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  • झारखंड: आखिर कब रुकेगा भ्रष्टाचार का सिलसिला ? भ्रष्टाचार के इस काले पन्ने पर आईएएस ऑफिसरों की फेरहिस्त बढती जा रही है  

    उत्पाद विभाग के अधिकारियों की चल-अचल संपत्ति का आकलन करने में जुटी है एसीबी की टीम.

    परवेज़ आलम.

    झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत एक और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी, विनय कुमार चौबे, अब आरोपों के घेरे में हैं। राज्य गठन के बाद से अब तक भ्रष्टाचार के मामलों में गिरफ्तार आईएएस अधिकारियों की सूची में चौबे का नाम छठे नंबर पर दर्ज हो गया है। खास बात यह है कि इन छह में से चार अधिकारी रांची के उपायुक्त रह चुके हैं, जिससे राजधानी में प्रशासनिक स्तर पर लंबे समय से भ्रष्टाचार के पैठ की पुष्टि होती है।

    भ्रष्टाचार की जद में रांची के पूर्व डीसी

    विनय कुमार चौबे, जो झारखंड राज्य बेवरेजेस कॉरपोरेशन लिमिटेड (JSBCL) के प्रबंध निदेशक और उत्पाद विभाग के प्रधान सचिव रह चुके हैं, को 20 मई को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने गिरफ्तार किया। उनके साथ संयुक्त आयुक्त उत्पाद गजेंद्र सिंह को भी जेल भेजा गया है। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने प्लेसमेंट एजेंसियों के चयन में निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन करते हुए फर्जीवाड़ा किया, जिससे राज्य को तकरीबन 38 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

    जालसाजी की रकम एक अरब तक पहुंचने की आशंका

    ACB की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि यह घोटाला महज 38 करोड़ रुपये तक सीमित नहीं है। यह आंकड़ा एक अरब रुपये तक पहुंच सकता है। इन अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने नियमों की अनदेखी करते हुए कुछ प्लेसमेंट एजेंसियों को लाभ पहुंचाया। यही नहीं, बाद में जिन एजेंसियों को अनुबंध दिया गया, उनमें भी कथित रूप से गड़बड़ी हुई। संबंधित एजेंसियों की बैंक गारंटी तक जब्त की गई, लेकिन कार्रवाई अधूरी रही।

    कौन-कौन आईएएस घोटाले में गए जेल

    इससे पहले रांची के उपायुक्त रह चुके आईएएस सजल चक्रवर्ती को चारा घोटाले में जेल भेजा गया था। फिर सीबीआई ने दवा घोटाले में डॉ. प्रदीप कुमार को, और ईडी ने जमीन घोटाले में छवि रंजन को हिरासत में लिया। इसके अतिरिक्त पूजा सिंघल और सियाराम प्रसाद सिन्हा भी भ्रष्टाचार मामलों में जेल जा चुके हैं और वर्तमान में जमानत पर हैं।

    चारा घोटाले से जुड़े मामलों में अब तक पांच आईएएस – सजल चक्रवर्ती, महेश प्रसाद, के. अरुणगम, फूल चंद्र सिंह और बेक जुलियस – को दोषी ठहराया जा चुका है।

    एसीबी की सक्रियता, सीबीआई-ईडी को भी मिलेगा लाभ

    ACB की यह कार्रवाई अब केंद्रीय जांच एजेंसियों – CBI और ED – के लिए भी महत्वपूर्ण सबूत उपलब्ध करा सकती है। ED जल्दी ही इस प्राथमिकी को टेकओवर कर नया ECIR दर्ज कर सकती है। वहीं CBI पहले से ही भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत इस पूरे मामले की जांच कर रही है।

    नेताओं की मांग: अब हो सीबीआई जांच

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अप्रैल 2022 में ही इस घोटाले की आशंका जाहिर कर राज्य सरकार को पत्र लिखा था। मरांडी का आरोप है कि यह घोटाला छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले की तर्ज पर, योजनाबद्ध तरीके से किया गया है। उन्होंने एसीबी की कार्रवाई को अपर्याप्त बताते हुए सीबीआई जांच की मांग की है।

    मरांडी ने सवाल उठाया, “क्या केवल एसीबी की जांच से घोटाले की पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी? ऐसा प्रतीत होता है कि बड़ी मछलियों को बचाने के लिए कुछ लोगों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।”

    आरोपियों की संपत्ति की जांच शुरू

    ACB अब गिरफ्तार अधिकारियों की चल-अचल संपत्तियों और बैंक खातों की जांच में जुट गई है। पिछले दस वर्षों के दौरान उनकी आय-व्यय की समीक्षा की जा रही है। उनके पैन कार्ड, बैंक स्टेटमेंट और घोषित संपत्तियों की भी पड़ताल की जा रही है।

    स्वास्थ्य जांच में सामने आई हाई बीपी की समस्या

    गिरफ्तारी के बाद ACB कार्यालय में विनय कुमार चौबे और गजेंद्र सिंह की स्वास्थ्य जांच की गई। दोनों की स्थिति सामान्य पाई गई, हालांकि चौबे का ब्लड प्रेशर थोड़ा बढ़ा हुआ मिला। डॉक्टरों ने उन्हें नमक कम करने की सलाह दी है।

    आखिर कब रुकेगा भ्रष्टाचार का सिलसिला?

    झारखंड में लगातार सामने आ रहे घोटाले राज्य प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करते हैं। रांची जैसे प्रमुख जिले से बार-बार अधिकारियों की गिरफ्तारी इस बात की ओर संकेत करती है कि भ्रष्टाचार यहां संस्थागत रूप ले चुका है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या केवल गिरफ्तारी से हालात सुधरेंगे या अब वक्त आ गया है कि राज्य सरकार और जांच एजेंसियां मिलकर बड़े सुधार की ओर कदम बढ़ाएं?

     

  • झारखंड में मौसम का मिजाज बदला-बदला सा: 24 मई तक बारिश और तेज़ हवाओं की चेतावनी, आकाशीय बिजली से 5 की मौत

    By The NewsPost4u

    झारखंड में मौसम का मिजाज लगातार बदलता जा रहा है। दिन में चटक धूप के बाद अचानक बदलता मौसम तापमान में पांच से छह डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट ला रहा है। राज्य के कई इलाकों में दोपहर बाद हल्की से मध्यम बारिश हो रही है, जिससे आम जनजीवन पर असर पड़ा है।

    मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि 24 मई तक झारखंड के कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी हुई है। इसके साथ ही 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज़ हवाएं चलने और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है।

    राजधानी रांची और अन्य इलाकों में राहत, लेकिन पलामू तप रहा है.

    पिछले दो दिनों में रांची और उसके आसपास के इलाकों में दोपहर बाद हुई बारिश ने मौसम में ठंडक घोल दी है। तापमान में पांच से छह डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, पलामू अब भी भीषण गर्मी की चपेट में है। वहां का तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। दूसरी ओर, पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम में गर्मी में कुछ राहत मिली है, जहां पारा 34 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा।

    23 और 24 मई को फिर बारिश की संभावना.

    मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि 23 और 24 मई को राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इन दो दिनों के लिए भी येलो अलर्ट जारी किया गया है। हालांकि सोमवार को रांची में मौसम अपेक्षाकृत साफ रहा। कभी-कभी बादल छाए और हल्की हवाएं भी चलीं।

    प्रमुख शहरों का तापमान:

    • रांची – 35.8°C
    • जमशेदपुर – 34.5°C
    • डाल्टनगंज – 42.2°C
    • बोकारो – 34.5°C
    • चाईबासा – 35.4°C

    बीते कुछ दिनों में रांची में खराब मौसम के चलते विमान सेवाएं और ट्रेनों का संचालन भी प्रभावित हुआ है। वहीं, कई इलाकों में घंटों तक बिजली गुल रही।

    आकाशीय बिजली का कहर: 5 की मौत, 6 घायल.

    सोमवार को गढ़वा और हजारीबाग जिलों में आकाशीय बिजली गिरने से पांच लोगों की मौत हो गई जबकि छह अन्य लोग घायल हो गए। पुलिस के अनुसार, गढ़वा में तीन और हजारीबाग में दो लोगों की जान गई है।

    सुरक्षा बल पर भी मौसम का कहर.

    पिछले हफ्ते चाईबासा में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान सीआरपीएफ के 46 वर्षीय जवान की आकाशीय बिजली गिरने से मौत हो गई थी और तीन अन्य घायल हुए थे।

    मौसम विभाग की सतर्कता जारी.

    मौसम विभाग ने पहले ही 20 मई तक ऑरेंज अलर्ट जारी किया था। 23-24 मई को बारिश बढ़ने के कारण तूफान की आशंका कम हो सकती है, लेकिन किसी भी मौसमीय आपातस्थिति से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए विभाग समय-समय पर येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी कर रहा है ताकि लोग सतर्क रहें।

    झारखंड में मौसम की अनिश्चितता लोगों के लिए चुनौती बनती जा रही है। ऐसे में ज़रूरी है कि लोग मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान दें और सावधानी बरतें, खासकर खुले इलाकों में निकलने से बचें।

  • गिरिडीह :नक्सली बंकर से रायफल, SLR समेत भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद

    By News Post4u

    GIRIDIH: नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे सघन सर्च अभियान में गिरिडीह पुलिस और सीआरपीएफ को एक बड़ी सफलता मिली है। खुखरा थाना क्षेत्र के जोकानाला जंगल में एक नक्सली बंकर का पर्दाफाश करते हुए सुरक्षा बलों ने भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक जब्त किए हैं।

    गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने पारसनाथ पर्वत की तराई में सर्च ऑपरेशन चलाया। इस दौरान जंगल के भीतर ज़मीन के नीचे छिपा एक बंकर मिला, जिसमें नक्सलियों ने हथियारों का जखीरा छुपा रखा था। बंकर से कुल 14 हथियार बरामद किए गए हैं, जिनमें .303 बोर की रायफल, एक एसएलआर, एक 12 बोर की बंदूक और 11 सिंगल शॉट बंदूकें शामिल हैं।

    इतना ही नहीं, बंकर से 7.62 एमएम की 38 गोलियां, 9 एमएम की 10 गोलियां, गन पाउडर, बारूद, वायर और अन्य विस्फोटक सामग्री भी मिली है। बरामद हथियारों में कुछ पर संदेह है कि वे पुलिस से लूटे गए हो सकते हैं।

    गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक डॉ. विमल कुमार ने शुक्रवार को मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि इस ऑपरेशन में नक्सलियों के ठिकाने को ध्वस्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा, “यह कार्रवाई एक लंबी तैयारी और पुख्ता खुफिया सूचना के बाद संभव हो सकी। इस इलाके में नक्सल विरोधी अभियान लगातार जारी रहेगा।”

    पुलिस की इस कार्रवाई को नक्सली नेटवर्क पर एक बड़ा प्रहार माना जा रहा है। पारसनाथ पर्वत की तराई में सुरक्षा बलों की सक्रियता बढ़ा दी गई है और आगे भी इस तरह के तलाशी अभियान चलाए जाते रहेंगे।

  • झारखंड में आतंकी नेटवर्क का खुलासा – रांची से लेकर धनबाद तक फैला था जाल !

    परवेज़ आलम.  

    धनबाद/रांची।  झारखंड आतंकवाद निरोधक दस्ता [एटीएस] ने राज्य में आतंक के खिलाफ बड़ी कामयाबी हासिल की है। वासेपुर से गिरफ्तार की गई महिला संदिग्ध शबनम परवीन न केवल अलकायदा, आईएसआईएस और हिज्ब-उत-तहरीर जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों से जुड़ी रही, बल्कि इन संगठनों के झारखंड मॉड्यूल को सक्रिय रूप से संचालित करने में भी अहम भूमिका निभा रही थी।

    जांच में यह साफ हुआ है कि शबनम युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा के जरिए बहला-फुसलाकर आतंकी संगठनों में भर्ती करने का काम कर रही थी। खासकर 18 से 25 वर्ष की आयु के मुस्लिम युवाओं को वह धर्म के नाम पर गुमराह करती थी।

    चार आधार कार्ड, चार अलग उम्रें – असली पहचान पर सस्पेंस.

    एटीएस की छापेमारी के दौरान शबनम के पास से चार अलग-अलग आधार कार्ड बरामद हुए हैं, जिनमें उसकी उम्र अलग-अलग — 20, 25, 28 और 32 वर्ष दर्ज है। इससे स्पष्ट है कि वह पहचान छिपाने और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के नेटवर्क से भी जुड़ी हुई थी।

    शबनम धनबाद के गोविंदपुर की रहने वाली बताई जा रही है, लेकिन उसके मूल घर के बारे में पुलिस को कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिली है। उसने आयान जावेद नामक युवक से प्रेम विवाह किया था, जो खुद भी एक संदिग्ध आतंकी है। लेकिन शादी के बाद वह जावेद के साथ अमन सोसायटी के घर में न रहकर शमशेर नगर में किराए के मकान में रह रही थी। यहीं से वह साइबर कैफे के माध्यम से युवाओं को प्रभावित करने का कार्य करती थी।

    झारखंड में आतंकी नेटवर्क का खुलासा – रांची से लेकर धनबाद तक फैला था जाल

    शबनम अकेली नहीं थी। गौरतलब है कि एटीएस की ओर से 26 अप्रैल को धनबाद में छापेमारी कर प्रतिबंध आतंकी संगठन के आतंकी शबनम के साथ गुलफाम हसन, अयान जावेद, और मोहम्मद शहजाद आलम  को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

    इनके पास से दो पिस्तौल, 12 जिंदा कारतूस, आतंकी संगठनों से जुड़े कई दस्तावेज, किताबें, और मोबाइल-लैपटॉप बरामद किए गए हैं।

    हथियारों का लेन देन ये लोग करते ही थे, लेकिन मूल काम युवाओं को आतंकी संगठनों से जोड़ना था। इसी माड्यूल पर रांची से गिरफ्तार हुआ डॉ. इश्तियाक भी काम करता रहा है।

    झारखंड एटीएस की टीम बुधवार को धनबाद के वासेपुर से गिरफ्तार आतंकी संगठन हिज्ब उत तहरीर से जुड़े महिला समेत चार संदिग्धों को तीन दिन की रिमांड पर ली थी । एटीएस की टीम ने न्यायालय में चारों संदिग्धों को रिमांड पर लेने के लिए आवेदन दिया था। आवेदन पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने तीन दिन तक रिमांड दी है। अब इनसे एटीएस की टीम तीन दिन तक लगातार पूछताछ करेगी और उनके इरादों के साथ ही उनके संबंधों को की भी जांच की जाएगी। इसके अलावा एटीएस की टीम चारों संदिग्धों के विदेशी संबंधों की भी जांच करेगी।

    रिमांड मिलने के बाद टीम बुधवार को चारों संदिग्धों को बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा से एटीएस की टीम अपने साथ ले गई। इसके तुरंत बाद एटीएस ने चारों संदिग्धों से एटीएस ने पूछताछ शुरू कर दी है। मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम तक एटीएस उनसे पूछताछ करेगी।

    अम्मार यासर की गिरफ्तारी – इंडियन मुजाहिदीन से लेकर हिज्ब-उत-तहरीर तक का कनेक्शन.

    झारखंड एटीएस ने अम्मार यासर नामक एक संदिग्ध को भी गिरफ्तार किया है, जो पहले इंडियन मुजाहिदीन से जुड़ा रहा है। वर्ष 2014 में जोधपुर से गिरफ्तार हुआ था । यासर, हाल ही में 2024 में जेल से रिहा होने के बाद फिर से आतंकी गतिविधियों में सक्रिय हो गया था और हिज्ब-उत-तहरीर के झारखंड मॉड्यूल का हिस्सा बन गया। अयान जावेद से पूछताछ में अम्मार यासर का नाम सामने आया, जिसके आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया। झारखंड के डीजीपी अनुराग गुप्ता ने इसकी गिरफ्तारी की पुष्टि की है

    क्या है ‘हिज्ब-उत-तहरीर‘?

    1953 में यरुशलम में गठित यह आतंकी संगठन एक इस्लामिक खिलाफत स्थापित करने के उद्देश्य से काम करता है। भारत में यह संगठन 2010 में प्रतिबंधित कर दिया गया था। इसका मकसद लोकतांत्रिक सरकारों को गिराकर कट्टरपंथी इस्लामिक शासन लागू करना है।

    एटीएस की सतर्कता से टला खतरा, जांच अब विदेशी लिंक पर. 

    झारखंड एटीएस की सघन कार्रवाई से एक बड़े आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। एटीएस अब इन सभी संदिग्धों के विदेशी कनेक्शन की पड़ताल में जुटी है। शुरुआती पूछताछ में कुछ अहम जानकारियां सामने आई हैं, लेकिन यह जांच अभी जारी है।
    झारखंड जैसे शांत राज्य में आतंक की ये घुसपैठ बेहद चिंताजनक है। युवाओं को धर्म के नाम पर भटकाना, फर्जी दस्तावेज बनाना और विदेशी संगठनों से जुड़ना — ये सारी गतिविधियां अब जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। सवाल ये है कि क्या ये सिर्फ एक मॉड्यूल था? या फिर एक बड़ा नेटवर्क धीरे-धीरे सामने आने वाला है?

  • धनबाद में एटीएस की बड़ी कार्रवाई: आतंकी संगठनों से जुड़े है तार , दर्जनों से पूछताछ जारी

    धनबाद, झारखंड : शनिवार  सुबह करीब साढ़े पांच बजे शुरू हुई इस व्यापक कार्रवाई में एटीएस ने धनबाद के वासेपुर, भूली और अन्य इलाकों में 20 से अधिक स्थानों पर दबिश दी। इस अभियान में एक दंपती समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया  है  हालांकि  गिरफ़्तरी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गयी है छापेमारी के दौरान आरोपियों के पास से दो पिस्टल, 12 जिंदा कारतूस, कई मोबाइल फोन, लैपटॉप, प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े दस्तावेज और कट्टरपंथी साहित्य बरामद हुआ। इसके अलावा, करीब एक दर्जन संदिग्धों को भी हिरासत में लेकर अलग-अलग थानों में पूछताछ के लिए रखा गया है।

    युवाओं को बहकाने की साजिश.

    सूत्रों के मुताबिक, एटीएस को गुप्त सूचना मिली थी कि HTU, AQIS और ISIS जैसे संगठन झारखंड के युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथ की ओर धकेल रहे हैं और उन्हें अपने नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को हवा देने की इस साजिश का भंडाफोड़ करने के लिए धनबाद पुलिस के सहयोग से विशेष टीमें गठित कर ताबड़तोड़ छापेमारी की गई।

    डीएसपी लॉ एंड ऑर्डर नौशाद आलम के नेतृत्व में बैंकमोड़ थाना प्रभारी प्रवीण कुमार समेत कई थानों के अधिकारी इस अभियान में शामिल रहे।

    किराए के मकान में चल रही थी संदिग्ध गतिविधियाँ.

    भूली के शमशेर नगर में पकड़े गए दंपति  जनवरी महीने से किराए पर रह रहे थे। मोहल्ले के लोगों को उन्होंने आधार कार्ड बनाने का काम करने वाला बताया था, लेकिन स्थानीय लोगों से उनका खास मेलजोल नहीं था। एटीएस की छापेमारी में उनके घर से बड़ी संख्या में प्रतिबंधित किताबें और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद हुए।

    भागते हुये दोनों पकड़े गए.

    जब एटीएस ने वासेपुर और अमन सोसाइटी में दबिश दी तो  हसन और जावेद घर से फरार हो गए। दोनों ने एक स्कूटी से तोपचांची की ओर भागने की कोशिश की। लेकिन जीटी रोड सिक्स लेन ब्रह्मांडीहा फ्लाईओवर के पास एटीएस की टीम ने दोनों को धर दबोचा। तलाशी के दौरान दोनों के पास से हथियार, कारतूस, डायरी, नक्शा और मोबाइल फोन बरामद किए गए।

    सोशल मीडिया पर अफवाहों का बाजार गर्म.

    एटीएस की कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर अफवाहों का दौर शुरू हो गया। किसी ने आतंकियों के पकड़े जाने की बात लिखी, तो किसी ने धर्म और जाति को लेकर भ्रामक जानकारियां वायरल कीं। हालांकि, एटीएस और स्थानीय पुलिस ने इस पूरे मामले पर अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई बयान नहीं दिया है।

    सभी गिरफ्तार आरोपी 20-21 वर्ष के.

    गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों की उम्र महज 20-21 वर्ष है। हसन और जावेद की उम्र 21 वर्ष है। माना जा रहा है कि आतंकी संगठन जानबूझकर कम उम्र के युवाओं को अपने जाल में फंसा रहे हैं ताकि उन्हें आसानी से कट्टरपंथी विचारधारा में ढाला जा सके।

    पहली बार धनबाद में ऐसी बड़ी गिरफ्तारी.

    गौरतलब है कि भारत सरकार ने अक्टूबर 2024 में HTU, AQIS और ISIS जैसे संगठनों को प्रतिबंधित किया था। इसके बाद धनबाद में इनसे जुड़े लोगों की यह पहली बड़ी गिरफ्तारी है। सभी गिरफ्तार युवक धनबाद जिले के ही निवासी हैं।

    सीओ कार्यालय के कर्मचारी पर भी जांच.

    एटीएस ने जिन दर्जनभर लोगों को उठाया है, उनमें से एक स्थानीय सीओ कार्यालय का आउटसोर्स कर्मचारी भी बताया जा रहा है। फिलहाल, सभी संदिग्धों से गहन पूछताछ जारी है और उनके मोबाइल फोन, लैपटॉप तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की जा रही है।

    सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के बाद इस पूरे नेटवर्क के बारे में और चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।

  • झारखंड में नक्सलवाद पर अंतिम प्रहार: कोल्हान बना आखिरी मोर्चा, शीर्ष नेतृत्व लगभग नेस्तनाबूद

    परवेज़ आलम.

    झारखंड के जंगलों में चल रही एक पुरानी जंग अब अपने अंतिम मोड़ पर है। बरसों से राज्य के विकास और सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने वाले माओवादियों के खिलाफ पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने निर्णायक मोर्चा खोल दिया है। डीजीपी अनुराग गुप्ता का बयान अब सिर्फ घोषणा नहीं, बल्कि मैदान पर उतर चुकी एक रणनीति का हिस्सा है।

    मार्च 2026 की डेडलाइन से पहले ही झारखंड करेगा निर्णायक वार.

    बोकारो में हाल ही में हुए मुठभेड़ के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में झारखंड पुलिस प्रमुख डीजीपी अनुराग गुप्ता ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ने भले ही मार्च 2026 तक माओवाद खत्म करने का लक्ष्य तय किया हो, लेकिन राज्य पुलिस उससे पहले ही सारंडा और कोल्हान जैसे नक्सल गढ़ों से माओवादियों का पूरी तरह सफाया करने की ओर अग्रसर है।

    लुगू पहाड़ी की मुठभेड़: माओवादियों को चेतावनी का संदेश.

    लुगू पहाड़ी में हुई मुठभेड़ को डीजीपी ने ‘टर्निंग पॉइंट’ बताया। यह वह घटना है जिससे नक्सलियों को न केवल सैन्य हार मिली, बल्कि मनोवैज्ञानिक झटका भी लगा। डीजीपी ने कहा कि यह घटना माओवादियों के लिए “सबक” है और उन्होंने उन्हें सरकार की आत्मसमर्पण नीति के तहत मुख्यधारा में लौटने की सलाह दी।

    अब कोई माओवादी ‘अदृश्य‘ नहीं.

    राज्य पुलिस के पास हर सक्रिय माओवादी की लोकेशन, नेटवर्क, फंडिंग स्रोत और गतिविधियों की जानकारी है। यह वही रणनीतिक जानकारी है जिसने माओवादियों के एक-एक किले को कमजोर किया है। डीजीपी के अनुसार, “अब वे न छिप सकते हैं, न बच सकते हैं।”

    तीन बचा, लेकिन घेरे में: करोड़ों के इनामी नक्सलियों की अंतिम सूची

    झारखंड में अब सिर्फ तीन नक्सली ऐसे बचे हैं जिनके सिर पर ₹1 करोड़ का इनाम है:

    1. मिसिर बेसरा – भाकपा माओवादी का ईआरबी सचिव
    2. पतिराम मांझी – सेंट्रल कमेटी मेंबर
    3. आकाश मंडल उर्फ अनमोल – कोल्हान में सक्रिय

    ये तीनों अब सुरक्षा बलों के निशाने पर हैं। साथ ही, एनकाउंटर से बच निकले एक अन्य नक्सली “प्रवेश” पर भी जल्द ₹1 करोड़ का इनाम घोषित किया जा सकता है।

    प्रयाग मांझी उर्फ विवेक: एनकाउंटर में मारे गए पहले करोड़पति नक्सली

    इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी सफलता थी – प्रयाग मांझी उर्फ विवेक की मुठभेड़ में मौत। वह झारखंड पुलिस द्वारा मारे गए पहले ₹1 करोड़ के इनामी नक्सली बने। उनके मारे जाने से उत्तरी छोटानागपुर क्षेत्र में माओवाद का लगभग सफाया हो गया।

    नक्सलवाद का ढहता नेतृत्व: गिरफ्तारी और आत्मसमर्पण की श्रृंखला

    झारखंड में नक्सल आंदोलन के सबसे बड़े नेताओं की या तो गिरफ्तारी हो चुकी है या उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया है:

    • प्रशांत बोस उर्फ किशन दा: सेकेंड इन कमांड, गिरफ्तार
    • कंचन दा उर्फ कबीर: थिंक टैंक, गिरफ्तार
    • महाराज प्रमाणिक, विमल यादव, रिमी दी, अभय जी: आत्मसमर्पण

    2021 से फरवरी 2025 तक 1490 नक्सली गिरफ्तार हुए हैं। इनमें कई नाम जैसे प्रभा दी, सुधीर किस्कू, नंदलाल मांझी और बलराम उरांव शामिल हैं जिन पर 10 से 25 लाख तक का इनाम था।

    बूढ़ा पहाड़ से कोल्हान तक: कमजोर होता नक्सली नेटवर्क.

    कभी झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ का प्रमुख माओवादी किला माना जाने वाला बूढ़ा पहाड़ अब नेतृत्वविहीन हो चुका है।

    • देवकुमार सिंह (अरविंद जी) की मौत,
    • सुधाकरण का सरेंडर,
    • मिथिलेश महतो की गिरफ्तारी—
      इन घटनाओं ने संगठन को झकझोर दिया।

    अब नक्सली नेतृत्व केवल कोल्हान तक सिमट गया है, जहाँ अंतिम शेष शीर्ष माओवादी अब सुरक्षा बलों के रडार पर हैं।

    क्या यह नक्सलवाद का अंतिम अध्याय है?

    झारखंड में जो कभी नक्सलियों का अघोषित किला था, वहां अब पुलिस की रणनीति, जानकारी और जमीन पर पकड़ ने बागियों की रीढ़ तोड़ दी है।
    कोल्हान आखिरी मोर्चा है और माओवादियों के पास दो ही विकल्प बचे हैं—आत्मसमर्पण या अंतिम लड़ाई।

     

  • झारखंड सरकार का यूरोपीय दौरा: प्रवासी भारतीयों से संवाद

    विशेष संवाददाता.

    झारखंड में निवेश को लेकर एक नई सुबह दस्तक दे रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल इन दिनों यूरोप के दो प्रमुख देशों——के दौरे पर है। इस कूटनीतिक और आर्थिक यात्रा का मकसद है: झारखंड को वैश्विक निवेश का गंतव्य बनाना।

    इस यात्रा के दौरान न केवल राज्य की संभावनाओं को प्रस्तुत किया गया, बल्कि कुछ अहम समझौते और प्रस्तावों की नींव भी रखी गई।

    खेल के क्षेत्र में ऐतिहासिक पहल: फुटबॉल कोचिंग के लिए RCD Espanyol का प्रस्ताव.

    स्पेन के बार्सिलोना में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान, विश्वप्रसिद्ध RCD Espanyol फुटबॉल क्लब ने झारखंड सरकार को एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव दिया। क्लब ने झारखंड में खेल—विशेषकर फुटबॉल—के विकास के लिए सहयोग की इच्छा जताई है। इसमें खासकर फुटबॉल कोचों के प्रशिक्षण के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) की पेशकश की गई है।

    यह प्रस्ताव बार्सिलोना के विकसित खेल पारिस्थितिकी तंत्र और झारखंड में युवाओं की खेल प्रतिभा को जोड़ने का सेतु बन सकता है। आने वाले समय में यह साझेदारी झारखंड को भारतीय खेल मानचित्र पर और मजबूत स्थान दिला सकती है।

    व्यापक क्षेत्रों में चर्चा: स्टार्टअप, क्लीन एनर्जी, बायो-फार्मा और अधिक.

    सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, झारखंड प्रतिनिधिमंडल की इस यात्रा में कई विविध क्षेत्रों पर संवाद हुआ। इसमें स्टार्टअप मेंटरशिप, क्लीन एनर्जी, पर्यावरणीय स्थिरता, सप्लाई चेन, बायो-फार्मास्यूटिकल्स, खेल विपणन, क्रिकेट टीम ओनरशिप, डीप-टेक बी2बी मार्केटिंग, लीगल, डेंटल साइंस और मेडटेक जैसे क्षेत्र प्रमुख रहे।

    प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड में नवाचार आधारित एक जीवंत स्टार्टअप इकोसिस्टम तैयार करने हेतु वैश्विक विशेषज्ञों और कंपनियों से मार्गदर्शन और निवेश का अनुरोध किया ।

    झारखंड में गीगा फैक्ट्री? टेसला ग्रुप A.S. से CM की महत्वपूर्ण बैठक.

    इस यूरोपीय दौरे का सबसे आकर्षक पड़ाव रहा टेसला ग्रुप A.S. (चेकोस्लोवाकिया) के CEO और सह-संस्थापक डुशान लिचार्डस के साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मुलाकात। बातचीत के दौरान टेसला ग्रुप ने झारखंड में एक गीगा फैक्ट्री स्थापित करने की इच्छा जताई, जो मुख्य रूप से वाणिज्यिक और औद्योगिक उपयोग के लिए बैटरी भंडारण उत्पादों के असेंबली पर केंद्रित होगी।

    यह प्रस्ताव न केवल झारखंड को नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बना सकता है, बल्कि इससे राज्य के तकनीकी और औद्योगिक बुनियादी ढांचे को भी नई दिशा मिलेगी।

    प्रवासी भारतीयों से संवाद: संभावनाओं को जोड़ने का प्रयास.

    यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने बार्सिलोना में बसे प्रवासी भारतीय व्यवसायियों और विशेषज्ञों से भी मुलाकात की। इस संवाद का उद्देश्य था—झारखंड की विकास गाथा से उन्हें जोड़ना और विदेशी धरती पर बसे भारतीय मस्तिष्क को अपनी धरती से जोड़ना।

    मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि स्पेनिश कंपनियों और निवेशकों के साथ सतत संवाद और सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा। इस कड़ी में भविष्य में और बैठकें तथा कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुवाई में झारखंड सरकार की यह यात्रा केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि निवेश और विकास की ओर बढ़ते भरोसे का संकेत है। यूरोपीय धरती पर झारखंड की आवाज़ अब सुनाई देने लगी है—चाहे वह खेल हो, तकनीक हो, या उद्योग। आने वाला समय बताएगा कि इन बैठकों का परिणाम धरातल पर किस तरह उतरता है, लेकिन शुरुआत आशाजनक है।

     

  • झारखंड वक्फ बोर्ड का बड़ा फैसला: ऑडिट रिपोर्ट नहीं देने वाली संस्थाओं की जाएगी मान्यता

    विवाद सुलझाने के लिए जिलों के दौरे पर जाएंगी कमेटियां. 

    परवेज़ आलम 

    रांची – झारखंड राज्य सुन्नी वक्फ बोर्ड नेअपनी संपत्तियों को लेकर एक अहम निर्णय लिया है। बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि अब उन तमाम संस्थाओं की मान्यता रद्द कर दी जाएगी, जो वक्फ संपत्तियों पर वर्षों से काम तो कर रही हैं, लेकिन अपनी ऑडिट रिपोर्ट या वित्तीय हिसाब-किताब बोर्ड को नहीं सौंप रही हैं। हालांकि, अंतिम कार्रवाई से पहले संबंधित संस्थाओं को चेतावनी पत्र भेजा जाएगा।

    यह निर्णय राज्य के सांसद सरफराज अहमद की अध्यक्षता में राजधानी रांची में आयोजित वक्फ बोर्ड की बैठक में लिया गया। बैठक में यह भी तय किया गया कि सबसे पहले ऐसी संस्थाओं की सूची तैयार की जाएगी, जो वक्फ बोर्ड की जमीन या संपत्तियों पर कार्यरत हैं। इसके बाद उनसे अब तक का वित्तीय लेखा-जोखा और ऑडिट रिपोर्ट मांगी जाएगी। आदेशों की अवहेलना करने पर संबंधित संस्थाओं की मान्यता समाप्त  कर दी जाएगी।

    विवादों को सुलझाने के लिए दौरे पर जाएगी विशेष कमेटी.

    बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि वक्फ संपत्तियों को लेकर राज्य के विभिन्न हिस्सों में जो विवाद चल रहे हैं, उन्हें सुलझाने के लिए विशेष कमेटी गठित की गई है। यह कमेटी 19 अप्रैल को गिरिडीह और 22 अप्रैल को चाईबासा का दौरा करेगी। गिरिडीह में कमेटी के सदस्य पूर्व विधायक निजामुद्दीन अंसारी, ए.के. रसीदी और मोहम्मद फैजी शामिल होंगे।

    वहीं, चाईबासा दौरे में कमेटी में ए.के. रसीदी, मोहम्मद फैजी, महबूब आलम और इबरार अहमद मौजूद रहेंगे। इन दौरों का मकसद संबंधित क्षेत्रों में वक्फ संपत्ति को लेकर चल रहे विवादों को सुलझाना है, ताकि स्थानीय मुस्लिम समु दाय के हित सुरक्षित रह सकें।

    अंजुमन कमेटियों से भी होगी बातचीत.

    बैठक में राजधानी रांची स्थित अंजुमन से जुड़े मामलों पर भी चर्चा की गई। तय हुआ कि इन मामलों को सुलझाने के लिए अंजुमन की विभिन्न कमेटियों से वार्ता की जाएगी। इस दौरान बैठक में पूर्व विधायक निजामुद्दीन अंसारी, सामाजिक कार्यकर्ता इबरार अहमद, मौलाना तहजीबुल हसन रिजवी, शकील अख्तर, ए.के. रशीदी, मोहम्मद फैजी, सरकार के संयुक्त सचिव आसिफ हसन सहित अन्य सदस्य मौजूद थे।

    “झारखंड में वक्फ कानून लागू नहीं होगा” – डॉ इरफान अंसारी

    राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने इस पूरे घटनाक्रम पर भाजपा पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार वक्फ कानून में संशोधन कर मुस्लिम समुदाय को परेशान करने की साजिश कर रही है। डॉ अंसारी ने कहा, “भाजपा सरकार ने वक्फ संशोधन कानून लाकर मुसलमानों के अधिकारों को छीनने की कोशिश की है। यह कानून जनविरोधी है और इसका झारखंड में किसी भी हाल में लागू नहीं होने दिया जाएगा।”

    उन्होंने आगे कहा कि इस तरह के कानूनों से मुस्लिम समाज को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर किया जा रहा है और भाजपा का मकसद जनहित नहीं, बल्कि समुदाय विशेष को निशाना बनाना है।

     

  • गिरिडीह को मिली नई स्वास्थ्य सौगात: मर्सी हॉस्पिटल का भव्य शुभारंभ, एक सपने की हुई पूर्ति

    परवेज़ आलम .

    गिरिडीह : जिलेवासियों के लिए आज का दिन ऐतिहासिक और भावनात्मक दोनों ही रहा। वर्षों से जिस स्वास्थ्य सुविधा की कमी महसूस की जा रही थी, वह आज पूरी हुई। झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने गिरिडीह के पहले मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल मर्सी हॉस्पिटल का भव्य उद्घाटन किया। समारोह में भारी संख्या में लोग मौजूद रहे और माहौल किसी उत्सव से कम नहीं था।

    स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई उम्मीद.

    मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने उद्घाटन के दौरान अपने संबोधन में कहा, “मर्सी हॉस्पिटल केवल एक इमारत नहीं, बल्कि गिरिडीह और आसपास के जिलों के लिए नई जिंदगी की उम्मीद है। यह अस्पताल वह चिकित्सा सुविधाएं देगा, जो अब तक केवल बड़े शहरों तक सीमित थीं।”

    मर्सी हॉस्पिटल में मरीजों को वही तकनीक और सेवाएं मिलेंगी जो देश के बड़े मेट्रो शहरों में उपलब्ध हैं। इसका लाभ न केवल गिरिडीह के लोग उठाएंगे, बल्कि कोडरमा, हजारीबाग, धनबाद जैसे आसपास के जिले भी इससे लाभान्वित होंगे।

    एक सपने की कहानी: डॉ. अमित गोंड का संकल्प.

    इस अस्पताल की नींव एक स्वप्न पर रखी गई थी — स्वर्गीय डॉ. अमित गोंड का सपना, जो चाहते थे कि गिरिडीह के लोगों को इलाज के लिए बाहर न जाना पड़े। उन्होंने इस सपने के लिए जीवन भर मेहनत की, पर दुर्भाग्यवश, उद्घाटन से ठीक पहले उनका असमय निधन हो गया।

    हालांकि, यह सपना वहीं नहीं रुका। डॉ. गोंड के परिवार ने इसे अपना मिशन बना लिया। रंजीत कुमार गौड, सुमित कुमार गोंड, नीरज शाहबादी, विश्वजीत सिंह (गुड्डू सिंह) और साहिल सलूजा ने अस्पताल के कार्य को आगे बढ़ाया और आज यह दिन उनके प्रयासों और दृढ़ निश्चय का प्रतीक बन गया।

    तीन चरणों में होगी सेवाओं की शुरुआत. 

    मर्सी हॉस्पिटल के सीईओ संजीत नायक ने बताया कि अस्पताल को तीन चरणों में पूरी तरह कार्यशील किया जाएगा:

    1. प्रथम चरण में –
      ओपीडी, अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक लैब, डायलिसिस यूनिट, डेंटल विभाग, सीटी स्कैन, टीएमटी जैसी सेवाएं चालू कर दी गई हैं।
    2. द्वितीय चरण में –
      इमरजेंसी सेवाएं, ऑपरेशन थिएटर, नवजात शिशु और व्यस्क आईसीयू, स्त्री रोग विभाग, एंडोस्कोपी एवं सामान्य सर्जरी यूनिट शुरू की जाएंगी।
    3. तृतीय चरण में –
      कार्डियोलॉजी, एंजियोग्राफी, हार्ट कैथ लैब जैसी सुपर स्पेशलिटी सेवाएं शुरू की जाएंगी, जिससे गिरिडीह मेडिकल सुविधाओं के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके।

    समाज का व्यापक समर्थन. 

    इस ऐतिहासिक अवसर पर शहर के तमाम गणमान्य नागरिक निर्मल शाहबादी,अभय शाहबादी,रितेश शाहबादी, वैभव शाहबादी, रमेश प्रभकर, दिलीप झा,सईद अख्तर , अजित कुमार पप्पू ,सरदार चरणजीत सिंह , अधिवक्ता परवेज़ आलम ,चुननु कान्त , दीपक सवर्णकार, प्रशासनिक अधिकारी, विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, डॉक्टर्स और सैकड़ों की संख्या में आम जनता उपस्थित रही। यह दिन न केवल एक अस्पताल के उद्घाटन का था, बल्कि गिरिडीह के भविष्य की एक नई शुरुआत का प्रतीक भी था।

  • भगवान महावीर की जयंती पर निकली भव्य शोभायात्रा

    परवेज़ आलम

    गिरिडीह: अहिंसा, त्याग और करुणा का संदेश देने वाले 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी की 2624वीं जयंती गुरुवार को देशभर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई। इसी क्रम में झारखंड के गिरिडीह और सरिया शहरों में भी जैन समाज की ओर से भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धा और आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा।

    सरिया में निकली भक्ति की गंगा

    सरिया के स्टेशन रोड से शुरू हुई शोभायात्रा में भगवान महावीर की सजीव झांकी दो विशेष वाहनों पर सजाई गई थी। रथों में विराजमान भगवान की मूर्ति को फूलों, रंग-बिरंगे कपड़ों और झूमरों से सजाया गया था। साथ ही बच्चों की टोली हाथों में जयकारों की तख्तियां लिए उत्साहपूर्वक नारे लगाते हुए चल रही थी — “जिओ और जीने दो”, “अहिंसा परमो धर्मः”।

    सरिया जैन समाज की अगुवाई में निकली इस शोभायात्रा में प्रमुख रूप से राजेश जैन, डिंपल जैन, संदीप जैन, विक्की जैन, अजित जैन, मोना जैन और संतोष जैन जैसे समाजसेवी शामिल रहे।

    गिरिडीह में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

    वहीं गिरिडीह के बड़ा चौक से निकली शोभायात्रा में हजारों की संख्या में भक्तों ने हिस्सा लिया। महिलाएं पारंपरिक परिधानों में ढोल-नगाड़ों की धुन पर झूमती रहीं, तो पुरुषों की टोली जयकारों के साथ आगे बढ़ती रही। एक विशेष आकर्षण रहा भगवान महावीर का घोड़े पर सुसज्जित रथ, जिसमें अष्टधातु की मूर्ति को नगर भ्रमण कराया गया।

    हर गली में बिखरी भक्ति की रोशनी

    शहर की गलियों से गुजरते हुए शोभायात्रा ने मानो पूरा गिरिडीह को भक्ति के रंग में रंग दिया। मंदिर से निकलते ही रथ की आरती की गई और भगवान के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। दो घोड़ों पर सवार युवक शोभायात्रा का प्रहरी स्वरूप में नेतृत्व करते नजर आए।

    समापन पर जलाभिषेक और भंडारे का आयोजन

    शोभायात्रा के बाद मंदिर प्रांगण में भगवान महावीर स्वामी का जलाभिषेक कर विशेष पूजा अर्चना की गई। दोपहर में श्रद्धालुओं के लिए भव्य भंडारे का आयोजन हुआ और देर शाम तक आरती व अन्य धार्मिक अनुष्ठान चलते रहे।

    इस मौके पर महिला जैन समाज की सदस्य राजश्री जैन ने कहा, “भगवान महावीर का संदेश आज पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है। जब पूरा विश्व हिंसा और संघर्ष से गुजर रहा है, तब ‘जिओ और जीने दो’ का विचार हर घर तक पहुंचना चाहिए।”

    शोभायात्रा में शामिल हुए कई प्रमुख श्रद्धालु

    इस आयोजन में अशोक जैन, अंकित जैन, अजय जैन, पद्म जैन, विजय सेठी, अमित जैन, राजन जैन, अविनाश सेठी, सार्थक जैन और विनीता जैन समेत जैन समाज के अनेक गणमान्य श्रद्धालु शामिल हुए।