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  • गिरिडीह : डीएवी स्कूलों में ऑनलाइन कानूनी साक्षरता क्लब का जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद ने किया उद्घाटन

    गिरिडीह: झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा), रांची के निर्देशानुसार गिरिडीह जिले के तीन डीएवी स्कूलों—बीएनएस डीएवी सिरसिया, श्री रामकृष्ण डीएवी सरिया और डीएवी सीसीएल—में ऑनलाइन कानूनी साक्षरता क्लब का उद्घाटन किया गया।

    इस अवसर पर झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश एवं कार्यकारी अध्यक्ष झालसा, जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद ने न्याय सदन, डोरंडा से इस क्लब का वर्चुअल उद्घाटन किया। कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारियों, पैनल अधिवक्ताओं, विद्यालय के प्रधानाध्यापक, शिक्षकगण और स्कूल प्रशासन के अधिकारियों ने भाग लिया।

    उद्घाटन समारोह में मौजूद रहे सम्माननीय अतिथि

    कार्यक्रम में अमित कुमार, अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश (कुटुंब न्यायालय), राजेश कुमार बग्गा (अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नवम), हरिओम कुमार (अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश चतुर्थ), सुश्री सुशीला हंसदा (न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी), महबूब आलम,  कुमारी रूबी, एलएडीसीएस गौरी शंकर सहाय, फैयाज अहमद, पुरुषोत्तम कुमार, रविकांत शर्मा, पैनल अधिवक्तागण मो. शाहनवाज, अमित कुमार, सूरज नयन और तृप्ति रंजना उपस्थित रहे।

    छात्रों को मिलेगा कानूनी जागरूकता का लाभ

    इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों को उनके मौलिक अधिकारों एवं कानूनी सेवाओं की जानकारी देना और समाज में न्याय की पहुंच को मजबूत करना था। सीसीएल डीएवी के छात्र पारस कुमार माजी को पेंटिंग प्रतियोगिता में राज्य स्तर पर द्वितीय स्थान प्राप्त करने पर सम्मानित किया गया।

    गौतलब है कि झारखंड राज्य के 72 डीएवी स्कूलों में कानूनी साक्षरता क्लब का वर्चुअल उद्घाटन किया गया है। इसके माध्यम से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण स्कूलों में नियमित रूप से कानूनी जानकारी प्रदान करेगा।

    विद्यालय प्राचार्य का आभार प्रकट

    बीएनएस डीएवी, गिरिडीह के प्राचार्य योगेश्वर शर्मा ने झालसा के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि यह क्लब छात्रों को कानूनी साक्षरता, मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी देने में सहायक होगा। उन्होंने डालसा, गिरिडीह से अनुरोध किया कि वे विधि विशेषज्ञों की सहायता से प्रतिमाह विद्यालय में कानूनी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करें, जिससे छात्रों को कानून की बारीकियों को समझने और भविष्य में इस क्षेत्र में करियर तलाशने का अवसर मिले।

    न्यायिक साक्षरता से समाज होगा सशक्त

    गिरिडीह जिले में कानूनी साक्षरता कार्यक्रम लगातार जारी हैं, जिससे छात्रों और आम नागरिकों को कानूनी प्रक्रियाओं एवं अधिकारों की जानकारी मिल रही है। आने वाले समय में ये क्लब न्यायिक जागरूकता को बढ़ावा देंगे और समाज में कानूनी ज्ञान का प्रसार करेंगे।

    रिपोर्ट- चंदन पांडे

     

  • गिरिडीह : अधिवक्ताओं का बड़ा ऐलान, 25 फरवरी को न्यायिक से रहेंगे अलग

    रिपोर्ट – परवेज़ आलम

    गिरिडीह ज़िला अधिवक्ता संघ ने सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया है! फैसला लिया गया है कि 25 फरवरी, मंगलवार को गिरिडीह व्यवहार न्यायालय के सभी वकील न्यायिक कार्यों से अलग रहेंगे। वजह? एडवोकेट (संशोधन) विधेयक, 2025 का मसौदा, जिसे लेकर अधिवक्ताओं में ज़बरदस्त नाराज़गी है!

    संघ के उपाध्यक्ष अजय कुमार सिन्हा  मंटू ने खुलकर विरोध जताते हुए कहा, “यह विधेयक अधिवक्ताओं के अधिकारों और विशेषाधिकारों को सीमित करने की कोशिश करता है, जो पूरी तरह से अस्वीकार्य है!”

    अब ज़रा इधर भी देखिए—देशभर में वकीलों के विरोध का असर साफ दिखने लगा है! केंद्र सरकार बैकफुट पर आ गई है! केंद्रीय विधि और न्याय मंत्रालय ने एक बड़ा ऐलान किया है! मंत्रालय ने कहा है कि विधेयक को फिर से संशोधित किया जाएगा और हितधारकों से दोबारा सलाह-मशविरा होगा।


    मंत्रालय के मुख्य लेखा नियंत्रक ध्रुव कुमार सिंह के दस्तख़त वाले पत्र में साफ लिखा गया है कि, “सरकार की प्राथमिकता पारदर्शिता है! 13 फरवरी को विधेयक को सार्वजनिक परामर्श के लिए डाला गया था, लेकिन अब जब इतने सुझाव और विरोध आ रहे हैं, तो हमें इसे फिर से संशोधित करना होगा!”

    तो कुल मिलाकर, वकीलों की एकता रंग ला रही है! अब देखना ये है कि सरकार नया मसौदा लेकर कब आती है और क्या उसमें वकीलों की मांगों को शामिल किया जाता है या नहीं!

     

  • जागरूकता का संदेश लेकर निकली विधिक सेवा प्राधिकार की रैली

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट ……….

    गिरिडीह : गिरिडीह में 90 दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम सह आउटरीच कैंपेन की शुरुआत हो चुकी है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से आज  17 दिसंबर सोमवार को एक जागरूकता रैली निकाली गई। यह रैली व्यवहार न्यायालय परिसर से निकलकर लोगों को बाल श्रम, बाल विवाह और स्पॉन्सरशिप योजनाओं जैसी अहम मुद्दों पर जागरूक करने के लिए आयोजित की गई।

    सचिव सीमा कुमारी मिंज के नेतृत्व में निकली इस रैली में लोगों को बताया गया कि यह जागरूकता अभियान 17 दिसंबर 2024 से 16 मार्च 2025 तक जिले के सभी प्रखंडों और पंचायतों में चलेगा। इस अभियान को पीएलवी (पैरा लीगल वॉलंटियर्स), बाल श्रम अधिकारी और स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से घर-घर तक पहुंचाया जाएगा।

    न्यायिक पदाधिकारियों की रही अहम उपस्थिति
    इस कार्यक्रम में प्रधान न्यायाधीश अरविंद कुमार पांडेय , कुटुंब न्यायालय धनंजय कुमार, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी  सौरभ कुमार गौतम और कई अन्य न्यायिक पदाधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान सचिव महोदया ने बाल श्रम और बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों को मिटाने के लिए जागरूकता फैलाने पर जोर दिया।

    मीडिया से अपील: जन-जन तक पहुंचाएं जागरूकता का संदेश। 
    सचिव सीमा कुमारी मिंज ने सभी मीडिया साथियों से विशेष अपील की कि इस अभियान का ज्यादा से ज्यादा प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि आम लोगों तक योजनाओं और कानूनी अधिकारों की जानकारी पहुंचे। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को लाभ पहुंचाने के लिए है।

    कानूनी योद्धाओं की भागीदारी। 
    इस जागरूकता कार्यक्रम में लीगल एड डिफेंस काउंसिल के अधिवक्ता, विद्वान मध्यस्थ, पीएलवी दिलीप कुमार, अशोक कुमार वर्मा, कामेश्वर कुमार, शालिनी प्रिया, सुनील कुमार सहित कई लोग मौजूद रहे। न्यायालय कर्मियों में राजेश कुमार, नवनीत कुमार दराद और ताबिश जहूर ने भी अपनी अहम भूमिका निभाई।

    “जागरूकता की यह रैली गिरिडीह जिले में सामाजिक बदलाव की नींव रखेगी। बाल श्रम और बाल विवाह जैसी समस्याओं के खिलाफ लोगों को एकजुट करने का यह अभियान समाज को मजबूत और जागरूक बनाने का संकल्प है।”

  • राष्ट्रीय लोक अदालत: 63,389 मामलों का हुआ ऑन द स्पॉट समाधान

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट

    गिरिडीह की धरती पर न्याय का ऐसा महाकुंभ लगा, जिसे कहते हैं राष्ट्रीय लोक अदालत। शनिवार को व्यवहार न्यायालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में 63,389 मामलों का समाधान हुआ। सोचिए, यह सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि उन हजारों चेहरों पर लौटी मुस्कान की कहानी है।
    कितना हुआ समाधान?
    इस लोक अदालत में प्री-लिटिगेशन और लंबित मामलों का निपटारा किया गया। इसके साथ ही 20 करोड़ 40 लाख 74 हजार 719 रुपए की राशि संबंधित पक्षों को दी गई, जिसमें राजस्व के रूप में भी राशि शामिल है।
    कौन-कौन हुआ शामिल?
    कार्यक्रम का उद्घाटन हुआ दीप प्रज्वलन से। मंच पर थे प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार पांडेय, उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा, एसपी डॉक्टर विमल कुमार, और बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रकाश सहाय। इनके साथ अन्य न्यायिक दंडाधिकारी भी शामिल हुए।
    क्या बोले न्यायाधीश?
    प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार पांडेय ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य छोटे-छोटे विवादों का ऑन द स्पॉट समाधान करना है। खासकर ग्रामीण इलाकों में, जहां लंबित मामलों का बोझ अक्सर परिवारों पर भारी पड़ता है।
    प्रशासन की भूमिका
    डीसी नमन प्रियेश लकड़ा और एसपी डॉक्टर विमल कुमार ने भी इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ विवाद सुलझाने का मंच नहीं, बल्कि विश्वास लौटाने की प्रक्रिया है।” जिला और पुलिस प्रशासन समय-समय पर लोगों को इस पहल के प्रति जागरूक करता है।
    अधिवक्ता संघ की अपील
    जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष प्रकाश सहाय ने लोक अदालत की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए पक्षकारों से अधिक से अधिक मामले निपटाने की अपील की।
    कार्यक्रम का संचालन
    कार्यक्रम को विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव सोनम बिश्नोई ने कुशलता से संचालित किया।
    तोलोक अदालत से यह साफ हो गया कि समाधान मुश्किल नहीं, बस एक सही मंच की जरूरत है। गिरिडीह ने एक बार फिर यह साबित किया कि न्याय और आपसी सुलह से बड़ी कोई जीत नहीं।