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  • शिबू सोरेन की तबीयत में सुधार, गंगाराम अस्पताल में चल रहा है इलाज – सीएम और राज्यपाल ने अस्पताल पहुँचकर लिया हाल

    नई दिल्ली/रांची: By The News Post4u
    झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक और वरिष्ठ नेता शिबू सोरेन की तबीयत एक बार फिर बिगड़ गई है। वर्तमान में वे दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती हैं, जहां उनका इलाज चल रहा है। बुधवार सुबह उनकी तबीयत अचानक कुछ ज्यादा खराब हो गई थी, जिससे पार्टी में चिंता का माहौल बन गया। हालांकि, अब उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।

    झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने बुधवार को जानकारी देते हुए बताया कि गुरुजी (शिबू सोरेन) की तबीयत में अब सुधार हो रहा है, लेकिन पूरी तरह स्वस्थ होने में समय लगेगा। उन्होंने कहा कि वह खुद भी आज दिल्ली रवाना हो रहे हैं, ताकि गुरुजी से मिलकर उनका हालचाल जान सकें।

    बताया गया कि शिबू सोरेन नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए दिल्ली पहुंचे थे, लेकिन अस्पताल में उनकी हालत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें भर्ती कर लिया गया।

    इधर, झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार भी बुधवार को सर गंगाराम अस्पताल पहुंचे और शिबू सोरेन के स्वास्थ्य की जानकारी ली। उन्होंने डॉक्टरों से बात की और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की।

    गौरतलब है कि इससे पहले मंगलवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी दिल्ली पहुंचे थे और अस्पताल जाकर गुरुजी का हाल जाना। मुख्यमंत्री की पत्नी और शिबू सोरेन की बहू कल्पा सोरेन पहले से ही दिल्ली में मौजूद हैं और लगातार उनके साथ हैं।

    पार्टी सूत्रों के अनुसार, फिलहाल डॉक्टरों की एक विशेष टीम शिबू सोरेन के स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है। समर्थकों और झामुमो कार्यकर्ताओं में भी गुरुजी की तबीयत को लेकर चिंता है, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने फिलहाल किसी गंभीर खतरे से इनकार किया है।

  • नए साल के जश्न के बीच झारखंड का खरसावां गोलीकांड का स्मरण,सीएम ने दी श्रद्धांजलि

    परवेज़ आलम की खास और भावपूर्ण रिपोर्ट……..

    एक तरफ़ जहां पूरी दुनिया 1 जनवरी को नए साल के आगमन का उत्सव मना रही है, झारखंड का सरायकेला-खरसावां गांव हर साल इस दिन को शहीद दिवस के रूप में याद करता है। यह वह दिन है जब इस भूमि ने अपने वीर सपूतों और बेटियों की कुर्बानियां देखीं।

    आज झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी और विधायक कल्पना सोरेन के साथ खरसावां स्थित शहीद स्थल पहुंचे। पारंपरिक तरीकों से शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्होंने झारखंड के महान वीरों के संघर्ष को नमन किया। यह परंपरा पिछले मुख्यमंत्रियों – बाबूलाल मरांडी और रघुवर दास – के समय से चली आ रही है।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा,
    “आज नए साल के पहले दिन, हम अपने उन वीर पूर्वजों की शहादत से प्रेरणा लेते हैं जिन्होंने जल, जंगल, और ज़मीन की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। यह वीर भूमि “झारखंड “असंख्य बलिदानों से सिंचित है। हर साल हम खरसावां के शहीदों की स्मृति में यहां एकत्र होते हैं, उनकी अमर गाथा को याद करते हैं।”

    यहाँ आने से पहले हेमंत सोरेन अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के साथ झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार से राजभवन मे जाकर मिले और उन्हें नए साल की बधाई दी ।

    क्या है खरसावां की कहानी?

    यह दर्दनाक घटना 1 जनवरी 1948 को हुई, जब खरसावां के हाट बाजार में सैकड़ों आदिवासियों को गोलियों का सामना करना पड़ा। उस दिन, जो गुरुवार था, आदिवासी ग्रामीण अपने पारंपरिक बाजार में पहुंचे थे। लेकिन वहां उनकी ज़िंदगी खून से लथपथ खरसावां की मिट्टी पर सिमट गई।

    इस जनसंहार की जड़ें आज़ाद भारत के शुरुआती दौर से जुड़ी हैं। 1947 के बाद राज्यों के पुनर्गठन की प्रक्रिया चल रही थी। 14-15 दिसंबर को अनौपचारिक रूप से खरसावां और सरायकेला रियासतों का विलय ओडिशा राज्य में कर दिया गया। इसका विरोध आदिवासी नेता जयपाल सिंह मुंडा ने किया। उन्होंने 1 जनवरी 1948 को एक विशाल जनसभा का आह्वान किया, लेकिन किसी कारणवश वे खुद वहां नहीं पहुंच सके। सभा में हज़ारों की संख्या में लोग शामिल हुए। इसी दौरान पुलिस और भीड़ के बीच संघर्ष हुआ और अचानक गोलियां चलने लगीं। इतिहासकारों का कहना है कि सैकड़ों लोग मारे गए, लेकिन मरने वालों की सही संख्या आज तक किसी को नहीं पता।

    शहीद दिवस और गहरे दफन राज। 

    हर साल 1 जनवरी को खरसावां में शहीदों की याद में मेला लगता है। इसमें झारखंड और ओडिशा के आदिवासी समुदाय बड़ी संख्या में हिस्सा लेते हैं। यह केवल शोक का नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता और एकता का प्रतीक है। मुख्यमंत्री और अन्य नेता इस आयोजन को अपनी उपस्थिति से सम्मान देते हैं।

    आजाद भारत का सबसे बड़ा गोलीकांड।

    खरसावां गोलीकांड भारत का सबसे बड़ा आदिवासी जनसंहार माना जाता है। इसने झारखंड की राजनीति और समाज पर अमिट छाप छोड़ी है। यह दिन सिर्फ़ एक इतिहास नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के अदम्य साहस और बलिदान का प्रतीक है।

    आज, जब पूरा देश नए साल के उल्लास में डूबा है, झारखंड का यह छोटा सा गांव उस जख्म को याद कर रहा है जिसने यहां की मिट्टी को रक्त से लाल कर दिया। खरसावां के शहीदों को शत-शत नमन।

     

  • 18 दिसंबर: राजभवन मार्च करेगी कांग्रेस, केंद्र के खिलाफ प्रदर्शन

    RANCHI: कांग्रेस ने केंद्र सरकार की “जनविरोधी नीतियों” के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए 18 दिसंबर को रांची स्थित राजभवन तक मार्च का ऐलान किया है। इस विरोध प्रदर्शन में पार्टी के कार्यकर्ता, मंत्री, सांसद, विधायक, और प्रदेश के वरिष्ठ नेता शामिल होंगे।

    प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश का बयान.
    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने संगठन के पदाधिकारियों को इस मार्च को सफल बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार की नीतियां आम जनता के खिलाफ हैं। महंगाई, बेरोजगारी, और पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने की नीतियां देश के संविधान के खिलाफ हैं। कांग्रेस पार्टी लगातार इन मुद्दों को उठा रही है, मगर केंद्र सरकार हर सवाल से बचने की कोशिश कर रही है।”

    अडाणी प्रकरण पर सरकार को घेरा। 
    कमलेश ने अडाणी मामले को लेकर केंद्र पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “जब देश के बाहर अडाणी समूह के खिलाफ मुकदमे चल रहे हैं, तब भारत सरकार उन्हें बचाने में जुटी है। यह दिखाता है कि मौजूदा सरकार केवल पूंजीपतियों की हितैषी है, न कि जनता की।”

    कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व सक्रिय।
    कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी लगातार जन मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। कमलेश ने कहा, “हमारा संघर्ष संविधान की रक्षा और आम जनता के अधिकारों की लड़ाई है। केंद्र सरकार की चुप्पी इस बात का सबूत है कि वह देश के सवालों का सामना नहीं करना चाहती।”

    क्या है कांग्रेस का एजेंडा?
    इस राजभवन मार्च को कांग्रेस जनता से जुड़े मुद्दों पर एक बड़े संदेश के रूप में देख रही है। पार्टी ने इसे केंद्र सरकार के खिलाफ अपनी राष्ट्रीय रणनीति का हिस्सा बताया है।

    जनता से अपील। 
    प्रदेश कांग्रेस ने झारखंड की जनता से भी इस मार्च में शामिल होने की अपील की है। पार्टी का कहना है कि यह प्रदर्शन हर उस व्यक्ति की आवाज को बुलंद करेगा, जो महंगाई और अन्याय से परेशान है।

    क्या होगा असर?
    कांग्रेस के इस प्रदर्शन से झारखंड की राजनीति में हलचल तेज होने की संभावना है। 18 दिसंबर का दिन राजनीतिक रूप से अहम हो सकता है।

  • झारखंड विधानसभा के ऐतिहासिक पल और नई राहें

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट……

    झारखंड विधानसभा के पहले सत्र के तीसरे दिन ने इतिहास रच दिया। राज्यपाल संतोष गंगवार के अभिभाषण ने झारखंड की राजनीति और विकास की दिशा को नई ऊर्जा दी। उनके शब्दों ने न केवल सरकार के वादों को पुख्ता किया, बल्कि झारखंड के भविष्य का एक रोडमैप भी सामने रखा।

    महिलाओं के लिए नई उम्मीद
    सबसे बड़ा ऐलान सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 33% आरक्षण का रहा। यह कदम झारखंड में महिलाओं के लिए नई संभावनाओं का द्वार खोलने वाला है। चुनावी वादे को निभाते हुए, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि महिलाओं को रोजगार में बराबरी का हक मिले।

    सरना धर्म कोड और आरक्षण पर जोर
    राज्यपाल ने अपने अभिभाषण में बताया कि झारखंड सरकार ने सरना धर्म कोड बिल पास किया है, जो अब केंद्र की मंजूरी का इंतजार कर रहा है। इसके साथ ही आदिवासियों को 28%, ओबीसी को 27%, और एससी को 12% आरक्षण देने की बात दोहराई गई। यह झारखंड के सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है।

    किसानों और गरीबों के लिए राहत पैकेज
    किसानों को ज़ीरो ब्याज पर लोन देने का ऐलान झारखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देगा। साथ ही, गरीबों के लिए 7 किलो चावल और 2 किलो दाल उपलब्ध कराने की योजना ने आम जनता की बुनियादी जरूरतों को प्राथमिकता दी है।

    शिक्षा और खेल को मिलेगा बढ़ावा
    राज्यपाल ने घोषणा की कि झारखंड में 500 सीएम स्कूल ऑफ एक्सलेंस और 4,500 पंचायत स्तरीय आदर्श विद्यालय खोले जाएंगे। इन स्कूलों में स्वास्थ्य और संगीत जैसे विषयों के शिक्षक नियुक्त किए जाएंगे। स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की स्थापना और खिलाड़ियों के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण के जरिए खेल को भी एक नई पहचान देने का प्रयास किया गया है।

    गांव और शहर में संतुलित विकास
    अबुआ आवास योजना के तहत 25 लाख गरीब परिवारों को तीन कमरों के सुंदर घर मुहैया कराए जाएंगे। शहरी क्षेत्रों में पुराने मकानों के नक्शे का नियमितीकरण भी राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

    वित्तीय मजबूती की ओर कदम
    राज्यपाल ने बताया कि झारखंड सरकार केंद्र और उसकी कंपनियों के बकाए ₹1.36 लाख करोड़ को कानूनी रास्ते से वसूलने का प्रयास करेगी। यह कदम राज्य की आर्थिक स्थिति को स्थिरता देगा।

    सहारा इंडिया के पीड़ित निवेशकों के लिए लड़ाई लड़ने से लेकर नई पेंशन योजना के तहत जमा धनराशि वापस लाने तक, राज्य सरकार ने अपने इरादे स्पष्ट कर दिए हैं।

    झारखंड विधानसभा के इस सत्र ने केवल घोषणाएं नहीं कीं, बल्कि झारखंड के विकास की नई नींव भी रखी। राज्यपाल के शब्दों में उन्नत, समृद्ध, और सुखी झारखंड का सपना झलकता है। अब देखना यह होगा कि ये योजनाएं जमीन पर कैसे उतरती हैं।

  • झारखंड की धरती पर वीरता और सादगी को सलाम

    परवेज़ आलम की कलम से……

    आज झारखंड  में एक अद्भुत भावनात्मक संगम देखने को मिला। एक ओर शहादत की गूंज थी, तो दूसरी ओर राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा। परमवीर चक्र विजेता लांस नायक अल्बर्ट एक्का की शहादत दिवस और देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती पर राज्यपाल संतोष गंगवार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने झारखंड की मिट्टी से जुड़े इन महान व्यक्तित्वों को श्रद्धांजलि दी।

    अल्बर्ट एक्का: शौर्य की जीवित गाथा
    महात्मा गांधी मार्ग, रांची में अल्बर्ट एक्का की प्रतिमा पर पुष्पचक्र अर्पित करते हुए राज्यपाल संतोष गंगवार ने कहा, “लांस नायक अल्बर्ट एक्का का साहस और बलिदान केवल झारखंड नहीं, पूरे देश का गौरव है। उनका जीवन हर भारतवासी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनके वीरता की गाथा सदियों तक अमर रहेगी।”

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी इस अवसर पर शहीद को नमन करते हुए झारखंड के वीर सपूतों के अद्वितीय योगदान को रेखांकित किया।

    डॉ. राजेंद्र प्रसाद: सादगी का अनूठा आदर्श
    इसके बाद डोरंडा स्थित राजेंद्र चौक पर देश के प्रथम राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। राज्यपाल गंगवार ने कहा, “डॉ. राजेंद्र प्रसाद की सादगी, निस्वार्थ सेवा, और राष्ट्र निर्माण में योगदान हर पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक हैं। उनकी निष्ठा हमें बताती है कि महानता दिखावे में नहीं, कर्म में होती है।”

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस अवसर पर कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद के आदर्श झारखंड जैसे उभरते राज्य के लिए विकास और समानता के पथ पर चलते रहने की प्रेरणा देते हैं।

    अल्बर्ट एक्का की शहादत और डॉ. राजेंद्र प्रसाद की सादगी—दो कहानियां, दो मिसाल। एक ने मातृभूमि के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया, तो दूसरे ने राष्ट्र को मजबूत करने के लिए अपना सर्वस्व समर्पित किया। आज झारखंड ने इन दोनों को याद कर एक बार फिर अपनी मिट्टी की गहराई और गर्व को महसूस किया।

  • झारखंड में विधान सभा सत्र का ऐलान : नये अध्यक्ष का चुनाव

    RANCHI: झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार की पहली परीक्षा तय हो गई है। 9 दिसंबर से शुरू हो रहे चार दिवसीय विधानसभा सत्र ने सियासी हलचल को गरमा दिया है।

    पहला दिन: नव निर्वाचित विधायकों का शपथ ग्रहण।
    दूसरा दिन:चुना जाएगा।
    तीसरा दिन: राज्यपाल का अभिभाषण, और फिर सरकार पेश करेगी वित्तीय वर्ष 2024-25 का दूसरा अनुपूरक बजट।
    आखिरी दिन: राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा और बजट पर बहस।

    अब सवाल यह है कि चार दिन में हेमंत सरकार कितना कुछ साध पाएगी?

    बजट से बड़ी उम्मीदें .
    इस सत्र में सरकार न सिर्फ अनुपूरक बजट पेश करेगी, बल्कि मंईयां सम्मान योजना समेत कई जन-कल्याणकारी योजनाओं के लिए अनुदान की मांग भी रखेगी। लेकिन क्या सिर्फ योजनाओं का ऐलान, ज़मीन पर क्रियान्वयन के भरोसे में तब्दील हो पाएगा?

    कैबिनेट विस्तार की अटकलें जारी
    इधर, हेमंत सोरेन सरकार के विस्तार को लेकर भी चर्चा तेज़ है। मुख्यमंत्री दिल्ली में कांग्रेस के आला नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं, और कैबिनेट बंटवारे पर घटक दलों से बातचीत जारी है।

    राज्यपाल की सहमति और विपक्ष का सवाल
    राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने 9 से 12 दिसंबर तक सत्र की अधिसूचना जारी कर दी है। लेकिन विपक्ष इस छोटे सत्र को लेकर सवाल उठा सकता है। चार दिन का सत्र—क्या यह जनता की समस्याओं को उठाने और समाधान खोजने के लिए पर्याप्त होगा?

    तो, सत्र शुरू होने वाला है। अब देखना यह है कि यह सत्र जनता के मुद्दों को लेकर कितनी गंभीरता दिखाता है या फिर यह भी महज़ औपचारिकता बनकर रह जाएगा।