— मंत्री बोले “राजद-कांग्रेस की धूर्त राजनीति का शिकार हुई पार्टी”
परवेज़ आलम.
गिरिडीह: बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी इस बार बिहार की किसी भी विधानसभा सीट पर चुनाव नहीं लड़ पाएगी, क्योंकि नामांकन की अंतिम तिथि (सोमवार) बीत जाने तक जेएमएम का कोई उम्मीदवार पर्चा दाखिल नहीं कर सका।
इस अप्रत्याशित स्थिति के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा ने औपचारिक रूप से महागठबंधन से अलग होने की घोषणा कर दी है।
यह घोषणा झारखंड सरकार के मंत्री और जेएमएम के वरिष्ठ नेता सुदिव्य कुमार सोनू ने गिरिडीह में पत्रकारों से बातचीत के दौरान की।
राजद और कांग्रेस ने दिखाई राजनीतिक धूर्तता.
पत्रकारों से बातचीत में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने तीखे शब्दों में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस दोनों पर गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने कहा —
“राजद और कांग्रेस ने जो किया है, वह राजनीतिक धूर्तता की पराकाष्ठा है। हमें जानबूझकर गठबंधन की प्रक्रिया से बाहर रखा गया। इसका परिणाम जल्द ही सबके सामने होगा।”
मंत्री ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि अब जेएमएम बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन का हिस्सा नहीं है, और पार्टी किसी भी सीट पर चुनाव नहीं लड़ेगी।
सीट शेयरिंग पर अटका मामला, 13 दिनों तक होता रहा इंतज़ार.
मंत्री सोनू ने बताया कि 7 अक्टूबर को पटना में सीट बंटवारे को लेकर महागठबंधन की बैठक हुई थी।
वे अपने सहयोगी विनोद पांडेय के साथ इस बैठक में शामिल हुए थे।
जेएमएम को उम्मीद थी कि पार्टी को कुछ सीटें मिलेंगी, ताकि बिहार में भी उसका राजनीतिक विस्तार हो सके।
लेकिन मंत्री के अनुसार,
“7 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक राजद ने चालबाजी का खेल खेला, और कांग्रेस ने उस पर मौन सहमति दी।
जब तक नामांकन की तिथि समाप्त हुई, हमें जानबूझकर दरकिनार कर दिया गया।”
उन्होंने इसे “साजिशन बहिष्कार” बताया और कहा कि राजद-कांग्रेस की मिलीभगत ने जेएमएम की चुनावी योजनाओं पर पानी फेर दिया।
अगर पहले साफ़ बोलते, तो हम अकेले मैदान में उतर जाते.
मंत्री सोनू ने अपनी नाराज़गी जताते हुए कहा कि अगर राजद और कांग्रेस को जेएमएम को सीट नहीं देनी थी, तो यह बात पहले ही स्पष्ट करनी चाहिए थी।
“हम झारखंड से बिहार तक एकजुटता और क्षेत्रीय सहयोग का संदेश देना चाहते थे, लेकिन हमें राजनीतिक सहयोगी नहीं, बल्कि प्रतिद्वंद्वी समझा गया,”
मंत्री सोनू ने कहा।
उन्होंने आगे कहा —
“7 से 20 अक्टूबर तक हमें सिर्फ छल का सामना करना पड़ा। यह सब सोची-समझी चाल थी, जिसमें कांग्रेस ने राजद का पूरा साथ दिया। अब इसका खामियाजा दोनों दलों को भुगतना पड़ेगा। क्यूकि JMM देश की अकेली पार्टी है जिसका आदिवासी समाज मे ब्यापक जननधर है और बिहार की कई सीटों पर महागठबंधन को JMM की उपेक्षा भारी पड़ेगी । 
महागठबंधन की एकता पर बड़ा सवाल.
जेएमएम के महागठबंधन से अलग होने के ऐलान से बिहार महागठबंधन की एकता पर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टूट न केवल महागठबंधन की साख को कमजोर करेगी, बल्कि झारखंड-बिहार के क्षेत्रीय तालमेल और गठबंधन राजनीति की विश्वसनीयता पर भी असर डालेगी।
बिहार की सियासत में जहां एक ओर गठबंधन की मजबूती की बातें हो रही थीं, वहीं अब जेएमएम का यह कदम आने वाले दिनों में नए समीकरण और नए गठजोड़ों की शुरुआत कर सकता है।
फिलहाल का निष्कर्ष.
झारखंड मुक्ति मोर्चा ने साफ़ कर दिया है कि वह अब बिहार मे महागठबंधन का हिस्सा नहीं रहेगा और झारखंड मे महागठबंधन के रहने पर भी समीक्षा होगी ।
मंत्री सोनू के बयान से यह भी स्पष्ट है कि यह अलगाव किसी सीट या सौदेबाज़ी का नहीं, बल्कि विश्वास और सम्मान की राजनीति का मामला है।
बिहार के चुनावी मैदान में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि
क्या राजद-कांग्रेस इस झटके से उबर पाते हैं,
या फिर झारखंड से उठी यह नाराज़गी
बिहार की सियासत की नई कहानी लिख देगी।







