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  • मंईयां सम्मान योजना का इंतजार खत्म: जानिए किस तारीख को महिलाओं के खाते में आएंगे 2500 रुपये

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट……
    झारखंड में लाखों महिलाओं के लिए राहत भरी खबर आई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की महत्वाकांक्षी योजना मंईयां सम्मान योजना के तहत लाभुकों के खाते में 2500 रुपये की राशि इसी महीने से ट्रांसफर की जाएगी। माना जा रहा है कि सीएम सोरेन 14 दिसंबर को अपने विधानसभा क्षेत्र बरहेट से इस योजना की पांचवी किस्त जारी करेंगे।
    बरहेट से होगी योजना की शुरुआत। 
    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 14 दिसंबर को अपने दो दिवसीय संताल दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे वीर शहीद सिदो-कान्हू और फूलो-झानो की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण करेंगे। जनसभा को संबोधित करते हुए, महिला लाभुकों के खातों में 2500 रुपये ट्रांसफर करने की संभावना है।
    आर्थिक मदद के लिए बजट पास। 
    हाल ही में सोरेन सरकार ने 2024-25 के लिए दूसरा अनुपूरक बजट पेश किया, जिसमें महिला, बाल विकास और सामाजिक सुरक्षा विभाग को प्रमुखता दी गई। मंईयां सम्मान योजना इसी विभाग के अंतर्गत संचालित हो रही है। बजट पास होने के बाद वित्त विभाग से राशि नोडल विभाग को ट्रांसफर की जाएगी।
    महिलाओं को जल्द मिलेगा लाभ। 
    योजना का लाभ पाने के लिए महिलाएं लंबे समय से इंतजार कर रही थीं। हालांकि इस महीने देरी का कारण अनुपूरक बजट की प्रक्रिया रही। विभागीय सूत्रों के अनुसार, एक-दो दिन में सारी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी।
    संताल दौरे पर सोरेन परिवार। 
    मुख्यमंत्री के साथ उनकी पत्नी और गांडेय की विधायक कल्पना सोरेन भी दौरे पर रहेंगी। सीएम देवघर बाबाधाम और दुमका के बासुकिनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद बरहेट में जनसभा को संबोधित करते हुए महिला लाभुकों के खातों में राशि भेजने की शुरुआत करेंगे।

    मंईयां सम्मान योजना के तहत इस किस्त से झारखंड की लाखों महिलाओं को आर्थिक सहायता मिलेगी। यह योजना न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति को सशक्त बनाएगी बल्कि आने वाले चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  • झारखंड की सियासत में सत्ता के नए समीकरण !

    परवेज़ आलम की विश्लेषणात्मक रपट ……..

    झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने मंत्रिपरिषद का विभागीय बंटवारा कर दिया है। ये सिर्फ विभागों का आवंटन नहीं, बल्कि सियासी बिसात पर बिछाई गई पहली चाल है। अहम विभागों को खुद के पास रखकर सोरेन ने अपनी पकड़ मजबूत दिखाई, लेकिन सवर्ण और महिला प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल भी खड़े हो गए हैं।

    जब मईया सम्मान योजना के तहत महिलाओं को केंद्र में रखकर फैसले हुए थे, तो लगा था कि सोरेन महिलाओं को सत्ता में बड़ी हिस्सेदारी देंगे। लेकिन इस बार उनकी झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के कोटे से शपथ लेने वाले छह मंत्रियों में एक भी महिला नहीं हैं। यह वही राज्य है, जहां इस बार विधानसभा में कुल 12 महिला विधायक पहुंची हैं। कांग्रेस ने अपने हिस्से से दो महिलाओं – दीपिका पांडेय सिंह और शिल्पी नेहा तिर्की – को मंत्रिमंडल में जगह दी, जबकि जेएमएम ने इस पहलू को पूरी तरह नजरअंदाज किया।

    सवाल यह भी उठता है कि सोरेन ने अपने मंत्रिमंडल से सवर्णों को बाहर क्यों रखा? 2005 से भाजपा के कद्दावर नेता भानु प्रताप शाही को हराकर पहुंचे अनंत प्रताप देव मंत्री पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे। लेकिन सवर्णों को किनारे करने की रणनीति ने झारखंड की सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। सोरेन का यह कदम झारखंड की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ रहा है, जहां बहसें सिर्फ पावर के बंटवारे पर नहीं, बल्कि जातीय समीकरणों पर भी केंद्रित हो गई हैं।

    अहम विभागों की बंटवारे की तस्वीर
    हेमंत सोरेन ने कार्मिक, गृह, पथ निर्माण और भवन निर्माण जैसे संवेदनशील विभाग खुद के पास रखे।
    राधा कृष्ण किशोर को वित्त, वाणिज्य कर और संसदीय कार्य सौंपा गया।
    इरफान अंसारी स्वास्थ्य, खाद्य आपूर्ति और आपदा प्रबंधन संभालेंगे।
    रामदास सोरेन के जिम्मे स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग आए।
    दीपिका पांडेय सिंह को ग्रामीण विकास जैसे अहम क्षेत्रीय विभाग मिले।
    शिल्पी नेहा तिर्की को कृषि, पशुपालन और सहकारिता विभाग की जिम्मेदारी दी गई।

    राजनीतिक संकेत और संभावनाएं
    झारखंड के इस नए समीकरण में सवाल यह है कि सोरेन सरकार विपक्ष के सवालों का कैसे जवाब देगी? क्या महिला और सवर्ण प्रतिनिधित्व का यह अभाव उनकी छवि पर असर डालेगा? या फिर यह उनके जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों का नतीजा है?

    बहरहाल, नौ नवंबर को विधानसभा का विशेष सत्र इन बहसों को और तेज कर देगा।

  • तुम्हारी जीत से ज्यादा मेरी हार के चर्चे

    परवेज़ आलम
    झारखंड की राजनीति में इस बार ये लाइन जेएलकेएम यानी झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा पर बिल्कुल सटीक बैठती है। 71 सीटों पर लड़ाई लड़ी, लेकिन जीते सिर्फ एक। और उस एक जीत के बाद भी उनके चर्चे उनकी हार से ज्यादा हैं। जीत तो बस डुमरी की थी, लेकिन हार ने बीजेपी और आजसू का समीकरण बिगाड़ दिया।

    एक जीत और 70 हार की कहानी
    दो महीने पुरानी पार्टी। चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड और सीधे विधानसभा चुनाव में 71 उम्मीदवार। सुनने में लगा था कि जयराम महतो कोई बड़ा राजनीतिक तूफान लाने वाले हैं, लेकिन उन्होंने खुद डुमरी से जीतकर और बाकी 70 सीटों पर हारकर एनडीए का गणित जरूर हिला दिया।

    एनडीए की लुटिया डुबोने वाला खेल
    एनडीए को उम्मीद थी कि कुर्मी समाज के वोट आजसू और बीजेपी के पक्ष में जाएंगे। लेकिन जयराम महतो ने वोट काटकर वह खेल खराब कर दिया।

    जेएमएम की जीती 34 सीटों में से 15 सीटों पर जेएलकेएम तीसरे स्थान पर रही।
    कांग्रेस की 16 सीटों में से 6 सीटों और भाकपा माले की 2 सीटों पर भी जेएलकेएम ने वोट काटे।
    एनडीए की जीती 24 सीटों में से भी 9 सीटों पर जेएलकेएम ने तीसरा स्थान हासिल किया।
    सुदेश महतो का दर्द
    अब आइए सिल्ली सीट पर। यहां सुदेश महतो, जो कुर्मी समाज के सबसे बड़े चेहरे माने जाते हैं, उन्हें 23,867 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। और हराने वाले थे जेएलकेएम के उम्मीदवार देवेंद्रनाथ महतो, जिन्होंने 41,725 वोट लेकर सुदेश महतो का खेल खत्म कर दिया।

    राजनीतिक संदेश
    झारखंड की 81 सीटों में एनडीए सिर्फ 24 पर सिमट गई, जबकि इंडिया गठबंधन ने 56 सीटें जीत लीं। जेएलकेएम ने भले ही सिर्फ एक सीट जीती, लेकिन उसकी छाया हर तरफ रही। कैंची छाप के उम्मीदवारों ने कई जगह एनडीए को नुकसान पहुंचाया। जयराम महतो ने कुर्मी समाज के 15% वोट बैंक को साधने की कोशिश की, लेकिन उनके पास संसाधन और राजनीतिक नेटवर्क की कमी थी। यह चुनाव यह बताता है कि छोटे दल सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि बड़े दलों के लिए भी कितना बड़ा खतरा बन सकते हैं।   झारखंड में इस बार की राजनीति एक बड़ा संदेश देती है। जयराम महतो की जीत से ज्यादा उनकी हार ने सुर्खियां बटोरीं। कभी-कभी राजनीति में हार जीत से बड़ी कहानी बन जाती है। एनडीए को समझना होगा कि क्षेत्रीय पार्टियों के उभार को नजरअंदाज करना उनके लिए भारी पड़ सकता है। क्योंकि राजनीति में एक सीट भी पूरा गणित बदल सकती है।