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  • “मोंगिया का प्लांट नहीं लगने देंगे, तो नहीं लगने देंगे!” — गूंज उठा चतरो गांव

    परवेज़ आलम.

    गिरिडीह : शनिवार को चतरो गांव का उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय मंझलाडीह एक बार फिर जनआवाज़ से गूंज उठा। मौका था मेसर्स मोंगिया पावर प्राइवेट लिमिटेड की प्रस्तावित विस्तारीकरण परियोजना को लेकर आयोजित पर्यावरणीय लोक सुनवाई का। लेकिन यह सुनवाई कुछ ही मिनटों में “लोक” से “विरोध सभा” बन गई।

    “स्पंज फैक्ट्री नहीं लगेगा, नहीं लगेगा…”,
    “प्रदूषण मुक्त गिरिडीह हमारा अधिकार है!”,
    “पर्यावरण के दुश्मनों होश में आओ!”
    — ये नारे पूरे गांव में गूंजते रहे।

    सुनवाई की अध्यक्षता सदर एसडीओ श्रीकांत यशवंत विस्पुते कर रहे थे। उनके साथ झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद रांची के सहायक वैज्ञानिक अधिकारी रामरतन काशी, क्षेत्रीय पदाधिकारी धनबाद के विवेक कुजूर, गादी श्रीरामपुर पंचायत की मुखिया कंचन देवी और मोंगिया पावर लिमिटेड के चेयरमैन गुणवंत सिंह मोंगिया समेत कई अधिकारी मौजूद थे।

    लेकिन जैसे ही एसडीओ ने सुनवाई की औपचारिक शुरुआत की — ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। हाथों में तख्तियां, आंखों में आक्रोश, और स्लोगनों की गूंज ने माहौल को गर्मा दिया। कुछ देर के प्रयास के बाद एसडीओ ने किसी तरह लोगों को शांत कराया, और फिर ग्रामीणों ने बारी-बारी से अपनी बात रखी।

    “हम बीमार हो रहे हैं, फसलें मर रही हैं, पानी खत्म हो रहा है” — ग्रामीणों की पीड़ा

    गांव के विकास राय, विजय राय, सावित्री देवी, धनेश्वर सिंह, शत्रुघ्न राय, अरुण साव, रामेश्वर शर्मा समेत दर्जनों ग्रामीणों ने कहा —

    “कारखाने से निकलने वाला धुआं और राख हमारी ज़िंदगी में जहर घोल रहा है। बच्चे बीमार पैदा हो रहे हैं, खेतों की फसलें सूख रही हैं, और अब तो पीने का पानी भी जहरीला हो गया है।”

    उन्होंने आरोप लगाया कि फैक्ट्री की डीप बोरिंग से भूजल स्तर बहुत नीचे चला गया है। नदियों का पानी प्रदूषित है, जिससे इंसान ही नहीं, मवेशी तक बीमार पड़ रहे हैं।

    कंपनी की दलील पर फिर भड़के लोग.

    झारखंड प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के अधिकारियों ने बताया कि कंपनी स्पंज आयरन उत्पादन क्षमता को 33 हज़ार टन से बढ़ाकर 2.64 लाख टन प्रति वर्ष करना चाहती है। साथ ही 1.98 लाख टन बिलेट उत्पादन, री-हीटिंग फर्नेस, रोलिंग मिल और 25 मेगावाट कैप्टिव पावर प्लांट लगाने की योजना है।

    जैसे ही कंपनी के चेयरमैन गुणवंत सिंह मोंगिया ने परियोजना के फायदे गिनाने शुरू किए — भीड़ एक बार फिर उग्र हो गई।
    लोगों ने एक स्वर में कहा —

    “कुछ नहीं सुनेंगे! प्लांट नहीं लगने देंगे तो नहीं लगने देंगे!”

    विरोध इतना तीव्र था कि अंततः सुनवाई बीच में ही समाप्त करनी पड़ी।

    ग्रामीणों का साफ संदेश — ‘प्रदूषण से विकास नहीं चाहिए’

    इस लोक सुनवाई में गादी श्रीरामपुर, मोहनपुर, मंझलाडीह, चतरो, गंगापुर, अंबाडीह, भोरंडीहा और झलकडीहा समेत आसपास के गांवों से 500 से अधिक ग्रामीण शामिल हुए — जिनमें महिलाओं की संख्या भी काफी रही। सभी की मांग एक ही थी —

    “पहले स्वास्थ्य और स्वच्छ हवा, बाद में उद्योग-धंधा।”

     

  • झारखंड पर्यटन को मिलेगी नई रफ्तार-सुदिव्य कुमार

    केंद्रीय पर्यटन मंत्री से मुलाकात में लिए गए कई अहम फैसले.

    परवेज़ आलम.

    For The News Post4U.

    रांची /नई दिल्ली, 22 जुलाई
    झारखंड में पर्यटन विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से आज नई दिल्ली में झारखंड पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार और केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई । यह शिष्टाचार भेंट झारखंड को एक उभरते हुए पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ठोस पहल मानी जा रही है।

    बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने राज्य में पर्यटन के सर्वांगीण विकास से संबंधित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया और केंद्र सरकार से सक्रिय सहयोग का आश्वासन प्राप्त हुआ।

    बैठक में लिए गए मुख्य निर्णय.

    अशोक होटल के हस्तांतरण पर सहमति.
    रांची स्थित अशोक होटल को झारखंड सरकार को सौंपने के संबंध में सैद्धांतिक सहमति बनी है। इससे होटल क्षेत्र में राज्य सरकार की सक्रियता बढ़ेगी और स्थानीय पर्यटन व्यवसाय को बल मिलेगा।

    इको-टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा.
    स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के अंतर्गत छनडील, नेतरहाट और तेनुघाट में इको-टूरिज्म परियोजनाएं विकसित की जाएंगी, जो पर्यावरण-संवेदनशील पर्यटन को प्रोत्साहित करेंगी।

    ADVT.

    पर्यटन संस्थान की स्थापना.
    राज्य में IITTM मॉडल पर आधारित एक उच्च स्तरीय पर्यटन संस्थान स्थापित किया जाएगा, जो पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में युवाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराएगा।

    राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मेलों का आयोजन.
    झारखंड में पर्यटन को वैश्विक मंच देने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मेलों का संयुक्त आयोजन किया जाएगा, जिससे राज्य की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विविधताओं को व्यापक पहचान मिलेगी।

    विरासत स्थलों का संरक्षण.
    राज्य के पुरातात्विक और ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया गया। यह पहल न केवल सांस्कृतिक विरासत को संजोएगी, बल्कि इन्हें आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित करेगी।

    पर्यटन के नए युग की शुरुआत.

    बैठक के बाद यह स्पष्ट हुआ कि झारखंड को पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान दिलाने के लिए राज्य और केंद्र मिलकर ठोस प्रयास करेंगे। पर्यटन से जुड़े ये सभी प्रोजेक्ट्स न केवल झारखंड की आर्थिक संरचना को मजबूत करेंगे, बल्कि स्थानीय रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि करेंगे।

  • झारखंड : रहस्यमयी खदानों की दुनिया को अब नजदीक से देखेंगे पर्यटक

    पहली बार शुरू होगा माइनिंग टूरिज्म.

    By: परवेज़ आलम.

    For The News Post4u.

    रांची : झारखंड सरकार ने देश में पहली बार एक अनोखी और साहसिक पहल की शुरुआत की है। अब तक बंद दरवाज़ों के पीछे रही खदानों की दुनिया आम जनता के लिए खोली जा रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुवाई में राज्य ने माइनिंग टूरिज्म (खनन पर्यटन) की शुरुआत की है, जो न सिर्फ राज्य की औद्योगिक पहचान को मजबूत करेगा, बल्कि पर्यटन क्षेत्र को भी नया आयाम देगा।

    खनन क्षेत्र अब बनेगा दर्शनीय स्थल.

    इस योजना के तहत राज्य सरकार और कोल इंडिया लिमिटेड की अनुषंगी कंपनी सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) के बीच एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह साझेदारी झारखंड पर्यटन विकास निगम (JTDC) और CCL के बीच हुई है। प्रारंभिक तौर पर यह परियोजना उत्तर उरीमारी खदान (North Urimari Mines) से शुरू की जाएगी।

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि इस पहल से लोगों को खदानों की कार्यप्रणाली, खनिज संपदा और श्रमिकों की मेहनत को नजदीक से देखने और समझने का मौका मिलेगा। उन्होंने यह फैसला हाल ही में स्पेन के गावा संग्रहालय के दौरे के बाद लिया, जहां उन्होंने प्राचीन खनन तकनीकों को देखा और उनसे प्रेरित हुए।

    क्या होगा इस खनन पर्यटन में खास.

    • पर्यटन संचालन: JTDC पर्यटकों की ऑनलाइन बुकिंग करेगा। सप्ताह में दो दिन पर्यटन की सुविधा मिलेगी। प्रत्येक ग्रुप में 10 से 20 पर्यटक शामिल हो सकेंगे।
    • सुरक्षा और निर्देश: पर्यटकों को खदान में प्रवेश से पहले CCL के सुरक्षा प्रोटोकॉल और स्वास्थ्य मानकों का पालन करना होगा। अंतिम अनुमति CCL द्वारा दी जाएगी।
    • गाइड सुविधा: CCL खदान की कार्यशैली, तकनीकी प्रक्रिया और सुरक्षा उपायों को समझाने के लिए प्रशिक्षित गाइड उपलब्ध कराएगा।
    • समझौते की अवधि: यह MoU पांच वर्षों के लिए लागू रहेगा, जिसे आगे पांच साल और बढ़ाया जा सकता है।
    • विस्तार की योजना: भविष्य में अन्य खदानों को भी इस पर्यटन सर्किट में जोड़ा जाएगा।

    खान पर्यटन के पीछे सरकार का मकसद.

    पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा, “झारखंड खनन राज्य के रूप में जाना जाता है। अब हम उस पहचान को एक नए रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। खनन पर्यटन आम जनता, छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए एक ज्ञानवर्धक अनुभव बनेगा। इससे न केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी बल्कि राज्य की औद्योगिक विरासत और ऊर्जा इतिहास को भी वैश्विक मंच पर पहचान मिलेगी।”

    उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में सरकार भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) के साथ मिलकर एक और माइनिंग टूरिज्म ज़ोन विकसित करने की योजना पर काम कर रही है।

    समारोह में बड़ी भागीदारी.

    इस ऐतिहासिक अवसर पर CCL के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर निलेंदु कुमार सिंह, JTDC के एमडी प्रेम रंजन, पर्यटन निदेशक विजया जाधव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए सरकार और CCL के बीच तीन दौर की मैराथन बैठकें हुईं, जिसके बाद यह समझौता साकार हुआ।

    राज्य को मिलेंगे बहुआयामी लाभ.

    झारखंड खनिज संसाधनों से भरपूर राज्य है। देश के कुल खनिज भंडार का करीब 40% हिस्सा यहीं स्थित है। ऐसे में यह पहल राज्य को सिर्फ पर्यटन के क्षेत्र में ही नहीं, शिक्षा, रोजगार, सांस्कृतिक धरोहर और उद्योग के क्षेत्र में भी लाभ पहुंचाएगी।


    माइनिंग टूरिज्म के जरिए झारखंड अब सिर्फ ‘खनन राज्य’ नहीं, बल्कि ‘टूरिस्ट फ्रेंडली खनन राज्य’ बनने की ओर बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी सरकार का यह कदम देशभर में अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।

    अगर आप रहस्यमयी खदानों की दुनिया को नजदीक से देखना चाहते हैं, तो झारखंड अब आपके स्वागत के लिए तैयार है।

  • नगर निकाय चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट सख्त : सरकार पर संवैधानिक तंत्र को कुचलने का आरोप, मुख्य सचिव को किया तलब

    By : परवेज़ आलम.

    For The News Post4u.

    रांची ब्यूरो | 18 जुलाई 2025

    झारखंड में नगर निकाय चुनाव में लगातार हो रही देरी को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। जस्टिस आनंद सेन की एकल पीठ ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान सरकार पर न्यायालय के आदेश की अवहेलना का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य प्रशासन लोकतंत्र की मूल भावना और कानून के शासन (Rule of Law) का गला घोंट रहा है।

    अदालत ने इस मामले में राज्य के मुख्य सचिव को 25 अगस्त 2025 को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है ताकि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जा सके। इस दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार के रवैये को “जानबूझकर टालमटोल करने वाला और गैर-जिम्मेदार” बताया।

    ❖ अदालत की तीखी टिप्पणियां:

    सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा:

    “राज्य सरकार ने न्यायालय के स्पष्ट आदेश की अवहेलना करते हुए संवैधानिक तंत्र को ठप्प कर दिया है। यह न केवल अदालत की अवमानना है, बल्कि यह लोकतंत्र और विधिसम्मत शासन के खिलाफ एक गंभीर हमला है।”

    ❖ मुख्य सचिव को अवमानना का नोटिस:

    पूर्व पार्षद रोशनी खलखो की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि सरकार ने पहले खुद चार महीने में चुनाव कराने की गारंटी दी थी, लेकिन वह मियाद भी खत्म हो चुकी है। अब सरकार यह तर्क दे रही है कि राज्य चुनाव आयोग से मतदाता सूची नहीं मिली है, जबकि आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि 25 मार्च से राज्य चुनाव आयुक्त का पद रिक्त है, जिसके कारण सूची जारी नहीं हो सकी।

    इस पर अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा:

    “जब चुनाव आयुक्त की नियुक्ति राज्य सरकार की जिम्मेदारी है, तो नियुक्ति में देरी क्यों? यह अदालत के आदेश की अवमानना का एक नायाब तरीका है।”

    ❖ सरकार का रवैया लोकतंत्र विरोधी: याचिकाकर्ता.

    याचिकाकर्ता के वकील विनोद सिंह ने कहा कि यह स्पष्ट है कि राज्य सरकार चुनाव प्रक्रिया में जानबूझकर देरी कर रही है। इससे स्थानीय निकायों का कामकाज प्रभावित हो रहा है और जनता की भागीदारी को नजरअंदाज किया जा रहा है।

    ❖ पहले भी मिला था आदेश, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई.

    • 4 जनवरी 2024 को हाईकोर्ट ने सरकार को 3 सप्ताह के भीतर निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी करने का आदेश दिया था।
    • सरकार ने इस आदेश के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील की, जिसे खंडपीठ ने खारिज कर दिया।
    • इसके बाद मुख्य सचिव की ओर से अदालत को 4 महीने में चुनाव कराने की अंडरटेकिंग दी गई थी, जो अब समाप्त हो चुकी है।

    ❖ चुनाव न होने से अफसरों के हवाले प्रशासन.

    चुनाव न होने के चलते फिलहाल राज्य के 49 नगरीय निकायों का संचालन निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के बजाय नियुक्त अधिकारियों के हाथों में है। इनमें शामिल हैं:

    • नगर निगम (9): रांची, धनबाद, हजारीबाग, मेदिनीनगर, गिरिडीह, देवघर, चास, आदित्यपुर, मानगो।
    • नगर परिषद (21): चाईबासा, दुमका, गोड्डा, साहिबगंज, रामगढ़ आदि।
    • नगर पंचायत (19): जामताड़ा, खूंटी, चाकुलिया, लातेहार, हुसैनाबाद आदि।

    ❖ ट्रिपल टेस्ट रिपोर्ट का बहाना?

    राज्य सरकार बार-बार निकाय चुनाव में देरी के लिए ‘ट्रिपल टेस्ट’ प्रक्रिया की अधूरी रिपोर्ट को जिम्मेदार ठहरा रही है। हालांकि कोर्ट ने इस पर भी सवाल उठाया है कि आखिर इतनी लंबी अवधि में प्रक्रिया पूरी क्यों नहीं की गई?

    अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी, जिसमें मुख्य सचिव के खिलाफ औपचारिक आरोप तय किए जा सकते हैं। अगर कोर्ट को सरकार का जवाब संतोषजनक नहीं लगा, तो यह मामला राज्य के लिए बड़ा संवैधानिक संकट बन सकता है।

  • राज्य मे जल्द निकाय चुनाव नहीं हुये तो झारखंड को 1500 करोड़ का हो सकता है नुकसान?

    वित्त आयोग की चेतावनी, चुनाव न कराने पर अटक सकती है केंद्र से झारखंड को मिलने वाली सहायता राशि !

    विशेष राज्य का दर्जा या विशेष पैकेज वित्त आयोग के दायरे में नहीं ।

    परवेज़ आलम.

    रांची:  झारखंड सरकार के लिए एक बड़ा अलर्ट आया है। 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया ने स्पष्ट शब्दों में कह दिया है कि यदि राज्य सरकार दिसंबर 2025 तक नगर निकाय और पंचायत चुनाव नहीं कराती है, तो केंद्र से मिलने वाली बकाया वित्तीय सहायता की राशि लैप्स हो सकती है। यह रकम कोई मामूली राशि नहीं, बल्कि लगभग 1500 करोड़ रुपये है।

    रांची के होटल रेडिसन ब्लू में मीडिया कर्मियों से मुखातिब होते हुये  डॉ. पनगढ़िया ने कहा कि चुनावों की गैर-हाजिरी में केंद्र से राशि जारी नहीं हो सकती, क्योंकि इसका वितरण संविधान और आयोग की गाइडलाइन से बंधा है। यदि तय समय-सीमा के भीतर स्थानीय निकाय चुनाव करवा दिए जाते हैं, तो झारखंड को पिछला बकाया भी मिल सकता है।

    विशेष राज्य का दर्जा नहीं देगा आयोग के अधिकार क्षेत्र से बाहर.  

    डॉ. पनगढ़िया ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि विशेष राज्य का दर्जा या विशेष पैकेज देना वित्त आयोग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। उन्होंने यह बात ऐसे समय पर कही, जब झारखंड सरकार की ओर से यह मांग की जा रही है कि राज्य को उसकी अनूठी परिस्थितियों और समस्याओं को देखते हुए अतिरिक्त सहायता दी जाए।

    उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा अनुदान की जो राशि मांगी जाती है, वह केंद्रीय बजट के जरिए सशर्त मिलती है, और इसके भुगतान में होने वाली देरी पर वित्त आयोग का कोई सीधा हस्तक्षेप नहीं होता।

    राज्य की कमजोर आर्थिक स्थिति पर चिंता, पर सराहना भी.

    डॉ. पनगढ़िया ने झारखंड के वित्तीय प्रबंधन की सराहना तो की, लेकिन साथ ही यह भी बताया कि राज्य अभी भी कई सामाजिक-आर्थिक मानकों पर पिछड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि झारखंड की प्रति व्यक्ति आय देश में तीसरे सबसे निचले पायदान पर है, जहां उत्तर प्रदेश पहले और बिहार दूसरे स्थान पर हैं।

    जीएसटी लागू होने से राजस्व में हुए नुकसान को झारखंड ने आयोग के समक्ष एक नई मांग के रूप में रखा है। राज्य सरकार ने इस नुकसान की भरपाई के लिए वित्तीय फॉर्मूले में बदलाव की अपील की है, जिसे आयोग ने केवल ‘प्रस्ताव‘ के रूप में नोट किया है। कोई भी निर्णय आयोग के निर्धारित फॉर्मूले के आधार पर ही लिया जाएगा।

    झारखंड ने रखी 3.03 लाख करोड़ की मांग, राज्य का पक्ष मजबूत.

    राज्य सरकार ने वित्त आयोग के सामने 2026 से 2031 तक के लिए 3,03,527.44 करोड़ रुपये की मांग रखी है। यह मांग राज्य के 23 विभागों के सुझावों के आधार पर तैयार की गई है। इसके अलावा, केंद्रीय करों में हिस्सेदारी को 41% से बढ़ाकर 55% करने की भी अपील की गई है।

    राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि जीएसटी क्षतिपूर्ति बंद होने से झारखंड को गंभीर नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि 2025-30 के बीच राजस्व में लगभग 61,677 करोड़ रुपये की हानि का अनुमान है।

    वित्त मंत्री ने पूर्ववर्ती 15वें वित्त आयोग का उदाहरण देते हुए कहा कि तब झारखंड ने 1.5 लाख करोड़ रुपये की मांग की थी, लेकिन सिर्फ 12,398 करोड़ रुपये ही मिले थे, जिससे विकास कार्यों पर प्रतिकूल असर पड़ा।

    प्राकृतिक संसाधनों वाला राज्य, लेकिन सड़कें नहीं.

    राज्य सरकार ने वन क्षेत्रों के आधार पर होने वाले राजस्व वितरण फार्मूले में संशोधन की मांग की है। उन्होंने कहा कि खुले वनों को भी सघन वनों की तरह गणना में लाया जाए। साथ ही झारखंड में 14.19 लाख हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई क्षमता विकसित करने के लिए भी अतिरिक्त सहायता मांगी गई है।

    राज्य के सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति भी चिंताजनक बताई गई। राष्ट्रीय औसत जहां 500 किमी प्रति 1000 वर्ग किमी है, वहीं झारखंड में यह मात्र 186 किमी है। खनिज संपदा से भरपूर राज्य होने के बावजूद खनिज ढुलाई के लिए पर्याप्त सड़क नेटवर्क नहीं है।

    बकाया राशि नहीं मिलने से योजनाएं प्रभावित.

    राज्य सरकार ने केंद्र से कुछ प्रमुख मदों में बकाया राशि की ओर भी ध्यान दिलाया:

    • कोयला कंपनियों से: ₹1.36 लाख करोड़
    • जल जीवन मिशन में: ₹5,235 करोड़
    • मनरेगा में: ₹1,300 करोड़

    राज्य सरकार का कहना है कि इन बकाया राशि के अभाव में कई विकास योजनाएं ठप पड़ी हैं।

    ‘भेदभाव नहीं हो‘, स्थानीय निकायों के लिए राशि जारी हो: नगर विकास मंत्री.

    नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने आयोग से आग्रह किया कि स्थानीय निकायों की राशि को रोका न जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि 20-25% राशि रोककर शेष राशि जारी की जा सकती है, ताकि स्थानीय विकास कार्य बाधित न हों।

    उन्होंने झारखंड की वास्तविक चुनौतियों — जैसे कि प्रदूषण, उग्रवाद, बेरोजगारी और विस्थापन — की ओर भी आयोग का ध्यान खींचा।

    31 अक्टूबर तक सौंप दी जाएगी अंतिम रिपोर्ट.

    वित्त आयोग की अंतिम रिपोर्ट 31 अक्टूबर 2025 तक राष्ट्रपति को सौंपी जाएगी। इस बीच आयोग ने झारखंड के पब्लिक सेक्टर उपक्रमों (PSUs) की वर्षों से लंबित ऑडिट रिपोर्टों पर भी चिंता जताई है। डॉ. पनगढ़िया ने इसे वित्तीय पारदर्शिता के लिए गंभीर खतरा बताया और राज्य सरकार को इस पर तत्काल कार्रवाई करने की सलाह दी।

    इस दौरे के दौरान वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, उत्पाद मंत्री योगेंद्र प्रसाद और पूर्व वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने विस्तृत ज्ञापन के जरिए आयोग के समक्ष झारखंड की जरूरतें और अपेक्षाएं रखीं।

    वित्त आयोग से अनुदान की मांग.

    बैठक के बाद मीडियाकर्मियों से बात करते हुए नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से तीन लाख तीन हजार करोड़ की मांग से संबंधित प्रतिवेदन सौंपी गई है. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य से लेकर शिक्षा एवं आधारभूत संरचना जो राज्य सरकार की प्राथमिकता में है उसको लेकर वित्त आयोग से अनुदान की मांग की गई है.

    सुदिव्य कुमार ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि भारत सरकार की यह संवैधानिक संस्था केंद्र सरकार के समक्ष सकारात्मक सोच के साथ हमारी मांग को पहुंचाने में मदद करेगा. उत्पादक राज्य होने के कारण झारखंड को होने वाले घाटे को भी वित्त आयोग के समक्ष प्रमुखता से रखा गया है और जो मांगे रखी गई है उसे आप विशेष पैकेज माने या अनुदान की राशि राज्य सरकार ने बड़े ही तर्कपूर्ण ढंग के साथ इसे रखा है. वित्त आयोग ने भी हमें भरोसा दिया है कि उनकी मांगों पर सकारात्मक रूप से विचार होगा.

  • पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने जमशेदपुर में स्काई डाइविंग फेस्टिवल 2025 का फ्लैग ऑफ कर किया शुभारंभ

    जमशेदपुर में स्काई डाइविंग फेस्टिवल 2025 का भव्य आगाज

    झारखंड पर्यटन विभाग के तत्वावधान में जमशेदपुर के सोनारी एयरपोर्ट पर स्काई डाइविंग फेस्टिवल 2025 का शानदार शुभारंभ हुआ। कला, संस्कृति, पर्यटन, खेलकूद एवं युवा मामले विभाग के मंत्री सुदिव्य कुमार ने फ्लैग ऑफ कर इस रोमांचक आयोजन की शुरुआत की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार पर्यटन और साहसिक खेलों के क्षेत्र में नए अवसर विकसित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

    झारखंड में पर्यटन की असीम संभावनाएं

    मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि झारखंड सिर्फ खनिज संपदा से समृद्ध नहीं है, बल्कि इसकी प्राकृतिक सुंदरता, जैव विविधता, ऐतिहासिक विरासत और धार्मिक स्थलों में भी अनगिनत संभावनाएं हैं। सरकार डीजीसीए के सुरक्षा मानकों और दिशानिर्देशों के अनुसार स्काई डाइविंग जैसी साहसिक गतिविधियों का आयोजन कर रही है। राज्य में धार्मिक, प्राकृतिक और एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए नए पर्यटन स्थलों की पहचान की जा रही है।

    पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा, युवाओं को रोजगार

    उन्होंने आगे बताया कि किरीबुरू में माइनिंग टूरिज्म, स्काई डाइविंग, मोटर/पैराग्लाइडिंग, रॉक क्लाइंबिंग जैसे एडवेंचर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने की योजना है। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे और झारखंड को पर्यटन के क्षेत्र में एक नई पहचान मिलेगी। नई पर्यटन नीति के तहत निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे राज्य का राजस्व भी बढ़ेगा।

    ऑनलाइन बुकिंग से जुड़ सकते हैं प्रतिभागी

    पर्यटन सचिव मनोज कुमार ने बताया कि यह फेस्टिवल 16 से 23 फरवरी 2025 तक चलेगा, जिसमें इच्छुक प्रतिभागी ऑनलाइन बुकिंग के माध्यम से शामिल हो सकते हैं। जमशेदपुर के उपायुक्त अनन्य मित्तल ने इस आयोजन को जिले के लिए गौरव का विषय बताया और कहा कि लोगों में इसे लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है।

    इस अवसर पर पर्यटन निदेशक अंजली यादव, वरीय पुलिस अधीक्षक कौशल किशोर, एडीएम अनिकेत सचान, अनुमंडल पदाधिकारी शताब्दी मजूमदार, सिटी एसपी कुमार शिवशीष समेत कई अधिकारी उपस्थित रहे।

  • झारखंड की बेटियों को मिला अपना आशियाना, सीएम हेमंत सोरेन ने निभाया वादा

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट ………………

    झारखंड की धरती से निकलीं, अपने हुनर से देश और दुनिया में नाम रौशन करने वाली हॉकी स्टार सलीमा टेटे और निक्की प्रधान को आखिरकार वह सौगात मिल गई, जिसका उन्हें वर्षों से इंतजार था। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को इन दोनों ओलंपियन खिलाड़ियों को रांची के हरमू आवासीय कॉलोनी में 3750 वर्ग फीट के भूखंड आवंटन के कागजात सौंपे। इसके साथ ही सरकार ने यह भी घोषणा की कि दोनों खिलाड़ियों को अपने घर के निर्माण के लिए 35-35 लाख रुपये भी दिए जाएंगे। इस मौके पर पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य मंत्री सुदिव्य कुमार भी उपस्थित थे ।

    झारखंड की बेटियों का सपना हुआ साकार।

    राज्य सरकार के इस फैसले के बाद सलीमा और निक्की का रांची में अपने घर का सपना अब हकीकत बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री ने हरमू आवासीय कॉलोनी के प्लॉट नंबर 10 (ए) और 10 (बी) में इन दोनों खिलाड़ियों को जमीन देने की घोषणा की। यह वही वादा था जो हेमंत सोरेन ने 2021 में किया था, जब निक्की प्रधान टोक्यो ओलंपिक में हिस्सा लेकर लौटी थीं।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा, “आज का दिन सिर्फ सलीमा और निक्की के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के लिए गर्व का दिन है। ये बेटियां राज्य की असली धरोहर हैं। इन्होंने साबित कर दिया कि अगर हौसला हो, तो झारखंड जैसी पिछड़ी समझी जाने वाली भूमि से भी वर्ल्ड क्लास खिलाड़ी निकल सकते हैं।”

    संघर्ष से सफलता तक की कहानी॰

    इस मौके पर एक ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति भी दिखाई गई, जिसमें सलीमा और निक्की की संघर्ष से सफलता तक की यात्रा को दिखाया गया। मुख्यमंत्री ने कहा, “जब मैं पहली बार इनके गांव गया था, तब इनके हालात देखे थे। उस दिन तय कर लिया था कि इन बेटियों को घर दूंगा। सरकार सिर्फ वादे नहीं करती, बल्कि उन्हें पूरा भी करती है।”

    सलीमा-निक्की ने जताया आभार.

    अपना सपना साकार होता देख सलीमा टेटे और निक्की प्रधान की खुशी का ठिकाना नहीं था। सलीमा ने कहा, “जब आप दिल से मेहनत करते हैं, तो मंजिल जरूर मिलती है।” वहीं, निक्की प्रधान ने मुख्यमंत्री का धन्यवाद करते हुए कहा, “आज हमारा सपना पूरा हो गया। 2021 में जब मुख्यमंत्री ने यह वादा किया था, तब हमें भरोसा था कि वह इसे निभाएंगे और आज वही दिन आ गया।”

    खेल और खिलाड़ियों के लिए सरकार का बड़ा कदम।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने झारखंड सरकार की नई खेल नीति पर भी जोर दिया और कहा कि राज्य के खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य सिर्फ वर्ल्ड-क्लास खिलाड़ी बनाना ही नहीं, बल्कि उन्हें वो सारी सुविधाएं देना है, जिसकी वे हकदार हैं।”

    इस कार्यक्रम में पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य मंत्री सुदिव्य कुमार, विधायक राजेश कच्छप, विधायक भूषण बाड़ा, मुख्य सचिव अलका तिवारी, नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे।

    झारखंड की बेटियों को उनका हक मिल गया। सलीमा और निक्की अब अपने घर का सपना पूरा कर पाएंगी। लेकिन यह सिर्फ दो खिलाड़ियों की कहानी नहीं है—यह संदेश है उन हजारों युवा खिलाड़ियों के लिए जो झारखंड की मिट्टी से निकलकर दुनिया में छा जाना चाहते हैं। झारखंड सरकार का यह कदम राज्य में खेल और खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने की दिशा में एक नई मिसाल बन सकता है।

     

  • झारखंड में जल्द शुरू होगा ट्राइबल और माइनिंग टूरिज्म

    झारखंड में जल्द शुरू होगा ट्राइबल टूरिज्म, माइनिंग टूरिज्म को भी मिलेगा बढ़ावा

    झारखंड में जल्द ही ‘ट्राइबल टूरिज्म’ की शुरुआत की जाएगी। राज्य के नगर विकास, पर्यटन और उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने बताया कि इस पहल का पहला केंद्र तमाड़ के अड़की से उलिहातू तक विकसित होगा। यहां पर्यटक भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली के साथ-साथ आदिवासी संस्कृति, उनके रहन-सहन और पारंपरिक खानपान का अनुभव भी कर सकेंगे।

    खनन पर्यटन पर भी रहेगा फोकस

    मंत्री ने यह भी बताया कि राज्य में ‘माइनिंग टूरिज्म’ शुरू करने की योजना है। इसके तहत सीसीएल और बीसीसीएल की कोयला खदानों को पर्यटकों के लिए खोला जाएगा, जहां वे ‘ओपन कास्ट माइंस’ का दौरा कर सकेंगे। इसके साथ ही धार्मिक और दर्शनीय स्थलों को जोड़ते हुए एक विशेष पर्यटन सर्किट तैयार किया जाएगा। हर 25 किलोमीटर पर एक विश्राम केंद्र बनाया जाएगा, जहां यात्रियों के लिए खान-पान और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इन स्थलों का प्रबंधन स्थानीय ग्राम और वन समितियों को सौंपा जाएगा, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय लोग पर्यटन से जुड़ सकेंगे।

    प्रमुख पर्यटन स्थलों का होगा विकास

    राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। नेतरहाट के कोयल व्यू प्वाइंट पर ग्लास टावर और अन्य लोकप्रिय स्थलों जैसे दशम फॉल, जोन्हा फॉल, मैगनोलिया प्वाइंट और पतरातू वैली में ग्लास ब्रिज बनाए जाएंगे। इसके अलावा मसानजोर, गेतलसूद, पतरातु, चांडिल, तेनुघट और तिलैया डैम में पर्यटकों के लिए सुविधाएं बेहतर की जाएंगी। ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण पर भी ध्यान दिया जाएगा। पलामू किले के जीर्णोद्धार के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को पत्र लिखा जाएगा, जबकि हजारीबाग के मेगालिथ स्थल का भी विकास किया जाएगा।

    स्पेन से सीखने जाएगी झारखंड की टीम

    झारखंड के पर्यटन क्षेत्र को नई ऊंचाई देने के लिए मंत्री सुदिव्य कुमार और उनकी टीम स्पेन के मैड्रिड में 22-26 जनवरी तक आयोजित अंतरराष्ट्रीय पर्यटन ट्रेड फेयर (FITUR) में भाग ले रही है। इस टीम में पर्यटन सचिव मनोज कुमार, निदेशक अंजिल यादव और उपनिदेशक राजीव कुमार सिंह शामिल हैं। मंत्री 24-25 जनवरी को वापस लौटेंगे, जबकि अन्य अधिकारी 28 जनवरी को झारखंड आएंगे।

    झारखंड में ये नई पर्यटन योजनाएं राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार के अवसर भी प्रदान करेंगी।

  • सम्मेद शिखर: जंगल सफारी योजना का विरोध, जैन समाज नाराज

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट ………..

    गिरिडीह:  सम्मेद शिखर में जंगल सफारी बनाने के झारखंड सरकार के फैसले से जैन समाज में गहरी नाराज़गी है। सम्मेद शिखर जैन धर्म का एक अत्यंत पवित्र स्थल है, जहां 20 तीर्थंकरों को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। जैन समुदाय का मानना है कि जंगल सफारी जैसी मनोरंजन गतिविधियों से इस पवित्र स्थल की गरिमा और शांति भंग होगी।

    जैन समाज ने झारखंड सरकार के इस फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया  है। जैन समाज के लोगों का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकार पहले ही इस स्थल को पवित्र तीर्थस्थल घोषित कर चुकी हैं, और ऐसे में जंगल सफारी शुरू करना तीर्थस्थल का अपमान होगा।

    “पवित्रता से समझौता नामंज़ूर “
    जैन धर्म संगठनों का मानना है कि सम्मेद शिखर जैसे पवित्र स्थल पर मौज-मस्ती की कोई भी गतिविधि अनुचित है। जैन समाज ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने जंगल सफारी की योजना को वापस नहीं लिया, तो  देशव्यापी आंदोलन होगा । यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन के दौरान जो भी स्थिति बनेगी, उसकी पूरी जिम्मेदारी झारखंड और केंद्र सरकार की होगी।

    पर्यटन क्षेत्र को लेकर पहले भी हुआ था विवाद।
    यह पहली बार नहीं है जब पारसनाथ क्षेत्र को लेकर विवाद हुआ हो। दो साल पहले इस क्षेत्र को पर्यटन क्षेत्र घोषित करने की कोशिश की गई थी, जिसका भी जैन समाज ने पुरजोर विरोध किया था। समुदाय का कहना है कि पर्यटन क्षेत्र बनने से मांस-मदिरा जैसे अनुचित कार्य शुरू हो सकते हैं, जिससे तीर्थस्थल की पवित्रता नष्ट होगी। हालांकि, सरकार ने इस क्षेत्र को पहले ही मांस-मदिरा निषेध क्षेत्र घोषित कर दिया है।
    बताया गया है कि 2018 में झारखंड सरकार ने पारसनाथ पर्वत को जैन समाज का पवित्र तीर्थ स्थल घोषित किया था, जबकि भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने 5 जनवरी 2023 को इसे पुनः पवित्र तीर्थ स्थल के रूप में मान्यता दी थी।

    जैन समाज का संदेश साफ है—सम्मेद शिखर जैसे पवित्र स्थल की गरिमा और शांति बनाए रखना ही उनकी प्राथमिकता है। उनका यह आंदोलन उस विरासत और श्रद्धा को बचाने के लिए है, जो इस तीर्थस्थल के साथ गहराई से जुड़ी हुई है।

     

  • तोपचांची झील बनेगा झारखंड का प्रमुख पर्यटन केंद्र, 76 करोड़ की आएगी लागत -मंत्री सुदिव्य कुमार

    धनबाद: झारखंड के धनबाद जिले में स्थित ऐतिहासिक तोपचांची झील जल्द ही आधुनिक पर्यटन स्थल के रूप में चमकेगी। नगर विकास एवं पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार ने शनिवार को झील का निरीक्षण करते हुए इसकी नई परियोजना का खुलासा किया। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत झील का कायाकल्प करने के लिए 76 करोड़ रुपये की लागत निर्धारित की गई है, जो बढ़कर 100 करोड़ रुपये तक जा सकती है।

    झील को मिलेगी नई पहचान।
    झील को टूरिस्ट प्लेस के रूप में विकसित करने के लिए विस्तृत ब्लू प्रिंट तैयार कर लिया गया है। मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू  ने बताया कि परियोजना में आधुनिक स्ट्रीट लाइट, रिसॉर्ट, स्विमिंग पूल, और पर्यटकों के रहने के लिए उत्कृष्ट सुविधाएं शामिल होंगी। इसके साथ ही झील के चारों ओर थीम पार्क, वोटिंग और स्विमिंग जैसी आकर्षक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।

    पुराने ढांचे को तोड़कर बनेगा नया निर्माण। 
    झील के आसपास के पुराने और जर्जर भवनों को तोड़कर नए निर्माण किए जाएंगे। परियोजना से जुड़े इंजीनियरों ने मंत्री को विस्तार से बताया कि झील के चारों ओर के इलाकों को कैसे विकसित किया जाएगा। मंत्री ने लगभग एक घंटे तक ब्लू प्रिंट का निरीक्षण किया और आवश्यक निर्देश दिए।

    पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए खास। 
    मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू  ने कहा, “तोपचांची झील की प्राकृतिक सुंदरता पहले से ही आकर्षक है। इसे आधुनिक सुविधाओं से लैस कर पर्यटकों के लिए और भी आकर्षक बनाया जाएगा। इस परियोजना के तहत स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।”

    नए साल में शिलान्यास और काम की शुरुआत। 
    तोपचांची झील परियोजना को लेकर स्थानीय विधायक मथुरा प्रसाद महतो ने कहा, “नए साल में इसका शिलान्यास होगा और कार्य तेज़ी से शुरू किए जाएंगे। यह परियोजना न केवल झील की खूबसूरती को बढ़ाएगी, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक विकास में भी अहम भूमिका निभाएगी।”

    सरकार की बड़ी योजना। 
    मंत्री ने आश्वासन दिया कि तीन महीने के भीतर सरकार इस परियोजना पर काम शुरू करेगी। तोपचांची झील के कायाकल्प से झारखंड को एक नया पर्यटन केंद्र मिलेगा, जो राज्य की पर्यटन संभावनाओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

    झील का यह विकास न केवल पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा, बल्कि झारखंड के इतिहास और प्राकृतिक सुंदरता को भी जीवंत बनाएगा।