पहली बार शुरू होगा माइनिंग टूरिज्म.
By: परवेज़ आलम.
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रांची : झारखंड सरकार ने देश में पहली बार एक अनोखी और साहसिक पहल की शुरुआत की है। अब तक बंद दरवाज़ों के पीछे रही खदानों की दुनिया आम जनता के लिए खोली जा रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुवाई में राज्य ने माइनिंग टूरिज्म (खनन पर्यटन) की शुरुआत की है, जो न सिर्फ राज्य की औद्योगिक पहचान को मजबूत करेगा, बल्कि पर्यटन क्षेत्र को भी नया आयाम देगा।
खनन क्षेत्र अब बनेगा दर्शनीय स्थल.
इस योजना के तहत राज्य सरकार और कोल इंडिया लिमिटेड की अनुषंगी कंपनी सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) के बीच एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह साझेदारी झारखंड पर्यटन विकास निगम (JTDC) और CCL के बीच हुई है। प्रारंभिक तौर पर यह परियोजना उत्तर उरीमारी खदान (North Urimari Mines) से शुरू की जाएगी।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि इस पहल से लोगों को खदानों की कार्यप्रणाली, खनिज संपदा और श्रमिकों की मेहनत को नजदीक से देखने और समझने का मौका मिलेगा। उन्होंने यह फैसला हाल ही में स्पेन के गावा संग्रहालय के दौरे के बाद लिया, जहां उन्होंने प्राचीन खनन तकनीकों को देखा और उनसे प्रेरित हुए।
क्या होगा इस खनन पर्यटन में खास.
- पर्यटन संचालन: JTDC पर्यटकों की ऑनलाइन बुकिंग करेगा। सप्ताह में दो दिन पर्यटन की सुविधा मिलेगी। प्रत्येक ग्रुप में 10 से 20 पर्यटक शामिल हो सकेंगे।
- सुरक्षा और निर्देश: पर्यटकों को खदान में प्रवेश से पहले CCL के सुरक्षा प्रोटोकॉल और स्वास्थ्य मानकों का पालन करना होगा। अंतिम अनुमति CCL द्वारा दी जाएगी।
- गाइड सुविधा: CCL खदान की कार्यशैली, तकनीकी प्रक्रिया और सुरक्षा उपायों को समझाने के लिए प्रशिक्षित गाइड उपलब्ध कराएगा।
- समझौते की अवधि: यह MoU पांच वर्षों के लिए लागू रहेगा, जिसे आगे पांच साल और बढ़ाया जा सकता है।
- विस्तार की योजना: भविष्य में अन्य खदानों को भी इस पर्यटन सर्किट में जोड़ा जाएगा।

खान पर्यटन के पीछे सरकार का मकसद.
पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा, “झारखंड खनन राज्य के रूप में जाना जाता है। अब हम उस पहचान को एक नए रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। खनन पर्यटन आम जनता, छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए एक ज्ञानवर्धक अनुभव बनेगा। इससे न केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी बल्कि राज्य की औद्योगिक विरासत और ऊर्जा इतिहास को भी वैश्विक मंच पर पहचान मिलेगी।”
उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में सरकार भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) के साथ मिलकर एक और माइनिंग टूरिज्म ज़ोन विकसित करने की योजना पर काम कर रही है।
समारोह में बड़ी भागीदारी.
इस ऐतिहासिक अवसर पर CCL के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर निलेंदु कुमार सिंह, JTDC के एमडी प्रेम रंजन, पर्यटन निदेशक विजया जाधव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए सरकार और CCL के बीच तीन दौर की मैराथन बैठकें हुईं, जिसके बाद यह समझौता साकार हुआ।
राज्य को मिलेंगे बहुआयामी लाभ.
झारखंड खनिज संसाधनों से भरपूर राज्य है। देश के कुल खनिज भंडार का करीब 40% हिस्सा यहीं स्थित है। ऐसे में यह पहल राज्य को सिर्फ पर्यटन के क्षेत्र में ही नहीं, शिक्षा, रोजगार, सांस्कृतिक धरोहर और उद्योग के क्षेत्र में भी लाभ पहुंचाएगी।
माइनिंग टूरिज्म के जरिए झारखंड अब सिर्फ ‘खनन राज्य’ नहीं, बल्कि ‘टूरिस्ट फ्रेंडली खनन राज्य’ बनने की ओर बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी सरकार का यह कदम देशभर में अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।
अगर आप रहस्यमयी खदानों की दुनिया को नजदीक से देखना चाहते हैं, तो झारखंड अब आपके स्वागत के लिए तैयार है।







