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  • झारखंड कांग्रेस को राहुल गांधी की सख्त हिदायत, जनहित पर मुखर रहें

    –कार्यकर्ताओं का सम्मान करें, गठबंधन में सामंजस्य बनाए रखें

    परवेज आलम

    For The News Post4u.

    RANCHI : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कांग्रेस पार्टी को झारखंड में नई दिशा देने के मकसद से नई  दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक की , जिसमें झारखंड के सभी कांग्रेस विधायक और सभी  मंत्री  शामिल हुये ।  इस बैठक को कांग्रेस की राज्य इकाई में संगठनात्मक मजबूती और गठबंधन सरकार में प्रभावशाली भूमिका सुनिश्चित करने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।

    जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता, भाजपा को मौका न देने की सलाह.

    बैठक की शुरुआत में राहुल गांधी ने स्पष्ट तौर पर कहा कि झारखंड के कांग्रेसी नेता जनता से जुड़े मुद्दों पर आक्रामक और सक्रिय रुख अपनाएं। उन्होंने कहा कि पेसा कानून, ओबीसी आरक्षण और सरना धर्म कोड जैसे संवेदनशील मसलों पर कांग्रेस को स्पष्ट और मज़बूत रुख दिखाना होगा, ताकि भाजपा को जनता के बीच जगह बनाने का कोई मौका न मिले।

    उन्होंने यह भी चेताया कि अगर कांग्रेस जनहित से जुड़ी आवाजें नहीं उठाएगी, तो भाजपा इन मुद्दों को हथियाने की कोशिश करेगी, जो पार्टी की राजनीतिक स्थिति को कमजोर कर सकता है।

    विधायकों को विधानसभा में सक्रियता और जनता से जुड़ाव का निर्देश.

    राहुल ने साफ शब्दों में कहा कि विधायक पहले जनता के प्रतिनिधि हैं, फिर मंत्री। इसलिए उन्हें अपनी विधानसभा में सक्रिय रहकर लोगों की समस्याओं को सीधे सुनना और समाधान के लिए प्रयास करना चाहिए। उन्होंने विधायकों को निर्देश दिया कि वे विधानसभा में मजबूती से अपनी बात रखें और सरकार की योजनाओं को सही तरीके से जनता तक पहुंचाएं।

    गठबंधन धर्म का पालन और झामुमो के साथ समन्वय पर जोर.

    बैठक में राहुल गांधी ने खास तौर पर गठबंधन सहयोगी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के साथ बेहतर तालमेल बनाए रखने की बात कही। उन्होंने नेताओं से कहा कि कांग्रेस को गठबंधन धर्म का सम्मान करते हुए झामुमो के साथ किसी भी प्रकार की टकराव या टकराहट से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे जनता के बीच संयुक्त सरकार की सकारात्मक छवि बनती है।

    संगठनात्मक मजबूती और कार्यकर्ताओं की भूमिका को बताया केंद्रीय बिंदु.

    राहुल गांधी ने इस बात पर भी जोर दिया कि पार्टी के स्थानीय संगठनों को सक्रिय और सशक्त किया जाए। उन्होंने मंत्रियों और विधायकों को निर्देश दिया कि वे पार्टी कार्यकर्ताओं का सम्मान करें, नियमित संवाद रखें और उनकी समस्याओं को प्राथमिकता दें।

    उन्होंने कहा, “कार्यकर्ता ही पार्टी की रीढ़ होते हैं। यदि कार्यकर्ता उत्साहित और संलग्न रहेंगे तो चुनावी सफलता भी सुनिश्चित होगी।” उन्होंने आगामी निकाय चुनावों की तैयारी में कार्यकर्ताओं की भूमिका को केंद्रीय बताया।

    भाजपा की आलोचना और कांग्रेस की वैकल्पिक भूमिका पर बल.

    राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा आमजन से जुड़े मुद्दों को दबाने का प्रयास करती है, लेकिन कांग्रेस को चाहिए कि वह इन मुद्दों को मजबूती से उठाकर जनता के बीच खुद को उनका सच्चा प्रतिनिधि साबित करे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को झारखंड में एक प्रभावशाली और जनहितैषी की भूमिका निभानी होगी, भले ही वह सत्ता का हिस्सा हो।

    प्रदेश अध्यक्ष से असंतोष पर राहुल की समझदारी भरी सलाह.

    बैठक के दौरान कुछ विधायकों ने झारखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ अपनी असहमति भी जाहिर की, जिस पर राहुल गांधी ने नेताओं से सुलह और सामंजस्य की नीति अपनाने को कहा। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत मतभेद संगठन की एकता को प्रभावित न करें।

    रणनीतिक संदेश और भविष्य की तैयारी.

    इस उच्चस्तरीय बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी मौजूद रहे। उन्होंने झारखंड में पार्टी की वर्तमान स्थिति और गठबंधन सरकार के प्रदर्शन की समीक्षा की।

    बैठक मे  राहुल गांधी ने सभी विधायकों और मंत्रियों से कहा कि वे एकजुटता, प्रतिबद्धता और जनसेवा की भावना के साथ काम करें। उन्होंने कहा कि यही समय है जब कांग्रेस को झारखंड में अपनी ताकत को फिर से स्थापित करना है ।

    राहुल गांधी की यह बैठक झारखंड कांग्रेस के लिए एक नई रणनीतिक दिशा, संगठनात्मक पुनर्गठन और गठबंधन धर्म के प्रति प्रतिबद्धता का स्पष्ट संकेत है। यह पहल आगामी चुनावों और राजनीतिक समीकरणों के मद्देनजर कांग्रेस के लिए एक फोकस्ड रोडमैप की तरह काम करेगी।

     

  • बिहार चुनाव 2025: झामुमो की राजनीतिक बिसात, 12 सीटों पर दावा!

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट……………..

    झारखंड की सियासी सरगर्मी अब बिहार की ओर बढ़ रही है। साल 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही राजनीतिक बिसात बिछने लगी है। इस बार झामुमो (झारखंड मुक्ति मोर्चा) भी पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरने को तैयार है। पार्टी ने 12 विधानसभा सीटों पर दावा ठोक दिया है, और यह मांग सीधे  महागठबंधन (राजद-कांग्रेस) से की गई है।

    झामुमो का तर्क: सीमावर्ती जिलों में मजबूत पकड़। 
    सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, झामुमो ने अपनी दावेदारी पर बड़ा तर्क दिया है—बिहार के सीमावर्ती जिलों में उनका मजबूत जनाधार है। पहले भी पार्टी के विधायक इन इलाकों से चुने जा चुके हैं। जिन सीटों पर झामुमो की नजर है, उनमें शामिल हैं:

    • तारापुर, कटोरिया, मनिहारी, झाझा, बांका, ठाकुरगंज
    • रूपौली, रामपुर, बनमनखी, जमालपुर, पीरपैंती, चकाई

    झामुमो का मास्टरप्लान।
    पार्टी के नेताओं का कहना है कि इन 12 सीटों पर उनके पास न सिर्फ मजबूत कार्यकर्ता आधार है, बल्कि जीतने वाले प्रत्याशी भी तैयार हैं। जल्द ही झामुमो, राजद, और कांग्रेस की महागठबंधन बैठक में यह मांग रखने की तैयारी है।

    2020 का सबक और 2025 की उम्मीद। 
    गौरतलब है कि 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में झामुमो ने अकेले चुनाव लड़ने का दांव खेला था। लेकिन यह कदम कामयाब नहीं हो सका। इस बार झामुमो को उम्मीद है कि झारखंड की तरह बिहार में भी महागठबंधन सीटों का बंटवारा उसी अंदाज में करेगा।

    क्या कहती है राजनीति?
    बिहार में झामुमो का दांव क्या रंग लाएगा?

    • राजद और कांग्रेस को सीट बंटवारे में झामुमो की मांग माननी होगी या सियासी घमासान बढ़ेगा?
    • सीमावर्ती जिलों में झामुमो के दावे को कितना समर्थन मिलेगा?

    , बिहार की सियासत एक बार फिर गरमाने को तैयार है। झारखंड का झामुमो बिहार में कितनी जगह बना पाएगा, यह देखने वाली बात होगी। लेकिन राजनीति का एक नियम तो तय है—जितनी बड़ी रणनीति, उतना बड़ा खेल!

  • शांति वन में मनमोहन सिंह का होगा अंतिम संस्कार

    नई दिल्ली: शनिवार की सुबह शांति वन में जब देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अंतिम विदाई दी जाएगी, तो यह सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि एक युग का अंत होगा। वह युग, जिसने भारत को आर्थिक उदारीकरण के रास्ते पर आगे बढ़ाया। सुबह 8 बजे उनके पार्थिव शरीर को उनके सरकारी आवास से कांग्रेस मुख्यालय लाया जाएगा। यहाँ पार्टी के नेता और उनके चाहने वाले उन्हें अंतिम विदाई देंगे। यह अंतिम यात्रा महज एक रस्म नहीं है। यह वह पल है जब कांग्रेस पार्टी के इतिहास को दोबारा लिखा जा रहा है।

    गांधी परिवार से परे मनमोहन सिंह की स्मृति पर जोर. 
    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर यमुना किनारे एक स्थायी स्मारक के लिए जगह मांगी। यह स्मारक उस शख्स के लिए होगा जिसने भारत की आवाज को वैश्विक मंच पर एक नई पहचान दी।

    प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल की रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से बातचीत, खरगे की चिट्ठी और सोनिया-राहुल गांधी का हर पल मनमोहन सिंह के परिवार के साथ खड़ा रहना—ये सब एक बात को स्पष्ट करते हैं: कांग्रेस इस बार कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती।

    शांति वन: जहां इतिहास खुद को दोहराता है. 
    करना अपने आप में प्रतीकात्मक है। यह वही जगह है, जहां देश के अन्य पूर्व प्रधानमंत्रियों को अंतिम विदाई दी गई। लेकिन सवाल यह है कि क्या इस स्मारक की राजनीति मनमोहन सिंह की यादों के साथ न्याय कर पाएगी?

    एक पत्र, एक स्मृति, और ओबामा का कथन. 
    खरगे के पत्र में एक खास बात थी: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा का वह बयान, जिसमें उन्होंने कहा था, “जब भारत के प्रधानमंत्री बोलते हैं, तो पूरी दुनिया सुनती है।” यह वाक्य न सिर्फ मनमोहन सिंह की गरिमा को दर्शाता है, बल्कि यह भी कि एक साधारण परिवार से आए व्यक्ति ने वैश्विक स्तर पर भारत का कद कैसे बढ़ाया।

    गांधी परिवार की छाया से बाहर निकलने की कोशिश?
    नरसिम्हा राव के समय हुई चूक को लेकर आलोचनाएं कांग्रेस को अब भी घेरती हैं। ऐसे में मनमोहन सिंह के मामले में पार्टी इस बार सतर्क दिख रही है। उनके पार्थिव शरीर को कांग्रेस मुख्यालय लाना और सम्मानपूर्वक अंतिम यात्रा निकालना, इन सबके पीछे एक राजनीतिक संदेश भी है। शनिवार को जब शांति वन में मनमोहन सिंह को अंतिम विदाई दी जाएगी, तब यह सिर्फ एक श्रद्धांजलि नहीं होगी। यह वह पल होगा जब कांग्रेस पार्टी अपनी संवेदनशीलता और राजनीतिक सोच का प्रदर्शन करेगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह स्मारक और यह यात्रा इतिहास में कैसे दर्ज होती है।

  • झारखंड: कौन मंत्री बनेगा ? काँग्रेस मे सियासी गहमागहमी

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …..
    झारखंड में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर दिल्ली में कांग्रेस की सियासी गहमागहमी चरम पर है। सोमवार को दिल्ली मे प्रदेश प्रभारी गुलाम अहमद मीर और प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने राहुल गांधी से मुलाकात की। चर्चाओं का बाजार गर्म है—कौन मंत्री बनेगा और किसे इंतजार करना पड़ेगा? अब कांग्रेस आलाकमान के पास झारखंड से आए संभावित नामों की सूची है। सूत्रों की मानें, तो शाम तक चार नामों पर मुहर लगने की संभावना है।
    कांग्रेस का मंत्रिमंडल—सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन पर जोर।
    झारखंड में मंत्रिमंडल विस्तार का खाका खींचा जा रहा है। कांग्रेस के सूत्र बता रहे हैं कि प्रमंडल और सामाजिक समीकरणों को केंद्र में रखा गया है। हर प्रमंडल से प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही, जातीय समीकरण को साधते हुए आदिवासी, ओबीसी, अल्पसंख्यक, और अगड़ी जाति को बराबर तरजीह मिलेगी।
    गुलाम अहमद मीर कहते हैं, “कैबिनेट विस्तार की तिथि तय करना मुख्यमंत्री का अधिकार है। कांग्रेस पूरी तरह तैयार है। जैसे ही तारीख तय होगी, हम अपनी सूची सौंप देंगे।” वहीं प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश का भी यही कहना है कि विधानसभा सत्र से पहले मंत्रिमंडल का विस्तार हो जाएगा।
    दिल्ली में फैसले की घड़ी। 
    झारखंड कांग्रेस की टीम ने आलाकमान से मुलाकात की है । मीर और कमलेश ने मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, और केसी वेणुगोपाल से एक-एक कर भेंट की। इस दौरान विधानसभा चुनाव के प्रदर्शन का ब्यौरा दिया गया। 16 सीटों पर कांग्रेस की जीत और 14 सीटों पर हार के कारणों की रिपोर्ट भी सौंपी गई।
    इंडिया गठबंधन की जीत और कांग्रेस की उम्मीदें।
    झारखंड विधानसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन ने बहुमत हासिल किया। झामुमो के खाते में 34 सीटें आईं, जबकि कांग्रेस ने 16 सीटों पर जीत दर्ज की। अब कांग्रेस ने 4:1 के फॉर्मूले के तहत चार विधायकों पर एक मंत्री पद की मांग रखी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शपथ तो ले ली है, लेकिन कांग्रेस की नजर अब मंत्री पद पर है।

  • संगठन में ऊपर से नीचे तक बदलाव की जरूरत:खड़गे

    नई दिल्ली से विशेष रिपोर्ट…..

    कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक ने पार्टी के अंदर एक बड़ा मंथन छेड़ दिया। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के तीखे और सटीक बयानों ने नेताओं को आत्ममंथन पर मजबूर कर दिया। इस बैठक में प्रियंका गांधी समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। खड़गे ने अपनी बात को पांच मुख्य बिंदुओं में समेटा और पार्टी को अनुशासन, बदलाव, और रणनीति में सुधार की नसीहत दी।

    खड़गे की 5 बड़ी बातें
    1. संगठन में ऊपर से नीचे तक बदलाव की जरूरत
    खड़गे ने कहा, “राज्य चुनावों में उम्मीद से कम प्रदर्शन हमारे लिए चुनौती है। पार्टी नेताओं में एकता की कमी और एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी हमें नुकसान पहुंचा रही है।”
    उन्होंने सख्त अनुशासन की मांग करते हुए कहा कि पार्टी को “जमीनी स्तर से लेकर AICC तक बदलाव लाने होंगे।”

    2. माहौल पक्ष में होना, जीत की गारंटी नहीं
    खड़गे ने साफ कहा कि चुनाव का माहौल कांग्रेस के पक्ष में दिखता है, लेकिन सिर्फ इससे जीत तय नहीं होती। “हमें टाइम बाउंड रणनीति बनानी होगी और मतदाता सूचियों की जांच जैसे काम चुनाव से एक साल पहले ही पूरे करने होंगे,” उन्होंने जोड़ा।

    3. चुनाव रणनीति में सुधार की दरकार
    महाराष्ट्र के नतीजों को लेकर खड़गे ने कहा, “MVA के लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद विधानसभा के परिणाम चौंकाने वाले हैं। हमें अपनी रणनीति में सुधार करना होगा।”
    उन्होंने जोर दिया कि “दुष्प्रचार और गलत सूचना का मुकाबला करने के ठोस तरीके विकसित करने होंगे।”

    4. सत्ता में आना कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण
    खड़गे ने कहा कि कांग्रेस का सत्ता में आना न केवल पार्टी के लिए, बल्कि देश के एजेंडे को लागू करने के लिए भी जरूरी है। उन्होंने विधानसभा चुनाव के खराब प्रदर्शन को लेकर चेताया कि “हमें कड़े कदम उठाने होंगे।”

    5. मणिपुर से संभल तक गंभीर मुद्दे
    खड़गे ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि “मणिपुर से लेकर संभल तक कई गंभीर मुद्दे हैं। बीजेपी अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए धार्मिक मुद्दों को हवा दे रही है। हमें इन विभाजनकारी ताकतों को हर हाल में हराना होगा।”

    महाराष्ट्र चुनाव पर कांग्रेस का ऐतराज
    कांग्रेस ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में कथित धांधली का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग को पत्र लिखा है।

    कांग्रेस ने इन मुद्दों को उठाया:
    वोटर्स की हेराफेरी:
    कांग्रेस ने दावा किया कि “जुलाई से नवंबर 2024 के बीच महाराष्ट्र में 47 लाख नए वोटर्स जोड़े गए।” इनमें से अधिकांश 50 विधानसभा सीटों पर जोड़े गए, जहां 47 सीटें सत्ताधारी गठबंधन ने जीतीं।

    वोटिंग प्रतिशत में संदिग्ध बढ़ोतरी:
    “21 नवंबर को शाम 5 बजे तक वोटिंग प्रतिशत 58.22% था, जो रात 11:30 बजे 65.02% हो गया।” कांग्रेस ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक घंटे में 76 लाख वोट कैसे डाले गए?

    खड़गे का संदेश:
    खड़गे के इन बयानों और कांग्रेस की आपत्ति से एक बात साफ है—पार्टी अब न तो अनुशासनहीनता बर्दाश्त करेगी, न ही रणनीति में ढील।

  • झारखंड की राजनीति में नया पेंच: कांग्रेस की ‘चार विधायकों पर एक मंत्री’

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट……
    झारखंड की सत्ता की गोटियां बिछ रही हैं और कांग्रेस ने पुराना पत्ता फेंका है—चार विधायकों पर एक मंत्री का फॉर्मूला। 2019 में इस फॉर्मूले ने कांग्रेस को चार मंत्री पद दिलवाए थे, जब उसके पास 16 विधायक थे। हेमंत सोरेन की अगुवाई वाली सरकार में तब जेएमएम के 30 विधायक थे, और पार्टी ने मुख्यमंत्री समेत सात मंत्री पद अपने हिस्से किए थे। आरजेडी को एक मंत्री पद मिला था।

    अब क्या बदला?
    इस बार कांग्रेस के पास फिर से 16 विधायक हैं, लेकिन पेंच यह है कि इंडिया ब्लॉक के कुल विधायकों की संख्या 56 है। कांग्रेस के फॉर्मूले से 14 मंत्रियों की गुंजाइश बनती है, लेकिन कानून कहता है कि झारखंड विधानसभा (81 सीटें) में मंत्रियों की संख्या 12 से अधिक नहीं हो सकती। इसमें मुख्यमंत्री भी शामिल हैं।

    फिर क्यों कर रही है कांग्रेस ये डिमांड?
    साफ है, बार्गेनिंग पावर कमजोर हुई है। 2019 में जेएमएम को सरकार बनाने के लिए कांग्रेस के 11 विधायकों की जरूरत थी। इस बार जेएमएम को केवल सात विधायकों का सहारा चाहिए। ऐसे में कांग्रेस का पुराना फॉर्मूला प्रैक्टिकल तो नहीं, लेकिन दांवपेंच का हिस्सा जरूर है।

    लेफ्ट का खेल और आरजेडी की चुनौती
    इस बार लेफ्ट भी गठबंधन का हिस्सा है। कोयलांचल और संथाल में लेफ्ट का जनाधार मजबूत है, और लोकसभा चुनाव से पहले हेमंत सोरेन ने उसे साथ लाने की पहल की थी। ऐसे में लेफ्ट को नज़रअंदाज़ करना मुश्किल होगा। आरजेडी भी एक मंत्री पद की उम्मीद लगाए बैठा है।

    नंबर गेम और गठबंधन की सियासत
    जेएमएम की स्थिति मजबूत है। कांग्रेस को दरकिनार कर भी गठबंधन 40 के आंकड़े पर पहुंच रहा है, जो बहुमत से महज एक कम है। ऐसे में कांग्रेस का दबाव बनाना स्वाभाविक है, लेकिन इस बार उसकी बात कितनी सुनी जाएगी, यह कहना मुश्किल है।

    क्या होगा आगे?
    हेमंत सोरेन की सरकार के लिए मंत्रीमंडल का संतुलन साधना बड़ी चुनौती है। क्या कांग्रेस अपने फॉर्मूले पर अड़ी रहेगी? क्या लेफ्ट को मंत्री पद मिलेगा? और आरजेडी कहां खड़ा होगा? जवाब आने वाले दिनों में झारखंड की सियासत तय करेगी।