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  • दिशोम गुरु शिबू सोरेन का सरकारी आवास बनेगा स्मृति संग्रहालय

    दिशोम गुरु शिबू सोरेन का सरकारी आवास बनेगा स्मृति संग्रहालय

    गुरु जी की स्मृतियों को संजोने की ऐतिहासिक पहल.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    रांची : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और दिशोम गुरु शिबू सोरेन की विरासत को संरक्षित और नई पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मोरहाबादी स्थित गुरुजी का सरकारी आवास अब “गुरुजी स्मृति संग्रहालय” के रूप में विकसित किया जाएगा। यह फैसला मंगलवार को हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में लिया गया।

    बैठक में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के समक्ष यह प्रस्ताव रखा। डॉ. अंसारी ने कहा, “गुरुजी का आवास सिर्फ ईंट-पत्थर की इमारत नहीं है, बल्कि यह झारखंड आंदोलन और राज्य की आत्मा का केंद्र है। यहां की हर वस्तु, हर दस्तावेज, हर स्मृति हमें उनके संघर्ष और बलिदान की याद दिलाती है। इसलिए इसे संग्रहालय के रूप में विकसित करना आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनकी विचारधारा और जीवन दर्शन से प्रेरणा ले सकें।”

    मंत्री सुदिव्य कुमार ने भी इसे झारखंड की अस्मिता को सहेजने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि गुरुजी का योगदान अमिट है और उनकी स्मृतियां हमेशा अमर रहेंगी। यह संग्रहालय झारखंड की लड़ाई, उसकी सांस्कृतिक धरोहर और सामाजिक संघर्ष की गाथा को जीवित रखेगा।

    सिर्फ इतना ही नहीं, दोनों मंत्रियों ने गुरुजी की जन्मभूमि जामताड़ा के चिरुडीह गांव में भी एक भव्य पार्क और विशाल प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। चिरुडीह वही पवित्र भूमि है, जहां से शिबू सोरेन ने अपनी राजनीतिक और सामाजिक लड़ाई की शुरुआत की थी।

    राज्य सरकार का यह निर्णय न सिर्फ शिबू सोरेन के प्रति सम्मान का प्रतीक है, बल्कि झारखंड की संघर्ष यात्रा को पीढ़ी दर पीढ़ी जीवित रखने का भी संकल्प है।

  • कोयला खनन के बाद जमीन रयैत को वापस हो- हेमंत सोरेन

    कोयला खनन के बाद जमीन रयैत को वापस हो- हेमंत सोरेन

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क

    रांची : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को झारखंड विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कक्ष में केंद्रीय कोयला राज्यमंत्री सतीश चंद्र दुबे के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। इस बैठक में कोयला खनन से जुड़े विभिन्न मुद्दों जैसे पर्यावरणीय संतुलन, स्थानीय युवाओं को रोजगार, खनन क्षेत्रों का सतत विकास और राज्य सरकार को मिलने वाले राजस्व पर गहन चर्चा हुई।

    मुख्यमंत्री ने बैठक में साफ कहा कि कोयला खनन कार्य पूरा हो जाने के बाद जिस भूमि का अधिग्रहण किया गया है, उसे केंद्र सरकार राज्य सरकार को लौटाए, ताकि उसे पुनः मूल रैयतों को दिया जा सके। उन्होंने कहा कि राज्य के आदिवासी और स्थानीय समुदाय लंबे समय से अपनी भूमि खोने के कारण संकट झेल रहे हैं, इसलिए उनकी जमीन उन्हें लौटाना ही न्यायोचित होगा।

    इसके अलावा उन्होंने खनन प्रभावित इलाकों में लोगों के पुनर्वास, पर्यावरणीय सुरक्षा, रोजगार सृजन और आधारभूत संरचना के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि खनन परियोजनाओं से प्राप्त लाभ में झारखंड के लोगों की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए, ताकि प्राकृतिक संसाधनों का दोहन सिर्फ केंद्र के हित तक सीमित न रहकर राज्य के विकास में भी सहायक बने।

    केंद्रीय कोयला राज्यमंत्री सतीश चंद्र दुबे ने मुख्यमंत्री की बातों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्य और केंद्र मिलकर समस्याओं का समाधान खोजेंगे और झारखंड के हितों की अनदेखी नहीं की जाएगी। दुबे ने कहा कि केंद्र सरकार झारखंड के विकास और यहां के लोगों की भलाई के लिए हरसंभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।

    बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे, जिनमें मुख्य सचिव अलका तिवारी, खान सचिव अरवा राजकमल, खान निदेशक राहुल सिन्हा, सीएमपीडीआई के सीएमडी मनोज कुमार, बीसीसीएल के सीएमडी समीरन दत्ता, सीसीएल के सीएमडी नीलेंदु कुमार सिंह और बीसीसीएल के डीटी एम.के. अग्रवाल शामिल थे। उनकी मौजूदगी से यह स्पष्ट था कि बैठक सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि ठोस निर्णय की दिशा में एक कदम है।

  • शिबू सोरेन की अस्थियों को दामोदर नदी में विसर्जित किया गया

    शिबू सोरेन की अस्थियों को दामोदर नदी में विसर्जित किया गया

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संथाली परंपरा के अनुरूप सभी अनुष्ठान पूरा किया.

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क

    रामगढ़, झारखंड :  रविवार का दिन झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के लिए बेहद भावुक क्षणों का गवाह बना। मुख्यमंत्री ने अपने परिवार के साथ रामगढ़ के प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां छिन्नमस्तिका मंदिर में पूजा-अर्चना की और इसके बाद अपने पिता तथा झारखंड के जननायक दिशोम गुरु शिबू सोरेन की अस्थियों को दामोदर नदी में संथाली परंपरा के अनुरूप विसर्जित किया।

    अस्थि विसर्जन का यह क्षण मुख्यमंत्री के लिए पीड़ा और श्रद्धा दोनों का संगम था। घाट पर उपस्थित लोग साफ देख रहे थे कि पिता की स्मृति से भरे इस मौके पर मुख्यमंत्री की आंखें नम थीं।

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने पैतृक गांव नेमरा से अस्थि कलश लेकर पहुंचे। घाट पर परंपरागत संथाली पाहनों (पुजारियों) की मौजूदगी में मंत्रोच्चार और रीति-रिवाजों के साथ विसर्जन की प्रक्रिया पूरी की गई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के छोटे भाई व विधायक बसंत सोरेन, परिवार की महिलाएं और अन्य रिश्तेदार भी उपस्थित रहे।

    विसर्जन के बाद हेमंत सोरेन ने मां छिन्नमस्तिका मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की। मंदिर के पुजारी ने विधि-विधान से अनुष्ठान सम्पन्न कराया। पूजा के उपरांत मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में मौजूद गरीब और असहाय लोगों के बीच कपड़े व खाद्य सामग्री का वितरण किया। उन्होंने इस सेवा को अपने पिता के आदर्शों से प्रेरित सामाजिक उत्तरदायित्व का हिस्सा बताया। इसके बाद मुख्यमंत्री पुनः नेमरा लौट गए।

    तीन लाख लोगों ने ग्रहण किया संस्कार भोज का प्रसाद.

    नेमरा में आयोजित संस्कार भोज में जनसैलाब उमड़ पड़ा था  अनुमानित तीन लाख लोगों ने प्रसाद ग्रहण कर दिशोम गुरु को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस भोज ने यह प्रमाणित किया कि शिबू सोरेन केवल एक नेता नहीं, बल्कि जनता के हृदय में बसे एक परिवार के सदस्य थे।

    कार्यक्रम में राष्ट्रीय और राज्य स्तर के कई दिग्गज नेता व गणमान्य अतिथि उपस्थित हुए। इनमें केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, योगगुरु बाबा रामदेव, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय, बिहार के सांसद पप्पू यादव, विधानसभा अध्यक्ष रविंद्र नाथ महतो, राज्य सरकार के कई मंत्री और विधायक शामिल थे। झारखंड के वरिष्ठ आईएएस-आईपीएस अधिकारी तथा पड़ोसी राज्यों से आए लोग भी इस अवसर के साक्षी बने।

    4 अगस्त को बुझा एक युग का दीप.

    गौरतलब है कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन का निधन 4 अगस्त 2025 को दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद हुआ था। 5 अगस्त को उनके पैतृक गांव नेमरा में पूरे राजकीय और धार्मिक सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। तब से लेकर अब तक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन गांव में रहकर पिता के श्राद्धकर्म और धार्मिक अनुष्ठानों का पालन कर रहे हैं।

    झारखंड आंदोलन के अमर नायक.

    शिबू सोरेन केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि झारखंड आंदोलन के आदिवासी जननायक और संथाल समाज के सांस्कृतिक प्रतीक थे। उन्हें ‘दिशोम गुरु’ की उपाधि जनता ने उनके संघर्ष और समर्पण के कारण दी थी। उन्होंने जीवनभर आदिवासी समाज के अधिकार, जमीन-जंगल-जमीन की रक्षा और अलग राज्य की पहचान के लिए संघर्ष किया।

    रविवार को संपन्न हुए इस आयोजन ने एक बार फिर यह साबित किया कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन की स्मृति सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे देश के राजनीतिक-सामाजिक परिदृश्य में जीवित है।

  • सूर्या हांसदा मामले पर बाबूलाल मरांडी का हेमंत सरकार पर तीखा हमला

    सूर्या हांसदा मामले पर बाबूलाल मरांडी का हेमंत सरकार पर तीखा हमला

    यह एनकाउंटर नहीं, मर्डर है,सीबीआई जांच की मांग.

    The News Post4u.

    रांची : झारखंड की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। गोड्डा में आदिवासी नेता सूर्या हांसदा की मौत के मामले ने विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का बड़ा मौका दे दिया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने गुरुवार को रांची में प्रेस वार्ता कर सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए।

    अपराधियों को संरक्षण, निर्दोषों पर अत्याचार” – मरांडी.

    मरांडी ने कहा कि मौजूदा सरकार में कुछ पुलिसकर्मी अपराधियों को शरण और संरक्षण दे रहे हैं, जबकि निर्दोषों को झूठे मामलों में फंसाकर प्रताड़ित किया जा रहा है।
    उन्होंने आरोप लगाया –

    “चाहे किसी आदिवासी नेता को अपराधी साबित करना हो, या शक के आधार पर आवाज दबाने के लिए एनकाउंटर करना हो… झारखंड पुलिस के भीतर के कुछ अपराधी मानसिकता वाले लोग इन कामों को अंजाम दे रहे हैं। माफियाओं को खुली छूट दी जा रही है, और जमीन कब्जाने जैसे मामलों में भी इनकी भूमिका संदिग्ध है।”

    विपक्ष और सत्ता दोनों पर खतरा.

    नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि इस स्थिति से केवल आम जनता ही नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेता एवं उनके सहयोगी भी सुरक्षित नहीं हैं।
    मरांडी के शब्दों में –

    “संघर्ष करते-करते रास्ता भटकने वालों को देश की न्याय व्यवस्था ने हमेशा मुख्यधारा में लौटने का अवसर दिया है, लेकिन आज एक आवाज को हमेशा के लिए खामोश कर दिया गया।”

    यह एनकाउंटर नहीं, मर्डर है”

    मरांडी ने सूर्या हांसदा की मौत को सीधा-सीधा हत्या करार दिया।

    “यह एनकाउंटर नहीं, मर्डर है। वह भी अपराधियों द्वारा नहीं, बल्कि वर्दी में छिपे कुछ कायर और बुजदिलों द्वारा किया गया। उन्हें डर था कि आदिवासियों की आवाज उनके कानों का पर्दा न हिला दे, डर था कि आदिवासी अपने हक और अधिकार के लिए न खड़े हो जाएं।”

    उन्होंने कहा कि झूठे केस, फर्जी मुकदमे और लगातार मानसिक दबाव बनाना – यही आज के समय में विरोध की आवाज को दबाने का सरकारी तरीका बन गया है।

    परिजनों की सीबीआई जांच की मांग.

    मरांडी ने बताया कि सूर्या हांसदा की पत्नी और मां लगातार पुलिस पर जानबूझकर हत्या करने का आरोप लगा रही हैं। उनकी एक ही मांग है – इस पूरे मामले की सीबीआई जांच हो।

    “अगर मुख्यमंत्री को सीबीआई से डर लगता है तो हाईकोर्ट के सिटिंग जज की अध्यक्षता में जांच कराई जाए। इस घटना को जनता पचा नहीं पा रही, और पुलिस की भूमिका गंभीर संदेह के घेरे में है।”

    राजनीतिक माहौल में बढ़ी गरमी.

    सूर्या हांसदा की मौत पर भाजपा का यह हमला झारखंड की सियासत में नई बहस छेड़ सकता है। एक तरफ सरकार और पुलिस पर आरोपों की बौछार हो रही है, तो दूसरी ओर आदिवासी समुदाय के भीतर भी इस घटना को लेकर असंतोष गहराता जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना है।

  • शिबू सोरेन के श्राद्ध में 5 लाख लोगों की मेज़बानी की तैयारी

    शिबू सोरेन के श्राद्ध में 5 लाख लोगों की मेज़बानी की तैयारी

    वीआईपी के लिए बने चार हेलीपैड, सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम

    परवेज़ आलम

    For The News Post4u.

    रामगढ़, नेमरा :  झारखंड की राजनीति के पुरोधा और आदिवासी अस्मिता के प्रतीक, झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक दिशोम गुरु  शिबू सोरेन के श्राद्ध भोज की तैयारियां इन दिनों पूरे जोर-शोर से चल रही हैं। अनुमान है कि इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में करीब चार से पांच लाख लोग शामिल होंगे, जिसके लिए पांच विशाल पंडाल और अस्थायी रसोईघरों की व्यवस्था की गई है।

    वीआईपी के लिए विशेष इंतज़ाम.

    देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता, कांग्रेस अध्यक्ष, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री और विशिष्ट मेहमानों को निमंत्रण भेजा गया है। वीआईपी आवागमन को ध्यान में रखते हुए चार हेलीपैड तैयार किए गए हैं — जिनमें से तीन शिबू सोरेन के घर के पास और एक लगभग तीन किलोमीटर दूर बनाया गया है। 16 अगस्त को होने वाले संस्कार भोज के दिन, विशेष अतिथियों के लिए अलग पार्किंग की सुविधा भी होगी।

    स्थानीय आमंत्रण झारखंड मुक्ति मोर्चा की जिला कमेटियों के माध्यम से भेजे जा रहे हैं। वहीं प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से शिबू सोरेन के पैतृक आवास के 300 मीटर के दायरे में बैरिकेडिंग कर दी है, जहां केवल वीआईपी और करीबी लोग ही प्रवेश कर सकेंगे।

    ग्रामीणों और मेहमानों के लिए व्यवस्था.

    श्राद्ध भोज के लिए तैयार पांच पंडालों में बैठकर भोजन करने की सुविधा होगी। सभी पंडालों के पास ही बड़े-बड़े रसोई घर बनाए गए हैं। विशेष अतिथियों का भोजन शिबू सोरेन के घर के पीछे परोसा जाएगा। कार्यक्रम स्थल तक केवल वीआईपी वाहन ही पहुंचेंगे; आम लोगों के लिए 300 ई-रिक्शा की व्यवस्था की गई है, जो पार्किंग स्थल से लोगों को पंडाल तक लाएंगे।

    सुरक्षा के पुख्ता इंतेजाम.

    कार्यक्रम के दौरान नेमरा को छावनी में तब्दील कर दिया जाएगा। 9 आईपीएस अधिकारी 14 से 16 अगस्त तक और 40 डीएसपी 12 से 17 अगस्त तक सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेंगे। पुलिस मुख्यालय ने इसके लिए विशेष आदेश जारी कर दिए हैं।

    गांव में आम आदमी की तरह सीएम सोरेन.

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इन दिनों अपने पैतृक गांव नेमरा में हैं, जहां वे पिता के श्राद्ध कर्म में एक आम ग्रामीण की तरह हिस्सा ले रहे हैं। संथाल समाज और गांव के लोगों के साथ बैठकों में वे हर विधि-विधान की योजना पर चर्चा कर रहे हैं, साथ ही भोज के मेन्यू से लेकर मेहमानों की सेवा तक पर व्यक्तिगत रूप से नजर रख रहे हैं।

    पिता की विरासत को जीते हुए हेमंत सोरेन गांव की गलियों और खेत-खलिहानों में घूमते हैं, किसानों से बात करते हैं और जल, जंगल, ज़मीन की रक्षा पर चर्चा करते हैं। उनका कहना है कि राजनीति उनके लिए सत्ता का साधन नहीं, बल्कि जनसेवा और अधिकारों की रक्षा का संकल्प है — एक सीख जो उन्हें सीधे पिता से मिली है।

    जल, जंगल और ज़मीन: पहचान और संकल्प

    सीएम ने स्पष्ट कहा कि जल, जंगल और ज़मीन झारखंड की पहचान और अस्तित्व का आधार हैं। यही कारण है कि राज्य सरकार इन संसाधनों के संरक्षण और संवर्धन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। वे मानते हैं कि यह केवल पर्यावरणीय जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरा-भरा, समृद्ध झारखंड देने का वादा है।

    विरासत का विस्तार.

    गांव की मिट्टी, उसकी खुशबू और हरियाली की ठंडक में हेमंत सोरेन आज भी अपने पिता की परछाईं की तरह दिखते हैं। जनसेवा, सादगी और संघर्ष की वही परंपरा, जिसे दिशोम गुरु ने दशकों तक निभाया, अब मुख्यमंत्री अपने कामों के जरिये आगे बढ़ा रहे हैं।

  • अखिलेश यादव और चंद्रशेखर आज़ाद नेमरा पहुँचकर दिवंगत शिबू सोरेन को दी श्रद्धांजलि

    अखिलेश यादव और चंद्रशेखर आज़ाद नेमरा पहुँचकर दिवंगत शिबू सोरेन को दी श्रद्धांजलि

    The News Post4u.

    रामगढ़/नेमरा/रांची: झारखंड की राजनीति के पुरोधा, आदिवासी अस्मिता के प्रतीक दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि देने के लिए आज नेमरा गांव में श्रद्धालुओं और नेताओं का सैलाब उमड़ पड़ा। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के पैतृक आवास पर सुबह से ही लोगों का आना-जाना जारी रहा, जहां आमजन से लेकर देश के बड़े नेता तक श्रद्धा-सुमन अर्पित करने पहुंचे।

    अखिलेश यादव का भावुक पल.
    उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व सांसद अखिलेश यादव मंगलवार को नेमरा पहुंचे। उन्होंने दिवंगत नेता की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन, विधायक कल्पना सोरेन, विधायक बसंत सोरेन समेत परिवार के अन्य सदस्यों से मुलाकात की और गहरी संवेदनाएं प्रकट कीं।
    मुलाकात के दौरान वे रूपी सोरेन से बातचीत करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन का जीवन संघर्ष, सेवा और जनहित के लिए समर्पण का प्रतीक रहा है, जिसे देश और झारखंड कभी नहीं भूल पाएगा।

    चंद्रशेखर आज़ाद ने भी दी श्रद्धांजलि.
    इससे पहले नगीना लोकसभा से सांसद और भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद भी मुख्यमंत्री के पैतृक आवास पहुंचे। उन्होंने गुरुजी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना की। चंद्रशेखर आज़ाद ने शोक-संतप्त परिवार को सांत्वना देते हुए इस कठिन घड़ी को सहने की शक्ति प्रदान करने की कामना की।

    नेमरा में उमड़ी भीड़, गुरुजी को जननायक के रूप में किया याद.
    श्रद्धांजलि देने वालों में राजनीतिक नेता, सामाजिक कार्यकर्ता, व्यापारी, वकील, किसान, मजदूर और आम ग्रामीण बड़ी संख्या में मौजूद थे। सभी ने गुरुजी को ‘जननायक’ के रूप में याद किया और कहा कि उनका जीवन आदिवासी, वंचित और शोषित समाज की आवाज़ बनकर बीता।
    आज उनके श्राद्ध कर्म के सातवें दिन सुबह से ही नेमरा गांव में भीड़ उमड़नी शुरू हो गई थी। घर के आंगन से लेकर आस-पास की गलियों तक लोगों की कतारें लगी थीं।

    स्वतंत्रता दिवस समारोह में बदलाव.
    इसी बीच, रांची से यह खबर आई कि 15 अगस्त को मोरहाबादी मैदान में ध्वजारोहण मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की जगह राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार करेंगे। परंपरा के अनुसार, हर साल स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यमंत्री रांची में और राज्यपाल दुमका में ध्वजारोहण करते हैं। लेकिन इस बार मुख्यमंत्री के पारिवारिक शोक के कारण यह बदलाव किया गया है।
    राजभवन से जारी सूचना में बताया गया कि राज्य सरकार के प्रस्ताव पर राज्यपाल ने स्वीकृति दे दी है। साथ ही, इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में राजभवन में होने वाला पारंपरिक ‘एट होम’ कार्यक्रम भी रद्द कर दिया गया है, जो कि गुरुजी के सम्मान में लिया गया निर्णय है।

    गुरुजी की विरासत अमर रहेगी.
    नेमरा में मौजूद लोगों का कहना था कि शिबू सोरेन न सिर्फ एक नेता थे, बल्कि संघर्ष, सादगी और सेवा की मिसाल थे। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

  • राज्यपाल पहुंचे नेमरा, दिवंगत दिशोम गुरु को दी श्रद्धांजलि

    राज्यपाल पहुंचे नेमरा, दिवंगत दिशोम गुरु को दी श्रद्धांजलि

    हेमंत सोरेन निभा रहे पारिवारिक और राजनीतिक दायित्वों का संतुलन.

    परवेज़ आलम.

    The News Post4u.

    नेमरा/ रामगढ़: झारखंड की राजनीति के पुरोधा, आदिवासी अस्मिता के प्रतीक और झामुमो संस्थापक दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन के बाद पूरा राज्य शोक में डूबा है। इसी क्रम में गुरुवार को झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पैतृक गांव नेमरा पहुंचे और दिवंगत नेता की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

    राज्यपाल ने इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर शोक संवेदना भी प्रकट की। मुख्यमंत्री इन दिनों अपने पिता के निधन के बाद श्राद्धकर्म और अंतिम संस्कार से जुड़ी सभी धार्मिक विधियां पूरी करने के लिए नेमरा गांव में ही रुके हुए हैं। पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ भावनात्मक रूप से भी यह समय उनके लिए अत्यंत कठिन है।

    बाबा की चिता को दी मुखाग्नि, अब निभा रहे पुत्र धर्म

    बीते मंगलवार को दिशोम गुरु शिबू सोरेन का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव नेमरा में किया गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्वयं अपने पिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान राज्य के कई बड़े नेता, पार्टी कार्यकर्ता और हज़ारों की संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। रांची विधानसभा से नेमरा तक उनके पार्थिव शरीर की अंतिम यात्रा के दौरान लोग सड़कों पर कतारबद्ध होकर गुरुजी अमर रहें” के नारों से विदाई दे रहे थे।

    तीन कर्म की परंपरा निभाई, परिवार संग भावनात्मक क्षण

    अंतिम संस्कार के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गुरुवार को पारंपरिक तीन कर्म’ की रस्म निभाई। इस दौरान उनका पूरा परिवार उनके साथ था — माता रूपी सोरेन, छोटे भाई बसंत सोरेन, पत्नी कल्पना सोरेन, बहन अंजलि सोरेन, भाभी सीता सोरेन सहित अन्य परिजन और बच्चे भी मौजूद रहे। बुजुर्गों की सलाह और परिवार की परंपराओं का पालन करते हुए हेमंत सोरेन ने पुत्र धर्म का निर्वहन किया।

    भावुक पोस्ट में याद किया संघर्ष और बलिदान

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया (X) पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए लिखा,

    नेमरा की यह क्रांतिकारी और वीर भूमि, दादाजी की शहादत और बाबा के अथाह संघर्ष की गवाह है। यहां के जंगलों, नालों, नदियों और पहाड़ों ने क्रांति की हर गूंज सुनी है, हर बलिदान को संजो कर रखा है।

    उन्होंने वीर शहीद दादाजी सोना सोबरन मांझी और दिशोम गुरु के संघर्ष को नमन करते हुए उनकी स्मृतियों को साझा किया। मुख्यमंत्री ने इस भावुक क्षण में नेमरा की प्राकृतिक पृष्ठभूमि में ली गई एक तस्वीर भी पोस्ट की।

    नेमरा बना श्रद्धांजलि स्थल, प्रशासनिक व्यवस्था चाक-चौबंद

    नेमरा गांव इन दिनों शोक और श्रद्धा का केंद्र बन गया है। राज्य के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू खुद नेमरा मे कैंप  कर ब्यवस्था बनाने मे लगे है ।  झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में गांव में मौजूद हैं। आम जनता से लेकर राजनेता तक, हर कोई दिशोम गुरु को अंतिम श्रद्धांजलि देने नेमरा पहुंच रहा है। गांव की सीमाओं पर प्रशासन ने ट्रैफिक और भीड़ नियंत्रण की सख्त व्यवस्था की है। लगभग 4 किलोमीटर दूर तक गाड़ियों की पार्किंग व्यवस्था की गई है। रामगढ़ के डीसी और एसपी  व बोकारो ज़ोन के आई जी स्वयं स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।

    नेमरा आज केवल एक गांव नहीं, बल्कि आदिवासी चेतना, संघर्ष और नेतृत्व की विरासत का प्रतीक बन गया है। दिशोम गुरु शिबू सोरेन की अंतिम यात्रा ने यह साबित कर दिया कि वे केवल एक नेता नहीं, बल्कि एक आंदोलन थे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अब उस विरासत को संजोने और आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ अपने पिता के अंतिम संस्कार की हर परंपरा को निभा रहे हैं।

     

  • नेमरा गांव में 10 दिन तक रहेंगे मुख्यमंत्री, श्राद्धकर्म की सभी धार्मिक विधियों में निभाएंगे भागीदारी

    नेमरा गांव में 10 दिन तक रहेंगे मुख्यमंत्री, श्राद्धकर्म की सभी धार्मिक विधियों में निभाएंगे भागीदारी

    परवेज़ आलम.

    The News Post4u.

    नेमरा / रामगढ़ : झारखंड आंदोलन के जननायक, पूर्व मुख्यमंत्री और दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन के बाद अब उनके पुत्र और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने पिता के अंतिम संस्कार से जुड़ी हर धार्मिक प्रक्रिया में पूर्ण रूप से भाग लेने का निर्णय लिया है। वे आगामी दस दिनों तक अपने पैतृक गांव  नेमरा में ही रहेंगे और वहीं से राज्य के कार्यों का संचालन भी करेंगे।

    बीते मंगलवार को शिबू सोरेन का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनके गांव नेमरा में किया गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पिता को मुखाग्नि दी थी । परिवार के सूत्रों के मुताबिक, गुरुजी का श्राद्धकर्म 10 दिनों तक चलेगा, और इस अवधि में हेमंत सोरेन पूरी निष्ठा और श्रद्धा के साथ हर विधि-विधान में सम्मिलित रहेंगे।

    नेमरा में अपने पिता की स्मृतियों के बीच रहना हेमंत सोरेन के लिए एक भावनात्मक अनुभव होगा। वे परिवार के साथ समय बिताते हुए, अपने पिता के संघर्षों और योगदान को आत्मसात करने का अवसर भी प्राप्त कर रहे हैं। यह न केवल एक बेटे की जिम्मेदारी है, बल्कि एक ऐसे राजनीतिक वारिस की भावनात्मक यात्रा भी है जो अपने पिता की विरासत को संभाल रहा है।

    प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह सक्रिय.

    मुख्यमंत्री के नेमरा प्रवास को देखते हुए प्रशासनिक व्यवस्था भी पूरी तरह से सक्रिय हो गई है। नेमरा गांव में सड़क, बिजली, पेयजल और मोबाइल नेटवर्क की समस्याओं को दूर करने के लिए तेज़ी से कार्य किए जा रहे हैं। अंतिम यात्रा के दौरान लाखों लोगों की उपस्थिति से गांव की बुनियादी सुविधाओं पर भारी दबाव पड़ा था। खासकर मोबाइल नेटवर्क ठप हो जाने और संकरी सड़कों पर घंटों जाम लगने से लोगों को खासी परेशानी हुई।

    इस जाम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी यादव तक फंस गए थे। भारी भीड़ और अव्यवस्था के बीच सुरक्षा बलों और प्रशासनिक अधिकारियों की चुनौतियाँ कई गुना बढ़ गई थीं।

    नेमरा में फिर जुटेगी भीड़.

    स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, गुरुजी के श्राद्धकर्म के अंतिम दिन एक बार फिर नेमरा में भारी जनसैलाब उमड़ने की संभावना है। लाखों लोग अंतिम बार उनके चित्र पर पुष्प अर्पित करने और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करने के लिए वहां पहुँच सकते हैं।

    गांव के लोगों का कहना है कि गुरुजी की लोकप्रियता केवल एक नेता के रूप में नहीं थी, बल्कि एक जननायक और प्रेरणा स्रोत के रूप में थी। यही कारण है कि उनकी अंतिम विदाई में न केवल झारखंड, बल्कि बिहार, ओडिशा और बंगाल से भी श्रद्धालु उमड़े थे, और अब उनके श्राद्ध में भी यही दृश्य दोहराया जा सकता है।

  • शिबू सोरेन पंचतत्व में विलीन: नेमरा गांव में लाखों नम आंखों ने दी अंतिम विदाई

    शिबू सोरेन पंचतत्व में विलीन: नेमरा गांव में लाखों नम आंखों ने दी अंतिम विदाई

    परवेज़ आलम.

    The News Post4u.

    रामगढ़, झारखंड: झारखंड आंदोलन के जननायक, पूर्व मुख्यमंत्री ‘दिशोम गुरु’  शिबू सोरेन को उनके पैतृक गांव रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड स्थित नेमरा में पूरे राजकीय सम्मान के साथ मंगलवार को अंतिम संस्कार किया गया। झमाझम बारिश और गम के माहौल के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। इसी के साथ झारखंड की राजनीति का एक युग समाप्त हो गया।

    अंतिम यात्रा: पहाड़ों की गोद में उमड़ा जनसैलाब.

    नेमरा गांव, जो पहाड़ों की तलहटी में बसा एक शांत और साधारण गांव है, मंगलवार को लाखों लोगों की भीड़ से भर गया। आम जनता से लेकर झारखंड आंदोलन के पुराने सिपाही, झामुमो कार्यकर्ता, राजनेता, नौकरशाह,पत्रकार और परिजन—हर कोई ‘दिशोम गुरु’ को अंतिम बार देखने और श्रद्धांजलि देने पहुंचा।

    गांव की गलियों में नारे गूंजते रहे—शिबू सोरेन अमर रहें”, जब तक सूरज चांद रहेगा, गुरुजी तेरा नाम रहेगा”।

    बारिश की फुहारों के बीच शाम 6:45 बजे उनका अग्नि संस्कार किया गया। लोग छातों के नीचे भींगते हुए अंतिम विदाई में शामिल होते रहे। मानो आसमान भी इस विदाई में रो रहा हो।

    गुरुजी को अंतिम जोहार”, विनम्र श्रद्धांजलि”—ऐसे शब्दों के बड़े-बड़े होर्डिंग्स रांची से रामगढ़ तक पूरे रास्ते भर लोगों की आंखें नम करते रहे।

    विधानसभा से उनकी अंतिम यात्रा शुरू हुई और फिर पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव नेमरा लाया गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, उनके भाई बसंत सोरेन, और परिवार के अन्य सदस्य पार्थिव शरीर के साथ यात्रा में शामिल रहे।

    सादगी में श्रद्धा: संथाली परंपरा से हुआ अंतिम संस्कार.

    नेमरा गांव पहुंचने के बाद शिबू सोरेन का अंतिम संस्कार संथाली रीति-रिवाज और परंपराओं के अनुसार किया गया। वहीं, उनका दाह संस्कार उसी बड़का नाला श्मशान घाट में किया गया, जहां उनके पूर्वजों की भी अंत्येष्टि होती रही है।

    मुखाग्नि देने की जिम्मेदारी पुत्र हेमंत सोरेन ने निभाई। जैसे ही चिता को अग्नि दी गई, गांव के हर कोने से नारे उठे—शिबू सोरेन अमर रहें”। बारिश की बूंदें उस वक्त भी थमी नहीं थीं, लेकिन लोगों की श्रद्धा के आगे मौसम भी झुक गया।

    राजकीय सम्मान और राष्ट्रीय नेतृत्व की उपस्थिति.

    झारखंड सरकार ने शिबू सोरेन के निधन पर 6 अगस्त तक तीन दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की। साथ ही, 4 और 5 अगस्त को सभी सरकारी दफ्तर बंद रखे गए।

    राजकीय सम्मान के तहत उनकी चिता के पास झंडा फहराया गया, गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, और शोक ध्वनि के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई।

    इस दौरान कई राष्ट्रीय नेता नेमरा पहुंचे, जिनमें प्रमुख रूप से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोक सभा मे विपक्ष के नेता राहुल गांधी,तेजस्वी यादव (राजद),संजय सिंह (आप), शताब्दी रॉय (टीएमसी), पप्पू यादव ( सांसद पूर्णिया )

    भारी बारिश के कारण कई नेता हेलिकॉप्टर से नहीं आ सके, और उन्होंने सड़क मार्ग से ही नेमरा गांव पहुंचकर ‘दिशोम गुरु’ को अंतिम सलामी दी।

    प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था.

    गुरुजी की अंतिम यात्रा के दौरान मुख्य सचिव अलका तिवारी, डीजीपी अनुराग गुप्ता, प्रधान सचिव अविनाश कुमार, तथा कई जिलों के डीसी और एसपी सहित उच्चस्तरीय प्रशासनिक अमला मौजूद था। सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही, लेकिन सादगी और अनुशासन के साथ श्रद्धा का वातावरण भी बना रहा।

    आमजन का जुड़ाव.

    गांव की गलियों में, पहाड़ों के बीच, बारिश से भीगते छतरियों के नीचे खड़े आम लोग—हर आंख नम थी। हर दिल गमगीन। लोगों ने बताया—गुरुजी सिर्फ नेता नहीं थे, वो आंदोलन थे, वो आवाज थे हमारे हक की”। दुकानें, बाजार, स्कूल—हर जगह मातम पसरा रहा। कुछ विद्यालयों में दिवंगत नेता की आत्मा की शांति के लिए विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित की गईं।

    शिबू सोरेन का जाना, सिर्फ एक नेता का जाना नहीं है। यह उस संघर्ष का अंत है, जिसने झारखंड को अलग राज्य का दर्जा दिलाया।

    उनकी अंतिम यात्रा सिर्फ एक शारीरिक विदाई नहीं थी, बल्कि झारखंड के इतिहास में लिखी गई एक अविस्मरणीय घटना थी। उनका जीवन संघर्ष, आंदोलन और आदिवासी अस्मिता की मिसाल था।

    गुरुजी चले गए, लेकिन उनकी विचारधारा, उनकी आवाज, उनकी पहचान—हमेशा जीवित रहेगी।
    दिशोम गुरु अमर रहें!”

  • झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस तरलोक सिंह चौहान कल लेंगे शपथ

    झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस तरलोक सिंह चौहान कल लेंगे शपथ

    परवेज़ आलम.

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    रांची, 22 जुलाई : झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस तरलोक सिंह चौहान कल  सुबह 10 बजे राजभवन के बिरसा मंडप में पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे । राज्यपाल संतोष गंगवार  उन्हें शपथ दिलाएँगे । वे झारखंड हाईकोर्ट के 17वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदभार ग्रहण करेंगे।

    मंगलवार को रांची पहुंचे, हुआ भव्य स्वागत.

    जस्टिस चौहान मंगलवार को अपने परिजनों के साथ रांची पहुंचे। बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीशों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं और रजिस्ट्रार कार्यालय के अधिकारियों ने उनका भव्य स्वागत किया। इसके बाद वे होटल रेडिशन ब्लू पहुंचे, जहां उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया।

    शपथ के बाद सीधे संभालेंगे न्यायिक कार्य.

    शपथ ग्रहण समारोह के बाद जस्टिस चौहान सीधे हाईकोर्ट जाएंगे, जहां वे अपने नए पद का कार्यभार संभालेंगे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, झारखंड हाईकोर्ट के सभी न्यायाधीश, वरिष्ठ अधिकारी, अधिवक्ता और अन्य गणमान्य अतिथियों के शामिल होने की संभावना है।

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    राजभवन के बिरसा मंडप में भव्य समारोह की तैयारियां मंगलवार शाम तक पूरी कर ली गईं।

    जस्टिस तरलोक सिंह चौहान: एक परिचय.

    • जन्म: 9 जनवरी 1964, रोहड़ू तहसील, जिला शिमला (हिमाचल प्रदेश)
    • स्कूली शिक्षा: बिशप कॉटन स्कूल, शिमला
    • स्नातक: गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज, संजौली (बीए ऑनर्स)
    • कानून की पढ़ाई: पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से एलएलबी

    न्यायिक करियर.

    • 1989: हिमाचल प्रदेश बार काउंसिल में वकील के रूप में पंजीकरण
    • 2007: वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित
    • 2014 : हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त
    • 2014 : स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ
    • कई अवसरों पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की भूमिका निभा चुके हैं

    गौरवशाली इतिहास वाला झारखंड हाईकोर्ट.

    झारखंड हाईकोर्ट का इतिहास न्यायिक उत्कृष्टता से परिपूर्ण रहा है।

    • प्रथम मुख्य न्यायाधीश जस्टिस विनोद कुमार गुप्ता थे, जो बाद में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने।
    • यहां सेवा देने वाले कई मुख्य न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे, जिनमें शामिल हैं:
      • जस्टिस अल्तमश कबीर.
      • जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा.
      • जस्टिस आर. बनुमति.
      • जस्टिस अनिरुद्ध बोस.

    जस्टिस तरलोक सिंह चौहान के आने से झारखंड हाईकोर्ट को एक अनुभवी और प्रतिष्ठित न्यायविद् का नेतृत्व मिलने जा रहा है। उनके न्यायिक अनुभव और सशक्त दृष्टिकोण से राज्य की न्यायिक प्रणाली को और अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जनहितकारी बनाए जाने की उम्मीद की जा रही है।