Author: The News Post4u

  • झारखंड में नक्सली आतंक का अंत: छोटू खरवार की हत्या से वर्चस्व की जंग का पर्दाफाश !

    RANCHI: छोटू खरवार की मौत झारखंड के लिए एक नए युग की शुरुआत है। यह सिर्फ एक नक्सली कमांडर का खात्मा नहीं, बल्कि वर्चस्व की राजनीति में छिड़ी अंदरूनी जंग का खुलासा है। झारखंड पुलिस और सुरक्षा बलों ने जहां इसे बड़ी जीत माना है, वहीं नक्सली संगठनों के लिए यह चेतावनी है कि आतंक और अपराध का अंत तय है। लातेहार की धरती एक बार फिर खून से लाल हो गई, लेकिन इस बार कहानी उलट है। 15 लाख के इनामी नक्सली कमांडर छोटू खरवार, जो कभी दहशत का दूसरा नाम था, मंगलवार रात वर्चस्व की जंग में मारा गया। पुलिस ने उसके शव को बरामद कर लिया है। छोटू खरवार, जिसे नक्सली संगठनों में “सुजीत जी” के नाम से भी जाना जाता था, झारखंड के लातेहार, पलामू, गढ़वा, और गुमला जैसे जिलों में 100 से ज्यादा संगीन मामलों में वांछित था।

    कौन था छोटू खरवार?

    छोटू, भाकपा (माओवादी) संगठन की रीजनल कमेटी का सदस्य था और आतंक, रंगदारी और हिंसा का एक ऐसा अध्याय था, जिसे झारखंड कभी भूल नहीं सकता। पुलिस और एनआईए ने उसके सिर पर इनाम रखा था—15 लाख झारखंड पुलिस की ओर से और 3 लाख एनआईए की ओर से।

    2018 में एनआईए ने छोटू के खिलाफ मामला टेकओवर किया था। उसकी पत्नी ललिता देवी तक को पुलिस ने 2019 में गिरफ्तार किया था, जब छोटू के पैसे को निवेश कराने के दस्तावेज मिले। छोटू ने सहारा इंडिया के जरिए लाखों का लेनदेन किया था, जिससे पुलिस को उसके आर्थिक नेटवर्क का अंदाजा हुआ।

    कैसे मारा गया छोटू?

    मंगलवार रात, लातेहार के नावाडीह इलाके में नक्सलियों के बीच वर्चस्व की लड़ाई में छोटू मारा गया। झारखंड पुलिस ने उसके शव को बरामद कर लिया है। ऑपरेशन ऑक्टोपस के दौरान बूढ़ापहाड़ से भाग निकले नक्सलियों में छोटू भी शामिल था। इसके बाद वह कोयल-शंख जोन में संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रहा था। लेकिन ये कोशिशें अब खत्म हो गई हैं।

    आतंक से तस्करी तक: छोटू की कहानी

    छोटू ने हत्या, विस्फोट, आगजनी, पुलिस पर हमले जैसे अनगिनत अपराध किए। उसने हाल ही में लातेहार के छिपादोहर इलाके में एक दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी की हत्या की थी। 2016 में, पुलिस ने उसकी संपत्तियों और लेवी वसूली के सबूत जुटाए थे।

     

    2016: लातेहार में सहारा इंडिया के मैनेजर से 3 लाख की बरामदगी।
    2018: एनआईए ने छोटू के खिलाफ केस संभाला।
    2019: पत्नी की गिरफ्तारी, आर्थिक नेटवर्क का खुलासा।
    2023: ऑपरेशन ऑक्टोपस के बाद से भूमिगत।
    2024: वर्चस्व की लड़ाई में मौत।

    झारखंड के जंगलों में अब नक्सली ताकत की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। छोटू का खात्मा यही संदेश देता है—बंदूक का अंत हमेशा खून से लिखा जाता है।

  • हेमंत सोरेन: नेमरा की मिट्टी, कल्पवृक्ष की छांव और बचपन की यादें

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …….

    झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, जो 28 नवंबर को चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं, अपने पैतृक गांव नेमरा पहुंचे। नेमरा, जो न सिर्फ उनके बचपन का गवाह है, बल्कि उनकी जड़ों और संघर्ष की कहानियों को भी समेटे हुए है। पहाड़ की तलहटी में बसे इस गांव में हेमंत सोरेन के कदम पड़ते ही पुरानी यादें जैसे ताजा हो उठीं।

    गांव का बदलता चेहरा, पर यादों का वही अक्स
    नेमरा में स्थित उनका खपरैल मकान, अब आंशिक रूप से दो मंजिला हो गया है। आंगन में लगा कल्पतरु का वृक्ष पहले से अधिक घना हो चुका है, लेकिन खेतों की पगडंडियां और गांव के गलियारे हेमंत सोरेन के लिए वही बचपन की कहानियां सुनाने लगे। वे बिना चप्पल दौड़ने, गुल्ली-डंडा, फुटबॉल, और बैडमिंटन खेलने की यादों में खो गए।

    गांव में रोशनी, पर सुविधाओं की दरकार
    नेमरा, जहां अब 150 संताल परिवारों के घर हैं, सौर ऊर्जा से जलने वाली स्ट्रीट लाइटों से रोशन है। रामगढ़ ज़िले के गोला प्रखंड मुख्यालय से 14 किलोमीटर दूर यह गांव अब पक्की सड़कों से जुड़ चुका है। हालांकि, गांव में अब भी आधारभूत सुविधाओं का अभाव है। सिर्फ नौवीं कक्षा तक पढ़ाई करने वाला एक स्कूल, डॉक्टरों की कमी वाला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, और कमजोर मोबाइल कनेक्टिविटी यहां की वास्तविकता को बयां करते हैं।

    शहीद सोबरन सोरेन को श्रद्धांजलि
    हेमंत सोरेन ने अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के साथ शहीद सोबरन सोरेन के 67वें शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा, “दादा की शहादत इसी पहाड़ की तराई में हुई थी। वह हमारे दिलों में आज भी जिंदा हैं।”

    गांववालों को दिया शपथ ग्रहण का न्योता
    नेमरा में श्रद्धांजलि सभा के दौरान हेमंत सोरेन ने गांव के लोगों का धन्यवाद किया और उन्हें शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने का न्योता भी दिया। उन्होंने कहा, “सरकार का गठन हो रहा है। इस बार जब नेमरा आया हूं, तो फिलहाल परिसंपत्तियों का वितरण या योजनाओं का उद्घाटन नहीं, बल्कि आप सभी से संवाद के लिए आया हूं।”

    संदेश: मिट्टी से जुड़े रहना ही असली पहचान
    हेमंत सोरेन का यह दौरा न केवल उनके जीवन के शुरुआती संघर्षों की याद दिलाता है, बल्कि यह भी बताता है कि चाहे इंसान कितनी भी ऊंचाई पर पहुंच जाए, उसकी जड़ें हमेशा उसकी ताकत होती हैं।

     

  • हेमंत के शपथ मे जुटेंगे देश के सियासी सूरमा: रांची में ‘राजनीति का महाकुंभ’

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट…….

    रांची के आसमान पर सियासी सितारों की जगमगाहट, क्योंकि 28 नवंबर को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का शपथ ग्रहण समारोह महज एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राजनीति का महाकुंभ बनने जा रहा है।

    कांग्रेस के दिग्गज नेता राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, और तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनने रांची पहुंचेंगे। यह शपथ ग्रहण समारोह विपक्षी एकता का मंच भी बनेगा, जिसमें कई अन्य बड़े नेता अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।

    राजनीति के सितारे करेंगे शिरकत
    समारोह में माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंता रेड्डी, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, और बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के भी शामिल होने की संभावना है।

    सभी मेहमान बनेंगे राजकीय अतिथि
    शपथ ग्रहण में आने वाले इन नेताओं को राज्य सरकार ने राजकीय अतिथि का दर्जा दिया है। मंत्रिमंडल समन्वय विभाग ने इसके लिए औपचारिक आदेश जारी कर दिए हैं। सभी अतिथि 28 नवंबर को रांची पहुंचेंगे और उसी दिन कार्यक्रम में हिस्सा लेकर लौट जाएंगे।

    दिल्ली से रांची तक न्योते की गूंज
    हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी शपथ ग्रहण समारोह का न्योता दिया है। हालांकि, उनकी उपस्थिति को लेकर अब तक कोई पुष्टि नहीं हुई है।

    ‘नई राजनीति’ की झलक का दावा
    रांची में होने वाला यह शपथ ग्रहण समारोह सिर्फ सत्ता के हस्तांतरण का मंच नहीं, बल्कि विपक्षी एकता और सियासी रणनीतियों के प्रदर्शन का एक ऐतिहासिक अवसर बन सकता है। क्या झारखंड की धरती से देश की राजनीति को कोई नया संदेश मिलेगा? यह देखना दिलचस्प होगा।

     

  • झारखंड में 5000 सिपाहियों की भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू होगी, जिसमें दौड़ से जुड़े नियमों में बदलाव किए जाएंगे।

    झारखंड में 5000 सिपाहियों की बहाली की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होने वाली है। पुलिस मुख्यालय ने इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है। उम्मीद है कि इस बार भर्ती प्रक्रिया में दौड़ के नियमों में बदलाव किया जा सकता है। पुरुष अभ्यर्थियों के लिए 10 किलोमीटर और महिला अभ्यर्थियों के लिए 5 किलोमीटर की दौड़ की सीमा घटाई जा सकती है, लेकिन समय बढ़ाया जा सकता है। सेना की तर्ज पर 1600 मीटर दौड़, लंबी और ऊंची कूद को भी शामिल करने पर विचार हो रहा है।

    पहले झारखंड पुलिस के 4919 रिक्त पदों के लिए शारीरिक जांच परीक्षा अगस्त 2024 तक पूरी होनी थी, लेकिन एजेंसी के चयन में देरी और विधानसभा चुनावों के कारण आचार संहिता लागू होने से प्रक्रिया रुक गई थी। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने जनवरी 2024 में आवेदन प्रक्रिया शुरू की थी। लाखों लोगों ने आवेदन किया, लेकिन स्क्रूटनी के बाद करीब 1,44,308 आवेदन रद्द कर दिए गए। अब प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने की तैयारी है।

    रिक्त पदों का विवरण
    झारखंड के विभिन्न जिलों में बैकलॉग और नियमित रिक्तियों के लिए पदों की संख्या इस प्रकार है:

    रांची: 76 पद
    देवघर: 343 पद
    हजारीबाग: 358 पद
    गिरिडीह: 452 पद
    धनबाद: 337 पद
    पलामू: 192 पद
    दुमका: 164 पद
    पू. सिंहभूम: 288 पद
    साहेबगंज: 131 पद
    रामगढ़: 200 पद
    जल्द ही शारीरिक दक्षता परीक्षा के बाद लिखित परीक्षा का आयोजन किया जाएगा।

  • झारखंड के लिए गौरव का क्षण! गिरिडीह जिले का निमियाघाट थाना !

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …….
    अब पूरे देश में सुर्खियां बटोर रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसे वर्ष 2024 के तीन सर्वश्रेष्ठ थानों में शामिल किया है। और यह सम्मान तब और खास बन जाता है, जब खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 29 नवंबर को भुवनेश्वर में आयोजित एक भव्य समारोह में निमियाघाट के थाना प्रभारी राणा जंगबहादुर को ट्रॉफी देकर सम्मानित करेंगे।

    थाने का चयन कैसे हुआ?
    हर साल केंद्रीय गृह मंत्रालय देश के थानों का निरीक्षण करता है। लेकिन यहां महज़ इमारत की हालत नहीं देखी जाती, बल्कि पुलिस का जनता के प्रति व्यवहार, थाना परिसर की साफ-सफाई, दिव्यांगों के लिए सुविधाएं, फायर सेफ्टी, और यहां तक कि पुलिसकर्मियों के लिए फिटनेस की व्यवस्था तक हर पहलू पर बारीकी से जांच की जाती है।

    गिरिडीह के थाने का राष्ट्रीय स्तर पर नाम!
    निमियाघाट का यह सफर साधारण नहीं है। इस थाने को अपनी पेंट्री, अनुसंधान अधिकारियों के लिए अलग कमरे, सीसीटीवी जैसी सुविधाओं और पुलिसकर्मियों के अनुकरणीय व्यवहार की बदौलत यह उपलब्धि हासिल हुई है। आम जनता से पुलिस का सहज और सम्मानजनक संवाद, जो अक्सर बड़े शहरों में भी दुर्लभ होता है, यहां एक मानक बन चुका है।

    राणा जंगबहादुर—इस सफलता के नायक!
    इस थाने की उत्कृष्टता के पीछे तत्कालीन थाना प्रभारी राणा जंगबहादुर का नाम है, जिनके कार्यकाल में यह निरीक्षण हुआ। अब यह देखना दिलचस्प होगा जब 29 नवंबर को अमित शाह के हाथों ट्रॉफी ग्रहण कर राणा न सिर्फ झारखंड, बल्कि पूरे देश को यह संदेश देंगे कि छोटे कस्बों और गांवों की पुलिसिंग भी राष्ट्रीय स्तर पर मिसाल बन सकती है।

    क्या झारखंड पुलिस ने एक नया मानक स्थापित किया है?
    ऐसे समय में जब पुलिसिंग को लेकर आलोचनाएं आम हैं, निमियाघाट थाना यह साबित करता है कि सही दिशा और नेतृत्व में पुलिस प्रणाली जनता की भरोसेमंद साथी बन सकती है।

    तो सवाल यह है—क्या यह सिर्फ एक ट्रॉफी तक सीमित रहेगा, या झारखंड की पुलिसिंग इस उपलब्धि को पूरे राज्य में दोहराने की दिशा में काम करेगी? भुवनेश्वर में गूंजेगा निमियाघाट का नाम, लेकिन इसकी असली परीक्षा झारखंड की बाकी थानों में सुधार की यात्रा में छिपी होगी।

  • कौन होगा हेमंत कैबिनेट का हिस्सा ?

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट……

    झारखंड की सियासत में इस वक्त हलचलें तेज़ हैं। मंत्रिमंडल के गठन की कवायद के बीच विधायकों की दौड़-भाग अपने चरम पर है। दिल्ली से रांची तक सियासी गलियारों में सिर्फ एक ही सवाल गूंज रहा है—कौन होगा हेमंत कैबिनेट का हिस्सा ?

    दिल्ली की तरफ़ रुख़ करें तो कांग्रेस के विधायक पहले ही पोजिशनिंग में जुट गए हैं। दीपिका पांडेय सिंह, इरफान अंसारी, कुमार जयमंगल और बंधु तिर्की जैसे नाम आलाकमान के दरवाज़े खटखटा रहे हैं। झारखंड में 28 नवंबर को नई सरकार का शपथ ग्रहण होना है, लेकिन उससे पहले यह राजनीतिक ड्रामा अपने चरम पर है। कांग्रेस, झामुमो और राजद—तीनों ही अपने-अपने विधायकों को संतुलन में लाने की जद्दोजहद में हैं।

    दिल्ली और रांची के बीच सियासी लाइनें खिंच चुकी हैं
    कांग्रेस के चार मंत्री बनना तय है, लेकिन जातीय और क्षेत्रीय समीकरण की गुत्थी सुलझाना आसान नहीं। अनुसूचित जाति से राधाकृष्ण किशोर या सुरेश बैठा, अल्पसंख्यक कोटे से इरफान अंसारी, और ओबीसी से ममता देवी या प्रदीप यादव मंत्री पद की रेस में सबसे आगे हैं। वहीं, दीपिका पांडेय सिंह और रामेश्वर उरांव भी अहम दावेदार माने जा रहे हैं।

    झामुमो की बात करें तो संताल-कोल्हान से ज़्यादा चेहरों को कैबिनेट में शामिल करने की तैयारी है। दीपक बिरुवा, रामदास सोरेन और महिला कोटे से लुईस मरांडी या सविता महतो की चर्चा जोरों पर है। पिछली सरकार के मंत्री मिथिलेश ठाकुर की जगह इस बार अनंत प्रताप देव को मौका मिल सकता है।

    राजद और माले के विधायकों की भूमिका पर सस्पेंस बरकरार
    राजद के चार विधायकों में से एक को मंत्री बनने का मौका मिलेगा। सुरेश पासवान और संजय सिंह यादव इस रेस में सबसे आगे हैं। वहीं, माले से अरूप चटर्जी के मंत्री बनने की संभावना पर भी चर्चाएं हो रही हैं।

    मोरहाबादी मैदान पर तैयारी जोरों पर
    शपथ ग्रहण समारोह को लेकर मोरहाबादी मैदान में तैयारियां ज़ोरों पर हैं। डीसी वरुण रंजन की अगुवाई में अधिकारी समारोह स्थल का जायज़ा ले रहे हैं। सुरक्षा से लेकर वीवीआईपी मेहमानों की आवभगत और ट्रैफिक प्रबंधन तक, हर पहलू पर काम किया जा रहा है।

    लेकिन बड़ा सवाल वही है—ये लामबंदी और जोड़तोड़ का खेल सत्ता के कौन-कौन से दरवाज़े खोलता है? झारखंड की सियासत में यह तय है कि हर सीट और हर मंत्री पद के पीछे की रणनीति, 28 नवंबर के बाद नए समीकरणों की इबारत लिखेगी। अब सबकी नज़रें मोरहाबादी पर टिकी हैं।”*

  • भगवान से मेरी यही दुआ है कि आने वाले पांच साल झारखंड के लिए शुभ हो -केजरीवाल

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट…….

    दिल्ली का सियासी मौसम अचानक से बदलता हुआ नज़र आया, जब पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद ककेजरीवाल के  आवास पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन पहुंचे। दोनों नेताओं ने मीडिया के सामने एक संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित किया, और इस दौरान जो बातें सामने आईं, उसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी।

    केजरीवाल ने सोरेन की तारीफों के पुल बांधते हुए कहा, ‘हेमंत सोरेन ने जिस मजबूती के साथ जेल के तमाम दबावों के बावजूद चुनाव लड़ा और उसमें जीत हासिल की, वह हम सबके लिए प्रेरणादायी है। मैं उनका और उनकी पत्नी का अपने आवास पर स्वागत करता हूं। 28 नवंबर को शपथ ग्रहण समारोह होगा और उसमें हम सब शामिल होंगे।’

    लेकिन इस बातचीत में सबसे दिलचस्प बात वह भावनात्मक अपील थी, जब केजरीवाल ने कहा, ‘भगवान से मेरी यही दुआ है कि आने वाले पांच साल झारखंड के लिए भगवान से मेरी यही दुआ है कि आने वाले पांच साल झारखंड के लिए शुभ रहें और विकास का जो रास्ता आपने बनाया है, वह और मजबूत हो।’

    दूसरी तरफ, हेमंत सोरेन ने भी इस मौके पर अपने अंदाज में बात की। उन्होंने कहा, ‘झारखंड में नई सरकार का गठन होना है, और इंडिया गठबंधन की सरकार बनेगी। दिल्ली आने का मकसद यही था कि हमारे साथियों को इस कार्यक्रम में आमंत्रित कर सकूं। हमने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को भी इस समारोह में शामिल होने का आग्रह किया है।’

    यह न सिर्फ एक औपचारिक बैठक थी, बल्कि एक ऐसा राजनीतिक संदेश भी, जिसने विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के भविष्य की उम्मीदों को नई उड़ान दी है। अब सबकी निगाहें 28 नवंबर पर हैं, जहां यह देखना होगा कि इस शपथ ग्रहण समारोह में कौन-कौन शामिल होता है और इससे क्या संकेत निकलते हैं।*

  • कैसे एक चिट्ठी ने AJSU का चुनावी माहौल खराब कर दिया, जानिए पूरी कहानी

    HAZARIBAGH :जब झारखंड में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हुआ, तो हर पार्टी अपने-अपने समीकरण साधने में जुटी थी। आजसू पार्टी भी पूरे दमखम से अपने वोट बैंक को साधने की कोशिशों में लगी थी। लेकिन इसी बीच एक चिट्ठी ने चुनावी माहौल को गर्म कर दिया। ये चिट्ठी कहां से आई, किसने लिखी, कोई नहीं जानता। लेकिन इसके असर से झारखंड की सियासत में भूचाल आ गया।

    इस चिट्ठी में कुरमी समाज के भीतर सालों से सुलग रही नाराजगी को शब्द दिए गए थे। हेडलाइन थी— “आखिर कुरमी समाज आजसू को वोट क्यों दे?” और जब नतीजे आए, तो साफ हो गया कि ये चिट्ठी आजसू पार्टी के लिए कितनी घातक साबित हुई। पार्टी महज एक सीट पर सिमट गई, और कुरमी समाज ने अपना नया नेता जयराम महतो को चुन लिया।

    क्यों नाराज हुआ कुरमी समाज?

    चिट्ठी ने आजसू पर सीधे-सीधे आरोप लगाए।

    • निर्मल महतो के परिवार का अपमान: शहीद निर्मल महतो के छोटे भाई सुधीर महतो की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी सबिता महतो को चुनाव हराने के लिए आजसू ने पूरी ताकत झोंक दी। चिट्ठी का दावा है कि अगर आजसू वास्तव में निर्मल महतो का सम्मान करती, तो उनकी विधवा के खिलाफ उम्मीदवार ही नहीं उतारती।
    • दुख में दूर, सियासत में पास: जब शहीद सुनील महतो की बेटी का आकस्मिक निधन हुआ, तो आजसू का कोई नेता उनसे मिलने तक नहीं गया। लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उनकी इस मुश्किल घड़ी में साथ दिया।

    कुरमी नेताओं के खिलाफ साजिश के आरोप

    इस चिट्ठी में आजसू पर अपने ही समाज के नेताओं को खत्म करने का आरोप लगाया गया।

    • जगरनाथ महतो के निधन के बाद डुमरी उपचुनाव में आजसू ने पूरा जोर लगाया, लेकिन जयराम महतो ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया।
    • दामोदर महतो की पत्नी यशोदा देवी का टिकट काटने की कोशिश की गई, ताकि दुर्योधन महतो को मौका दिया जा सके।
    • तीन कुरमी विधायकों—योगेंद्र महतो, अमित महतो, और ममता देवी—को झूठे मामलों में जेल भिजवाने का आरोप लगाया गया। खासतौर पर ममता देवी को अपने दूधमुंहे बच्चे को छोड़कर जेल जाना पड़ा।

    आरोप: आजसू पूंजीपतियों की पार्टी बन गई है

    चिट्ठी ने सुदेश महतो और चंद्रप्रकाश चौधरी पर भी सीधा निशाना साधा।

    • सुदेश महतो पर आरोप है कि अपने भाई को डीएसपी बनवाने के लिए उन्होंने JPSC में पैरवी की, लेकिन गरीब कुरमी युवाओं के लिए कुछ नहीं किया।
    • आजसू को एक ऐसी पार्टी बताया गया, जो अब पूंजीपतियों और गैर-झारखंडी लोगों की समर्थक बन चुकी है।

    जयराम महतो की नई राजनीति

    चिट्ठी का सबसे बड़ा निशाना ये था कि जब कुरमी समाज का एक नया युवा नेता, जयराम महतो, उभर रहा है, तो आजसू उसे कुचलने की साजिश कर रही है। पार्टी के सोशल मीडिया वर्कर्स उस पर व्यक्तिगत हमले कर रहे हैं। लेकिन जनता ने अपना फैसला सुना दिया।

    क्या है इस हार का संदेश?

    आजसू के लिए ये नतीजे महज हार नहीं हैं, बल्कि कुरमी समाज की एक चेतावनी हैं। चिट्ठी ने उस दर्द को आवाज दी, जिसे समाज ने सालों से महसूस किया। अब सवाल ये है कि झारखंड की राजनीति इस नए समीकरण को कैसे संभालती है।

    तो क्या आजसू अपनी रणनीति पर फिर से विचार करेगी? क्या जयराम महतो के उभार के बाद कुरमी राजनीति का नया अध्याय शुरू हो चुका है? झारखंड के सियासी अखाड़े में ये सवाल अब गूंज रहे हैं।

  • मंईयां सम्मान योजना के तहत महिलाओं को दिसंबर से 2500 रुपए

    RANCHI : महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के सचिव मनोज कुमार ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत महिलाओं को दिसंबर से 2500 रुपएकी राशि मिलनी शुरू हो जाएगी। उन्होंने सोमवार को प्रोजेक्ट भवन में मीडिया से बात करते हुए बताया कि योजना की तैयारी पूरी हो चुकी है।

    सचिव ने कहा कि नवंबर तक जिन महिलाओं के आवेदन स्वीकृत हो चुके थे, उन्हें योजना का लाभ प्रदान किया जा चुका है। दिसंबर में नए आवेदनों की संख्या में वृद्धि होने की उम्मीद है। बीडीओ और सीओ स्तर पर आवेदनों की स्वीकृति का कार्य जारी है। विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने इस योजना के तहत 2500 रुपए की सहायता राशि देने का फैसला लिया था।

    पेंशन योजनाओं का भुगतान भी जारी
    मनोज कुमार ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा संचालित सभी पेंशन योजनाओं का भुगतान नवंबर तक कर दिया गया है। इसमें यूनिवर्सल पेंशन योजनाएं भी शामिल हैं। वहीं, केंद्र प्रायोजित योजनाएं, जैसे इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना, के तहत सितंबर तक का भुगतान हो चुका है।

    हालांकि, अक्टूबर और नवंबर की राशि केंद्र सरकार से अभी तक नहीं मिली है, जिसके कारण इन महीनों का भुगतान रुका हुआ है। इस मुद्दे को हल करने के लिए राज्य सरकार केंद्र से संपर्क कर रही है। सचिव ने कहा कि दिसंबर से मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना और अन्य योजनाओं का लाभ लाभुकों को समय पर मिले, इसके लिए विभाग पूरी तरह सक्रिय है।

  • बाबूलाल मरांडी ने अपने पद से इस्तीफे की पेशकश

    RANCHI: झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 में भाजपा को बड़ी हार का सामना करना पड़ा है। इस हार से आहतने अपने पद से इस्तीफे की पेशकश की है। मरांडी ने चुनाव में पार्टी की हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपना इस्तीफा केंद्रीय नेतृत्व को भेजने की बात कही है।

    चुनाव परिणामों के मुताबिक, भाजपा राज्य की 81 विधानसभा सीटों में से सिर्फ 21 सीटों पर सिमट गई, जो पिछले चुनाव में हासिल 25 सीटों से भी कम हैं। एनडीए गठबंधन कुल मिलाकर केवल 24 सीटें जीत पाया।

    इस घटनाक्रम पर बाबूलाल मरांडी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा किया। इसमें उन्होंने बांग्लादेशी घुसपैठ को आदिवासी समाज की सभ्यता, संस्कृति और अधिकारों पर हमला बताया। उन्होंने लिखा कि चुनाव के नतीजे चाहे जैसे भी हों, लेकिन भाजपा अपने लोगों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।

    मरांडी ने आगे कहा कि वह अब अपना पूरा समय और ऊर्जा लोगों को जागरूक करने और उन्हें सशक्त बनाने में लगाएंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि वह यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी उनकी जल, जंगल और जमीन पर बुरी नजर न डाल सके।