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  • चुनाव लड़ रहे हो, लेकिन दूल्हा कौन है ? केजरीवाल ने पूछा बीजेपी से

    नई दिल्ली : बात दिल्ली के चुनावी रण की, जहां आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी को घेरा है। मुद्दा? मुख्यमंत्री का चेहरा।

    केजरीवाल का सवाल:
    त्यागराज स्टेडियम में आयोजित महिला अदालत में अरविंद केजरीवाल ने सीधे बीजेपी पर हमला बोला। उनका कहना था,
    “चुनाव तो लड़ रहे हो, लेकिन दूल्हा कौन है?”

    ये सवाल सिर्फ कटाक्ष नहीं था, बल्कि बीजेपी की रणनीति पर सवाल था। केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में बीजेपी के पास ना कोई टीम है, ना कोई मुद्दा, और ना ही मुख्यमंत्री का चेहरा।

    महिलाओं को 2100 रुपये का वादा दोहराया। 
    इस दौरान केजरीवाल ने अपने चुनावी वादे को दोहराते हुए कहा कि अगर उनकी सरकार बनी, तो दिल्ली की महिलाओं को हर महीने 2100 रुपये मिलेंगे।
    उन्होंने दावा किया कि बीजेपी को यही वादा खल रहा है।
    “बीजेपी वाले कह रहे हैं कि महिलाएं 2100 रुपये पाकर बिगड़ जाएंगी। मैं कहता हूं, देते रहो गालियां।”

    दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा पर तीखा हमला। 
    महिला सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए केजरीवाल ने कहा कि निर्भया कांड के बाद उम्मीद थी कि हालात सुधरेंगे, लेकिन दिल्ली में अपराध का स्तर बढ़ता जा रहा है।
    “गृहमंत्रालय हाथ पर हाथ धरे बैठा है। चुनाव के समय नेता झुग्गियों में सोते हैं, लेकिन बाद में उन्हीं झुग्गियों को गिराने का आदेश देते हैं।”

    अखिलेश यादव का समर्थन। 
    कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव भी मौजूद थे। उन्होंने केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय पर तीखा हमला करते हुए कहा,
    “ये कैसा गृह मंत्रालय है, जो दिल्ली को सुरक्षित नहीं रख सकता और मणिपुर को जलने देता है?”

    महिलाओं ने सुनाई अपनी आपबीती। 
    कार्यक्रम में दिल्ली के अलग-अलग इलाकों से महिलाएं पहुंचीं। कई महिलाओं ने मंच पर अपनी समस्याएं साझा कीं। किसी ने पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल उठाए, तो किसी ने सरकारी योजनाओं के न मिलने की बात कही। इस दौरान मंच पर कई महिलाएं भावुक हो गईं।

    ANI के मुताबिकदिल्ली भाजपा प्रमुख वीरेंद्र सचदेवा ने कहा- हमारा चेहरा तो एक ही है। हम 70 सीटों पर अपने चेहरे घोषित कर चुके हैं और वह चेहरा कमल का फूल है। वीरेंद्र सचदेवा के इस बयान से साफ है कि इस बार भी BJP अपने किसी नेता को दिल्ली विधानसभा चुनावों में सीएम चेहरे के तौर पर पेश नहीं करेगी। गौर करने वाली बात यह है कि इन चुनावों के लिए भाजपा ने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट भी जारी नहीं की है।

    चुनावी सवाल:
    अरविंद केजरीवाल का यह हमला सिर्फ बीजेपी पर तंज नहीं, बल्कि चुनावी रणनीति का हिस्सा है।

    क्या मुख्यमंत्री के चेहरे की कमी बीजेपी के लिए चुनौती बनेगी?
    क्या महिला सुरक्षा और आर्थिक मदद का वादा केजरीवाल को बढ़त दिलाएगा?
    और क्या अखिलेश यादव का समर्थन विपक्ष को और मजबूत करेगा?
    चुनावी दंगल तेज हो चुका है, और दिल्ली की सियासत एक बार फिर गर्म है।
    आपकी राय?
    क्या “2100 रुपये और महिला सुरक्षा” का मुद्दा वोटरों को आकर्षित करेगा, या बीजेपी बिना चेहरे के भी बाजी मार जाएगी?

  • वन नेशन, वन इलेक्शन: क्या भारत में बदलने जा रहा है चुनावी इतिहास ?

    परवेज़ आलम की विश्लेषणात्मक रिपोर्ट ………

    केंद्र की मोदी सरकार कल यानि मंगलवार को  लोकसभा में वन नेशन, वन इलेक्शन बिल पेश कर सकती है। इसको लेकर बीजेपी ने अपने सांसदों के लिए तीन-लाइन का व्हिप जारी कर दिया है। यह व्हिप कल यानी मंगलवार के लिए जारी हुआ है, और इसका सीधा मतलब है कि बिल को लेकर सरकार पूरी तैयारी में है।

    जेपीसी गठन की चर्चा। 
    बिल पेश होने के बाद इसे संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजने की संभावना जताई जा रही है। यही नहीं, कल ही इस समिति का गठन भी हो सकता है, जिसमें बीजेपी, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सदस्य शामिल होंगे।

    सरकार का पक्ष। 
    सरकार का कहना है कि एनडीए के सभी घटक दल वन नेशन, वन इलेक्शन के पक्ष में हैं। विपक्ष इसे लेकर विरोध कर रहा है, लेकिन सरकार इसे “राजनीतिक विरोध” मान रही है, न कि तार्किक।

    क्या है वन नेशन, वन इलेक्शन?
    अब बात करते हैं इस बिल की मूल भावना की।
    वन नेशन, वन इलेक्शन का मतलब है कि लोकसभा, विधानसभा, स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव एक साथ कराए जाएं। यह विचार नया नहीं है। 1952 से लेकर 1967 तक भारत में सभी चुनाव एक साथ हुए थे।

    लेकिन, 1967 के बाद राज्यों में सरकारें गिरने और मध्यावधि चुनाव होने की वजह से यह व्यवस्था टूट गई। अब हर साल देश के अलग-अलग हिस्सों में चुनाव होते रहते हैं, जिससे न केवल समय और पैसा बर्बाद होता है, बल्कि विकास कार्यों पर भी असर पड़ता है।

    सरकार के तर्क:

    लागत में कमी: अलग-अलग चुनाव कराने में सरकारी खजाने से बड़ी राशि खर्च होती है।
    प्रशासनिक दक्षता: एक साथ चुनाव से प्रशासनिक व्यवस्था पर दबाव कम होगा।
    विकास में गति: बार-बार आचार संहिता लागू होने से विकास कार्य रुकते हैं।

    विपक्ष का तर्क:

    संविधान की भावना पर सवाल: विपक्ष का कहना है कि संघीय ढांचे में राज्यों के अधिकार अलग-अलग चुनाव कराने की स्वतंत्रता में निहित हैं।
    व्यावहारिकता की चुनौती: इतने बड़े देश में एक साथ चुनाव कराना कितना व्यवहारिक है, यह बड़ा सवाल है।
    कल क्यों अहम है?
    सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने सभी सांसदों को बिल की कॉपी पहले ही वितरित कर दी थी। हालांकि, शुक्रवार को इसे लोकसभा के एजेंडा से हटा दिया गया था। लेकिन अब, तीन-लाइन का व्हिप जारी होने के बाद, यह तय माना जा रहा है कि बिल कल पेश होगा।

    बड़ा सवाल:

    क्या यह बिल पास हो पाएगा?
    क्या भारत चुनावी बदलाव के इस ऐतिहासिक पल को देखेगा?
    क्या विपक्ष इसे सिर्फ “राजनीतिक विरोध” के तौर पर देख रहा है, या वाकई इसमें संविधानिक और व्यावहारिक चुनौतियां हैं?
    आपकी इस पर क्या राय है?
    क्या वन नेशन, वन इलेक्शन वाकई लोकतंत्र को मजबूत करेगा या यह सिर्फ एक राजनीतिक कदम है? अपनी राय The News Post4u पर जरूर दे ।

  • हेमंत सोरेन: सीएम को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत!

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट ……….

    झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन , जो ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) के निशाने पर तो हैं, लेकिन हाईकोर्ट से मिली राहत ने उनकी मुश्किलों को कुछ कम कर दिया है।

    क्या है मामला?
    हेमंत सोरेन पर ईडी ने जमीन घोटाले के मामले में 10 समन जारी किए थे। लेकिन इन 10 में से उन्होंने केवल दो बार ही अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसके बाद ईडी ने समन की अवहेलना का मामला कोर्ट में ले जाकर शिकायतवाद दर्ज कराया।

    हाईकोर्ट का फैसला। 
    झारखंड हाईकोर्ट की जस्टिस ए.के. चौधरी की बेंच ने सोमवार को इस मामले में सुनवाई करते हुए हेमंत सोरेन को व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी। हाईकोर्ट ने ईडी को 16 जनवरी तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

    हाईकोर्ट ने पहले ही एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा जारी हेमंत सोरेन के खिलाफ हाजिरी के आदेश पर रोक लगा दी थी। अब इस राहत के बाद हेमंत सोरेन को फिलहाल अदालत में पेश होने की जरूरत नहीं है।

    ईडी का आरोप। 
    ईडी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि हेमंत सोरेन ने समन की बार-बार अवहेलना की है। 10 समन में केवल 20 और 31 जनवरी को ही वे ईडी के सामने पेश हुए। ईडी इसे कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन मान रहा है।

    हेमंत सोरेन कहां हैं?
    जब झारखंड हाईकोर्ट से राहत की खबर आई, उस समय हेमंत सोरेन दिल्ली में थे। वे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से शिष्टाचार मुलाकात के लिए गए हैं। साथ में उनकी पत्नी कल्पना सोरेन भी मौजूद हैं।

    दिल्ली दौरे के दौरान उन्होंने पहले भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे जैसे दिग्गज नेताओं से मुलाकात की थी। अब वे उज्जैन जाकर महाकाल की पूजा-अर्चना करने की योजना में हैं।

    क्या यह राहत स्थायी है?
    हालांकि हेमंत सोरेन को हाईकोर्ट से मिली यह छूट एक अस्थायी राहत है। ईडी 16 जनवरी तक जवाब दाखिल करेगा, और उसके बाद अदालत का अगला कदम क्या होगा, यह देखना दिलचस्प होगा।

    बड़ा सवाल?

    • क्या ईडी का यह केस झारखंड की राजनीति को नया मोड़ देगा?
    • क्या यह मामला सिर्फ कानूनी है, या इसके पीछे राजनीतिक साजिशें भी हैं?
    • और सबसे अहम, क्या हाईकोर्ट से मिली राहत हेमंत सोरेन को लंबे समय तक बचा पाएगी?
  • जस्टिस शेखर यादव: सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने तलब किया!

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट ……….
    इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस शेखर कुमार यादव, जिनके हालिया बयान ने राजनीति से लेकर न्यायिक गलियारों तक हलचल मचा दी है, अब सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम की नजरों में हैं।
    क्या है मामला?
    विश्व हिंदू परिषद (VHP) के एक कार्यक्रम में जस्टिस यादव ने बयान दिया कि समान नागरिक संहिता (UCC) हिंदू बनाम मुस्लिम विषय है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज ने अपनी परंपराओं की कमियों को सुधार लिया है, लेकिन मुस्लिम समाज ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने बहुविवाह, बिना पत्नी की सहमति के दूसरी शादी और इस्लाम में सहिष्णुता की कमी का मुद्दा उठाया। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि “कठमुल्लापन देश के लिए घातक है” और हिंदू धर्म सहिष्णुता के बीज बोता है।
    सुप्रीम कोर्ट का संज्ञान।
    10 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट से जानकारी मांगी थी। और अब, खबरें आ रही हैं कि जस्टिस यादव को 17 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम की बैठक में तलब किया गया है। इस बैठक की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना करेंगे।
    राज्यसभा में महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस।
    जस्टिस यादव के इस बयान से उपजे विवाद ने संसद तक को हिला दिया है। 13 दिसंबर को राज्यसभा में विपक्ष के 55 सांसदों ने उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने का नोटिस दिया।
    क्या है इस बयान का बड़ा सवाल?
    VHP के मंच पर, न्यायपालिका की गरिमा से जुड़ी सीमाओं को पार करते हुए, समान नागरिक संहिता को हिंदू-मुस्लिम विषय बनाना, क्या एक जज के लिए उचित है?
    क्या यह बयान देश के संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना को चुनौती देता है?
    और सबसे अहम, क्या इस तरह के बयान न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा नहीं करते?
    सवाल बड़ा है, जवाब का इंतजार!
    सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम इस पूरे मामले की समीक्षा करेगा। लेकिन क्या न्यायपालिका का यह आंतरिक संकट जनता के न्याय में विश्वास को कम करेगा, या इसे सुलझाने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे?

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  • JSSC कैंपस से देवेंद्रनाथ महतो को पुलिस ने हिरासत में लिया और विरोध कर रहे अभ्यर्थियों को खदेड़ते हुए वहां से हटाया

    SSC-CGL परीक्षा के डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन की प्रक्रिया JSSC कार्यालय में शुरू हो चुकी है। इस दौरान विरोध प्रदर्शन के लिए पहुंचे देवेंद्रनाथ महतो को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। खबर लिखे जाने तक कुछ उम्मीदवारों और छात्रों का आंदोलन अपने चरम पर था। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी JSSC कैंपस में जमा हुए, लेकिन पुलिस ने उन्हें खदेड़कर परिसर से बाहर कर दिया। वहीं, आंदोलन का नेतृत्व कर रहे देवेंद्रनाथ महतो को पुलिस ने हिरासत में लेकर अपने वाहन में बैठा लिया।

    प्रदर्शन के दौरान कुछ उम्मीदवार JSSC कैंपस के आसपास की कॉलोनियों में छिपते हुए भी देखे गए। पूरे कैंपस क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

    गौरतलब है कि JSSC-CGL परीक्षा में कथित पेपर लीक की शिकायतों को लेकर रांची के नामकुम स्थित आयोग कार्यालय में हजारों छात्रों के जुटने की संभावना थी। विरोध को देखते हुए प्रशासन ने कड़े इंतजाम किए हैं। JSSC कार्यालय के आसपास धारा 144 लागू कर दी गई है, और सुरक्षा के लिए करीब 1500 जवान तैनात किए गए हैं। इन जवानों को लाठी, टियर गैस और रबर बुलेट जैसे उपकरण दिए गए हैं। आयोग कार्यालय के आसपास का इलाका पूरी तरह से छावनी में बदल दिया गया है।

  • JSSC परिसर की सुरक्षा को कड़ा किया गया, छात्रों के प्रदर्शन को देखते हुए धारा-144 लागू की गई।

    जेएसएससी सीजीएल परीक्षा के कथित पेपर लीक के मामले को लेकर आज रांची के नामकुम स्थित आयोग कार्यालय के बाहर भारी संख्या में छात्रों के एकत्र होने की संभावना है। छात्रों के संभावित प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है। जेएसएससी कार्यालय के आसपास धारा 144 लागू कर दी गई है, और सुरक्षा के लिए 1500 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। इन जवानों के पास लाठी, आंसू गैस, और रबर बुलेट जैसे उपकरण उपलब्ध हैं। पूरे क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया है।

    रांची डीसी कार्यालय द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि अनुमंडल पदाधिकारी, सदर रांची ने अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग कार्यालय के पास धारा 144 (सीआरपीसी की धारा 163 के तहत) लागू की है। इसके तहत इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का प्रदर्शन या धरना देना अब अवैध होगा।

    छात्रों के प्रदर्शन को देखते हुए आयोग कार्यालय के आसपास के पूरे इलाके में सख्त पुलिस सुरक्षा व्यवस्था की गई है। नामकुम क्षेत्र में व्यापक बैरिकेडिंग की गई है ताकि प्रदर्शन को नियंत्रित किया जा सके। जिला प्रशासन ने छात्रों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के आक्रामक या हिंसक प्रदर्शन से बचें। ऐसे कृत्य न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बनते हैं, बल्कि छात्रों के शैक्षणिक रिकॉर्ड और करियर पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।

    प्रशासन ने चेतावनी दी है कि किसी भी हिंसक या गैरकानूनी गतिविधि में शामिल पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जो छात्रों के भविष्य में पुलिस वेरिफिकेशन और नौकरी पाने की संभावनाओं को प्रभावित कर सकती है। आजकल सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य हो चुका है, और नकारात्मक रिकॉर्ड आपकी करियर संभावनाओं को बाधित कर सकता है।

    छात्रों को सलाह दी गई है कि वे अपनी पढ़ाई और उज्ज्वल भविष्य को प्राथमिकता दें। यदि परीक्षा से जुड़ी कोई समस्या या शिकायत है, तो उसे शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से उठाएं। आक्रामकता या हिंसक प्रदर्शन से कोई समाधान नहीं निकलेगा और यह न तो छात्रों के हित में है और न ही समाज के।

  • जामताड़ा से देवघर-दुमका-गिरिडीह तक फैला साइबर क्राइम का जाल

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट ……..

    गिरिडीह :एक समय साइबर अपराध के लिए कुख्यात जामताड़ा का नाम अब देवघर -दुमकाऔर गिरिडीह  के साथ लिया जा रहा है। देशभर में ठगी करने वाले इन जिलों के साइबर ठगों ने हर किसी को परेशान कर रखा है। गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाली इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आईफोरसी) ने झारखंड पुलिस को 300 फोन नंबरों की लिस्ट भेजी है। इन नंबरों का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड के लिए किया जा रहा है।

    आईफोरसी की कार्रवाई: क्या होगा इन नंबरों का?
    आईफोरसी का काम देश में साइबर अपराध को रोकना और पुलिस को तकनीकी मदद देना है। झारखंड पुलिस ने इन नंबरों को संबंधित जिलों की पुलिस को भेजने की तैयारी कर ली है, ताकि जांच शुरू की जा सके और ठगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।

    झारखंड मॉडल पर केंद्र का ऐप।
    आईफोरसी ने झारखंड पुलिस के प्रतिबिंब ऐप की तर्ज पर एक ऐप तैयार किया है। इस ऐप की मदद से साइबर अपराधियों का पता लगाने में आसानी होगी। जांच में पता चला कि जामताड़ा, देवघर और दुमका के ठग 300 नंबरों के जरिए देशभर में फ्रॉड कर रहे थे। आईफोरसी ने इन्हीं नंबरों की लिस्ट झारखंड पुलिस को कार्रवाई के लिए सौंपी है।

    जामताड़ा: साइबर अपराध की ‘कैपिटल’
    जामताड़ा साइबर ठगी का पर्याय बन चुका है। यहां के अपराधियों के कारनामों पर एक वेब सीरीज भी बन चुकी है। नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ इस सीरीज ने दिखाया कि कैसे संगठित तरीके से जामताड़ा के ठग पूरे देश में लोगों से धोखाधड़ी करते हैं। इसी वजह से जामताड़ा को साइबर क्राइम का कैपिटल ऑफ इंडिया कहा जाता है।

    अब देवघर -दुमका और गिरिडीह  भी चर्चा में। 
    जहां पहले जामताड़ा का नाम ही कुख्यात था, अब देवघर-दुमकाऔर गिरिडीह  भी इस लिस्ट में जुड़ गए हैं। इन जिलों के ठग नई तकनीकों का इस्तेमाल कर लोगों को ठग रहे हैं।

    पुलिस का दावा: जल्द होगी कार्रवाई
    झारखंड पुलिस का कहना है कि इन नंबरों का बारीकी से विश्लेषण किया जा रहा है। जिला पुलिस जल्द ही अपराधियों की पहचान करेगी और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगी।

    साइबर अपराध के बढ़ते मामलों ने झारखंड पुलिस और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। लेकिन आईफोरसी और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से उम्मीद है कि ठगों के इस संगठित नेटवर्क को तोड़ा जा सकेगा।

  • दिनदहाड़े मर्डर: रांची में व्यापारी को बदमाशों ने मारीं 10 गोलियां, मौके पर मौत

    रांची: झारखंड की राजधानी में अपराध का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। नामकुम थाना क्षेत्र के रिंग रोड पर बदमाशों ने एक जमीन कारोबारी की गोली मारकर हत्या कर दी। मृतक की पहचान मधुसूदन राय के रूप में हुई है, जो राजा उलिहातू इलाके के रहने वाले थे।

    कैसे हुई घटना?
    मधुसूदन राय स्कूटी पर सवार होकर कहीं जा रहे थे। जैसे ही वह रिंग रोड के सुनसान इलाके में पहुंचे, घात लगाए बदमाशों ने उन पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं। बताया जा रहा है कि कारोबारी को 10 से ज्यादा गोलियां मारी गईं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

    पुलिस की जांच तेज
    घटना की जानकारी मिलते ही नामकुम थाना प्रभारी, डीएसपी अमर कुमार पांडे, और ग्रामीण एसपी सुमित अग्रवाल मौके पर पहुंचे। एसपी ने बताया कि हत्या की पूरी योजना रेकी करके बनाई गई थी। पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी कैमरे खंगालने शुरू कर दिए हैं और डॉग स्क्वायड टीम भी जांच में जुट गई है।

    क्या कहती है शुरुआती जांच?
    डीएसपी अमर पांडे ने बताया कि मृतक मधुसूदन राय जमीन से जुड़े कामों में सक्रिय थे। शुरुआती जांच में दुश्मनी का शक भी जताया जा रहा है, लेकिन अभी कुछ ठोस जानकारी सामने नहीं आई है।

    क्या था घटनास्थल का हाल?
    जहां हत्या हुई, वह इलाका बेहद सुनसान है। रिंग रोड होने के कारण वहां से गुजरने वाले वाहन भी कम ही थे। पुलिस को शक है कि बदमाशों ने कई दिनों तक रेकी की होगी।


    दिनदहाड़े हुए इस हत्याकांड ने राजधानी की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग दहशत में हैं और पुलिस से सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।

    पुलिस का दावा है कि जल्द ही अपराधियों को पकड़ लिया जाएगा। फिलहाल मधुसूदन राय का शव पोस्टमॉर्टम के लिए रिम्स भेज दिया गया है। घटना के बाद से इलाके में तनाव का माहौल है।

  • 18 दिसंबर: राजभवन मार्च करेगी कांग्रेस, केंद्र के खिलाफ प्रदर्शन

    RANCHI: कांग्रेस ने केंद्र सरकार की “जनविरोधी नीतियों” के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए 18 दिसंबर को रांची स्थित राजभवन तक मार्च का ऐलान किया है। इस विरोध प्रदर्शन में पार्टी के कार्यकर्ता, मंत्री, सांसद, विधायक, और प्रदेश के वरिष्ठ नेता शामिल होंगे।

    प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश का बयान.
    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने संगठन के पदाधिकारियों को इस मार्च को सफल बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार की नीतियां आम जनता के खिलाफ हैं। महंगाई, बेरोजगारी, और पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने की नीतियां देश के संविधान के खिलाफ हैं। कांग्रेस पार्टी लगातार इन मुद्दों को उठा रही है, मगर केंद्र सरकार हर सवाल से बचने की कोशिश कर रही है।”

    अडाणी प्रकरण पर सरकार को घेरा। 
    कमलेश ने अडाणी मामले को लेकर केंद्र पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “जब देश के बाहर अडाणी समूह के खिलाफ मुकदमे चल रहे हैं, तब भारत सरकार उन्हें बचाने में जुटी है। यह दिखाता है कि मौजूदा सरकार केवल पूंजीपतियों की हितैषी है, न कि जनता की।”

    कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व सक्रिय।
    कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी लगातार जन मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। कमलेश ने कहा, “हमारा संघर्ष संविधान की रक्षा और आम जनता के अधिकारों की लड़ाई है। केंद्र सरकार की चुप्पी इस बात का सबूत है कि वह देश के सवालों का सामना नहीं करना चाहती।”

    क्या है कांग्रेस का एजेंडा?
    इस राजभवन मार्च को कांग्रेस जनता से जुड़े मुद्दों पर एक बड़े संदेश के रूप में देख रही है। पार्टी ने इसे केंद्र सरकार के खिलाफ अपनी राष्ट्रीय रणनीति का हिस्सा बताया है।

    जनता से अपील। 
    प्रदेश कांग्रेस ने झारखंड की जनता से भी इस मार्च में शामिल होने की अपील की है। पार्टी का कहना है कि यह प्रदर्शन हर उस व्यक्ति की आवाज को बुलंद करेगा, जो महंगाई और अन्याय से परेशान है।

    क्या होगा असर?
    कांग्रेस के इस प्रदर्शन से झारखंड की राजनीति में हलचल तेज होने की संभावना है। 18 दिसंबर का दिन राजनीतिक रूप से अहम हो सकता है।

  • JSSC के CGL परीक्षा : छात्रों का आंदोलन और प्रशासन की चुनौती

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट ………..

    रांची : छात्रों का विरोध तेज हो गया है। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के CGL 2023 के परिणाम रद्द करने और सीबीआई जांच की मांग को लेकर हजारों छात्र आंदोलनरत हैं। रांची का नामकुम इलाका, जहां आयोग का कार्यालय स्थित है, अब इस आंदोलन का केंद्र बन चुका है।

    15 दिसंबर: प्रदर्शन की तैयारी। 
    सूत्रों के अनुसार, 15 दिसंबर को 4000-5000 छात्रों के रांची स्थित JSSC कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करने की संभावना है। प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि CGL परीक्षा में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। सुरक्षा के लिहाज से पुलिस ने पूरे इलाके में बैरिकेडिंग कर दी है।

    छात्रों की मांग और आरोप।
    छात्र नेताओं का कहना है कि परीक्षा के परिणामों में पारदर्शिता का अभाव है। 21 और 22 सितंबर की परीक्षाओं के परिणाम में बड़ा अंतर देखा गया। कटऑफ जारी नहीं करना और कम अंकों वाले छात्रों का चयन कई सवाल खड़े करता है।

    वहीं, विपक्षी दल भी छात्रों के आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर धांधली के गंभीर आरोप लगाते हुए सीबीआई जांच की मांग की है।

    प्रशासन अलर्ट पर। 
    रांची पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। स्पेशल ब्रांच की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए हर थाना और जिला सतर्क कर दिया गया है। 500 मीटर के दायरे में निषेधाज्ञा लागू है।

    छात्रों का हौसला बुलंद। 
    छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने कहा, “हमारा आंदोलन शांतिपूर्ण होगा, लेकिन अपने अधिकारों के लिए हम मजबूती से खड़े हैं। सरकार को जवाब देना होगा।”

    पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव। 
    जब महतो छात्रों से मिलने पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। लेकिन छात्रों की रणनीति से महतो वहां से सुरक्षित निकल गए।

    क्या है आगे?
    16 दिसंबर को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के साथ ही JSSC कार्यालय के बाहर महाघेराव की योजना है। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।

    यह आंदोलन न केवल परीक्षा में सुधार की मांग है, बल्कि झारखंड केयुवाओं की नई राजनीतिक चेतना और संघर्षशीलता का प्रतीक भी बन चुका है।