Category: Bihar

  • देर रात ऑपरेशन: आलू की आड़ में चल रही शराब माफिया की बड़ी चाल उजागर

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह: उत्पाद विभाग की टीम ने मंगलवार की देर रात एक ऐसी कार्रवाई को अंजाम दिया, जिसने शराब माफिया के पूरे नेटवर्क की नींद उड़ा दी है। बंगाल से बिहार भेजी जा रही विदेशी शराब की भारी खेप—जो ट्रक में आलू की परत के नीचे छिपाई गई थी—को टीम ने शानदार तरीके से जब्त कर लिया।

    गुप्त सूचना पर जैसे ही विभाग की टीम ने ट्रक को रोका, पूरे ऑपरेशन का सच सामने आने लगा। जांच के दौरान ट्रक के ऊपरी हिस्से में आलू भरे थे, लेकिन उसके नीचे छिपाकर रखी गई थीं चंडीगढ़ निर्मित 800 पेटियां विदेशी शराब की, जिसकी बाजार कीमत करीब 75 लाख रुपये बताई जा रही है।

    अधिकारियों के अनुसार तस्कर लंबे समय से कृषि उपज का आवरण बनाकर शराब की बड़े पैमाने पर खेप बिहार भेजने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन इस बार विभाग की सतर्कता ने उनका पूरा खेल बिगाड़ दिया।

    कार्रवाई के दौरान टीम ने मौके से चार आरोपियों—हरिन्दर सिंह, बिन्दर सिंह, हरपीत सिंह और दीपक कुमार—को गिरफ्तार कर लिया। इनमें से सभी आरोपी पंजाब और हरियाणा के रहने वाले बताए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, ट्रक को पूरे रास्ते स्कॉर्ट कर रही एक कार को भी टीम ने जब्त कर लिया है, जिससे साफ है कि तस्करों का नेटवर्क काफी संगठित और सक्रिय था।

    उत्पाद विभाग ने इस जब्ती को बड़ी सफलता बताते हुए कहा है कि अवैध शराब के खिलाफ अभियान और भी सख्ती के साथ जारी रहेगा। विभाग का दावा है कि आने वाले दिनों में ऐसे नेटवर्क पर और भी बड़ी चोट की जाएगी।

  • बिहार चुनाव में JMM को बड़ा झटका, नहीं हुआ एक भी नामांकन

    — मंत्री बोले “राजद-कांग्रेस की धूर्त राजनीति का शिकार हुई पार्टी”

    परवेज़ आलम.

    गिरिडीह:  बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी इस बार बिहार की किसी भी विधानसभा सीट पर चुनाव नहीं लड़ पाएगी, क्योंकि नामांकन की अंतिम तिथि (सोमवार) बीत जाने तक जेएमएम का कोई उम्मीदवार पर्चा दाखिल नहीं कर सका।

    इस अप्रत्याशित स्थिति के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा ने औपचारिक रूप से महागठबंधन से अलग होने की घोषणा कर दी है।
    यह घोषणा झारखंड सरकार के मंत्री और जेएमएम के वरिष्ठ नेता सुदिव्य कुमार सोनू ने गिरिडीह में पत्रकारों से बातचीत के दौरान की।

    राजद और कांग्रेस ने दिखाई राजनीतिक धूर्तता.

    पत्रकारों से बातचीत में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने तीखे शब्दों में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस दोनों पर गंभीर आरोप लगाए।
    उन्होंने कहा —

    “राजद और कांग्रेस ने जो किया है, वह राजनीतिक धूर्तता की पराकाष्ठा है। हमें जानबूझकर गठबंधन की प्रक्रिया से बाहर रखा गया। इसका परिणाम जल्द ही सबके सामने होगा।”

    मंत्री ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि अब जेएमएम बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन का हिस्सा नहीं है, और पार्टी किसी भी सीट पर चुनाव नहीं लड़ेगी।

    सीट शेयरिंग पर अटका मामला, 13 दिनों तक होता रहा इंतज़ार.

    मंत्री सोनू ने बताया कि 7 अक्टूबर को पटना में सीट बंटवारे को लेकर महागठबंधन की बैठक हुई थी।
    वे अपने सहयोगी विनोद पांडेय के साथ इस बैठक में शामिल हुए थे।
    जेएमएम को उम्मीद थी कि पार्टी को कुछ सीटें मिलेंगी, ताकि बिहार में भी उसका राजनीतिक विस्तार हो सके।

    लेकिन मंत्री के अनुसार,

    “7 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक राजद ने चालबाजी का खेल खेला, और कांग्रेस ने उस पर मौन सहमति दी।
    जब तक नामांकन की तिथि समाप्त हुई, हमें जानबूझकर दरकिनार कर दिया गया।”

    उन्होंने इसे “साजिशन बहिष्कार” बताया और कहा कि राजद-कांग्रेस की मिलीभगत ने जेएमएम की चुनावी योजनाओं पर पानी फेर दिया।

    अगर पहले साफ़ बोलते, तो हम अकेले मैदान में उतर जाते.

    मंत्री सोनू ने अपनी नाराज़गी जताते हुए कहा कि अगर राजद और कांग्रेस को जेएमएम को सीट नहीं देनी थी, तो यह बात पहले ही स्पष्ट करनी चाहिए थी।

    “हम झारखंड से बिहार तक एकजुटता और क्षेत्रीय सहयोग का संदेश देना चाहते थे, लेकिन हमें राजनीतिक सहयोगी नहीं, बल्कि प्रतिद्वंद्वी समझा गया,”
    मंत्री सोनू ने कहा।

    उन्होंने आगे कहा —

    “7 से 20 अक्टूबर तक हमें सिर्फ छल का सामना करना पड़ा। यह सब सोची-समझी चाल थी, जिसमें कांग्रेस ने राजद का पूरा साथ दिया। अब इसका खामियाजा दोनों दलों को भुगतना पड़ेगा। क्यूकि JMM देश की अकेली  पार्टी है जिसका आदिवासी समाज मे ब्यापक जननधर है और बिहार की कई सीटों पर महागठबंधन को  JMM की उपेक्षा भारी पड़ेगी ।

    महागठबंधन की एकता पर बड़ा सवाल.

    जेएमएम के महागठबंधन से अलग होने के ऐलान से बिहार महागठबंधन की एकता पर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टूट न केवल महागठबंधन की साख को कमजोर करेगी, बल्कि झारखंड-बिहार के क्षेत्रीय तालमेल और गठबंधन राजनीति की विश्वसनीयता पर भी असर डालेगी।

    बिहार की सियासत में जहां एक ओर गठबंधन की मजबूती की बातें हो रही थीं, वहीं अब जेएमएम का यह कदम आने वाले दिनों में नए समीकरण और नए गठजोड़ों की शुरुआत कर सकता है।

    फिलहाल का निष्कर्ष.

    झारखंड मुक्ति मोर्चा ने साफ़ कर दिया है कि वह अब बिहार मे महागठबंधन का हिस्सा नहीं रहेगा और झारखंड मे महागठबंधन के रहने पर भी समीक्षा होगी ।
    मंत्री सोनू के बयान से यह भी स्पष्ट है कि यह अलगाव किसी सीट या सौदेबाज़ी  का नहीं, बल्कि विश्वास और सम्मान की राजनीति  का मामला है।

    बिहार के चुनावी मैदान में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि
    क्या राजद-कांग्रेस इस झटके से उबर पाते हैं,
    या फिर झारखंड से उठी यह नाराज़गी
    बिहार की सियासत की नई कहानी लिख देगी।

  • झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने लालू प्रसाद यादव से राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर की चर्चा

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    पटना: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सोमवार को बिहार की राजधानी पटना पहुंचे। यहाँ उन्होंने राबड़ी देवी के सरकारी आवास पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के संस्थापक और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव से शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने लालू प्रसाद यादव के स्वास्थ्य की जानकारी ली और उनके हालचाल पूछे।

    मुलाकात के दौरान हेमंत सोरेन और लालू प्रसाद यादव के बीच देश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति, सामाजिक न्याय की चुनौतियों और आर्थिक स्थिति पर गंभीर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने शिक्षा, स्वास्थ्य और युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दों पर भी विचार साझा किए। इस दौरान राबड़ी देवी समेत परिवार के अन्य सदस्य और राजद के कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे।

    लालू यादव को बताया संघर्ष और न्याय की राजनीति का प्रतीक.

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मुलाकात के बाद कहा कि लालू प्रसाद यादव भारतीय राजनीति में संघर्ष और न्याय की राजनीति के सशक्त प्रतीक हैं। उन्होंने हमेशा गरीबों, पिछड़ों और वंचितों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी है। सोरेन ने कहा कि लालू यादव जैसे नेताओं के अनुभव और मार्गदर्शन से लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की मजबूती होती है।
    उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड और बिहार के रिश्ते ऐतिहासिक रूप से गहरे हैं। दोनों राज्य मिलकर काम करेंगे, तो विकास की गति और भी तेज होगी।

    वोटर अधिकार यात्रा में बोले सोरेन – “यह चुनाव देश का संकल्प होगा”

    इससे पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पटना में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के समापन अवसर पर जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि बिहार में होने वाला आगामी विधानसभा चुनाव सिर्फ राज्य की दिशा तय नहीं करेगा, बल्कि यह देश की दशा और दिशा का भी निर्धारण करेगा।
    उन्होंने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा धनबल और बाहुबल के सहारे सत्ता में आने की कोशिश करती है। केंद्रीय एजेंसियों – सीबीआई और ईडी – का दुरुपयोग कर विपक्षी नेताओं को डराया-धमकाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुझे भी झूठे मामलों में जेल भेजा गया, लेकिन जेल जाने के बावजूद हमने झारखंड की जनता का हौसला टूटने नहीं दिया। अगर हम जेल में नहीं होते, तो झारखंड में लोकसभा चुनाव में भाजपा एक भी सीट नहीं जीत पाती।

    भाजपा पर ‘वोट चोरी‘ का आरोप.

    हेमंत सोरेन ने भाजपा पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि आज भाजपा सत्ता में ‘वोट चोरी’ के सहारे बनी हुई है। यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि वर्षों से भाजपा इस गोरखधंधे का सहारा लेती रही है। फर्क सिर्फ इतना है कि आज इस खेल का पर्दाफाश सबके सामने हो गया है। उन्होंने कहा कि भाजपा का मुकाबला तभी संभव है जब विपक्ष और जनता एकजुट होकर इसका सामना करें। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा – “जब हम सब मिलकर खड़े होंगे, तो कोई ताकत हमें रोक नहीं पाएगी।”

    वोटर सूची पुनरीक्षण पर उठाए सवाल.

    बिहार की ऐतिहासिक धरती का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विशेष और गहन पुनरीक्षण को एक साथ जोड़कर जो प्रक्रिया अपनाई गई है, वह गलत है और इससे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

     

  • सबूत के अभाव में पूर्व विधायक संजीव सिंह सहित सभी आरोपी बरी

    नीरज सिंह हत्याकांड मे आठ साल बाद आया फैसला.

    परवेज़ आलम.द न्यूज़ पोस्ट4यू.

    धनबाद : बहुचर्चित नीरज सिंह हत्याकांड  में बुधवार को आखिरकार अदालत का फैसला आ गया। धनबाद की एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने पूर्व भाजपा विधायक संजीव सिंह सहित सभी 8 आरोपियों को सबूत के अभाव में बरी कर दिया।

    विशेष न्यायाधीश दुर्गेश चंद्र अवस्थी की अदालत ने यह निर्णय सुनाया। इस दौरान कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और गहमागहमी का माहौल रहा।

    स्ट्रेचर पर कोर्ट पहुंचे संजीव सिंह.

    फैसले के दिन संजीव सिंह को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण स्ट्रेचर पर कोर्ट लाया गया। पुलिस एंबुलेंस से उन्हें सिंह मेंशन से अदालत तक लेकर पहुंची। सुनवाई शुरू होने से पहले वकीलों को कोर्ट में प्रवेश से रोक दिया गया, जिसके चलते अधिवक्ताओं ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी भी की। हालांकि, थोड़ी देर बाद स्थिति सामान्य हुई और अदालत ने केस की सुनवाई शुरू की।

    21 मार्च 2017 की वारदात जिसने झकझोर दिया था झारखंड.

    धनबाद के सरायढेला थाना क्षेत्र स्थित स्टील गेट पर 21 मार्च 2017 की शाम लगभग 7 बजे अंधाधुंध फायरिंग कर कांग्रेस नेता और पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह, उनके अंगरक्षक मुन्ना तिवारी, पीए अशोक यादव और ड्राइवर घोलटू महतो की हत्या कर दी गई थी। यह घटना राज्य का सबसे बड़ा शूटआउट मानी जाती है।

    हत्या के बाद संजीव सिंह समेत 12 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। बाद में एक आरोपी अमन सिंह की 2023 में जेल के अंदर हत्या कर दी गई, जबकि रिंकू सिंह से जुड़े मामले का ट्रायल अलग से चल रहा है।

    आठ साल लंबी कानूनी जंग.

    इस मामले में सुनवाई 6 अलग-अलग अदालतों में हुई।

    • 408 तारीखों पर पेशी हुई।
    • 3 जनवरी 2019 को 22 महीने बाद आरोप तय हुए।
    • अभियोजन पक्ष ने 74 गवाहों में से 37 गवाह और कई साक्ष्य पेश किए।
    • बचाव पक्ष ने 5 गवाहों की गवाही कराई।
    • दोनों पक्षों की बहस 49 तारीखों तक चली।
      आखिरकार, आठ साल से ज्यादा समय तक चली इस कानूनी जंग का परिणाम सभी आरोपियों की रिहाई के रूप में सामने आया।

    फैसले से पहले प्रशासन अलर्ट.

    जिला प्रशासन को पहले से आशंका थी कि फैसले के दिन दोनों गुटों के समर्थक बड़ी संख्या में कोर्ट परिसर पहुंच सकते हैं, जिससे टकराव की स्थिति बन सकती है। इस कारण धारा 144 लागू की गई।

    • जैप (Jharkhand Armed Police) की एक कंपनी को सुरक्षा में लगाया गया।
    • कोर्ट परिसर और उसके आसपास भारी पुलिस बल तैनात रहा।
    • संवेदनशील इलाकों में नियमित गश्त भी तेज की गई।

    राजनीतिक पृष्ठभूमि और असर.

    यह मामला राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम रहा है।

    • बरी हुए संजीव सिंह की पत्नी रागिनी सिंह वर्तमान में झरिया से भाजपा विधायक हैं।
    • वहीं, नीरज सिंह की पत्नी पूर्णिमा नीरज सिंह कांग्रेस से झरिया की विधायक रह चुकी हैं।
      इस वजह से इस केस पर पूरे झारखंड ही नहीं, बल्कि बिहार और उत्तर प्रदेश की भी नज़रें थीं।
  • सलूजा गोल्ड इंटरनेशनल स्कूल में कबड्डी का महाकुंभ शुरू

    झारखंड-बिहार से 50 से अधिक टीमें पहुंचीं.

    The News Post4u.

    गिरिडीह: खेल भावना, सांस्कृतिक एकता और युवाओं के उत्साह से भरे माहौल में सोमवार से सलूजा गोल्ड इंटरनेशनल स्कूल में कबड्डी का महाकुंभ शुरू हो गया। झारखंड और बिहार के विभिन्न जिलों से आई 50 से अधिक विद्यालयी टीमें अपने-अपने स्कूल के झंडों के साथ जब मैदान में उतरीं तो दृश्य बेहद मनमोहक हो गया। रंग-बिरंगी ड्रेस में सजे छात्र-छात्राओं ने मैदान पर ‘विविधता में एकता’ की भावना को जीवंत कर दिया।

    भव्य उद्घाटन.
    प्रतियोगिता का शुभारंभ सोमवार सुबह 10 बजे दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। उद्घाटन समारोह में शामिल प्रमुख अतिथियों में स्कॉलर बी.एड कॉलेज की प्राचार्या शालिनी कवला, लोजपा के प्रदेश अध्यक्ष राज कुमार राज ,डी.एल.एड स्कॉलर बी.एड कॉलेज की प्रमुख हरदीप कौर, बीएनएस डीएवी के प्राचार्य सचिन गर्ग, सीसीएल डीएवी के प्राचार्य ओ.पी. गोयल, ऑब्जर्वर गोविंद झा, योगेश पांडेय, तकनीकी सदस्य प्रसाद महतो, विद्यालय के प्रबंध निदेशक जोरावर सिंह सलूजा, निदेशक रमनप्रीत कौर सलूजा, प्राचार्या ममता शर्मा, उप प्राचार्य सूरज कुमार लाला, सीनियर एडमिनिस्ट्रेटर रूपा मुद्रा, स्पोर्ट्स पर्सन धनंजय राय, घनश्याम रजक और अजय सिंह शामिल रहे।

    उद्देश्य और महत्व।
    उद्घाटन के बाद विद्यालय के प्रबंध निदेशक जोरावर सिंह सलूजा ने कहा—

    “यह कबड्डी खेलकूद प्रतियोगिता केवल खेल प्रतिभाओं को निखारने का अवसर नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक समागम और सामाजिक एकता का प्रतीक भी है। सीबीएसई बोर्ड द्वारा लगातार कई वर्षों से सलूजा गोल्ड इंटरनेशनल स्कूल को इस प्रतियोगिता के आयोजन का अवसर मिलना हमारे प्रबंधन और तैयारियों की गुणवत्ता का प्रमाण है।”

    उन्होंने बताया कि सभी आने वाली टीमों के लिए आवास, भोजन और खेल संबंधी आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है, और विद्यालय की पूरी टीम इस आयोजन को सफल बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

    प्रतियोगिता का आगाज रोमांचक मुकाबलों से
    प्रतियोगिता का पहला मुकाबला अंडर-17 बालक वर्ग में दून ग्लोबल और साउथ पॉइंट बुंडू के बीच खेला गया। इसके बाद प्रतिभा पलवान स्कूल और लेडी के.सी. रॉय स्कूल के बीच दूसरा मैच हुआ, जिसमें खिलाड़ियों ने जोरदार खेल दिखाकर दर्शकों का मन मोह लिया।

  • अब बिहार में विधान परिषद सदस्यों को भी कहा जाएगा “विधायक”, केंद्र सरकार का बड़ा फैसला

    परवेज़ आलम.

    For The News Post4u.

    पटना :  केंद्र सरकार ने एक अहम निर्णय लेते हुए बिहार विधान परिषद के सदस्यों (MLC) को अब “विधायक” के रूप में संबोधित करने का फैसला लिया है। यह निर्णय न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया को सरल और स्पष्ट बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है, बल्कि इसका उद्देश्य विधानमंडल के दोनों सदनों – विधानसभा और परिषद – के बीच समानता स्थापित करना भी है।

    अब विधान परिषद सदस्य भी होंगे “विधायक”.

    बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने इस बदलाव की पुष्टि करते हुए कहा कि जिस प्रकार लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य को आमतौर पर “सांसद” कहा जाता है, उसी तर्ज पर अब विधानसभा और विधान परिषद – दोनों सदनों के सदस्यों को “विधायक” कहा जाएगा।

    उन्होंने बताया कि वर्षों से विधान परिषद के सदस्यों को ‘पार्षद’ के रूप में पहचाना जाता रहा है, जिससे अक्सर भ्रम की स्थिति पैदा होती थी, खासकर उन राज्यों में जहां विधान परिषद जैसी संस्था मौजूद नहीं है। बहुत से लोग MLC को नगर निगम के पार्षद से जोड़ देते थे। ऐसे में यह नया संबोधन आम जनता के बीच समझ को आसान बनाएगा।

    समान दर्जा, बढ़ेगा सम्मान.

    यह निर्णय न सिर्फ भाषाई रूप से स्पष्टता लाएगा, बल्कि विधान परिषद के सदस्यों को भी वही सामाजिक और प्रशासनिक सम्मान दिलाएगा, जो विधानसभा के विधायकों को मिलता है। अब वे भी जनता के बीच “विधायक” की पहचान के साथ कार्य कर सकेंगे।

    दस्तावेजों में भी आएगा बदलाव.

    सरकारी और संवैधानिक दस्तावेजों में अब विधान परिषद के सदस्यों को “विधायक” के रूप में दर्ज किया जाएगा। इससे भाषा में एकरूपता आएगी और संचार में आसानी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम देश भर में एक समान राजनीतिक पहचान की ओर एक महत्वपूर्ण पहल है।

    भविष्य के लिए संकेत.

    इस पहल को एक व्यापक सुधार के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। संभव है कि आने वाले समय में अन्य राज्य भी इसी प्रणाली को अपनाएं, जिससे भारत के संघीय ढांचे में भाषाई और प्रशासनिक एकता और भी सशक्त हो सके।

    यह निर्णय सिर्फ एक शब्द का बदलाव नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा कदम है जो जन प्रतिनिधियों की पहचान को स्पष्ट, समान और सम्मानजनक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

  • सहारा इंडिया ज़मीन घोटाला: झारखंड CID की जांच में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर

    -दर्जनों शहरों में फंड ट्रांसफर और ज़मीनों की हेराफेरी का खुलासा.

    Edited By: परवेज़ आलम

    For The News Post4u.

    रांची: झारखंड CID ने सहारा समूह से जुड़े एक बड़े घोटाले का खुलासा किया है, जिसमें करोड़ों रुपये की जमीनें फर्जी कंपनियों और व्यक्तियों के माध्यम से बेच दी गईं। यह घोटाला सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार कोलकाता, गुवाहाटी, पटना, लखनऊ और दिल्ली जैसे बड़े शहरों से भी जुड़ते दिख रहे हैं।

    जांच एजेंसी ने सहारा इंडिया के अधिकारी शैलेंद्र शुक्ला से पूछताछ की, जिसमें उन्होंने कबूल किया कि रांची और बोकारो जोन से नियमित रूप से बड़ी मात्रा में धनराशि कंपनी के मुख्यालय के निर्देश पर विभिन्न शहरों में ट्रांसफर की जाती थी। फंड ट्रांसफर के आदेश कंपनी के मंडल प्रमुख नीरज कुमार पाल और मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी एस.बी. सिंह द्वारा दिए जाते थे।

    जमीन की हेराफेरी का तरीका और खुलासे:

    CID की रिपोर्ट के अनुसार, सहारा समूह ने फर्जी कंपनियों और व्यक्तियों के नाम पर जमीनों की बिक्री की। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ये जमीनें SEBI द्वारा तय मूल्यों से कई गुना कम कीमत पर बेची गईं, और इससे अर्जित राशि ना तो निवेशकों को वापस लौटाई गई और ना ही SEBI में जमा की गई। इसके बजाय यह पैसा निजी खर्चों में उपयोग किया गया।

    उदाहरण स्वरूप कुछ बड़े सौदे:

    • बेगूसराय में 28.39 एकड़ जमीन, जिसकी कीमत 2013 में 41.17 करोड़ रुपये आंकी गई थी, महज 2.15 करोड़ रुपये में बेच दी गई।
    • 3.77 एकड़ दूसरी जमीन को भी 3.36 करोड़ रुपये में बेचा गया, जबकि उस वक्त बाजार दर इससे कई गुना अधिक थी।
    • पटना में 65.28 एकड़ जमीन, जिसकी कीमत SEBI ने 44.80 करोड़ रुपये तय की थी, रणकौशल प्रताप सिंह नामक व्यक्ति को केवल 2.52 करोड़ रुपये में बेच दी गई। यहां तक कि सरकारी गाइडलाइन के अनुसार भी इस जमीन की कीमत 5.05 करोड़ रुपये थी।
    • बोकारो में 68.14 एकड़ जमीन, जिसकी अनुमानित कीमत 2013 में 61.33 करोड़ रुपये थी, आज भी सहारा इंडिया के नाम पर ही दर्ज है। इससे यह संकेत मिलता है कि कई सौदों के दस्तावेजों में भी अनियमितता हो सकती है।

    धनबाद में अस्पताल निर्माण पर सवाल:

    धनबाद के गोविंदपुर स्थित रेगुनी मौजा में सहारा की ज़मीन पर अस्पताल का निर्माण किया जा रहा है। CID इस प्रकरण की भी जांच कर रही है कि यह ज़मीन कैसे उपयोग में लाई गई, जबकि यह ज़मीन अब भी कंपनी के नाम पर दर्ज है।

    CID की कार्रवाई और सिफारिश:

    इस घोटाले को लेकर CID ने FIR दर्ज करने की सिफारिश की है। इसके साथ ही संबंधित विभागों से सभी आवश्यक दस्तावेज और सौदों की जानकारी तलब की गई है। पोस्टिंग अधिकारी, अंचल अधिकारी और थाना प्रभारियों से विशेष सहयोग की अपील की गई है ताकि जांच तेजी से पूरी हो सके।

    CID की टीम अब इस घोटाले से जुड़े हर छोटे-बड़े सौदे की जांच कर रही है। कई फर्जी कंपनियों के नाम और उनसे जुड़े व्यक्तियों की पहचान की जा रही है। जल्द ही इस मामले से जुड़े और बड़े नामों का पर्दाफाश होने की उम्मीद है।

    कहानी सिर्फ जमीन की नहीं है… कहानी है एक सुनियोजित लूट की।

    जांच में खुलासा हुआ है कि सहारा समूह ने झारखंड सहित कई राज्यों में जमीनों की बिक्री फर्जी नामों, फर्जी कंपनियों के ज़रिए की। और ये कोई मामूली गलती नहीं थी – ये एक ठोस योजना थी, जिसमें निवेशकों की कमाई को कौड़ियों के दाम बेचकर, उसकी रकम से अपनी जेबें भरी गईं।

    न निवेशकों को पैसा, न SEBI को हिसाब… तो गया कहाँ पैसा?

    CID की रिपोर्ट में साफ कहा गया है – इन जमीनों की बिक्री से जो पैसा आया, न वो सेबी में जमा हुआ, न निवेशकों को वापस मिला। वो पैसा गया कहाँ? निजी खर्चों में – मतलब किसी के बंगले बने, किसी के चुनाव खर्च निकले, किसी की गाड़ी चली।

    यह जांच सिर्फ कागज़ों में रह जाएगी या सचमुच कोई बड़ी कार्रवाई होगी?
    क्या जिन लोगों ने भरोसे के नाम पर हजारों लोगों की कमाई लूटी, वो जेल में होंगे या फिर अगला चुनाव लड़ेंगे?

     

  • पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक मे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति मे हेमंत सोरेन ने गिनाई राज्य की पीड़ा

    Edited By: परवेज़ आलम.

    For The News Post4u.

    रांची की वह दोपहर इतिहास के दस्तावेज़ों में दर्ज होगी। जब पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की 27 वीं बैठक के मंच पर झारखंड की जमीन से उठी आवाज़ ने राष्ट्रीय सियासत के गलियारों में एक नई दस्तक दी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने न केवल अपने प्रदेश की पीड़ा को शब्दों में पिरोया, बल्कि दिल्ली को यह भी बताया कि देश के संसाधनों पर सिर्फ़ दिल्ली और मुंबई का हक नहीं है। जंगलों, पहाड़ों और आदिवासियों की भी साझेदारी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक मे झारखंड राज्य की समस्याओं, विकास की जरूरतों और लंबित मामलों को विस्तार से रखा गया । मुख्यमंत्री ने झारखंड की ओर से 31 अहम मुद्दों को उठाते हुए राज्य के विकास के लिए केंद्र सरकार से सहयोग की अपेक्षा जताई। बैठक में बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया।

    कोयले की राख में दबे करोड़ों के सवाल.

    सबसे बड़ा प्रश्न था कोयला कंपनियों के ऊपर झारखंड सरकार का 1.40 लाख करोड़ रुपये का बकाया। न कोई ब्याज, न कोई माफी – सिर्फ़ मांग। हेमंत सोरेन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सामने सवाल रखा कि जब कोयले की खुदाई झारखंड की धरती से होती है, तो मुनाफा दिल्ली और कोलकाता के बहीखातों में क्यों दर्ज होता है?

    212 अस्पताल और आयुष्मान भारत की ठहरी साँसे.

    झारखंड के 212 निजी अस्पताल आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत इलाज तो कर रहे हैं, लेकिन भुगतान अटका हुआ है। वजह ? ईडी की जांच। हेमंत सोरेन ने दो टूक कहा – “भ्रष्टाचार की जांच होनी चाहिए, लेकिन मरीजों की जान बचाने वालों को सज़ा क्यों ?” इस पर अमित शाह ने जांच तेज़ करने और भुगतान सुनिश्चित करने का भरोसा दिलाया।

    मसानजोर डैम: पानी वहीं, प्यासा झारखंड.

    मयूराक्षी नदी पर बना मसानजोर डैम। पूरा सबमर्ज एरिया झारखंड में, लेकिन सिंचाई का लाभ बंगाल को। यह 1949 के समझौते की असंतुलित विरासत है। झारखंड को जहां मात्र 53 एमसीएम पानी मिलता है, जरूरत है 457 एमसीएम की। सोरेन ने मांग की – डैम का नियंत्रण साझा हो और जलस्तर 378 फीट से नीचे न जाने दिया जाए।

    “सहकारी संघवाद” का असली मतलब.

    मुख्यमंत्री ने मंच से एक स्पष्ट संदेश दिया – “यह परिषद केवल चर्चा का मंच नहीं, समाधान का प्रयोगशाला होनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि झारखंड, बिहार, बंगाल और ओडिशा का साझा अतीत, साझा समस्याएं हैं, और इसलिए समाधान भी मिलकर ही होंगे।

    प्रमुख मांगें – हर क्षेत्र, हर वर्ग की आवाज़.

    हेमंत सोरेन की 360 डिग्री अपील में हर तबके की झलक थी:

    • खनिज संसाधनों का न्यायपूर्ण उपयोग: DMFT नीति में संशोधन, कोल कंपनियों द्वारा बकाया भुगतान और बंद खदानों का माइन क्लोजर।
    • महिलाओं के लिए “मुख्यमंत्री मईयां सम्मान योजना” के तहत 2500 रुपये मासिक सहायता।
    • शिक्षा में सामाजिक न्याय: वंचित वर्ग के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति, जनजातीय विश्वविद्यालय, उच्च शिक्षा में नवाचार और पेटेंट सुविधा।
    • स्वास्थ्य व्यवस्था: RIMS-2 और छह नए मेडिकल कॉलेजों हेतु केंद्र की आर्थिक सहायता।
    • यातायात और संपर्क: रांची मेट्रो परियोजना, साहेबगंज एयर कार्गो हब, पूर्वोत्तर को जोड़ने वाले पुलों व एक्सप्रेसवे का प्रस्ताव।
    • मनरेगा में मजदूरी दर बढ़ाकर 405 रुपये करने की मांग।
    • कुपोषण और आंगनबाड़ी की समस्याओं पर केंद्र का ध्यान।
    • COMFED और होटल अशोक जैसे बिहार-झारखंड के साझा आस्तियों का विभाजन।

    एक मुख्यमंत्री की भूमिका से आगे.

    हेमंत सोरेन ने अपनी बात न किसी तंज में रखी, न किसी घमंड में। नारेबाज़ी नहीं, तथ्य, तर्क और अनुभव के साथ झारखंड की मांगों को मंच पर उतारा। उन्होंने यह जता दिया कि एक राज्य का मुख्यमंत्री सिर्फ़ मुख्यमंत्री नहीं होता – वह उस भूभाग की आत्मा, चेतना और आवाज़ होता है।  झारखंड ने सिर्फ़ अपना पक्ष नहीं रखा, बल्कि केंद्र और पड़ोसी राज्यों के सामने एक आइना रखा है। सवाल यह नहीं कि झारखंड क्या मांग रहा है, सवाल यह है कि देश की नीति में झारखंड की कितनी हिस्सेदारी है। और जब तक इस हिस्सेदारी का हिसाब नहीं चुकता, तब तक सहकारी संघवाद अधूरा रहेगा।

  • देवघर में राजकीय श्रावणी मेले का भव्य उद्घाटन

    EDITED BY: परवेज़ आलम

    FOR THE NEWS POST4U

    देवघर: गुरू पूर्णिमा के पावन अवसर पर देवघर जिले के दुम्मा स्थित झारखंड के प्रवेश द्वार पर पारंपरिक श्रद्धा और आधुनिक तकनीक के समावेश के साथ राजकीय श्रावणी मेले का शुभारंभ किया गया। उद्घाटन समारोह में पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार, ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय, और श्रम नियोजन मंत्री संजय प्रसाद यादव बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। तीनों मंत्रियों ने संयुक्त रूप से पूजा-अर्चना कर फीता काटा और “हर-हर महादेव” के जयघोष के बीच मेले की शुरुआत की।

    श्रद्धालुओं की सुविधा में तकनीक का सहारा.

    उद्घाटन के दौरान मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि सरकार और जिला प्रशासन ने इस बार श्रावणी मेले को पहले से बेहतर और सुरक्षित बनाने की हरसंभव कोशिश की है। श्रद्धालुओं के सुगम दर्शन और यात्रा अनुभव को यादगार बनाने के लिए एआई (AI) आधारित सिस्टम लागू किया गया है। इसमें:

    • AI चैटबॉट: यात्रियों की सहायता और मार्गदर्शन के लिए।
    • QR कोड सिस्टम: जरूरी जानकारी स्कैन कर तुरंत उपलब्ध कराने के लिए।
    • RFID ट्रैकिंग सिस्टम: छोटे बच्चों की सुरक्षा के लिए उन्हें ट्रेस और ट्रैक करने की सुविधा।

    इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास की योजना.

    पर्यटन मंत्री ने बताया कि कांवरिया पथ को और सुगम बनाने के लिए सरकार की ओर से विस्तृत योजना बनाई गई है।

    • खिजुरिया से मानसरोवर तट स्थित क्यू कॉम्प्लेक्स तक फूट ओवरब्रिज (FOB) का निर्माण प्रस्तावित है। यह सर्कुलर रोड पार करने में कांवरियों को हो रही असुविधा को दूर करेगा।
    • दुम्मा से खिजुरिया तक के मार्ग को पहले ही सुविधाजनक बना दिया गया है, और अब इसके आगे मंदिर तक की सड़क को भी समर्पित कांवर पथ के रूप में विकसित किया जाएगा।
      इससे न सिर्फ श्रद्धालुओं को आसानी होगी, बल्कि देवघर शहर की यातायात व्यवस्था भी पहले से ज्यादा सुव्यवस्थित हो जाएगी।

    मंत्रियों ने जताया विश्वास और आभार.

    ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय ने कहा कि बाबा बैद्यनाथ की कृपा से मेले के दौरान वर्षा भी हो रही है, जिससे श्रद्धालुओं के साथ-साथ किसानों को भी लाभ होगा। उन्होंने कहा, “हम सभी मिलकर मेले को सफल बनाएंगे।”
    वहीं, श्रम नियोजन मंत्री संजय प्रसाद यादव ने कहा कि नगर विकास विभाग और जिला प्रशासन ने समर्पित भाव से मेले की व्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास किया है।

    प्रशासन की ओर से पुख्ता इंतजाम.

    देवघर के उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा ने जानकारी दी कि इस बार सुरक्षित और सुगम जलार्पण की दिशा में हर संभव उपाय किए गए हैं। प्रशासन ने AI चैटबॉट, रियल टाइम सहायता, पानी और चिकित्सा की सुविधा, तथा यातायात नियंत्रण के लिए विशेष टीमें तैनात की हैं।

    उद्घाटन में उमड़ा जनसैलाब.

    पूजन और उद्घाटन समारोह के दौरान दुम्मा प्रवेश द्वार “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालु, स्थानीय नागरिक और अधिकारियों की उपस्थिति में माहौल भक्तिमय हो गया। इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि झारखंड सरकार पारंपरिक भावनाओं के साथ-साथ आधुनिक तकनीक के सहारे एक समर्पित और सशक्त व्यवस्था देने के लिए तत्पर है।

     

  • लालू यादव फिर चुने गए RJD  के राष्ट्रीय अध्यक्ष का कब्जा, 13वीं बार निर्विरोध चुनाव

    परवेज़ आलम. By The News Post4u.

    राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में नेतृत्व को लेकर चल रही प्रक्रिया एक बार फिर उसी बिंदु पर पहुंची, जहां से पार्टी की पहचान शुरू होती है। पार्टी संस्थापक लालू प्रसाद यादव को लगातार 13वीं बार राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में निर्विरोध चुन लिया गया है। यह घोषणा पार्टी के निर्वाचन पदाधिकारी रामचंद्र पूर्वे ने अधिसूचना जारी कर की।

    सोमवार, 23 जून को लालू यादव ने राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था। मंगलवार, 24 जून को दोपहर 2 बजे नामांकन पत्रों की जांच की गई और दोपहर 3 बजे तक नाम वापस लेने की समयसीमा तय थी। लेकिन जब किसी अन्य उम्मीदवार ने न तो नामांकन दाखिल किया और न ही लालू यादव ने अपना नाम वापस लिया, तो उन्हें निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया।

    कब सौंपा जाएगा प्रमाण पत्र?

    निर्वाचन पदाधिकारी रामचंद्र पूर्वे ने बताया कि लालू यादव को निर्वाचन का आधिकारिक प्रमाण पत्र 5 जुलाई 2025 को आयोजित होने वाली पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में सौंपा जाएगा। इसी बैठक में उनका आधिकारिक रूप से कार्यभार भी घोषित किया जाएगा।

    इसका राजनीतिक महत्व क्या है?

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, लालू प्रसाद यादव का एक बार फिर राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना यह दर्शाता है कि पार्टी अब भी पूरी तरह उनके नेतृत्व में विश्वास रखती है। हालांकि लालू यादव सक्रिय राजनीति से स्वास्थ्य कारणों से थोड़ा पीछे रहे हैं, फिर भी उनका करिश्माई प्रभाव, संगठन पर पकड़ और सामाजिक न्याय की राजनीति में उनकी गूंज अब भी बनी हुई है।

     RJD के अंदरूनी समीकरण.

    राजद में लंबे समय से यह अटकलें थीं कि अब पार्टी की कमान तेजस्वी यादव को सौंप दी जाएगी, लेकिन इस बार फिर से लालू यादव की ताजपोशी यह संकेत देती है कि वह अभी भी पार्टी का चेहरा बने रहेंगे और संगठन को अपनी निगरानी में आगे बढ़ाएंगे। संभवतः पार्टी की रणनीति यह है कि वरिष्ठता का नेतृत्व और युवाओं का संचालन साथ-साथ चले।
    लालू प्रसाद यादव का निर्विरोध निर्वाचन न केवल राजद की एकजुटता को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि पार्टी अभी भी अपने संस्थापक के अनुभव और रणनीतिक कौशल पर भरोसा करती है। आने वाले समय में राजद किस तरह से अपनी राजनीति को आगे बढ़ाएगा, इस पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।