Category: Bihar

  • बिहार में लगेगा न्यूक्लियर पावर प्लांट, ऊर्जा मंत्रियों के पांचवें क्षेत्रीय सम्मेलन  मे शामिल हुये मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू

    परवेज़ आलम. By The News Post4u.

    देश के ऊर्जा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम की घोषणा मंगलवार को पटना में हुई, जब केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बिहार में न्यूक्लियर पावर प्लांट (परमाणु बिजली घर) स्थापित करने के प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे दी। यह घोषणा पूर्वी भारत के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ऊर्जा मंत्रियों के पांचवें क्षेत्रीय सम्मेलन के दौरान हुई। इस  सम्मेलन में बिहार, झारखण्ड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल एवं अंडमान-निकोबार के ऊर्जा मंत्री उपस्थित रहे। बिहार से इसका प्रतिनिधित्व ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने किया जबकि झारखंड से  नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू इसमे शामिल हुये ।

    मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने सम्मेलन के बाद फोन पर The News Post4u को बताया कि  बैठक में राज्यों में संचालित विद्युत परियोजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन, वितरण नेटवर्क को मजबूत करने तथा सेवा प्रदायगी में दक्षता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही, निर्बाध और समान रूप से बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर भी गहन चर्चा हुई।
    देश के ऊर्जा क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन लाने के लिए यह सामूहिक प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।

    बिहार को मिलेगा ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बूस्ट.

    सम्मेलन के दौरान बिहार सरकार की ओर से राज्य में परमाणु ऊर्जा आधारित पावर प्लांट की मांग रखी गई थी। इस पर केंद्रीय मंत्री खट्टर ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा कि केंद्र सरकार हर आवश्यक तकनीकी और वित्तीय सहायता देने को तैयार है।

    साथ ही बिहार में अगले 6 महीनों के भीतर अतिरिक्त 500 मेगावाट बिजली की आपूर्ति करने का भी प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया है, जिससे राज्य की औद्योगिक और ग्रामीण जरूरतों को मजबूत आधार मिलेगा।

     केंद्रीय मंत्री ने क्या कहा?

    बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बताया कि:

    • ऊर्जा क्षेत्र में थर्मल, सोलर, विंड और स्टोरेज प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम हो रहा है।
    • 2035 तक का राष्ट्रीय ऊर्जा विजन तैयार किया गया है, जिसमें हर राज्य में एक परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की योजना है।
    • बिहार में अब तक 80 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिसे उन्होंने “रिकॉर्ड” बताया।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि “बिहार को कभी पिछड़ा समझा जाता था, लेकिन अब वह बिजली क्षेत्र में कई राज्यों से आगे निकल गया है।”

    बिजली स्टोरेज की भी मांग॰

    सम्मेलन के दौरान बिहार सरकार ने राज्य में 1000 मेगावाट की बिजली स्टोरेज क्षमता विकसित करने की मांग भी रखी। इस पर भी केंद्र सरकार ने भरोसा दिलाया कि जरूरत के मुताबिक हरसंभव मदद दी जाएगी।

    भारत अब बिजली निर्यातक देश.

    मंत्री खट्टर ने कहा कि कभी “पावर डिफिसिट” (बिजली की कमी वाला) देश माने जाने वाला भारत, आज भूटान, म्यांमार, बांग्लादेश और नेपाल को बिजली निर्यात कर रहा है। देश के भीतर जरूरत के हिसाब से बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।

    इस सम्मेलन से स्पष्ट है कि बिहार अब पारंपरिक बिजली आपूर्ति से आगे बढ़कर विकसित ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर और वैकल्पिक स्रोतों की ओर बढ़ रहा है। न्यूक्लियर पावर प्लांट की स्थापना राज्य के लिए आर्थिक और औद्योगिक विकास का एक नया अध्याय खोल सकती है।

     

  • मानहानि की जंग में सियासी तकरार: लालू यादव के साले साधु यादव ने भेजा ₹5 करोड़ का कानूनी नोटिस

    ‘Broken Promises’ किताब बनी विवाद की जड़

    परवेज़ आलम for The News Post4u.

    राजनीति और लेखनी के टकराव में अब कानूनी लड़ाई की आहट सुनाई देने लगी है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के साले और चर्चित राजनीतिक शख्सियत अनिरुद्ध प्रसाद उर्फ साधु यादव ने झारखंड भाजपा के चुनाव प्रबंधन प्रमुख मृत्युंजय शर्मा को ₹5 करोड़ का मानहानि नोटिस भेजा है। यह नोटिस शर्मा द्वारा लिखी गई किताब ‘Broken Promises: Caste, Crime and Politics in Bihar’ और हाल ही में एक पॉडकास्ट में दिए गए बयान के संबंध में भेजा गया है।

    क्या है विवाद?

    20 जून 2024 को एक पॉडकास्ट में मृत्युंजय शर्मा ने साधु यादव से जुड़ी कुछ घटनाओं का जिक्र किया था, जिन्हें साधु यादव ने “गंभीर, आधारहीन और उनकी छवि को धूमिल करने वाला” बताया है। नोटिस में तीन प्रमुख आरोपों को गलत, बेबुनियाद और अपमानजनक बताते हुए माफी की मांग की गई है।

    ये हैं वे तीन विवादित आरोप:

    1. गौतम-शिल्पी हत्याकांड में साधु यादव की कथित संलिप्तता, जबकि उनका कहना है कि इस मामले में CBI और न्यायालय दोनों ने उन्हें क्लीन चिट दी है।
    2. छात्र नेता चंद्रशेखर की हत्या के विरोध में JNU छात्रों द्वारा दिल्ली स्थित बिहार भवन पर किए गए प्रदर्शन के दौरान, गोली चलवाने का आदेश देने का आरोप। साधु यादव ने इसे भी  पूरी तरह मनगढ़ंत बताया है।
    3. रोहिणी आचार्य की शादी के समय एक शो-रूम से कार, गहने और फर्नीचर जबरन उठवाने का दावा, जिसे भी वे झूठा और अपमानजनक करार देते हैं।

    साधु यादव की मांगें.

    मानहानि नोटिस के तहत साधु यादव ने मृत्युंजय शर्मा से बिना शर्त माफी मांगने की बात कही है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो वे कानूनी कार्रवाई के लिए बाध्य होंगे।

     

    मृत्युंजय शर्मा का पलटवार.

    इधर, मृत्युंजय शर्मा ने किसी भी प्रकार की माफी मांगने से साफ इनकार करते हुए कहा,

    “जो किताब मैंने लिखी है, वह तथ्यात्मक शोध और ऐतिहासिक दस्तावेजों पर आधारित है। साधु यादव जैसे व्यक्ति किस ‘प्रतिष्ठा‘ की बात कर रहे हैं, यह पूरा बिहार जानता है।” मृत्युंजय शर्मा का कहना है कि लालू यादव के साले साधु यादव ने जिन तीन मामलों का जिक्र कर मानहानि का नोटिस भेजा है, उससे हर बिहारी वाकिफ है. इनके पास कौन सी प्रतिष्ठा है जिसको ठेस पहुंची है. यही तो वह संस्कृति है- गुंडागर्दी, डर और परिवारवाद की, जिसने लालू यादव के राज में बिहार को बर्बाद किया था और अब सच बोलने वालों को डराने के लिए कानूनी नोटिस भेजा जा रहा है.

    शर्मा का यह भी आरोप है कि साधु यादव ने उन्हें फोन कर दबाव डालने की कोशिश की थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि “यदि मुझे या मेरे परिवार को कोई नुकसान पहुंचता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी साधु यादव की होगी।”

    किताब, चुनाव और राजनीति.

    11 मार्च 2024 को प्रकाशित हुई यह पुस्तक उस समय सामने आई थी जब देश में लोकसभा चुनावों का माहौल गर्म था। अब जबकि बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, साधु यादव द्वारा भेजा गया यह नोटिस राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर रहा है।

    मृत्युंजय शर्मा का दावा है कि वे सच के पक्ष में खड़े हैं और उनके लेखन का उद्देश्य बिहार की जातीय राजनीति, अपराध और सत्ता के समीकरणों को उजागर करना है। उन्होंने कहा,

    “डराने, धमकाने और मानहानि के नोटिस भेजने से सच्चाई नहीं रुकती।”

    कौन हैं मृत्युंजय शर्मा ?

    • झारखंड भाजपा के इलेक्शन मैनेजमेंट प्रमुख हैं।
    • बीआईटी मेसरा और एक्सएलआरआई, जमशेदपुर से पढ़ाई की है।
    • पूर्व में एशियन पेंट्स में काम कर चुके हैं और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के साथ भाजपा संगठन में कार्यरत रहे हैं।
    • ‘Broken Promises’ किताब के ज़रिए उन्होंने बिहार की राजनीति की कथित काली परतों को सामने लाने की कोशिश की है।

    यह मामला केवल एक मानहानि नोटिस का नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा, इतिहास के पुनर्पाठ और सियासी समीकरणों के टकराव का प्रतीक बन चुका है। अब देखना यह है कि यह विवाद अदालत की चौखट तक पहुंचता है या सियासत की गलियों में और गहराता है।

     

  • बोकारो: अवैध हथियार फैक्ट्री का भंडाफोड़

     बंगाल-बिहार के नेटवर्क से जुड़ी थी सप्लाई चेन, दो गिरफ्तार, मुख्य आरोपी फरार

    Key points:

    🔗 बोकारो में पकड़ी गई गन फैक्ट्री, बांग्लादेश तक होती थी हथियारों की सप्लाई.
    🔗 धनबाद में भी पकड़े गए थे अवैध हथियार, बंगाल और बिहार कनेक्शन उजागर.

     By The News Post4U | परवेज़ आलम | 20 जून 2025

    झारखंड के बोकारो जिले में सुरक्षा एजेंसियों को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। कोलकाता एसटीएफ और रांची एटीएस की संयुक्त कार्रवाई में बेरमो अनुमंडल क्षेत्र के जरीडीह बाजार स्थित एक पुराने व्यवसायिक परिसर में चल रही अवैध गन फैक्ट्री का पर्दाफाश किया गया है। इस छापेमारी में हथियार निर्माण से जुड़ा बड़ा नेटवर्क सामने आया है, जिसकी डोरें बिहार से लेकर बांग्लादेश तक फैली हुई थीं।

    मैरेज हॉल की आड़ में चल रहा था हथियारों का कारखाना.

    यह अवैध फैक्ट्री जरीडीह पश्चिमी पंचायत अंतर्गत कलाली रोड पर स्थित ‘कावेरी मैरेज पैलेस’ और उसके ठीक सामने स्थित एक गोदाम में संचालित की जा रही थी। छापेमारी के दौरान वहां से बड़ी संख्या में अर्धनिर्मित हथियार, उनके पुर्जे, हथियार निर्माण में उपयोग की जाने वाली लेथ मशीन, कच्चा माल और करीब 50 कार्टून अवैध शराब जब्त की गई है। इस पूरी कार्रवाई में यह भी सामने आया है कि उक्त स्थल पर लंबे समय से हथियार निर्माण का काम चल रहा था और इसे कबाड़ व्यवसाय की आड़ में छुपाया गया था।

    बिहार से लाए गए थे कुशल कारीगर.

    फैक्ट्री में काम कर रहे दो हथियार बनाने वाले कारीगरों को गिरफ्तार किया गया है, जिनकी पहचान बिहार के मुंगेर और खगड़िया जिलों के रहने वाले के रूप में हुई है। दोनों ही इस अवैध धंधे में प्रशिक्षित और तकनीकी दक्षता रखते हैं। वहीं इस पूरे ऑपरेशन का मास्टरमाइंड और मैरेज हॉल का संचालक सूरज साव मौके से फरार हो गया है। उसकी गिरफ्तारी के लिए देर रात तक छापेमारी जारी रही।

    इंटरस्टेट और इंटरनेशनल नेटवर्क की पुष्टि.

    सूत्रों के अनुसार यह गन फैक्ट्री सिर्फ स्थानीय स्तर पर ही नहीं बल्कि अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हथियारों की आपूर्ति में शामिल थी। बंगाल में हाल ही में जब्त किए गए अवैध हथियारों के बाद एसटीएफ ने इस नेटवर्क को ट्रैक करते हुए बोकारो के इस ठिकाने तक पहुंच बनाई। बताया जा रहा है कि इस नेटवर्क के जरिए तैयार हथियारों की सप्लाई बांग्लादेश जैसे देशों तक भी की जा रही थी।

    लंबे समय से चल रही थी खुफिया निगरानी.

    कोलकाता एसटीएफ और रांची एटीएस की टीमें बीते दो-तीन दिनों से गुप्त रूप से इस क्षेत्र में जमी हुई थीं और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी रख रही थीं। जैसे ही ठोस जानकारी प्राप्त हुई, दोनों टीमों ने स्थानीय पुलिस—बेरमो थाना और गांधीनगर थाना के सहयोग से एक सुनियोजित तरीके से छापा मारा। चारों ओर से इलाके को घेर कर मैरेज हॉल और गोदाम में एक साथ दबिश दी गई।

    पहले भी महुदा में हुई थी बरामदगी.

    गौरतलब है कि इससे पहले भी 15 दिन पूर्व इसी एसटीएफ टीम ने धनबाद के महुदा थाना क्षेत्र में भारी मात्रा में अवैध हथियार बरामद किए थे। उस कार्रवाई से मिले सुरागों को जोड़ते हुए अब यह बोकारो ऑपरेशन अंजाम दिया गया, जिससे इस बड़े नेटवर्क की परतें खुलने लगी हैं।

    सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने में जुट गई हैं। गिरफ्तार कारीगरों से पूछताछ की जा रही है और फरार मुख्य आरोपी सूरज साव की गिरफ्तारी के लिए कई जगहों पर दबिश दी जा रही है। इस मामले में और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

     

     

  • हेमंत सोरेन-जद यू नेता अशोक चौधरी की मुलाकात ने बढ़ाई सियासी सरगर्मी

    महागठबंधन में अनदेखी से गुस्से मे JMM.

    परवेज़ आलम,राजनीतिक विश्लेषक , द न्यूज़ पोस्ट4U

    बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन की तैयारियां ज़ोरों पर हैं, लेकिन इन बैठकों में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की गैरमौजूदगी ने सियासी समीकरणों में हलचल पैदा कर दी है। इसी बीच बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री और JDU नेता अशोक चौधरी की झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है।

    शिष्टाचार मुलाकात या रणनीतिक संदेश?

    अशोक चौधरी की यह मुलाकात 13 जून को हुई और इसकी जानकारी खुद झारखंड मुख्यमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया पर दी। कहा गया कि यह केवल “शिष्टाचार भेंट” थी, लेकिन इस मुलाकात की टाइमिंग  ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौकन्ना कर दिया है।

    एक दिन पहले यानी 12 जून को पटना में महागठबंधन की अहम बैठक आयोजित हुई थी, जिसमें RJD, कांग्रेस और अन्य दलों ने हिस्सा लिया, मगर JMM को आमंत्रित नहीं किया गया। इससे पार्टी की नाराजगी अब सार्वजनिक हो गई है।

    JMM ने उठाए सवाल, भेजा सियासी संदेश.

    JMM के महासचिव विनोद पांडे ने साफ तौर पर कहा कि पार्टी बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में है, लेकिन उन्हें अब तक न तो बैठक में बुलाया गया और न ही चर्चा में शामिल किया गया। उन्होंने यह भी जोड़ा कि गठबंधन में झामुमो की उपेक्षा करना कई सवाल खड़े करता है।
    झामुमो प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि पार्टी बड़े फैसले पर विचार कर रही है और जल्द ही अगला कदम उठाया जाएगा।

    RJD की दो टूक – ‘जहां गठबंधन, वहीं बैठक’

    दूसरी ओर RJD ने भी स्पष्ट कर दिया है कि बिहार की गठबंधन बैठकें उन्हीं दलों के साथ होंगी, जो महागठबंधन का सक्रिय हिस्सा हैं। RJD के नेताओं ने JMM को सीधी चुनौती देते हुये कहा है कि अगर झारखंड मुक्ति मोर्चा को खुद पर इतना भरोसा है, तो अकेले चुनाव मैदान में उतरकर अपनी ताकत दिखाए। झामुमो की बिहार में चुनाव लड़ने की इच्छा पर RJD के तेवर साफ तौर पर ‘आर या पार’ के संकेत दे रहे हैं।

    JMM की नजर सीमावर्ती सीटों पर.

    JMM बिहार के झारखंड से सटे सीमावर्ती क्षेत्रों की कुछ सीटों पर चुनाव लड़ना चाहता है। इन इलाकों में पार्टी का आधार मजबूत आधार का दावा किया जा रहा है , पार्टी का दावा है कि पहले भी पार्टी के विधायक इन इलाकों से चुने जा चुके हैं। जिन सीटों पर झामुमो की नजर है, उनमें शामिल हैं:तारापुर, कटोरिया, मनिहारी, झाझा, बांका, ठाकुरगंज,रूपौली, रामपुर, बनमनखी, जमालपुर, पीरपैंती, व चकाई.

    BJP का तंज – “फुफकारता है, काटता नहीं”

    इस सियासी तकरार के बीच बीजेपी ने मौके को भुनाते हुए तंज कसा। पार्टी के बिहार सह प्रभारी दीपक प्रकाश ने JMM पर कटाक्ष करते हुए कहा, “झामुमो सिर्फ फुफकारता है, काटता नहीं। पहले भी चुनाव लड़ने की बात की थी, लेकिन न समर्थन मिला, न सीट।” बीजेपी इस पूरे घटनाक्रम को महागठबंधन की कमजोर होती एकता के संकेत के तौर पर देख रही है।

    क्या दरक रही है तेजस्वी-हेमंत की दोस्ती?

    राजनीतिक समीक्षक अब यह सवाल भी उठा रहे हैं कि क्या तेजस्वी यादव और हेमंत सोरेन के बीच की ‘पुरानी दोस्ती’ में दरार आ चुकी है? क्या JMM को महागठबंधन में अब कोई खास भूमिका नहीं दी जाएगी?
    इस मुलाकात के बाद अटकलें हैं कि हेमंत सोरेन जेडीयू या तीसरे मोर्चे के साथ नई संभावनाएं तलाश सकते हैं, जिससे बिहार की राजनीति में नया मोड़ आ सकता है।
    बिहार के चुनावी दंगल में अभी बहुत कुछ तय होना बाकी है, लेकिन झामुमो की नाराजगी और अशोक चौधरी की हेमंत सोरेन से मुलाकात ने संकेत दे दिया है कि पर्दे के पीछे बड़ी हलचल जारी है। आने वाले हफ्तों में यह साफ हो जाएगा कि झामुमो महागठबंधन का हिस्सा रहेगा, या कोई नया गठजोड़ तैयार होगा।

  • हेमंत मंत्रिमंडल में राजद कोटे के मंत्री संजय यादव की कुर्सी खतरे मे है ?

    महागठबंधन की अंदरूनी राजनीति से संतुष्ट नहीं है JMM.

    बिहार चुनाव: टकराव की दिशा में बढ़ रही है सियासत।

    परवेज़ आलम.

    हेमंत मंत्रिमंडल में राजद कोटे के मंत्री संजय यादव की कुर्सी खतरे मे है ? क्या कैबिनेट से उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा ? क्या जेएमएम बिहार चुनाव से पहले महागठबंधन से अलग हो जाएगा ? दरअसल झारखंड की सियासत में इन दिनों यह सवाल लगातार उछाले जा  रहें हैं । खासकर बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले ? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि JMM की ओर से संकेत मिल रहे हैं कि महागठबंधन की अंदरूनी राजनीति से वह संतुष्ट नहीं है, और स्थिति नहीं संभली तो राजद कोटे से मंत्री संजय यादव की झारखंड कैबिनेट से छुट्टी हो जाएगी ।

    दरअसल, हाल ही में JMM ने एक आधिकारिक बयान जारी कर यह साफ कर दिया है कि वह बिहार में राजद के रवैये से बेहद नाराज है। पार्टी ने दो टूक शब्दों में कहा है कि अगर उन्हें बिहार विधानसभा चुनाव में “सम्मानजनक भागीदारी” नहीं दी गई, तो वह 12 से 15 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारकर अकेले चुनाव लड़ेगी।

    JMM महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि महागठबंधन की किसी बैठक में पार्टी को शामिल नहीं किया गया है, यहां तक कि गठित की गई 21 सदस्यीय समन्वय समिति में भी JMM को कोई स्थान नहीं मिला। इससे पार्टी खुद को “उपेक्षित और तिरस्कृत” महसूस कर रही है।

    पार्टी ने 2019 के झारखंड विधानसभा चुनावों की याद दिलाई, जब सीमित सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद JMM ने राजद को मंत्री पद दिया था। लेकिन अब बिहार में JMM की अनदेखी की जा रही है, जो पार्टी को मंजूर नहीं है।

    बॉर्डर बेल्ट पर JMM की नजर

    JMM ने साफ तौर पर संकेत दिया है कि वह बिहार-झारखंड सीमावर्ती इलाकों — जैसे चकाई, झाझा, तारापुर, कटोरिया, बांका, मनिहारी, रूपौली, बनमनखी, जमालपुर और धमदाहा — में चुनाव लड़ना चाहती है। इन क्षेत्रों में झारखंडी संस्कृति, भाषा और आदिवासी पहचान की मजबूत मौजूदगी है, जिसका राजनीतिक लाभ JMM उठाना चाहती है।

    पार्टी के सूत्रों के मुताबिक, JMM का असली मकसद 4-5 सीटों की सम्मानजनक साझेदारी है, लेकिन ज्यादा सीटों की मांग कर वो राजनीतिक दबाव बना रही है। अगर बातचीत नहीं बनी, तो पार्टी सीमावर्ती सीटों पर राजद को सीधी चुनौती दे सकती है, और इसके झारखंड सरकार में भी असर दिख सकता है — खासकर संजय यादव की कैबिनेट में मौजूदगी पर।

    JMM का राष्ट्रीय विस्तार का एजेंडा

    झामुमो सिर्फ बिहार तक ही सीमित नहीं रहना चाहता। हाल ही में संपन्न पार्टी के केंद्रीय अधिवेशन में यह स्पष्ट कर दिया गया कि JMM अब राष्ट्रीय पहचान बनाना चाहता है। इसके तहत पार्टी बिहार के अलावा पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम और छत्तीसगढ़ में भी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।

    गौरतलब है कि अतीत में JMM का ओडिशा में छह विधायक, बिहार में एक विधायक और एक सांसद भी रह चुका है। ऐसे में पार्टी को भरोसा है कि सीमावर्ती इलाकों में उसकी पैठ उसे क्षेत्रीय से राष्ट्रीय स्तर तक ले जा सकती है।

    राजद और JMM की पुरानी साझेदारी

    JMM ने यह भी याद दिलाया कि 2024 में तेजस्वी यादव और राजद सांसद मनोज झा ने रांची आकर कई दिनों

     तक रणनीतिक बैठकों में हिस्सा लिया था। तब महागठबंधन के तहत राजद को छह सीटें मिली थीं और मंत्री पद भी। JMM को उम्मीद है कि बिहार में भी उसे उसी स्तर की हिस्सेदारी दी जाएगी।

    क्या बदलेगा बिहार का राजनीतिक समीकरण?

    JMM की सक्रियता और खुले तेवरों ने बिहार की राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है। खासकर सीमावर्ती क्षेत्रों में, जहां JMM की प्रभावशाली पकड़ है, वहां उसका अकेले उतरना राजद के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। अब देखना यह है कि आने वाले दिनों में सीटों के तालमेल को लेकर JMM और राजद के बीच कोई सहमति बनती है या फिर टकराव की दिशा में सियासत आगे बढ़ती है।

     

  • तेज प्रताप यादव RJD और परिवार से 6 साल के लिए निष्कासित

    लालू प्रसाद यादव का बड़ा फैसला, बिहार की राजनीति में मचा हलचल

    परवेज़ आलम.

    बिहार की राजनीति एक बार फिर तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को न केवल पार्टी से छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया, बल्कि उन्हें परिवार से भी अलग कर देने का ऐलान कर दिया है। इस फैसले ने न सिर्फ यादव परिवार में दरार की अटकलों को हवा दी है, बल्कि आरजेडी के भीतर आंतरिक कलह और सियासी समीकरणों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

    लालू यादव ने इस विषय पर ट्वीट करते  हुए लिखा “”निजी जीवन में नैतिक मूल्यों की अवहेलना करना हमारे सामाजिक न्याय के लिए सामूहिक संघर्ष को कमज़ोर करता है। ज्येष्ठ पुत्र की गतिविधि, लोक आचरण तथा गैर जिम्मेदाराना व्यवहार हमारे पारिवारिक मूल्यों और संस्कारों के अनुरूप नहीं है। अतएव उपरोक्त परिस्थितियों के चलते उसे पार्टी और परिवार से दूर करता हूं। अब से पार्टी और परिवार में उसकी किसी भी प्रकार की कोई भूमिका नहीं रहेगी। उसे पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित किया जाता है। अपने निजी जीवन का भला-बुरा और गुण-दोष देखने में वह स्वयं सक्षम है। उससे जो भी लोग संबंध रखेंगे वो स्वविवेक से निर्णय लें। लोकजीवन में लोकलाज का सदैव हिमायती रहा हूं। परिवार के आज्ञाकारी सदस्यों ने सावर्जनिक जीवन में इसी विचार को अंगीकार कर अनुसरण किया है।

    तेज प्रताप के निष्कासन की वजह मानी जा रही है हाल ही में वायरल हुआ वह वीडियो जिसमें वह अनुष्का यादव के साथ नजर आ रहे हैं। खबरों के मुताबिक तेज प्रताप ने इस रिश्ते को सार्वजनिक रूप से स्वीकार भी किया है। उन्होंने यह भी बताया कि वह पिछले 12 वर्षों से अनुष्का से प्रेम करते थे और अब उन्होंने उनसे विवाह कर लिया है

    तेज प्रताप की छवि: रंगीन, धार्मिक और विवादास्पद.

    तेज प्रताप यादव हमेशा से ही बिहार की राजनीति में अपनी अनोखी शैली, धार्मिक रूप और सोशल मीडिया पर सक्रियता के लिए चर्चा में रहे हैं। कभी भगवान शिव, तो कभी श्रीकृष्ण के रूप में दिखाई देना, होली पर पारंपरिक वेशभूषा पहनकर आयोजन करना—तेज प्रताप ने हमेशा खुद को अलग दिखाने की कोशिश की।

    राजनीतिक करियर की बात करें तो उन्होंने 2015 में महुआ सीट से जीत दर्ज की और नीतीश कुमार की सरकार में स्वास्थ्य मंत्री बने। फिर 2020 में हसनपुर से विधायक चुने गए और दूसरी बार नीतीश सरकार में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री का पद संभाला। हालांकि, उनकी कार्यशैली और विवादास्पद बयान अक्सर पार्टी की मुश्किलें बढ़ाते रहे।

    निजी जीवन में भी विवादों से घिरे रहे तेज प्रताप.

    तेज प्रताप का निजी जीवन भी सुर्खियों से अछूता नहीं रहा है। 2018 में उन्होंने बिहार के पूर्व मंत्री चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या राय से शादी की थी। यह रिश्ता ज्यादा लंबा नहीं चला और तलाक की प्रक्रिया अब भी अदालत में लंबित है। अब अनुष्का यादव के साथ उनकी नई शुरुआत ने राजनीतिक और पारिवारिक हलकों में भूचाल ला दिया है।

    पप्पू यादव ने तेज प्रताप का किया समर्थन, लालू के फैसले पर उठाए सवाल.

    तेज प्रताप यादव के निष्कासन के बाद जन अधिकार पार्टी (JAP) के नेता और पूर्णिया सांसद पप्पू यादव खुलकर उनके समर्थन में सामने आए हैं। उन्होंने तेज प्रताप को “ईमानदार प्रेमी” बताते हुए लालू प्रसाद यादव से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है।

    “तेज प्रताप ने कोई अपराध नहीं किया है। उन्होंने समाज के सामने सच स्वीकार किया। ऐसे में उन्हें सजा देना कहां तक उचित है?” – पप्पू यादव

    उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि देश की राजनीति में ऐसे कई नेता हैं जिन पर गंभीर आपराधिक आरोप हैं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती, जबकि तेज प्रताप को सिर्फ इसलिए निष्कासित किया गया क्योंकि उन्होंने प्रेम को स्वीकार किया

    राजनीतिक असर: RJD को फायदा या विरोधियों को मिलेगा मुद्दा?

    तेज प्रताप के निष्कासन से RJD को अनुशासन का संदेश देने का मौका मिला है, लेकिन साथ ही यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इससे पार्टी को चुनावी नुकसान होगा। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा विरोधी दलों के लिए एक बड़ा हथियार बन सकता है। वहीं, तेज प्रताप यादव के समर्थकों में इस फैसले को लेकर नाराज़गी देखी जा रही है।

    अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या तेज प्रताप कोई नया राजनीतिक विकल्प तलाशेंगे, क्या वे बगावती रुख अपनाएंगे, या फिर यह पारिवारिक कलह समय के साथ शांत हो जाएगा ।

  • गिरिडीह : हथियार फैक्ट्री का भंडाफोड़, 6 गिरफ्तार! मुंगेर से मंगाए गए थे मिस्त्री!

    रिपोर्ट-परवेज़ आलम 

    गिरिडीह के जमुआ थाना क्षेत्र में पुलिस ने मिनी गन फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है! जी हां, ये कोई मामूली वर्कशॉप नहीं, बल्कि एक ऐसी फैक्ट्री थी, जहां देसी कट्टे और पिस्टल बनाए जा रहे थे! पुलिस ने छापा मारकर यहां से 6 लोगों को गिरफ्तार किया है और भारी मात्रा में हथियार बनाने की सामग्री भी बरामद की है!

    गांव में ही चल रहा था पूरा नेटवर्क!

    पुलिस को सूचना मिली कि जमुआ थाना क्षेत्र के चपरियामो गांव में कुछ संदिग्ध गतिविधियां चल रही हैं! जब टीम ने शनिवार देर रात रेड डाली, तो वहां का नजारा चौंकाने वाला था! मो दयमुद्दीन के  अर्धनिर्मित मकान में पूरी गन फैक्ट्री चल रही थी! और खास बात ये कि यहां मुंगेर से मिस्त्री बुलाकर पिस्टल तैयार करवाई जा रही थी! पुलिस ने मौके से 10 नई पिस्टल, ड्रिलिंग मशीन, लोहे के सांचे, जेनरेटर समेत कई उपकरण बरामद किए हैं!

    40 देसी कट्टे पहले ही सप्लाई हो चुके थे!

    जांच में पता चला है कि पिछले महीने ही इस फैक्ट्री में बने 40 देसी कट्टे बिहार के मुंगेर में सलीम नाम के अपराधी को सप्लाई किए गए थे! यानी गिरिडीह से लेकर मुंगेर तक अवैध हथियारों का बड़ा नेटवर्क फैला हुआ था! पुलिस ने इस फैक्ट्री का संचालन कर रहे  मो दयमुद्दीन समेत 6 लोगों को धर दबोचा है! पूछताछ जारी है और पुलिस का कहना है कि इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं!

    अब देखना होगा कि क्या पुलिस इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म कर पाएगी या नहीं? झारखंड और बिहार में फैले अवैध हथियार तस्करी के इस खेल का पूरा सच क्या है? ये आने वाले दिनों में साफ होगा!

     

  • 24 घंटे में विजय यादव की जघन्य हत्याकांड का खुलासा,चार गिरफ्तार

    गिरिडीह पुलिस की हो रही है सराहना

    परवेज़ आलम की खास रिपोर्ट……

    गिरिडीह। पुलिस ने सिर्फ 24 घंटे में विजय यादव की जघन्य हत्याकांड का खुलासा कर दिया।  गिरिडीह पुलिस और सिमुलतला पुलिस ने न शिर्फ हत्याकांड का खुलासा किया बल्कि  चार आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया। गिरिडीह एसपी डॉ. बिमल कुमार  ने  शुक्रवार को पूरे ह्त्या कांड और अभियुक्तों की गिफ़्तरी की जानकारी मीडिया  को दी ।  पुलिस के अनुसार, हत्या की वजह पुरानी रंजिश थी।

    पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरफ्तार अभियुक्त—बाबू चंद यादव, पवन यादव, अरुण कुमार शर्मा और मनोज यादव ने मिलकर इस नृशंस हत्या को अंजाम दिया। पहले विजय को जबरन शराब पिलाई गई, फिर बोलेरो गाड़ी में ठूंसकर बिहार ले जाया गया। रास्ते में गमछे से गला घोंटकर उसकी सांसें रोक दी गईं और तलवार से हमला कर हत्या कर दी गई। इसके बाद शव को सिमुलतला के घने जंगल में फेंक दिया गया, ताकि किसी को शक न हो।

    सड़क पर उतरे लोग, पुलिस पर दबाव, 24 घंटे में खुलासा।

    विजय यादव के लापता होने की खबर मिलते ही इलाके में सनसनी फैल गई थी । जब परिजनों को शक हुआ कि विजय का अपहरण कर हत्या कर दी गई है, तो बुधवार को जिला परिषद सदस्य राजकुमार राउत और मुखिया हासिम अंसारी के नेतृत्व में सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए। उन्होंने गावां-गिरिडीह मुख्य मार्ग को जाम कर दिया और अपराधियों की गिरफ्तारी की मांग की।

    एसपी के आदेश पर बनी टीम, खोजी कुत्तों और फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट की मदद से खुलासा

    हालात की गंभीरता को देखते हुए गिरिडीह एसपी डॉ. बिमल  कुमार ने तुरंत खोरीमहुआ एसडीपीओ राजेंद्र प्रसाद के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया । छापेमारी, फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट और खोजी कुत्तों की मदद से पुलिस को अहम सुराग मिले, जिसके बाद चारों अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया।

    हत्या में प्रयुक्त हथियार, बोलेरो और मोबाइल फोन जब्त।

    गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल की गई तलवार, गमछा, बोलेरो गाड़ी और 6 मोबाइल फोन जब्त किए। पूछताछ में आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

    “विजय मुखर था, इसलिए मार दिया गया” – गांव वालों का बयान

    गांव के लोगों का कहना है कि “विजय गलत के खिलाफ हमेशा आवाज उठाता था। वह निडर था, लेकिन शायद यही उसकी सबसे बड़ी गलती बन गई।”

    पुरानी दुश्मनी का बदला: एसडीपीओ का बयान।

    खोरीमहुआ एसडीपीओ राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि विजय यादव और आरोपियों के बीच पुरानी दुश्मनी थी। इसी के चलते उसे रास्ते से हटाने की साजिश रची गई।

    गिरिडीह पुलिस की तत्परता से 24 घंटे में केस सुलझा

    गिरिडीह पुलिस ने सिर्फ 24 घंटे में इस जघन्य हत्याकांड का खुलासा कर दिया, जिससे इलाके में पुलिस की तत्परता की सराहना की जा रही है। हालांकि, इस निर्मम हत्या ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या सच बोलना अब जानलेवा हो गया है?

     

  • सम्मेद शिखर: जंगल सफारी योजना का विरोध, जैन समाज नाराज

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट ………..

    गिरिडीह:  सम्मेद शिखर में जंगल सफारी बनाने के झारखंड सरकार के फैसले से जैन समाज में गहरी नाराज़गी है। सम्मेद शिखर जैन धर्म का एक अत्यंत पवित्र स्थल है, जहां 20 तीर्थंकरों को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। जैन समुदाय का मानना है कि जंगल सफारी जैसी मनोरंजन गतिविधियों से इस पवित्र स्थल की गरिमा और शांति भंग होगी।

    जैन समाज ने झारखंड सरकार के इस फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया  है। जैन समाज के लोगों का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकार पहले ही इस स्थल को पवित्र तीर्थस्थल घोषित कर चुकी हैं, और ऐसे में जंगल सफारी शुरू करना तीर्थस्थल का अपमान होगा।

    “पवित्रता से समझौता नामंज़ूर “
    जैन धर्म संगठनों का मानना है कि सम्मेद शिखर जैसे पवित्र स्थल पर मौज-मस्ती की कोई भी गतिविधि अनुचित है। जैन समाज ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने जंगल सफारी की योजना को वापस नहीं लिया, तो  देशव्यापी आंदोलन होगा । यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन के दौरान जो भी स्थिति बनेगी, उसकी पूरी जिम्मेदारी झारखंड और केंद्र सरकार की होगी।

    पर्यटन क्षेत्र को लेकर पहले भी हुआ था विवाद।
    यह पहली बार नहीं है जब पारसनाथ क्षेत्र को लेकर विवाद हुआ हो। दो साल पहले इस क्षेत्र को पर्यटन क्षेत्र घोषित करने की कोशिश की गई थी, जिसका भी जैन समाज ने पुरजोर विरोध किया था। समुदाय का कहना है कि पर्यटन क्षेत्र बनने से मांस-मदिरा जैसे अनुचित कार्य शुरू हो सकते हैं, जिससे तीर्थस्थल की पवित्रता नष्ट होगी। हालांकि, सरकार ने इस क्षेत्र को पहले ही मांस-मदिरा निषेध क्षेत्र घोषित कर दिया है।
    बताया गया है कि 2018 में झारखंड सरकार ने पारसनाथ पर्वत को जैन समाज का पवित्र तीर्थ स्थल घोषित किया था, जबकि भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने 5 जनवरी 2023 को इसे पुनः पवित्र तीर्थ स्थल के रूप में मान्यता दी थी।

    जैन समाज का संदेश साफ है—सम्मेद शिखर जैसे पवित्र स्थल की गरिमा और शांति बनाए रखना ही उनकी प्राथमिकता है। उनका यह आंदोलन उस विरासत और श्रद्धा को बचाने के लिए है, जो इस तीर्थस्थल के साथ गहराई से जुड़ी हुई है।

     

  • झारखंड : मंइयां सम्मान योजना का भव्य आगाज कल,तीन लाख महिलाएं होंगी सहभागी

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …………………

    सोमवार को राजधानी रांची के नामकुम में झारखंड सरकार मंइयां सम्मान योजना के तहत ऐतिहासिक कार्यक्रम आयोजित करेगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस योजना का औपचारिक शुभारंभ करेंगे, जिसमें लाभुक महिलाओं के लिए मासिक सहायता राशि को बढ़ाकर ₹2500 कर दिया गया है। यह योजना महिला सशक्तिकरण की दिशा में सरकार का एक महत्वपूर्ण कदम है।

    महिलाओं के खाते में हर महीने ₹2500।

    पहले इस योजना के तहत ₹1000 मासिक दिए जाते थे, जिसे अब बढ़ाकर ₹2500 कर दिया गया है। प्रायोगिक तौर पर दिसंबर माह में कुछ लाभार्थी महिलाओं के खाते में यह राशि ट्रांसफर की गई थी। सोमवार को आयोजित कार्यक्रम में इस योजना का औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा।

    भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी आकर्षण का केंद्र।

    कार्यक्रम में झारखंड की लोक संस्कृति का भी जीवंत प्रदर्शन किया जाएगा। प्रसिद्ध नागपुरी गायक पवन राय, कुडुख गायक सुरेंद्र कुजूर और सादरी गायक इग्नेश कुमार अपनी सुरमयी प्रस्तुतियां देंगे। वहीं पारंपरिक पाइका और छऊ नृत्य जैसे लोकनृत्यों के जरिए झारखंड की सांस्कृतिक विरासत को मंच पर जीवंत किया जाएगा।

    तीन लाख महिलाओं की भागीदारी, पुख्ता सुरक्षा इंतजाम।

    इस राज्यस्तरीय समारोह में करीब तीन लाख महिलाओं के शामिल होने की उम्मीद है। भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चार हजार से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। रैप की चार कंपनियां और प्रमुख चौक-चौराहों पर क्यूआरटी टीम को आंसू गैस दस्ते के साथ तैयार रखा गया है।

    सुविधाओं और यातायात का रखा गया विशेष ध्यान।

    लाभार्थियों के लिए भोजन, पानी, और बैठने की पुख्ता व्यवस्था की गई है। वाहनों को व्यवस्थित पार्किंग स्थल पर खड़ा कराने के निर्देश दिए गए हैं। यातायात सुचारू रखने के लिए शहर के कुछ मार्गों को वन-वे किया गया है और भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है।

    प्रशासनिक तैयारियां अंतिम चरण में।

    रविवार को रांची डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने आयोजन स्थल का निरीक्षण किया और पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को समय पर ड्यूटी संभालने के निर्देश दिए। मौके पर डीडीसी दिनेश यादव, रांची एसडीओ उत्कर्ष कुमार, और ग्रामीण एसपी सुमित अग्रवाल भी मौजूद थे।

    झारखंड की संस्कृति का संदेश।

    यह समारोह झारखंड की परंपराओं और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को एक नए आयाम तक पहुंचाने का प्रयास है। मंइयां सम्मान योजना के जरिए सरकार ने महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण का जो अवसर दिया है, वह झारखंड के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है।