Category: Crime

  • गिरिडीह : दिल दहला देने वाला दोहरा हत्याकांड

    पत्नी की हत्या के बाद पति को ससुरालवालों ने पीट-पीटकर मार डाला

    By The News Post4u

    गिरिडीह जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र अंतर्गत लुकईया गांव में बुधवार की देर रात एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक पति ने पहले अपनी पत्नी की चाकू से गोदकर हत्या कर दी और फिर ससुरालवालों के हाथों खुद भी मौत का शिकार हो गया। पुलिस ने इस दोहरे हत्याकांड की जांच शुरू कर दी है और कई लोगों से पूछताछ की जा रही है।

    क्या है पूरा मामला ?

    जानकारी के अनुसार, लुकईया गांव निवासी मीणा हांसदा की शादी करीब आठ साल पहले मुफस्सिल थाना क्षेत्र के ही एक गांव के रहने वाले छोटेलाल हांसदा से हुई थी। कुछ समय से मीणा अपने मायके में रह रही थी। बुधवार की रात छोटेलाल अपनी पत्नी को ससुराल से वापस ले जाने के इरादे से वहां पहुंचा था। इस दौरान पति-पत्नी के बीच कहासुनी हो गई, जो देखते ही देखते हिंसक झगड़े में बदल गई।

    मीणा के पिता चंदलाल मुर्मू के अनुसार, छोटेलाल जबरदस्ती पत्नी को साथ ले जाने की जिद पर अड़ा था। इस बात को लेकर दोनों में बहस हुई। तभी अचानक मीणा की चीख सुनाई दी। जब परिजन दौड़कर घर के आंगन में पहुंचे, तो देखा कि मीणा लहूलुहान हालत में पड़ी थी और पेट से खून बह रहा था। पास में ही खून से सना चाकू भी मिला।

    हत्या के बाद आक्रोशित परिजनों ने की पति की पिटाई.

    मीणा को चाकू मारने के बाद छोटेलाल वहां से भागने की कोशिश करने लगा, लेकिन गांववालों और परिजनों ने उसे पकड़ लिया। आक्रोशित लोगों ने उसकी जमकर पिटाई कर दी। मारपीट इतनी भीषण थी कि छोटेलाल ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

    घटना की सूचना मिलते ही मुफस्सिल थाना की पुलिस  एसडीपीओ जीतवाहन उरांव की अगुवाई में  मौके पर पहुंच गयी । पुलिस ने घटनास्थल की छानबीन की और हत्या में प्रयुक्त चाकू को बरामद कर लिया । दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

    पुलिस कर रही है मामले की पड़ताल.

    एसडीपीओ जीतवाहन उरांव ने बताया कि घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है। मृतका मीणा के माता-पिता सहित कुछ ग्रामीणों को हिरासत मे लेकर पूछताछ की जा रही है।

    मासूम बच्ची की जिंदगी पर सवाल.

    इस दोहरे हत्याकांड के बाद सबसे बड़ी चिंता अब मृत दंपति की छह साल की मासूम बेटी को लेकर है, जो अब अनाथ हो चुकी है। फिलहाल, बच्ची की देखरेख की जिम्मेदारी उसके ननिहाल वालों ने संभाली है, लेकिन यह दर्दनाक हादसा उसके जीवन में गहरा जख्म छोड़ गया है।

    यह दोहरा हत्याकांड केवल एक पारिवारिक विवाद का नतीजा नहीं है, बल्कि यह समाज में बढ़ते गुस्से, रिश्तों में घटते धैर्य और कानून को हाथ में लेने की प्रवृत्ति की भयावह तस्वीर भी है। पुलिस अब हर एंगल से जांच कर रही है, ताकि दोषियों को कानून के कटघरे में लाया जा सके।

  • डिजिटल ठगों का नया अड्डा बना झारखंड: बिना हथकड़ी, बिना वर्दी हो रहा ‘डिजिटल अरेस्ट’

    परवेज़ आलम  for The News Post4U.

    झारखंड, जो कभी कोयले की खदानों और जंगलों के लिए पहचाना जाता था, अब एक नई पहचान के साथ सामने आ रहा है—भारत का नया साइबर क्राइम हब। यहां अब न तो खदानें चर्चा में हैं और न ही जंगल, बल्कि अब बात हो रही है उस डर की जो एक कॉल से शुरू होता है और एक करोड़ की ठगी तक पहुंच जाता है।

    जब फोन बन जाए गिरफ्तारी का वारंट.

    सोचिए, एक दिन अचानक आपके फोन पर कॉल आता है—
    “हम दिल्ली क्राइम ब्रांच से बोल रहे हैं, आपके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज हुआ है। ईडी और सीबीआई आपको ट्रैक कर रही हैं। गिरफ़्तारी कभी भी हो सकती है।”

    और फिर वीडियो कॉल पर एक फर्जी गिरफ्तारी वारंट दिखाया जाता है जिसमें आपका नाम लिखा होता है। आप डर जाते हैं, घबरा जाते हैं। और यहीं से शुरू होता है डिजिटल अरेस्ट—आपसे कहा जाता है कि अगर आप निर्दोष हैं तो “सहयोग” करिए और अपने बैंक अकाउंट से पैसे ट्रांसफर करिए ताकि वेरिफिकेशन हो सके। डर के मारे लोग अपनी मेहनत की कमाई खुद ठगों को ट्रांसफर कर देते हैं।

    झारखंड पुलिस के साइबर सेल ने ऐसे ही एक मामले में 14 मई 2025को केस दर्ज किया। जांच के दौरान पता चला कि गिरोह ने व्हाट्सएप कॉल के जरिए लोगों को ईडी का अधिकारी बनकर धमकाया और ₹1.39 करोड़ की ठगी कर ली।

    साइबर गिरोह का जाल—हिमाचल से तमिलनाडु तक.

    जांच में खुलासा हुआ कि इस गिरोह ने महिला समाज कल्याण समिति के नाम से फर्जी खाता YES बैंक में खुलवाया था, जिसमें चार दिनों में ₹3.10 करोड़ से अधिक ट्रांसफर हुआ। ये रकम देशभर के ठगे गए पीड़ितों की थी।

    अब तक 27 अलग-अलग राज्यों से शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं—हरियाणा, केरल, दिल्ली, असम, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, तेलंगाना, और खुद झारखंड।
    यह नेटवर्क इतना संगठित है कि देश के हर कोने में इसका असर दिखने लगा है।

    कई राज्यों में हुई गिरफ्तारियां.

    इस केस में झारखंड पुलिस ने तीन ठगों को गिरफ्तार किया है:

    • सुभाष शर्मा — हिमाचल प्रदेश से पकड़ा गया मुख्य आरोपी
    • बी. इशाक अहमद — तेलंगाना से
    • लालडूसंगा — मिजोरम से

    इनके पास से मोबाइल, सिम कार्ड, एटीएम और आधार कार्ड बरामद किए गए। लेकिन ठगी के इस खेल में यह केवल कुछ मोहरे हैं।

    झारखंड: साइबर क्राइम का नया ‘डिजिटल गुरुकुल’

    देवघर, दुमका, जामताड़ा, गिरिडीह और बोकारो अब सिर्फ जिले नहीं, साइबर ठगी के ब्रांड बन गए हैं। इन इलाकों के कुछ युवाओं ने बिना किसी औपचारिक शिक्षा के ‘डिजिटल बैंकिंग’ में ऐसी महारत हासिल की है, जो बड़े-बड़े इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र भी नहीं कर पाते।

    इन गांवों में न सड़कें हैं, न रोजगार, लेकिन लैपटॉप, इंटरनेट और मोबाइल फोन ने यहां के लड़कों को ‘फ्रॉडवेयर इंजीनियर’ बना दिया है। ये ठग इतनी सफाई से कॉल करते हैं—“सर, मैं बैंक से बोल रही हूं, आपका केवाईसी अपडेट करना है”—कि सुनने वाला झांसे में आ ही जाता है।

    सरकारी सिस्टम की चुनौती.

    सरकार 1930 हेल्पलाइन नंबर का प्रचार कर रही है। आईफोरसी (Indian Cyber Force Coordination App) जैसे ऐप बनाए गए हैं, जो साइबर अपराधियों को ट्रैक करने में मदद करते हैं। पर फिर भी, झारखंड के इन ‘डिजिटल अपराधियों‘ के खिलाफ जंग आसान नहीं है। हर गिरफ्तारी के साथ नए नाम उभरते हैं, नए तरीके आते हैं, और लोगों की मेहनत की कमाई फिर उड़ जाती है।

    फिर भी सवाल वही है…

    • क्या ये साइबर ठगी कभी रुकेगी?
    • क्या सरकार सिर्फ “डिजिटल इंडिया” का सपना दिखाएगी या इसके काले पक्ष से भी लड़ेगी?
    • क्या युवाओं की तकनीकी दक्षता को सही दिशा नहीं दी जा सकती?

    एक विचार कीजिए—अगर इन्हीं युवाओं को सही दिशा और रोजगार दिया जाए, तो झारखंड न केवल खनिजों का प्रदेश होगा, बल्कि भारत का डिजिटल टैलेंट हब भी बन सकता है।

    और जब अगली बार कोई कहे…

    “मैं बैंक से बोल रहा हूं…”
    तो मुस्कराकर कहिए—
    “तो मैं भी झारखंड से बोल रहा हूं!”

     

  • गिरिडीह :रिश्वतखोरी का पर्दाफाश, निदेशक अभिषेक कमल 20 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार

    By The News Post4u

    गिरिडीह: जिले के कल्याणडीह स्थित ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरएसईटीआई) में भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला सामने आया है। संस्थान के निदेशक और बैंक ऑफ इंडिया के सीनियर मैनेजर अभिषेक कमल को सीबीआई की धनबाद टीम ने 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई शुक्रवार को की गई, जिसकी पुष्टि सीबीआई एसपी पी.के. झा ने की है।

    जानकारी के मुताबिक, संस्थान परिसर में कैंटीन संचालित हो रही थी। उसी कैंटीन संचालक से अभिषेक कमल द्वारा नियमित संचालन के एवज में रिश्वत की मांग की जा रही थी। परेशान होकर संचालक ने धनबाद स्थित सीबीआई कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर सीबीआई की टीम ने मामले की गोपनीय जांच की, जिसमें घूसखोरी की पुष्टि हुई।

    जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने शुक्रवार को कल्याणडीह स्थित आरएसईटीआई कार्यालय पर छापा मारा। इस दौरान कैंटीन संचालक द्वारा जैसे ही तयशुदा 20 हजार रुपये की राशि निदेशक को सौंपी गई, टीम ने मौके पर ही अभिषेक कमल को पकड़ लिया। उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

    सीबीआई अधिकारियों के अनुसार, अभिषेक कमल हजारीबाग जिले के निवासी हैं। चूंकि हजारीबाग रांची के करीब है, इसलिए आगे की छानबीन रांची सीबीआई की टीम कर रही है। अभिषेक के निवास स्थान पर भी तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

    गौरतलब है कि आरएसईटीआई केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय और राज्य सरकार द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किया जाता है। इस संस्थान का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार और कौशल विकास का प्रशिक्षण देना है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। इस संस्थान का प्रबंधन संबंधित क्षेत्रीय बैंक ऑफ इंडिया के जिम्मे होता है।

    इस घूसकांड ने सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि आगे की जांच में और कौन-कौन इस मामले में शामिल पाए जाते हैं।

     

  • बोकारो: अवैध हथियार फैक्ट्री का भंडाफोड़

     बंगाल-बिहार के नेटवर्क से जुड़ी थी सप्लाई चेन, दो गिरफ्तार, मुख्य आरोपी फरार

    Key points:

    🔗 बोकारो में पकड़ी गई गन फैक्ट्री, बांग्लादेश तक होती थी हथियारों की सप्लाई.
    🔗 धनबाद में भी पकड़े गए थे अवैध हथियार, बंगाल और बिहार कनेक्शन उजागर.

     By The News Post4U | परवेज़ आलम | 20 जून 2025

    झारखंड के बोकारो जिले में सुरक्षा एजेंसियों को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। कोलकाता एसटीएफ और रांची एटीएस की संयुक्त कार्रवाई में बेरमो अनुमंडल क्षेत्र के जरीडीह बाजार स्थित एक पुराने व्यवसायिक परिसर में चल रही अवैध गन फैक्ट्री का पर्दाफाश किया गया है। इस छापेमारी में हथियार निर्माण से जुड़ा बड़ा नेटवर्क सामने आया है, जिसकी डोरें बिहार से लेकर बांग्लादेश तक फैली हुई थीं।

    मैरेज हॉल की आड़ में चल रहा था हथियारों का कारखाना.

    यह अवैध फैक्ट्री जरीडीह पश्चिमी पंचायत अंतर्गत कलाली रोड पर स्थित ‘कावेरी मैरेज पैलेस’ और उसके ठीक सामने स्थित एक गोदाम में संचालित की जा रही थी। छापेमारी के दौरान वहां से बड़ी संख्या में अर्धनिर्मित हथियार, उनके पुर्जे, हथियार निर्माण में उपयोग की जाने वाली लेथ मशीन, कच्चा माल और करीब 50 कार्टून अवैध शराब जब्त की गई है। इस पूरी कार्रवाई में यह भी सामने आया है कि उक्त स्थल पर लंबे समय से हथियार निर्माण का काम चल रहा था और इसे कबाड़ व्यवसाय की आड़ में छुपाया गया था।

    बिहार से लाए गए थे कुशल कारीगर.

    फैक्ट्री में काम कर रहे दो हथियार बनाने वाले कारीगरों को गिरफ्तार किया गया है, जिनकी पहचान बिहार के मुंगेर और खगड़िया जिलों के रहने वाले के रूप में हुई है। दोनों ही इस अवैध धंधे में प्रशिक्षित और तकनीकी दक्षता रखते हैं। वहीं इस पूरे ऑपरेशन का मास्टरमाइंड और मैरेज हॉल का संचालक सूरज साव मौके से फरार हो गया है। उसकी गिरफ्तारी के लिए देर रात तक छापेमारी जारी रही।

    इंटरस्टेट और इंटरनेशनल नेटवर्क की पुष्टि.

    सूत्रों के अनुसार यह गन फैक्ट्री सिर्फ स्थानीय स्तर पर ही नहीं बल्कि अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हथियारों की आपूर्ति में शामिल थी। बंगाल में हाल ही में जब्त किए गए अवैध हथियारों के बाद एसटीएफ ने इस नेटवर्क को ट्रैक करते हुए बोकारो के इस ठिकाने तक पहुंच बनाई। बताया जा रहा है कि इस नेटवर्क के जरिए तैयार हथियारों की सप्लाई बांग्लादेश जैसे देशों तक भी की जा रही थी।

    लंबे समय से चल रही थी खुफिया निगरानी.

    कोलकाता एसटीएफ और रांची एटीएस की टीमें बीते दो-तीन दिनों से गुप्त रूप से इस क्षेत्र में जमी हुई थीं और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी रख रही थीं। जैसे ही ठोस जानकारी प्राप्त हुई, दोनों टीमों ने स्थानीय पुलिस—बेरमो थाना और गांधीनगर थाना के सहयोग से एक सुनियोजित तरीके से छापा मारा। चारों ओर से इलाके को घेर कर मैरेज हॉल और गोदाम में एक साथ दबिश दी गई।

    पहले भी महुदा में हुई थी बरामदगी.

    गौरतलब है कि इससे पहले भी 15 दिन पूर्व इसी एसटीएफ टीम ने धनबाद के महुदा थाना क्षेत्र में भारी मात्रा में अवैध हथियार बरामद किए थे। उस कार्रवाई से मिले सुरागों को जोड़ते हुए अब यह बोकारो ऑपरेशन अंजाम दिया गया, जिससे इस बड़े नेटवर्क की परतें खुलने लगी हैं।

    सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने में जुट गई हैं। गिरफ्तार कारीगरों से पूछताछ की जा रही है और फरार मुख्य आरोपी सूरज साव की गिरफ्तारी के लिए कई जगहों पर दबिश दी जा रही है। इस मामले में और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

     

     

  • गिरिडीह : ज्वेलर्स लूटकांड का पुलिस ने किया खुलासा, छह अपराधी गिरफ्तार, हथियार और जेवरात बरामद

    By The News Post4U

    गिरिडीह : जमुआ थाना क्षेत्र के पोबी मोड़ के पास 22 मई को ज्वेलर्स से हुई लूट और गोलीबारी की सनसनीखेज वारदात का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। गिरिडीह पुलिस को इस मामले में बड़ी सफलता मिली है। इस कांड में शामिल छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि एक आरोपी अब भी फरार है, जिसकी तलाश में लगातार छापेमारी जारी है।

    पुलिस अधीक्षक डॉ. विमल कुमार ने आज मीडिया को  जानकारी दी कि घटना के तुरंत बाद एसडीपीओ खोरीमहुआ राजेन्द्र प्रसाद के नेतृत्व में एक विशेष छापामारी टीम गठित की गई थी। टीम ने त्वरित और गुप्त कार्रवाई कर मामले में संलिप्त सभी छह आरोपियों को धर दबोचा।

    गौर तलब है कि 22 मई 2025 की शाम को विशाल ज्वेलर्स के मालिक विशाल कुमार सोनी, अपनी दुकान बंद कर द्वारपहरी चौक से घर लौट रहे थे, पोबी मोड़ के आगे सुनसान रास्ते पर तीन अज्ञात अपराधियों ने उन्हें ओवरटेक कर रोका। अपराधी एक सफेद रंग की Apache बाइक पर सवार थे। उन्होंने पिस्टल दिखाकर विशाल को डराया और उनके पास से ₹5000 नकद और कीमती जेवरात से भरा बैग लूटने की कोशिश की। विरोध करने पर अपराधियों ने उन पर गोली चला दी, जिससे विशाल घायल हो गए। इसके बाद अपराधी बैग लेकर फरार हो गए।

    घटना की प्राथमिकी जमुआ थाना कांड संख्या 102/2025, दिनांक 22.05.2025 को धारा 300(5) BNS 2023 और 27 Arms Act के तहत दर्ज की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए गिरिडीह पुलिस ने जांच को तेज़ किया।

    कई पुराने मामलों का भी खुलासा:
    गिरफ्तार आरोपियों ने पुलिस पूछताछ में अन्य तीन घटनाओं में भी अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। इनमें शामिल हैं:

    1. जमुआ थाना कांड संख्या 60/2025, दिनांक 29.03.2025, धारा 300(4) BNS 2023
    2. जमुआ थाना कांड संख्या 90/2025, दिनांक 14.05.2025, धारा 304(2)/62/134/307 BNS 2023 एवं 27 Arms Act
    3. धनवार थाना कांड संख्या 43/2025, दिनांक 16.02.2025, धारा 309(4) BNS 2023

    बरामदगी:
    गिरफ्तार अभियुक्तों की निशानदेही पर लूट के जेवरात, दो देसी पिस्तौल, और दो मोटरसाइकिलें भी बरामद की गई हैं। इनका इस्तेमाल अपराध में किया गया था।
    गिरफ्तार सभी छह अभियुक्तों को 14 जून 2025 को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस शेष एक फरार अभियुक्त की गिरफ्तारी के लिए सघन छापामारी अभियान चला रही है।

    इस कार्रवाई ने गिरिडीह में लूट और गोलीबारी जैसे अपराधों पर लगाम कसने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित किया है। पुलिस अधीक्षक ने जनता से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें, ताकि अपराधियों पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।

  • झारखंड: एनआईए ने तीन नक्सलियों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट

    वसूली और जबरन भर्ती की साजिश में थे शामिल.

    By The News Post4u

    रांची :झारखंड में नक्सली गतिविधियों पर कड़ा प्रहार करते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने वसूली, धमकी और नक्सली संगठन में जबरन भर्ती कराने जैसे गंभीर आरोपों में तीन माओवादियों के खिलाफ पूरक आरोपपत्र (Supplementary Chargesheet) दाखिल किया है। यह चार्जशीट रांची स्थित एनआईए की विशेष अदालत में पेश की गई।

    चार्जशीट के अनुसार, आरोपितों में कृष्णा हांसदा उर्फ सौरव दा उर्फ अविनाश दा, अभिजीत कोरा उर्फ मतला कोरा उर्फ सुनील कोरा, और रामदयाल महतो उर्फ नीलेश दा उर्फ बच्चन दा शामिल हैं। ये सभी वर्ष 2023 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की ओर से रची गई आतंकवादी साजिश में शामिल थे।

    आरोपितों की भूमिका:

    • कृष्णा हांसदा — भाकपा (माओवादी) की क्षेत्रीय समिति का सदस्य था।
    • अभिजीत कोरा — संगठन के सशस्त्र कैडर में शामिल था और बिहार का निवासी है।
    • रामदयाल महतो — विशेष क्षेत्रीय समिति का सदस्य था और झारखंड का निवासी है।

    एनआईए की जांच में सामने आया कि तीनों अभियुक्त गिरिडीह जिले के पारसनाथ इलाके में संगठन की ओर से चल रही अवैध वसूली, धमकी और युवाओं को जबरन माओवादी संगठन में भर्ती करने की साजिश में सक्रिय रूप से शामिल थे। यह इलाका लंबे समय से नक्सली गतिविधियों का गढ़ रहा है।

    गिरफ्तारी और जब्ती:

    जनवरी 2023 में गिरिडीह जिले के डुमरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत लुसियो जंगल से कृष्णा हांसदा की गिरफ्तारी हुई थी। पुलिस ने उसके पास से जबरन वसूली से संबंधित नकदी, 7.65 मिमी की एक पिस्तौल और कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए थे। प्रारंभिक कार्रवाई के तहत स्थानीय पुलिस ने हांसदा, कोरा, महतो और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।

    एनआईए की जांच:

    इस मामले को जून 2023 में एनआईए ने अपने हाथ में लेते हुए पुनः पंजीकृत किया और विस्तृत जांच शुरू की। अब तक की जांच में तीनों अभियुक्तों की भूमिकाओं को पुख्ता मानते हुए यह पूरक आरोपपत्र दाखिल किया गया है।

    एनआईए के अनुसार, यह केस सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं बल्कि एक संगठित और सुनियोजित साजिश का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य राज्य में भय और अस्थिरता फैलाना था।

  • धनबाद में अवैध हथियार फैक्ट्री का भंडाफोड़, ATS की कार्रवाई में पांच गिरफ्तार

    By The News Post4u.
    धनबाद/कोलकाता : झारखंड के धनबाद जिले के महुदा थाना क्षेत्र अंतर्गत सिंगड़ा बस्ती में बुधवार देर रात अवैध हथियारों के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। पश्चिम बंगाल की एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) और झारखंड एटीएस की संयुक्त टीम ने एक मकान में संचालित हो रही अवैध मिनी गन फैक्ट्री पर छापेमारी कर बड़ी मात्रा में हथियार और हथियार निर्माण के उपकरण जब्त किए हैं। इस कार्रवाई में फैक्ट्री का संचालन कर रहे मास्टरमाइंड मुर्शिद अंसारी समेत कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार लोगों में चार आरोपी बिहार के मुंगेर जिले से हैं, जो अवैध हथियार निर्माण के लिए पहले से बदनाम है।
    ATS को अर्श मोहम्मद से मिली अहम जानकारी.
    सूत्रों के मुताबिक, यह छापेमारी पश्चिम बंगाल में पहले से चल रही एक जांच के आधार पर की गई। कुछ दिन पहले पश्चिम बंगाल एटीएस ने अर्श मोहम्मद नामक एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था, जो अवैध हथियारों के कच्चे माल की सप्लाई से जुड़ा हुआ था। अर्श से पूछताछ में यह खुलासा हुआ कि धनबाद के महुदा क्षेत्र में एक अवैध गन फैक्ट्री चलाई जा रही है, जिसके बाद बंगाल एटीएस ने झारखंड एटीएस से समन्वय कर संयुक्त कार्रवाई की।
    हथियार निर्माण करते रंगे हाथ पकड़े गए कारीगर.
    बुधवार रात की छापेमारी के समय, फैक्ट्री में मौजूद चारों कारीगर हथियार निर्माण में व्यस्त थे। कार्रवाई इतनी त्वरित और योजनाबद्ध थी कि आरोपियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। दिलचस्प बात यह रही कि जब एटीएस टीम ने इनसे पूछताछ के दौरान हथियार बनाने की प्रक्रिया समझनी चाही, तो कारीगरों ने मौके पर ही कुछ मिनटों में चार पिस्तौल तैयार कर टीम को दिखा दिए। यह देखकर एटीएस के अधिकारी भी हैरान रह गए।
    तीन हजार से अधिक हथियार जब्त होने की आशंका.
    एटीएस और पुलिस सूत्रों के अनुसार, मौके से भारी मात्रा में निर्मित और अर्द्धनिर्मित हथियार बरामद हुए हैं। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार इनकी संख्या लगभग तीन हजार हो सकती है, हालांकि पुलिस ने इस संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसके अलावा मौके से बैरल, लेथ मशीन, ड्रिल मशीन, ग्राइंडर, ग्रुप कटर, हेक्सा ब्लेड, गेज जैसे औजार तथा लोहा, तांबा, पीतल आदि धातुएं भी बरामद की गई हैं।
    महिला हिरासत में, अंतरराज्यीय तस्करी की जांच शुरू.
    इस मामले में मुर्शिद अंसारी की पत्नी हिना परवीन को भी हिरासत में लिया गया है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि इस गन फैक्ट्री में बने हथियार किन-किन राज्यों में सप्लाई किए गए। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि पश्चिम बंगाल में हाल ही में हुई एक आपराधिक घटना में महुदा में बने हथियारों का इस्तेमाल हुआ था, जिससे इस नेटवर्क का सुराग मिला।
    फैक्ट्री चलाने वाला गिरोह तकनीकी रूप से दक्ष.
    गिरफ्तार कारीगर बिहार के मुंगेर जिले से हैं, जो देश में अवैध हथियार निर्माण का कुख्यात केंद्र माना जाता है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ये सभी व्यक्ति तकनीकी रूप से अत्यंत दक्ष हैं और सुनियोजित तरीके से अवैध हथियार तैयार करते थे। यह गिरोह लंबे समय से अंतरराज्यीय स्तर पर हथियारों की आपूर्ति कर रहा था।
    मौके पर भारी पुलिस बल तैनात.
    छापेमारी के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। बाघमारा के डीएसपी पुरुषोत्तम कुमार सिंह, स्थानीय थाना पुलिस के अधिकारी, एटीएस के इंस्पेक्टर मंगल हेम्ब्रम, समीर भगत समेत सैकड़ों जवान मौजूद थे।
    पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी एटीएस.
    फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से गहन पूछताछ जारी है। पुलिस इस पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड, हथियारों के खरीदारों और सप्लाई चैन की विस्तृत जानकारी जुटाने में लगी है। एटीएस सूत्रों का मानना है कि यह महज एक केंद्र नहीं, बल्कि एक बड़े अंतरराज्यीय हथियार तस्करी नेटवर्क का हिस्सा है।

  • गिरिडीह :नक्सली बंकर से रायफल, SLR समेत भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद

    By News Post4u

    GIRIDIH: नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे सघन सर्च अभियान में गिरिडीह पुलिस और सीआरपीएफ को एक बड़ी सफलता मिली है। खुखरा थाना क्षेत्र के जोकानाला जंगल में एक नक्सली बंकर का पर्दाफाश करते हुए सुरक्षा बलों ने भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक जब्त किए हैं।

    गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने पारसनाथ पर्वत की तराई में सर्च ऑपरेशन चलाया। इस दौरान जंगल के भीतर ज़मीन के नीचे छिपा एक बंकर मिला, जिसमें नक्सलियों ने हथियारों का जखीरा छुपा रखा था। बंकर से कुल 14 हथियार बरामद किए गए हैं, जिनमें .303 बोर की रायफल, एक एसएलआर, एक 12 बोर की बंदूक और 11 सिंगल शॉट बंदूकें शामिल हैं।

    इतना ही नहीं, बंकर से 7.62 एमएम की 38 गोलियां, 9 एमएम की 10 गोलियां, गन पाउडर, बारूद, वायर और अन्य विस्फोटक सामग्री भी मिली है। बरामद हथियारों में कुछ पर संदेह है कि वे पुलिस से लूटे गए हो सकते हैं।

    गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक डॉ. विमल कुमार ने शुक्रवार को मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि इस ऑपरेशन में नक्सलियों के ठिकाने को ध्वस्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा, “यह कार्रवाई एक लंबी तैयारी और पुख्ता खुफिया सूचना के बाद संभव हो सकी। इस इलाके में नक्सल विरोधी अभियान लगातार जारी रहेगा।”

    पुलिस की इस कार्रवाई को नक्सली नेटवर्क पर एक बड़ा प्रहार माना जा रहा है। पारसनाथ पर्वत की तराई में सुरक्षा बलों की सक्रियता बढ़ा दी गई है और आगे भी इस तरह के तलाशी अभियान चलाए जाते रहेंगे।

  • झारखंड में आतंकी नेटवर्क का खुलासा – रांची से लेकर धनबाद तक फैला था जाल !

    परवेज़ आलम.  

    धनबाद/रांची।  झारखंड आतंकवाद निरोधक दस्ता [एटीएस] ने राज्य में आतंक के खिलाफ बड़ी कामयाबी हासिल की है। वासेपुर से गिरफ्तार की गई महिला संदिग्ध शबनम परवीन न केवल अलकायदा, आईएसआईएस और हिज्ब-उत-तहरीर जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों से जुड़ी रही, बल्कि इन संगठनों के झारखंड मॉड्यूल को सक्रिय रूप से संचालित करने में भी अहम भूमिका निभा रही थी।

    जांच में यह साफ हुआ है कि शबनम युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा के जरिए बहला-फुसलाकर आतंकी संगठनों में भर्ती करने का काम कर रही थी। खासकर 18 से 25 वर्ष की आयु के मुस्लिम युवाओं को वह धर्म के नाम पर गुमराह करती थी।

    चार आधार कार्ड, चार अलग उम्रें – असली पहचान पर सस्पेंस.

    एटीएस की छापेमारी के दौरान शबनम के पास से चार अलग-अलग आधार कार्ड बरामद हुए हैं, जिनमें उसकी उम्र अलग-अलग — 20, 25, 28 और 32 वर्ष दर्ज है। इससे स्पष्ट है कि वह पहचान छिपाने और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के नेटवर्क से भी जुड़ी हुई थी।

    शबनम धनबाद के गोविंदपुर की रहने वाली बताई जा रही है, लेकिन उसके मूल घर के बारे में पुलिस को कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिली है। उसने आयान जावेद नामक युवक से प्रेम विवाह किया था, जो खुद भी एक संदिग्ध आतंकी है। लेकिन शादी के बाद वह जावेद के साथ अमन सोसायटी के घर में न रहकर शमशेर नगर में किराए के मकान में रह रही थी। यहीं से वह साइबर कैफे के माध्यम से युवाओं को प्रभावित करने का कार्य करती थी।

    झारखंड में आतंकी नेटवर्क का खुलासा – रांची से लेकर धनबाद तक फैला था जाल

    शबनम अकेली नहीं थी। गौरतलब है कि एटीएस की ओर से 26 अप्रैल को धनबाद में छापेमारी कर प्रतिबंध आतंकी संगठन के आतंकी शबनम के साथ गुलफाम हसन, अयान जावेद, और मोहम्मद शहजाद आलम  को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

    इनके पास से दो पिस्तौल, 12 जिंदा कारतूस, आतंकी संगठनों से जुड़े कई दस्तावेज, किताबें, और मोबाइल-लैपटॉप बरामद किए गए हैं।

    हथियारों का लेन देन ये लोग करते ही थे, लेकिन मूल काम युवाओं को आतंकी संगठनों से जोड़ना था। इसी माड्यूल पर रांची से गिरफ्तार हुआ डॉ. इश्तियाक भी काम करता रहा है।

    झारखंड एटीएस की टीम बुधवार को धनबाद के वासेपुर से गिरफ्तार आतंकी संगठन हिज्ब उत तहरीर से जुड़े महिला समेत चार संदिग्धों को तीन दिन की रिमांड पर ली थी । एटीएस की टीम ने न्यायालय में चारों संदिग्धों को रिमांड पर लेने के लिए आवेदन दिया था। आवेदन पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने तीन दिन तक रिमांड दी है। अब इनसे एटीएस की टीम तीन दिन तक लगातार पूछताछ करेगी और उनके इरादों के साथ ही उनके संबंधों को की भी जांच की जाएगी। इसके अलावा एटीएस की टीम चारों संदिग्धों के विदेशी संबंधों की भी जांच करेगी।

    रिमांड मिलने के बाद टीम बुधवार को चारों संदिग्धों को बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा से एटीएस की टीम अपने साथ ले गई। इसके तुरंत बाद एटीएस ने चारों संदिग्धों से एटीएस ने पूछताछ शुरू कर दी है। मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम तक एटीएस उनसे पूछताछ करेगी।

    अम्मार यासर की गिरफ्तारी – इंडियन मुजाहिदीन से लेकर हिज्ब-उत-तहरीर तक का कनेक्शन.

    झारखंड एटीएस ने अम्मार यासर नामक एक संदिग्ध को भी गिरफ्तार किया है, जो पहले इंडियन मुजाहिदीन से जुड़ा रहा है। वर्ष 2014 में जोधपुर से गिरफ्तार हुआ था । यासर, हाल ही में 2024 में जेल से रिहा होने के बाद फिर से आतंकी गतिविधियों में सक्रिय हो गया था और हिज्ब-उत-तहरीर के झारखंड मॉड्यूल का हिस्सा बन गया। अयान जावेद से पूछताछ में अम्मार यासर का नाम सामने आया, जिसके आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया। झारखंड के डीजीपी अनुराग गुप्ता ने इसकी गिरफ्तारी की पुष्टि की है

    क्या है ‘हिज्ब-उत-तहरीर‘?

    1953 में यरुशलम में गठित यह आतंकी संगठन एक इस्लामिक खिलाफत स्थापित करने के उद्देश्य से काम करता है। भारत में यह संगठन 2010 में प्रतिबंधित कर दिया गया था। इसका मकसद लोकतांत्रिक सरकारों को गिराकर कट्टरपंथी इस्लामिक शासन लागू करना है।

    एटीएस की सतर्कता से टला खतरा, जांच अब विदेशी लिंक पर. 

    झारखंड एटीएस की सघन कार्रवाई से एक बड़े आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। एटीएस अब इन सभी संदिग्धों के विदेशी कनेक्शन की पड़ताल में जुटी है। शुरुआती पूछताछ में कुछ अहम जानकारियां सामने आई हैं, लेकिन यह जांच अभी जारी है।
    झारखंड जैसे शांत राज्य में आतंक की ये घुसपैठ बेहद चिंताजनक है। युवाओं को धर्म के नाम पर भटकाना, फर्जी दस्तावेज बनाना और विदेशी संगठनों से जुड़ना — ये सारी गतिविधियां अब जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। सवाल ये है कि क्या ये सिर्फ एक मॉड्यूल था? या फिर एक बड़ा नेटवर्क धीरे-धीरे सामने आने वाला है?

  • धनबाद में एटीएस की बड़ी कार्रवाई: आतंकी संगठनों से जुड़े है तार , दर्जनों से पूछताछ जारी

    धनबाद, झारखंड : शनिवार  सुबह करीब साढ़े पांच बजे शुरू हुई इस व्यापक कार्रवाई में एटीएस ने धनबाद के वासेपुर, भूली और अन्य इलाकों में 20 से अधिक स्थानों पर दबिश दी। इस अभियान में एक दंपती समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया  है  हालांकि  गिरफ़्तरी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गयी है छापेमारी के दौरान आरोपियों के पास से दो पिस्टल, 12 जिंदा कारतूस, कई मोबाइल फोन, लैपटॉप, प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े दस्तावेज और कट्टरपंथी साहित्य बरामद हुआ। इसके अलावा, करीब एक दर्जन संदिग्धों को भी हिरासत में लेकर अलग-अलग थानों में पूछताछ के लिए रखा गया है।

    युवाओं को बहकाने की साजिश.

    सूत्रों के मुताबिक, एटीएस को गुप्त सूचना मिली थी कि HTU, AQIS और ISIS जैसे संगठन झारखंड के युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथ की ओर धकेल रहे हैं और उन्हें अपने नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को हवा देने की इस साजिश का भंडाफोड़ करने के लिए धनबाद पुलिस के सहयोग से विशेष टीमें गठित कर ताबड़तोड़ छापेमारी की गई।

    डीएसपी लॉ एंड ऑर्डर नौशाद आलम के नेतृत्व में बैंकमोड़ थाना प्रभारी प्रवीण कुमार समेत कई थानों के अधिकारी इस अभियान में शामिल रहे।

    किराए के मकान में चल रही थी संदिग्ध गतिविधियाँ.

    भूली के शमशेर नगर में पकड़े गए दंपति  जनवरी महीने से किराए पर रह रहे थे। मोहल्ले के लोगों को उन्होंने आधार कार्ड बनाने का काम करने वाला बताया था, लेकिन स्थानीय लोगों से उनका खास मेलजोल नहीं था। एटीएस की छापेमारी में उनके घर से बड़ी संख्या में प्रतिबंधित किताबें और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद हुए।

    भागते हुये दोनों पकड़े गए.

    जब एटीएस ने वासेपुर और अमन सोसाइटी में दबिश दी तो  हसन और जावेद घर से फरार हो गए। दोनों ने एक स्कूटी से तोपचांची की ओर भागने की कोशिश की। लेकिन जीटी रोड सिक्स लेन ब्रह्मांडीहा फ्लाईओवर के पास एटीएस की टीम ने दोनों को धर दबोचा। तलाशी के दौरान दोनों के पास से हथियार, कारतूस, डायरी, नक्शा और मोबाइल फोन बरामद किए गए।

    सोशल मीडिया पर अफवाहों का बाजार गर्म.

    एटीएस की कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर अफवाहों का दौर शुरू हो गया। किसी ने आतंकियों के पकड़े जाने की बात लिखी, तो किसी ने धर्म और जाति को लेकर भ्रामक जानकारियां वायरल कीं। हालांकि, एटीएस और स्थानीय पुलिस ने इस पूरे मामले पर अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई बयान नहीं दिया है।

    सभी गिरफ्तार आरोपी 20-21 वर्ष के.

    गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों की उम्र महज 20-21 वर्ष है। हसन और जावेद की उम्र 21 वर्ष है। माना जा रहा है कि आतंकी संगठन जानबूझकर कम उम्र के युवाओं को अपने जाल में फंसा रहे हैं ताकि उन्हें आसानी से कट्टरपंथी विचारधारा में ढाला जा सके।

    पहली बार धनबाद में ऐसी बड़ी गिरफ्तारी.

    गौरतलब है कि भारत सरकार ने अक्टूबर 2024 में HTU, AQIS और ISIS जैसे संगठनों को प्रतिबंधित किया था। इसके बाद धनबाद में इनसे जुड़े लोगों की यह पहली बड़ी गिरफ्तारी है। सभी गिरफ्तार युवक धनबाद जिले के ही निवासी हैं।

    सीओ कार्यालय के कर्मचारी पर भी जांच.

    एटीएस ने जिन दर्जनभर लोगों को उठाया है, उनमें से एक स्थानीय सीओ कार्यालय का आउटसोर्स कर्मचारी भी बताया जा रहा है। फिलहाल, सभी संदिग्धों से गहन पूछताछ जारी है और उनके मोबाइल फोन, लैपटॉप तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की जा रही है।

    सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के बाद इस पूरे नेटवर्क के बारे में और चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।