Category: Crime

  • झारखंड में सुरक्षाबलों की बड़ी जीत: 8 नक्सली ढेर

    एक करोड़ का इनामी प्रयाग मांझी उर्फ विवेक दा मारा गया

    परवेज़ आलम.

    बोकारो/गिरिडीह: झारखंड में चल रहे नक्सल विरोधी अभियान को सोमवार को बड़ी सफलता मिली जब सुरक्षाबलों ने बोकारो के लुगू पहाड़ क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में आठ नक्सलियों को मार गिराया। इन मारे गए नक्सलियों में सबसे बड़ा नाम है प्रयाग मांझी उर्फ विवेक दा का — जो भाकपा माओवादी की सेंट्रल कमेटी का सदस्य था और झारखंड-बिहार-छत्तीसगढ़-ओडिशा के नक्सली नेटवर्क का संचालन करता था। इस पर एक करोड़ रुपए का इनाम घोषित था ।

    मुठभेड़ रविवार रात से शुरू हुई, जब खुफिया सूत्रों से सुरक्षाबलों को नक्सलियों के जमावड़े की सूचना मिली। इलाके को घेरते हुए तड़के ऑपरेशन शुरू हुआ, और भारी गोलीबारी के बाद सुरक्षाबलों ने आठ नक्सलियों को ढेर कर दिया। फरार नक्सलियों की तलाश में इलाके में अभी भी व्यापक तलाशी अभियान जारी है।

    प्रयाग मांझी उर्फ विवेक दा कौन था?

    धनबाद जिले के टुंडी प्रखंड के दलबुढ़ा गांव का रहने वाला प्रयाग मांझी, माओवादी सर्किट में “विवेक दा”, “करण दा”, “फुचना” और “नागो मांझी” जैसे नामों से जाना जाता था। उसने बेहद कम उम्र में माओवादी संगठन से जुड़ाव बना लिया था और सालों में वह संगठन का रणनीतिक दिमाग बन गया।

    वह न केवल झारखंड, बल्कि बिहार, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के नक्सली बेल्ट में सक्रिय था। गिरिडीह के पारसनाथ और बोकारो के लुगू व झुमरा पहाड़ उसके प्रभाव क्षेत्र थे। सिर्फ गिरिडीह में ही उसके खिलाफ 50 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे।

    रणनीतिकार, प्रशिक्षक और हथियारों का जानकार

    विवेक दा नक्सलियों के लिए सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि सैन्य रणनीतिकार, प्रशिक्षक और हथियारों का जानकार था। उसके दस्ते के पास एके-47, इंसास राइफल और भारी मात्रा में विस्फोटक थे। उसके साथ 50 से ज्यादा प्रशिक्षित नक्सली थे, जिनमें महिला माओवादी भी शामिल थीं।

    सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, हाल ही में उसे पारसनाथ क्षेत्र की कमान दी गई थी, ताकि वहां पुनः नक्सली गतिविधियों को सक्रिय किया जा सके।

    पत्नी भी थी माओवादी नेता, इलाज के दौरान हुई थी मौत.

    विवेक की पत्नी जया मांझी भी माओवादी संगठन में महिला विंग की प्रमुख सदस्य थी। 25 लाख की इनामी जया को गिरिडीह पुलिस ने जुलाई 2024 में धनबाद के एक निजी अस्पताल से गिरफ्तार किया था, जहां वह फर्जी नाम से गॉल ब्लैडर कैंसर का इलाज करवा रही थी। इलाज के दौरान 21 सितंबर 2024 को रांची के रिम्स अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी।

    माओवादियों को गहरा झटका.

    इस मुठभेड़ में मारे गए अन्य नक्सलियों में अरविंद यादव और साहेब राम मांझी भी शामिल थे, जो संगठन के पुराने और प्रभावशाली सदस्य थे। विवेक दा की मौत को सुरक्षाबलों के लिए न सिर्फ सैन्य सफलता, बल्कि मनोवैज्ञानिक बढ़त के रूप में देखा जा रहा है।

    झारखंड पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, यह पहली बार है जब राज्य में एक करोड़ के इनामी नक्सली को मार गिराया गया है। इससे गिरिडीह-बोकारो क्षेत्र में नक्सली नेटवर्क की कमर टूट गई है।

    लुगू और पारसनाथ: नक्सलियों का सुरक्षित अड्डा अब खतरे में.

    लुगू पहाड़ और पारसनाथ लंबे समय से नक्सलियों के सेफ जोन माने जाते रहे हैं। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में लगातार ऑपरेशनों के चलते माओवादी इन इलाकों से पीछे हटे थे। लेकिन हालिया मुठभेड़ से संकेत मिलता है कि नक्सली दोबारा इन्हीं क्षेत्रों को पुनर्जीवित करना चाहते थे।

    पुलिस ने संकेत दिए हैं कि इन इलाकों में सघन अभियान जारी रहेगा ताकि बचे-खुचे माओवादी पूरी तरह खत्म किए जा सकें।

    नक्सलवाद के अंत की ओर एक कदम.

    प्रयाग मांझी की मौत को माओवादी संगठन के लिए बहुत बड़ा धक्का माना जा रहा है। उसकी रणनीतिक पकड़, राज्य के कई जिलों में असर और नेटवर्क को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि यह झारखंड के नक्सल इतिहास में एक निर्णायक मोड़ है।

    पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अब बचे हुए माओवादियों की गिरफ्तारी और संगठन को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने के लिए ज़मीनी स्तर पर ऑपरेशन को और तेज करने की तैयारी में हैं।

  • झारखंड, दिल्ली और पश्चिम बंगाल में ईडी की बड़ी कार्रवाई, 21 ठिकानों पर छापेमारी

    परवेज़ आलम

    प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को झारखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में 21 स्थानों पर एक साथ छापेमारी कर तहलका मचा दिया। सूत्रों के अनुसार, इस छापेमारी का मुख्य उद्देश्य मेडिकल सेक्टर में हो रहे कथित भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग को उजागर करना है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत की गई।

    ईडी के अभियान में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की मौजूदगी

    संघीय जांच एजेंसी ने इस छापेमारी के दौरान केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की सुरक्षा के साथ कई ठिकानों की तलाशी ली। अधिकारियों के अनुसार, यह छापेमारी आयुष्मान भारत योजना से जुड़े एक बड़े घोटाले की जांच का हिस्सा है। ईडी की टीमों ने रांची, जमशेदपुर और कोलकाता सहित कई बड़े शहरों में छानबीन की।

    विधायक सरयू राय का समर्थन

    झारखंड के जमशेदपुर पश्चिमी विधानसभा क्षेत्र के विधायक सरयू राय ने इस कार्रवाई का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से इस घोटाले की जांच की मांग कर रहे थे और अब ईडी के कदम से संतोष महसूस कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य विभाग में पिछले पांच वर्षों में जो अनियमितताएं हुई हैं, उनकी गहराई तक जांच होनी चाहिए।

    हवाला डीलरों के ठिकानों पर भी छापेमारी

    सूत्रों की मानें तो झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी (JSAS) से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के ठिकानों के साथ-साथ कई थर्ड-पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (TPA) कंपनियों जैसे ‘एमडी इंडिया’, ‘सेफवे’ और ‘मेडी असिस्ट’ पर भी छापेमारी की गई। इसके अलावा, कोलकाता में हवाला डीलरों के कुछ ठिकानों पर भी ईडी की टीम पहुंची।

    रांची में कई स्थानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी

    ईडी की टीमों ने झारखंड की राजधानी रांची के अशोक नगर, पीपी कंपाउंड, एदलहातू, बरियातू, लालपुर और चिरौंदी जैसे इलाकों में छापेमारी की। इसके अतिरिक्त, जमशेदपुर के राष्ट्रीय राजमार्ग-33 के किनारे स्थित मैंगो क्षेत्र में एक घर और एक नर्सिंग होम की तलाशी ली गई।

    सीएजी रिपोर्ट के बाद ईडी की जांच तेज

    आयुष्मान भारत योजना में कथित अनियमितताओं की जांच भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट के आधार पर की जा रही है। सीएजी की रिपोर्ट संसद में पेश होने के बाद ईडी ने इसे संज्ञान में लिया और प्रारंभिक जांच रिपोर्ट (ECIR) दर्ज की। इसके बाद, स्वास्थ्य विभाग और झारखंड स्टेट हेल्थ सोसायटी से इस योजना में हुए घोटालों पर स्पष्टीकरण मांगा गया।

    फर्जी दावों के जरिए करोड़ों रुपये की हेराफेरी

    ईडी को संदेह है कि आयुष्मान भारत योजना के तहत अस्पतालों के पैनल में फर्जीवाड़ा किया गया और फर्जी दावों के माध्यम से बड़े पैमाने पर धनशोधन हुआ। इस योजना के तहत भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के गठजोड़ के जरिए अवैध रूप से धन अर्जित किया गया। गौरतलब है कि यह योजना केंद्र सरकार की एक प्रमुख स्वास्थ्य योजना है, जिसका उद्देश्य देशभर के नागरिकों को सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज प्रदान करना है।

    ईडी की छापेमारी से कई बड़े नामों पर गिरेगी गाज?

    ईडी की कार्रवाई के बाद कई बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि ईडी की टीमें सुबह 4 बजे से ही विभिन्न स्थानों पर सक्रिय थीं। बरियातू रोड स्थित श्यामा इनक्लेव, राधा गोविंद अपार्टमेंट, मोहराबादी स्थित बुधिया एजेंसी, सिंदुवार के ललिता ऑर्किड और अरविंद मार्क के रश्मि इनक्लेव सहित कई स्थानों पर छापेमारी की गई।

    फिलहाल, इस मामले में बन्ना गुप्ता या उनके निजी सचिव की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। ईडी अपनी जांच को और आगे बढ़ा रही है और जल्द ही और बड़े नामों के सामने आने की संभावना है।

     

  • घोड़थम्भा : हिंसक झड़प के बाद अब स्थिति पूरी तरह सामान्य

    झारखंड के गिरिडीह जिले के घोड़थम्भा में होली  के दिन हुई हिंसक झड़प  के बाद अब स्थिति पूरी तरह  सामान्य है  । इलाके मे  पुलिस का कडा पहरा है ।  गिरिडीह एसपी डॉ. विमल कुमार खुद मौके पर मौजूद रह कर  माहौल को पुरसकुन बनाने मे लगे है ।  एसपी ने बताया कि पुलिस घटना को अंजाम देने वाले उपद्रवियों की पहचान कर रही है और उन्हें जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा । उपद्रवियों की पहचान  के लिए सीसीटीवी फुटेज को खंगाला जा रहा है । इलाके मे पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है। पुलिस-प्रशासन की ओर से काफी मशक्कत के बाद स्थिति को नियंत्रण में किया जा सका। इस दौरान एसपी ने कहा कि किसी भी सूरत में शांति भंग करने वाले लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा स्थिति पूरी पुलिस प्रशासन के काबू में है। उन्होंने लोगों से अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की है। इधर डीडीसी स्मिता कुमारी ने बताया कि कुछ अज्ञात लोगों ने व्यवस्था ख़राब करने करने की कोशिश की थी, लेकिन अब सब कुछ सामान्य है। उन्होंने कहा, “कुछ दुकानों को जलाया गया है. कुछ बाइक और वाहनों में भी आग लगाई गई है. इसके पीछे जो भी वजह है, उसकी जांच की जा रही है.।

    गौरतलब है  कि होली के दिन दो पक्षों के  बीच गिरिडीह के घोड़थम्भा में विवाद ने हिंसक रूप ले लिया था  जिसके बाद पथराव और आगजनी की घटनाएं सामने आईं। उपद्रवियों ने दुकानों और वाहनों में आग लगा दी, जिससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी

    घटना की जानकारी मिलते ही गिरिडीह एसपी डॉ. विमल कुमार के नेतृत्व में खोरीमहुआ एसडीपीओ राजेंद्र प्रसाद सहित कई पुलिस थानों की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद हालात पर काबू पाया और उपद्रवियों को खदेड़ा। पूरे इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है और अन्य थाना क्षेत्रों को भी अलर्ट किया गया है।

    प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह विवाद होली के जुलूस के दौरान भड़का। जुलूस में डीजे  बजाने को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी हुई, जो जल्द ही हिंसक झड़प में बदल गई। इसके बाद उपद्रवियों ने पथराव किया और दुकानों एवं वाहनों को आग के हवाले कर दिया।

    इस घटना पर सियासी बयानबाजी भी शुरू हो गई है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने प्रशासन और सरकार को विफल करार देते हुए कहा कि त्योहारों के दौरान हिंसा एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है। उन्होंने राज्य सरकार पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया।

    इधर जेएमएम के वरिष्ठ नेता इरशाद अहमद वारिस ने कहा कि कुछ शरारती तत्व हेमंत सरकार को  बदनाम करने के लिए पर्व की  आड़ ले कर माहौल खराब करने का प्रयास करते  है । उन्होने कहा कि हेमन्त 02 की सरकार ऐसे तत्वों से निबटना जानती है । उन्होने  पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच  की मांग करते हुये कहा कि दोषी बक्से न जाएं पर निर्दोष पर झूठे मुकदमे नही हो, पुलिस प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए ।

     

  • जेल ब्रेक: सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल, 6 कक्षपाल निलंबित

    रिपोर्ट-परवेज़ आलम

    …….तो आखिर वही हुआ जिसका डर था। एक और जेल ब्रेक, एक और सुरक्षा में सेंध, और प्रशासन के हाथ-पांव फूले हुए! रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा से फरार PLFI उग्रवादी समीर तिर्की का 24 घंटे बाद भी कोई सुराग नहीं मिला। मगर सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस जेल से कैदी इतने आराम से फरार कैसे हो जाते हैं?

    तीन लेयर की सुरक्षा में आखिर सेंध कैसे?

    बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा की सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। तीन परतों की सुरक्षा व्यवस्था होने का ढोल पीटा जाता है। लेकिन हकीकत यह है कि इन दावों के बीच से ही समीर तिर्की चकमा देकर निकल गया! सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह कि जेल प्रशासन की नाक के नीचे आखिर यह हुआ कैसे? क्या यह सिर्फ लापरवाही है, या फिर कुछ और?

    जेल प्रशासन की घोर लापरवाही, 6 कक्षपाल निलंबित

    हर बार की तरह इस बार भी लापरवाही का ठीकरा जेल प्रशासन पर फूटा है। जेल आईजी सुदर्शन मंडल ने आनन-फानन में छह कक्षपालों को निलंबित कर दिया है। इनमें बीचा मुण्डा, सतन नायक, सोमन लोहार, राकेश कुमार सिंह, रामजीत महतो और गोपाल सिंह के नाम शामिल हैं। इन पर आरोप है कि इनकी लापरवाही के चलते समीर तिर्की फरार हो सका। लेकिन क्या सिर्फ इन छह लोगों की गलती है, या फिर इसमें कोई अंदरूनी मिलीभगत भी है?

    जेलर और अधीक्षक का पद खाली, फिर कौन जिम्मेदार?

    अब ज़रा इस जेल की व्यवस्था पर गौर कीजिए। बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में न तो स्थायी अधीक्षक है और न ही स्थायी जेलर। मतलब यह कि जो लोग वहां तैनात हैं, वे केवल प्रभार में काम कर रहे हैं। तो फिर सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी? क्या यह पूरा तंत्र ही ध्वस्त हो चुका है?

    कैदी निकला, कैमरे देखते रहे!

    कैदी के फरार होने का CCTV फुटेज भी सामने आया है। इसमें साफ दिख रहा है कि समीर तिर्की जेल के मुख्य गेट की ओर बढ़ रहा है। लेकिन सवाल यह है कि जब मुख्य गेट पर 10 सुरक्षाकर्मी तैनात थे, तो फिर समीर कैसे बच निकला? कहीं ऐसा तो नहीं कि किसी ने जानबूझकर इसे अनदेखा किया? क्या यह एक सुनियोजित जेल ब्रेक था?

    समीर तिर्की: कौन है यह फरार कैदी?

    गुमला का रहने वाला समीर तिर्की कोई साधारण अपराधी नहीं था। वह पहले पहाड़ी चिता नामक उग्रवादी संगठन से जुड़ा था, फिर जोनल कमांडर परमेश्वर गोप और एरिया कमांडर बसंत तिर्की के साथ कई वारदातों को अंजाम दिया। 2013 में अपहरण और हत्या के मामले में उसे पकड़ा गया था, और 2022 में उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

    प्रशासन की नींद अब तक नहीं खुली!

    24 घंटे बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। तमाम संभावित ठिकानों पर छापेमारी हो रही है, लेकिन नतीजा शून्य! रांची के बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन से लेकर गुमला स्थित उसके घर तक, हर जगह तलाशी ली जा रही है, मगर कोई सुराग नहीं।

    जेल प्रशासन पर बड़े सवाल

    1. कैसे तीन लेयर की सुरक्षा में सेंध लगी?
    2. कैमरों के सामने कैदी बाहर निकलता रहा, कोई कुछ क्यों नहीं बोला?
    3. स्थायी अधीक्षक और जेलर की पोस्टिंग क्यों नहीं हुई?
    4. क्या यह किसी बड़े षड्यंत्र का हिस्सा है?

    इन सवालों के जवाब किसके पास हैं? या फिर यह भी किसी और जेल ब्रेक की तरह धीरे-धीरे भुला दिया जाएगा? प्रशासन मौन है, सरकार मौन है, लेकिन यह मामला मौन नहीं रहेगा।

  • रिश्वत लेते दारोगा रंगे हाथ गिरफ्तार !

    एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रांची में कोतवाली थाना के दारोगा ऋषिकांत को 5,000 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया। दारोगा पर आरोप था कि वे एक व्यक्ति का जब्त मोबाइल छुड़ाने के बदले घूस मांग रहे थे।

    क्या है पूरा मामला?

    रांची के कोतवाली थाना पुलिस ने आर्म्स एक्ट के तहत एक आरोपी को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के दौरान उसका एक महंगा मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया गया। केस की जांच कर रहे दारोगा ऋषिकांत ने पीड़ित से मोबाइल वापस देने के लिए 5,000 रुपये रिश्वत की मांग की।

    पीड़ित के भाई को यह नागवार गुजरा और उसने सीधा एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई।

    शिकायत मिलते ही हरकत में आई एसीबी

    पीड़ित की शिकायत पर एसीबी ने तुरंत मामले की जांच शुरू की। जब दारोगा के खिलाफ रिश्वत मांगने के आरोप सही पाए गए, तो ACB ने जाल बिछाया।

    शिकायतकर्ता को ACB द्वारा पहले से निशान लगाए गए 5,000 रुपये के साथ दारोगा के पास भेजा गया। जैसे ही दारोगा ने पैसे लिए, वहां पहले से घात लगाए बैठी एसीबी टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया।

    अब होगी बड़ी कार्रवाई!

    फिलहाल एसीबी की टीम दारोगा से सघन पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह रिश्वतखोरी का कोई बड़ा नेटवर्क तो नहीं।

  • गिरिडीह: वाहन चोर गिरोह का भंडाफोड़, 15 चोरी की मोटरसाइकिल बरामद!

    गिरिडीह पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ वाहन चोर जिले में सक्रिय हैं। इस इनपुट के आधार पर पुलिस अधीक्षक डॉक्टर बिमल कुमार  के निर्देश पर पचम्बा थाना क्षेत्र में विशेष चेकिंग अभियान चलाया गया। इसी दौरान शाम करीब 4:50 बजे बनखंजो पुल के पास एक संदिग्ध बाइक सवार को रोकने की कोशिश की गई। पुलिस को देखते ही वह बाइक छोड़कर भागने लगा, लेकिन मुस्तैद पुलिस टीम ने तुरंत पीछा कर उसे धर दबोचा।

    गिरफ्तार चोर का खुलासा!

    पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम अभिषेक कुमार वर्णवाल उर्फ गोलू (24) बताया, जो गिरिडीह जिले के शास्त्रीनगर में रह रहा था। जब पुलिस ने बाइक के वैध कागजात मांगे, तो वह कोई दस्तावेज नहीं दिखा सका। सख्ती से पूछने पर उसने कबूल किया कि यह बाइक 18 फरवरी 2025 को भंडारीडीह से चोरी की गई थी। इतना ही नहीं, उसने ये भी माना कि गिरिडीह के पचम्बा, नगर, मुफ्फसिल और अन्य थाना क्षेत्रों से कई और मोटरसाइकिलें चोरी की गई हैं।

    घर की पार्किंग से मिलीं 5 बाइक!

    अभिषेक ने बताया कि उसने चोरी की बाइक अपने शास्त्रीनगर स्थित घर में छिपा रखी हैं। पुलिस ने उसके बताए ठिकाने पर छापेमारी की, जहां 5 चोरी की मोटरसाइकिल बरामद की गईं।

    और भी चौंकाने वाला खुलासा!

    अभिषेक ने पुलिस को बताया कि कुछ चोरी की बाइक चंद्रमंडी थाना क्षेत्र के ग्राम सिमरा निवासी लाला पासवान उर्फ लखन पासवान के पास हैं, जबकि कुछ बाइकों को चंद्रमंडी के ग्राम बाम्दा के जंगल में छिपाया गया है।

    जंगल और साथी के घर से मिलीं और मोटरसाइकिलें

    पुलिस ने तुरंत दोनों जगह छापेमारी की और 9 और बाइक बरामद कर लीं—
    ✅ लाला पासवान के घर से 5 बाइक
    ✅ सुनसान जंगल से 4 बाइक

    कुल 15 चोरी की बाइक बरामद, जांच जारी!

    अब तक कुल 15 चोरी की मोटरसाइकिल बरामद की जा चुकी हैं, और बाकी चोरी की गाड़ियों की तलाश में छापेमारी जारी है।

    अभिषेक कुमार वर्णवाल उर्फ गोलू को गिरफ्तार कर लिया गया है, और उसके खिलाफ पचम्बा थाना में कांड संख्या 26/25, दिनांक 27.02.2025 को धारा 303(2)/317(5)/210(a)/336(3) BNS के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।

  • गिरिडीह : हथियार फैक्ट्री का भंडाफोड़, 6 गिरफ्तार! मुंगेर से मंगाए गए थे मिस्त्री!

    रिपोर्ट-परवेज़ आलम 

    गिरिडीह के जमुआ थाना क्षेत्र में पुलिस ने मिनी गन फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है! जी हां, ये कोई मामूली वर्कशॉप नहीं, बल्कि एक ऐसी फैक्ट्री थी, जहां देसी कट्टे और पिस्टल बनाए जा रहे थे! पुलिस ने छापा मारकर यहां से 6 लोगों को गिरफ्तार किया है और भारी मात्रा में हथियार बनाने की सामग्री भी बरामद की है!

    गांव में ही चल रहा था पूरा नेटवर्क!

    पुलिस को सूचना मिली कि जमुआ थाना क्षेत्र के चपरियामो गांव में कुछ संदिग्ध गतिविधियां चल रही हैं! जब टीम ने शनिवार देर रात रेड डाली, तो वहां का नजारा चौंकाने वाला था! मो दयमुद्दीन के  अर्धनिर्मित मकान में पूरी गन फैक्ट्री चल रही थी! और खास बात ये कि यहां मुंगेर से मिस्त्री बुलाकर पिस्टल तैयार करवाई जा रही थी! पुलिस ने मौके से 10 नई पिस्टल, ड्रिलिंग मशीन, लोहे के सांचे, जेनरेटर समेत कई उपकरण बरामद किए हैं!

    40 देसी कट्टे पहले ही सप्लाई हो चुके थे!

    जांच में पता चला है कि पिछले महीने ही इस फैक्ट्री में बने 40 देसी कट्टे बिहार के मुंगेर में सलीम नाम के अपराधी को सप्लाई किए गए थे! यानी गिरिडीह से लेकर मुंगेर तक अवैध हथियारों का बड़ा नेटवर्क फैला हुआ था! पुलिस ने इस फैक्ट्री का संचालन कर रहे  मो दयमुद्दीन समेत 6 लोगों को धर दबोचा है! पूछताछ जारी है और पुलिस का कहना है कि इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं!

    अब देखना होगा कि क्या पुलिस इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म कर पाएगी या नहीं? झारखंड और बिहार में फैले अवैध हथियार तस्करी के इस खेल का पूरा सच क्या है? ये आने वाले दिनों में साफ होगा!

     

  • देवघर AIIMS के नर्सिंग अधिकारी से Telegram पर लिंक भेजकर 10 लाख रुपये की ठगी

    झारखंड में साइबर ठगी का कहर जारी, एम्स देवघर के नर्सिंग अधिकारी बने शिकार

    झारखंड में साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ताजा घटना में, एम्स देवघर के एक नर्सिंग अधिकारी साइबर अपराधियों के जाल में फंस गए और 10.82 लाख रुपये की ठगी का शिकार हो गए। ठगों ने उन्हें Telegram लिंक भेजकर अपने जाल में फंसाया और धीरे-धीरे बड़ी रकम ऐंठ ली।

    Telegram लिंक से हुई ठगी

    मामला 8 फरवरी का है, जब एम्स देवघर में कार्यरत नर्सिंग अधिकारी दिनेश चौधरी को एक Telegram लिंक भेजा गया। यह लिंक “Amazon Working Benefit Group” से जुड़ा था, जिससे जुड़ने के बाद उन्हें ऑनलाइन टास्क करने के लिए प्रेरित किया गया। शुरुआत में उन्हें अमेज़न कार्ट में कपड़े और खिलौने जोड़ने का काम सौंपा गया और इसके बदले 150 रुपये दिए गए।

    ठगी का तरीका

    धीरे-धीरे ठगों ने नर्सिंग अधिकारी से अधिक टास्क पूरा करने के लिए पैसे जमा करने के लिए कहा। इस दौरान, उन्होंने पांच बार में 28,500 रुपये जमा करवाए। इसके बाद, क्रेडिट स्कोर सुधारने के नाम पर 2 लाख रुपये और फिर क्रिप्टो करेंसी फंड ट्रांसफर व सरकारी टैक्स के नाम पर 1,55,856 रुपये ऐंठ लिए।

    इतना ही नहीं, ठगों ने झांसा दिया कि उनकी कमाई का रिटर्न 6,23,427 रुपये हो चुका है, लेकिन वह उनके खाते में नहीं आए। इसके बाद वीआईपी चैनल अकाउंट खोलने के बहाने 80,000 रुपये और सिक्योरिटी चार्ज के नाम पर 25,000 रुपये की मांग की गई। इस तरह, कुल मिलाकर नर्सिंग अधिकारी से 10.82 लाख रुपये की ठगी कर ली गई।

    साइबर थाना में दर्ज हुई शिकायत

    ठगी का अहसास होने पर दिनेश चौधरी ने तुरंत साइबर थाना में शिकायत दर्ज करवाई और एनसीआरपी (National Cyber Crime Reporting Portal) पर भी मामला रिपोर्ट किया। फिलहाल, पुलिस इस मामले की जांच में जुटी हुई है और साइबर ठगों का पता लगाने का प्रयास कर रही है।

    सावधानी बरतें, साइबर ठगों से बचें!
    ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों को देखते हुए, लोगों को अनजान Telegram लिंक, व्हाट्सएप ग्रुप और अन्य ऑनलाइन जॉब ऑफर्स से सतर्क रहने की जरूरत है। किसी भी संदिग्ध लिंक या स्कीम में बिना जांच-पड़ताल के शामिल न हों और किसी भी अनजान व्यक्ति को पैसे न भेजें।

  • फर्जी वेबसाइट के जरिए साइबर ठगों ने 1523 पदों पर निकाली फर्जी वैकेंसी, साइबर थाना में शिकायत दर्ज

    झारखंड में फर्जी वेबसाइट के जरिए 1523 पदों पर भर्ती का झांसा, 

    झारखंड में साइबर अपराधियों ने फर्जी वेबसाइट बनाकर 1523 पदों पर भर्ती का फर्जी विज्ञापन जारी किया है। जैसे ही यह मामला सामने आया, राज्य स्तरीय कृषि प्रबंधन, प्रसार सह प्रशिक्षण संस्थान (समेति), झारखंड के निदेशक विकास कुमार ने साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई और कॉपीराइट उल्लंघन की रिपोर्ट भी दी है।

    फर्जी वेबसाइट www.jharkhandagri.com पर नेशनल मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन एंड टेक्नोलॉजी, झारखंड के नाम पर ब्लॉक टेक्नोलॉजी मैनेजर (BTM), असिस्टेंट टेक्नोलॉजी मैनेजर (ATM), और असिस्टेंट क्लर्क पदों पर भर्ती की सूचना दी गई है। जबकि समेति की आधिकारिक वेबसाइट www.sameti.org है, जहां से ही सभी सरकारी सूचनाएं जारी की जाती हैं।

    फर्जी और असली वेबसाइट के डिजाइन में मामूली अंतर हैं, जिससे लोग आसानी से धोखे में आ सकते हैं। असली वेबसाइट पर केवल झारखंड सरकार का लोगो दाईं ओर होता है, जबकि फर्जी वेबसाइट पर बाईं ओर झारखंड सरकार का लोगो और दाईं ओर अशोक स्तंभ भी दिया गया है। इसके अलावा, फर्जी वेबसाइट पर भर्ती से संबंधित स्क्रॉलिंग नोटिस और ऑनलाइन आवेदन लिंक दिया गया है, जिस पर क्लिक करने पर रजिस्ट्रेशन फॉर्म खुलता है और आवेदन शुल्क भी मांगा जाता है।

    शुल्क की दरें इस प्रकार रखी गई हैं:
    🔹 जनरल और ईडब्ल्यूएस – ₹300
    🔹 ओबीसी और ईबीसी – ₹250
    🔹 एससी और एसटी – ₹100

    फर्जी वेबसाइट के विज्ञापन में कई स्पेलिंग मिस्टेक और गलत जानकारियां हैं, जिससे इसका फर्जीवाड़ा उजागर होता है। समेति ने लोगों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक वेबसाइट और अखबारों में प्रकाशित सूचना पर ही भरोसा करें। किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें और सतर्क रहें।

  • गिरिडीह में ट्रेन पर पथराव, जानिए क्या है मामला।

    गिरिडीह (झारखंड): गोड्डा से दिल्ली जाने वाली ट्रेन पर जमुआ स्टेशन पर पत्थरबाजी की घटना हुई। बताया जा रहा है कि ट्रेन में जगह नहीं मिलने और दरवाजे न खुलने से नाराज यात्रियों और भीड़ ने पथराव कर दिया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कुछ लोग ट्रैक पर भी आ गए, जिससे अफरा-तफरी मच गई।

    ट्रेन में चढ़ने की कोशिश में हंगामा

    यह साप्ताहिक ट्रेन गोड्डा से रवाना होकर गिरिडीह होते हुए दिल्ली जाती है। बुधवार दोपहर जब यह ट्रेन जमुआ स्टेशन पहुंची, तो पहले से वहां मौजूद हजारों लोग इसमें चढ़ने के लिए दौड़ पड़े। ट्रेन में पहले से भारी भीड़ थी, जिससे कई डिब्बों के दरवाजे नहीं खुल सके और यात्री चढ़ नहीं पाए। इससे गुस्साई भीड़ ट्रैक पर उतर आई, जिससे स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। हालात बिगड़ते देख आरपीएफ ने तुरंत गिरिडीह एसपी को सूचना दी।

    दरवाजे खुलते ही यात्रियों ने सीटों पर जमाया कब्जा

    गिरिडीह एसपी के निर्देश पर जमुआ थाने की पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस की मौजूदगी में ट्रेन को स्टेशन से रवाना करने की प्रक्रिया शुरू हुई। जैसे ही बोगियों के दरवाजे खुले, सैकड़ों यात्रियों ने सीटों पर कब्जा जमा लिया।

    प्रयागराज महाकुंभ जाने वालों की थी भारी भीड़

    इस भीड़ में प्रयागराज महाकुंभ जाने वाले श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल थे। इसके अलावा, दिल्ली और अन्य शहरों के लिए यात्रा करने वाले आरक्षित टिकटधारी यात्री भी थे। गिरिडीह एसपी ने बताया कि मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल भेजा गया, यात्रियों को समझाकर स्थिति को नियंत्रित किया गया और ट्रेन के सभी दरवाजे खुलवाए गए। साथ ही, जिले के अन्य रेलवे स्टेशनों पर भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है।