Category: Crime

  • Giridih: पुलिस अधीक्षक कार्यालय में मासिक अपराध सेमिनार आयोजित

    गिरिडीह:

    12 फरवरी 2025 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय स्थित सभागार में मासिक अपराध सेमिनार  का आयोजन किया गया। इस बैठक में पुलिस अधीक्षक गिरिडीह ने लंबित मामलों की समीक्षा की और उनके त्वरित निष्पादन के निर्देश दिए।

    इसके साथ ही, अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए नियमित एंटी-क्राइम चेकिंग के निर्देश दिए गए। महिला अपराधों की जांच को प्रभावी बनाने के लिए अनुसंधानकर्ताओं को बीएनएसएस के प्रावधानों के तहत प्रशिक्षण देने की बात कही गई।

    लंबित वारंट और कुर्की मामलों के शीघ्र निष्पादन पर जोर दिया गया। साथ ही, E-Sakshya ऐप में सात साल या उससे अधिक सजा वाले मामलों की घटनास्थल और गवाह के बयान को 24 घंटे के भीतर अपलोड करने का निर्देश दिया गया।

    सीएमपीएस के अंतर्गत गवाहों को निर्धारित तिथि पर न्यायालय में उपस्थित होकर गवाही देने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा, IGOT Karmayogi ऐप के उपयोग की जानकारी साझा की गई।

    डायन प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों को रोकने के लिए गांवों में जागरूकता अभियान चलाने और नाटकीय प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया गया।

    अंत में, आगामी शब-ए-बारात पर्व के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।

  • नाबालिग बच्ची का अपहरण और हत्या मे दो गिरफ्तार,कांड का हुआ उद्भेदन

    गिरिडीह: पुरानी रंजिश का बदला लेने के लिए एक नाबालिग बच्ची का अपहरण कर उसकी हत्या कर दी गई और शव को छिपाने के उद्देश्य से देवघर जिले के चितोलोढिया गांव में झाड़ियों में फेंक दिया गया। इस मामले में गिरिडीह पुलिस ने एक महिला समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार अभियुक्तों में अनिता देवी और राजकुमार हाजरा शामिल हैं,दोनों देवरी थाना के राणे वाले हैं  । पुलिस ने उनके पास से घटना में प्रयुक्त ग्लैमर मोटरसाइकिल और दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं।

    इस संबंध में पुलिस कप्तान  डॉ. बिमल कुमार ने मीडिया को बताया कि दोनों गिरफ्तार अभियुक्तों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

    एसपी ने बताया कि देवरी थाना क्षेत्र के ग्राम चतरो तुरिया टोला की एक नाबालिग बच्ची के गुम होने की सूचना मिली थी, जिसके आधार पर देवरी थाना में कांड संख्या- 08/2025 दिनांक 31.01.2025 को धारा 137(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर अनुसंधान प्रारंभ किया गया था।

    जांच के दौरान 03 फरवरी को देवघर जिले के कुंडा थाना क्षेत्र के चितोलोढिया गाँव में एक बच्ची का लावारिस शव बरामद हुआ, जिसकी पहचान देवरी थाना क्षेत्र से लापता बच्ची के रूप में की गई।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कप्तान ने कांड के त्वरित उद्भेदन के लिए एसडीपीओ खोरोमहूआ  के नेतृत्व में एक एसआईटी का गठन का जांच शुरू कराई। एसआईटी ने तकनीकी और मानवीय साक्ष्यों के आधार पर गुजरात के सूरत में छापेमारी कर एक संदिग्ध को हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान अभियुक्त ने अपराध में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली।

    गिरफ्तार अभियुक्त राजकुमार हाजरा ने अपने स्वीकारोक्ति बयान में बताया कि उसने अपने सहयोगी अनिता देवी के साथ मिलकर नाबालिग बच्ची का अपहरण किया और पुरानी रंजिश के चलते उसकी हत्या कर दी। शव को छिपाने के लिए देवघर जिले के चितोलोढिया गाँव में झाड़ियों में फेंक दिया गया।

    एसपी ने यह भी बताया कि गिरफ्तार अभियुक्त राजकुमार हाजरा के खिलाफ देवरी थाना में पहले से ही छह अन्य मामले दर्ज हैं। पुलिस ने दोनों अभियुक्तों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

    इस जघन्य अपराध से पूरे इलाके में आक्रोश व्याप्त है, वहीं पुलिस प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से जनता में कानून-व्यवस्था पर विश्वास कायम हुआ है।

  • डिजिटल अरेस्ट का शिकार होते पढ़े-लिखे लोग, युवती के साथ हुआ 24 घंटे का साइबर टॉर्चर

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट ……………

    हर दिन मोबाइल पर गृह मंत्रालय द्वारा जारी एडवाइजरी के तहत डिजिटल अरेस्ट को लेकर जागरूकता कॉलर ट्यून सुनाई देती है। अखबारों और विभिन्न कार्यक्रमों में भी इसके बारे में चर्चा होती रहती है। बावजूद इसके, पढ़े-लिखे लोग भी साइबर अपराधियों के जाल में फंसते जा रहे हैं। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला देवघर में सामने आया, जहां पीजी तक पढ़ाई कर चुकी एक युवती को डिजिटल अरेस्ट का शिकार बनाया गया।

    कैसे हुआ साइबर क्राइम?

    शुक्रवार को देवघर के विलियम्स टाउन इलाके की एक युवती को ठगों ने सीबीआई अधिकारी बनकर वीडियो कॉल पर 24 घंटे तक कैद रखा। अपराधी उसे लगातार मानसिक यातनाएं देते रहे और हर उस निर्देश का पालन करवाया, जो उन्होंने दिया। इस दौरान युवती सोई, खाई, पी और यहां तक कि अपने पिता से बात कराकर बैंक अकाउंट की डिटेल्स भी साझा कर दी।

    सौभाग्य से, वह ठगी से बच गई, लेकिन जब वह पुलिस थाने शिकायत दर्ज कराने पहुंची, तो उसका डर उसके कांपते हाथों और सहमे हुए चेहरे पर साफ झलक रहा था।

    “तुम्हारे खिलाफ केस दर्ज है” – एक फोन कॉल जिसने जिंदगी बदल दी!

    घटना 6 फरवरी की है, जब युवती की सामान्य दिनचर्या चल रही थी। तभी अचानक एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉलर ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताते हुए कहा कि “तुम्हारे खिलाफ सोशल मीडिया पर अश्लील तस्वीरें पोस्ट करने का केस दर्ज हुआ है!”

    जब युवती ने यह कहकर इनकार किया कि “मैंने ऐसा कुछ नहीं किया,” तो कॉलर ने उसे एक सीनियर अधिकारी से बात करवाई।

    इसके बाद…

    🔹 फोन पर ही एक ‘फर्जी अरेस्ट वारंट‘ भेज दिया गया।
    🔹 वीडियो कॉल पर युवती को कैद कर लिया गया।
    🔹 कहा गया कि ‘तुम्हारे घर की निगरानी की जा रही है, बाहर मत निकलना!‘
    🔹 डराने के लिए वर्दी में फोटो भी दिखाया गया।
    🔹 “अगर किसी को बताया, तो पूरे परिवार की जान खतरे में पड़ जाएगी” – धमकी दी गई।

    24 घंटे तक साइबर टॉर्चर – पिता तक को झांसे में लिया!

    गुरुवार से शुक्रवार तक युवती पूरी तरह ठगों के जाल में फंसी रही। इस दौरान उसने किसी से संपर्क करने की हिम्मत नहीं की। जब सुबह उसने बड़ी मुश्किल से अपने पिता से बात करने की गुहार लगाई, तो अपराधियों ने पिता को भी अपने जाल में फंसा लिया।

    पिता से एक बैंक अकाउंट की डिटेल्स भी ले ली गईं। लेकिन इस बीच युवती के भाई को इस घटना की जानकारी हो गई। उसने अपने दोस्त को युवती के घर भेजा, जिसने किसी तरह समझा-बुझाकर युवती को साइबर थाना जाने के लिए तैयार किया।

    अगर युवती समय रहते पुलिस के पास नहीं पहुंचती, तो वह गलत कदम उठा सकती थी।

    क्या है डिजिटल अरेस्ट?

    👉 डिजिटल अरेस्ट भारतीय कानून में मान्य नहीं है।
    👉 यह साइबर क्राइम का नया तरीका है।
    👉 अपराधी सोशल मीडिया प्रोफाइल से जानकारी चुराते हैं और फिर पीड़ित को मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हैं।
    👉 गिरफ्तारी का डर दिखाकर वीडियो कॉल के जरिए ‘घर में नजरबंद‘ कर देते हैं।
    👉 बैकग्राउंड में पुलिस स्टेशन, सीबीआई ऑफिस जैसी तस्वीरें दिखाकर पीड़ित को भ्रमित करते हैं।
    👉 किसी ऐप को डाउनलोड कराकर या डिजिटल फॉर्म भरवाकर पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।

    कैसे बचें डिजिटल अरेस्ट से?

    ✔️ अज्ञात नंबरों से आए कॉल पर सतर्क रहें।
    ✔️ किसी भी फर्जी अरेस्ट वारंट या केस के नाम पर डरें नहीं।
    ✔️ अगर कोई आपको डराकर बैंक डिटेल्स मांग रहा है, तो तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर संपर्क करें।
    ✔️ सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी, फोटो और नंबर शेयर न करें।
    ✔️ अगर कोई वीडियो कॉल पर आपको ‘कैद‘ कर रहा है, तो तुरंत किसी भरोसेमंद व्यक्ति को जानकारी दें।

    डिजिटल दुनिया में सतर्क रहना ही सुरक्षा है!

    देवघर की यह घटना सिर्फ एक चेतावनी नहीं, बल्कि सबक है कि साइबर ठग कितने शातिर हो सकते हैं। पढ़े-लिखे लोग भी इन अपराधियों के जाल में फंस सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि सतर्क रहें, जागरूक रहें और जरूरत पड़ने पर तुरंत पुलिस की मदद लें!

  • 24 घंटे में विजय यादव की जघन्य हत्याकांड का खुलासा,चार गिरफ्तार

    गिरिडीह पुलिस की हो रही है सराहना

    परवेज़ आलम की खास रिपोर्ट……

    गिरिडीह। पुलिस ने सिर्फ 24 घंटे में विजय यादव की जघन्य हत्याकांड का खुलासा कर दिया।  गिरिडीह पुलिस और सिमुलतला पुलिस ने न शिर्फ हत्याकांड का खुलासा किया बल्कि  चार आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया। गिरिडीह एसपी डॉ. बिमल कुमार  ने  शुक्रवार को पूरे ह्त्या कांड और अभियुक्तों की गिफ़्तरी की जानकारी मीडिया  को दी ।  पुलिस के अनुसार, हत्या की वजह पुरानी रंजिश थी।

    पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरफ्तार अभियुक्त—बाबू चंद यादव, पवन यादव, अरुण कुमार शर्मा और मनोज यादव ने मिलकर इस नृशंस हत्या को अंजाम दिया। पहले विजय को जबरन शराब पिलाई गई, फिर बोलेरो गाड़ी में ठूंसकर बिहार ले जाया गया। रास्ते में गमछे से गला घोंटकर उसकी सांसें रोक दी गईं और तलवार से हमला कर हत्या कर दी गई। इसके बाद शव को सिमुलतला के घने जंगल में फेंक दिया गया, ताकि किसी को शक न हो।

    सड़क पर उतरे लोग, पुलिस पर दबाव, 24 घंटे में खुलासा।

    विजय यादव के लापता होने की खबर मिलते ही इलाके में सनसनी फैल गई थी । जब परिजनों को शक हुआ कि विजय का अपहरण कर हत्या कर दी गई है, तो बुधवार को जिला परिषद सदस्य राजकुमार राउत और मुखिया हासिम अंसारी के नेतृत्व में सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए। उन्होंने गावां-गिरिडीह मुख्य मार्ग को जाम कर दिया और अपराधियों की गिरफ्तारी की मांग की।

    एसपी के आदेश पर बनी टीम, खोजी कुत्तों और फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट की मदद से खुलासा

    हालात की गंभीरता को देखते हुए गिरिडीह एसपी डॉ. बिमल  कुमार ने तुरंत खोरीमहुआ एसडीपीओ राजेंद्र प्रसाद के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया । छापेमारी, फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट और खोजी कुत्तों की मदद से पुलिस को अहम सुराग मिले, जिसके बाद चारों अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया।

    हत्या में प्रयुक्त हथियार, बोलेरो और मोबाइल फोन जब्त।

    गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल की गई तलवार, गमछा, बोलेरो गाड़ी और 6 मोबाइल फोन जब्त किए। पूछताछ में आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

    “विजय मुखर था, इसलिए मार दिया गया” – गांव वालों का बयान

    गांव के लोगों का कहना है कि “विजय गलत के खिलाफ हमेशा आवाज उठाता था। वह निडर था, लेकिन शायद यही उसकी सबसे बड़ी गलती बन गई।”

    पुरानी दुश्मनी का बदला: एसडीपीओ का बयान।

    खोरीमहुआ एसडीपीओ राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि विजय यादव और आरोपियों के बीच पुरानी दुश्मनी थी। इसी के चलते उसे रास्ते से हटाने की साजिश रची गई।

    गिरिडीह पुलिस की तत्परता से 24 घंटे में केस सुलझा

    गिरिडीह पुलिस ने सिर्फ 24 घंटे में इस जघन्य हत्याकांड का खुलासा कर दिया, जिससे इलाके में पुलिस की तत्परता की सराहना की जा रही है। हालांकि, इस निर्मम हत्या ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या सच बोलना अब जानलेवा हो गया है?

     

  • साइबर अपराधियों पर कड़ा प्रहार, फुरसोडीह गांव से तीन गिरफ्तार

    मनमोहन की रिपोर्ट………..

    गिरिडीह पुलिस साइबर अपराध के खिलाफ लगातार मोर्चा खोले हुए है, और एक बार फिर इस मुहिम में बड़ी सफलता मिली है। बेंगाबाद थाना क्षेत्र के फुरसोडीह गांव में प्रतीबिंब पोर्टल के माध्यम से मिली सूचना पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने तीन कुख्यात साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है।

    गिरफ्तार अपराधियों में अदालत अंसारी, समीर अंसारी उर्फ इसाक अंसारी और समसुद अंसारी शामिल हैं। पुलिस ने इनके पास से चार मोबाइल फोन और पांच सिमकार्ड बरामद किए हैं। गिरिडीह एसपी डॉ. बिमल कुमार ने मीडिया को र इस पूरे ऑपरेशन की जानकारी दी।

    गर्भवती महिलाओं को बनाते थे शिकार।

    गिरफ्तार अपराधियों से पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। ये गिरोह गर्भवती महिलाओं को मातृत्व राशि दिलाने के नाम पर ठगी करता था। इतना ही नहीं, एयरटेल पेमेंट बैंक का अधिकारी बनकर लोगों से ठगी करना भी इनका तरीका था।

    छापेमारी टीम में कौन-कौन थे शामिल?

    इस सफल ऑपरेशन में साइबर डीएसपी आबिद खान, विजय कुमार (साइबर थाना प्रभारी), पुनित कुमार गौतम, गुंजन कुमार, गजेन्द्र कुमार, सोनू कुमार नाग, मो. फिरोज आलम समेत अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे।

    गिरिडीह पुलिस की इस कार्रवाई ने एक बार फिर साइबर अपराधियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। यह अभियान आगे भी जारी रहेगा!

  • मंईयां सम्मान योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा ! एक ही खाते से 95 बार किया गया आवेदन

    बोकारो:हेमंत सरकार की बहुचर्चित “मंईयां सम्मान योजना” को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बोकारो डीसी विजया जाधव के निर्देश पर सामाजिक सुरक्षा विभाग द्वारा किए गए भौतिक सत्यापन में पता चला है कि एक ही बैंक खाते का इस्तेमाल कर 95 अलग-अलग नामों से आवेदन किया गया था!

    सबसे बड़ा झटका यह है कि ये सारे फर्जीवाड़े अलग-अलग प्रखंडों से किए गए, जिसमें से 67 आवेदन चास प्रखंड और चास नगर निगम क्षेत्र से जबकि 28 आवेदन गोमिया प्रखंड से किए गए थे। और हैरान करने वाली बात यह है कि सभी बैंक खाते इंडसइंड बैंक में ही खुले थे!

    पर्दाफाश: फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड कौन?

    जांच में यह सामने आया कि इन 95 फर्जी आवेदनों को पलामू जिले के मेदनीनगर स्थित एक प्रज्ञा केंद्र संचालक सुमीत कुमार के आईडी (542316220013) के जरिए किया गया था। यानी, पूरी साजिश एक ही व्यक्ति द्वारा सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई थी।

    राशन कार्ड नंबर भी निकला फर्जी!

    सत्यापन के दौरान यह भी सामने आया कि बैंक खाता संख्या 100253387047, जो कि पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर के यूसुफ नामक व्यक्ति के नाम पर है, उसका इस्तेमाल 95 बार अलग-अलग नामों से योजना का लाभ लेने के लिए किया गया।

    इतना ही नहीं, फर्जीवाड़ा यहीं खत्म नहीं हुआ—इस व्यक्ति के नाम पर दर्ज राशन कार्ड नंबर भी फर्जी पाया गया। जिला आपूर्ति पदाधिकारी ने इस बात की पुष्टि कर दी है।

    डीसी ने दिए सख्त निर्देश: होगा मामला दर्ज!

    जैसे ही इस बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ, बोकारो डीसी विजया जाधव ने तत्काल खाता धारक के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया। उन्होंने साफ कर दिया है कि सरकार की योजनाओं में किसी भी तरह की धांधली बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।

    अब सवाल उठता है—कैसे हुआ इतना बड़ा फर्जीवाड़ा?

    1. बैंक और प्रशासन की अनदेखी:
      • आखिर कैसे एक ही बैंक खाते का इस्तेमाल 95 बार अलग-अलग नामों से किया गया और बैंक को भनक तक नहीं लगी?
      • इंडसइंड बैंक से इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई?
    2. प्रज्ञा केंद्र की भूमिका संदिग्ध:
      • सुमीत कुमार जैसे लोग कैसे सरकारी योजनाओं का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं?
      • क्या सिर्फ एक प्रज्ञा केंद्र संचालक इस फर्जीवाड़े के पीछे है या फिर बड़ी साजिश का हिस्सा है?
    3. योजना की निगरानी में चूक:
      • भौतिक सत्यापन में इतनी बड़ी गड़बड़ी सामने आने के बाद, क्या अब प्रशासन और सरकार इस योजना की निगरानी और कड़ी करेगी?
      • मंईयां सम्मान योजना को लेकर सरकार का दावा था कि यह महिलाओं के लिए एक बड़ी सौगात है, लेकिन इस खुलासे ने यह भी दिखाया कि कैसे सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाकर लोग सरकारी योजनाओं का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।

    अब देखने वाली बात यह होगी कि बोकारो प्रशासन इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करता है और क्या सिर्फ छोटे स्तर पर कार्रवाई होगी या फिर इस गड़बड़ी की जड़ तक पहुंचा जाएगा?

     

  • नक्सली दंपती गिरफ्तार, सेंट्रल कमेटी के इनामी सदस्य के दस्ते से जुड़े होने का खुलासा

    झारखंड के नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षाबलों को एक बड़ी कामयाबी मिली है। नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के सेंट्रल कमेटी सदस्य और एक करोड़ के इनामी माओवादी नेता विवेक के दस्ते में शामिल पति-पत्नी को गिरिडीह पुलिस ने गिरफ्तार किया गया है। पकड़े गए नक्सलियों की पहचान तालेश्वर हांसदा उर्फ सेरमा और उनकी पत्नी मालती मुर्मू उर्फ गुड़ी उर्फ गुड़िया के रूप में हुई है। तालेश्वर गिरिडीह के जमुआ थाना क्षेत्र के गणियाडीह और मालती मधुबन थाना क्षेत्र के टेसाफुली की रहने वाली है।

    जंगली क्षेत्र में छापेमारी से गिरफ्तारी.

    गिरफ्तारी की पुष्टि गिरिडीह के एएसपी अभियान सुरजीत कुमार ने की है। उन्होंने बताया कि गिरिडीह एसपी डॉ. बिमल कुमार को सूचना मिली थी कि टेसाफुली के जंगली पहाड़ी इलाके में माओवादी दस्ते की गतिविधियां देखी गई हैं। इसके बाद एसपी और सीआरपीएफ 154 बटालियन के कमांडेंट के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया।

    टीम में एएसपी अभियान, सीआरपीएफ के सेकंड कमान अधिकारी, एसडीपीओ डुमरी, और डुमरी, पीरटांड व मधुबन के थाना प्रभारियों को शामिल किया गया। छापेमारी के दौरान नक्सली दंपती को गिरफ्तार कर लिया गया। इनके पास से 9 एमएम पिस्टल और गोलियां बरामद की गईं।

    प्रमुख नक्सली दस्ते से जुड़ाव।

    पूछताछ के दौरान दंपती ने स्वीकार किया कि वे प्रतिबंधित नक्सली संगठन के बड़े नेता प्रयाग मांझी उर्फ विवेक उर्फ करण दा के दस्ते के सक्रिय सदस्य थे। एएसपी अभियान ने बताया कि दंपती से पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं, जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    अभियान में सुरक्षाबलों की प्रभावी भूमिका।

    इस सफल अभियान में एएसपी अभियान सुरजीत कुमार, सीआरपीएफ के सेकेंड कमान अधिकारी दलजीत सिंह भाटी, एसडीपीओ डुमरी सुमित प्रसाद, सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट मनोज कुमार यादव, मधुबन थाना प्रभारी जगन्नाथ पान, पीरटांड थाना प्रभारी दीपेश कुमार, महिला चौकीदार मैनवा देवी, और सशस्त्र बलों की टीम ने हिस्सा लिया।

    पुलिस की उपलब्धि।

    इस गिरफ्तारी को पुलिस के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। माओवादी संगठन के खिलाफ चल रहे अभियान में यह कार्रवाई सुरक्षाबलों के आत्मविश्वास को और बढ़ाएगी। पूछताछ में मिली जानकारियां संगठन के अन्य सदस्यों और गतिविधियों पर चोट पहुंचाने में मददगार साबित हो सकती हैं।

    झारखंड के नक्सल प्रभावित इलाकों में इस तरह के अभियानों से पुलिस और सीआरपीएफ का ऑपरेशन माओवादियों के लिए लगातार चुनौती बनता जा रहा है।

  • झारखंड: मनचाही पोस्टिंग और ट्रांसफर कराने का झांसा देने वाला गिरोह का भंडाफोड़  

    परवेज़ आलम की खास रिपोर्ट ………..

    झारखंड में पुलिस-प्रशासन के अफसरों को मनचाही पोस्टिंग और ट्रांसफर का झांसा देकर ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। रांची पुलिस ने इस गिरोह के पाँच शातिर सदस्यों को हिरासत में लिया था पर फिलवक्त इन आरोपियों को पीआर बॉन्ड पर छोड़ दिया गया है । इस गिरोह ने  कई आईपीएस, डीएसपी और दारोगा को अपना शिकार बनाया है। पुलिस ने आरोपियों के व्हाट्सएप चैट और लेन-देन के सबूत खंगालने रही है।

    गुप्त सूचना से हुआ खुलासा.

    रांची कोतवाली थाने में दर्ज एक सनहा के आधार पर पुलिस ने इस गिरोह का पर्दाफाश किया है । खबर थी कि यह गिरोह अधिकारियों के तबादले, पोस्टिंग और ठेका मैनेज करने का झांसा देकर बड़ी रकम वसूल रहा था। इसके बाद हिंदपीढ़ी और चुटिया थाना क्षेत्रों में दबिश देकर गिरोह के प्रमुख सदस्य सज्जाद उर्फ मुन्ना और कैप्टन सिंह सलूजा को हिरासत में लिया गया। इनसे पूछताछ के बाद जमशेदपुर के अयान सरकार, हल्दीपोखर के चंदन लाल और रांची के सूर्य प्रभात को भी गिरफ्तार किया गया।

    राजनीतिक कनेक्शन से जुड़े तार।

    पुलिस की पहली जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों का राजनीतिक कनेक्शन है। अयान सरकार भाजपा नेता बाबूलाल सोरेन के कारोबारी साझेदार बताए जा रहे हैं। चंदन लाल भी सोरेन के साथ मिलकर काम करता है। वहीं, सूर्य प्रभात भाजपा युवा मोर्चा का पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष रह चुका है, जबकि कैप्टन सिंह सलूजा भाजपा के एक राज्यसभा सदस्य के करीबी माने जाते हैं।

    डेढ़ करोड़ की ठगी का शक।

    सूत्रों के मुताबिक, गिरोह ने अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग के नाम पर अब तक करीब डेढ़ करोड़ रुपये की ठगी की है। हालांकि फंसने के डर से कोई भी पीड़ित अधिकारी सामने नहीं आ रहा है, जिससे पुलिस के लिए जांच को आगे बढ़ाना चुनौतीपूर्ण हो रहा है।

    मोबाइल और चैट की जांच जारी।

    पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए हैं। व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है ताकि पता चल सके कि किन-किन अधिकारियों को ठगा गया है और यह गिरोह किस तरह से काम कर रहा था।

    सीआईडी जांच की संभावना।

    पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए सीआईडी से जांच कराए जाने की संभावना जताई जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि इस गिरोह के खिलाफ और भी ठोस सबूत जुटाए जा सकते हैं।

    आरोपियों को पीआर बॉन्ड पर छोड़ा गया।

    फिलहाल हिरासत में लिए गए आरोपियों को पीआर बॉन्ड पर छोड़ दिया गया है, लेकिन जांच जारी है। पुलिस इस गिरोह से जुड़े हर पहलू को खंगालने में जुटी है ताकि झारखंड में ऐसी ठगी के खेल पर लगाम लगाई जा सके।

    झारखंड में अधिकारियों को निशाना बनाकर चल रहे इस ठगी के खेल के भडाफोड़ ने  प्रशासनिक महकमे मे खलबली मचा दी है ।

     

  • गिरिडीह में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता: रणविजय महतो गिरफ्तार, मनोज टुडू ढेर

     

    गिरिडीह: नक्सली संगठन भाकपा माओवादी को झारखंड पुलिस ने बड़ा झटका दिया है। रीजनल कमेटी मेंबर और 15 लाख के इनामी नक्सली रणविजय महतो को गिरफ्तार कर लिया गया है। रणविजय बोकारो जिले के चंद्रपुरा थाना क्षेत्र के बेहराटांड़ का रहने वाला है। वहीं, गिरिडीह जिले के खुखरा थाना क्षेत्र के चतरो निवासी रणविजय की पत्नी शांति, जो खुद एक सक्रिय नक्सली थी, मुठभेड़ में मारी जा चुकी है।

    इसके अलावा, पीरटांड़ थाना क्षेत्र के धावाटांड़ निवासी और भाकपा माओवादी के सदस्य मनोज टुडू को भी पुलिस ने मुठभेड़ में ढेर कर दिया। पुलिस की इस कार्रवाई से न केवल गिरिडीह बल्कि पारसनाथ क्षेत्र में भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

    शीर्ष नक्सली नेताओं तक पहुंचने की उम्मीद

    रणविजय महतो की गिरफ्तारी पुलिस के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। उससे पूछताछ के जरिए संगठन के पोलित ब्यूरो मेंबर मिसिर बेसरा, केंद्रीय कमेटी के सदस्य प्रयाग मांझी उर्फ विवेक और पतिराम मांझी उर्फ अनल जैसे बड़े नेताओं तक पहुंचने की संभावना है। रणविजय का प्रभाव गिरिडीह, बोकारो और धनबाद जिलों के पारसनाथ से झुमरा इलाके तक रहा है।

    रणविजय पर बोकारो में 18, गिरिडीह में 14 और धनबाद में एक मामला दर्ज है। ये कुल 33 मामले उसकी नक्सली गतिविधियों में गहरी संलिप्तता को दर्शाते हैं। माना जा रहा है कि उसकी गिरफ्तारी के बाद संगठन के कई गुप्त राज सामने आ सकते हैं, जिससे झुमरा और सारंडा जैसे इलाकों में नक्सली गतिविधियों पर बड़ा असर पड़ सकता है।

    शांति महतो: एक कुख्यात महिला नक्सली

    रणविजय की पत्नी शांति महतो पिछले डेढ़ दशक से नक्सली संगठन में सक्रिय थी। वह झारखंड के गिरिडीह और बिहार के जमुई क्षेत्र में आतंक फैलाने के लिए जानी जाती थी। साल 2015 में भेलवाघाटी इलाके में विस्फोटक बरामदगी के मामले में शांति का नाम प्रमुखता से सामने आया था।

    गिरिडीह-डुमरी रोड पर 4 अगस्त 2010 को हुए लैंडमाइन विस्फोट में भी शांति की संलिप्तता पाई गई थी। इस हमले में पांच निजी सुरक्षा गार्ड मारे गए थे। इसके अलावा, 2023 में खुखरा थाना क्षेत्र में विस्फोटक बरामद होने पर भी शांति के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

    मुठभेड़ में मारे गए मनोज टुडू की पहचान

    पीरटांड़ थाना क्षेत्र के मुठभेड़ में मारे गए नक्सली मनोज टुडू की पहचान के लिए पुलिस ने उसके गांव जाकर परिजनों को मृतक की तस्वीर दिखाई। मनोज की मां ने उसे पहचानते हुए बताया कि वह उनका मझला बेटा था।

    पुलिस की इन कार्रवाइयों से न केवल संगठन को बड़ा नुकसान हुआ है, बल्कि झारखंड में नक्सल विरोधी अभियानों को मजबूती भी मिली है।

  • कट्टा ले कर आए थे कांड करने, पुलिस ने वारदात से पहले धर-दबोचा

    गिरिडीह: जमुआ थाना पुलिस ने समय पर कार्रवाई करते हुए एक बड़ी घटना को होने से रोक लिया। खोरीमहुआ एसडीपीओ राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि मंगलवार रात रंगामाटी निवासी इंद्रदेव कुमार वर्मा ने सूचना दी कि छह युवकों ने देसी कट्टे के साथ उनके भाई मणिलाल वर्मा पर जानलेवा हमला किया है।

    इस सूचना पर तुरंत कार्रवाई करते हुए थाना प्रभारी मणिकांत कुमार ने पुलिस बल के साथ रंगामाटी गांव में छापेमारी की। ग्रामीणों के सहयोग से दो आरोपियों को पकड़ लिया गया। पकड़े गए युवकों में रितेश पांडे (19) और अनिमेष पांडे (20), दोनों निवासी ग्राम चुंगलों, थाना जमुआ, शामिल हैं। उनके पास से एक देसी कट्टा और दो मोटरसाइकिल बरामद की गईं।

    इंद्रदेव कुमार वर्मा के आवेदन पर जमुआ थाना में कांड संख्या 03/2025 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस कांड के अन्य फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है।