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  • धनबाद में एटीएस की बड़ी कार्रवाई: आतंकी संगठनों से जुड़े है तार , दर्जनों से पूछताछ जारी

    धनबाद, झारखंड : शनिवार  सुबह करीब साढ़े पांच बजे शुरू हुई इस व्यापक कार्रवाई में एटीएस ने धनबाद के वासेपुर, भूली और अन्य इलाकों में 20 से अधिक स्थानों पर दबिश दी। इस अभियान में एक दंपती समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया  है  हालांकि  गिरफ़्तरी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गयी है छापेमारी के दौरान आरोपियों के पास से दो पिस्टल, 12 जिंदा कारतूस, कई मोबाइल फोन, लैपटॉप, प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े दस्तावेज और कट्टरपंथी साहित्य बरामद हुआ। इसके अलावा, करीब एक दर्जन संदिग्धों को भी हिरासत में लेकर अलग-अलग थानों में पूछताछ के लिए रखा गया है।

    युवाओं को बहकाने की साजिश.

    सूत्रों के मुताबिक, एटीएस को गुप्त सूचना मिली थी कि HTU, AQIS और ISIS जैसे संगठन झारखंड के युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथ की ओर धकेल रहे हैं और उन्हें अपने नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को हवा देने की इस साजिश का भंडाफोड़ करने के लिए धनबाद पुलिस के सहयोग से विशेष टीमें गठित कर ताबड़तोड़ छापेमारी की गई।

    डीएसपी लॉ एंड ऑर्डर नौशाद आलम के नेतृत्व में बैंकमोड़ थाना प्रभारी प्रवीण कुमार समेत कई थानों के अधिकारी इस अभियान में शामिल रहे।

    किराए के मकान में चल रही थी संदिग्ध गतिविधियाँ.

    भूली के शमशेर नगर में पकड़े गए दंपति  जनवरी महीने से किराए पर रह रहे थे। मोहल्ले के लोगों को उन्होंने आधार कार्ड बनाने का काम करने वाला बताया था, लेकिन स्थानीय लोगों से उनका खास मेलजोल नहीं था। एटीएस की छापेमारी में उनके घर से बड़ी संख्या में प्रतिबंधित किताबें और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद हुए।

    भागते हुये दोनों पकड़े गए.

    जब एटीएस ने वासेपुर और अमन सोसाइटी में दबिश दी तो  हसन और जावेद घर से फरार हो गए। दोनों ने एक स्कूटी से तोपचांची की ओर भागने की कोशिश की। लेकिन जीटी रोड सिक्स लेन ब्रह्मांडीहा फ्लाईओवर के पास एटीएस की टीम ने दोनों को धर दबोचा। तलाशी के दौरान दोनों के पास से हथियार, कारतूस, डायरी, नक्शा और मोबाइल फोन बरामद किए गए।

    सोशल मीडिया पर अफवाहों का बाजार गर्म.

    एटीएस की कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर अफवाहों का दौर शुरू हो गया। किसी ने आतंकियों के पकड़े जाने की बात लिखी, तो किसी ने धर्म और जाति को लेकर भ्रामक जानकारियां वायरल कीं। हालांकि, एटीएस और स्थानीय पुलिस ने इस पूरे मामले पर अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई बयान नहीं दिया है।

    सभी गिरफ्तार आरोपी 20-21 वर्ष के.

    गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों की उम्र महज 20-21 वर्ष है। हसन और जावेद की उम्र 21 वर्ष है। माना जा रहा है कि आतंकी संगठन जानबूझकर कम उम्र के युवाओं को अपने जाल में फंसा रहे हैं ताकि उन्हें आसानी से कट्टरपंथी विचारधारा में ढाला जा सके।

    पहली बार धनबाद में ऐसी बड़ी गिरफ्तारी.

    गौरतलब है कि भारत सरकार ने अक्टूबर 2024 में HTU, AQIS और ISIS जैसे संगठनों को प्रतिबंधित किया था। इसके बाद धनबाद में इनसे जुड़े लोगों की यह पहली बड़ी गिरफ्तारी है। सभी गिरफ्तार युवक धनबाद जिले के ही निवासी हैं।

    सीओ कार्यालय के कर्मचारी पर भी जांच.

    एटीएस ने जिन दर्जनभर लोगों को उठाया है, उनमें से एक स्थानीय सीओ कार्यालय का आउटसोर्स कर्मचारी भी बताया जा रहा है। फिलहाल, सभी संदिग्धों से गहन पूछताछ जारी है और उनके मोबाइल फोन, लैपटॉप तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की जा रही है।

    सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के बाद इस पूरे नेटवर्क के बारे में और चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।

  • स्वीडन में मुख्यमंत्री सोरेन का वोल्वो संयंत्र का दौरा, झारखंड में ट्रक फैक्ट्री खोलने पर मंथन

    स्पेशल कोरेस्पोंडेंट.

    रांची/गोटेनबर्ग — झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने स्वीडन दौरे के दौरान गोटेनबर्ग शहर में स्थित वोल्वो ट्रक निर्माण संयंत्र का दौरा किया। उनके साथ राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद था। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य झारखंड में औद्योगिक विकास के नए रास्ते तलाशना और राज्य में ट्रक निर्माण इकाई स्थापित करने की संभावनाओं पर बातचीत करना था।

    मुख्यमंत्री ने वोल्वो कंपनी के शीर्ष अधिकारियों के साथ गहन बातचीत की। उन्होंने बताया कि झारखंड में खनन और औद्योगिक परियोजनाओं के लिए भारी संख्या में ट्रकों और डंपरों की जरूरत है। इस जरूरत को देखते हुए मुख्यमंत्री ने वोल्वो को झारखंड में एक ट्रक निर्माण संयंत्र लगाने का प्रस्ताव दिया। वोल्वो के अधिकारियों ने भी इस विचार में रुचि दिखाई और झारखंड की विशेष जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ट्रक मॉडल विकसित करने की इच्छा जताई।

    वोल्वो की अत्याधुनिक तकनीकों का अनुभव.

    मुख्यमंत्री और उनके दल ने वोल्वो के ‘ट्रक एक्सपीरियंस सेंटर’ का भी दौरा किया। यहां उन्होंने कंपनी की नई-नई तकनीकों को करीब से देखा। इनमें मिरर-लेस कैमरा वाली ट्रक कैब, ट्रिपल पॉइंट सस्पेंशन सिस्टम और 440 किलोवाट मोटर से चलने वाले इलेक्ट्रिक ट्रक शामिल थे। मुख्यमंत्री ने वोल्वो की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में किए गए नवाचारों की तारीफ की। उन्होंने यह भी जाना कि ये इलेक्ट्रिक ट्रक ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर किस तरह बेहतर प्रदर्शन करते हैं।

    झारखंड में फैक्ट्री बनने से रोजगार और विकास के नए अवसर.

    सूत्रों के मुताबिक, अगर बातचीत सफल रहती है, तो वोल्वो निकट भविष्य में झारखंड में ट्रक निर्माण संयंत्र लगा सकती है। इससे न केवल राज्य के औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा।

    स्वीडन में निवेशक संवाद कार्यक्रम में भी झारखंड की मजबूत मौजूदगी.

    अपने दौरे के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भारतीय दूतावास और झारखंड सरकार के संयुक्त प्रयास से गोटेनबर्ग में आयोजित निवेशक संवाद कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में स्वीडन की बड़ी कंपनियों के अधिकारी, निवेशक और भारतीय समुदाय के सदस्य मौजूद थे।

    कार्यक्रम में भारत के कार्यवाहक राजदूत राकेश तिवारी ने भारत और स्वीडन के बीच बढ़ते आर्थिक संबंधों और झारखंड में मौजूद निवेश अवसरों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी स्वीडिश कंपनियों को झारखंड में निवेश करने का खुला निमंत्रण दिया।

    चार प्रमुख क्षेत्रों में निवेश का विशेष निमंत्रण.

    मुख्यमंत्री ने खासतौर पर चार क्षेत्रों में निवेश के लिए स्वीडन की कंपनियों को आमंत्रित किया —

    1. खनिज अन्वेषण,
    2. खाद्य प्रसंस्करण,
    3. हरित (सस्टेनेबल) ऊर्जा,
    4. इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र।

    राज्य सरकार के अधिकारियों ने बताया कि झारखंड में खनन उपकरणों के निर्माण जैसे क्षेत्रों में भी अपार संभावनाएं हैं। ड्रिलिंग रिग्स, बुलडोजर, हॉल ट्रक, मोटर ग्रेडर और एक्सकेवेटर जैसे भारी मशीनों के निर्माण में निवेश के बेहतरीन मौके हैं। इसके साथ ही, खनिज शोधन संयंत्र और ट्रांसपोर्ट इक्विपमेंट जैसे बेल्ट कन्वेयर और मोटर स्क्रैपर के निर्माण में भी बड़े अवसर हैं।


    खनिज संपदा से समृद्ध झारखंड: निवेशकों के लिए स्वर्णिम अवसर.

    झारखंड देश के कुल खनिज भंडार का लगभग 40% हिस्सा रखता है। कोयला, लोहा, तांबा, बॉक्साइट, चूना पत्थर, मैंगनीज जैसे कई कीमती खनिज यहां बड़ी मात्रा में पाए जाते हैं। झारखंड को देश में कोकिंग कोल का एकमात्र उत्पादक राज्य होने का गौरव प्राप्त है। इसके अलावा, यह कोयला उत्पादन में दूसरा, लौह अयस्क में दूसरा, तांबा अयस्क में तीसरा और बॉक्साइट भंडार में सातवां स्थान रखता है।

    इन प्राकृतिक संपदाओं के चलते झारखंड निवेशकों के लिए बेहद आकर्षक राज्य बन गया है। राज्य सरकार खनिज ब्लॉकों की नीलामी और खनिज अन्वेषण परियोजनाओं के जरिए निजी निवेश को प्रोत्साहित कर रही है।

    झारखंड सरकार का सतत और समावेशी विकास पर जोर.

    कार्यक्रम में झारखंड सरकार के प्रतिनिधियों ने राज्य की निवेश के अनुकूल नीतियों, उद्योगों के लिए बेहतर अवसंरचना, और सतत व समावेशी विकास के प्रयासों पर भी विस्तार से प्रस्तुति दी। स्वीडन की हरित तकनीकों में विशेषज्ञता और झारखंड के हरित औद्योगीकरण के लक्ष्य के बीच सहयोग की बड़ी संभावनाएं दिखाई दीं।

    इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सरकार से व्यवसाय (G2B) और सरकार से सरकार (G2G) के स्तर पर संवाद को मजबूत करना और भारत-स्वीडन के आर्थिक संबंधों को एक नई ऊंचाई तक ले जाना था।

     

  • झारखंड में नक्सलवाद पर अंतिम प्रहार: कोल्हान बना आखिरी मोर्चा, शीर्ष नेतृत्व लगभग नेस्तनाबूद

    परवेज़ आलम.

    झारखंड के जंगलों में चल रही एक पुरानी जंग अब अपने अंतिम मोड़ पर है। बरसों से राज्य के विकास और सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने वाले माओवादियों के खिलाफ पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने निर्णायक मोर्चा खोल दिया है। डीजीपी अनुराग गुप्ता का बयान अब सिर्फ घोषणा नहीं, बल्कि मैदान पर उतर चुकी एक रणनीति का हिस्सा है।

    मार्च 2026 की डेडलाइन से पहले ही झारखंड करेगा निर्णायक वार.

    बोकारो में हाल ही में हुए मुठभेड़ के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में झारखंड पुलिस प्रमुख डीजीपी अनुराग गुप्ता ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ने भले ही मार्च 2026 तक माओवाद खत्म करने का लक्ष्य तय किया हो, लेकिन राज्य पुलिस उससे पहले ही सारंडा और कोल्हान जैसे नक्सल गढ़ों से माओवादियों का पूरी तरह सफाया करने की ओर अग्रसर है।

    लुगू पहाड़ी की मुठभेड़: माओवादियों को चेतावनी का संदेश.

    लुगू पहाड़ी में हुई मुठभेड़ को डीजीपी ने ‘टर्निंग पॉइंट’ बताया। यह वह घटना है जिससे नक्सलियों को न केवल सैन्य हार मिली, बल्कि मनोवैज्ञानिक झटका भी लगा। डीजीपी ने कहा कि यह घटना माओवादियों के लिए “सबक” है और उन्होंने उन्हें सरकार की आत्मसमर्पण नीति के तहत मुख्यधारा में लौटने की सलाह दी।

    अब कोई माओवादी ‘अदृश्य‘ नहीं.

    राज्य पुलिस के पास हर सक्रिय माओवादी की लोकेशन, नेटवर्क, फंडिंग स्रोत और गतिविधियों की जानकारी है। यह वही रणनीतिक जानकारी है जिसने माओवादियों के एक-एक किले को कमजोर किया है। डीजीपी के अनुसार, “अब वे न छिप सकते हैं, न बच सकते हैं।”

    तीन बचा, लेकिन घेरे में: करोड़ों के इनामी नक्सलियों की अंतिम सूची

    झारखंड में अब सिर्फ तीन नक्सली ऐसे बचे हैं जिनके सिर पर ₹1 करोड़ का इनाम है:

    1. मिसिर बेसरा – भाकपा माओवादी का ईआरबी सचिव
    2. पतिराम मांझी – सेंट्रल कमेटी मेंबर
    3. आकाश मंडल उर्फ अनमोल – कोल्हान में सक्रिय

    ये तीनों अब सुरक्षा बलों के निशाने पर हैं। साथ ही, एनकाउंटर से बच निकले एक अन्य नक्सली “प्रवेश” पर भी जल्द ₹1 करोड़ का इनाम घोषित किया जा सकता है।

    प्रयाग मांझी उर्फ विवेक: एनकाउंटर में मारे गए पहले करोड़पति नक्सली

    इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी सफलता थी – प्रयाग मांझी उर्फ विवेक की मुठभेड़ में मौत। वह झारखंड पुलिस द्वारा मारे गए पहले ₹1 करोड़ के इनामी नक्सली बने। उनके मारे जाने से उत्तरी छोटानागपुर क्षेत्र में माओवाद का लगभग सफाया हो गया।

    नक्सलवाद का ढहता नेतृत्व: गिरफ्तारी और आत्मसमर्पण की श्रृंखला

    झारखंड में नक्सल आंदोलन के सबसे बड़े नेताओं की या तो गिरफ्तारी हो चुकी है या उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया है:

    • प्रशांत बोस उर्फ किशन दा: सेकेंड इन कमांड, गिरफ्तार
    • कंचन दा उर्फ कबीर: थिंक टैंक, गिरफ्तार
    • महाराज प्रमाणिक, विमल यादव, रिमी दी, अभय जी: आत्मसमर्पण

    2021 से फरवरी 2025 तक 1490 नक्सली गिरफ्तार हुए हैं। इनमें कई नाम जैसे प्रभा दी, सुधीर किस्कू, नंदलाल मांझी और बलराम उरांव शामिल हैं जिन पर 10 से 25 लाख तक का इनाम था।

    बूढ़ा पहाड़ से कोल्हान तक: कमजोर होता नक्सली नेटवर्क.

    कभी झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ का प्रमुख माओवादी किला माना जाने वाला बूढ़ा पहाड़ अब नेतृत्वविहीन हो चुका है।

    • देवकुमार सिंह (अरविंद जी) की मौत,
    • सुधाकरण का सरेंडर,
    • मिथिलेश महतो की गिरफ्तारी—
      इन घटनाओं ने संगठन को झकझोर दिया।

    अब नक्सली नेतृत्व केवल कोल्हान तक सिमट गया है, जहाँ अंतिम शेष शीर्ष माओवादी अब सुरक्षा बलों के रडार पर हैं।

    क्या यह नक्सलवाद का अंतिम अध्याय है?

    झारखंड में जो कभी नक्सलियों का अघोषित किला था, वहां अब पुलिस की रणनीति, जानकारी और जमीन पर पकड़ ने बागियों की रीढ़ तोड़ दी है।
    कोल्हान आखिरी मोर्चा है और माओवादियों के पास दो ही विकल्प बचे हैं—आत्मसमर्पण या अंतिम लड़ाई।

     

  • झारखंड सरकार का यूरोपीय दौरा: प्रवासी भारतीयों से संवाद

    विशेष संवाददाता.

    झारखंड में निवेश को लेकर एक नई सुबह दस्तक दे रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल इन दिनों यूरोप के दो प्रमुख देशों——के दौरे पर है। इस कूटनीतिक और आर्थिक यात्रा का मकसद है: झारखंड को वैश्विक निवेश का गंतव्य बनाना।

    इस यात्रा के दौरान न केवल राज्य की संभावनाओं को प्रस्तुत किया गया, बल्कि कुछ अहम समझौते और प्रस्तावों की नींव भी रखी गई।

    खेल के क्षेत्र में ऐतिहासिक पहल: फुटबॉल कोचिंग के लिए RCD Espanyol का प्रस्ताव.

    स्पेन के बार्सिलोना में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान, विश्वप्रसिद्ध RCD Espanyol फुटबॉल क्लब ने झारखंड सरकार को एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव दिया। क्लब ने झारखंड में खेल—विशेषकर फुटबॉल—के विकास के लिए सहयोग की इच्छा जताई है। इसमें खासकर फुटबॉल कोचों के प्रशिक्षण के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) की पेशकश की गई है।

    यह प्रस्ताव बार्सिलोना के विकसित खेल पारिस्थितिकी तंत्र और झारखंड में युवाओं की खेल प्रतिभा को जोड़ने का सेतु बन सकता है। आने वाले समय में यह साझेदारी झारखंड को भारतीय खेल मानचित्र पर और मजबूत स्थान दिला सकती है।

    व्यापक क्षेत्रों में चर्चा: स्टार्टअप, क्लीन एनर्जी, बायो-फार्मा और अधिक.

    सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, झारखंड प्रतिनिधिमंडल की इस यात्रा में कई विविध क्षेत्रों पर संवाद हुआ। इसमें स्टार्टअप मेंटरशिप, क्लीन एनर्जी, पर्यावरणीय स्थिरता, सप्लाई चेन, बायो-फार्मास्यूटिकल्स, खेल विपणन, क्रिकेट टीम ओनरशिप, डीप-टेक बी2बी मार्केटिंग, लीगल, डेंटल साइंस और मेडटेक जैसे क्षेत्र प्रमुख रहे।

    प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड में नवाचार आधारित एक जीवंत स्टार्टअप इकोसिस्टम तैयार करने हेतु वैश्विक विशेषज्ञों और कंपनियों से मार्गदर्शन और निवेश का अनुरोध किया ।

    झारखंड में गीगा फैक्ट्री? टेसला ग्रुप A.S. से CM की महत्वपूर्ण बैठक.

    इस यूरोपीय दौरे का सबसे आकर्षक पड़ाव रहा टेसला ग्रुप A.S. (चेकोस्लोवाकिया) के CEO और सह-संस्थापक डुशान लिचार्डस के साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मुलाकात। बातचीत के दौरान टेसला ग्रुप ने झारखंड में एक गीगा फैक्ट्री स्थापित करने की इच्छा जताई, जो मुख्य रूप से वाणिज्यिक और औद्योगिक उपयोग के लिए बैटरी भंडारण उत्पादों के असेंबली पर केंद्रित होगी।

    यह प्रस्ताव न केवल झारखंड को नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बना सकता है, बल्कि इससे राज्य के तकनीकी और औद्योगिक बुनियादी ढांचे को भी नई दिशा मिलेगी।

    प्रवासी भारतीयों से संवाद: संभावनाओं को जोड़ने का प्रयास.

    यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने बार्सिलोना में बसे प्रवासी भारतीय व्यवसायियों और विशेषज्ञों से भी मुलाकात की। इस संवाद का उद्देश्य था—झारखंड की विकास गाथा से उन्हें जोड़ना और विदेशी धरती पर बसे भारतीय मस्तिष्क को अपनी धरती से जोड़ना।

    मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि स्पेनिश कंपनियों और निवेशकों के साथ सतत संवाद और सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा। इस कड़ी में भविष्य में और बैठकें तथा कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुवाई में झारखंड सरकार की यह यात्रा केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि निवेश और विकास की ओर बढ़ते भरोसे का संकेत है। यूरोपीय धरती पर झारखंड की आवाज़ अब सुनाई देने लगी है—चाहे वह खेल हो, तकनीक हो, या उद्योग। आने वाला समय बताएगा कि इन बैठकों का परिणाम धरातल पर किस तरह उतरता है, लेकिन शुरुआत आशाजनक है।

     

  • झारखंड में सुरक्षाबलों की बड़ी जीत: 8 नक्सली ढेर

    एक करोड़ का इनामी प्रयाग मांझी उर्फ विवेक दा मारा गया

    परवेज़ आलम.

    बोकारो/गिरिडीह: झारखंड में चल रहे नक्सल विरोधी अभियान को सोमवार को बड़ी सफलता मिली जब सुरक्षाबलों ने बोकारो के लुगू पहाड़ क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में आठ नक्सलियों को मार गिराया। इन मारे गए नक्सलियों में सबसे बड़ा नाम है प्रयाग मांझी उर्फ विवेक दा का — जो भाकपा माओवादी की सेंट्रल कमेटी का सदस्य था और झारखंड-बिहार-छत्तीसगढ़-ओडिशा के नक्सली नेटवर्क का संचालन करता था। इस पर एक करोड़ रुपए का इनाम घोषित था ।

    मुठभेड़ रविवार रात से शुरू हुई, जब खुफिया सूत्रों से सुरक्षाबलों को नक्सलियों के जमावड़े की सूचना मिली। इलाके को घेरते हुए तड़के ऑपरेशन शुरू हुआ, और भारी गोलीबारी के बाद सुरक्षाबलों ने आठ नक्सलियों को ढेर कर दिया। फरार नक्सलियों की तलाश में इलाके में अभी भी व्यापक तलाशी अभियान जारी है।

    प्रयाग मांझी उर्फ विवेक दा कौन था?

    धनबाद जिले के टुंडी प्रखंड के दलबुढ़ा गांव का रहने वाला प्रयाग मांझी, माओवादी सर्किट में “विवेक दा”, “करण दा”, “फुचना” और “नागो मांझी” जैसे नामों से जाना जाता था। उसने बेहद कम उम्र में माओवादी संगठन से जुड़ाव बना लिया था और सालों में वह संगठन का रणनीतिक दिमाग बन गया।

    वह न केवल झारखंड, बल्कि बिहार, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के नक्सली बेल्ट में सक्रिय था। गिरिडीह के पारसनाथ और बोकारो के लुगू व झुमरा पहाड़ उसके प्रभाव क्षेत्र थे। सिर्फ गिरिडीह में ही उसके खिलाफ 50 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे।

    रणनीतिकार, प्रशिक्षक और हथियारों का जानकार

    विवेक दा नक्सलियों के लिए सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि सैन्य रणनीतिकार, प्रशिक्षक और हथियारों का जानकार था। उसके दस्ते के पास एके-47, इंसास राइफल और भारी मात्रा में विस्फोटक थे। उसके साथ 50 से ज्यादा प्रशिक्षित नक्सली थे, जिनमें महिला माओवादी भी शामिल थीं।

    सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, हाल ही में उसे पारसनाथ क्षेत्र की कमान दी गई थी, ताकि वहां पुनः नक्सली गतिविधियों को सक्रिय किया जा सके।

    पत्नी भी थी माओवादी नेता, इलाज के दौरान हुई थी मौत.

    विवेक की पत्नी जया मांझी भी माओवादी संगठन में महिला विंग की प्रमुख सदस्य थी। 25 लाख की इनामी जया को गिरिडीह पुलिस ने जुलाई 2024 में धनबाद के एक निजी अस्पताल से गिरफ्तार किया था, जहां वह फर्जी नाम से गॉल ब्लैडर कैंसर का इलाज करवा रही थी। इलाज के दौरान 21 सितंबर 2024 को रांची के रिम्स अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी।

    माओवादियों को गहरा झटका.

    इस मुठभेड़ में मारे गए अन्य नक्सलियों में अरविंद यादव और साहेब राम मांझी भी शामिल थे, जो संगठन के पुराने और प्रभावशाली सदस्य थे। विवेक दा की मौत को सुरक्षाबलों के लिए न सिर्फ सैन्य सफलता, बल्कि मनोवैज्ञानिक बढ़त के रूप में देखा जा रहा है।

    झारखंड पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, यह पहली बार है जब राज्य में एक करोड़ के इनामी नक्सली को मार गिराया गया है। इससे गिरिडीह-बोकारो क्षेत्र में नक्सली नेटवर्क की कमर टूट गई है।

    लुगू और पारसनाथ: नक्सलियों का सुरक्षित अड्डा अब खतरे में.

    लुगू पहाड़ और पारसनाथ लंबे समय से नक्सलियों के सेफ जोन माने जाते रहे हैं। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में लगातार ऑपरेशनों के चलते माओवादी इन इलाकों से पीछे हटे थे। लेकिन हालिया मुठभेड़ से संकेत मिलता है कि नक्सली दोबारा इन्हीं क्षेत्रों को पुनर्जीवित करना चाहते थे।

    पुलिस ने संकेत दिए हैं कि इन इलाकों में सघन अभियान जारी रहेगा ताकि बचे-खुचे माओवादी पूरी तरह खत्म किए जा सकें।

    नक्सलवाद के अंत की ओर एक कदम.

    प्रयाग मांझी की मौत को माओवादी संगठन के लिए बहुत बड़ा धक्का माना जा रहा है। उसकी रणनीतिक पकड़, राज्य के कई जिलों में असर और नेटवर्क को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि यह झारखंड के नक्सल इतिहास में एक निर्णायक मोड़ है।

    पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अब बचे हुए माओवादियों की गिरफ्तारी और संगठन को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने के लिए ज़मीनी स्तर पर ऑपरेशन को और तेज करने की तैयारी में हैं।

  • पूर्व सांसद व काँग्रेस नेता तिलकधारी सिंह नहीं रहे

    शिक्षक से सांसद तक का प्रेरणादायक सफर थमा.

    गिरिडीह: झारखंड की राजनीति ने एक अनुभवी और सज्जन नेता को खो दिया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और दो बार कोडरमा से लोकसभा सांसद रहे तिलकधारी सिंह का सोमवार को निधन हो गया। वे 87 वर्ष के थे और पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे थे। गिरिडीह के नवजीवन अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।

    तिलकधारी सिंह की तबीयत 8 अप्रैल से लगातार खराब चल रही थी। 19 अप्रैल को  राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने अस्पताल जाकर उनका हालचाल लिया था । इससे पहले पूर्व सीएम रघुवर दास, बाबू लाल मरंडी और केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने भी  अस्पताल जाकर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली थी । सोमवार की दोपहर टीडी सिंह के  जीवन का आखिरी पन्ना बंद हो गया। निधन की जानकारी उनके पुत्र किशोर सिंह ने दी।

    गांव से दिल्ली तक: शिक्षक से सांसद बनने की यात्रा.

    तिलकधारी सिंह का जन्म 8 जनवरी 1938 को गिरिडीह जिले के देवरी प्रखंड अंतर्गत चतरो गांव में हुआ था। शिक्षा के प्रति गहरी रुचि रखने वाले सिंह ने बीएससी की पढ़ाई पूरी करने के बाद 1962 में शिक्षक के रूप में अपना करियर शुरू किया। चकाई हाई स्कूल में वर्षों तक सेवा देने के बाद उन्होंने सामाजिक जीवन की ओर रुख किया।

    1968 में उन्होंने मुखिया पद का चुनाव लड़ा और जीतकर ग्रामीण राजनीति में प्रवेश किया। इसके बाद वे जिला परिषद के अध्यक्ष भी बने। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को आज भी याद किया जाता है – उन्होंने जिले में कई सरकारी स्कूलों की स्थापना में अहम भूमिका निभाई थी।

    राजनीति में कांग्रेस का मजबूत चेहरा.

    1977 में वे कांग्रेस के गिरिडीह जिला अध्यक्ष बने। इसके बाद 1980 में धनवार विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित हुए। फिर 1984 में कांग्रेस ने उन्हें कोडरमा लोकसभा सीट से टिकट दिया, और उन्होंने जीत दर्ज कर संसद में प्रवेश किया। इस चुनाव में उन्होंने बीजेपी के रीतलाल प्रसाद वर्मा को हराया था और 208731 वोट हासिल किए थे – जो कुल मतों का 58.8 प्रतिशत था।

    1999 में उन्होंने दूसरी बार कोडरमा से जीत दर्ज की और संसद पहुंचे। अपने राजनीतिक जीवन में वे सांसद के साथ-साथ विधायक, जिला परिषद अध्यक्ष, और कांग्रेस संगठन के अहम पदों पर रहे।

    राजनीतिक विरासत और परिवार.

    राजनीतिक जीवन में सक्रिय रहते हुए, वृद्धावस्था में उन्होंने अपनी राजनीतिक विरासत अपने पुत्र धनंजय सिंह को सौंपी। वर्तमान में धनंजय सिंह कांग्रेस के गिरिडीह जिला अध्यक्ष के पद पर कार्यरत हैं।

    सरल स्वभाव के कारण लोकप्रिय नेता.

    तिलकधारी सिंह को उनके सादे जीवन और सरल स्वभाव के लिए जाना जाता था। आम जनता से लेकर बड़े नेताओं तक, सभी को उनके बोलचाल की शैली और व्यवहार में विनम्रता आकर्षित करती थी। वे ज़िले मे भूमिहार समाज के बड़े नेता थे ।

    श्रद्धांजलियाँ और राजनीतिक शोक

    पूर्व सांसद के निधन पर पूरे गिरिडीह जिले में शोक की लहर दौड़ गई है। मंत्री सुदिव्य कुमार ने उन्हें गिरिडीह की राजनीति का ‘पितामह’ बताते हुए कहा, “उनकी कमी गिरिडीह की राजनीतिक धरातल पर हमेशा महसूस की जाएगी। उनका योगदान अमिट है ।

    शोक व्यक्त करने वालों में सासंद डॉ सरफराज अहमद ,बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रकाश सहाय, कांग्रेस नेता अजय सिन्हा, कार्यकारी अध्यक्ष सतीश केडिया, पूर्व विधायक निर्भय शाहबादी,अभय शाहबादी , लोजपा नेता राज कुमार राज सहित अनेक बुद्धिजीवी और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल हैं।

  • कांग्रेस ने सीपी सिंह की सदस्यता रद्द करने की मांग की, कहा- “मानसिक कुंठा के शिकार हैं विधायक”

    रांची ब्यूरो।
    भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक सीपी सिंह के मुसलमानों को लेकर दिए गए विवादित बयान ने झारखंड की सियासत में तूफान ला दिया है। कांग्रेस ने इस बयान की तीखी आलोचना करते हुए इसे न केवल समाज को बांटने वाला बल्कि राज्य की सांप्रदायिक सौहार्द के लिए गंभीर खतरा बताया है। पार्टी ने विधानसभा अध्यक्ष से मांग की है कि सीपी सिंह की विधान सभा की सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द की जाए।

    प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष शहजादा अनवर ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा विधायक पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “सीपी सिंह मानसिक कुंठा के शिकार हो गए हैं। भाजपा में वे न तो प्रदेश अध्यक्ष बन पाए, न ही विधायक दल के नेता। यही कारण है कि वे निराशा में ऐसी बयानबाजी कर रहे हैं जो समाज को गहरे तक बांट सकती है।”

    शहजादा अनवर ने भाजपा नेतृत्व और केंद्र सरकार से तीखे सवाल भी पूछे। उन्होंने कहा, “क्या भाजपा अपने वरिष्ठ मुस्लिम नेताओं जैसे शहनवाज हुसैन, मुख्तार अब्बास नकवी, जफर इस्लाम और यहां तक कि बिहार के राज्यपाल मोहम्मद आरिफ खान को भी ‘जिहादी’ समझती है? जो मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों ने देश की आज़ादी के लिए जान की बाज़ी लगाई, क्या वे भी भाजपा की नजर में जिहादी थे?”

    इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा, मीडिया चेयरमैन सतीश पाल मुजनी, प्रवक्ता सोन शांति, अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य एम तौसीफ और गजेंद्र सिंह समेत कई नेता मौजूद थे। सभी ने एक सुर में कहा कि ऐसे बयानों को किसी भी हाल में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    इस बीच कांग्रेस नेता शमशेर आलम ने विधानसभा अध्यक्ष रविंद्रनाथ महतो को पत्र लिखकर सीपी सिंह के बयान की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में यह बयान सत्य पाए जाते हैं, तो विधानसभा से उनकी सदस्यता रद्द की जाए। शमशेर आलम ने कहा, “एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि होकर सीपी सिंह ने समाज को उस दिशा में धकेलने का काम किया है, जहां न केवल सामाजिक तानेबाने को नुकसान पहुंचेगा, बल्कि पूरे देश की एकता भी खतरे में पड़ सकती है।”

    कांग्रेस का कहना है कि झारखंड जैसे संवेदनशील राज्य में शांति बनाए रखने के लिए ऐसे बयानों पर तत्काल प्रभाव से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि समाज में नफरत फैलाने की कोशिश करने वालों को सख्त संदेश दिया जा सके।

  • मंत्री हफीजुल हसन ने दी सफाई , भाजपा बर्खास्तगी की मांग पर अड़ी  

    झारखंड की सियासी फिजा इन दिनों एक बयान से राजनीति गरमाई हुई है। राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन का एक कथित बयान— “शरीयत संविधान से ऊपर है” — राजनीतिक हलकों में बीते चार दिनों से हलचल मचा रखा  है। विपक्षी दल भाजपा ने इस बयान को लेकर मंत्री पर सीधा हमला बोला है और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से उनकी तत्काल बर्खास्तगी की मांग की है।

    लेकिन क्या मंत्री ने सचमुच ऐसा कहा था? या फिर बयान को संदर्भ से काट कर, अपने-अपने राजनीतिक एजेंडे के अनुसार परोसा गया? राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप नई बात नहीं, लेकिन जब बात संविधान और धार्मिक मूल्यों की हो, तो सावधानी और संवेदनशीलता दोनों की जरूरत होती है।

    भाजपा का हमला: ‘संविधान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं’

    विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस कथन को भारतीय संविधान का अपमान बताते हुए तीखा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि हसन का यह बयान सामाजिक सौहार्द्र के लिए खतरा है और झारखंड जैसे विविधता वाले राज्य में इस तरह की सोच की कोई जगह नहीं हो सकती। मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से साफ शब्दों में मांग की कि हसन को मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाया जाए।

    मंत्री की सफाई: ‘बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया’

    इस पूरे विवाद के बीच मंत्री हफीजुल हसन ने मीडिया के सामने आकर सफाई दी और कहा कि उनका बयान गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा, “मैं बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के बनाए संविधान को सर्वोपरि मानता हूं। मेरी राजनीति हमेशा सामाजिक न्याय, समावेशिता और बराबरी के सिद्धांतों पर आधारित रही है। मैं ऐसे किसी भी बयान का समर्थन नहीं करता जो देश के मूलभूत सिद्धांतों के विरुद्ध हो।”

    हसन ने आगे जोड़ा, “संविधान ही हमें धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है। मेरा विश्वास उसी संविधान पर है, जिसने हमें यह आजादी और अधिकार दिए हैं।”

    भाजपा नेताओं पर पलटवार: ‘नफरत की राजनीति बंद हो’

    हसन ने अपनी सफाई में भाजपा नेताओं पर भी पलटवार किया। उन्होंने कहा, “देश के कई केंद्रीय मंत्री मंच से अल्पसंख्यकों के खिलाफ भड़काऊ बातें करते आए हैं— किसी ने ‘गोली मारो’ के नारे लगवाए, तो किसी ने देश छोड़ने की धमकी दी। क्या वह संविधान की रक्षा है या संविधान से खिलवाड़?”

    उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्म को लेकर प्रेम होना स्वाभाविक है, लेकिन यह प्रेम दूसरे धर्म के प्रति नफरत नहीं बन जाना चाहिए। “हम सबको अपने-अपने धर्म से लगाव हो सकता है, लेकिन उस लगाव में दूसरों के धर्म का अपमान न हो, यही संविधान की आत्मा है,” उन्होंने कहा।

    “संवैधानिक मूल्यों से नहीं हटूंगा”: हसन का संकल्प.

    बयान के अंत में हसन ने यह स्पष्ट किया कि वे अपने संवैधानिक कर्तव्यों से कभी पीछे नहीं हटेंगे। “मैं झारखंड के हर समुदाय के लिए न्याय, समानता और समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हूं। संविधान मेरी राजनीति की धुरी है और वही मेरी सोच की दिशा तय करता है।”

    यह विवाद केवल एक बयान का नहीं है। यह एक बड़े विमर्श का हिस्सा है—धर्म और संविधान के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती का। जब राजनीतिक दल इस संतुलन को अपने-अपने नजरिए से तोड़ते-मरोड़ते हैं, तो सवाल उठता है: क्या वाकई चिंता संविधान की है या उसका इस्तेमाल सियासी लाभ के लिए हो रहा है?

     

  • हेमंत सोरेन का स्पेन-स्वीडन दौरा: झारखंड में निवेश लाने की तैयारी

    रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 18 अप्रैल से 27 अप्रैल तक एक 11 सदस्यीय उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ स्पेन और स्वीडन के दौरे पर रवाना होंगे। इस विदेश यात्रा का मकसद स्पष्ट है — वैश्विक निवेशकों को झारखंड में निवेश के लिए आमंत्रित करना और राज्य को एक उभरते औद्योगिक केंद्र के रूप में प्रस्तुत करना। इस यात्रा के लिए मुख्यमंत्री को केंद्र सरकार से राजनीतिक स्वीकृति भी मिल चुकी है।

    निवेश बढ़ाने की रणनीति के तहत दौरा.

    मुख्यमंत्री की यह यात्रा राज्य के उद्योग विभाग के नेतृत्व में की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, यह दौरा “झारखंड में औद्योगिक निवेश के नए रास्ते खोलने” की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल स्पेन के मैड्रिड, बार्सिलोना और स्वीडन के गोथेनबर्ग जैसे प्रमुख शहरों में उद्यमियों और कॉर्पोरेट प्रतिनिधियों से मिलेगा।

    मुख्य ठिकाने और कार्यक्रम:

    • 19 अप्रैल: प्रतिनिधिमंडल मैड्रिड पहुंचेगा
    • 21 अप्रैल: प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात
    • 22 अप्रैल:
      • मैड्रिड में खनन और इस्पात क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के साथ बैठक
      • बार्सिलोना में कृषि मंत्रालय के अधिकारियों से संवाद
    • 25 अप्रैल: गोथेनबर्ग (स्वीडन) में क्लीन एनर्जी कंपनियों से मुलाकात
    • 26 अप्रैल: वन-टू-वन बैठकें, संभावित निवेशकों से सीधी बातचीत
    • 27 अप्रैल: भारत वापसी

    दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल नेशनल रिन्यूएबल एनर्जी सेंटर (Spain) भी जाएगा, जो सौर ऊर्जा क्षेत्र में अग्रणी रिसर्च केंद्र है।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर झारखंड की पहचान बनाने की कोशिश.

    मुख्यमंत्री के इस दौरे का एक बड़ा उद्देश्य झारखंड की ब्रांडिंग भी है। राज्य सरकार “हरित ऊर्जा, स्मार्ट सिटी, तकनीकी नवाचार और औद्योगिक विकास” को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक मंचों पर झारखंड की छवि को उभारना चाहती है। इस दौरे से निवेशकों के साथ प्रत्यक्ष संवाद का अवसर मिलेगा, जिससे आगामी परियोजनाओं में साझेदारी की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

    प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन होंगे शामिल?

    मुख्यमंत्री के साथ जो टीम विदेश यात्रा पर जा रही है, उसमें प्रशासनिक, तकनीकी और राजनीतिक प्रतिनिधित्व का संतुलन दिखता है। टीम में शामिल हैं:

    • कल्पना सोरेन (विधायक)
    • अलका तिवारी (मुख्य सचिव)
    • अविनाश कुमार (सीएम के अपर मुख्य सचिव)
    • ए.के. रस्तोगी (सेवानिवृत्त आईएफएस)
    • अरवा राजकमल (उद्योग सचिव)
    • राहुल कुमार सिन्हा (एमडी, जेएसएमडीसी)
    • सुशांत गौरव (उद्योग निदेशक)
    • वरुण रंजन (एमडी, जेआईआईडीसीओ)
    • प्रणव कुमार पाल (संयुक्त निदेशक, उद्योग)
    • अजय कुमार सिंह (सीएम के निजी सुरक्षा अधिकारी)

    क्या कहती है यह यात्रा झारखंड की दिशा के बारे में?

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का यह दौरा उस बदले हुए दृष्टिकोण का संकेत है जिसमें राज्य सरकार सिर्फ खनन पर निर्भरता छोड़कर हरित ऊर्जा, स्मार्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी नवाचार की ओर कदम बढ़ा रही है। यह यात्रा न केवल आर्थिक निवेश की राह खोलेगी, बल्कि झारखंड को वैश्विक मंचों पर एक प्रगतिशील और निवेश-मैत्रीपूर्ण राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम साबित हो सकती है।

     

  •  झारखंड में वक्फ संशोधन कानून नहीं होगा लागू -मंत्री हफीजुल हसन का बड़ा बयान

    BJP पर साधा निशाना

    परवेज़ आलम. 

    झारखंड के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन ने साफ़ तौर पर ऐलान किया है कि झारखंड में वक्फ संशोधित कानून लागू नहीं किया जाएगा। बुधवार को रांची स्थित हज हाउस में आयोजित हज प्रशिक्षण शिविर के दौरान मंत्री ने कहा कि यह कानून मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने की एक कोशिश है, जिसे भारतीय जनता पार्टी ने राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से संसद से पारित कराया है।

    हफीजुल हसन ने इस मौके पर कहा, “यह कानून मुसलमानों को परेशान करने के इरादे से लाया गया है। लेकिन झारखंड में इसे हम लागू नहीं होने देंगे।”

    हज यात्रा की तैयारियों की समीक्षा. 

    हज यात्रा पर रवाना होने वाले झारखंड के आज़मीन-ए-हज के लिए बुधवार को एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन हुआ, जिसमें रांची, खूंटी और सिमडेगा जिलों से आए कुल 248 हज यात्रियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री और राज्य हज कमेटी के चेयरमैन डॉ. इरफान अंसारी भी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि सरकार हज यात्रियों को हर जरूरी सुविधा उपलब्ध कराएगी।

    “झारखंड से लेकर मक्का-मदीना तक, सरकार हर मोड़ पर ज़ायरीनों के साथ खड़ी रहेगी,” – डॉ. इरफान अंसारी ने कहा। उन्होंने हज यात्रियों से देश में अमन, चैन और भाईचारे की दुआ करने की अपील भी की।

    संसद से पारित हुआ वक्फ संशोधन कानून, देशभर में हो रहा विरोध. 

    हाल ही में संसद में वक्फ संशोधन विधेयक पारित किया गया, जिस पर राष्ट्रपति की मंज़ूरी भी मिल चुकी है। यानी यह विधेयक अब कानून बन चुका है। इस कानून के खिलाफ देशभर के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह कानून वक्फ संपत्तियों की स्वायत्तता पर हमला है और इससे अल्पसंख्यकों के अधिकारों में कटौती होगी।

    इस साल हज यात्रा पर 1301 जायरीन जाएंगे, रांची से नहीं मिलेगी सीधी उड़ान. 

    राज्य हज कमेटी के कार्यपालक पदाधिकारी आफताब अहमद ने जानकारी दी कि इस साल झारखंड से कुल 1301 हज यात्री मक्का-मदीना के लिए रवाना होंगे। हालांकि, इस बार भी रांची से कोई सीधी उड़ान सेवा उपलब्ध नहीं होगी। हज यात्रियों को पहले कोलकाता जाना होगा, और वहां से वे जेद्दा के लिए उड़ान भरेंगे।

    हज यात्रा पर खर्च और सुविधाएं.

    इस साल एक हज यात्री को लगभग ₹3.58 लाख खर्च करना होगा। इसके अतिरिक्त, कुर्बानी के लिए अलग से राशि देनी होगी। हज यात्रियों की सहायता के लिए 9 स्टेट हज इंस्पेक्टर नियुक्त किए गए हैं, जिनमें एक महिला इंस्पेक्टर भी शामिल हैं।

    हज प्रशिक्षण शिविर में यात्रियों को हज से जुड़ी प्रक्रियाएं, नियमावली, स्वास्थ्य संबंधी उपायों और यात्रा से जुड़े तमाम जरूरी दिशा-निर्देशों की जानकारी दी गई। शिविर का उद्देश्य हज यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सरल बनाना है।

    झारखंड सरकार ने वक्फ संशोधन कानून को राज्य में लागू न करने का ऐलान करके अल्पसंख्यक समुदाय को स्पष्ट संदेश दिया है कि वह उनके हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं, हज यात्रा की तैयारियों से यह भी स्पष्ट होता है कि सरकार धार्मिक यात्राओं में सहभागी जनता के लिए गंभीर प्रयास कर रही है, चाहे वह सुविधाओं की बात हो या मार्गदर्शन की।