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  • नए साल के जश्न के बीच झारखंड का खरसावां गोलीकांड का स्मरण,सीएम ने दी श्रद्धांजलि

    परवेज़ आलम की खास और भावपूर्ण रिपोर्ट……..

    एक तरफ़ जहां पूरी दुनिया 1 जनवरी को नए साल के आगमन का उत्सव मना रही है, झारखंड का सरायकेला-खरसावां गांव हर साल इस दिन को शहीद दिवस के रूप में याद करता है। यह वह दिन है जब इस भूमि ने अपने वीर सपूतों और बेटियों की कुर्बानियां देखीं।

    आज झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी और विधायक कल्पना सोरेन के साथ खरसावां स्थित शहीद स्थल पहुंचे। पारंपरिक तरीकों से शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्होंने झारखंड के महान वीरों के संघर्ष को नमन किया। यह परंपरा पिछले मुख्यमंत्रियों – बाबूलाल मरांडी और रघुवर दास – के समय से चली आ रही है।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा,
    “आज नए साल के पहले दिन, हम अपने उन वीर पूर्वजों की शहादत से प्रेरणा लेते हैं जिन्होंने जल, जंगल, और ज़मीन की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। यह वीर भूमि “झारखंड “असंख्य बलिदानों से सिंचित है। हर साल हम खरसावां के शहीदों की स्मृति में यहां एकत्र होते हैं, उनकी अमर गाथा को याद करते हैं।”

    यहाँ आने से पहले हेमंत सोरेन अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के साथ झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार से राजभवन मे जाकर मिले और उन्हें नए साल की बधाई दी ।

    क्या है खरसावां की कहानी?

    यह दर्दनाक घटना 1 जनवरी 1948 को हुई, जब खरसावां के हाट बाजार में सैकड़ों आदिवासियों को गोलियों का सामना करना पड़ा। उस दिन, जो गुरुवार था, आदिवासी ग्रामीण अपने पारंपरिक बाजार में पहुंचे थे। लेकिन वहां उनकी ज़िंदगी खून से लथपथ खरसावां की मिट्टी पर सिमट गई।

    इस जनसंहार की जड़ें आज़ाद भारत के शुरुआती दौर से जुड़ी हैं। 1947 के बाद राज्यों के पुनर्गठन की प्रक्रिया चल रही थी। 14-15 दिसंबर को अनौपचारिक रूप से खरसावां और सरायकेला रियासतों का विलय ओडिशा राज्य में कर दिया गया। इसका विरोध आदिवासी नेता जयपाल सिंह मुंडा ने किया। उन्होंने 1 जनवरी 1948 को एक विशाल जनसभा का आह्वान किया, लेकिन किसी कारणवश वे खुद वहां नहीं पहुंच सके। सभा में हज़ारों की संख्या में लोग शामिल हुए। इसी दौरान पुलिस और भीड़ के बीच संघर्ष हुआ और अचानक गोलियां चलने लगीं। इतिहासकारों का कहना है कि सैकड़ों लोग मारे गए, लेकिन मरने वालों की सही संख्या आज तक किसी को नहीं पता।

    शहीद दिवस और गहरे दफन राज। 

    हर साल 1 जनवरी को खरसावां में शहीदों की याद में मेला लगता है। इसमें झारखंड और ओडिशा के आदिवासी समुदाय बड़ी संख्या में हिस्सा लेते हैं। यह केवल शोक का नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता और एकता का प्रतीक है। मुख्यमंत्री और अन्य नेता इस आयोजन को अपनी उपस्थिति से सम्मान देते हैं।

    आजाद भारत का सबसे बड़ा गोलीकांड।

    खरसावां गोलीकांड भारत का सबसे बड़ा आदिवासी जनसंहार माना जाता है। इसने झारखंड की राजनीति और समाज पर अमिट छाप छोड़ी है। यह दिन सिर्फ़ एक इतिहास नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के अदम्य साहस और बलिदान का प्रतीक है।

    आज, जब पूरा देश नए साल के उल्लास में डूबा है, झारखंड का यह छोटा सा गांव उस जख्म को याद कर रहा है जिसने यहां की मिट्टी को रक्त से लाल कर दिया। खरसावां के शहीदों को शत-शत नमन।

     

  • झारखंड : पुलिस का बड़ा दावा माओवाद और अपराध पर 2024 में कसी नकेल!

    परवेज़ आलम की खास रिपोर्ट …………

    झारखंड पुलिस ने 2024 की समाप्ति के साथ अपनी उपलब्धियों का लेखा-जोखा पेश किया है। दावा है कि राज्य में नक्सलवाद, अपराध, साइबर क्राइम, और मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए गए अभियानों में बड़े पैमाने पर सफलता मिली है।

    आईजी (ऑपरेशन) एवी होमकर की मानें तो पुलिस ने माओवादी गतिविधियों पर शिकंजा कसते हुए 244 माओवादियों को गिरफ्तार किया है। इनमें एसएसी सदस्य जया दी उर्फ चिंता, 10 लाख के इनामी जोनल कमांडर शंभू गंझू और सीताराम रजवार जैसे कुख्यात नाम शामिल हैं। इसके अलावा 24 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, 9 मुठभेड़ों में मारे गए, और 123 हथियार बरामद किए गए। उन्होंने बताया कि सीपीआई (माओवादी) से अलग हुए समूह तृतीय प्रस्तुति समिति (टीपीसी) के कई उग्रवादियों को भी गिरफ्तार किया गया है। इनपर कुल 36 लाख रुपये का इनाम था। पुलिस ने 246 किलो विस्फोटक, 13.39 लाख की लेवी के रुपए , और 239 आईईडी भी बरामद करने का दावा किया हैं।

    नक्सलवाद रोकने पर ठोस नीति नहीं ।  

    झारखंड की पहाड़ियों में अब भी नक्सलियों की गतिविधियां खत्म नहीं हुईं। सवाल है कि ये गिरफ्तारियां राज्य के युवाओं को माओवादी संगठन से जुड़ने से कैसे रोकेंगी इस पर  कोई थोड़ प्लानिंग अभी तक नहीं दिखती ।

    साइबर क्राइम और मादक पदार्थों पर नकेल का दावा

    2024 में पुलिस ने साइबर अपराध से जुड़े 1295 मामलों में 971 गिरफ्तारियां कीं और 8.18 करोड़ रुपये जब्त किए। “प्रतिबिंब एप” के जरिए 274 मामलों का समाधान और 77 लाख की वसूली ने तकनीकी अभियानों को एक नया आयाम दिया।
    मादक पदार्थों के खिलाफ 1407 किलो अफीम और 4251 किलो गांजा जब्त किया गया। 3975 एकड़ में फैली अफीम की खेती नष्ट की गई।

    अपराध पर लगाम या सिर्फ आंकड़ों का खेल?

    154 अपराधियों की गिरफ्तारी, 97 संगठित अपराध के मामलों का निपटारा और अलकायदा के 4 आतंकियों की गिरफ्तारी—सुनने में जरूर बड़ा लगता है। लेकिन झारखंड की सड़कों पर बढ़ते अपराध और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर पुलिस की चुप्पी सवाल खड़े करती है।

    नया साल, नई चुनौती!

    झारखंड पुलिस ने 2025 के लिए जनता को शुभकामनाएं दी हैं और अपराध व उग्रवाद से मुक्ति का संकल्प दोहराया है। लेकिन क्या यह संकल्प सिर्फ प्रेस बयान तक सीमित रहेगा, या झारखंड सचमुच शांति और सुरक्षा के नए अध्याय की ओर बढ़ेगा? यह सवाल अभी भी बाकी है।

     

     

     

  • नया साल, नई शुरुआत: गुरुद्वारे में सिख समाज का भजन-कीर्तन और लंगर आयोजन!

    गिरिडीह:  सिख समाज ने नए साल 2025 का स्वागत भक्ति और समर्पण के साथ किया। पंजाबी मुहल्ला स्थित गुरुद्वारे में रात 11 बजे से लेकर 12:30 बजे तक शब्द कीर्तन, भजन और गुरु सिमरन का आयोजन हुआ। इस अवसर पर सिख समुदाय के लोग एकजुट होकर प्रभु और गुरु को याद करते हुए सबके सुख और समृद्धि की कामना करते नजर आए।

    कार्यक्रम की खास बात यह रही कि साल के अंतिम क्षणों में, जहां एक तरफ दुनिया पार्टियों और शोर-शराबे में व्यस्त थी, वहीं सिख समाज भक्ति और साधना में डूबा हुआ था। जैसे ही घड़ी की सुई ने रात 12 बजकर एक नया दिन दिखाया, पूरे गुरुद्वारे में “वाहेगुरु” के जयकारे गूंज उठे।

    इस कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों के लिए लंगर का भी आयोजन किया गया, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस आयोजन में सिख समाज के प्रतिष्ठित सदस्यों ने भी भाग लिया, जिनमें डॉ. गुणवंत सिंह मोंगिया, सरदार नरेंद्र सिंह शमी, डॉ. अमरजीत सिंह सलूजा, चरणजीत सिंह सलूजा, भूपेंद्र सिंह दुआ, तेजेंदर सिंह  डिम्पल  और अन्य गणमान्य शामिल रहे।

    गौरतलब है कि हर साल गिरिडीह का सिख समाज इस तरह के जागरण का आयोजन करता रहा है। यह परंपरा न सिर्फ धार्मिक श्रद्धा को बढ़ावा देती है, बल्कि समाज में शांति और एकता का संदेश भी फैलाती है।

    इस बार का कार्यक्रम भी एक प्रेरणादायक संदेश के साथ खत्म हुआ— “गुरु का नाम लो और नई शुरुआत करो!”

  • गिरिडीह में नए साल का जश्न और पुलिस का परफेक्ट प्लान!

    गिरिडीह में नए साल का जश्न: पिकनिक, पहाड़, और पुलिस का परफेक्ट प्लान!

    गिरिडीह – झारखंड का वो हिस्सा जो नए साल पर सिर्फ जिले का नहीं, बल्कि बिहार, बंगाल, राजस्थान और गुजरात तक के सैलानियों के दिलों की धड़कन बन जाता है। जंगल, पहाड़ और झरनों के बीच यहां जो सुकून मिलता है, वो शायद ही कहीं और मिले।

    उसरी फॉल का जादू:
    जरा सोचिए, ऊंची-ऊंची चट्टानों के बीच से कल-कल करती पानी की धाराएं, जैसे किसी पुराने गीत की धुन पर नाच रही हों। यही है उसरी फॉल, गिरिडीह का सबसे खूबसूरत जलप्रपात। दूर से सुनाई देने वाली झरने की आवाज मानो सैलानियों को खींचकर बुला लेती है। यही वजह है कि भोजपुरी फिल्म ‘गंगाधाम’ समेत दर्जनों फिल्मों की शूटिंग यहीं हो चुकी है।

    खंडोली का दमदार डैम:
    अगर आपकी रुचि झरनों से हटकर डैम और विदेशी पक्षियों में है, तो खंडोली डैम आपका इंतजार कर रहा है। नौका विहार हो या शांत जल में पक्षियों का प्रवास देखना, खंडोली की हरियाली और पानी आपका दिल जीत लेगा।

    नया साल, नई भीड़, और पुलिस की पैनी नजर:

    अब सवाल ये है कि इतनी भीड़ संभलती कैसे है? नए साल के पहले दिन यहां पैर रखने की जगह नहीं बचती।

    • पुलिस प्रशासन ने 35 पुलिस बल और 35 स्थानीय कार्यकर्ताओं को तैनात किया है।
    • शराब पीकर हंगामा न हो, इसके लिए ब्रेथ एनालाइजर से जांच हो रही है।
    • वाहन तेज चलाने वालों पर पैनी नजर और गोताखोरों की टीम हर वक्त तैयार।
    • मेडिकल इमरजेंसी की भी पूरी व्यवस्था।

    मंत्री जी का जायजा:

    झारखंड के पर्यटन मंत्री और स्थानीय विधायक सुदिव्य कुमार सोनू खुद खंडोली और उसरी फॉल पहुंचे। साथ में गिरिडीह के एसपी डॉ. बिमल कुमार भी मौजूद थे। मंत्री जी ने मीडिया को बताया कि इस बार सुरक्षा और सुविधाओं में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है।

    मंत्री और एसपी दोनों ने नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए लोगों से शांतिपूर्ण और सुरक्षित जश्न मनाने की अपील की।

    तो गिरिडीह बुला रहा है!

    नए साल की शुरुआत में अगर आपको प्रकृति के बीच, झरनों के पास, या पक्षियों की चहचहाहट में सुकून चाहिए, तो गिरिडीह आपका इंतजार कर रहा है।
    बस याद रहे – जश्न में भी सुरक्षा का ख्याल रखना जरूरी है!

  • पुलिस और प्रशासन में बड़ा उलटफेर: नए साल में नई जिम्मेदारियां!

    RANCHI: 1 जनवरी 2025 से झारखंड के पुलिस विभाग में 6 एसपी अधिकारी डीआइजी रैंक में और 3 डीआइजी अधिकारी आइजी रैंक में प्रमोट हो जाएंगे। विभागीय प्रोन्नति बोर्ड की बैठक में हाल ही में यह बड़े फैसले लिए गए थे।

    कौन कहां जा रहा है?
    आइजी रैंक में प्रमोट होने वाले:

    अनूप बिरथरे: डीआइजी रांची से बने आइजी एसटीएफ।
    सुनील भास्कर: डीआइजी हजारीबाग से बने आइजी पलामू।
    मयूर पटेल कन्हैया लाल: डीआइजी जैप से बने आइजी मानवाधिकार।

    डीआइजी रैंक में प्रमोट होने वाले:

    चंदन कुमार सिन्हा: एसएसपी रांची, डीआइजी पद पर प्रमोट होकर रांची में ही बने रहेंगे।
    अजीत पीटर डुंगडुंग: एसपी देवघर, डीआइजी पद पर प्रमोट होकर वहीं बने रहेंगे।
    प्रियदर्शी आलोक: एसपी एसटीएफ से बने डीआइजी रेल।
    अंबर लकड़ा: जैप-3 गोविंदपुर से प्रमोट होकर बने डीआइजी दुमका।
    अनुरंजन किस्पोट्टा: एसपी सीआइडी से बने डीआइजी विशेष शाखा।
    चंदन कुमार झा: एसपी विशेष शाखा से बने डीआइजी एसआइबी।

    प्रोफार्मा प्रोन्नति में कौन शामिल?

    राकेश बंसल: भारत सरकार के कैबिनेट सचिवालय में निदेशक के तौर पर आइजी रैंक।
    जया राय और शिवानी तिवारी: एनआइए और सीबीआइ में एसपी रहते हुए डीआइजी रैंक।
    आईएएस अफसरों का प्रमोशन भी चर्चा में!
    झारखंड में हाल ही में 13 आईएएस अधिकारियों को विशेष सचिव रैंक में प्रमोट किया गया है। इनमें अजय कुमार सिंह और डॉ. नितिन मदन कुलकर्णी को अपर मुख्य सचिव का दर्जा मिला।

    विशेष सचिव बने अफसर:
    रविशंकर शुक्ला, नेहा अरोड़ा, संदीप सिंह, संजीव कुमार बेसरा, अजयनाथ झा और अन्य।

    इसके अलावा गैर-प्रशासनिक सेवा से भी 7 अफसरों को आईएएस में प्रमोट किया गया है। इस फैसले से झारखंड की प्रशासनिक सेवाओं में बड़ा बदलाव आने की संभावना है।

    तो झारखंड के पुलिस और प्रशासनिक ढांचे को मिलेंगी नई दिशाएं और जिम्मेदारियां।

  • झारखंड 2024: सीएम को हुई जेल और भाजपा हुई फ़ेल!

    परवेज़ आलम की खास रपट ……………..

    2024  झारखंड के लिए केवल एक चुनावी साल नहीं था, बल्कि सियासत का ऐसा रंगमंच था, जहां हर दिन एक नया ट्विस्ट देखने को मिला। जनवरी से शुरू हुई उथल-पुथल नवंबर में जाकर शांत हुई, लेकिन इस दौरान झारखंड ने इतिहास भी बनाया और राजनीति के सबसे दिलचस्प पल भी देखे।

    हेमंत सोरेनकी गिरफ्तारी ।

    31 जनवरी 2024, झारखंड की राजनीति और भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में दर्ज हो गया। पहली बार किसी मौजूदा मुख्यमंत्री को केंद्रीय जांच एजेंसी ने गिरफ्तार किया। ईडी के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से उनके आवास पर सात घंटे पूछताछ की और फिर रात में उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले 29 जनवरी को ईडी ने दिल्ली में शांति निकेतन स्थित उनके आवास, झारखंड भवन और उनके पिता शिबू सोरेन के घर पर छापेमारी की थी। लेकिन हेमंत सोरेन को ढूंढ नहीं पाई । 30 जनवरी को वे अचानक इंडिया गठबंधन के विधायकों के साथ रांची में बैठक करते दिखे।

    चंपाई सोरेन का मुख्यमंत्री बनना।

    31 जनवरी की रात हेमंत सोरेन को इस्तीफा देना पड़ा। उनकी गिरफ्तारी के बाद गठबंधन ने चंपाई सोरेन को मुख्यमंत्री चुना। पांच महीने तक राज्य की कमान चंपाई सोरेन के हाथ में रही

    5 महीने बाद जेल रिहाई और हेमंत की वापसी।

    28 जून 2024 को झारखंड हाई कोर्ट से हेमंत सोरेन को जमानत मिली। जेल से बाहर आते ही उन्होंने अपने नए लुक से सबको चौंका दिया। लंबे बाल और दाढ़ी में वे अपने पिता शिबू सोरेन की झलक दे रहे थे। उनकी रिहाई के साथ ही गठबंधन में सत्ता परिवर्तन की अटकलें तेज हो गईं। और आखिरकार, 4 जुलाई को हेमंत सोरेन ने तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली ।

    चुनाव और गठबंधन की जीत।

    2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन ने जबरदस्त प्रदर्शन किया। जेएमएम-कांग्रेस-आरजेडी और सीपीआई-एमएल के साथ मिलकर गठबंधन ने 81 में से 56 सीटों पर जीत दर्ज की। 28 नवंबर को हेमंत सोरेन ने चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

    बीजेपी के लिए निराशाजनक रहा साल।

    2024 बीजेपी की हार का साल भी साबित हुआ। लोकसभा चुनाव में भी पार्टी को झटका लगा, और विधानसभा चुनाव में उनकी हार ने झारखंड में उनकी स्थिति और कमजोर कर दी।

    झारखंड की राजनीति में 2024 का साल दिखाता है कि लोकतंत्र में एक दिन भी कितना निर्णायक हो सकता है। हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी से लेकर उनकी वापसी तक, सत्ता के हर पहलू में सस्पेंस, ड्रामा और नई उम्मीदें देखने को मिलीं।

    झारखंड की राजनीति को समझने के लिए इस साल को हमेशा याद किया जाएगा।
    तो दोस्तों, कैसी लगी ये कहानी ? कमेंट में अपनी राय जरूर दीजिएगा।

  • गिरिडीह : हाई लेवल प्लानिंग से जेवर दुकान मे लाखों की चोरी

    गिरिडीह : हीरोडीह थाना क्षेत्र के कोदम्बरी इलाके में सोमवार रात चोरी की बड़ी वारदात सामने आई है। चोरों ने आरएस ज्वेलर्स और वंदना ज्वेलर्स का शटर तोड़कर लाखों का माल और नकदी उड़ा ली। 6 लाख के गहने और 85 हज़ार रुपये नकद लेकर चोरों ने आरएस ज्वेलर्स को तो साफ कर दिया, लेकिन जब वंदना ज्वेलर्स पहुंचे, तो उनका खेल और बड़ा हो गया—20-30 लाख के गहने और सामान पर हाथ साफ कर दिया।
    कैसे हुई चोरी?
    सोमवार शाम दुकानें बंद कर दुकानदार घर चले गए। मंगलवार सुबह जब दुकान पर पहुंचे, तो उनके होश उड़ गए। शटर कटे हुए थे और दुकानें खाली।
    आरएस ज्वेलर्स के मालिक सीताराम स्वर्णकार ने बताया, “सिर्फ सामान ही नहीं, चोर गिरवी रखे गहने और मरम्मत के लिए आए सामान तक उठा ले गए।”
    वहीं वंदना ज्वेलर्स के मालिक सुधीर स्वर्णकार ने कहा, “शटर इतनी ऊंचाई तक उठा दी गई थी कि कोई आराम से अंदर जा सके। दुकान का सारा कीमती सामान ले गए, CCTV तोड़ा और DVR भी चुरा लिया।”
    चोरी का तरीका—’प्लानिंग लेवल हाई!’
    चोर न सिर्फ दुकान का शटर काटने में माहिर थे, बल्कि अंदर घुसते ही सबसे पहले CCTV और DVR को ठिकाने लगा दिया। इन्वर्टर तक को नहीं छोड़ा। दुकान में गहने और नकदी सब ले उड़े।
    पुलिस ने क्या कहा?
    घटना की जानकारी मिलते ही हीरोडीह थाने की टीम हरकत में आ गई। एसडीपीओ राजेंद्र प्रसाद और पुलिस टीम ने जांच शुरू कर दी। एसपी डॉ. बिमल कुमार ने बताया, “चोरी की वारदात कितनी बड़ी है, इसकी जांच चल रही है। अपराधियों को पकड़ने के लिए एक विशेष टीम बनाई गई है। छापेमारी जारी है, और जल्द ही अपराधियों को दबोचा जाएगा।”
    चोरों के हौसले बुलंद क्यों?
    घटना थाने के पास ही हुई, फिर भी चोरों ने बेखौफ होकर वारदात को अंजाम दिया। यह पुलिस के लिए सवाल खड़े करता है।
    क्या कहती है गिरिडीह की जनता?
    दुकानदारों और इलाके के लोगों में डर का माहौल है। उनका कहना है कि अगर पुलिस जल्द चोरों को नहीं पकड़ पाई, तो यह हिम्मत और बढ़ेगी। गिरिडीह की इस बड़ी चोरी ने फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या हमारी पुलिस वाकई सतर्क है? और अगर नहीं, तो अगला शिकार कौन होगा?

  • बिहार चुनाव 2025: झामुमो की राजनीतिक बिसात, 12 सीटों पर दावा!

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट……………..

    झारखंड की सियासी सरगर्मी अब बिहार की ओर बढ़ रही है। साल 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही राजनीतिक बिसात बिछने लगी है। इस बार झामुमो (झारखंड मुक्ति मोर्चा) भी पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरने को तैयार है। पार्टी ने 12 विधानसभा सीटों पर दावा ठोक दिया है, और यह मांग सीधे  महागठबंधन (राजद-कांग्रेस) से की गई है।

    झामुमो का तर्क: सीमावर्ती जिलों में मजबूत पकड़। 
    सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, झामुमो ने अपनी दावेदारी पर बड़ा तर्क दिया है—बिहार के सीमावर्ती जिलों में उनका मजबूत जनाधार है। पहले भी पार्टी के विधायक इन इलाकों से चुने जा चुके हैं। जिन सीटों पर झामुमो की नजर है, उनमें शामिल हैं:

    • तारापुर, कटोरिया, मनिहारी, झाझा, बांका, ठाकुरगंज
    • रूपौली, रामपुर, बनमनखी, जमालपुर, पीरपैंती, चकाई

    झामुमो का मास्टरप्लान।
    पार्टी के नेताओं का कहना है कि इन 12 सीटों पर उनके पास न सिर्फ मजबूत कार्यकर्ता आधार है, बल्कि जीतने वाले प्रत्याशी भी तैयार हैं। जल्द ही झामुमो, राजद, और कांग्रेस की महागठबंधन बैठक में यह मांग रखने की तैयारी है।

    2020 का सबक और 2025 की उम्मीद। 
    गौरतलब है कि 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में झामुमो ने अकेले चुनाव लड़ने का दांव खेला था। लेकिन यह कदम कामयाब नहीं हो सका। इस बार झामुमो को उम्मीद है कि झारखंड की तरह बिहार में भी महागठबंधन सीटों का बंटवारा उसी अंदाज में करेगा।

    क्या कहती है राजनीति?
    बिहार में झामुमो का दांव क्या रंग लाएगा?

    • राजद और कांग्रेस को सीट बंटवारे में झामुमो की मांग माननी होगी या सियासी घमासान बढ़ेगा?
    • सीमावर्ती जिलों में झामुमो के दावे को कितना समर्थन मिलेगा?

    , बिहार की सियासत एक बार फिर गरमाने को तैयार है। झारखंड का झामुमो बिहार में कितनी जगह बना पाएगा, यह देखने वाली बात होगी। लेकिन राजनीति का एक नियम तो तय है—जितनी बड़ी रणनीति, उतना बड़ा खेल!

  • झारखंड : PESA कानून लागू करने की कवायद तेज़, क्या है PESA कानून !

    परवेज़ आलम  की खास रिपोर्ट………….

    झारखंड में पेसा कानून (PESA Act) को लेकर बड़ी हलचल मची है। खबरें आ रही हैं कि पेसा नियमावली अब कैबिनेट में भेजे जाने की तैयारी में है। राज्य के महाधिवक्ता से सलाह लेकर इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है।

    क्या कहती हैं निदेशक निशा उरांव?
    निशा उरांव का कहना है कि, “2017 में पेसा कानून पर उच्च और सर्वोच्च न्यायालयों ने सरकार के पक्ष में फैसला सुना दिया था। इसके बाद इसे लागू करने की कवायद शुरू हुई, लेकिन कुछ लोगों ने जानबूझकर जनता को भटकाने का काम किया। इसी वजह से यह प्रक्रिया अटक गई।” उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत ने पंचायती राज अधिनियम को पेसा क्षेत्र के अनुकूल माना है और इसे 1996 के पेसा कानून के तहत सही ठहराया है। अब राज्य अधिनियम के तहत पेसा नियमावली का प्रस्ताव तैयार है। उन्होंने बताया कि देश के 10 राज्यों ने भी यही प्रक्रिया अपनाई है, जो कानूनी रूप से सही मानी जाती है।

    हाईकोर्ट का अल्टीमेटम: 2 महीने में लागू करें कानून!
    हाईकोर्ट ने पेसा कानून को जल्द लागू करने का आदेश दिया है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अरुण राय की बेंच ने 29 जुलाई को ही यह फैसला सुनाया था। लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया, जिसके बाद राज्य सरकार को फिर से अल्टीमेटम दिया गया है।

    क्या है विवाद?
    पेसा कानून को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में तीन याचिकाएं दायर की गई हैं। हालांकि अदालत ने साफ कहा है कि यह कानून सही प्रक्रिया के तहत है और इसे जल्द लागू करना अनिवार्य है।

    पेसा कानून का क्या मतलब है?
    पेसा यानी पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996। इसका मकसद आदिवासी इलाकों में स्वशासन को बढ़ावा देना और संसाधनों पर उनकी अधिकारिता सुनिश्चित करना है।

    कब तक लागू होगा?
    सूत्रों की मानें तो अगले दो महीने के भीतर पेसा कानून झारखंड में लागू हो सकता है। लेकिन क्या राज्य सरकार समय पर इस आदेश का पालन कर पाएगी या फिर एक बार फिर प्रक्रिया फाइलों में अटक जाएगी?

  • साइबर अपराध: ठगी की कहानी जानकार आप हो जाएंगे हैरान !

    गिरिडीह:गिरिडीह पुलिस ने ठगी के खेल में माहिर चार शातिर साइबर अपराधियों को पकड़ने में बड़ी सफलता हासिल की है। मोहनपुर के जंगल में ये ठग अपने फर्जीपन के जाल में लोगों को फंसाकर उनकी मेहनत की कमाई चट कर रहे थे। लेकिन, गिरिडीह पुलिस की फुर्ती और सूझबूझ ने इनके मंसूबों पर पानी फेर दिया। गिरफ्तार ठगों में अहिल्यापुर के पंडरिया गांव का अफजल अंसारी, मो. समीम, गांडेय के घाटकुल गांव का मो. मनीर अंसारी और रयूफ अंसारी शामिल हैं। इनके पास से पुलिस ने 14 मोबाइल फोन और 20 सिम कार्ड बरामद किए हैं। साइबर डीएसपी आबिद खान ने मंगलवार को मीडिया को  इसकी जानकारी दी।

    कैसे हुआ खुलासा?
    एसपी डॉ. विमल कुमार को गुप्त सूचना मिली थी कि मोहनपुर जंगल में कुछ लोग छिपकर साइबर ठगी का खेल खेल रहे हैं। एसपी के निर्देश पर पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर छापेमारी की और इन चारों को रंगे हाथ दबोच लिया। ये अपराधी कोरियर कंपनियों की वेबसाइट पर फर्जी नंबर डालने और एयरटेल पेमेंट बैंक के फर्जी अधिकारी बनने का नाटक कर लोगों को ठगते थे।

    अफजल: साइबर ठगी का ‘महागुरु’। 
    गिरफ्तार अफजल अंसारी इस गोरखधंधे में पिछले 10 साल से सक्रिय है। कोरियर सर्विस की आड़ में उसने गूगल पर दर्जनभर फर्जी नंबर डाल रखे थे। ये नंबर जब किसी ग्राहक को कोरियर रिटर्न करने की जरूरत होती, तो उसके गिरोह के पास पहुंच जाते।

    ठगी का तरीका:

    • ग्राहक को फोन पर फर्जी डिलीवरी रिटर्न की प्रक्रिया बताई जाती।
    • उनकी गोपनीय जानकारी जैसे OTP, बैंक डिटेल्स ले ली जाती।
    • और कुछ ही सेकंड में उनके खाते से रकम गायब!

    सावधान रहें:
    डीएसपी आबिद खान ने बताया, “अगर आप कोरियर या ऑनलाइन ऑर्डर रिटर्न कर रहे हैं, तो केवल कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट या ऐप का ही इस्तेमाल करें। गूगल पर दिख रहे अनजान नंबरों से सतर्क रहें।”

    गिरिडीह पुलिस का बड़ा कदम।
    इस कार्रवाई ने गिरिडीह जिले में साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस की गंभीरता को साफ कर दिया है। लेकिन सवाल यह है—क्या यह गिरफ्तारी इस संगठित अपराध के नेटवर्क को तोड़ने के लिए काफी है? तो दोस्तों आपका सतर्क रहना ही इन ठगों के खेल को खत्म कर सकता है!