Category: Jharkhand

  • गिरिडीह में डेटोनेटर ब्लास्ट: दो जवान घायल धनबाद रेफर

    GIRIDIH: गिरिडीह जिले के लटकटो-2 पिकेट में शनिवार सुबह का वक्त था जब अचानक डेटोनेटर ब्लास्ट हुआ। इस हादसे में झारखंड आर्म्ड पुलिस (जैप) के दो जवान घायल हो गए। घटना मधुबन थाना क्षेत्र की है।

    धनबाद रेफर किए गए घायल जवान
    घायल जवानों को तुरंत मधुबन से धनबाद के शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसएनएमएमसीएच) ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। घायल जवानों में जैप-5 के हवलदार अशोक कुमार और सिपाही गौतम कुमार शामिल हैं।

    जांच में सामने आई गंभीर स्थिति
    जांच में पता चला कि दोनों जवान डेटोनेटर जमा कराने जा रहे थे। इसी दौरान एक डेटोनेटर ब्लास्ट हो गया। हादसे में हवलदार अशोक कुमार का हाथ गंभीर रूप से जख्मी हो गया, जबकि सिपाही गौतम कुमार की उंगली उड़ गई।

    घायल जवानों का परिचय
    हवलदार अशोक कुमार बिहार के लखीसराय जिले के रहने वाले हैं, जबकि कांस्टेबल गौतम कुमार साहिबगंज जिले से हैं। दोनों जवानों की हालत चिंताजनक बताई जा रही है।

    ब्लास्ट की वजह क्या?
    इस हादसे के बाद घटना की जांच तेज कर दी गई है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, डेटोनेटर के रख-रखाव में लापरवाही ब्लास्ट का कारण हो सकता है। घटना ने सुरक्षा तैयारियों और उपकरणों के प्रबंधन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    घटना से जुड़ी अपडेट के लिए पढ़ते रहिए The News Post4U

  • प्रदीप यादव और राजेश कच्छप का कांग्रेस पार्टी दफ़्तर किया गया स्वागत

    RANCHI : कांग्रेस नेता प्रदीप यादव ने कहा कि पार्टी को राहुल गांधी के नेतृत्व में जिस लड़ाई को पूरे देश में मजबूती से आगे बढ़ाना है, वह उनकी पहली प्राथमिकता होगी। उन्होंने संगठन को सशक्त बनाने और पार्टी के विचारों को घर-घर तक पहुंचाने का आह्वान किया। यादव ने दिल्ली में बैठी केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए इसे जनविरोधी और देशविरोधी करार दिया। उन्होंने कहा, “ऐसी सरकार को सत्ता से बेदखल करना हमारा मकसद है। तमाम विधायकों और नेताओं के साथ मिलकर एक ठोस रोडमैप तैयार करेंगे ताकि आगामी चुनावों में सफलता सुनिश्चित हो सके।”
    प्रदीप यादव: कांग्रेस विचारधारा को हर घर तक पहुंचाने का संकल्प। 
    प्रदीप यादव ने जोर देकर कहा कि संगठन को मजबूत करना और कांग्रेस के विचारों को जनता तक पहुंचाना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, “परिश्रम करने वालों के लिए रास्ते खुद-ब-खुद बनते हैं। अगर ईमानदारी से काम किया जाए, तो सफलता जरूर मिलती है। हमारा उद्देश्य देश को एक मजबूत विकल्प देना है।”
    राजेश कच्छप ने जताया शीर्ष नेतृत्व का आभार।
    कांग्रेस विधायक दल के उपनेता राजेश कच्छप ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का धन्यवाद करते हुए कहा, “मुझे जो जिम्मेदारी मिली है, वह सरकार और पार्टी के बीच समन्वय स्थापित करने की है। मैं इस पर पूरी निष्ठा से खरा उतरने की कोशिश करूंगा। पार्टी कार्यकर्ताओं के सहयोग से सरकार की योजनाओं को धरातल पर लाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।”
    प्रदीप यादव के अनुभव पर भरोसा। 
    राजेश कच्छप ने प्रदीप यादव के अनुभव की सराहना करते हुए कहा, “उन्हें संसदीय कार्य प्रणाली का लंबा अनुभव है। उनके साथ मिलकर डिप्टी सीएलपी के तौर पर जिम्मेदारी निभाऊंगा और कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं के अनुरूप तालमेल बनाकर काम करूंगा।”
    नेतृत्व के फैसले पर खुशी।
    पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा, “पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने अनुभवी नेता प्रदीप यादव को विधायकों की कमान सौंपकर संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय की नींव रखी है। साथ ही, राजेश कच्छप को सहयोगी बनाना कार्यकर्ताओं के मनोबल को ऊंचा करने वाला फैसला है।”
    कांग्रेस ने संगठन को मजबूत करने और जनता के बीच अपनी जगह बनाने के लिए एक ठोस रणनीति तैयार की है।

  • मुख्यमंत्री हेमंत और कल्पना ने की भगवान भोलेनाथ की पूजा

    देवघर : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी धर्मपत्नी, गांडेय की विधायक कल्पना सोरेन ने आज देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच तीर्थ पुरोहितों ने विधिवत शिवलिंग का जलाभिषेक कराया। मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी ने झारखंडवासियों की सुख-समृद्धि और उन्नति के लिए बाबा से प्रार्थना की।

    देवघर एयरपोर्ट पर हुआ भव्य स्वागत. 
    देवघर एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी का स्वागत जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने किया। सारठ के विधायक उदय शंकर सिंह, संथाल परगना कमिश्नर लालचंद दादेल, आई.जी. क्रांति कुमार, डी.आई.जी. संजीव कुमार, उपायुक्त विशाल सागर और पुलिस अधीक्षक अजीत पीटर डुंगडुंग ने मुख्यमंत्री का अभिवादन किया। मौके पर मुख्यमंत्री को गॉर्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया।

    बासुकीनाथ धाम में बाबा भोलेनाथ की पूजा. 
    इसके बाद मुख्यमंत्री और कल्पना सोरेन दुमका जिले के प्रसिद्ध बासुकीनाथ धाम पहुंचे। वहां भी तीर्थ पुरोहितों ने पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना संपन्न कराई। मुख्यमंत्री ने राज्य की खुशहाली और प्रगति के लिए भगवान शिव से प्रार्थना की।

    धार्मिक आस्था और झारखंड की पहचान.
    बाबा बैद्यनाथ और बासुकीनाथ धाम न केवल झारखंड की धार्मिक आस्था के केंद्र हैं, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक धरोहर भी हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का यह धार्मिक दौरा झारखंड की परंपरा और धार्मिक भावनाओं से जुड़ाव को दर्शाता है।

    मुख्यमंत्री के इस दौरे ने न केवल धार्मिक महत्त्व को बल दिया है, बल्कि राज्य के विकास और जनहित के लिए उनकी प्रतिबद्धता को भी उजागर किया है।

  • मंईयां सम्मान योजना का इंतजार खत्म: जानिए किस तारीख को महिलाओं के खाते में आएंगे 2500 रुपये

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट……
    झारखंड में लाखों महिलाओं के लिए राहत भरी खबर आई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की महत्वाकांक्षी योजना मंईयां सम्मान योजना के तहत लाभुकों के खाते में 2500 रुपये की राशि इसी महीने से ट्रांसफर की जाएगी। माना जा रहा है कि सीएम सोरेन 14 दिसंबर को अपने विधानसभा क्षेत्र बरहेट से इस योजना की पांचवी किस्त जारी करेंगे।
    बरहेट से होगी योजना की शुरुआत। 
    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 14 दिसंबर को अपने दो दिवसीय संताल दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे वीर शहीद सिदो-कान्हू और फूलो-झानो की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण करेंगे। जनसभा को संबोधित करते हुए, महिला लाभुकों के खातों में 2500 रुपये ट्रांसफर करने की संभावना है।
    आर्थिक मदद के लिए बजट पास। 
    हाल ही में सोरेन सरकार ने 2024-25 के लिए दूसरा अनुपूरक बजट पेश किया, जिसमें महिला, बाल विकास और सामाजिक सुरक्षा विभाग को प्रमुखता दी गई। मंईयां सम्मान योजना इसी विभाग के अंतर्गत संचालित हो रही है। बजट पास होने के बाद वित्त विभाग से राशि नोडल विभाग को ट्रांसफर की जाएगी।
    महिलाओं को जल्द मिलेगा लाभ। 
    योजना का लाभ पाने के लिए महिलाएं लंबे समय से इंतजार कर रही थीं। हालांकि इस महीने देरी का कारण अनुपूरक बजट की प्रक्रिया रही। विभागीय सूत्रों के अनुसार, एक-दो दिन में सारी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी।
    संताल दौरे पर सोरेन परिवार। 
    मुख्यमंत्री के साथ उनकी पत्नी और गांडेय की विधायक कल्पना सोरेन भी दौरे पर रहेंगी। सीएम देवघर बाबाधाम और दुमका के बासुकिनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद बरहेट में जनसभा को संबोधित करते हुए महिला लाभुकों के खातों में राशि भेजने की शुरुआत करेंगे।

    मंईयां सम्मान योजना के तहत इस किस्त से झारखंड की लाखों महिलाओं को आर्थिक सहायता मिलेगी। यह योजना न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति को सशक्त बनाएगी बल्कि आने वाले चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  • रांची के पूर्व DC छवि रंजन को बड़ा झटका, कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज की

    रांची के पूर्व डीसी छवि रंजन को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। यह मामला सेना की जमीन की अवैध खरीद-फरोख्त से जुड़ा हुआ है। गुरुवार को विशेष PMLA कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए उनकी याचिका को नामंजूर कर दिया। सोमवार को सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने इस मामले में अपना निर्णय सुरक्षित रखा था।

    प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में कांड संख्या 01/2023 के तहत जांच शुरू की थी। मामले में ED के विशेष लोक अभियोजक शिव कुमार उर्फ काका जी ने अपनी दलीलें पेश कीं।

    अब तक की जांच में ED ने इस जमीन घोटाले के सिलसिले में अमित अग्रवाल, दिलीप घोष, पूर्व डीसी छवि रंजन, बड़ागाईं अंचल के राजस्व उप निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद, कथित रैयत प्रदीप बागची, और जमीन कारोबारी अफसर अली, इम्तियाज खान, तल्हा खान, फैयाज खान, व मोहम्मद सद्दाम को गिरफ्तार किया है। फिलहाल सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं।

  • प्रदीप यादव बने कांग्रेस विधायक दल के नेता

    By -Perwez Alam

    RANCHI: झारखंड की राजनीति में सस्पेंस खत्म हुआ! आखिरकार कांग्रेस ने विधायक दल के नेता और उपनेता के नामों पर मोहर लगा दी है। पोड़याहाट से छठी बार विधायक बने प्रदीप यादव को कांग्रेस विधायक दल नेता चुना गया है, और खिजरी से लगातार दूसरी बार विधायक बने राजेश कच्छप को उपनेता की जिम्मेदारी दी गई है।

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने विधानसभा स्पीकर रबींद्रनाथ महतो को एक सीलबंद लिफाफे में इन नामों की सूचना दी। वहीं, दूसरी तरफ झामुमो ने भी बड़ा फैसला लेते हुए टुंडी से चार बार के विधायक मथुरा प्रसाद महतो को मुख्य सचेतक की जिम्मेदारी सौंप दी है।

    प्रदीप यादव: सियासत का पुराना खिलाड़ी. 
    प्रदीप यादव की बात करें तो पोड़याहाट की जनता ने उन्हें लगातार छह बार विधानसभा पहुंचाया है। वो कभी बीजेपी का चेहरा रहे, फिर झारखंड विकास मोर्चा के टिकट पर चुनाव जीते, और अब कांग्रेस के नेता के रूप में पहचान बना रहे हैं। उनकी इस राजनीतिक यात्रा ने उन्हें एक अनुभवी और कद्दावर नेता बना दिया है।

    राजेश कच्छप: युवा और ऊर्जावान चेहरा. 
    राजेश कच्छप, जो खिजरी से लगातार दूसरी बार विधायक बने हैं, कांग्रेस के लिए एक युवा और भरोसेमंद नेता माने जाते हैं। उनकी नियुक्ति यह संकेत देती है कि कांग्रेस युवा नेताओं को आगे लाने का मन बना चुकी है।

    झामुमो का दांव: मथुरा प्रसाद महतो बने मुख्य सचेतक
    अब बात झामुमो की। टुंडी से चार बार के विधायक मथुरा प्रसाद महतो को पार्टी ने मुख्य सचेतक बना दिया है। दिलचस्प बात यह है कि मथुरा महतो का नाम पहले कैबिनेट मंत्री पद के लिए चर्चा में था, लेकिन पार्टी ने इस जिम्मेदारी के लिए गोमिया के विधायक योगेंद्र महतो को चुना। योगेंद्र महतो को पेयजल और मध निषेध विभाग सौंपा गया है।

    सियासत का गणित और गठबंधन का संतुलन
    झारखंड की राजनीति में कांग्रेस और झामुमो गठबंधन का संतुलन बनाना हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है। लेकिन इन नियुक्तियों से दोनों दलों ने अपने-अपने पत्ते खोल दिए हैं। प्रदीप यादव का अनुभव, राजेश कच्छप की ऊर्जा और मथुरा महतो की लोकप्रियता, सब कुछ अगले चुनाव की रणनीति का हिस्सा है

    झारखंड की सियासत गर्म है और यह तो तय है कि आने वाले दिन और भी दिलचस्प होंगे।

  • I.N.D.I.A की कमान पर मचा घमासान: JMM ने सुझाया फार्मूला

    परवेज़ आलम की विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग ………

    I.N.D.I.A यानी विपक्षी दलों का सबसे बड़ा गठबंधन। इसका नेतृत्व कौन करेगा? ये सवाल अब सियासत के गलियारों में गूंज रहा है। इस बीच झारखंड से झामुमो का बयान आया है। महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने जो कहा, उसका मतलब साफ है—नेतृत्व ऐसा हो जो परिपक्व हो, अनुभव से भरा हो। लेकिन इस बयान के मायने क्या हैं?

    झामुमो का संदेश: नाम नहीं, मगर इशारा साफ। 
    झामुमो ने किसी का नाम नहीं लिया। पर क्या इस बयान का मतलब ममता बनर्जी के समर्थन में है, या कांग्रेस पर सवाल ? झारखंड में सत्ता चला रही।  झामुमो का वजन अब राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ रहा है। हेमंत सोरेन की पार्टी न सिर्फ गठबंधन का अहम हिस्सा है, बल्कि खुद सोरेन I.N.D.I.A की कोर कमेटी में भी हैं।

    सार्वजनिक बहस पर रोक की वकालत
    भट्टाचार्य ने कहा कि नेतृत्व जैसे मुद्दे पर सार्वजनिक मंच से चर्चा नहीं होनी चाहिए। यह इशारा किस तरफ है? हाल के दिनों में लालू यादव और शरद पवार ने ममता बनर्जी के नेतृत्व की वकालत की है। वहीं कांग्रेस के नेतृत्व पर सवाल भी उठे हैं।

    ममता बनर्जी: विपक्ष की धुरी या सवालों का केंद्र?
    ममता बनर्जी को लेकर विपक्ष में चर्चा गर्म है। बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता, विपक्ष की रणनीति में अहम मानी जाती हैं। पर क्या कांग्रेस इस पर सहमत होगी? राहुल गांधी की हालिया सक्रियता और कांग्रेस का इरादा क्या ममता के पक्ष में जाएगा?

    हेमंत सोरेन का दांव: गठबंधन की सीख। 
    हेमंत सोरेन ने झारखंड में गठबंधन को सफलतापूर्वक संभाला। कांग्रेस, राजद और वाम दलों के बीच तालमेल बैठाया। सीट शेयरिंग से लेकर मंत्री पद तक—हर जगह गठबंधन का धर्म निभाया। झारखंड में यह मॉडल I.N.D.I.A के लिए सबक हो सकता है।

    क्या बोले सियासी संकेत?
    झामुमो का बयान, झारखंड की सीमाओं से आगे जाकर संदेश दे रहा है। विपक्ष को बेहतर समन्वय और तालमेल का रास्ता दिखाने की कोशिश। लेकिन क्या इस ‘परिपक्व और अनुभवी’ नेता की परिभाषा पर सभी दल सहमत होंगे?

    कहानी अभी बाकी है…
    तो सवाल फिर वही है—I.N.D.I.A का नेतृत्व किसके हाथ में होगा? झामुमो का बयान, लालू-ममता की वकालत, कांग्रेस की दुविधा—ये सब इस राजनीति की गहराई को और बढ़ाते हैं।

    नेतृत्व पर निर्णय भले देर से हो, लेकिन एक बात साफ है—यह चुनावी राजनीति का सबसे बड़ा दांव है। और जब दांव बड़ा हो, तो हर कदम संभलकर उठाना होता है।

  • ‘जीनत’ की दस्तक, जंगलों से शहर तक दहशत ! कौन है ज़ीनत ?

    जमशेदपुर : झारखंड के चाकुलिया एरोड्रम के पास बाघिन ‘जीनत’ की मौजूदगी ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। सिमलीपाल टाइगर रिजर्व से भागकर आई इस बाघिन ने वन विभाग को खूब दौड़ाया। जीनत के गले में बंधे रेडियो कॉलर से उसके हर कदम की खबर तो मिल रही है, लेकिन उसे पकड़ना अब तक नामुमकिन साबित हो रहा है।

    “जीनत का सफर और गांवों में खौफ”
    ओडिशा से निकलकर गुड़ाबांधा के रास्ते चाकुलिया पहुंची तीन साल की जीनत ने मंगलवार को पूरा दिन गोदराशोल जंगल में बिताया। यह जंगल चाकुलिया शहर से महज दो किलोमीटर दूर है। रेडियो कॉलर के जरिए उसकी हरकतें ट्रैक की जा रही हैं, लेकिन गांवों के लोग अब खौफ में हैं। आसपास के गांव जैसे मोरबेड़ा, राजाबासा, और सानघाटी के लोग घर से बाहर निकलने से डर रहे हैं। यहां तक कि मवेशियों को भी जंगल की ओर नहीं भेज रहे।

    “वन विभाग की टीमें और जीनत की चालाकी”
    जीनत की निगरानी के लिए ओडिशा और झारखंड से वन विभाग की 80 सदस्यीय टीम जुटी है। सिमलीपाल टाइगर रिजर्व से आए विशेषज्ञों की 20 सदस्यीय टीम और चाकुलिया वन क्षेत्र के 60 वनकर्मी अलग-अलग पाली में काम कर रहे हैं। लेकिन जीनत इतनी चालाक है कि दिनभर इन टीमों को चकमा देती रही। वन विभाग की आरसीसीएफ स्मिता पंकज के मुताबिक, “जीनत अब तक सीधी दिशा में बढ़ रही है। वह राजाबासा और गोदराशोल के जंगलों में आराम कर रही है। अगर यह सीधे बढ़ती है तो रेलवे लाइन या रिहाइशी इलाका आ सकता है।”

    “बेहोश करके ओडिशा लौटाने की तैयारी”
    वन विभाग की योजना है कि अगर जरूरत पड़ी तो जीनत को ट्रेंकुलाइज करके सिमलीपाल वापस भेजा जाएगा। विशेषज्ञ एस साई का कहना है कि बाघिन अब तक इंसानों का शिकार नहीं कर चुकी है, जो राहत की बात है। लेकिन उसकी हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

    गांववालों के लिए जीनत सिर्फ एक बाघिन नहीं, बल्कि डर का दूसरा नाम बन गई है। बच्चे घरों में कैद हैं, और झुंड में रहने वाले ग्रामीण जंगल की ओर झांकने तक से कतरा रहे हैं। वन विभाग की टीमें अपनी जगह मुस्तैद हैं, लेकिन जीनत का अगला कदम क्या होगा, ये सवाल सबके दिलों में खौफ पैदा कर रहा है।

  • गिरिडीह के खंडोली में साइबेरियन मेहमानों का स्वागत, झील बनी नयनाभिराम

    परवेज़ आलम
    गिरिडीह का खंडोली पर्यटन स्थल इन दिनों साइबेरियन पक्षियों के स्वागत में सराबोर है। झील के शांत पानी पर तैरते ये सफेद परिंदे और उनके कलरव से खंडोली का माहौल और भी मोहक हो गया है। अक्टूबर-नवंबर में हर साल साइबेरियन पक्षी यहां प्रवास के लिए आते हैं, लेकिन इस बार इनकी संख्या ने लोगों को और भी उत्साहित कर दिया है।

    “झील पर पक्षियों का जलवा”
    साइबेरियन क्रेन, गूज और स्वान की उपस्थिति खंडोली की झील को जैसे जीवंत बना देती है। ये पक्षी तिब्बत, मंगोलिया और मध्य एशिया से हजारों किलोमीटर का सफर तय कर यहां पहुंचते हैं। झील के इर्द-गिर्द हरे-भरे जंगल और पहाड़ियों का सौंदर्य, इन परिंदों की खूबसूरती को और बढ़ा देता है।

    “पर्यटकों के लिए खंडोली बना परिंदों का स्वर्ग”
    पक्षी दर्शन और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए खंडोली इन दिनों हॉटस्पॉट बन गया है। नौका विहार करते हुए पर्यटक इन परिंदों की तस्वीरें लेने से खुद को रोक नहीं पाते। खंडोली झील पर पंछियों के साथ बिताए पल, यहां आने वाले हर व्यक्ति के लिए यादगार बन जाते हैं।

    “प्रकृति को बचाने की गुहार”
    पक्षी शोधकर्ताओं  ने खंडोली जलाशय को संरक्षित क्षेत्र घोषित करने की मांग की है। उनका कहना है कि  ये पक्षी दिसंबर से जनवरी तक यहां प्रवास करते हैं और मार्च के अंत में अपने देश लौट जाते हैं। “प्राकृतिक आवास और सुरक्षा इन पक्षियों के लिए अनिवार्य है। प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए,”

    “साइबेरियन परिंदों के साथ खंडोली का जादू”
    खंडोली की झील इन परिंदों के साथ पर्यावरण प्रेमियों और सैलानियों के लिए एक खूबसूरत तोहफा है। झारखंड के इस छोटे से कोने में हर साल ये मेहमान प्रकृति का जादू बिखेरते हैं। अगर आपने अभी तक इनका दीदार नहीं किया, तो यह मौका हाथ से जाने मत दीजिए।

  • JPSC अध्यक्ष की नियुक्ति पर हाईकोर्ट सख्त

    RANCHI: झारखंड हाईकोर्ट में आज JPSC अध्यक्ष की नियुक्ति से संबंधित रिट याचिका पर सुनवाई हुई। जस्टिस एस.एन. पाठक की अध्यक्षता वाली बेंच ने मामले की गंभीरता पर जोर दिया। याचिका के माध्यम से अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने अदालत को बताया कि 22 अगस्त से JPSC अध्यक्ष का पद खाली है, जिससे परीक्षाओं और उनकी प्रक्रियाओं में देरी हो रही है।

    “हजारों छात्रों का भविष्य अधर में”
    याचिकाकर्ता ने कोर्ट से गुहार लगाई कि JPSC अध्यक्ष की नियुक्ति में हो रही देरी छात्रों के भविष्य को खतरे में डाल रही है। कोर्ट ने सरकार और JPSC के वकीलों से तुरंत इस समस्या का समाधान निकालने और अध्यक्ष की नियुक्ति के आदेश दिए।

    “पद खाली क्यों, जब अन्य भरे जा रहे हैं?”
    सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। अदालत ने कहा, “जब DGP और अन्य महत्वपूर्ण पदों की नियुक्ति तुरंत हो रही है, तो JPSC अध्यक्ष का पद अब तक खाली क्यों है?” कोर्ट ने इस देरी को अनुचित ठहराते हुए कहा कि यह न केवल पॉलिसी का मामला है, बल्कि हजारों बच्चों के भविष्य से जुड़ा हुआ भी है।

    हाईकोर्ट ने सरकार से कहा कि एक पॉपुलर गवर्नमेंट होने के बावजूद, इस तरह की देरी सवाल खड़े करती है। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि वह इस मुद्दे को प्राथमिकता देते हुए अध्यक्ष की नियुक्ति की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करे।

    इस सुनवाई के बाद JPSC और सरकार पर दबाव बढ़ गया है, और अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि नियुक्ति प्रक्रिया कितनी जल्दी पूरी होती है।