Category: Politics

  • बिना नेता प्रतिपक्ष के पारित होगा झारखंड विधान सभा का बजट !

    भाजपा में नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश अध्यक्ष की खोज जारी, पर कब खत्म होगा इंतजार?

    – परवेज़ आलम

    झारखंड में विधानसभा चुनाव को बीते तीन महीने हो चुके हैं, लेकिन क्या मजाल कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अब तक नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर कोई फैसला ले पाई हो! बजट सत्र की गूंज विधानसभा में गूंजने लगी है, लेकिन मुख्य विपक्षी दल के नेता का नाम अब तक सस्पेंस बना हुआ है। सवाल यह उठता है कि जब सत्ता पक्ष अपनी जिम्मेदारियों में जुटा हुआ है, तो विपक्ष का यह ढुलमुल रवैया किस ओर इशारा करता है?

    बिना नेता प्रतिपक्ष के बजट ! यह कैसी राजनीति?

    3 मार्च को राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर विधानसभा में बजट पेश करने वाले हैं। लेकिन यह बजट इतिहास में इस बात के लिए भी दर्ज होगा कि जब इसे विधानसभा में पेश किया जाएगा, तो वहां विपक्ष का कोई मुखिया मौजूद नहीं होगा! यह एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया की गंभीर चूक मानी जा रही है। यह महज संयोग नहीं, बल्कि भाजपा के आंतरिक असंतुलन का संकेत भी देता है।

    विधानसभा अध्यक्ष की नाराजगी, लेकिन भाजपा बेफिक्र!

    झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी जता दी है। उनका साफ कहना है कि विपक्ष में नेता का होना अनिवार्य है, ताकि सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चल सके। लेकिन क्या भाजपा इस बात को गंभीरता से ले रही है? या फिर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के लिए झारखंड की राजनीतिक तस्वीर फिलहाल किसी प्राथमिकता में नहीं है?

    दिल्ली में अटकी फाइल, इंतजार में रांची!

    नेता प्रतिपक्ष का चयन आखिर क्यों नहीं हो पा रहा? सूत्रों की मानें तो भाजपा की केंद्रीय कमेटी अब तक इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं ले पाई है। पार्टी के कई बड़े नेता झारखंड आ चुके हैं, लेकिन हर बार सिर्फ कयास और अटकलों का दौर चलता है, नतीजा कुछ नहीं निकलता।

    कौन होगा अगला नेता प्रतिपक्ष? संभावित नामों की सूची लंबी!

    अगर झारखंड की राजनीति के गलियारों में सुगबुगाहट सुनी जाए, तो भाजपा के भीतर कई नामों की चर्चा है।

    1. बाबू लाल मराण्डी :पूर्व मुख्य मंत्री व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष,विधायी कार्यों का लंबा अनुभव
    2. सीपी सिंह: रांची विधायक, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और कद्दावर नेता।
    3. नीरा यादव: कोडरमा विधायक, महिला चेहरा।
    4. नवीन जायसवाल: हटिया विधायक, ओबीसी समाज से आते हैं और भाजपा की सामाजिक संतुलन नीति के तहत इनका नाम भी चर्चा में है।

    लेकिन असल सवाल यह है कि चर्चा कब खत्म होगी और भाजपा अपने नेता के नाम पर अंतिम मुहर कब लगाएगी?

    प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी भी खाली, कब मिलेगा नया अध्यक्ष?

    झारखंड भाजपा सिर्फ नेता प्रतिपक्ष की ही नहीं, बल्कि प्रदेश अध्यक्ष की भी तलाश में है। रघुवर दास के ओड़ीसा के राज्यपाल से इस्तीफे के बाद से ही यह कयास लगाया जा रहा था कि इन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद कि जिम्मेवारी मिल सकती है पर आलाकमान कोई निर्णय लेने कि स्थिति मे फिलवक्त नहीं दिखती । पार्टी संगठन के स्तर पर सांगठनिक चुनाव अभी जारी है और जिला स्तर पर इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही प्रदेश अध्यक्ष का नाम सामने आएगा। लेकिन तब तक कार्यकर्ताओं को सिर्फ इंतजार ही करना होगा।

    क्या भाजपा की रणनीति झारखंड में कमजोर पड़ रही है?

    झारखंड में भाजपा को एक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाने की जरूरत है, लेकिन पार्टी का यह ढुलमुल रवैया न केवल कार्यकर्ताओं के बीच असमंजस पैदा कर रहा है, बल्कि इसका राजनीतिक नुकसान भी पार्टी को उठाना पड़ सकता है। अगर भाजपा जल्द ही नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा नहीं करती, तो यह उसकी साख पर सवाल खड़े करने वाला साबित हो सकता है।

    आखिर कब खत्म होगा यह इंतजार?

    झारखंड में भाजपा का राजनीतिक अस्थिरता का यह दौर कब खत्म होगा? भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व कब नींद से जागेगा? और क्या झारखंड में विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए भाजपा सच में गंभीर है? ये तमाम सवाल भाजपा के लिए जितने महत्वपूर्ण हैं, उतने ही झारखंड की जनता के लिए भी। क्योंकि लोकतंत्र की मजबूती के लिए सत्ता के साथ एक मजबूत विपक्ष भी जरूरी होता है।

  • विधानसभा: लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंदिर ! सीएम ने विधायकों को दिलाई लोकतांत्रिक मूल्यों की शपथ

    परवेज़ आलम की विश्लेषणात्मक रिपोर्ट

    झारखंड विधानसभा के सभागार में जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने माइक संभाला, तो उनका संदेश बिल्कुल स्पष्ट था— “विधानसभा भवन लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंदिर है!” और यह मंदिर किसी धर्म, जाति या व्यक्ति विशेष की जागीर नहीं, बल्कि जनता की आकांक्षाओं का पवित्र स्थल है।

    शनिवार को नव-निर्वाचित विधायकों के लिए आयोजित दो दिवसीय प्रबोधन सह प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ पर मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र की इस पवित्रता को रेखांकित किया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि “इस सदन में भले ही पक्ष और विपक्ष के विचार अलग हों, लेकिन यह लोकतांत्रिक व्यवस्था सबको साथ लेकर चलने के लिए है।”

    जनप्रतिनिधियों की पाठशाला!

    अब जरा समझिए, यह प्रशिक्षण सत्र कोई साधारण औपचारिकता नहीं थी।
    बजट सत्र से पहले विधायकों को उनके कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का स्मरण कराना था। यानी, उन्हें सिखाया गया कि कैसे प्रश्नकाल में सरकार से जवाब मांगा जाए, शून्यकाल में जनहित के मुद्दे उठाए जाएं, विधायिका की कार्यवाही को प्रभावी बनाया जाए, और सबसे जरूरी— लोकतंत्र की ताकत को समझा जाए। छठी झारखंड विधान सभा के सदस्यों के प्रशिक्षण को ध्यान में रखकर आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है।

    बात सिर्फ विधायकों की नहीं, लोकतंत्र की गरिमा की भी!

    हेमंत सोरेन ने अपने संबोधन में कहा,
    👉 “सीखने की कोई उम्र नहीं होती।”
    👉 “जो भी इस सदन में आते हैं, वे सीखते भी हैं और जनता की आकांक्षाओं को पटल पर रखते भी हैं।”
    👉 “सदन की कार्यवाही में सभी सदस्यों को साथ लेकर राज्य को समृद्ध और विकसित बनाने के लिए आगे बढ़ना जरूरी है।”

    यानी, यह सिर्फ सत्ता की कुर्सी का सवाल नहीं, जनता के प्रति जवाबदेही का संकल्प है।

    मुख्यमंत्री, राज्यसभा के उपसभापति, संसदीय कार्य मंत्री और अन्य गणमान्य

    सिर्फ भाषण नहीं, एक मजबूत संदेश!

    यह आयोजन सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने का संकल्प था।
    झारखंड विधानसभा के प्रबोधन कार्यक्रम में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, विधानसभाध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो, संसदीय कार्य मंत्री राधा कृष्ण किशोर, मंत्रीगण और कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में विधायकों को उनके कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का स्मरण कराया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बजट सत्र के दौरान विधायकों को सदन की कार्यवाही को बेहतर ढंग से समझने और लोकतंत्र को मजबूत बनाने में योगदान देने के लिए तैयार करना था।

    कार्यक्रम में विधायकों की भूमिका, प्रश्नकाल का महत्व, शून्यकाल, व्यवधान, विधि निर्माण, बजट और वित्तीय मामलों पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही, नए और अनुभवी विधायकों के बीच विचारों के आदान-प्रदान को भी प्रोत्साहित किया गया।

     

    सवाल यह है कि क्या यह सत्र महज औपचारिकता था या विधायकों ने वास्तव में कुछ सीखा?
    क्योंकि लोकतंत्र का यह मंदिर तभी पवित्र रहेगा, जब इसमें जनता की आवाज गूंजेगी, न कि सत्ता का अहंकार!

    तो अगली बार जब विधानसभा की कार्यवाही में हंगामा हो, तो याद रखिएगा— यहां सिर्फ कुर्सियों की नहीं, लोकतंत्र की परीक्षा होती है!

     

  • झारखंड: बदलते वक़्त की नई तस्वीर

    गुजरात के कच्छ उत्सव की तरह झारखंड मे होगा  ‘नेतरहाट उत्सव’

    परवेज़ आलम की खास रपट

    झारखंड—एक ऐसी धरती, जो खनिजों की दौलत और अपार संभावनाओं से भरी हुई है। लेकिन क्या यह हिंदुस्तान के पर्यटन नक्शे पर उतना दमकता है, जितना इसे दमकना चाहिए? जवाब है—नहीं! मगर यह बदलने जा रहा है।

    झारखंड की ऐतिहासिक धरोहर

    साल 2000 में बिहार से अलग होकर एक नया राज्य बना झारखंड। तब इसे हेल्थ रिसॉर्ट के तौर पर जाना जाता था। बंगाल के नामचीन चेहरे गर्मियों में यहीं सुकून पाते थे। यही वह जगह है जहां सर जेसी बोस ने ‘क्रेस्कोग्राफ मशीन’ बनाई और साबित किया कि पेड़ों में भी जीवन होता है। मशहूर गणितज्ञ पीसी महलनोबिस ने यहां भारतीय सांख्यिकी संस्थान की स्थापना की। और गोमो रेलवे स्टेशन—जहां से नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने अंग्रेजों को चकमा देकर विदा ली थी—अब ‘सुभाष चंद्र बोस गोमो रेलवे स्टेशन’ कहलाता है।

    बदलाव की नई बयार

    पिछले चार महीनों में झारखंड सरकार ने कई नए कदम उठाए हैं। जमशेदपुर में स्काईडाइविंग शो हुआ , मेक माय ट्रिप के साथ साझेदारी हो चुकी है, चार ग्लास के शानदार पुल को मंजूरी मिल गई है, माइन टूरिज्म, नाइट सफारी और जंगल सफारी जैसी योजनाएं पाइपलाइन में हैं। इन बदलावों को लेकर पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने अपने विचार साझा किए ।

    पर्यटन मंत्री की रणनीति

    जब पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने पद संभाला, तो देखा कि पर्यटन का 70% बजट धार्मिक स्थलों पर खर्च हो रहा है, जबकि बाकी पर्यटन क्षेत्र उपेक्षित हैं। उनका मकसद संतुलन बनाना है। साथ ही, एक और बड़ी समस्या यह थी कि झारखंड के ज्यादातर पर्यटन स्थल जंगलों में हैं, लेकिन पर्यटन और वन विभागों के बीच तालमेल की कमी के चलते बुनियादी सुविधाएं प्रभावित हो रही थीं।

    इको-टूरिज्म को बढ़ावा

    सरकार ने जेईटीए (Jharkhand Eco-tourism Amenities) को पुनर्जीवित किया, जिसे 2017 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बनाया गया था। अब यह झारखंड के पर्यटन स्थलों में इको-टूरिज्म की नई तस्वीर पेश करेगा। साथ ही, संयुक्त वन प्रबंधन समिति (JFMC) में महिलाओं की भागीदारी 33% से बढ़ाकर 50% करने का फैसला लिया गया है।

    स्थानीय युवाओं को ट्रेनिंग

    पर्यटन और आतिथ्य उद्योग को मजबूत करने के लिए होटल इंडस्ट्री के विशेषज्ञों से संपर्क किया गया है। स्थानीय युवाओं को पेशेवर ट्रेनिंग दी जा रही है ताकि झारखंड के पर्यटन स्थलों पर बेहतरीन सेवा सुनिश्चित की जा सके। इसके अलावा, होमस्टे कल्चर को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि बजट ट्रैवलर्स के लिए भी राज्य को आकर्षक बनाया जा सके।

    राजस्व मॉडल और नई योजनाएं

    इको-टूरिज्म से होने वाली आय का 60% जेईटीए को मिलेगा और 40% जेएफएमसी को, ताकि स्थानीय समुदायों को रोजगार मिल सके। इसके अलावा, झारखंड पर्यटन विकास निगम (JTDC) को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केरल और ओडिशा के सफल मॉडल्स को अपनाया जा रहा है।

    नेतरहाट फेस्टिवल: झारखंड की पहचान

    गुजरात के कच्छ उत्सव से प्रेरित होकर झारखंड सरकार ‘नेतरहाट उत्सव’ शुरू कर रही है, जो 15 नवंबर से 15 जनवरी तक चलेगा। इसमें 80% स्थानीय खानपान होगा, और झारखंड की संस्कृति को दुनिया के सामने लाने का मौका मिलेगा।

    झारखंड का नया सफर

    बदलाव की यह लहर केवल झारखंड के लोगों के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश और दुनिया के लिए भी एक नया आयाम साबित होगी। पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की इस मुहिम में झारखंड खुद को एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

     

  • झारखंड विधानसभा में 5508 करोड़ रुपये का तीसरा अनुपूरक बजट पेश, महिला, बाल विकास और शिक्षा पर विशेष ध्यान

    झारखंड विधानसभा में तीसरा अनुपूरक बजट पेश, ऊर्जा विभाग को सबसे अधिक आवंटन

    झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष का तीसरा अनुपूरक बजट पेश किया। गुरुवार को वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के बाद सदन में 5508 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट प्रस्तुत किया। इस बजट में विभिन्न विभागों के लिए धनराशि का आवंटन किया गया, जिसमें सबसे अधिक राशि ऊर्जा विभाग को दी गई।

    इस तृतीय अनुपूरक बजट में ऊर्जा विभाग के लिए 971.80 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं, कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता (कृषि) विभाग को 176.48 लाख रुपये, पशुपालन प्रभाग को 241.34 लाख रुपये, मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग को 612.62 लाख रुपये और उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग को 180.75 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं।

    इसके अलावा, वित्त विभाग को 10471.61 लाख रुपये, पेंशन मद के लिए 50,000 लाख रुपये, वाणिज्य कर विभाग को 50 लाख रुपये और खाद्य, जन वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग को 74 लाख रुपये दिए गए हैं। वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के लिए 16137.95 लाख रुपये तथा स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के लिए 14289.39 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।

    शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़े आवंटन किए गए हैं। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सेकेंडरी शिक्षा विभाग को 18850.43 लाख रुपये और प्राथमिक एवं बजट शिक्षा प्रभार को 39293.50 लाख रुपये मिले हैं। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के लिए 150 लाख रुपये और उद्योग विभाग को 274.54 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।

    महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग को 26668.69 लाख रुपये तथा ग्रामीण कार्य विभाग को 87329 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं। इस अनुपूरक बजट के जरिए विभिन्न योजनाओं को मजबूती देने और विकास कार्यों को गति देने का प्रयास किया गया है।

  • मंत्री चमरा लिंडा का बड़ा बयान: सदन में कहा, 15 मार्च तक मंईयां सम्मान योजना की राशि होगी जारी

    मंईयां सम्मान योजना की बकाया राशि 15 मार्च तक खातों में भेजी जाएगी: मंत्री चमरा लिंडा

    बजट सत्र के तीसरे दिन मंत्री चमरा लिंडा ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि मंईयां सम्मान योजना की बकाया राशि 15 मार्च तक महिलाओं के खातों में जमा कर दी जाएगी।

    सदन में सीपी सिंह के सवाल का जवाब देते हुए मंत्री ने बताया कि इस योजना की राशि महिलाओं के खाते में भेजने की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि 15 मार्च तक बाकी बची सभी किस्तों का भुगतान कर दिया जाएगा।

    मंत्री ने आगे कहा कि मार्च माह की राशि महिलाओं के खातों में ट्रांसफर होना शुरू हो गया है, जबकि जनवरी और फरवरी माह की बकाया किस्तें भी 15 मार्च तक खातों में जमा कर दी जाएंगी।

  • झारखंड सरकार ने गठित की TAC, CM हेमंत बने अध्यक्ष; चंपाई सोरेन और बाबूलाल मरांडी को मिली सदस्यता

    झारखंड जनजाति सलाहकार परिषद का गठन, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बने अध्यक्ष

    राज्य सरकार ने झारखंड जनजाति सलाहकार परिषद का गठन कर इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। यह अधिसूचना अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की ओर से जारी की गई है। परिषद के अध्यक्ष मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन होंगे, जबकि चमरा लिंडा को उपाध्यक्ष बनाया गया है।

    परिषद में कुल 19 सदस्य शामिल हैं, जिनमें बीजेपी नेता चंपाई सोरेन और बाबूलाल मरांडी को भी स्थान दिया गया है। इसके अलावा, प्रो. स्टीफन मरांडी, आलोक कुमार सोरेन, लुईस मरांडी और संजीव सरदार जैसे प्रमुख नेताओं को भी परिषद में शामिल किया गया है।

    इस बार परिषद में दो मनोनीत सदस्यों, जोसाई मार्डी और नारायण उरांव को भी जगह दी गई है। परिषद की पूरी सूची जारी कर दी गई है।

  • राज्यपाल ने अभिभाषण में गिनाईं हेमंत सरकार की उपलब्धियां, कहा – बजट सत्र की सफलता के लिए सभी दल करें सहयोग

    झारखंड विधानसभा बजट सत्र का शुभारंभ: राज्यपाल संतोष गंगवार का अभिभाषण

    झारखंड विधानसभा का बजट सत्र राज्यपाल संतोष गंगवार के अभिभाषण के साथ प्रारंभ हुआ। अपने संबोधन में उन्होंने सरकार की उपलब्धियों, योजनाओं और भविष्य की प्राथमिकताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने विकास, सुशासन और जनकल्याण को सरकार की प्राथमिकताओं के रूप में रेखांकित किया और सभी वर्गों के कल्याण हेतु सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

    विकास और आधारभूत संरचना

    राज्यपाल ने बुनियादी ढांचे के विकास को सरकार की प्रमुख प्राथमिकता बताया। सड़क, पुल और रेलवे कनेक्टिविटी को सुधारने के लिए विभिन्न परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण एवं मरम्मत हेतु बड़ी धनराशि आवंटित की गई है, जबकि शहरी यातायात को सुगम बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की जा रही हैं। जल आपूर्ति और स्वच्छता को आधुनिक बनाने के प्रयास भी जारी हैं।

    कृषि एवं ग्रामीण विकास

    राज्य सरकार किसानों की आय को दोगुना करने के उद्देश्य से विभिन्न योजनाओं को लागू कर रही है। कृषि ऋण माफी योजना, सॉइल हेल्थ कार्ड, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए ठोस प्रयास किए गए हैं। छोटे एवं मध्यम किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि की गई है और उनकी फसलें बेहतर मूल्य पर बिकें, इसके लिए नई मंडियों की स्थापना की जा रही है। डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए भी योजनाएं शुरू की गई हैं।

    शिक्षा एवं युवाओं के लिए योजनाएं

    शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए सरकार ने स्मार्ट क्लासरूम, छात्रवृत्ति योजनाओं और उच्च शिक्षा संस्थानों में सुधार हेतु पर्याप्त बजट आवंटित किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा के विस्तार के लिए नए कॉलेज खोले जा रहे हैं। इसके अलावा, तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास के माध्यम से युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

    स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार

    सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य जांच, अस्पतालों में बेड की संख्या बढ़ाने और दूरस्थ क्षेत्रों तक चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने के लिए कई योजनाएं चलाई हैं। टेलीमेडिसिन सेवाओं के विस्तार पर भी जोर दिया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए विशेष योजनाओं को लागू किया गया है।

    रोजगार एवं औद्योगिक विकास

    राज्य सरकार स्थानीय उद्योगों और स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के लिए कई नई योजनाएं लेकर आई है। औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए नीतिगत फैसले लिए गए हैं। टेक्सटाइल, खनन और कृषि आधारित उद्योगों को प्राथमिकता दी जा रही है। महिला उद्यमियों के सशक्तिकरण के लिए भी विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं।

    महिला एवं बाल विकास

    महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा एवं सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार कई योजनाएं चला रही है। मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, पोषण अभियान और महिला स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक सहयोग देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। महिला सशक्तिकरण के लिए विशेष कौशल विकास कार्यक्रम भी शुरू किए गए हैं। बाल श्रम और मानव तस्करी जैसी सामाजिक बुराइयों से निपटने के लिए कठोर कानून लागू किए गए हैं।

    पर्यावरण एवं सतत विकास

    पर्यावरण संरक्षण के तहत ग्रीन एनर्जी, वृक्षारोपण और जल संरक्षण योजनाओं को प्राथमिकता दी गई है। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए सरकार सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा दे रही है। प्रदूषण नियंत्रण और कचरा प्रबंधन को भी प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है।

    कानून व्यवस्था एवं सुशासन

    राज्यपाल ने कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पुलिस बल के आधुनिकीकरण और साइबर क्राइम से निपटने के लिए उठाए गए कदमों का जिक्र किया। महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। आपराधिक गतिविधियों पर नजर रखने के लिए आधुनिक निगरानी प्रणाली लागू की गई है। भ्रष्टाचार और लालफीताशाही को समाप्त करने के लिए ई-गवर्नेंस को बढ़ावा दिया जा रहा है।

    सांस्कृतिक एवं पर्यटन विकास

    झारखंड सरकार राज्य की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं चला रही है। ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के विकास के साथ-साथ इको-टूरिज्म और साहसिक पर्यटन को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिल सकें।,,

    राज्यपाल संतोष गंगवार ने अपने अभिभाषण में झारखंड सरकार की विभिन्न योजनाओं और नीतियों का सार प्रस्तुत किया। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, महिला सशक्तिकरण और कानून व्यवस्था के क्षेत्र में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और आशा जताई कि आगामी बजट इन लक्ष्यों को और मजबूती प्रदान करेगा। सरकार का उद्देश्य झारखंड को एक विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर राज्य बनाना है। इस अभिभाषण के साथ बजट सत्र की शुरुआत हो गई है, जिसमें विभिन्न विभागों की योजनाओं एवं बजट प्रस्तावों पर चर्चा होगी।

  • बजट सत्र: दिवंगत हस्तियों को श्रद्धांजलि देने के बाद सदन कल तक के लिए स्थगित

     

    झारखंड विधानसभा में दिवंगत हस्तियों को श्रद्धांजलि, शोक प्रस्ताव पारित

    झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान हाल ही में दिवंगत हुई कई प्रतिष्ठित हस्तियों और आम नागरिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक प्रस्ताव पारित किया गया। इस दौरान सदन ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव को स्वीकार किया और दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की।

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शोक प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि राज्य और देश ने कई महत्वपूर्ण व्यक्तियों को खो दिया है, जिनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार उनके दुख में सहभागी है। विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो ने भी अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए इस क्षति को अपूरणीय बताया और कहा कि हम सभी उनकी यादों को संजोकर आगे बढ़ेंगे।

    इस अवसर पर विभिन्न दलों के नेताओं ने भी दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को याद किया।

    इन हस्तियों को किया गया याद

    विधानसभा में श्रद्धांजलि अर्पित की गई प्रमुख हस्तियों में देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, दिग्गज उद्योगपति रतन नवल टाटा, वामपंथी नेता सीताराम येचुरी, वरिष्ठ राजनेता ओम प्रकाश चौटाला, एस.एम. कृष्णा, कुंवर नटवर सिंह, सधनु भगत, बच्चा सिंह, छत्रुराम महतो, बैरागी उरांव, गुलाब सिंह मुंडा, मनोरमा सिंह, डॉ. कृष्णानंद झा, विश्वनाथ सिंह, गणेश पासवान, प्रीतिश नंदी, जनरल पदमनाभन, शारदा सिन्हा, उस्ताद जाकिर हुसैन और श्याम बेनेगल आदि शामिल हैं।

    पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का 26 दिसंबर 2024 को निधन हो गया। वर्ष 2004 से 2014 तक देश की बागडोर संभालने वाले सिंह ने भारतीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्हें पद्म विभूषण, एशिया मनी अवॉर्ड और यूरो मनी अवॉर्ड जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया था।

    देश के दिग्गज उद्योगपति और टाटा संस के मानद चेयरमैन रतन नवल टाटा का 9 अक्टूबर 2024 को निधन हुआ। वे भारतीय उद्योग जगत की अग्रणी शख्सियतों में से एक थे और उन्हें पद्म भूषण, पद्म विभूषण सहित कई सम्मान प्राप्त हुए थे। उनका निधन औद्योगिक क्षेत्र के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।

    वामपंथी आंदोलन के प्रमुख नेता सीताराम येचुरी का 12 सितंबर 2024 को निधन हो गया। वे 2005 से 2017 तक राज्यसभा सदस्य रहे और भारतीय राजनीति में उनका योगदान अविस्मरणीय रहेगा।

    शोक प्रस्ताव पारित करने के बाद सदन की कार्यवाही 25 फरवरी को सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

  • विधानसभा का बजट सत्र को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज़

    झारखंड विधानसभा का बजट सत्र 24 फरवरी से शुरू होने जा रहा है और इसको लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज़ हो गई हैं। कांग्रेस विधायक दल की बैठक रविवार को सर्किट हाउस में होगी,जिसमे पार्टी इस सत्र को लेकर अपनी रणनीति तय करेगी  । बैठक में कांग्रेस के सभी विधायक, मंत्री, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू मौजूद रहेंगे। विधायक दल की बैठक के बाद दोपहर 2 बजे कांग्रेस के अग्रणी मोर्चा और बोर्ड निगम की बैठक भी होगी। इसमें प्रदेश कांग्रेस प्रभारी अपने मोर्चा और बोर्ड निगम के अध्यक्षों व सदस्यों के साथ चर्चा करेंगे।

    वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने भी बजट सत्र से पहले अपनी रणनीति को धार देने के लिए बैठक बुलाई है। झामुमो विधायक दल की बैठक भी रविवार को ATI सभागार में होगी। इस बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में सत्ताधारी दलों (झामुमो, कांग्रेस, राजद और सीपीआई माले) की संयुक्त बैठक भी आयोजित की जाएगी।

    अब देखना यह होगा कि बजट सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच किस तरह की राजनीतिक हलचल देखने को मिलती है।

  • हेमन्त सरकार का बड़ा कदम: विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में रिसर्च और स्टार्टअप को मिलेगा  47 करोड़

    राज्य सरकार ने उच्च शिक्षा और नवाचार को नया आयाम देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अगले पांच वर्षों में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में होने वाले शोध और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए सरकार 47 करोड़ रुपये खर्च करेगी। यह राशि सरकारी और निजी दोनों संस्थानों को अनुदान के रूप में प्रदान की जाएगी, जिससे अनुसंधान और नवाचार की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति संभव हो सकेगी।

    सरकारी और निजी संस्थानों को मिलेगा लाभ

    सरकार की इस योजना के तहत न केवल सरकारी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को बल्कि निजी विश्वविद्यालयों और संबद्धता प्राप्त कॉलेजों को भी आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। प्रस्तावित झारखंड स्टूडेंट रिसर्च एंड इनोवेशन पॉलिसी-2025 में इसका स्पष्ट प्रावधान किया गया है।

    राज्य सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने इस नीति पर जनता और शैक्षणिक संस्थानों से एक मार्च तक सुझाव मांगे हैं। प्रस्ताव के अनुसार, सरकारी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को शोध एवं नवाचार के लिए शत-प्रतिशत राशि अनुदान के रूप में मिलेगी। वहीं, निजी विश्वविद्यालयों को कुल बजट का 75 प्रतिशत सरकार देगी, जबकि शेष 25 प्रतिशत राशि संबंधित संस्थानों को स्वयं निवेश करनी होगी।

    शोध और नवाचार के लिए विशेष केंद्रों की स्थापना

    इस नीति के तहत राज्यभर में शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए स्टेट रिसर्च पार्क और स्टेट इनोवेशन पार्क की स्थापना का प्रस्ताव भी किया गया है। इसके अतिरिक्त, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के संकाय सदस्यों के प्रशिक्षण हेतु झारखंड फैकल्टी डेवलपमेंट अकादमी की स्थापना की जाएगी। ये सभी केंद्र अगले वित्तीय वर्ष में अस्तित्व में आ जाएंगे।

    पॉलिटेक्निक संस्थानों में इनोवेशन हब

    राज्य सरकार सभी पॉलिटेक्निक संस्थानों में इनोवेशन हब स्थापित करने जा रही है, जिसका उद्देश्य छात्रों को उद्योग जगत से संबंधित आधुनिक कौशल से लैस करना होगा। यह हब झारखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार परिषद के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार किया जाएगा। इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस एंड म्यूजियम (NCSM) द्वारा बनाई जाएगी।

    तकनीकी छात्रों के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं

    इस इनोवेशन हब में विभिन्न स्ट्रीम के छात्रों के लिए आधुनिक संसाधनों की व्यवस्था की जाएगी:

    • कंप्यूटर साइंस के छात्रों के लिए इनोवेशन रिसोर्स सेंटर
    • थ्री डी प्रिंटर और लेजर कटिंग मशीन से सुसज्जित डिजाइन स्टूडियो
    • इलेक्ट्रिकल और ईएंडसी केंद्रित लैब
    • इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) लैब, जो इलेक्ट्रॉनिक्स स्ट्रीम के छात्रों के लिए विशेष रूप से विकसित की जाएगी।

    शोध और स्टार्टअप को मिलेगा नया आयाम

    सरकार की यह पहल झारखंड में उच्च शिक्षा और शोध को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे न केवल छात्रों को नई तकनीकों से अवगत होने का अवसर मिलेगा, बल्कि प्रदेश में स्टार्टअप कल्चर को भी बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति राज्य को इनोवेशन और उद्यमिता के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सहायक होगी।