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  • झारखंड बजट सत्र पर चर्चा के लिए 21 फरवरी को स्पीकर की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक

    झारखंड विधानसभा सचिवालय ने शुरू की बजट सत्र की तैयारियां।

    झारखंड विधानसभा सचिवालय ने आगामी बजट सत्र की तैयारियों को तेज कर दिया है। सत्र के सुचारू संचालन और जनहित से जुड़े अधिकतम मुद्दों पर चर्चा सुनिश्चित करने के लिए 21 फरवरी को विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित विभिन्न दलों के नेता शामिल होंगे। बैठक में सत्र संचालन सहित अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

    वहीं, भाजपा ने अब तक अपने विधायक दल के नेता का चयन नहीं किया है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। इसी दिन राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सुरक्षा और अन्य प्रमुख विषयों को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक भी प्रस्तावित है। विधानसभा सचिवालय ने विभिन्न विभागों से समय पर विधेयकों और प्रश्नों के उत्तर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है, ताकि सदन की कार्यवाही के दौरान किसी तरह की तकनीकी बाधा उत्पन्न न हो।

    संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बताया कि स्पीकर के साथ अबुआ बजट और अन्य महत्वपूर्ण विषयों को लेकर चर्चा हुई है। बजट तैयारियों का कार्य अंतिम चरण में है, जिसके लिए कई दौर की बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इसमें विशेषज्ञों के साथ-साथ आम जनता से भी सुझाव लिए गए हैं। आगामी बजट राज्य के सर्वांगीण विकास पर केंद्रित होगा, जिसमें सभी वर्गों का ध्यान रखा जाएगा। झारखंड का यह बजट सत्र राज्य की प्रगति और समृद्धि के नए आयाम स्थापित करेगा।

  • दिल्ली में 27 साल बाद भाजपा की वापसी, आम आदमी पार्टी सत्ता से बाहर!

    दिल्ली का अगला मुख्यमंत्री कौन?

    दिल्ली विधानसभा चुनाव की सभी 70 सीटों के नतीजे अब सामने आ रहे हैं और राजधानी की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 27 साल बाद सत्ता में वापसी करती दिख रही है, जबकि तीन बार से दिल्ली की सत्ता संभाल रही आम आदमी पार्टी (AAP) को बाहर होना पड़ेगा।

    क्या है बहुमत का जादुई आंकड़ा?

    चुनाव आयोग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, दोपहर 3 बजे तक भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलता दिख रहा है।

    ✔️ भाजपा – 47 सीटों पर आगे (बहुमत के लिए 36 सीटें चाहिए)
    ✔️ आप – 23 सीटों पर बढ़त

    यानी, भाजपा अब दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने के लिए पूरी तरह तैयार है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि दिल्ली का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? भाजपा के अंदर कई नाम चर्चा में हैं, लेकिन पार्टी नेतृत्व अक्सर चौंकाने वाले फैसले लेता रहा है।

    दिल्ली का अगला मुख्यमंत्री कौन? ये नाम हैं रेस में

    ➡️ विजेंद्र गुप्ता – विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष, रोहिणी से प्रत्याशी
    ➡️ रेखा गुप्ता – शालीमार बाग से प्रत्याशी
    ➡️ दुष्यंत गौतम – राष्ट्रीय महामंत्री और भाजपा के अनुसूचित जाति के बड़े नेता, करोल बाग से प्रत्याशी
    ➡️ वीरेंद्र सचदेवा – दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष
    ➡️ प्रवेश वर्मा – पूर्व सांसद और नई दिल्ली से प्रत्याशी
    ➡️ मनोज तिवारी – सांसद और भाजपा का सबसे बड़ा पूर्वांचली चेहरा
    ➡️ आशीष सूद – जनकपुरी से प्रत्याशी

    भाजपा के लिए दिल्ली में सत्ता में वापसी सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि ऐतिहासिक बदलाव है। पार्टी अब डबल इंजन सरकार की बात कर रही है, यानी दिल्ली में भी मोदी सरकार की नीतियां लागू होंगी।

    “भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता ने दिया जनादेश”

    दिल्ली में भाजपा की ऐतिहासिक जीत पर प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा –

    🗣️ “अगर आप जनता के साथ बेईमानी करोगे तो जनता भी वैसा ही परिणाम देगी। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में दिल्ली में डबल इंजन की सरकार बनेगी।”

    उन्होंने आगे कहा –
    “यह चुनाव भाजपा के सुशासन बनाम आप के कुशासन पर केंद्रित था। लोगों ने भ्रष्टाचार के खिलाफ वोट दिया है। आम आदमी पार्टी के सभी बड़े चेहरे – अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और आतिशी – भ्रष्टाचार का चेहरा हैं और आज उन्हें जनता ने जवाब दे दिया है।”

    क्या अब दिल्ली में नया राजनीतिक अध्याय शुरू होगा?

    भाजपा की इस जीत के बाद दिल्ली की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। आम आदमी पार्टी की सत्ता से विदाई के बाद दिल्ली के विकास का नया मॉडल कैसा होगा, भाजपा किस तरह की नीतियां अपनाएगी, और मुख्यमंत्री कौन बनेगा? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में मिलेंगे।

    लेकिन इतना तय है कि दिल्ली की राजनीति में यह चुनाव मील का पत्थर साबित होगा!

  • झारखंड में लागू नहीं होंगे UCC, CAA और NRC- हेमंत सोरेन

    झारखंड दिवस के रूप में मना समारोह.

    झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने केंद्र सरकार के प्रमुख एजेंडों को सीधे नकारते हुए साफ कर दिया है कि झारखंड में समान नागरिक संहिता (UCC), नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लागू नहीं किया जाएगा।  दुमका में आयोजित पार्टी के स्थापना दिवस समारोह में पार्टी ने 50 सूत्री प्रस्ताव पारित करते हुए यह बड़ा ऐलान किया। झामुमो का स्थापना दिवस पूरे जोश और उत्साह के साथ मनाया गया। पार्टी का पूरा कुनबा इस खास मौके पर दुमका में मौजूद रहा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष ने इस ऐतिहासिक अवसर पर पार्टी का झंडा फहराकर 46वें स्थापना दिवस समारोह का विधिवत उद्घाटन किया।

    झामुमो का केंद्र से दो-दो हाथ का मूड!

    झामुमो ने सिर्फ CAA-NRC-UCC पर ही नहीं, बल्कि कोयला रॉयल्टी मद के 1.36 लाख करोड़ रुपये बकाया का मुद्दा भी उठाया। पार्टी ने साफ कर दिया कि इस रकम को लेकर सदन से सड़क तक संघर्ष जारी रहेगा और कानूनी मोर्चे पर भी केंद्र से लड़ाई लड़ी जाएगी।

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि सत्ता में वापसी के बाद झामुमो अपने कोर एजेंडे पर कायम रहेगा। पार्टी ने 1932 के खतियान के आधार पर स्थानीय नीति लागू करने, संताल परगना काश्तकारी अधिनियम (SPT एक्ट) और छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT एक्ट) को और मजबूती देने की अपनी प्रतिबद्धता जताई।

    झारखंड में होनी चाहिए PSU कंपनियों का मुख्यालय।

    झामुमो ने झारखंड में काम कर रही कंपनियों के मुख्यालय को राज्य में लाने की मांग को फिर से दोहराया। पार्टी का कहना है कि कोल इंडिया और दामोदर घाटी निगम (DVC) जैसी कंपनियां झारखंड से संसाधन निकालकर मुनाफा कमा रही हैं, लेकिन उनका मुख्यालय यहां नहीं है। झामुमो का मानना है कि इन कंपनियों के मुख्यालय झारखंड में लाने से राज्य की अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा मिलेगा। झामुमो ने अपने पारंपरिक गढ़ संताल परगना को बचाने और भाजपा की सेंधमारी को रोकने के लिए केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने का संकेत दिया है।

    स्थापना दिवस समारोह झारखंड दिवस के रूप में मनाया गया, जिसमें हजारों की संख्या में पार्टी के मंत्री, सांसद, विधायक, कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए। इस मौके  पर झारखंड सरकार के कई मंत्री, सांसद और विधायक उपस्थित रहे। इनमें मंत्री सुदिव्य सोनू, हफीजुल हसन, दुमका सांसद नलिन सोरेन, राजमहल सांसद विजय हांसदा, विधायक कल्पना सोरेन, बसंत सोरेन ,मथुरा महतो, स्टीफन मरांडी, हेमलाल मुर्मू, आलोक कुमार सोरेन, लुईस मरांडी और उदय शंकर सिंह जैसे कई बड़े नाम शामिल हैं ।

     छह जिलों से उमड़ी भीड़, सुरक्षा रही चाक-चौबंद।
    इस मेगा इवेंट में संथाल परगना के सभी छह जिलों—दुमका, देवघर, जामताड़ा, पाकुड़, साहिबगंज और गोड्डा से भारी संख्या में कार्यकर्ता और जनता शामिल हुई। इतनी बड़ी भीड़ को संभालने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। दुमका जिला पुलिस बल के अलावा अन्य जिलों से भी सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी। गांधी मैदान में करीब 400 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था , जिनमें कांस्टेबल से लेकर डीएसपी स्तर तक के अधिकारी शामिल थे।

    चार्टर प्लेन से पहुंचे मुख्यमंत्री।

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी एवं गांडेय विधायक कल्पना सोरेन के साथ चार्टर प्लेन से दुमका पहुंचे। हवाई अड्डे पर उनका भव्य स्वागत किया गया और प्रशासन की ओर से उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। एयरपोर्ट से मुख्यमंत्री सीधे अपने खिजुरिया स्थित आवास पहुंचे, जहां कुछ समय विश्राम करने के बाद वे गांधी मैदान पहुंचे और समारोह की शुरुआत की।

    भाजपा को बड़ा झटका, दिनेश चौधरी झामुमो में शामिल।

    झामुमो को उस समय बड़ी सफलता मिली, जब भाजपा के ओबीसी मोर्चा के पूर्व जिला पदाधिकारी और अनगड़ा निवासी दिनेश कुमार चौधरी ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली।

    झामुमो के इस ऐतिहासिक स्थापना दिवस ने न सिर्फ कार्यकर्ताओं में जोश भर दिया, बल्कि झारखंड की सियासत में भी एक मजबूत संदेश दिया कि पार्टी की पकड़ आज भी उतनी ही मजबूत है!

  • भाजपा मे इतना सन्नाटा क्यूँ है भाई !

    परवेज़ आलम की खास रिपोर्ट ………..

    झारखंड में भाजपा की हालत इन दिनों कुछ ऐसी हो गई है जैसे कोईपहलवान दो मुकाबलों में लगातार पटखनी खाकर चारों खाने चित हो गया हो। विधानसभा चुनाव में दूसरी बार हार का स्वाद चखने के बाद पार्टी की सक्रियता पर मानो विराम लग गया है। जो नेता चुनावी मौसम में चौबीसों घंटे दौरे कर रहे थे, वे अब अपने-अपने पुराने कामों में लौट गए हैं। आलम यह है कि संगठन का काम ठप पड़ा है और नेता प्रतिपक्ष का चयन भी अब तक नहीं हो पाया है।

    रघुवर दास की ‘घर वापसी’ पर सवाल.
    भाजपा की स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ओडिशा के राज्यपाल पद से इस्तीफा देकर झारखंड लौटे रघुवर दास भी पार्टी में किसी जिम्मेदारी के इंतजार में हैं। चर्चाएं थीं कि उन्हें संगठन में बड़ा पद दिया जाएगा, लेकिन फिलहाल उनकी भूमिका सिर्फ प्राथमिक सदस्यता तक ही सीमित रह गई है। पार्टी के अंदरखाने में यह कयास भी लगाए जा रहे थे कि उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई कदम नहीं बढ़ा है। जिस जोश और उमंग के साथ उन्होंने भाजपा में दोबारा कदम रखा था, वह अब ठंडा पड़ता दिख रहा है।

    नेता प्रतिपक्ष का पेंच फंसा.
    विधानसभा का दूसरा सत्र 24 फरवरी से शुरू होने वाला है और भाजपा अब तक नेता प्रतिपक्ष के नाम की घोषणा नहीं कर पाई है। सूत्रों की मानें तो दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद इस पर निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ही इस दौड़ में सबसे आगे दिख रहे हैं। अगर पार्टी उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखती है, तो रांची से सातवीं बार विधायक चुने गए चंद्रेश्वर प्रसाद सिंह (सीपी सिंह) को यह जिम्मेदारी मिल सकती है।

    आयोगों की नियुक्तियां अटकीं, कोर्ट सख्त.
    भाजपा की निष्क्रियता का असर सरकार के कामकाज पर भी पड़ रहा है। सूचना आयोग समेत कई महत्वपूर्ण आयोगों में नियुक्तियां अब तक लटकी हुई हैं, क्योंकि इसके लिए नेता प्रतिपक्ष की सहमति जरूरी होती है। हाई कोर्ट ने कई बार सरकार को फटकार लगाई है कि अगर नेता प्रतिपक्ष का चयन नहीं हो पा रहा है तो विपक्ष अपने किसी सदस्य को नामित करे, लेकिन अदालत की बात भी अनसुनी ही रह गई है। सूचना आयोग में वर्षों से मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों के पद खाली हैं, लेकिन नियुक्तियों को लेकर कोई ठोस पहल नहीं दिख रही।

    सोशल मीडिया पर सक्रियता, जमीनी स्तर पर सन्नाटा.
    झारखंड भाजपा की मौजूदा स्थिति पर नजर डालें तो लगता है कि पार्टी अभी तक हार के ग़म से उबर नहीं पाई है। चुनावी साल में जो उर्जा और सक्रियता भाजपा में देखने को मिल रही थी, वह अब लगभग गायब हो गई है। पार्टी के नेता सिर्फ सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते नजर आ रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई बड़ा आंदोलन या अभियान नहीं दिख रहा। ऐसा लगता है कि भाजपा अब अगली बार चुनावी बिगुल बजने तक ‘मौन व्रत’ में ही रहने वाली है।

     

  • तो इस साल भी नहीं होगी जनगणना? NPR पर भी संदेह, बजट के आंकड़ों से समझिए

    परवेज़ आलम की खास रिपोर्ट ………..

    क्या भारत में 2025 में भी जनगणना नहीं होगी? क्या सरकार का ध्यान इस दिशा में नहीं है? यह सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि इस साल के बजट में जनगणना के लिए महज 574.80 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह राशि इतनी कम है कि इससे इस विशाल प्रक्रिया की शुरुआत भी मुश्किल लगती है। ऐसे में सवाल उठता है—क्या सरकार जनगणना कराने के मूड में नहीं है?

    2019 में मिली थी मंजूरी, लेकिन अब तक अधर में योजना।

    2019 में केंद्र सरकार ने 2021 की जनगणना और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) को अपडेट करने की मंजूरी दी थी। तब सरकार ने अनुमानित खर्च जनगणना के लिए 8,754.23 करोड़ रुपये और NPR के लिए 3,941.35 करोड़ रुपये तय किया था। लेकिन फिर आया कोरोना, और पूरा कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया। तब से अब तक सरकार ने नए सिरे से इसकी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

    बजट में भारी कटौती, 12,000 करोड़ के अनुमान के मुकाबले 574 करोड़!

    अब अगर 2025-26 के बजट की बात करें, तो जनगणना, सर्वेक्षण और सांख्यिकी विभाग (RGI) को सिर्फ 574.80 करोड़ रुपये मिले हैं। यह 2021-22 के 3,768 करोड़ रुपये की तुलना में बहुत कम है। इससे पहले 2024-25 में भी केवल 572 करोड़ रुपये ही मिले थे। अब सवाल उठता है—अगर जनगणना करानी है, तो इसके लिए जरूरी फंड कहां से आएगा? क्योंकि अधिकारियों के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया में 12,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च आने की संभावना है।

    डिजिटल होगी अगली जनगणना, लेकिन पोर्टल अब तक लॉन्च नहीं।

    जब भी अगली जनगणना होगी, यह पूरी तरह डिजिटल होगी। सरकार नागरिकों को सेल्फ-एन्यूमरेशन (Self-Enumeration) यानी खुद अपने डेटा भरने की सुविधा देगी। इसके लिए NPR को अपडेट करना अनिवार्य होगा। लेकिन अब तक इस प्रक्रिया के लिए जो डिजिटल पोर्टल बनाया जाना था, वह भी लॉन्च नहीं हुआ है।

    आधार और मोबाइल नंबर जरूरी, ये सवाल पूछे जाएंगे।

    जनगणना के दौरान नागरिकों से आधार या मोबाइल नंबर देना अनिवार्य होगा। साथ ही, इनसे जुड़े कई सवाल पूछे जाएंगे, जैसे:

    • परिवार के पास टेलीफोन, इंटरनेट, मोबाइल या स्मार्टफोन है या नहीं?
    • घर में साइकिल, स्कूटर, बाइक या कार है?
    • परिवार मुख्य रूप से कौन सा अनाज खाता है?
    • पीने के पानी का मुख्य स्रोत क्या है?
    • घर में बिजली, शौचालय, स्नानघर, रसोई और गैस कनेक्शन है या नहीं?
    • खाना पकाने के लिए कौन सा ईंधन इस्तेमाल किया जाता है?
    • घर की दीवार, छत और फर्श किस सामग्री से बनी है?
    • परिवार के मुखिया की जाति, लिंग और विवाहित जोड़ों की संख्या क्या है?

    सरकार की चुप्पी, क्या 2025 में भी नहीं होगी जनगणना?

    जनगणना देश के विकास और नीतियों के लिए बेहद जरूरी प्रक्रिया है। इससे देश की आर्थिक, सामाजिक और जनसंख्या से जुड़ी सही तस्वीर सामने आती है। लेकिन मौजूदा बजट और सरकार की ओर से अब तक किसी भी आधिकारिक बयान की गैरमौजूदगी ने इस पर संदेह गहरा कर दिया है। क्या सरकार इसे आगे और टालने की योजना बना रही है? या फिर कोई नया फैसला आने वाला है?

  • क्या सीता सोरेन की JMM में वापसी होगी ? सियासी गलियारों में चर्चा तेज

    परवेज़ आलम की खास रिपोर्ट………………….

    झारखंड की राजनीति में इन दिनों सीता सोरेन की घरवापसी की चर्चाएं जोरों पर हैं। भाजपा नेता और शिबू सोरेन की बड़ी पुत्र वधू  सीता सोरेन एक बार फिर अपने पुराने राजनीतिक घराने में लौटने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन इस राह में सबसे बड़ी चुनौती उनके ही परिवार से आ रही है।

    राजनीतिक भविष्य को लेकर बढ़ी बेचैनी।

    लोकसभा और विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद सीता सोरेन की स्थिति डगमगाने लगी है। उन्हें लगने लगा है कि भाजपा में रहकर संथाल परगना में अपनी सियासी पकड़ मजबूत करना मुश्किल है, क्योंकि यहां जेएमएम का जनाधार काफी मजबूत है। यही वजह है कि अब  वे  वापसी का रास्ता तलाश रही हैं। इस फैसले के पीछे सिर्फ उनकी सियासत ही नहीं, बल्कि अपनी बेटियों का राजनीतिक भविष्य भी एक बड़ी वजह बताया जा रहा है।

    हेमंत और कल्पना की सहमति का इंतजार।

    हालांकि, जेएमएम में वापसी इतनी आसान नहीं दिख रही। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन इस पर सहमत नहीं दिख रहे हैं। दरअसल, भाजपा में शामिल होते वक्त सीता सोरेन ने हेमंत और कल्पना पर गंभीर आरोप लगाए थे। दिवंगत दुर्गा सोरेन को लेकर दिए गए उनके बयानों ने भी परिवार को झकझोर दिया था। यही कारण है कि हेमंत-कल्पना उन्हें वापस लेने के मूड में नहीं हैं।

    शिबू सोरेन चाहते हैं परिवार एक हो।

    जेएमएम के संरक्षक और दिग्गज नेता शिबू सोरेन हमेशा से अपने परिवार को एकजुट देखना चाहते हैं। 11 जनवरी को सीता सोरेन जब शिबू सोरेन को जन्मदिन की बधाई देने उनके घर पहुंचीं, तो इस चर्चा को और बल मिल गया कि वो जेएमएम में वापसी की कोशिशों में जुटी हैं।

    परिवार के भीतर ही सियासी संघर्ष!

    अब सवाल यह उठता है कि क्या हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन पारिवारिक दबाव में झुकेंगे? परिवार के सदस्य और जेएमएम के कुछ नेता हेमंत और कल्पना को मनाने में लगे हैं, ताकि सीता की वापसी की राह आसान हो सके। लेकिन यह इतना आसान भी नहीं होगा, क्योंकि हेमंत और कल्पना को यह डर भी है कि पुराने विवाद कहीं दोबारा ना उठ खड़े हों।

    भाजपा से मोहभंग, जेएमएम में फायदा!

    भाजपा में रहते हुए सीता सोरेन को दो बड़े चुनावों में हार का सामना करना पड़ा—दुमका लोकसभा और जामताड़ा विधानसभा। इस हार ने उनके राजनीतिक भविष्य पर सवाल खड़ा कर दिया। ऐसे में, जब जेएमएम सत्ता में है, तो पार्टी में वापसी से उन्हें और उनके परिवार को राजनीतिक लाभ मिल सकता है।

    अब आगे क्या?

    अब सबकी निगाहें हेमंत और कल्पना सोरेन के फैसले पर टिकी हैं। अगर उन्होंने सीता सोरेन की वापसी को मंजूरी दे दी, तो झारखंड की सियासत में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। लेकिन अगर विरोध जारी रहा, तो सीता को एक नए राजनीतिक रास्ते की तलाश करनी होगी।

  • झारखंड में ईडी के खिलाफ उबाल, झामुमो ने जलाया पुतला, मनाया काला दिवस

    गिरिडीह : 31 जनवरी—झारखंड के इतिहास का वह दिन, जिसे झामुमो कार्यकर्ता “काला दिवस” के रूप में याद कर रहे हैं। ठीक एक साल पहले, 31 जनवरी को झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने केंद्र सरकार के इशारे पर गिरफ्तार किया था। इस घटना के विरोध में झामुमो की जिला इकाई ने आज पूरे जोश और आक्रोश के साथ जुलूस निकाला और ईडी का पुतला दहन किया।

    “लोकतंत्र की हत्या का काला अध्याय”.

    झामुमो कार्यकर्ताओं का आरोप है कि केंद्र सरकार ने लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को ताक पर रखकर संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया। यह सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं थी, बल्कि एक जनप्रतिनिधि और झारखंड की अस्मिता पर सीधा हमला था।

    ईडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर अनगिनत आरोप लगाए, लेकिन हाईकोर्ट में वे सारे आरोप रेत के महल की तरह ढह गए। अदालत में ईडी अपने ही लगाए आरोपों को साबित नहीं कर पाई और माननीय मुख्यमंत्री को नियमित जमानत देकर रिहा किया गया।

    “सुप्रीम कोर्ट की फटकार और झारखंडी जनता का जवाब”.

    झारखंडी जनता ने ईडी और केंद्र सरकार की साजिश को नाकाम कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाल ही में ईडी को फटकार लगाते हुए कहा कि “आप सिर्फ गिरफ्तार ही नहीं कर रहे, बल्कि मानवाधिकारों का उल्लंघन भी कर रहे हैं।”

    झामुमो नेताओं का कहना था कि “केंद्र सरकार का असली मकसद सत्ता की भूख को पूरा करना था। लेकिन झारखंड की जनता ने इसका जवाब दिया। भारी बहुमत से झामुमो सरकार को फिर सत्ता में बिठाकर बता दिया कि साजिशों से जनता को नहीं हराया जा सकता।”

    ईडी का पुतला दहन, सैकड़ों कार्यकर्ता हुए शामिल.

    इस विरोध प्रदर्शन में झामुमो जिला संयोजक समिति के अजित कुमार पप्पू, दिलीप मंडल, कौलेश्वर सोरेन, राकेश कुमार रॉकी, प्रमिला मेहरा , अभय सिंह, संजय वर्मा, सुमन सिंहा,कृष्ण मुरारी शर्मा, अकिल सोनू, प्रधान मुर्मू, दिलीप रजक, तेजलाल मंडल, राकेश रंजन,अनवर अंसारी, नौशाद अहमद चं।द ,लेखों मंडल,देव चरण दास, जाकिर हुसैन ,अशोक राम, निरंजन राय, मो नूर, नूरुल होदा, सुशांत सिंहा, योगेंद्र सिंह,मो इमरान, बृजमोहन तुरी, शेखर यादव, शमीम गद्दी, प्रमोद कांधवे, मेहताब मिर्जा, अभिषेक शर्मा, सचिन शर्मा, ताज हसन, विवेक राम, मो सलीम, अनुभव सिंह, मो नसीम, अनूप सिंह रूपेश रजक,सहित सैकड़ों कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे। उन्होंने ईडी और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और पुतला दहन कर अपना रोष प्रकट किया।

    “झारखंडी जनता ने बता दिया—हम झुकने वाले नहीं!”.

    कार्यक्रम में शामिल झामुमो नेताओं ने कहा कि यह सिर्फ ईडी का विरोध नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा—“झारखंड को दबाने की कोशिश करने वाले खुद मिट जाएंगे, लेकिन हमारी आवाज कभी नहीं दबेगी!” “हम झारखंडी हैं, हम लड़ेंगे और जीतेंगे!”

  • अबुआ आवास योजना के लाभार्थियों के लिए नया मोबाइल ऐप लॉन्च, जानें इसकी खासियतें

    राज्य सरकार ने अबुआ आवास योजना के लाभार्थियों की सुविधा के लिए एक नया मोबाइल ऐप लॉन्च किया है। यह ऐप ग्रामीण विकास विभाग द्वारा विकसित किया गया है और गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है। इस ऐप की मदद से लाभार्थी अपने घर के निर्माण की प्रगति को जियो टैग कर सकेंगे। साथ ही, योजना के तहत मिलने वाली किस्तों का भुगतान भी ऐप के माध्यम से समय पर किया जाएगा। पंचायत सेवक जियो टैग की जानकारी को स्थल पर जाकर सत्यापित करेंगे। यह ऐप अबुआ आवास योजना के आधिकारिक पोर्टल से भी डाउनलोड किया जा सकता है। योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को 2 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है, जिससे वे अपना खुद का घर बना सकें।

  • झारखंड में सादा पान मसाला पर लगेगा प्रतिबंध, स्वास्थ्य मंत्री ने की सख्त घोषणा

    रांची: झारखंड में अब सादा पान मसाला की बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगेगा। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के राज्यस्तरीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम में यह बड़ा ऐलान किया। उन्होंने साफ कहा कि गुटखा के नाम पर बिक रहे सादा पान मसाला पर पूरी तरह से रोक लगाई जाएगी और नशीली दवाओं की बढ़ती बिक्री पर भी सख्त कार्रवाई होगी।

    ‘सादा पान मसाला के नाम पर हो रही है गुटखा की बिक्री’

    मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि झारखंड में गुटखा और तंबाकू उत्पादों के सेवन से युवा शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर हो रहे हैं। उन्होंने कहा—
    “हमारी सरकार किसी भी सूरत में यह बर्दाश्त नहीं करेगी कि राज्य का युवा नशे की गिरफ्त में जाए।”

    उन्होंने अधिकारियों को दवा दुकानों की तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। मंत्री ने कहा कि कई मेडिकल स्टोर्स में नशीले सिरप और स्टेरॉयड खुलेआम बेचे जा रहे हैं, जिससे युवा पीढ़ी गलत रास्ते पर जा रही है।

    सिविल सर्जनों और ड्रग इंस्पेक्टरों को सख्त चेतावनी!

    स्वास्थ्य मंत्री ने सभी सिविल सर्जनों और ड्रग इंस्पेक्टरों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा—
    “अगर आपके इलाके में प्रतिबंधित नशीले पदार्थों की बिक्री पाई गई, तो सिर्फ दुकानदार नहीं, बल्कि आप भी कार्रवाई के दायरे में आएंगे!”

    उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि यदि किसी मेडिकल स्टोर में प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री पाई जाती है, तो तत्काल दुकान को सील कर कानूनी कार्रवाई की जाए।

    ‘स्वस्थ झारखंड, नशामुक्त झारखंड’ का लक्ष्य.

    स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि झारखंड सरकार पूरे राज्य में इस अभियान को लागू करेगी और किसी भी हालत में गुटखा, नशीले पदार्थों और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उत्पादों की बिक्री बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं को नशे से बचाने के लिए और भी सख्त कदम उठाने जा रही है ताकि स्वस्थ झारखंड, नशामुक्त झारखंड का सपना साकार हो सके।

    ‘मैं खुद डॉक्टर हूं, सही-गलत अच्छी तरह जानता हूं’

    बैठक के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने साफ कहा—
    “मैं खुद डॉक्टर हूं, सही-गलत अच्छी तरह जानता हूं। मेरी जिम्मेदारी है कि झारखंड में ऐसे अवैध कार्यों को जड़ से खत्म करूं।”

    उन्होंने सभी जिलों के सिविल सर्जनों को निर्देश दिया कि वे अपने जिलों में मेडिकल स्टोर्स की जांच कर नशीली दवाओं की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाएं।

    अब देखना यह होगा कि क्या यह फैसला केवल घोषणा बनकर रह जाएगा, या झारखंड में सच में नशे के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाएंगे?

  • झारखंड की बेटियों को मिला अपना आशियाना, सीएम हेमंत सोरेन ने निभाया वादा

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट ………………

    झारखंड की धरती से निकलीं, अपने हुनर से देश और दुनिया में नाम रौशन करने वाली हॉकी स्टार सलीमा टेटे और निक्की प्रधान को आखिरकार वह सौगात मिल गई, जिसका उन्हें वर्षों से इंतजार था। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को इन दोनों ओलंपियन खिलाड़ियों को रांची के हरमू आवासीय कॉलोनी में 3750 वर्ग फीट के भूखंड आवंटन के कागजात सौंपे। इसके साथ ही सरकार ने यह भी घोषणा की कि दोनों खिलाड़ियों को अपने घर के निर्माण के लिए 35-35 लाख रुपये भी दिए जाएंगे। इस मौके पर पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य मंत्री सुदिव्य कुमार भी उपस्थित थे ।

    झारखंड की बेटियों का सपना हुआ साकार।

    राज्य सरकार के इस फैसले के बाद सलीमा और निक्की का रांची में अपने घर का सपना अब हकीकत बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री ने हरमू आवासीय कॉलोनी के प्लॉट नंबर 10 (ए) और 10 (बी) में इन दोनों खिलाड़ियों को जमीन देने की घोषणा की। यह वही वादा था जो हेमंत सोरेन ने 2021 में किया था, जब निक्की प्रधान टोक्यो ओलंपिक में हिस्सा लेकर लौटी थीं।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा, “आज का दिन सिर्फ सलीमा और निक्की के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के लिए गर्व का दिन है। ये बेटियां राज्य की असली धरोहर हैं। इन्होंने साबित कर दिया कि अगर हौसला हो, तो झारखंड जैसी पिछड़ी समझी जाने वाली भूमि से भी वर्ल्ड क्लास खिलाड़ी निकल सकते हैं।”

    संघर्ष से सफलता तक की कहानी॰

    इस मौके पर एक ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति भी दिखाई गई, जिसमें सलीमा और निक्की की संघर्ष से सफलता तक की यात्रा को दिखाया गया। मुख्यमंत्री ने कहा, “जब मैं पहली बार इनके गांव गया था, तब इनके हालात देखे थे। उस दिन तय कर लिया था कि इन बेटियों को घर दूंगा। सरकार सिर्फ वादे नहीं करती, बल्कि उन्हें पूरा भी करती है।”

    सलीमा-निक्की ने जताया आभार.

    अपना सपना साकार होता देख सलीमा टेटे और निक्की प्रधान की खुशी का ठिकाना नहीं था। सलीमा ने कहा, “जब आप दिल से मेहनत करते हैं, तो मंजिल जरूर मिलती है।” वहीं, निक्की प्रधान ने मुख्यमंत्री का धन्यवाद करते हुए कहा, “आज हमारा सपना पूरा हो गया। 2021 में जब मुख्यमंत्री ने यह वादा किया था, तब हमें भरोसा था कि वह इसे निभाएंगे और आज वही दिन आ गया।”

    खेल और खिलाड़ियों के लिए सरकार का बड़ा कदम।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने झारखंड सरकार की नई खेल नीति पर भी जोर दिया और कहा कि राज्य के खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य सिर्फ वर्ल्ड-क्लास खिलाड़ी बनाना ही नहीं, बल्कि उन्हें वो सारी सुविधाएं देना है, जिसकी वे हकदार हैं।”

    इस कार्यक्रम में पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य मंत्री सुदिव्य कुमार, विधायक राजेश कच्छप, विधायक भूषण बाड़ा, मुख्य सचिव अलका तिवारी, नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे।

    झारखंड की बेटियों को उनका हक मिल गया। सलीमा और निक्की अब अपने घर का सपना पूरा कर पाएंगी। लेकिन यह सिर्फ दो खिलाड़ियों की कहानी नहीं है—यह संदेश है उन हजारों युवा खिलाड़ियों के लिए जो झारखंड की मिट्टी से निकलकर दुनिया में छा जाना चाहते हैं। झारखंड सरकार का यह कदम राज्य में खेल और खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने की दिशा में एक नई मिसाल बन सकता है।