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  • मंईयां सम्मान योजना: कब आएगी जनवरी माह की राशि?

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट ………..

    झारखंड में मुख्यमंत्री के लाभार्थी इस वक्त असमंजस और इंतजार की स्थिति में हैं। जनवरी माह की किस्त का पैसा अब तक लाभार्थी के अकाउंट  में ट्रांसफर नहीं हुआ है, जिससे 58 लाख से अधिक लाभार्थियों के बीच सवाल उठ रहे हैं कि आखिर देरी की वजह क्या है।

    अगस्त से शुरू हुई है योजना।
    मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना की शुरुआत अगस्त 2024 में हुई थी। योजना के तहत अगस्त से नवंबर तक लाभार्थियों को हर माह ₹1,000 दिए गए। दिसंबर से इस राशि को बढ़ाकर ₹2,500 प्रति माह कर दिया गया।
    6 जनवरी 2025 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नामकुम में आयोजित एक बड़े कार्यक्रम में ₹2,500 की पहली बढ़ी हुई राशि 56,61,791 लाभार्थियों के खातों में ट्रांसफर की थी। मात्र दिसंबर माह में ₹1,415 करोड़ 44 लाख 77 हजार 500 रुपये का वितरण हुआ। इसके बाद से जनवरी की किस्त का इंतजार बढ़ता जा रहा है।

    कहां फंसा है पेंच?
    योजना के तहत हर माह की 15 तारीख तक राशि लाभार्थियों के खातों में क्रेडिट हो जानी चाहिए, लेकिन इस बार प्रक्रिया में देरी हुई है।

    1. प्रखंड स्तर पर सत्यापन प्रक्रिया
      हर महीने नए लाभार्थियों को जोड़ा जा रहा है और 50 वर्ष की आयु पूरी कर चुके लाभार्थियों को सूची से हटाया जा रहा है। जनवरी में 10 लाख से अधिक नए आवेदन आए, जिनमें से डेढ़ लाख का सत्यापन पूरा हो चुका है।
    2. पोर्टल की तकनीकी समस्याएं
      योजना का पोर्टल बार-बार तकनीकी खामियों का सामना कर रहा है। आवेदन अद्यतन और सत्यापन प्रक्रिया बाधित हो रही है। इसका सीधा असर राशि ट्रांसफर पर पड़ रहा है।

    क्या कह रहा है विभाग?
    जिला स्तर पर नोडल बैंकों और प्रखंड स्तर के अधिकारियों के सहयोग से सत्यापन प्रक्रिया जारी है। विभाग का कहना है कि जैसे ही प्रक्रिया पूरी होगी, लाभार्थियों के खातों में राशि ट्रांसफर कर दी जाएगी।

    लाभार्थियों को संदेश।
    जनवरी माह की राशि में हो रही देरी के बावजूद सरकार ने मार्च तक की राशि पहले ही आवंटित कर दी है। विभागीय अधिकारी तकनीकी खामियों को दूर करने और सत्यापन प्रक्रिया को तेज करने के लिए काम कर रहे हैं।

  • झारखंड : 5 लाख का कैशलेस इलाज, 10 लाख गंभीर बीमारियों के लिए, जानिए किसको मिलेगा

    झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में मंगलवार को  रांची में हुई कैबिनेट बैठक ने राज्य कर्मियों और पेंशनरों के लिए बहुप्रतीक्षित स्वास्थ्य बीमा योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत, राज्य कर्मियों और उनके आश्रितों को सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये और गंभीर बीमारियों के लिए 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा।

    1.75 लाख कर्मियों और 2.25 लाख पेंशनरों को होगा फायदा।
    कैबिनेट सचिव वंदना डाडेल ने बैठक के बाद बताया कि इस योजना के तहत राज्य के 1.75 लाख कर्मियों और 2.25 लाख सेवानिवृत्त कर्मियों को लाभ मिलेगा। योजना में शामिल होने वाले कर्मियों के वेतन से हर महीने 500 रुपये काटे जाएंगे, जबकि पेंशनभोगियों को सालाना 6,000 रुपये जमा करने होंगे। योजना का कवरेज इतना ही नहीं रुकता। इसमें अखिल भारतीय सेवाओं के सेवारत और सेवानिवृत्त अधिकारी, विधानसभा के पूर्व सदस्य, और राज्य के विभिन्न बोर्ड-निगमों के कर्मी भी अपनी इच्छा से जुड़ सकते हैं।

    टाटा एआईजी से हुआ करार।
    इस योजना के सफल कार्यान्वयन के लिए राज्य सरकार ने टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी के साथ करार किया है। 150 करोड़ रुपये आकस्मिकता निधि से और 50 करोड़ रुपये बफर स्टॉक के रूप में आरोग्य सोसायटी के ट्रस्ट में रखे जाएंगे।

    हालांकि, यह योजना पिछले साल 31 जुलाई 2023 को घोषित की गई थी, लेकिन तकनीकी दिक्कतों की वजह से इसे लागू नहीं किया जा सका। अब, संशोधन के बाद, यह योजना कर्मियों और पेंशनरों के लिए वरदान साबित होगी।

    दुमका से उड़ान सेवा का रास्ता साफ।
    कैबिनेट ने दुमका हवाई अड्डे से उड़ान सेवा शुरू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इंडियन एयरपोर्ट अथॉरिटी के साथ संचार, नेविगेशन और एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट सेवाओं के लिए एमओयू के ड्राफ्ट को मंजूरी दी गई है। इसके बाद क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना ‘उड़ान’ के तहत दुमका हवाई अड्डे से नियमित उड़ानें शुरू होंगी।

    हॉस्पिटलों में नए पद और शिक्षा क्षेत्र में सुधार।
    राज्य के मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पतालों में सीनियर मैनेजर, फाइनेंस मैनेजर, और आईटी एग्जीक्यूटिव जैसे नए पद सृजित किए गए हैं। इसके अलावा, मिडिल स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा के लिए ज्ञानोदय योजना के तहत 94.50 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।

    सरकार के कदमों से उम्मीदें बढ़ीं।
    झारखंड सरकार के ये निर्णय न केवल स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों को मजबूत करेंगे बल्कि राज्य के विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे।

  • गांडेय में विधायक कल्पना सोरेन का हुआ भव्य स्वागत, कल्पना ने जनता का जताया आभार

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …………

    झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की नेत्री और गांडेय की विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन ने झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 में अपनी ऐतिहासिक जीत के बाद मंगलवर को पहली बार अपने विधानसभा क्षेत्र का दौरा किया। बरमसिया पंचायत में आयोजित “धन्यवाद सह आभार कार्यक्रम” में शामिल होकर उन्होंने क्षेत्रवासियों को उनके समर्थन के लिए दिल से धन्यवाद दिया।

    कार्यक्रम में राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन, विधायकप्रतिनिधि बैरिस्टर फरदीन अहमद और झामुमो के अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे। इससे पहले, विधायक ने जिला उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा और एसपी डॉ. विमल कुमार सहित ज़िले और प्रखंड के सभी अधिकारियों के साथ एक संक्षिप्त बैठक की। बैठक में उन्होंने विकास कार्यों को प्राथमिकता देते हुए निर्देश दिया कि योजनाओं की रूपरेखा तैयार कर उन्हें तुरंत लागू किया जाए। उन्होंने आश्वासन दिया कि इसके लिए झारखंड सरकार आवश्यक बजट उपलब्ध कराएगी।

    भव्य स्वागत और जन समर्थन का उत्सव।
    गांडेय पहुंचने पर विधायक सोरेन का जोरदार स्वागत हुआ। महिलाओं ने उन्हें फूल मालाओं से लाद दिया और बच्चों ने उनके साथ सेल्फी लेकर खुशी जताई। पूरे गांव में उत्साह का माहौल था। इस दौरान कल्पना सोरेन ने कहा, “यह आपकी सरकार है, अबुआ सरकार। झारखंड के हर व्यक्ति के मान-सम्मान और विकास को प्राथमिकता देना हमारी जिम्मेदारी है।”

    जन योजनाओं और महिलाओं के लिए विशेष योजनाएं।
    विधायक सोरेन ने अपनी सरकार की महत्वाकांक्षी “माइयाँ सम्मान योजना” की चर्चा करते हुए बताया कि झारखंड सरकार महिलाओं के खातों में हर महीने ₹2500 दे रही है ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने वादा किया कि आने वाले पांच वर्षों में गांडेय की तकदीर और तस्वीर बदलने का जो सपना उन्होंने देखा है, उसे साकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।

    भ्रष्टाचार पर कड़ा रुख और जनता से अपील।
    कल्पना सोरेन ने विकास कार्यों में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को दोहराया। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि गरीब और जरूरतमंद लोगों को दफ्तरों में अनावश्यक परेशान न किया जाए। उन्होंने कहा, “आपके दुख-दर्द को समझकर उन्हें राहत पहुंचाना ही प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।”

    जनता और प्रतिनिधियों का सम्मान।
    बैरिस्टर फरदीन अहमद की भूमिका की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, “एक विधायक प्रतिनिधि के तौर पर फरदीन अहमद का कार्य सराहनीय है। वे लगातार क्षेत्र की समस्याओं को हम तक पहुंचाते हैं, और हम उनका समाधान करने का हर संभव प्रयास करते हैं।”

    कार्यक्रम के बाद विधायक सोरेन रांची के लिए रवाना हो गईं, लेकिन उन्होंने गांडेय की जनता को यह भरोसा दिलाया कि वह जल्द ही अन्य क्षेत्रों का भी दौरा करेंगी और क्षेत्र के विकास के लिए अपने प्रयासों को निरंतर आगे बढ़ाएंगी।

  • राजनीतिक हिस्सेदारी के लिए अनुसूचित जाति को एकजुट होना होगा -डॉ. शैलेन्द्र

    गिरिडीह : राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एकता मंच का मिलन समारोह सह बैठक का आयोजन रविवार को गिरिडीह शहर के शहनाई बैंक्वेट हॉल में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता डॉ. शैलेंद्र कुमार चौधरी, विशेषज्ञ रेडियोलॉजिस्ट ने की, जबकि संचालन विनोद चौधरी द्वारा किया गया।

    बैठक में संगठन का विस्तार करते हुए सर्वसम्मति से डॉ. शैलेंद्र कुमार चौधरी को जिलाध्यक्ष से प्रोन्नत कर प्रदेश अध्यक्ष चुना गया। उनके कार्यों की दक्षता और समर्पण भावना को देखते हुए यह निर्णय लिया गया। इसके अलावा जिला कमिटी का भी विस्तार किया गया।

     कमल दास को जिला अध्यक्ष बनाया गया जबकि  सत्यनारायण दास, राजेंद्र चौधरी,  राजेश हाड़ी व राजकुमार भुइयां को  जिला उपाध्यक्ष, डॉ. रविकांत, विनोद चौधरी, सुखदेव दास, सुनील पासवान,  सुरेंद्र तूरी, बबलू हाड़ी व  संतोष पासवान को  सचिव, वहीं  सुनीता कुमारी को कोषाध्यक्ष व  रामचंद्र हजारा, रिंकू दास व ज्ञान ज्योति मीडिया प्रभारी बनये गए हैं ।

    मार्गदर्शक मंडली मे धनेश्वर रजक, भोला चौधरी, छात्रधारी महथा, व  गिरधारी महथा को शामिल किया गया है ।

     

    डॉ. शैलेंद्र चौधरी का संबोधन।
    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नव-निर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष डॉ. शैलेंद्र चौधरी ने कहा, “अनुसूचित जाति समाज विभिन्न जातियों में बंटा हुआ है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एकता मंच का उद्देश्य इस बिखराव को समाप्त कर सबको एकजुट करना है। बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने हमें शिक्षित बनने, संगठित रहने और संघर्ष करने का जो संदेश दिया, उसी मार्ग पर चलकर समाज को एक सूत्र में पिरोना है।”

    उन्होंने आगे कहा, “हमारे भोले-भाले समाज का लंबे समय से केवल उपयोग होता आया है। राजनीतिक दलों ने हमें सक्षम नेतृत्व नहीं दिया। लेकिन अब समय आ गया है कि हम संगठित होकर समाज को मजबूत करें।” डॉ. चौधरी ने यह भी कहा कि मंच शिक्षा और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने और सरकारी योजनाओं का लाभ समाज तक पहुंचाने में मदद करेगा।

    एकजुटता का संकल्प।
    बैठक के दौरान उपस्थित सभी सदस्यों ने मंच को मजबूत बनाने और समाज के सशक्तिकरण के लिए एकजुट होकर काम करने का संकल्प लिया। सभी नव-निर्वाचित पदाधिकारियों का फूल-मालाओं से स्वागत किया गया।

    इस अवसर पर अन्य गणमान्य लोग और मंच के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

  • कल्पना सोरेन को महिला एवं बाल विकास समिति की अध्यक्ष नियुक्त किया गया है

    झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो ने विधानसभा की 25 समितियों का पुनर्गठन किया है। इसके लिए सभापति और सदस्यों की सूची अधिसूचना के माध्यम से जारी कर दी गई है। जारी अधिसूचना के अनुसार, गांडेय से झामुमो की विधायक कल्पना सोरेन को महिला एवं बाल विकास समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वहीं, बरही से भाजपा के विधायक मनोज कुमार यादव को लोकलेखा समिति की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो स्वयं विशेषाधिकार समिति, नियम समिति और याचिका समिति के अध्यक्ष होंगे।

    अन्य प्रमुख समितियों के नए अध्यक्ष:

    • सत्येंद्र नाथ तिवारी (भाजपा, गढ़वा) – सामान्य प्रयोजन समिति
    • हेमलाल मुर्मू (झामुमो, लिट्टीपाड़ा) – प्राक्कलन समिति
    • निरल पूर्ति (झामुमो, मझगांव) – सरकारी उपक्रम समिति
    • अरूप चटर्जी (माले, निरसा) – सरकारी आश्वासन समिति
    • बसंत सोरेन (झामुमो, दुमका) – प्रश्न एवं ध्यानाकर्षण समिति
    • प्रदीप यादव (पोड़ैयाहाट) – जिला परिषद एवं पंचायती राज समिति
    • रामेश्वर उरांव (कांग्रेस, लोहरदगा) – आंतरिक संसाधन एवं केंद्रीय सहायता समिति
    • उमाकांत रजक (झामुमो, चंदनक्यारी) – निवेदन समिति
    • स्टीफन मरांडी (महेशपुर) – अनुसूचित जाति, जनजाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण समिति
    • रामचंद्र सिंह (मनिका, कांग्रेस) – सदाचार समिति
    • नीरा यादव (कोडरमा, भाजपा) – पुस्तकालय विकास समिति
    • उदयशंकर सिंह (सारठ, झामुमो) – पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण समिति
    • चंद्रेश्वर प्रसाद सिंह (रांची, भाजपा) – विधायक निधि अनुश्रवण समिति
    • भूषण तिर्की (गुमला, झामुमो) – शून्यकाल समिति
    • राज सिन्हा (धनबाद, भाजपा) – गैर सरकारी संकल्प समिति
    • सुरेश पासवान (देवघर, राजद) – अनागत प्रश्न क्रियान्वयन समिति
    • सविता महतो (ईचागढ़, झामुमो) – युवा कल्याण, संस्कृति एवं पर्यटन विकास समिति
    • दशरथ गगराई (खरसावां, झामुमो) – आवास समिति
    • सरयू राय (जमशेदपुर पश्चिम, निर्दलीय) – प्रत्यायुक्त समिति
    • विकास मुंडा (तमाड़, झामुमो) – खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले समिति
  • जमीन की रसीद अब मोबाइल से, बार कोड तकनीक करेगा काम

    झारखंड सरकार ने  एक बड़ी पहल की है, जिससे जमीन मालिकों को राहत मिलेगी। अब जमीन खरीदने के बाद उसकी रसीद कटवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी। राजस्व मंत्री दीपक बिरुआ ने इस नई व्यवस्था की घोषणा करते हुए बताया कि अब बार कोड तकनीक के माध्यम से घर बैठे रसीद कटाने की सुविधा उपलब्ध होगी।

    नए सिस्टम से मिलेगी बड़ी राहत।

    राजस्व मंत्री ने वर्चुअल समीक्षा बैठक में विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि जनता को अपनी जमीन की रसीद कटवाने के लिए सरकारी कार्यालयों में भटकने की मजबूरी से छुटकारा दिलाया जाए। उन्होंने कहा, “यह बेहद शर्मनाक है कि लोगों को उनकी ही जमीन के कागजात के लिए परेशान होना पड़ता है। नई व्यवस्था के जरिए अब मोबाइल पर ही रसीद आसानी से कट सकेगी।”

    म्यूटेशन को राइट टू सर्विस में लाने की तैयारी।

    मंत्री ने म्यूटेशन को राइट टू सर्विस एक्ट के दायरे में लाने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और सरलता लाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। इससे न केवल लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि सरकार के राजस्व में भी इजाफा होगा।

    2,000 करोड़ बकाया राशि पर भी निर्देश।

    बैठक में चाईबासा आयुक्त ने जिले की कंपनियों पर दो हज़ार करोड़ रुपये बकाया होने का मुद्दा उठाया। इस पर मंत्री ने तुरंत कार्रवाई का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि राज्य के राजस्व को बढ़ाने के लिए ऐसे मामलों का निपटारा प्राथमिकता से किया जाए।

    अतिक्रमण पर सख्ती और राजस्व प्रक्रिया में सुधार।

    मंत्री दीपक बिरुआ ने सरकारी जमीनों को अतिक्रमण से मुक्त कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अतिक्रमणकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और लंबित म्यूटेशन मामलों का जल्द निपटारा हो।

    सरल होगी राजस्व वसूली प्रक्रिया।

    राजस्व संग्रहण की प्रक्रिया को और सरल बनाने पर जोर देते हुए मंत्री ने खासमहल जमीन के रिन्युअल और सैरात की वसूली के लिए भी नई व्यवस्था लागू करने के सुझाव दिए। उन्होंने नीलामी संबंधित विवादों का जल्द समाधान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। इस बैठक में विभागीय सचिव चंद्रेशेखर, विशेष सचिव शशिप्रकाश झा समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

    जनता को क्या फायदा होगा?

    1. जमीन की रसीद अब मोबाइल पर ही उपलब्ध होगी।
    2. सरकारी दफ्तरों में चक्कर लगाने की जरूरत नहीं।
    3. म्यूटेशन और अन्य कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी।
    4. राजस्व वसूली की प्रक्रिया होगी आसान।
    5. अतिक्रमण के मामलों में सख्ती से निपटारा।

    सरकार का यह कदम जनता को बड़ी राहत देने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रह है । \

    • परवेज़ आलम की खास रिपोर्ट …….

     

  • चार महीने में निकाय चुनाव होने चाहिए-झारखंड हाईकोर्ट

    झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नगर निकाय चुनाव चार महीने में कराने का सख्त आदेश दिया है। जस्टिस आनंद सेन की बेंच ने यह निर्देश अवमानना याचिका पर सुनवाई के बाद दिया। याचिका रोशनी खलखो और अन्य की ओर से दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान राज्य की मुख्य सचिव अलका तिवारी और नगर विकास सचिव सुनील कुमार कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे।

    कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया है कि वह अद्यतन मतदाता सूची राज्य निर्वाचन आयोग को प्रदान करे ताकि चुनाव की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके। साथ ही, मुख्य सचिव को अगली सुनवाई में उपस्थित होने से छूट दे दी गई है।

    कई जिलों में ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया लगभग पूरी.

    सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने 4 जनवरी 2024 को दिए गए आदेश का पालन न करने पर नाराजगी जाहिर की। अदालत ने पूछा कि अब तक चुनाव की तारीखें क्यों घोषित नहीं हुईं। इसके जवाब में राज्य सरकार ने बताया कि नगर निकायों में पिछड़े वर्गों को आरक्षण देने के लिए ट्रिपल टेस्ट प्रक्रिया चल रही है, जो कई जिलों में पूरी हो चुकी है और कुछ में अंतिम चरण में है। इसके अलावा, भारत निर्वाचन आयोग से अब तक अद्यतन मतदाता सूची प्राप्त न होने को भी देरी का कारण बताया गया।

    क्या ट्रिपल टेस्ट के बिना भी हो सकते हैं चुनाव?

    याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेश के अनुसार, ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी होने तक चुनाव टालना गैरकानूनी है। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार चुनाव कराने में रुचि नहीं रखती। इस आधार पर उन्होंने सरकार के खिलाफ अवमानना का मामला चलाने की मांग की।

    चुनाव में देरी पर कोर्ट नाराज.

    कोर्ट ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि नगर निकाय चुनाव न कराना अवमानना का स्पष्ट मामला है। हाईकोर्ट ने 13 जनवरी को हुई पिछली सुनवाई में भी कहा था कि ओबीसी आरक्षण के नाम पर चुनाव टालना स्वीकार्य नहीं है।

    गौरतलब है कि झारखंड में नगर निकायों का कार्यकाल अप्रैल 2023 में समाप्त हो गया था। नए कार्यकाल के लिए चुनाव 27 अप्रैल 2023 तक हो जाने चाहिए थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब हाईकोर्ट के सख्त आदेश के बाद राज्य सरकार पर चुनाव प्रक्रिया जल्द पूरी करने का दबाव बढ़ गया है।

     

  • महेंद्र सिंह: झारखंड के जननेता को शहादत दिवस पर नमन

    परवेज़ आलम की खास रिपोर्ट ………..

    16 जनवरी झारखंड के लिए एक खास तारीख है। यह दिन उस नेता की याद दिलाता है, जिसने गरीबों, मजदूरों और शोषितों की आवाज़ को बुलंद किया। स्वर्गीय महेंद्र सिंह की शहादत दिवस पर आज झारखंड उन्हें नमन कर रहा है।

    सादगी और संघर्ष से भरा जीवन।

    महेंद्र सिंह का जन्म 1944 में गिरिडीह के छोटे से गांव खंभरा में हुआ। सीमित शिक्षा के बावजूद, उनका ज्ञान और जागरूकता बेमिसाल थी। किताबों और अखबारों से उनका गहरा लगाव था। वह राजनीति को कुर्सी का खेल नहीं, बल्कि जनसेवा का माध्यम मानते थे।

    महेंद्र सिंह ने अपने करियर की शुरुआत लाल सेना के गुरिल्ला नेता के रूप में की। शुरुआत में चुनावी राजनीति के खिलाफ रहने वाले महेंद्र सिंह ने वक्त के साथ अपने विचार बदले और बिहार विधानसभा चुनाव में कूद पड़े। गिरिडीह के बगोदर विधानसभा क्षेत्र से उन्होंने लगातार जीत दर्ज की और गरीबों के सच्चे रहनुमा बने।वे सीपीआई(एमएल) के नेता थे, लेकिन उनकी पहचान केवल पार्टी तक सीमित नहीं थी।

    ईमानदारी और साहस की मिसाल।

    महेंद्र सिंह के लिए राजनीति का मतलब था अन्याय के खिलाफ लड़ाई। उन्होंने खदान मालिकों, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाहियों के खिलाफ आवाज़ उठाई। सत्ता पर तीखा वार करना और जनता के हक की बात करना उनकी पहचान थी। यही वजह है कि वह नक्सल प्रभावित इलाकों में भी उतने ही लोकप्रिय थे जितने ग्रामीण क्षेत्रों में।

    झूठे मामलों में फंसाए गए, पर हिम्मत नहीं हारी।

    1980 के दशक में सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने प्रभावशाली लोगों को चुनौती दी। इसके चलते उन्हें झूठे हत्या के मामले में फंसा दिया गया। निचली अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई, लेकिन हाईकोर्ट ने उन्हें बाइज्जत बरी कर दिया। जेल में भी उन्होंने अन्य कैदियों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।

    शहादत: विचारधारा को कुचलने की कोशिश।

    2005 में 16 जनवरी को महेंद्र सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना उस वक्त हुई, जब वे चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे। उनकी हत्या केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं थी, बल्कि एक विचारधारा को खत्म करने की कोशिश थी। लेकिन महेंद्र सिंह के विचार आज भी हर उस व्यक्ति के दिल में जिंदा हैं, जो न्याय और समानता की बात करता है।

    झारखंड को एक नई राह दिखाने वाले नेता। 

    महेंद्र सिंह की सादगी, ईमानदारी और साहस आज भी झारखंड के लोगों को प्रेरणा देते हैं। उनकी याद में हर साल बगोदर और उनके गांव खंभरा में लोग जुटते हैं। यह साबित करता है कि महेंद्र सिंह का आंदोलन कभी खत्म नहीं होगा।उनकी मौत के सालों बाद आज भी बगोदर विधान सभा में “महेंद्र सिंह तुम जिंदा हो खेतों व खलिहानों में, जनता के अरमानो में नारे गाँव में गूंजती है”.

    महेंद्र सिंह को नमन। उनकी विरासत हमें यह सिखाती है कि राजनीति केवल सत्ता का खेल नहीं, बल्कि जनता के लिए एक मिशन हो सकता है।

  • कौन बनेगा बीजेपी विधायक दल का नेता ? मरांडी, सीपी सिंह और नीरा यादव !

    परवेज़ आलम की खास रिपोर्ट ………

    झारखंड की राजनीति में इन दिनों बीजेपी की खामोशी ने सत्ता पक्ष  को हमलावर होने का पूरा मौका दे दिया है। विधानसभा चुनाव खत्म हुए चार महीने हो गए, लेकिन अब तक बीजेपी अपने विधायक दल के नेता का चयन नहीं कर पाई है। संवैधानिक पदों पर नियुक्तियां अटकी हुई हैं, और सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि दो सप्ताह के भीतर नेता प्रतिपक्ष का चयन किया जाए।

    मरांडी, सीपी सिंह और नीरा यादव!

    पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी इस दौड़ में सबसे आगे हैं। उनके साथ सीपी सिंह और डॉ. नीरा यादव के नामों पर भी गंभीरता से विचार हो रहा है। लेकिन बीजेपी की इस देरी ने सवाल खड़े कर दिए हैं। सत्ता पक्ष  का कहना है कि चुनावी हार के बाद पार्टी नेतृत्व में गहरी निराशा है।

    झामुमो और कांग्रेस के तीखे वार।

    सत्तारूढ़ झामुमो ने इस मुद्दे पर भाजपा को जमकर घेरा है। झामुमो महासचिव विनोद पांडेय ने तंज कसते हुए कहा, “चुनावी हार के बाद भाजपा इतनी निराश हो चुकी है कि विधायक दल का नेता तक नहीं चुन पा रही। राज्य की जनता ने इन्हें नकार दिया है, और अब इनकी सियासत दिशाहीन हो गई है।”

    कांग्रेस ने भी भाजपा पर संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान न करने का आरोप लगाया। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा, “भाजपा को नफरत और झूठ फैलाने के अलावा कुछ नहीं आता। इनकी मंशा संविधान को कमजोर करने की है।”

    मामला उल्टा पड़ गया।

    गौर करने वाली बात यह है कि भाजपा पहले संवैधानिक पदों पर नियुक्ति न होने को लेकर राज्य सरकार पर हमलावर रहती थी। लेकिन अब यही मुद्दा पार्टी के गले की फांस बन गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद विपक्ष को हमले का नया हथियार मिल गया है।

    शीघ्र होगा निर्णय?

    ऐसा माना जा रहा है कि भाजपा केंद्रीय नेतृत्व की निगरानी में जल्द ही विधायक दल के नेता का चयन करेगी। पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाने की संभावना है। सुप्रीम कोर्ट का निर्देश पार्टी पर दबाव बढ़ा रहा है, और फैसला जल्द लिए जाने की उम्मीद की जा रही है।

    क्या मरांडी बन पाएंगे विधायक दल के नेता, या सीपी सिंह और डॉ. नीरा यादव बाज़ी मारेंगे?

  • रघुवर दास आज प्रदेश कार्यालय में भाजपा की सदस्यता ग्रहण किया

    रांची:

    पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास आज, 10 जनवरी को भाजपा की सदस्यता ग्रहण किया  इस अवसर पर प्रदेश कार्यालय में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. रविंद्र कुमार राय, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री नागेंद्र त्रिपाठी, प्रदेश संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह, और प्रदेश सदस्यता प्रभारी राकेश प्रसाद भी मौजूद रहें।