Category: Politics

  • आपकी योजना–आपकी सरकार–आपके द्वार” कार्यक्रम में उमड़ी भीड़

    By:-Chandan Nitu.

    For The News Post4U.

    गिरिडीह जिले में “सेवा का अधिकार सप्ताह” के तहत आपकी योजना–आपकी सरकार–आपके द्वार कार्यक्रम की रौनक देखते ही बन रही है। जिले के लगभग हर प्रखंड में लगे शिविरों में लोगों का तांता लगा है। सरकार का लक्ष्य साफ है—हर लाभुक तक योजनाओं का लाभ घर–घर पहुंचाना और किसी को भी उसके हक से वंचित न रहने देना।

    आज इसी कड़ी में विधायक  कल्पना मुर्मू सोरेन और उपायुक्त रामनिवास यादव गांडेय प्रखंड के कुंडलवादह, बदगुंदा, पर्वतपुर, अहिल्यापुर और बेंगाबाद पंचायत व महुआर पंचायत सचिवालय पहुँचे और शिविरों का निरीक्षण किया।

    राज्यसभा सांसद डॉ. सरफराज अहमद भी पहुंचे — हर सेवा का स्वयं लिया जायजा

    निरीक्षण के दौरान राज्यसभा सांसद डॉ. सरफराज अहमद, विधायक गांडेय और उपायुक्त ने प्रत्येक स्टॉल की व्यवस्था, सेवाओं की उपलब्धता, आवेदनों की प्रक्रिया और आम जनता की सहभागिता को बारीकी से परखा। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए—
    “हर लाभुक की समस्या का त्वरित और पारदर्शी समाधान सुनिश्चित करें।”

    अपने संबोधन में डॉ. अहमद ने कहा—
    “सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी योजना कागज़ों में नहीं, बल्कि लोगों तक पहुंचे। आपकी सहभागिता और प्रशासन की प्रतिबद्धता से यह अभियान सफल हो रहा है।”

    विधायक का जनता से सीधा संवाद—“अबुआ की सरकार मतलब आपकी सरकार”

    लोगों को संबोधित करते हुए विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन ने दो टूक कहा—
    “इस कार्यक्रम से सरकार आप सभी के और करीब आ रही है। आपकी समस्याओं का तुरंत समाधान करना हमारी पहली प्राथमिकता है।”

    उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि—

    • पात्र लाभुकों को योजनाओं का लाभ समयबद्ध तरीके से दें।
    • किसी आवेदन में लापरवाही या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
    • सभी स्टॉल पर पर्याप्त कार्यबल तत्परता से उपलब्ध रहे।

    उन्होंने उपस्थित ग्रामीणों का धन्यवाद करते हुए कहा—
    “आपके सहयोग से यह कार्यक्रम सफल है। आने वाले समय में और भी बेहतर सेवाएं आपके लिए लेकर आएंगे।”

    शिविर में सबसे ज्यादा भीड़ इन सेवाओं के लिए.

    लोगों ने बड़ी संख्या में इन सुविधाओं के लिए आवेदन दिए—

    • जाति, आवासीय, आय प्रमाण पत्र
    • वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन
    • राशन कार्ड
    • प्रधानमंत्री आवास योजना
    • स्वास्थ्य बीमा
    • श्रम विभाग की योजनाएं

    कई आवेदनों का मौके पर ही निष्पादन कर दिया गया।

    उपायुक्त ने अपील की—
    “निकटतम शिविर में पहुँचकर अधिक से अधिक लोग सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं। यह कार्यक्रम शिकायत निवारण से लेकर नई सेवाओं तक—सब कुछ आपके द्वार ला रहा है।

     त्वरित समाधान, डिजिटल एंट्री और लगातार मॉनिटरिंग

    सभी प्राप्त आवेदनों की ऑनलाइन एंट्री की जा रही है। जिला स्तरीय टीम लगातार मॉनिटरिंग कर रही है ताकि—

    • लंबित आवेदनों का जल्द निष्पादन हो,
    • और योजनाओं का लाभ तेजी से पहुंचे।

    कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त ने कहा—
    “जिला प्रशासन पूरी तत्परता के साथ आपके लिए खड़ा है। हमारा लक्ष्य है—ज्यादा से ज्यादा योग्य लाभुकों तक योजनाओं को पहुँचाना। आपका सहयोग ही हमारी प्रेरणा है।”

  • गिरिडीह में भाजपा का धरना: चाईबासा कांड के विरोध में फूटा गुस्सा, मंत्री की बर्खास्तगी की मांग

    THE NEWS POST4U.

    गिरिडीह:झारखंड के चाईबासा में एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने की घटना ने पूरे राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी मुद्दे को लेकर सोमवार को गिरिडीह जिला भाजपा ने सिविल सर्जन कार्यालय के समक्ष एक दिवसीय धरना देकर राज्य सरकार के खिलाफ जमकर विरोध दर्ज कराया।

    धरना का नेतृत्व जिला अध्यक्ष महादेव दुबे ने किया। इस दौरान बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता, महिला मोर्चा की सदस्याएं और युवा मोर्चा के कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने राज्य सरकार की कथित लापरवाही और भ्रष्टाचार के खिलाफ नारेबाजी की।

    धरना को संबोधित करते हुए महादेव दुबे ने कहा कि — “चाईबासा की यह घटना सिर्फ एक अस्पताल की गलती नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की सड़ांध को उजागर करती है।” उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री के कार्यकाल में अस्पतालों की व्यवस्था चरमराई हुई है, दवा आपूर्ति से लेकर उपकरण खरीद तक में भ्रष्टाचार व्याप्त है।

    दुबे ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में टेंडर कमीशनखोरी के आधार पर दिए जा रहे हैं, जिससे घटिया सामग्री और सेवाएं मरीजों तक पहुंच रही हैं। उन्होंने इसे राज्य की जनता के जीवन से खिलवाड़ बताते हुए मुख्यमंत्री और राज्यपाल से स्वास्थ्य मंत्री को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की।

    भाजपा नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर राज्य सरकार ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो पार्टी राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ेगी। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि जनता अब इस लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगी — हर अस्पताल में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करनी होगी।

    धरना के अंत में भाजपा कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें राज्य की बिगड़ती स्वास्थ्य व्यवस्था की उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई।

  • बिहार चुनाव में JMM को बड़ा झटका, नहीं हुआ एक भी नामांकन

    — मंत्री बोले “राजद-कांग्रेस की धूर्त राजनीति का शिकार हुई पार्टी”

    परवेज़ आलम.

    गिरिडीह:  बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी इस बार बिहार की किसी भी विधानसभा सीट पर चुनाव नहीं लड़ पाएगी, क्योंकि नामांकन की अंतिम तिथि (सोमवार) बीत जाने तक जेएमएम का कोई उम्मीदवार पर्चा दाखिल नहीं कर सका।

    इस अप्रत्याशित स्थिति के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा ने औपचारिक रूप से महागठबंधन से अलग होने की घोषणा कर दी है।
    यह घोषणा झारखंड सरकार के मंत्री और जेएमएम के वरिष्ठ नेता सुदिव्य कुमार सोनू ने गिरिडीह में पत्रकारों से बातचीत के दौरान की।

    राजद और कांग्रेस ने दिखाई राजनीतिक धूर्तता.

    पत्रकारों से बातचीत में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने तीखे शब्दों में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस दोनों पर गंभीर आरोप लगाए।
    उन्होंने कहा —

    “राजद और कांग्रेस ने जो किया है, वह राजनीतिक धूर्तता की पराकाष्ठा है। हमें जानबूझकर गठबंधन की प्रक्रिया से बाहर रखा गया। इसका परिणाम जल्द ही सबके सामने होगा।”

    मंत्री ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि अब जेएमएम बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन का हिस्सा नहीं है, और पार्टी किसी भी सीट पर चुनाव नहीं लड़ेगी।

    सीट शेयरिंग पर अटका मामला, 13 दिनों तक होता रहा इंतज़ार.

    मंत्री सोनू ने बताया कि 7 अक्टूबर को पटना में सीट बंटवारे को लेकर महागठबंधन की बैठक हुई थी।
    वे अपने सहयोगी विनोद पांडेय के साथ इस बैठक में शामिल हुए थे।
    जेएमएम को उम्मीद थी कि पार्टी को कुछ सीटें मिलेंगी, ताकि बिहार में भी उसका राजनीतिक विस्तार हो सके।

    लेकिन मंत्री के अनुसार,

    “7 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक राजद ने चालबाजी का खेल खेला, और कांग्रेस ने उस पर मौन सहमति दी।
    जब तक नामांकन की तिथि समाप्त हुई, हमें जानबूझकर दरकिनार कर दिया गया।”

    उन्होंने इसे “साजिशन बहिष्कार” बताया और कहा कि राजद-कांग्रेस की मिलीभगत ने जेएमएम की चुनावी योजनाओं पर पानी फेर दिया।

    अगर पहले साफ़ बोलते, तो हम अकेले मैदान में उतर जाते.

    मंत्री सोनू ने अपनी नाराज़गी जताते हुए कहा कि अगर राजद और कांग्रेस को जेएमएम को सीट नहीं देनी थी, तो यह बात पहले ही स्पष्ट करनी चाहिए थी।

    “हम झारखंड से बिहार तक एकजुटता और क्षेत्रीय सहयोग का संदेश देना चाहते थे, लेकिन हमें राजनीतिक सहयोगी नहीं, बल्कि प्रतिद्वंद्वी समझा गया,”
    मंत्री सोनू ने कहा।

    उन्होंने आगे कहा —

    “7 से 20 अक्टूबर तक हमें सिर्फ छल का सामना करना पड़ा। यह सब सोची-समझी चाल थी, जिसमें कांग्रेस ने राजद का पूरा साथ दिया। अब इसका खामियाजा दोनों दलों को भुगतना पड़ेगा। क्यूकि JMM देश की अकेली  पार्टी है जिसका आदिवासी समाज मे ब्यापक जननधर है और बिहार की कई सीटों पर महागठबंधन को  JMM की उपेक्षा भारी पड़ेगी ।

    महागठबंधन की एकता पर बड़ा सवाल.

    जेएमएम के महागठबंधन से अलग होने के ऐलान से बिहार महागठबंधन की एकता पर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टूट न केवल महागठबंधन की साख को कमजोर करेगी, बल्कि झारखंड-बिहार के क्षेत्रीय तालमेल और गठबंधन राजनीति की विश्वसनीयता पर भी असर डालेगी।

    बिहार की सियासत में जहां एक ओर गठबंधन की मजबूती की बातें हो रही थीं, वहीं अब जेएमएम का यह कदम आने वाले दिनों में नए समीकरण और नए गठजोड़ों की शुरुआत कर सकता है।

    फिलहाल का निष्कर्ष.

    झारखंड मुक्ति मोर्चा ने साफ़ कर दिया है कि वह अब बिहार मे महागठबंधन का हिस्सा नहीं रहेगा और झारखंड मे महागठबंधन के रहने पर भी समीक्षा होगी ।
    मंत्री सोनू के बयान से यह भी स्पष्ट है कि यह अलगाव किसी सीट या सौदेबाज़ी  का नहीं, बल्कि विश्वास और सम्मान की राजनीति  का मामला है।

    बिहार के चुनावी मैदान में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि
    क्या राजद-कांग्रेस इस झटके से उबर पाते हैं,
    या फिर झारखंड से उठी यह नाराज़गी
    बिहार की सियासत की नई कहानी लिख देगी।

  • नवरात्र पर मंत्री सुदीव्य सोनू का पंडाल भ्रमण, व्यवस्था पर विशेष जोर

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह : नवरात्र के शुभ अवसर पर शनिवार को गिरिडीह विधायक एवं झारखंड सरकार के मंत्री सुदीव्य कुमार सोनू ने शहर और आसपास के क्षेत्रों में स्थापित विभिन्न दुर्गा पूजा पंडालों का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने मां दुर्गा की प्रतिमा के समक्ष माथा टेकते हुए राज्य और जिले के लोगों की खुशहाली व समृद्धि की कामना की।

    मंत्री सोनू ने न केवल शहरी क्षेत्र, बल्कि गिरिडीह मुफ्फसिल इलाके के कई बड़े पंडालों का भी दौरा किया। भ्रमण के दौरान उन्होंने पंडालों में सफाई व्यवस्था, विद्युत आपूर्ति, भीड़ नियंत्रण, अग्निशमन प्रबंधन और सुरक्षा इंतजामों का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पूजा के समय किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और श्रद्धालुओं को सुरक्षित व शांतिपूर्ण वातावरण में पूजा करने का अवसर मिलना चाहिए।

    निरीक्षण के दौरान जिले के पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी, नगर निगम प्रतिनिधि और बिजली विभाग के पदाधिकारी मंत्री के साथ मौजूद थे। मंत्री सोनू ने कहा, “दुर्गा पूजा झारखंड सहित पूरे देश की आस्था और संस्कृति का पर्व है। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि श्रद्धालु बिना किसी व्यवधान के पूजा-अर्चना कर सकें। इसके लिए सभी विभाग पूरी तरह सतर्क और तैयार रहें।”

    इस मौके पर मंत्री ने कई पंडाल समितियों के सदस्यों से भी मुलाकात की और उनकी समस्याओं व सुझावों को सुना। पंडाल समितियों ने प्रशासन से सहयोग और व्यवस्था पर संतोष जताया।

  • सीएम हेमंत सोरेन ने नव-नियुक्त अभ्यर्थियों को सौंपा नियुक्ति पत्र

    झारखंड पर्यटन कालोगो, वेबसाइट और नई एप्लीकेशन का शुभारंभ.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    रांची : झारखंड मंत्रालय में गुरुवार को एक अहम अवसर देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नगर विकास एवं आवास विभाग के अंतर्गत विभिन्न पदों पर चयनित 19 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। इस अवसर पर नगर विकास एवं पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार भी मौजूद रहे।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने झारखंड पर्यटन एवं झारखंड पर्यटन विकास निगम का नया लोगो, आधिकारिक वेबसाइट और सांस्कृतिक दल प्रबंधन प्रणाली एप्लीकेशन लॉन्च किया। इस पहल को राज्य के सांस्कृतिक एवं पर्यटन विकास की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार का प्रमुख लक्ष्य झारखंड का समग्र विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा,

    “हमारी प्रतिबद्धता सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों के अंतिम व्यक्ति तक विकास की किरण पहुँचाना है। राज्य में रोज़ नए कार्य हो रहे हैं और विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति की राह मजबूत हो रही है। प्रकृति ने झारखंड को धरती के नीचे खनिज संपदा और ऊपर अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य से नवाज़ा है। हमारा प्रयास है कि इन संसाधनों को सहेजते हुए झारखंड को देश और दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर और सशक्त पहचान दिलाई जाए।”

    उन्होंने नवनियुक्त अभ्यर्थियों को भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं और कहा कि युवाओं की ऊर्जा ही राज्य के विकास की असली ताकत है।

    नगर विकास एवं पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार ने भी इस अवसर पर अभ्यर्थियों और विभागीय कर्मियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि झारखंड अब डिजिटल युग में कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा,

    “कलाकारों का डाटा संग्रह, पर्यटन विभाग का नया लोगो, वेबसाइट और एप्लीकेशन—ये सभी पहल न केवल राज्यवासियों के लिए लाभकारी होंगे बल्कि झारखंड की पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मजबूत करेंगे। अब डॉक्यूमेंटेशन और डिजिटल माध्यमों से देश-दुनिया के लोग झारखंड की सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन स्थलों के बारे में आसानी से जान पाएंगे।”

    यह कार्यक्रम राज्य सरकार की दोहरी प्राथमिकताओं—युवाओं के लिए रोजगार सृजन और पर्यटन एवं संस्कृति को बढ़ावा देने—का जीवंत उदाहरण रहा। नियुक्ति पत्र वितरण से जहां नई पीढ़ी को अवसर मिले हैं, वहीं पर्यटन एवं संस्कृति से जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म राज्य की संभावनाओं को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में सहायक साबित होंगे। इस मौके पर मुख्य सचिव अल्का तिवारी और सांसद महुआ माझी भी मंच पर उपस्थित थी ।

     

  • सूर्या हांसदा की मौत के विरोध में भाजपा का राज्यव्यापी प्रदर्शन

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    रांची/गिरिडीह :  झारखंड में राजनीतिक माहौल गुरुवार को गरमा गया जब भाजपा ने सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता सूर्या हांसदा की कथित साजिशन हत्या की सीबीआई जांच और नगड़ी में रैयतों की खेतीहर जमीन को रिम्स-2 के नाम पर अधिग्रहित किए जाने के विरोध में राज्यभर में आक्रोश प्रदर्शन किया।

    प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. रविंद्र कुमार राय, केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश, सांसद आदित्य साहू समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने विभिन्न जिलों और प्रखंडों में अलग-अलग प्रदर्शन का नेतृत्व किया।

    मरांडी ने सरकार पर लगाया गंभीर आरोप.

    रांची महानगर भाजपा द्वारा आयोजित विरोध सभा को संबोधित करते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा,
    “अबुआ सरकार में आदिवासियों की हत्या और रैयतों की खेतिहर जमीन की लूट चरम पर है। सूर्या हांसदा जैसे ईमानदार और जनसेवी कार्यकर्ता को माफियाओं की मिलीभगत से मार गिराया गया।”

    मरांडी ने बताया कि सूर्या हांसदा लोकतांत्रिक तरीके से अब तक चार बार चुनाव लड़ चुके थे और कई मुकदमों से बरी हो रहे थे। वे गरीब और जरूरतमंद बच्चों को पढ़ाते, उनके रहने और खाने का इंतज़ाम करते थे। खनिज माफियाओं की लूट का विरोध करना ही उनकी सबसे बड़ी “गलती” थी।
    उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की शह पर फर्जी एनकाउंटर कर सूर्या की हत्या की गई। इसलिए भाजपा की मांग है कि इस पूरे मामले की सीबीआई जांच कराई जाए।

    मरांडी ने नगड़ी की जमीन के मुद्दे पर कहा कि बिहार सरकार के समय स्पष्ट आश्वासन दिया गया था कि रैयतों की खेतीहर भूमि अधिग्रहित नहीं की जाएगी। “लेकिन मौजूदा हेमंत सरकार किसानों से जबरन जमीन छीन रही है। भाजपा रैयतों के साथ खड़ी है और इस अन्याय के खिलाफ सरकार को चेतावनी देती है,” उन्होंने कहा।

    गिरिडीह में नवीन जायसवाल ने प्रदर्शन का नेतृत्व किया। प्रदेश उपाध्यक्ष विकास प्रीतम जिला अध्यक्ष महादेव दुबे, प्रदेश भाजपा नेता सुरेश साव , सांसद प्रतिनिधि दिनेश यादव , चुननु कान्त, विनय सिंह,सुभाष सिन्हा  समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं की मौजूदगी रही और नारेबाजी से माहौल पूरी तरह सरकार विरोधी बना रहा।

    रघुवर दास ने सरकार को दी चेतावनी.

    कांके में प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने सूर्या हांसदा की मौत को “फर्जी एनकाउंटर” करार दिया। उन्होंने कहा,
    “जब पूरा झारखंड शिबू सोरेन जी के निधन से शोकाकुल था, उसी समय सरकार ने एक ईमानदार आदिवासी युवक की हत्या कर दी। पुलिस का दावा है कि 40-50 लोगों के दस्ते ने हमला किया था, लेकिन गोली केवल सूर्या हांसदा को ही लगी। यही इस एनकाउंटर के फर्जी होने का सबसे बड़ा सबूत है।”

    दास ने अपने कार्यकाल की तुलना करते हुए कहा कि उनके समय में कई मेडिकल कॉलेज और अस्पताल बनाए गए, लेकिन खेतीहर भूमि को कभी नहीं छीना गया।
    “हेमंत सरकार ने रैयतों की जमीन रिम्स-2 के नाम पर बेच डाली है। आज का आंदोलन प्रतीकात्मक है। अगर सरकार ने सबक नहीं लिया तो जनता को गोलबंद कर व्यापक जनांदोलन खड़ा किया जाएगा। भ्रष्टाचार और बेरोजगारी से त्रस्त झारखंड के युवा चुप नहीं बैठेंगे और इस सरकार को उखाड़ फेंकेंगे।”

  • एबीवीपी कार्यकर्ताओं का अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी, दो की तबीयत बिगड़ी

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क

    गिरिडीह : स्नातक सेमेस्टर-वन के परीक्षा परिणाम में सुधार की मांग को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ता पिछले 24 घंटे से अधिक समय से गिरिडीह कॉलेज में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। गुरुवार को हड़ताल के दूसरे दिन स्थिति गंभीर होती दिखी, जब दो कार्यकर्ताओं – नीरज कुमार और अनीश – की तबीयत अचानक बिगड़ गई। मौके पर मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों की टीम ने दोनों को स्लाइन चढ़ाकर प्राथमिक उपचार दिया।

    ABVP कार्यकर्ताओं का आरोप है कि विनोबा भावे विश्वविद्यालय (VBU) द्वारा जारी स्नातक सेमेस्टर-वन का परिणाम बेहद लापरवाह तरीके से तैयार किया गया है। आधे से अधिक छात्रों को प्रमोट कर दिया गया है, जिससे मेहनती विद्यार्थियों का हक मारा गया है। छात्र संगठन ने इसे विश्वविद्यालय प्रशासन की गंभीर लापरवाही बताया है।

    ABVP के जिला संयोजक उज्ज्वल तिवारी ने कहा, “हमारी मांग स्पष्ट है – परीक्षा परिणाम की पुनः समीक्षा की जाए और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बंद हो। जब तक हमारी मांग पूरी नहीं होती, भूख हड़ताल जारी रहेगा।”

    इधर गिरिडीह कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनुज कुमार ने स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भूख हड़ताल पर बैठे कार्यकर्ताओं को समझाने की कोशिश की जा रही है। “कॉलेज प्रशासन ने विश्वविद्यालय से बातचीत शुरू कर दी है और समाधान की दिशा में पहल जारी है। हम छात्रों से अपील करते हैं कि वे अपना स्वास्थ्य खतरे में न डालें।”

    कॉलेज परिसर में माहौल तनावपूर्ण लेकिन शांतिपूर्ण बना हुआ है। बड़ी संख्या में छात्र हड़ताल स्थल पर जुटे हुए हैं और प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

  • नेपाल में अंतरिम सरकार गठन की तैयारी

    कौन हैं सुशीला कार्की जिस पर जेन-ज़ेड आंदोलनकारी जता रहे हैं भरोसा

    परवेज़ आलम.

    For The News Post4u.

    काठमांडू:  नेपाल इस समय बड़े राजनीतिक संकट से गुजर रहा है। लगातार बढ़ते जनाक्रोश और सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच अब देश में अंतरिम सरकार गठन की तैयारियाँ तेज हो गई हैं। सेना और जेन-ज़ेड आंदोलनकारियों के बीच हालात सामान्य करने के लिए बातचीत भी जारी है।

    जेन-ज़ेड की वर्चुअल बैठक, सुशीला कार्की बनीं नई उम्मीद.

    ताजा घटनाक्रम में जेन-ज़ेड आंदोलनकारियों ने एक ऑनलाइन बैठक की जिसमें 5,000 से अधिक युवाओं ने हिस्सा लिया। इस बैठक में उन्होंने नेपाल की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को अपना नेता चुनने का ऐलान किया। माना जा रहा है कि कार्की अब अंतरिम सरकार का नेतृत्व कर सकती हैं।

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कार्की ने युवाओं के इस फैसले पर सकारात्मक रुख दिखाया है, हालांकि उन्होंने साफ किया है कि किसी भी औपचारिक घोषणा से पहले वे सेना प्रमुख से मुलाकात करेंगी। बताया जा रहा है कि अब तक 2,500 से अधिक समर्थक औपचारिक तौर पर उनके साथ खड़े हो चुके हैं।

    कौन हैं

    • उन्होंने 1979 में वकालत की शुरुआत की थी।
    • 2009 में वे सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता न्यायाधीश बनीं।
    • 2010 में उन्हें स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया।
    • 11 जुलाई 2016 से 6 जून 2017 तक वे नेपाल की मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत रहीं।

    मुख्य न्यायाधीश बनने के एक साल के भीतर, 2017 में, उन पर महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था। राजनीतिक दलों ने उन पर पूर्वाग्रह और कार्यपालिका में हस्तक्षेप का आरोप लगाया था। हालांकि, उस समय भारी जन समर्थन और सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से यह प्रस्ताव वापस लेना पड़ा। इस विवाद ने कार्की को जनता के बीच एक साहसी और निष्पक्ष चेहरा बना दिया।

    नेपाल में हालात तनावपूर्ण, कर्फ्यू लागू.

    राजनीतिक अस्थिरता के बीच देश में कानून-व्यवस्था बिगड़ गई है। बीते दो दिनों में उपद्रव और हिंसा की घटनाएँ लगातार सामने आईं। प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, राष्ट्रपति कार्यालय, प्रधानमंत्री आवास, सुप्रीम कोर्ट और कई राजनीतिक दलों के दफ्तरों व नेताओं के घरों में आगजनी और तोड़फोड़ की।

    स्थिति नियंत्रण से बाहर न जाए, इसके लिए सेना ने मंगलवार रात से ही देशभर में कर्फ्यू लागू कर दिया। प्रतिबंधात्मक आदेश बुधवार शाम 5 बजे तक प्रभावी रहे और गुरुवार सुबह 6 बजे तक कर्फ्यू जारी रहेगा। राजधानी काठमांडू की सड़कों पर सेना का पहरा है और लोग घरों में कैद होकर रह गए हैं।

    नेपाल की राजनीति इस समय एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। एक ओर जनता बदलाव की मांग पर अडिग है, वहीं दूसरी ओर सेना स्थिरता बनाए रखने की कोशिश कर रही है। इस बीच, यदि सुशीला कार्की अंतरिम सरकार की कमान संभालती हैं तो यह नेपाल की राजनीति में नई दिशा की शुरुआत हो सकती है।

     

  • नेपाल में राजनीतिक भूचाल: हिंसक प्रदर्शनों और बढ़ते दबाव के बीच प्रधानमंत्री का  इस्तीफा

    परवेज़ आलम.

    FOR THE NEWS POST4U

    काठमांडू: नेपाल इस समय भीषण राजनीतिक और सामाजिक संकट से गुजर रहा है। सोशल मीडिया बैन के खिलाफ शुरू हुआ छात्रों और युवाओं का आंदोलन देखते-देखते इतना बड़ा रूप ले लेगा, शायद किसी ने सोचा भी नहीं था। पिछले तीन दिनों से देश के कई हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन हो रहे थे, जिनमें अब तक 20 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 500 लोग घायल बताए जा रहे हैं। हालात बेकाबू होते देख आखिरकार प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने सोमवार देर रात इस्तीफा दे दिया था ।

    सेना की तैनाती और मंत्रियों के इस्तीफे.

    काठमांडू, पोखरा, रूपनदेही, सुनसरी और बिरगंज सहित सात बड़े शहरों में कर्फ्यू लगाया गया है। संसद भवन, मंत्रियों के आवास और प्रमुख सरकारी भवनों को सुरक्षा घेरा देने के लिए सेना को तैनात किया गया है। सूत्रों का कहना है कि इस्तीफे से पहले सेना प्रमुख अशोक राज सिग्देल ने स्वयं ओली को पद छोड़ने की सलाह दी थी।

    इससे पहले, गृहमंत्री रमेश लेखक और स्वास्थ्य मंत्री प्रदीप पौडेल समेत तीन मंत्री पहले ही नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे चुके थे, जबकि चार अन्य मंत्री भी त्यागपत्र देने की तैयारी में थे। इससे ओली पूरी तरह राजनीतिक रूप से अलग-थलग पड़ गए थे।

    पूर्व प्रधानमंत्री देउबा और उनकी पत्नी पर हमला.

    प्रदर्शनों का हिंसक स्वरूप इतना बढ़ गया कि प्रदर्शनकारियों ने पूर्व प्रधानमंत्री एवं नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा और उनकी पत्नी आरजू राणा देउबा (जो नेपाल की विदेश मंत्री भी हैं) पर हमला कर दिया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देउबा लहूलुहान हालत में दिखाई दिए। दोनों नेता गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।

    उप प्रधानमंत्री विष्णु प्रसाद पौडेल को भी निशाना.

    प्रदर्शनकारियों का गुस्सा उप प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री विष्णु प्रसाद पौडेल पर भी फूटा। काठमांडू की एक गली में भीड़ ने उन्हें घेरकर जमकर पीटा। वायरल वीडियो में पौडेल को लात मारी जाती दिखाई दे रही है। फिलहाल उनकी स्थिति और ठिकाने के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं है।

    ओली को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया.

    इस्तीफे के बाद सेना ने प्रधानमंत्री ओली को हेलीकॉप्टर के जरिए सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, भैसपति स्थित कई मंत्रियों के आवासों से भी हेलीकॉप्टर की मदद से निकासी की गई, क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने वहां आगजनी और तोड़फोड़ की थी।

    आंदोलन की असली वजह.

    हालांकि सरकार ने सोशल मीडिया पर लगाया गया प्रतिबंध देर रात हटा लिया, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह आंदोलन सिर्फ सोशल मीडिया बैन तक सीमित नहीं था। यह व्यापक भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और आर्थिक गिरावट के खिलाफ युवाओं का जन-आक्रोश था। खासकर Gen-Z और छात्रों की अगुवाई में यह आंदोलन तेजी से फैला और सेलिब्रिटीज तथा मानवाधिकार संगठनों के समर्थन से पूरे देश में फैल गया।

    भारतीय नागरिकों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी.

    भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि नेपाल में विकसित हो रहे हालात को देखते हुए, भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे स्थिति स्थिर होने तक वहां की यात्रा स्थगित कर दें. नेपाल में वर्तमान में मौजूद भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने वर्तमान निवास स्थानों पर ही रहें, सड़कों पर निकलने से बचें और पूरी सावधानी बरतें. उन्हें नेपाल के अधिकारियों और काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास द्वारा जारी स्थानीय सुरक्षा सलाह का पालन करने की भी सलाह दी जाती है. किसी भी सहायता की आवश्यकता होने पर, कृपया काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास से सांप;अर्क की सलाह दी गयी है ।

    अंतरराष्ट्रीय प्रभाव.

    हिंसा और अशांति के चलते काठमांडू आने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी असर पड़ा। सोमवार शाम दिल्ली से काठमांडू जा रही इंडिगो की फ्लाइट 6E1153 और मुंबई से 6E1157 को काठमांडू एयरपोर्ट पर उतरने की अनुमति नहीं मिली। दोनों फ्लाइट्स को लखनऊ डायवर्ट करना पड़ा और बाद में अपने मूल शहरों की ओर वापस लौटना पड़ा।

    नेपाल की राजनीति अब बेहद अनिश्चित दौर में प्रवेश कर चुकी है। विपक्षी दल सत्ता परिवर्तन की तैयारी में जुटे हैं, वहीं सेना संसद भवन और संवेदनशील ठिकानों की सुरक्षा में लगी हुई है। राजधानी काठमांडू और अन्य जिलों में हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं। यह संकट नेपाल की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।