नेपाल में राजनीतिक भूचाल: हिंसक प्रदर्शनों और बढ़ते दबाव के बीच प्रधानमंत्री का  इस्तीफा

परवेज़ आलम.

FOR THE NEWS POST4U

काठमांडू: नेपाल इस समय भीषण राजनीतिक और सामाजिक संकट से गुजर रहा है। सोशल मीडिया बैन के खिलाफ शुरू हुआ छात्रों और युवाओं का आंदोलन देखते-देखते इतना बड़ा रूप ले लेगा, शायद किसी ने सोचा भी नहीं था। पिछले तीन दिनों से देश के कई हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन हो रहे थे, जिनमें अब तक 20 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 500 लोग घायल बताए जा रहे हैं। हालात बेकाबू होते देख आखिरकार प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने सोमवार देर रात इस्तीफा दे दिया था ।

सेना की तैनाती और मंत्रियों के इस्तीफे.

काठमांडू, पोखरा, रूपनदेही, सुनसरी और बिरगंज सहित सात बड़े शहरों में कर्फ्यू लगाया गया है। संसद भवन, मंत्रियों के आवास और प्रमुख सरकारी भवनों को सुरक्षा घेरा देने के लिए सेना को तैनात किया गया है। सूत्रों का कहना है कि इस्तीफे से पहले सेना प्रमुख अशोक राज सिग्देल ने स्वयं ओली को पद छोड़ने की सलाह दी थी।

इससे पहले, गृहमंत्री रमेश लेखक और स्वास्थ्य मंत्री प्रदीप पौडेल समेत तीन मंत्री पहले ही नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे चुके थे, जबकि चार अन्य मंत्री भी त्यागपत्र देने की तैयारी में थे। इससे ओली पूरी तरह राजनीतिक रूप से अलग-थलग पड़ गए थे।

पूर्व प्रधानमंत्री देउबा और उनकी पत्नी पर हमला.

प्रदर्शनों का हिंसक स्वरूप इतना बढ़ गया कि प्रदर्शनकारियों ने पूर्व प्रधानमंत्री एवं नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा और उनकी पत्नी आरजू राणा देउबा (जो नेपाल की विदेश मंत्री भी हैं) पर हमला कर दिया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देउबा लहूलुहान हालत में दिखाई दिए। दोनों नेता गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।

उप प्रधानमंत्री विष्णु प्रसाद पौडेल को भी निशाना.

प्रदर्शनकारियों का गुस्सा उप प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री विष्णु प्रसाद पौडेल पर भी फूटा। काठमांडू की एक गली में भीड़ ने उन्हें घेरकर जमकर पीटा। वायरल वीडियो में पौडेल को लात मारी जाती दिखाई दे रही है। फिलहाल उनकी स्थिति और ठिकाने के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं है।

ओली को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया.

इस्तीफे के बाद सेना ने प्रधानमंत्री ओली को हेलीकॉप्टर के जरिए सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, भैसपति स्थित कई मंत्रियों के आवासों से भी हेलीकॉप्टर की मदद से निकासी की गई, क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने वहां आगजनी और तोड़फोड़ की थी।

आंदोलन की असली वजह.

हालांकि सरकार ने सोशल मीडिया पर लगाया गया प्रतिबंध देर रात हटा लिया, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह आंदोलन सिर्फ सोशल मीडिया बैन तक सीमित नहीं था। यह व्यापक भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और आर्थिक गिरावट के खिलाफ युवाओं का जन-आक्रोश था। खासकर Gen-Z और छात्रों की अगुवाई में यह आंदोलन तेजी से फैला और सेलिब्रिटीज तथा मानवाधिकार संगठनों के समर्थन से पूरे देश में फैल गया।

भारतीय नागरिकों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी.

भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि नेपाल में विकसित हो रहे हालात को देखते हुए, भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे स्थिति स्थिर होने तक वहां की यात्रा स्थगित कर दें. नेपाल में वर्तमान में मौजूद भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने वर्तमान निवास स्थानों पर ही रहें, सड़कों पर निकलने से बचें और पूरी सावधानी बरतें. उन्हें नेपाल के अधिकारियों और काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास द्वारा जारी स्थानीय सुरक्षा सलाह का पालन करने की भी सलाह दी जाती है. किसी भी सहायता की आवश्यकता होने पर, कृपया काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास से सांप;अर्क की सलाह दी गयी है ।

अंतरराष्ट्रीय प्रभाव.

हिंसा और अशांति के चलते काठमांडू आने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी असर पड़ा। सोमवार शाम दिल्ली से काठमांडू जा रही इंडिगो की फ्लाइट 6E1153 और मुंबई से 6E1157 को काठमांडू एयरपोर्ट पर उतरने की अनुमति नहीं मिली। दोनों फ्लाइट्स को लखनऊ डायवर्ट करना पड़ा और बाद में अपने मूल शहरों की ओर वापस लौटना पड़ा।

नेपाल की राजनीति अब बेहद अनिश्चित दौर में प्रवेश कर चुकी है। विपक्षी दल सत्ता परिवर्तन की तैयारी में जुटे हैं, वहीं सेना संसद भवन और संवेदनशील ठिकानों की सुरक्षा में लगी हुई है। राजधानी काठमांडू और अन्य जिलों में हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं। यह संकट नेपाल की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

 

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