Category: RANCHI

  • हेमंत सरकार द्वारा अटल क्लिनिक का नाम बदलने पर भड़की बीजेपी

    रघुवर दास ने कहा- सरकार की मानसिक दिवालियापन की निशानी.

    The News Post4u.

    झारखंड में अटल क्लिनिक का नाम बदलकर “मदर टेरेसा एडवांस हेल्थ क्लिनिक” रखने के फैसले के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जमकर विरोध जताया है। शुक्रवार  को राज्य के कई जिलों में भाजपा कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया।

    पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, “अटल बिहारी वाजपेयी जी जैसे महान नेता के नाम पर शुरू की गई स्वास्थ्य योजना का नाम बदलना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और सरकार की गिरती मानसिकता को दिखाता है। सरकार ओछी राजनीति कर रही है।”

    रघुवर दास ने कहा कि वे मदर टेरेसा का सम्मान करते हैं, लेकिन कुछ संस्थाओं के जरिए उनके नाम पर जो काम हुए, वह देश जानता है। उन्होंने आरोप लगाया कि “निर्मल हृदय” संस्था पर नवजात बच्चों की बिक्री जैसे गंभीर आरोप लगे थे। ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि क्या यह नाम परिवर्तन धर्मांतरण की चल रही गतिविधियों से जुड़ा हुआ कदम तो नहीं है?

    उन्होंने आगे कहा कि “यह फैसला अटल जी जैसे राष्ट्र निर्माता को जनता की स्मृति से मिटाने की एक साजिश लगती है। न तो आदिवासी समाज और न ही आम जनता इसे स्वीकार करेगी।”

    पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि अगर सरकार मदर टेरेसा के नाम पर योजना शुरू करना चाहती थी, तो वह नई योजना लेकर आती। उन्होंने कहा, “पुरानी योजनाओं का नाम बदलकर अपनी नाकामी छुपाने का काम हो रहा है। सरकार स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर कुछ नया करने में असफल रही है।”

    रघुवर दास ने याद दिलाया कि “16 अगस्त 2019 को अटल जी की पुण्यतिथि पर गरीबों को सस्ती और अच्छी स्वास्थ्य सेवा देने के लिए अटल क्लिनिक की शुरुआत की गई थी।” उन्होंने सरकार से मांग की कि “वह अटल क्लिनिक का नाम वापस बहाल करे और इस तरह के राजनीतिक निर्णयों से बचे।”

     

  • हेमंत सोरेन सरकार का बड़ा फैसला: ‘अटल मोहल्ला क्लीनिक’ का नाम बदलकर अब होगा ‘मदर टेरेसा एडवांस हेल्थ क्लीनिक’

    21 अहम प्रस्तावों पर लगी मुहर, राज्य विश्वविद्यालय कानून को मिली मंजूरी, पुलिस भर्ती नियमों में भी बदलाव.

    परवेज़ आलम 

    For The News Post4u.

    रांची : झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने एक अहम निर्णय लेते हुए पूर्ववर्ती भाजपा सरकार द्वारा शुरू की गई ‘अटल मोहल्ला क्लीनिक’ योजना का नाम बदलने का फैसला किया है। अब ये स्वास्थ्य केंद्र ‘मदर टेरेसा एडवांस हेल्थ क्लीनिक’ के नाम से जाने जाएंगे। यह निर्णय गुरुवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया।

    क्लीनिक नाम परिवर्तन का उद्देश्य.
    कैबिनेट सचिव वंदना दादेल ने जानकारी दी कि मंत्रिमंडल ने इस नाम परिवर्तन को औपचारिक रूप से मंजूरी दी है। गौरतलब है कि इस योजना की शुरुआत अगस्त 2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुबर दास ने शहरी मलिन बस्तियों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की थी। वर्तमान में राज्य में ऐसे 140 मोहल्ला क्लीनिक कार्यरत हैं, जहां मुफ्त जांच, परामर्श और आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

    राज्य विश्वविद्यालय कानून में बड़ा बदलाव.
    कैबिनेट की बैठक में ‘झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक, 2025’ को भी मंजूरी दी गई। वंदना दादेल के अनुसार, वर्तमान में राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालय अलग-अलग अधिनियमों के अंतर्गत संचालित हो रहे हैं। अब एक समान और समेकित अधिनियम लाकर इन विश्वविद्यालयों को एक ही कानूनी ढांचे में लाया जाएगा। मेडिकल और एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी को इस दायरे से बाहर रखा गया है। साथ ही, विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों के लिए एक विशेष विश्वविद्यालय सेवा आयोग के गठन का भी प्रस्ताव स्वीकृत किया गया है।

    श्रावणी मेला की तैयारियों को भी मिली स्वीकृति.
    देवघर में एक महीने तक चलने वाले प्रसिद्ध श्रावणी मेले के मद्देनजर सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को लेकर 10 जुलाई से 10 अगस्त तक कुल 28 अस्थायी मेला पुलिस चौकियों और 19 ट्रैफिक नियंत्रण चौकियों की स्थापना को भी मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है।

    पुलिस भर्ती विज्ञापन रद्द, नए नियम लागू.
    संयुक्त भर्ती नियमावली 2025 के क्रियान्वयन के बाद पूर्व में प्रकाशित पुलिस भर्ती विज्ञापनों को निरस्त करने का निर्णय लिया गया है। हालांकि, पहले आवेदन कर चुके अभ्यर्थियों को नई भर्तियों में आवेदन शुल्क से छूट मिलेगी। इसके अतिरिक्त, सभी श्रेणियों के अभ्यर्थियों को अधिकतम आयु सीमा में भी रियायत देने का फैसला किया गया है।

    उर्दू शिक्षकों की बहाली को मिली हरी झंडी.
    राज्य के प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में उर्दू विषय के लिए सहायक अध्यापक की नियुक्ति को लेकर 4,339 पदों के सृजन का प्रस्ताव भी पारित किया गया। यह निर्णय राज्य में अल्पसंख्यक भाषा शिक्षा को मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    मंत्रिमंडल की इस बैठक में कुल 21 निर्णय लिए गए, जो प्रशासनिक सुधार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से संबंधित हैं। इन फैसलों से राज्य में सुशासन और सार्वजनिक सेवा प्रणाली को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

     

  • झारखंड शराब घोटाला: छत्तीसगढ़ की ‘सुमित फैसिलिटीज’ के निदेशक अमित सलौंकी गिरफ्तार

    अब तक 11 गिरफ्तारियां.

    State Bureau, The News Post4u.

    रांची:  झारखंड में बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच कर रही एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एक और बड़ी गिरफ्तारी की है। बुधवार को ACB ने छत्तीसगढ़ की प्लेसमेंट एजेंसी ‘सुमित फैसिलिटीज’ के निदेशक अमित प्रभाकर सलौंकी को हिरासत में लिया। यह इस मामले में ग्यारहवीं गिरफ्तारी है। सलौंकी पर खुदरा शराब दुकानों के लिए मैनपावर आपूर्ति के नाम पर ठेका हासिल कर करोड़ों रुपये के गबन का आरोप है।

    छत्तीसगढ़ कनेक्शन और ‘सिंडिकेट‘.

    गिरफ्तार सलौंकी, छत्तीसगढ़ के विवादित शराब कारोबारी सिद्धार्थ सिंघानिया का करीबी बताया जा रहा है, जिसे ACB पहले ही जेल भेज चुकी है। ACB के सूत्रों के अनुसार, सलौंकी की गिरफ्तारी सिंघानिया से हुई पूछताछ के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर की गई है। सलौंकी का नाम शराब घोटाले में ऐसे समय आया जब जांच एजेंसी राज्य में शराब नीति लागू किए जाने के बाद हुए घोटालों की परत-दर-परत जांच कर रही है।

    नीति लागू होते ही सक्रिय हुआ नेटवर्क.

    जानकारी के मुताबिक, मई 2022 में झारखंड में नई उत्पाद नीति लागू होने के बाद सुमित फैसिलिटीज समेत चार मैनपावर एजेंसियों ने खुदरा शराब दुकानों में स्टाफ उपलब्ध कराने का ठेका लिया। इस पूरी योजना को सीएसएमसीएल के तत्कालीन एमडी अरुण पति त्रिपाठी और उत्पाद विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव विनय कुमार चौबे के संरक्षण में संचालित किया गया।

    ₹450 करोड़ के गबन का आरोप.

    इन चार एजेंसियों—सुमित फैसिलिटीज, एटूजेड इंफ्रा सर्विसेज, इगल हंटर सॉल्यूशंस और प्राइम वन वर्क फोर्स प्राइवेट लिमिटेड—ने करीब आठ महीनों तक झारखंड में काम किया। इसके बाद इन्हें भारी वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में हटा दिया गया और ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। उत्पाद विभाग ने इन कंपनियों पर करीब ₹450 करोड़ के गबन का आरोप लगाया है और मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।अभी तक गिरफ्तार हुए 10 अन्य आरोपी

    इस घोटाले में अब तक जिन प्रमुख लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें शामिल हैं—

    विनय कुमार चौबे – निलंबित IAS, पूर्व प्रधान सचिव, उत्पाद विभाग,गजेंद्र सिंह – तत्कालीन संयुक्त आयुक्त उत्पाद (वर्तमान में जमानत पर),सुधीर कुमार दास – पूर्व महाप्रबंधक (वित्त),सुधीर कुमार – पूर्व अभियान प्रमुख,अमित प्रकाश – पूर्व आयुक्त, उत्पाद,नीरज कुमार सिंह – प्लेसमेंट एजेंसी मार्शन के प्रतिनिधि,सिद्धार्थ सिंघानिया – छत्तीसगढ़ के शराब कारोबारी,विधु गुप्ता – नकली होलोग्राम मामले में फंसे प्रिज्म होलोग्राफी कंपनी से,अतुल कुमार सिंह – श्री ओम साईं बेवरेजेज  व मुकेश मनचंदा – कारोबारी, इनमें से 9 आरोपी फिलहाल रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि एक आरोपी गजेंद्र सिंह जमानत पर बाहर हैं।

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    जांच जारी, और भी गिरफ्तारियां संभव.

    ACB की जांच में यह सामने आ रहा है कि कैसे छत्तीसगढ़ से झारखंड में एक संगठित नेटवर्क के जरिए शराब कारोबार को नियंत्रित किया गया। इस नेटवर्क में नौकरशाहों से लेकर निजी कंपनियों और राजनीतिक संपर्कों तक की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। अब सलौंकी की गिरफ्तारी के बाद यह तय माना जा रहा है कि जल्द ही कुछ और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

     

  • झारखंड के पांच राजनीतिक दलों का नहीं मिला सुराग, चुनाव आयोग की निगरानी तेज़

    The News Post4u.

    रांची: झारखंड में चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में दर्ज सात पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों में से पांच दलों का कोई ठोस पता या गतिविधि नहीं मिल पाने के कारण उनके पंजीकरण पर तलवार लटक गई है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के निर्देश पर राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने ऐसे दलों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो लंबे समय से निष्क्रिय हैं या जिनका कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है।

     

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    सुनवाई के लिए बुलाए गए थे 7 दल

    चुनाव आयोग ने इन सात दलों को 22 जुलाई 2025 को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाया था, ताकि वे अपने अस्तित्व और सक्रियता को लेकर स्थिति स्पष्ट कर सकें। सुनवाई के दौरान केवल दो दल—रांची की जनसाधारण पार्टी और झारखंड विकास दल—के प्रतिनिधि उपस्थित हुए। दोनों दलों ने आयोग को शपथ पत्र और लिखित जवाब सौंपते हुए कहा कि वे सक्रिय हैं और आगामी चुनावों में भाग लेने की तैयारी कर रहे हैं।

    इन दलों ने नहीं दिया कोई जवाब

    हालांकि शेष पांच दल—भारत विकास मोर्चा, भारतीय जनमुक्ति पार्टी, मानव मुक्ति मोर्चा, नवजवान संघर्ष मोर्चा और राष्ट्रीय मजदूर किसान प्रजातांत्रिक पार्टी—न तो निर्धारित तिथि पर सुनवाई में पहुंचे, न ही उन्होंने कोई लिखित जवाब आयोग को भेजा। आयोग ने इन्हें पहले पंजीकृत पते पर नोटिस भेजा था और उसके बाद समाचार पत्रों व सोशल मीडिया के माध्यम से भी आम सूचना जारी की गई थी, फिर भी इनसे कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

    पंजीकरण रद्द करने की प्रक्रिया की तैयारी

    इन दलों को 15 जुलाई तक शपथ पत्र और जवाब जमा करने का अंतिम मौका दिया गया था, जिसके बाद 22 जुलाई को व्यक्तिगत सुनवाई की गई। अब आयोग के पास यह विकल्प खुला है कि गैर-हाजिर दलों के खिलाफ पंजीकरण रद्द करने की अनुशंसा की जाए। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि जो दल समय पर जवाब नहीं देंगे, उन्हें निर्वाचन आयोग की पंजीकृत सूची से हटाने की सिफारिश की जाएगी।

    पारदर्शिता सुनिश्चित करने की पहल

    इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य चुनावी पारदर्शिता और मतदाता सूचना की शुद्धता बनाए रखना है। निर्वाचन आयोग चाहता है कि केवल वही राजनीतिक दल सूची में बने रहें, जो सक्रिय हैं और जिनका पता-संपर्क स्पष्ट रूप से उपलब्ध हो। निष्क्रिय और संदिग्ध दलों को हटाकर चुनावी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में यह एक अहम कदम माना जा रहा है।

  • झारखंड हाईकोर्ट को मिला नया मुख्य न्यायाधीश, जस्टिस तरलोक सिंह चौहान ने ली शपथ

    By: परवेज़ आलम.

    For The News Post4u.

    रांची – झारखंड हाईकोर्ट को सोमवार को अपना 17वां मुख्य न्यायाधीश मिल गया। हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस तरलोक सिंह चौहान ने 23 जुलाई को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से राजभवन स्थित बिरसा मंडप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। इस गरिमामयी समारोह में राज्य की प्रशासनिक, राजनीतिक और न्यायिक जगत की कई प्रतिष्ठित हस्तियों ने भाग लिया।

    शपथ समारोह बना राजभवन का खास अवसर.

    शपथग्रहण समारोह में जस्टिस चौहान के परिजनों के साथ-साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, विधानसभा अध्यक्ष रविन्द्रनाथ महतो, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी समेत राज्य सरकार के कई मंत्री, हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश और बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद थे। राज्यपाल गंगवार और मुख्यमंत्री सोरेन ने समारोह के बाद जस्टिस चौहान को पुष्पगुच्छ भेंट कर शुभकामनाएं दीं। बिरसा मंडप को इस विशेष अवसर पर भव्य ढंग से सजाया गया था।

    हिमाचल से झारखंड तक न्यायिक यात्रा.

    शिमला जिले के रोहड़ू क्षेत्र से आने वाले जस्टिस चौहान ने स्कूली शिक्षा शिमला से प्राप्त की और फिर पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ से कानून की पढ़ाई पूरी की। 1989 में उन्होंने हिमाचल प्रदेश स्टेट बार काउंसिल में बतौर अधिवक्ता नामांकन कराया और वहीं से वकालत की शुरुआत की। अपनी कड़ी मेहनत और न्यायिक दृष्टिकोण के चलते वे हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में वरिष्ठतम न्यायाधीश बने।

    झारखंड हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एम. एस. रामचंद्र राव के त्रिपुरा हाईकोर्ट में स्थानांतरण के बाद सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश पर जस्टिस तरलोक सिंह चौहान को झारखंड का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया।

    कार्यभार ग्रहण के बाद नई उम्मीदें.

    शपथ लेने के बाद जस्टिस चौहान सीधे हाईकोर्ट पहुंचे और वहां मुख्य न्यायाधीश के रूप में अपना कार्यभार ग्रहण किया। इस मौके पर झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं  ने उनका स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व में अदालत की कार्यप्रणाली में तेजी आएगी, विशेषकर लंबित मामलों की सुनवाई और रिक्त जजों की नियुक्तियों में।

    गौरतलब है कि जस्टिस तरलोक सिंह चौहान का कार्यकाल जनवरी 2026 तक रहेगा। न्यायपालिका, अधिवक्ताओं और आम जनता को अब उनसे न्यायिक प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और गति की उम्मीद है।

  • झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस तरलोक सिंह चौहान कल लेंगे शपथ

    परवेज़ आलम.

    For The News Post4u.

    रांची, 22 जुलाई : झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस तरलोक सिंह चौहान कल  सुबह 10 बजे राजभवन के बिरसा मंडप में पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे । राज्यपाल संतोष गंगवार  उन्हें शपथ दिलाएँगे । वे झारखंड हाईकोर्ट के 17वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदभार ग्रहण करेंगे।

    मंगलवार को रांची पहुंचे, हुआ भव्य स्वागत.

    जस्टिस चौहान मंगलवार को अपने परिजनों के साथ रांची पहुंचे। बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीशों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं और रजिस्ट्रार कार्यालय के अधिकारियों ने उनका भव्य स्वागत किया। इसके बाद वे होटल रेडिशन ब्लू पहुंचे, जहां उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया।

    शपथ के बाद सीधे संभालेंगे न्यायिक कार्य.

    शपथ ग्रहण समारोह के बाद जस्टिस चौहान सीधे हाईकोर्ट जाएंगे, जहां वे अपने नए पद का कार्यभार संभालेंगे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, झारखंड हाईकोर्ट के सभी न्यायाधीश, वरिष्ठ अधिकारी, अधिवक्ता और अन्य गणमान्य अतिथियों के शामिल होने की संभावना है।

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    राजभवन के बिरसा मंडप में भव्य समारोह की तैयारियां मंगलवार शाम तक पूरी कर ली गईं।

    जस्टिस तरलोक सिंह चौहान: एक परिचय.

    • जन्म: 9 जनवरी 1964, रोहड़ू तहसील, जिला शिमला (हिमाचल प्रदेश)
    • स्कूली शिक्षा: बिशप कॉटन स्कूल, शिमला
    • स्नातक: गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज, संजौली (बीए ऑनर्स)
    • कानून की पढ़ाई: पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से एलएलबी

    न्यायिक करियर.

    • 1989: हिमाचल प्रदेश बार काउंसिल में वकील के रूप में पंजीकरण
    • 2007: वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित
    • 2014 : हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त
    • 2014 : स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ
    • कई अवसरों पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की भूमिका निभा चुके हैं

    गौरवशाली इतिहास वाला झारखंड हाईकोर्ट.

    झारखंड हाईकोर्ट का इतिहास न्यायिक उत्कृष्टता से परिपूर्ण रहा है।

    • प्रथम मुख्य न्यायाधीश जस्टिस विनोद कुमार गुप्ता थे, जो बाद में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने।
    • यहां सेवा देने वाले कई मुख्य न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे, जिनमें शामिल हैं:
      • जस्टिस अल्तमश कबीर.
      • जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा.
      • जस्टिस आर. बनुमति.
      • जस्टिस अनिरुद्ध बोस.

    जस्टिस तरलोक सिंह चौहान के आने से झारखंड हाईकोर्ट को एक अनुभवी और प्रतिष्ठित न्यायविद् का नेतृत्व मिलने जा रहा है। उनके न्यायिक अनुभव और सशक्त दृष्टिकोण से राज्य की न्यायिक प्रणाली को और अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जनहितकारी बनाए जाने की उम्मीद की जा रही है।

  • झारखंड पर्यटन को मिलेगी नई रफ्तार-सुदिव्य कुमार

    केंद्रीय पर्यटन मंत्री से मुलाकात में लिए गए कई अहम फैसले.

    परवेज़ आलम.

    For The News Post4U.

    रांची /नई दिल्ली, 22 जुलाई
    झारखंड में पर्यटन विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से आज नई दिल्ली में झारखंड पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार और केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई । यह शिष्टाचार भेंट झारखंड को एक उभरते हुए पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ठोस पहल मानी जा रही है।

    बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने राज्य में पर्यटन के सर्वांगीण विकास से संबंधित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया और केंद्र सरकार से सक्रिय सहयोग का आश्वासन प्राप्त हुआ।

    बैठक में लिए गए मुख्य निर्णय.

    अशोक होटल के हस्तांतरण पर सहमति.
    रांची स्थित अशोक होटल को झारखंड सरकार को सौंपने के संबंध में सैद्धांतिक सहमति बनी है। इससे होटल क्षेत्र में राज्य सरकार की सक्रियता बढ़ेगी और स्थानीय पर्यटन व्यवसाय को बल मिलेगा।

    इको-टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा.
    स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के अंतर्गत छनडील, नेतरहाट और तेनुघाट में इको-टूरिज्म परियोजनाएं विकसित की जाएंगी, जो पर्यावरण-संवेदनशील पर्यटन को प्रोत्साहित करेंगी।

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    पर्यटन संस्थान की स्थापना.
    राज्य में IITTM मॉडल पर आधारित एक उच्च स्तरीय पर्यटन संस्थान स्थापित किया जाएगा, जो पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में युवाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराएगा।

    राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मेलों का आयोजन.
    झारखंड में पर्यटन को वैश्विक मंच देने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मेलों का संयुक्त आयोजन किया जाएगा, जिससे राज्य की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विविधताओं को व्यापक पहचान मिलेगी।

    विरासत स्थलों का संरक्षण.
    राज्य के पुरातात्विक और ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया गया। यह पहल न केवल सांस्कृतिक विरासत को संजोएगी, बल्कि इन्हें आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित करेगी।

    पर्यटन के नए युग की शुरुआत.

    बैठक के बाद यह स्पष्ट हुआ कि झारखंड को पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान दिलाने के लिए राज्य और केंद्र मिलकर ठोस प्रयास करेंगे। पर्यटन से जुड़े ये सभी प्रोजेक्ट्स न केवल झारखंड की आर्थिक संरचना को मजबूत करेंगे, बल्कि स्थानीय रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि करेंगे।

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के झारखंड दौरे को लेकर तैयारियां तेज

    मुख्य सचिव  ने दिए सुरक्षा और प्रोटोकॉल पुख्ता करने के निर्देश.

    For The News Post4u.

    रांची : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू  के झारखंड के  दो दिवसीय दौरे को लेकर प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। मुख्य सचिव अलका तिवारी ने मंगलवार को देवघर, रांची और धनबाद के उपायुक्तों और वरिष्ठ पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर सुरक्षा से लेकर कार्यक्रम संचालन तक हर पहलू पर विस्तार से चर्चा की और संबंधित विभागों को जिम्मेदारी सौंपी। 31 जुलाई से 1 अगस्त तक राष्ट्रपति झारखंड मे रहेंगी ।

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    मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि राष्ट्रपति के झारखंड प्रवास के दौरान हर छोटी-बड़ी व्यवस्था को समय रहते दुरुस्त कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि देवघर में सावन माह के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए कांवरिया पथ को बिना प्रभावित किए राष्ट्रपति के एयरपोर्ट से एम्स तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित कर लिया गया है।

    गौरतलब है कि राष्ट्रपति मुर्मू का पूर्व निर्धारित झारखंड दौरा 10-11 जून को अपरिहार्य कारणों से स्थगित हो गया था। उस समय भी तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने राष्ट्रपति के झारखंड दौरे को “यादगार और गरिमामय” बनाने का निर्देश दिया था, जिसे इस बार भी दोहराया गया।

    कार्यक्रमों का ब्यौरा:

    • राष्ट्रपति देवघर में एम्स के पहले दीक्षांत समारोह में भाग लेंगी।
    • इसके बाद वे धनबाद स्थित IIT (ISM) के दीक्षांत समारोह में भी शिरकत करेंगी।
    • रांची में भी उनके कुछ निर्धारित कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।

    मुख्य सचिव ने राष्ट्रपति के आगमन से लेकर प्रस्थान तक की हर व्यवस्था के लिए स्पष्ट जवाबदेही तय की।

    • वाणिज्य कर विभाग के सचिव अमिताभ कौशल और आईजी अखिलेश कुमार झा को मुख्य नोडल अधिकारी बनाया गया है।
    • सूचना एवं जनसंपर्क विभाग को पब्लिक एड्रेस सिस्टम और मीडिया व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गई है।

    प्रमुख तैयारियों पर हुई चर्चा:

    • राष्ट्रपति के कार्यक्रम स्थलों पर मंच व्यवस्था, राष्ट्रीय गान, रेड कार्पेट और बुके, कारकेड और आउट राइडर्स,
    • फोटोग्राफरों के लिए खुले वाहन, बैगेज वैन, छाता, ध्वनि विस्तारक यंत्र,
    • प्रमुख अतिथियों की सूची, मंच से बोलने वालों की सूची,
    • देवघर एयरपोर्ट से एम्स तक की सुरक्षा व्यवस्था,
    • चिकित्सा सुविधा, पेयजल, शौचालय, अग्निशमन व्यवस्था,
    • राष्ट्रपति के साथ आनेवाले अतिथियों के ठहराव और भोजन जैसी व्यवस्थाओं पर विस्तार से समीक्षा की गई।

    देवघर, रांची और धनबाद के उपायुक्तों ने भी अपने-अपने जिलों में राष्ट्रपति के संपूर्ण प्रवास के लिए ब्लूप्रिंट प्रस्तुत किया। उन्होंने यह आश्वासन दिया कि राष्ट्रपति के प्रत्येक कार्यक्रम प्रोटोकॉल के अनुरूप और शिष्टाचार पूर्ण वातावरण में संपन्न होंगे।

    मुख्य सचिव ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने का निर्देश दिया ताकि राष्ट्रपति का यह दौरा ना केवल सुरक्षित और सुव्यवस्थित हो, बल्कि राज्य की प्रतिष्ठा को भी ऊंचाई दे सके।

  • झारखंड में कोचिंग संस्थानों पर लगेगी लगाम, सोरेन सरकार ला रही सख्त नियंत्रण कानून

    For The News Post4u.

    रांची: झारखंड में बेलगाम तरीके से खुलते जा रहे कोचिंग संस्थानों पर अब सरकार शिकंजा कसने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार आगामी मानसून सत्र 2025 में एक नया कानून लेकर आ रही है, जिसका नाम है – झारखंड कोचिंग सेंटर (कंट्रोल एंड रेगुलेशन) बिल-2025। इस कानून के लागू होते ही राज्य में संचालित कोचिंग संस्थानों को तय मापदंडों और नियमों के अधीन आना अनिवार्य हो जाएगा।

    छात्रों को मिलेगा अधिकार, संस्थानों की मनमानी पर लगेगी रोक.

    यह प्रस्तावित कानून 50 से अधिक छात्रों वाले कोचिंग संस्थानों पर लागू होगा। इसके तहत:

    • प्रत्येक छात्र को न्यूनतम एक वर्ग मीटर जगह देना अनिवार्य होगा।
    • यदि कोई संस्थान कोर्स अधूरा छोड़कर या समय से पहले समाप्त करता है, या बिना पूर्व सूचना के संस्थान को बंद करता है, तो उस पर वित्तीय दायित्वों को पूरा करने की कानूनी बाध्यता होगी – जिसमें छात्रों की फीस लौटाना, शिक्षकों के वेतन का भुगतान और अन्य देनदारियां शामिल होंगी।

    भ्रामक प्रचार और झूठे विज्ञापनों पर लगेगी लगाम.

    बिल में कोचिंग संस्थानों के झूठे दावों और भ्रामक विज्ञापनों पर भी रोक लगाने के लिए कई सख्त प्रावधान जोड़े गए हैं। अब कोई संस्थान उस छात्र का नाम और फोटो अपने प्रचार में नहीं दिखा सकेगा जो वास्तव में उसके संस्थान का छात्र नहीं रहा हो।

    आईडी कार्ड सिस्टम होगा लागू: पारदर्शिता की ओर कदम.

    बिल के अनुसार, एक सुदृढ़ पहचान प्रणाली (ID Card System) लागू की जाएगी:

    1. सीसीआर कार्ड (CCR – Coaching Center Registration): प्रत्येक संस्थान के लिए अनिवार्य।
    2. सीईडी कार्ड (CED – Coaching Enrolled Data): हर छात्र को मिलेगा, जिससे सरकार को पता रहेगा कि कौन-सा छात्र किस संस्थान में पढ़ रहा है।
    3. सीटीआर कार्ड (CTR – Coaching Tutor Registration): हर ट्यूटर को मिलेगा, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि एक शिक्षक एक समय में एक ही संस्थान में पढ़ाए।
    4. सीएमसी कार्ड (CMC – Coaching Mental Counselor): उन संस्थानों में अनिवार्य होगा जहां छात्र संख्या 1000 से अधिक है। ऐसे संस्थानों को एक मनोचिकित्सक नियुक्त करना अनिवार्य होगा।

    अभिभावकों की सहमति अनिवार्य.

    यदि किसी छात्र की उम्र 18 वर्ष से कम है, तो कोचिंग संस्थान में प्रवेश के समय उसके माता-पिता या अभिभावक की अनिवार्य उपस्थिति और लिखित सहमति जरूरी होगी।

    कोचिंग संस्थानों को भवन उपविधि-2016 के तहत लाया जाएगा.

    अब सभी कोचिंग संस्थानों को झारखंड भवन उपविधि-2016 के दायरे में लाया जाएगा। इसके तहत:

    • स्वच्छ शौचालय
    • शुद्ध पेयजल
    • हवादार कक्ष
    • आपात निकास की व्यवस्था
      इन सभी सुविधाओं को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराना होगा। यह नियम झारखंड नगरपालिका अधिनियम 2011 की धारा 434 के तहत अधिसूचित किया गया है।

    फ्रैंचाइजी और फ्रैंचाइज़र भी आएंगे कानून के घेरे में.

    सरकार का यह कानून कोचिंग उद्योग में प्रचलित फ्रैंचाइज़र और फ्रैंचाइजी मॉडल पर भी सख्ती करेगा। हाल ही में राजधानी रांची में एक प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान के अचानक बंद हो जाने के कारण छात्रों और अभिभावकों को शैक्षिक, आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। अब ऐसे मामलों में सरकार दोनों पक्षों पर कानूनी कार्रवाई कर सकेगी।

    शिक्षा के क्षेत्र में अनुशासन और जवाबदेही की ओर कदम.

    यह नया कानून झारखंड में कोचिंग संस्थानों को प्रभावी निगरानी, पारदर्शिता, छात्र कल्याण और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में यह विधेयक छात्रों के हितों की रक्षा करेगा और शिक्षा को एक व्यवस्थित, सुरक्षित और जिम्मेदार प्रक्रिया बनाएगा।

    अब राज्य में शिक्षा के नाम पर मनमानी, शोषण और भ्रम फैलाने वालों को जवाब देना होगा — झारखंड सरकार अब तैयार है।

     

  • झारखंड : रहस्यमयी खदानों की दुनिया को अब नजदीक से देखेंगे पर्यटक

    पहली बार शुरू होगा माइनिंग टूरिज्म.

    By: परवेज़ आलम.

    For The News Post4u.

    रांची : झारखंड सरकार ने देश में पहली बार एक अनोखी और साहसिक पहल की शुरुआत की है। अब तक बंद दरवाज़ों के पीछे रही खदानों की दुनिया आम जनता के लिए खोली जा रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुवाई में राज्य ने माइनिंग टूरिज्म (खनन पर्यटन) की शुरुआत की है, जो न सिर्फ राज्य की औद्योगिक पहचान को मजबूत करेगा, बल्कि पर्यटन क्षेत्र को भी नया आयाम देगा।

    खनन क्षेत्र अब बनेगा दर्शनीय स्थल.

    इस योजना के तहत राज्य सरकार और कोल इंडिया लिमिटेड की अनुषंगी कंपनी सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) के बीच एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह साझेदारी झारखंड पर्यटन विकास निगम (JTDC) और CCL के बीच हुई है। प्रारंभिक तौर पर यह परियोजना उत्तर उरीमारी खदान (North Urimari Mines) से शुरू की जाएगी।

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि इस पहल से लोगों को खदानों की कार्यप्रणाली, खनिज संपदा और श्रमिकों की मेहनत को नजदीक से देखने और समझने का मौका मिलेगा। उन्होंने यह फैसला हाल ही में स्पेन के गावा संग्रहालय के दौरे के बाद लिया, जहां उन्होंने प्राचीन खनन तकनीकों को देखा और उनसे प्रेरित हुए।

    क्या होगा इस खनन पर्यटन में खास.

    • पर्यटन संचालन: JTDC पर्यटकों की ऑनलाइन बुकिंग करेगा। सप्ताह में दो दिन पर्यटन की सुविधा मिलेगी। प्रत्येक ग्रुप में 10 से 20 पर्यटक शामिल हो सकेंगे।
    • सुरक्षा और निर्देश: पर्यटकों को खदान में प्रवेश से पहले CCL के सुरक्षा प्रोटोकॉल और स्वास्थ्य मानकों का पालन करना होगा। अंतिम अनुमति CCL द्वारा दी जाएगी।
    • गाइड सुविधा: CCL खदान की कार्यशैली, तकनीकी प्रक्रिया और सुरक्षा उपायों को समझाने के लिए प्रशिक्षित गाइड उपलब्ध कराएगा।
    • समझौते की अवधि: यह MoU पांच वर्षों के लिए लागू रहेगा, जिसे आगे पांच साल और बढ़ाया जा सकता है।
    • विस्तार की योजना: भविष्य में अन्य खदानों को भी इस पर्यटन सर्किट में जोड़ा जाएगा।

    खान पर्यटन के पीछे सरकार का मकसद.

    पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा, “झारखंड खनन राज्य के रूप में जाना जाता है। अब हम उस पहचान को एक नए रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। खनन पर्यटन आम जनता, छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए एक ज्ञानवर्धक अनुभव बनेगा। इससे न केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी बल्कि राज्य की औद्योगिक विरासत और ऊर्जा इतिहास को भी वैश्विक मंच पर पहचान मिलेगी।”

    उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में सरकार भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) के साथ मिलकर एक और माइनिंग टूरिज्म ज़ोन विकसित करने की योजना पर काम कर रही है।

    समारोह में बड़ी भागीदारी.

    इस ऐतिहासिक अवसर पर CCL के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर निलेंदु कुमार सिंह, JTDC के एमडी प्रेम रंजन, पर्यटन निदेशक विजया जाधव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए सरकार और CCL के बीच तीन दौर की मैराथन बैठकें हुईं, जिसके बाद यह समझौता साकार हुआ।

    राज्य को मिलेंगे बहुआयामी लाभ.

    झारखंड खनिज संसाधनों से भरपूर राज्य है। देश के कुल खनिज भंडार का करीब 40% हिस्सा यहीं स्थित है। ऐसे में यह पहल राज्य को सिर्फ पर्यटन के क्षेत्र में ही नहीं, शिक्षा, रोजगार, सांस्कृतिक धरोहर और उद्योग के क्षेत्र में भी लाभ पहुंचाएगी।


    माइनिंग टूरिज्म के जरिए झारखंड अब सिर्फ ‘खनन राज्य’ नहीं, बल्कि ‘टूरिस्ट फ्रेंडली खनन राज्य’ बनने की ओर बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी सरकार का यह कदम देशभर में अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।

    अगर आप रहस्यमयी खदानों की दुनिया को नजदीक से देखना चाहते हैं, तो झारखंड अब आपके स्वागत के लिए तैयार है।