Category: RANCHI

  • एसपी हत्याकांड में हाई कोर्ट के जजों में मतभेद ! एक ने किया बरी, दूसरे जस्टिस ने फांसी की सजा को सही माना

    –अब चीफ जस्टिस तय करेंगे अगली सुनवाई.

    रांची, झारखंड: झारखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 2013 में पाकुड़ के तत्कालीन एसपी अमरजीत बलिहार और अन्य पांच पुलिसकर्मियों की हत्या मामले में दोषी ठहराए गए दो नक्सलियों की फांसी की सजा पर अलग-अलग निर्णय सुनाया है। अब यह मामला मुख्य न्यायाधीश को सौंपा जाएगा, जो इसे किसी अन्य पीठ को भेज सकते हैं।

    निचली अदालत ने सुनाई थी फांसी की सजा.

    6 सितंबर 2018 को दुमका के चतुर्थ जिला एवं सत्र न्यायाधीश तौफीकुल हसन की विशेष अदालत ने प्रवीर मुर्मू उर्फ ‘प्रवीर दा’ और सनातन बास्की उर्फ ‘ताला दा’ को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। अदालत ने इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ की श्रेणी का मामला माना था। दोषियों को हत्या, आपराधिक साजिश और आर्म्स एक्ट के तहत सजा दी गई थी।

    दोषियों ने इस निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उन्होंने कहा कि निचली अदालत ने बिना ठोस सबूतों के उन्हें दोषी करार दिया।

    हाईकोर्ट के जजों मे मतभेद.

    जस्टिस आर मुखोपाध्याय का निर्णय-दोषियों को संदेह का लाभ.

    जस्टिस रोंगोन मुखोपाध्याय ने अभियुक्तों को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का पक्ष लिया। उनके अनुसार –

    • गवाहों की पहचान प्रक्रिया (टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड) में खामियां थीं।
    • अभियोजन पक्ष के कई गवाहों के बयान आपस में मेल नहीं खा रहे थे।
    • घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था और फोरेंसिक साक्ष्य भी अपर्याप्त थे।
    • घायल पुलिसकर्मी बबलू मुर्मू ने भी आरोपियों की पहचान करने से इनकार कर दिया था।

    उनका मानना था कि अभियोजन पक्ष केवल संदेह के आधार पर दोष सिद्ध करने का प्रयास कर रहा था, जबकि अदालत में दोष सिद्ध करने के लिए संदेह से परे प्रमाण आवश्यक हैं।

    जस्टिस संजय प्रसाद का निर्णय: सजा कायम रखने का समर्थन.

    वहीं दूसरी ओर, जस्टिस संजय प्रसाद ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई मृत्युदंड की सजा को उचित ठहराया। उनके अनुसार –

    • अभियोजन ने घटना के दो प्रत्यक्षदर्शी गवाहों को प्रस्तुत किया, जो स्वयं हमले में घायल हुए थे।
    • अभियुक्त सनातन बास्की के इकबालिया बयान में हमले की पूर्व योजना का विवरण था।
    • मेडिकल रिपोर्ट और परिस्थितिजन्य साक्ष्य अभियोजन के पक्ष में थे।
    • यह हमला सुनियोजित, क्रूर और राज्य विरोधी था।

    जस्टिस प्रसाद ने कहा कि यह ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ श्रेणी का अपराध है और इसमें कोई नरमी नहीं बरती जा सकती।

    मुआवजे और पुनर्वास का निर्देश.

    जस्टिस संजय प्रसाद ने अपने फैसले में झारखंड सरकार को यह आदेश भी दिया:

    • तत्कालीन एसपी अमरजीत बलिहार के परिजनों को 2 करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाए।
    • उनके पुत्र या पुत्री को डीएसपी या डिप्टी कलेक्टर के पद पर नियुक्त किया जाए, साथ ही आवश्यकता पड़ने पर आयु सीमा में छूट भी दी जाए।
    • शहीद हुए अन्य पांच पुलिसकर्मियों के परिजनों को 50-50 लाख रुपये मुआवजा और उनकी योग्यता के अनुसार पुलिस विभाग में नियुक्ति दी जाए।

    इस आदेश की प्रति राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी समेत संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    2013 मे हुआ था भीषण हमला.

    2 जुलाई 2013 को पाकुड़ के एसपी अमरजीत बलिहार दुमका में एक चुनावी बैठक से लौट रहे थे, तभी लिट्टीपाड़ा के समीप करीब 30 नक्सलियों ने घात लगाकर पुलिस दल पर हमला कर दिया था। इस हमले में एसपी बलिहार सहित छह पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी। नक्सली मौके से दो AK-47, चार INSAS राइफलें, बुलेटप्रूफ जैकेट और मोबाइल भी लूट ले गए थे।

    आगे की कार्रवाई- नई बेंच तय करेगी निर्णय.

    दोनों जजों के भिन्न मत के कारण अब यह मामला झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भेजा जाएगा। वे तय करेंगे कि इस अपील की सुनवाई के लिए कौन सी बेंच गठित की जाए।

  • 3 अगस्त को झारखंड, बिहार समेत पांच राज्यों में नक्सली बंद का ऐलान

     — बढ़ते ऑपरेशनों के विरोध में नक्सलियों का प्रतिरोध

    By: परवेज़ आलम

    For The News Post4u.

    गिरिडीह/रांची: झारखंड और बिहार समेत पांच राज्यों में एक बार फिर नक्सली बंद का ऐलान किया गया है। प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) ने 3 अगस्त 2025 को झारखंड, बिहार, उत्तरी छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और असम में बंद का आह्वान किया है। बंद का उद्देश्य नक्सल ऑपरेशनों और लगातार हो रही मुठभेड़ों के विरोध में “जनविरोधी कार्रवाइयों” के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर करना है।

    माओवादी संगठन का आरोप और बंद का मकसद.

    भाकपा (माओवादी) के पूर्वी रीजनल ब्यूरो के प्रवक्ता संकेत ने प्रेस रिलीज जारी कर इस बंद की जानकारी दी। बयान में कहा गया है कि ऑपरेशन कगार के तहत की जा रही “फासीवादी कार्रवाई” और विवेक उर्फ प्रयाग मांझी सहित आठ माओवादी कार्यकर्ताओं की हत्या का प्रतिशोध लेने के लिए यह बंद बुलाया गया है। संगठन का आरोप है कि राज्य और केंद्र सरकारें गरीब, आदिवासी और वंचित वर्गों को कुचलने के लिए जबरन सैन्य कार्रवाई कर रही हैं।

    जगह-जगह स्मृति सभा का भी ऐलान.

    नक्सलियों ने न सिर्फ बंद का ऐलान किया है, बल्कि अपने मारे गए कैडरों की स्मृति में देशभर में स्मृति सभाएं आयोजित करने की योजना भी बनाई है। इन सभाओं में अंडरग्राउंड समर्थकों को भाग लेने और जनसंपर्क बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि नक्सली संगठन इस बंद के माध्यम से एक बार फिर अपने खोते प्रभाव को पुनः स्थापित करने की कोशिश में है।

    पुलिस का प्रहार: 6 महीने में 17 नक्सली मारे गए, 197 गिरफ्तार.

    इस साल के पहले छह महीनों में झारखंड पुलिस और केंद्रीय बलों ने माओवादियों पर बड़ा शिकंजा कसते हुए 17 नक्सलियों को मुठभेड़ में ढेर कर दिया है। वहीं 197 नक्सलियों को गिरफ्तार भी किया गया है। कई इनामी माओवादी या तो मारे गए हैं या जेल पहुंच चुके हैं।

    कुछ प्रमुख मुठभेड़ की घटनाएं:

    • 21 जनवरी 2025: बोकारो जिले में एरिया कमांडर शांति देवी और कदर मनोज टुडू को मार गिराया गया।
    • 29 जनवरी 2025: चाईबासा में जोनल कमांडर संजय गंझू और एक करोड़ के इनामी नक्सली एनाल्डा की महिला मित्र हेमंत मांगियां को सुरक्षा बलों ने ढेर किया।
    • जनवरी 2025: रामगढ़ में आतंक का पर्याय बने राहुल तुरी को भी मार गिराया गया।
    • 21 अप्रैल 2025: झारखंड पुलिस के इतिहास का सबसे बड़ा एनकाउंटर, जिसमें एक साथ आठ नक्सली ढेर हुए, जिनमें सबसे चर्चित नाम था एक करोड़ के इनामी विवेक उर्फ प्रयाग मांझी का।
    • जुलाई 2025: बोकारो में पांच लाख के इनामी नक्सली कुंवर को भी मार गिराया गया।

    इन सभी कार्रवाइयों ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया है कि राज्य की सुरक्षा एजेंसियां माओवादियों के खिलाफ सख्त मोड में हैं और अब संगठन बैकफुट पर है।

    सुरक्षा एजेंसियों के लिए अलर्ट.

    3 अगस्त को प्रस्तावित बंद को देखते हुए पुलिस और खुफिया एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं। रेलवे, बस अड्डे, बाजार, खनन क्षेत्र और सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पिछली बार की तरह इस बार भी नक्सली हिंसा की आशंका को देखते हुए अतिसंवेदनशील जिलों में ड्रोन और सैटेलाइट निगरानी की व्यवस्था की जा रही है।

    जहां एक ओर माओवादी संगठन पुलिस कार्रवाई के खिलाफ आवाज़ उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा बलों का दावा है कि उनका उद्देश्य केवल आम लोगों की सुरक्षा और शांति बहाल करना है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि नक्सली बंद को कितना समर्थन मिल पाता है और क्या राज्य प्रशासन उस पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रख पाता है।

  • वायरल वीडियो पर झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी की सफाई: “बेटे कृष को राजनीतिक साजिश के तहत घसीटा जा रहा है”

    By: परवेज़ आलम.

    For The News Post4u.

    रांची, 19 जुलाई 2025
    झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के बेटे कृष अंसारी इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो को लेकर सुर्खियों में हैं। वीडियो में कृष अंसारी राजधानी रांची के प्रमुख अस्पतालों – रिम्स (RIMS) और पारस हॉस्पिटल में मरीजों से बातचीत करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि कृष अस्पतालों का “निरीक्षण” कर रहे थे, जिससे सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    क्या है वायरल वीडियो का मामला?

    वायरल हो रहे इस वीडियो में कृष अंसारी कुछ युवकों के साथ अस्पतालों में मरीजों से बातचीत करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में उनके साथ मौजूद युवक कहते सुने जा सकते हैं – “ये मंत्री जी के बेटे हैं, अपनी समस्याएं बताइए।” इसके बाद से ही कृष पर “नेतागिरी” और “बिना अधिकार निरीक्षण” के आरोप लगने लगे।

    हालांकि, वीडियो की सत्यता की स्वतंत्र पुष्टि किसी न्यूज माध्यम द्वारा नहीं की गई है, लेकिन मामला तूल पकड़ता देख अब स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने खुद X (पूर्व ट्विटर) पर बयान जारी कर साफ-साफ जवाब दिया है।

    मंत्री इरफान अंसारी की प्रतिक्रिया: “तथ्यों को तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है”

    अपने आधिकारिक पोस्ट में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा:

    “सच्चाई को समझें। मेरे बेटे कृष को बेवजह और दुर्भावनापूर्ण तरीके से एक झूठे विवाद में घसीटा जा रहा है। कुछ मीडिया संस्थानों और राजनीतिक स्वार्थी तत्वों द्वारा इस विषय को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।”

    मंत्री ने स्पष्ट किया कि कृष किसी सरकारी निरीक्षण या राजनीतिक उद्देश्य से अस्पताल नहीं गया था। उन्होंने बताया कि कृष रिम्स में अपने शिक्षक आदित्य कुमार झा के बीमार पिता का हालचाल लेने गया था।

    “मानवीय आधार पर की गई मदद को राजनीति का रंग दिया जा रहा”

    डॉ. इरफान अंसारी ने आगे बताया कि पिछली रात कुछ आदिवासी परिवार उनके सरकारी आवास पर मदद के लिए पहुंचे थे, जो रिम्स में इलाज के लिए परेशान थे। उनके आग्रह पर कृष मानवीय भाव से उनकी मदद के लिए अस्पताल गया, ताकि वे आवश्यक चिकित्सा सहायता प्राप्त कर सकें।

    उन्होंने यह भी जोड़ा कि संयोग से रिम्स में भर्ती एक वरिष्ठ पत्रकार के परिजन को भी चिकित्सकीय सहयोग की ज़रूरत थी, और कृष ने उन्हें भी पूरी संवेदनशीलता से सहयोग किया।

    “सेवा करना अपराध कब से हो गया?” – इरफान अंसारी

    मंत्री ने वीडियो के राजनीतिकरण पर गहरी नाराज़गी जताते हुए कहा:

    “आज जिस तरह से एक सामान्य मानवीय कर्तव्य को तोड़-मरोड़ कर राजनीति का रंग चढ़ाया जा रहा है, वह दुखद और चिंताजनक है। कृष एक होनहार छात्र है, जो छुट्टियों में रांची आया है। वह पूर्व सांसद फुरकान अंसारी का पोता है, जिन्होंने झारखंड के अलग राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। क्या ऐसे परिवार में सेवा की भावना होना कोई अपराध है?”

    विपक्ष ने उठाए सवाल, मंत्री ने ठहराया ‘राजनीतिक साजिश’

    इस पूरे विवाद को लेकर विपक्ष के कुछ नेताओं ने सरकार पर प्रशासनिक नियमों के उल्लंघन और राजनीतिक परिवारवाद का आरोप लगाया है। वहीं, इरफान अंसारी ने इसे साफ तौर पर एक राजनीतिक साजिश और चरित्र हनन का प्रयास बताया है।

    वायरल वीडियो के बहाने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के परिवार को लेकर उठे विवाद ने झारखंड की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। जहां एक ओर मंत्री इसे सेवा भावना बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ वर्ग इसे शक्ति का दुरुपयोग कहा जा रहा है ।

    अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मामला राजनीतिक बहस तक सीमित रहता है या प्रशासनिक जाँच का विषय बनता है।

  • रांची, जमशेदपुर और धनबाद में मेट्रो रेल परियोजना के लिए केंद्र को भेजा गया प्रस्ताव

    –हेमंत सरकार की बड़ी पहल.

    By: परवेज़ आलम.

    For The News Post4u.

    रांची, 19 जुलाई 2025:
    झारखंड सरकार ने राज्य के तीन प्रमुख शहरों – रांची, जमशेदपुर और धनबाद – में मेट्रो रेल परियोजना शुरू करने की दिशा में अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा दिया है, जिससे झारखंड को आधुनिक और टिकाऊ शहरी परिवहन व्यवस्था मिल सके।

    पूर्वी क्षेत्रीय परिषद में रखा गया था एजेंडा.

    10 जुलाई को रांची में आयोजित 27वीं पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में इस मेट्रो रेल परियोजना का औपचारिक प्रस्ताव रखा। इसके बाद राज्य के  नगर विकास विभाग ने प्रस्ताव को केंद्रीय शहरी विकास एवं आवास मंत्री मनोहर लाल खट्टर और मंत्रालय के सचिव को भेज दिया है।

    तीन शहरों में मेट्रो से होगी शुरुआत.

    फिलहाल परियोजना का दायरा रांची, जमशेदपुर और धनबाद तक सीमित है, लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की दीर्घकालिक योजना है कि झारखंड के सभी पांच प्रमंडलीय शहरों तक मेट्रो सेवा का विस्तार किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा है कि , “यह मेट्रो रेल परियोजना झारखंड की नई विकास गाथा की नींव रखेगी और राज्य को आधुनिक परिवहन व्यवस्था से जोड़ेगी।”

     पूर्ववर्ती सरकारों की आलोचना.

    JMM  प्रवक्ता  ने  पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि “झारखंड में पहले कभी ऐसी विकास परियोजनाओं को लेकर केंद्र के पास गंभीरता से प्रस्ताव नहीं भेजे जाते थे। देश के दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों की तरह झारखंड को भी अब आधारभूत संरचना में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।”

    हेमंत सरकार ने पहली बार इस दिशा में ठोस पहल करते हुए मेट्रो जैसी परियोजना की विस्तृत योजना बनाई और केंद्र को सौंपा है।

    क्या है प्रस्ताव में खास?

    नगर विकास विभाग द्वारा भेजे गए प्रस्ताव में केंद्र से तीन प्रमुख मांगें की गई हैं:

    1. मेट्रो परियोजना की फिजिबिलिटी स्टडी (संभवता अध्ययन)
    2. सर्वेक्षण और तकनीकी मूल्यांकन
    3. विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के लिए सहयोग

    इसका उद्देश्य है कि केंद्र सरकार शीघ्र अनुमोदन दे ताकि इन शहरों में मेट्रो परियोजना की औपचारिक शुरुआत की जा सके।

    झारखंड के लिए मेट्रो क्यों है जरूरी?

    रांची, जमशेदपुर और धनबाद जैसे शहरों में बढ़ती जनसंख्या और ट्रैफिक के दबाव को देखते हुए मेट्रो सेवा न केवल परिवहन व्यवस्था को सुगम बनाएगी, बल्कि यह शहरी क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर, आर्थिक गतिविधियों में तेजी और पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगी।

    हेमंत सरकार का यह कदम झारखंड को 21वीं सदी की बुनियादी संरचना से जोड़ने की दिशा में एक दूरदर्शी प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

  • झारखंड पुलिस का रिपोर्ट कार्ड: माओवादी, साइबर और संगठित अपराध पर निर्णायक कार्रवाई, छह महीनों में दिखा असर

    रांची | राज्य ब्यूरो | 18 जुलाई 2025

    झारखंड पुलिस ने राज्य में माओवाद, साइबर ठगी, संगठित अपराध और मादक पदार्थ तस्करी जैसे अपराधों के खिलाफ बीते छह महीनों (जनवरी से जून 2025) में प्रभावी कार्रवाई कर अहम उपलब्धियां दर्ज की हैं। शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय में आईजी अभियान डॉ. माइकल राज एस. ने इस छः माह की उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड मीडिया के सामने प्रस्तुत किया।

    ▶ माओवादियों पर शिकंजा, बड़ी कार्रवाइयां.

    आईजी ने बताया कि राज्य में अब केवल 100 माओवादी-उग्रवादी ही सक्रिय बचे हैं, जिनमें 75 की मौजूदगी सारंडा (चाईबासा) क्षेत्र में है। बाकी 25 माओवादी अन्य जिलों में फैले हैं।

    इन छह महीनों में:

    • 197 माओवादियों को गिरफ्तार किया गया।
    • 10 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया।
    • 17 माओवादी मुठभेड़ों में मारे गए, जिनमें एक करोड़ के इनामी प्रयाग मांझी, अरविंद यादव, साहेब राम मांझी, विनय गंझू और जेजेएमपी प्रमुख पप्पू लोहरा जैसे शीर्ष नेता शामिल हैं।
    • 113 हथियार बरामद हुए, जिनमें 31 हथियार पुलिस से लूटे गए थे।

    राज्य के कई माओवादी प्रभावित क्षेत्रों—जैसे पारसनाथ, बूढ़ा पहाड़, बुंडू-तमाड़ और चतरा-गया जोन को उग्रवाद मुक्त घोषित कर दिया गया है। उग्रवाद प्रभावित जिलों की संख्या घटकर 9 रह गई है, जिनमें मुख्य रूप से चाईबासा और लातेहार शामिल हैं।

    ▶ साइबर अपराध पर सख्त कार्रवाई.

    जनवरी से जून 2025 तक साइबर अपराध पर पुलिस ने खास ध्यान दिया:

    • 620 केस दर्ज किए गए, जिनमें 767 साइबर अपराधी गिरफ्तार हुए।
    • 54.35 लाख रुपये नकद, 1664 सिम कार्ड, 1283 मोबाइल, 135 एटीएम कार्ड, और कई वाहन जब्त किए गए।
    • साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर 11,910 शिकायतें दर्ज हुईं।
    • पुलिस ने 15.90 करोड़ रुपये फ्रीज किए और कोर्ट के माध्यम से 83.84 लाख रुपये पीड़ितों को वापस दिलवाए।

    ▶ मादक पदार्थों के विरुद्ध अभियान.

    मई 2025 तक पुलिस ने 389 केस दर्ज कर 393 आरोपियों को जेल भेजा। जब्त किए गए मादक पदार्थों का बाजार मूल्य करीब 20.44 करोड़ रुपये आंका गया:

    • 553 किलो गांजा,
    • 66 किलो अफीम,
    • 2.49 किलो ब्राउन शुगर,
    • 9950 किलो डोडा,
    • 7925 टैबलेट्स शामिल हैं।

    ▶ संगठित अपराध और आतंकवाद के खिलाफ सख्ती.

    झारखंड पुलिस की एंटी टेररिज्म स्क्वाड (ATS) और अन्य इकाइयों ने चार प्रमुख संगठित आपराधिक गिरोहों पर कार्रवाई करते हुए:

    • 12 अपराधियों को गिरफ्तार किया।
    • जिनमें पांडेय गिरोह, अमन साहू गिरोह, सुजीत सिन्हा गिरोह, और अमन श्रीवास्तव गिरोह के सदस्य शामिल थे।
    • चार हथियार और 21 कारतूस जब्त किए गए।

    धनबाद से प्रतिबंधित आतंकी संगठन हिज्ब उत तहरीर के पांच सक्रिय सदस्य भी गिरफ्तार किए गए।

    ▶ पुलिस कल्याण और प्रोन्नति में प्रगति.

    • झारखंड पुलिस सहायता एवं कल्याण कोष से 622 परिवारों को ₹1.67 करोड़ की मदद दी गई।
    • 108 आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति मिली।
    • 64 पुलिस इंस्पेक्टर को डीएसपी, और 9 एएसआई को सब-इंस्पेक्टर रैंक में प्रोन्नति दी गई।

    ▶ खेल में भी पुलिस का परचम.

    • झारखंड पुलिस को राष्ट्रीय स्तर पर एक गोल्ड, चार सिल्वर और कई ब्रॉन्ज मेडल प्राप्त हुए।
    • कोच्चि में ऑल इंडिया पुलिस बैडमिंटन व टेबल टेनिस प्रतियोगिता में 5 कांस्य पदक।
    • 38वें नेशनल गेम्स (उत्तराखंड) में 2 स्वर्ण, 1 रजत और 1 कांस्य पदक पुलिस खिलाड़ियों ने झटके।

    आईजी डॉ. माइकल ने कहा कि यह रिपोर्ट झारखंड पुलिस की प्रतिबद्धता, सक्षमता और सुधार की दिशा में जारी प्रयासों का प्रमाण है। पुलिस विभाग का फोकस आगे भी अपराधियों पर नकेल कसने और जनता को सुरक्षित माहौल देने पर रहेगा।

     

  • नगर निकाय चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट सख्त : सरकार पर संवैधानिक तंत्र को कुचलने का आरोप, मुख्य सचिव को किया तलब

    By : परवेज़ आलम.

    For The News Post4u.

    रांची ब्यूरो | 18 जुलाई 2025

    झारखंड में नगर निकाय चुनाव में लगातार हो रही देरी को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। जस्टिस आनंद सेन की एकल पीठ ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान सरकार पर न्यायालय के आदेश की अवहेलना का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य प्रशासन लोकतंत्र की मूल भावना और कानून के शासन (Rule of Law) का गला घोंट रहा है।

    अदालत ने इस मामले में राज्य के मुख्य सचिव को 25 अगस्त 2025 को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है ताकि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जा सके। इस दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार के रवैये को “जानबूझकर टालमटोल करने वाला और गैर-जिम्मेदार” बताया।

    ❖ अदालत की तीखी टिप्पणियां:

    सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा:

    “राज्य सरकार ने न्यायालय के स्पष्ट आदेश की अवहेलना करते हुए संवैधानिक तंत्र को ठप्प कर दिया है। यह न केवल अदालत की अवमानना है, बल्कि यह लोकतंत्र और विधिसम्मत शासन के खिलाफ एक गंभीर हमला है।”

    ❖ मुख्य सचिव को अवमानना का नोटिस:

    पूर्व पार्षद रोशनी खलखो की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि सरकार ने पहले खुद चार महीने में चुनाव कराने की गारंटी दी थी, लेकिन वह मियाद भी खत्म हो चुकी है। अब सरकार यह तर्क दे रही है कि राज्य चुनाव आयोग से मतदाता सूची नहीं मिली है, जबकि आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि 25 मार्च से राज्य चुनाव आयुक्त का पद रिक्त है, जिसके कारण सूची जारी नहीं हो सकी।

    इस पर अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा:

    “जब चुनाव आयुक्त की नियुक्ति राज्य सरकार की जिम्मेदारी है, तो नियुक्ति में देरी क्यों? यह अदालत के आदेश की अवमानना का एक नायाब तरीका है।”

    ❖ सरकार का रवैया लोकतंत्र विरोधी: याचिकाकर्ता.

    याचिकाकर्ता के वकील विनोद सिंह ने कहा कि यह स्पष्ट है कि राज्य सरकार चुनाव प्रक्रिया में जानबूझकर देरी कर रही है। इससे स्थानीय निकायों का कामकाज प्रभावित हो रहा है और जनता की भागीदारी को नजरअंदाज किया जा रहा है।

    ❖ पहले भी मिला था आदेश, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई.

    • 4 जनवरी 2024 को हाईकोर्ट ने सरकार को 3 सप्ताह के भीतर निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी करने का आदेश दिया था।
    • सरकार ने इस आदेश के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील की, जिसे खंडपीठ ने खारिज कर दिया।
    • इसके बाद मुख्य सचिव की ओर से अदालत को 4 महीने में चुनाव कराने की अंडरटेकिंग दी गई थी, जो अब समाप्त हो चुकी है।

    ❖ चुनाव न होने से अफसरों के हवाले प्रशासन.

    चुनाव न होने के चलते फिलहाल राज्य के 49 नगरीय निकायों का संचालन निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के बजाय नियुक्त अधिकारियों के हाथों में है। इनमें शामिल हैं:

    • नगर निगम (9): रांची, धनबाद, हजारीबाग, मेदिनीनगर, गिरिडीह, देवघर, चास, आदित्यपुर, मानगो।
    • नगर परिषद (21): चाईबासा, दुमका, गोड्डा, साहिबगंज, रामगढ़ आदि।
    • नगर पंचायत (19): जामताड़ा, खूंटी, चाकुलिया, लातेहार, हुसैनाबाद आदि।

    ❖ ट्रिपल टेस्ट रिपोर्ट का बहाना?

    राज्य सरकार बार-बार निकाय चुनाव में देरी के लिए ‘ट्रिपल टेस्ट’ प्रक्रिया की अधूरी रिपोर्ट को जिम्मेदार ठहरा रही है। हालांकि कोर्ट ने इस पर भी सवाल उठाया है कि आखिर इतनी लंबी अवधि में प्रक्रिया पूरी क्यों नहीं की गई?

    अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी, जिसमें मुख्य सचिव के खिलाफ औपचारिक आरोप तय किए जा सकते हैं। अगर कोर्ट को सरकार का जवाब संतोषजनक नहीं लगा, तो यह मामला राज्य के लिए बड़ा संवैधानिक संकट बन सकता है।

  • झारखंड में ‘जोहार’ योजना से ग्रामीण महिलाएं बन रहीं हैं बदलाव की अगुवा, 2.1 करोड़ डॉलर का कारोबार और आत्मनिर्भरता की मिसाल

     By : परवेज़ आलम.
    झारखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक नई क्रांति की शुरुआत हो चुकी है। राज्य सरकार द्वारा वर्ल्ड बैंक के सहयोग से संचालित ‘जोहार योजना’  (Jharkhand Opportunities for Harnessing Rural Growth – JOHAR) न केवल महिलाओं को संगठित कर रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर भी बना रही है। यह योजना राज्य की लाखों महिलाओं को खेती-बाड़ी और कृषि आधारित आजीविका में निर्णायक भूमिका निभाने के लिए सशक्त बना रही है।

    कांके की आशा देवी: आत्मनिर्भरता की मिसाल.
    इस बदलाव का चेहरा बनी हैं कांके की आशा देवी, जो आज एक उत्पादक समूह की अध्यक्ष हैं। कभी परंपरागत खेती कर घर की सीमाओं में सिमटी आशा देवी, आज हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुकी हैं। उन्होंने बताया कि पहले उनकी खेती केवल घरेलू उपयोग तक सीमित थी। लेकिन जब वह ‘जोहार’ कार्यक्रम के तहत बनाए गए उत्पादक समूह से जुड़ीं, तो उन्हें अपनी उपज को संगठित रूप से बाजार तक ले जाने और लाभ कमाने का मार्ग मिला।

    2.1 करोड़ डॉलर का कारोबार, 4,000 उत्पादक समूहों की भागीदारी.
    महज चार वर्षों में महिला नेतृत्व वाले 21 किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), जो लगभग 4,000 उत्पादक समूहों का प्रतिनिधित्व करते हैं, ने मिलकर करीब 2.1 करोड़ अमेरिकी डॉलर का कारोबार कर दिखाया है। इन संगठनों के माध्यम से महिलाएं अब फलों, सब्जियों और पशुपालन जैसे लाभकारी क्षेत्रों में काम कर रही हैं। कई परिवारों की आय में 35% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।

    सरकार, वर्ल्ड बैंक और FAO का समन्वय.
    यह योजना झारखंड राज्य आजीविका संवर्धन सोसाइटी (JSLPS) के माध्यम से ग्रामीण विकास विभाग के नेतृत्व में लागू की जा रही है और इसे वर्ल्ड बैंक वित्त पोषित कर रहा है। साथ ही संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने इसकी डिजाइन और क्रियान्वयन में तकनीकी मदद दी है। इस संयुक्त प्रयास ने राज्य की 2 लाख ग्रामीण महिलाओं को नई दिशा दी है।

    तकनीक और आधुनिक खेती की ओर कदम.
    जोहार योजना के तहत छोटे किसान अब ऐप आधारित कस्टम हायरिंग सेंटरों से ट्रैक्टर, थ्रेसर और आधुनिक कृषि उपकरण किराये पर ले सकते हैं। ‘एग्री-मार्ट’ की सुविधा से उन्हें बीज, खाद और जरूरी कृषि सामग्री एक ही जगह मिलती है, जिससे उत्पादकता और मुनाफा दोनों बढ़ा है।

    सफलता का नया नाम: सरहुल आजीविका कंपनी.
    आशा देवी और अन्य महिला नेताओं के नेतृत्व में गठित सरहुल आजीविका किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड आज एक सशक्त संस्था बन चुकी है। इसमें अब 14,000 से अधिक महिलाएं भागीदार हैं, जिनकी कंपनी में वित्तीय हिस्सेदारी भी है। यह कंपनी उत्पादन से लेकर विपणन तक, हर मोर्चे पर ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित कर रही है।

    सीएम हेमंत सोरेन की सराहना
    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी इन महिलाओं की उपलब्धियों की सराहना करते हुए ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर लिखा –

    “झारखंड की मेरी माताएं-बहनें आज सशक्त हो आगे बढ़ रही हैं। आप सभी आगे बढ़ते रहें, आपका यह बेटा और भाई हमेशा आपके साथ है।”

    वर्ल्ड बैंक इंडिया का संदेश.
    वर्ल्ड बैंक इंडिया ने भी इन महिला उत्पादक समूहों की सफलता को ‘एक्स’ पर साझा करते हुए कहा –

    “यह इस बात का प्रमाण है कि महिलाओं में किया गया निवेश किस तरह आजीविका और कृषि-खाद्य प्रणालियों को नया रूप दे सकता है।”

    ‘जोहार’ योजना केवल एक विकास परियोजना नहीं, बल्कि झारखंड के ग्रामीण समाज की स्त्रियों को नया जीवन देने वाली आंदोलन बन चुकी है। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि जब महिलाओं को संसाधन, प्रशिक्षण और अवसर मिलते हैं, तो वे पूरे समाज की आर्थिक रीढ़ बन सकती हैं।

  • झारखंड कांग्रेस को राहुल गांधी की सख्त हिदायत, जनहित पर मुखर रहें

    –कार्यकर्ताओं का सम्मान करें, गठबंधन में सामंजस्य बनाए रखें

    परवेज आलम

    For The News Post4u.

    RANCHI : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कांग्रेस पार्टी को झारखंड में नई दिशा देने के मकसद से नई  दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक की , जिसमें झारखंड के सभी कांग्रेस विधायक और सभी  मंत्री  शामिल हुये ।  इस बैठक को कांग्रेस की राज्य इकाई में संगठनात्मक मजबूती और गठबंधन सरकार में प्रभावशाली भूमिका सुनिश्चित करने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।

    जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता, भाजपा को मौका न देने की सलाह.

    बैठक की शुरुआत में राहुल गांधी ने स्पष्ट तौर पर कहा कि झारखंड के कांग्रेसी नेता जनता से जुड़े मुद्दों पर आक्रामक और सक्रिय रुख अपनाएं। उन्होंने कहा कि पेसा कानून, ओबीसी आरक्षण और सरना धर्म कोड जैसे संवेदनशील मसलों पर कांग्रेस को स्पष्ट और मज़बूत रुख दिखाना होगा, ताकि भाजपा को जनता के बीच जगह बनाने का कोई मौका न मिले।

    उन्होंने यह भी चेताया कि अगर कांग्रेस जनहित से जुड़ी आवाजें नहीं उठाएगी, तो भाजपा इन मुद्दों को हथियाने की कोशिश करेगी, जो पार्टी की राजनीतिक स्थिति को कमजोर कर सकता है।

    विधायकों को विधानसभा में सक्रियता और जनता से जुड़ाव का निर्देश.

    राहुल ने साफ शब्दों में कहा कि विधायक पहले जनता के प्रतिनिधि हैं, फिर मंत्री। इसलिए उन्हें अपनी विधानसभा में सक्रिय रहकर लोगों की समस्याओं को सीधे सुनना और समाधान के लिए प्रयास करना चाहिए। उन्होंने विधायकों को निर्देश दिया कि वे विधानसभा में मजबूती से अपनी बात रखें और सरकार की योजनाओं को सही तरीके से जनता तक पहुंचाएं।

    गठबंधन धर्म का पालन और झामुमो के साथ समन्वय पर जोर.

    बैठक में राहुल गांधी ने खास तौर पर गठबंधन सहयोगी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के साथ बेहतर तालमेल बनाए रखने की बात कही। उन्होंने नेताओं से कहा कि कांग्रेस को गठबंधन धर्म का सम्मान करते हुए झामुमो के साथ किसी भी प्रकार की टकराव या टकराहट से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे जनता के बीच संयुक्त सरकार की सकारात्मक छवि बनती है।

    संगठनात्मक मजबूती और कार्यकर्ताओं की भूमिका को बताया केंद्रीय बिंदु.

    राहुल गांधी ने इस बात पर भी जोर दिया कि पार्टी के स्थानीय संगठनों को सक्रिय और सशक्त किया जाए। उन्होंने मंत्रियों और विधायकों को निर्देश दिया कि वे पार्टी कार्यकर्ताओं का सम्मान करें, नियमित संवाद रखें और उनकी समस्याओं को प्राथमिकता दें।

    उन्होंने कहा, “कार्यकर्ता ही पार्टी की रीढ़ होते हैं। यदि कार्यकर्ता उत्साहित और संलग्न रहेंगे तो चुनावी सफलता भी सुनिश्चित होगी।” उन्होंने आगामी निकाय चुनावों की तैयारी में कार्यकर्ताओं की भूमिका को केंद्रीय बताया।

    भाजपा की आलोचना और कांग्रेस की वैकल्पिक भूमिका पर बल.

    राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा आमजन से जुड़े मुद्दों को दबाने का प्रयास करती है, लेकिन कांग्रेस को चाहिए कि वह इन मुद्दों को मजबूती से उठाकर जनता के बीच खुद को उनका सच्चा प्रतिनिधि साबित करे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को झारखंड में एक प्रभावशाली और जनहितैषी की भूमिका निभानी होगी, भले ही वह सत्ता का हिस्सा हो।

    प्रदेश अध्यक्ष से असंतोष पर राहुल की समझदारी भरी सलाह.

    बैठक के दौरान कुछ विधायकों ने झारखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ अपनी असहमति भी जाहिर की, जिस पर राहुल गांधी ने नेताओं से सुलह और सामंजस्य की नीति अपनाने को कहा। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत मतभेद संगठन की एकता को प्रभावित न करें।

    रणनीतिक संदेश और भविष्य की तैयारी.

    इस उच्चस्तरीय बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी मौजूद रहे। उन्होंने झारखंड में पार्टी की वर्तमान स्थिति और गठबंधन सरकार के प्रदर्शन की समीक्षा की।

    बैठक मे  राहुल गांधी ने सभी विधायकों और मंत्रियों से कहा कि वे एकजुटता, प्रतिबद्धता और जनसेवा की भावना के साथ काम करें। उन्होंने कहा कि यही समय है जब कांग्रेस को झारखंड में अपनी ताकत को फिर से स्थापित करना है ।

    राहुल गांधी की यह बैठक झारखंड कांग्रेस के लिए एक नई रणनीतिक दिशा, संगठनात्मक पुनर्गठन और गठबंधन धर्म के प्रति प्रतिबद्धता का स्पष्ट संकेत है। यह पहल आगामी चुनावों और राजनीतिक समीकरणों के मद्देनजर कांग्रेस के लिए एक फोकस्ड रोडमैप की तरह काम करेगी।

     

  • झारखंड हाईकोर्ट का अहम फैसला: दो वर्षीय B.Ed धारकों को शिक्षक भर्ती में मिलेगा मौका

    -JSSC को सभी अभ्यर्थियों को फिर से शामिल करने का निर्देश.

    By The News Post4u.

    रांची:  झारखंड में शिक्षक भर्ती को लेकर बड़ी राहत की खबर आई है। झारखंड हाईकोर्ट ने एक अहम निर्णय में स्पष्ट कर दिया है कि दो वर्षीय B.Ed (बैचलर ऑफ एजुकेशन) डिग्रीधारी अभ्यर्थियों को सहायक आचार्य (Assistant Professor) भर्ती प्रक्रिया से बाहर नहीं किया जा सकता। इससे राज्य के हजारों B.Ed धारकों को राहत मिली है जिन्हें पहले एक वर्षीय B.Ed की शर्त के कारण चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया था।

    क्या है मामला?

    झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने सहायक आचार्य की नियुक्ति के लिए वर्ष 2023 में विज्ञापन निकाला था, जिसमें न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता के रूप में एक वर्षीय B.Ed कोर्स का उल्लेख था। इस आधार पर विभिन्न विश्वविद्यालयों से दो वर्षीय B.Ed की पढ़ाई कर चुके कई अभ्यर्थियों को दस्तावेज सत्यापन के दौरान अयोग्य घोषित कर दिया गया।

    याचिकाकर्ताओं की ओर से उठाई गई बात.

    इस निर्णय को विप्लव दत्ता सहित अन्य अभ्यर्थियों ने झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार और अधिवक्ता अपराजिता भारद्वाज ने अदालत को बताया कि:

    • वर्ष 2014 में वर्मा आयोग की रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के आधार पर NCTE (राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद) ने B.Ed कोर्स की समयावधि एक से बढ़ाकर दो वर्ष कर दी थी।
    • इसके बाद देशभर में और झारखंड में भी सभी मान्यता प्राप्त संस्थानों व विश्वविद्यालयों ने दो वर्षीय B.Ed पाठ्यक्रम लागू कर दिया है।
    • वर्ष 2019 में NCTE की अधिसूचना के अनुसार दो वर्षीय डिग्री पूरी तरह से वैध व मान्य है।

    कोर्ट ने दिया निर्देश.

    इस मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद, जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने सोमवार को अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:

    “दो वर्षीय B.Ed डिग्री रखने वाले अभ्यर्थियों को केवल इस आधार पर चयन प्रक्रिया से बाहर करना अनुचित है कि विज्ञापन में एक वर्षीय कोर्स का उल्लेख था।”

    कोर्ट ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को निर्देश दिया है कि:

    • ऐसे सभी उम्मीदवारों के दस्तावेजों का पुनः सत्यापन किया जाए।
    • योग्य पाए जाने पर उन्हें चयन प्रक्रिया में शामिल किया जाए।

    भविष्य की भर्तियों के लिए भी संकेत.

    हाईकोर्ट के इस फैसले का असर न केवल वर्तमान भर्ती प्रक्रिया पर पड़ेगा, बल्कि यह भविष्य में जारी होने वाले शिक्षक नियुक्तियों के विज्ञापनों की भाषा और शर्तों को लेकर भी एक न्यायिक मार्गदर्शन प्रदान करता है। इस आदेश से यह स्पष्ट होता है कि जो भी शैक्षणिक योग्यता मान्यता प्राप्त निकाय (जैसे NCTE) द्वारा निर्धारित है, उसे ही कानूनी रूप से मान्य माना जाएगा — भले ही विज्ञापन में कुछ और लिखा हो।

    झारखंड हाईकोर्ट का यह फैसला राज्य के हजारों योग्य B.Ed अभ्यर्थियों के लिए न्याय की उम्मीद की एक बड़ी जीत है। यह न केवल भर्ती में पारदर्शिता और न्यायिक दखल का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अद्यतन शैक्षणिक दिशा-निर्देशों की अनदेखी नहीं की जा सकती।

  • झारखंड में बड़ी कार्रवाई: 143 डॉक्टर सेवा से बर्खास्त

    स्वास्थ्य विभाग ने जारी की अधिसूचना.

    By The News Post4u.

    रांची: झारखंड सरकार ने राज्य के स्वास्थ्य तंत्र में अनुशासन बहाल करने की दिशा में एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। वर्षों से ड्यूटी से गायब चल रहे 143 डॉक्टरों को राज्य सरकार ने सेवा से बर्खास्त कर दिया है। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है।

    इन सभी चिकित्सकों पर आरोप था कि वे बिना किसी पूर्व सूचना या अनुमति के लंबे समय से अपने कार्यस्थल से अनुपस्थित चल रहे थे। लगातार चेतावनियों और विभागीय नोटिसों के बावजूद इन डॉक्टरों ने अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई, जिसके चलते विभाग को यह सख्त निर्णय लेना पड़ा।

    बर्खास्त डॉक्टरों की नियुक्ति जेपीएससी से हुई थी.

    जिन डॉक्टरों को सेवा से हटाया गया है, उनकी नियुक्ति झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के माध्यम से की गई थी। वे राज्य के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में कार्यरत थे, जिनमें प्रमुख जिले शामिल हैं:

    • रामगढ़, हजारीबाग, बोकारो, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम
    • धनबाद, जामताड़ा, दुमका, देवघर, चतरा
    • पाकुड़, गुमला, खूंटी, गढ़वा, गिरिडीह और गोड्डा

    कई वरिष्ठ और विशेषज्ञ डॉक्टर भी सूची में शामिल.

    बर्खास्त किए गए डॉक्टरों की सूची में कई विशेषज्ञ चिकित्सकों के नाम भी शामिल हैं, जो राज्य के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में तैनात थे:

    • डॉ. अभिषेक जायसवाल – रेडियोलॉजिस्ट, जमशेदपुर सदर अस्पताल
    • डॉ. चंदेवर मंगेश महादेव – ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ
    • डॉ. विक्रम – पश्चिमी सिंहभूम सदर अस्पताल
    • डॉ. रूपा – रिनपास (रांची मानसिक आरोग्यशाला)
    • डॉ. अभिषेक – डर्मेटोलॉजिस्ट, जामताड़ा सदर अस्पताल
    • डॉ. अनीश कुमार गांधी और डॉ. मनीष कुमार – सर्जन, धनबाद सदर अस्पताल

    खाली पदों पर होगी नई नियुक्ति.

    स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन डॉक्टरों की नियुक्ति अधिसूचना को रद्द कर दिया गया है। इसके बाद अब इन पदों पर नई भर्तियों का रास्ता साफ हो गया है। सरकार का उद्देश्य है कि आम जनता को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें और स्वास्थ्य ढांचा और अधिक प्रभावी तरीके से काम करे।

    सरकार का संदेश स्पष्ट: लापरवाही बर्दाश्त नहीं.

    इस कार्रवाई के माध्यम से राज्य सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि सरकारी सेवा में अनुशासनहीनता और गैर-जिम्मेदाराना रवैये को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लंबे समय से अनुपस्थित डॉक्टरों के खिलाफ यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।

    स्वास्थ्य विभाग अब इन खाली पदों को भरने के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रहा है ताकि राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं को और सशक्त किया जा सके।