झारखंड में ‘जोहार’ योजना से ग्रामीण महिलाएं बन रहीं हैं बदलाव की अगुवा, 2.1 करोड़ डॉलर का कारोबार और आत्मनिर्भरता की मिसाल

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 By : परवेज़ आलम.
झारखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक नई क्रांति की शुरुआत हो चुकी है। राज्य सरकार द्वारा वर्ल्ड बैंक के सहयोग से संचालित जोहार योजना’  (Jharkhand Opportunities for Harnessing Rural Growth – JOHAR) न केवल महिलाओं को संगठित कर रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर भी बना रही है। यह योजना राज्य की लाखों महिलाओं को खेती-बाड़ी और कृषि आधारित आजीविका में निर्णायक भूमिका निभाने के लिए सशक्त बना रही है।

कांके की आशा देवी: आत्मनिर्भरता की मिसाल.
इस बदलाव का चेहरा बनी हैं कांके की आशा देवी, जो आज एक उत्पादक समूह की अध्यक्ष हैं। कभी परंपरागत खेती कर घर की सीमाओं में सिमटी आशा देवी, आज हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुकी हैं। उन्होंने बताया कि पहले उनकी खेती केवल घरेलू उपयोग तक सीमित थी। लेकिन जब वह ‘जोहार’ कार्यक्रम के तहत बनाए गए उत्पादक समूह से जुड़ीं, तो उन्हें अपनी उपज को संगठित रूप से बाजार तक ले जाने और लाभ कमाने का मार्ग मिला।

2.1 करोड़ डॉलर का कारोबार, 4,000 उत्पादक समूहों की भागीदारी.
महज चार वर्षों में महिला नेतृत्व वाले 21 किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), जो लगभग 4,000 उत्पादक समूहों का प्रतिनिधित्व करते हैं, ने मिलकर करीब 2.1 करोड़ अमेरिकी डॉलर का कारोबार कर दिखाया है। इन संगठनों के माध्यम से महिलाएं अब फलों, सब्जियों और पशुपालन जैसे लाभकारी क्षेत्रों में काम कर रही हैं। कई परिवारों की आय में 35% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।

सरकार, वर्ल्ड बैंक और FAO का समन्वय.
यह योजना झारखंड राज्य आजीविका संवर्धन सोसाइटी (JSLPS) के माध्यम से ग्रामीण विकास विभाग के नेतृत्व में लागू की जा रही है और इसे वर्ल्ड बैंक वित्त पोषित कर रहा है। साथ ही संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने इसकी डिजाइन और क्रियान्वयन में तकनीकी मदद दी है। इस संयुक्त प्रयास ने राज्य की 2 लाख ग्रामीण महिलाओं को नई दिशा दी है।

तकनीक और आधुनिक खेती की ओर कदम.
जोहार योजना के तहत छोटे किसान अब ऐप आधारित कस्टम हायरिंग सेंटरों से ट्रैक्टर, थ्रेसर और आधुनिक कृषि उपकरण किराये पर ले सकते हैं। ‘एग्री-मार्ट’ की सुविधा से उन्हें बीज, खाद और जरूरी कृषि सामग्री एक ही जगह मिलती है, जिससे उत्पादकता और मुनाफा दोनों बढ़ा है।

सफलता का नया नाम: सरहुल आजीविका कंपनी.
आशा देवी और अन्य महिला नेताओं के नेतृत्व में गठित सरहुल आजीविका किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड आज एक सशक्त संस्था बन चुकी है। इसमें अब 14,000 से अधिक महिलाएं भागीदार हैं, जिनकी कंपनी में वित्तीय हिस्सेदारी भी है। यह कंपनी उत्पादन से लेकर विपणन तक, हर मोर्चे पर ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित कर रही है।

सीएम हेमंत सोरेन की सराहना
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी इन महिलाओं की उपलब्धियों की सराहना करते हुए ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर लिखा –

झारखंड की मेरी माताएं-बहनें आज सशक्त हो आगे बढ़ रही हैं। आप सभी आगे बढ़ते रहें, आपका यह बेटा और भाई हमेशा आपके साथ है।”

वर्ल्ड बैंक इंडिया का संदेश.
वर्ल्ड बैंक इंडिया ने भी इन महिला उत्पादक समूहों की सफलता को ‘एक्स’ पर साझा करते हुए कहा –

यह इस बात का प्रमाण है कि महिलाओं में किया गया निवेश किस तरह आजीविका और कृषि-खाद्य प्रणालियों को नया रूप दे सकता है।”

जोहार’ योजना केवल एक विकास परियोजना नहीं, बल्कि झारखंड के ग्रामीण समाज की स्त्रियों को नया जीवन देने वाली आंदोलन बन चुकी है। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि जब महिलाओं को संसाधन, प्रशिक्षण और अवसर मिलते हैं, तो वे पूरे समाज की आर्थिक रीढ़ बन सकती हैं।

The News Post4u

Perwez Alam is one of the founder of The News Post4U, he brings over 4 decades of Journalism of experience, having worked with Zee News, Sadhna News, News 11, Bureau cheif of Dainik Jargarn, Govt. Accredited Crosspondent of Hindustan daily, Jansatta ect, He loves doing human intrest, political and crime related stories. Contact : 9431395522

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