Category: Giridih

  • कांग्रेस की बैठक में नेताओं ने मंथन किया, कार्यकर्ताओं ने जताई उपेक्षा की पीड़ा

    परवेज़ आलम.

    गिरिडीह : कांग्रेस पार्टी झारखंड में अपने संगठन को मजबूत करने की दिशा में सक्रिय नजर आ रही है। इसी कड़ी में मंगलवार को पार्टी के झारखंड प्रभारी के. राजू और प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने गिरिडीह जिले के मधुबन स्थित प्रसिद्ध जैन तीर्थस्थल सम्मेद शिखर में ‘संगठन सृजन’ नामक बैठक की। यह बैठक मधुबन गेस्ट हाउस में आयोजित की गई, जहां जिले के कांग्रेस जिलाध्यक्ष धनंजय राम, कार्यकारी जिलाध्यक्ष सतीश केडिया, वरिष्ठ कोंग्रेस  नेता अजय सिन्हा  मंटू सभी प्रखंड, मंडल और बूथ स्तर के अध्यक्ष मौजूद रहे।

    बैठक का उद्देश्य और चिंता:

    बैठक को “संगठन सृजन” का नाम इसलिए दिया गया क्योंकि इसका मूल उद्देश्य गिरिडीह सहित पूरे झारखंड में कांग्रेस संगठन को फिर से मजबूत बनाना था। इस दौरान नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच इस बात को लेकर विशेष चिंता जताई गई कि हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में गिरिडीह जैसे राजनीतिक रूप से अहम जिले में कांग्रेस ने एक भी प्रत्याशी नहीं उतारा। यह निर्णय पार्टी की रणनीति पर सवाल खड़ा करता है, खासकर तब जब कुछ विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस के पास मजबूत आधार रहा है और वहां उम्मीदवार खड़े किए जा सकते थे।

    कार्यकर्ताओं की नाराजगी:

    बैठक के दौरान कई बूथ अध्यक्षों और प्रखंड प्रतिनिधियों ने संगठन के भीतर हो रही अनदेखी को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को तवज्जो नहीं मिल रही है, और प्रशासनिक अधिकारी उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेते।

    हालांकि, समय की कमी के कारण आधे घंटे तक चली इस बैठक में कई कार्यकर्ता अपनी बात नहीं रख सके, जिससे उनमें असंतोष देखने को मिला

    बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में के.राजू ने कहा,

    “कार्यकर्ताओं की बातों को गंभीरता से सुना गया है। कांग्रेस पार्टी जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी। सभी सुझावों को पार्टी के रणनीतिकारों तक पहुंचाया जाएगा।”

    जब मीडिया ने उनसे नीति आयोग की उस रिपोर्ट पर सवाल पूछा जिसमें भारत की अर्थव्यवस्था ने जापान को पीछे छोड़ते हुए विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की बात कही गई है, तो के. राजू ने जवाब देने से यह कहकर इनकार कर दिया कि उन्होंने अभी तक उस खबर को देखा नहीं है।

     

  • जब तक सरना धर्म कोड को मान्यता नहीं मिलती, तब तक “नो सेंसस”-मंत्री सुदिव्य कुमार

    GIRIDIH: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने 27 मई 2025 को राज्यभर में सरना धर्म कोड की मान्यता की मांग को लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। गिरिडीह जिले में यह प्रदर्शन टावर चौक के निकट आयोजित किया गया, जिसमें राज्य सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सहित दर्जनों पार्टी नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला उपाध्यक्ष शहनवाज अंसारी ने की, जबकि संचालन अजीत कुमार पप्पु और कोलेश्वर सोरेन ने किया।

    मंत्री सुदिव्य कुमार ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि जैसे दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने 1972 में झारखंड को अलग राज्य बनाने की बात कही थी और वह सपना 15 नवंबर 2000 को साकार हुआ, उसी तरह अब उन्होंने देश के 12 करोड़ आदिवासियों के लिए सरना धर्म कोड की मान्यता की बात कही है, और यह भी पूरा होकर रहेगा।

    गौरतलब है कि झारखंड विधानसभा ने 11 नवंबर 2020 को एक विशेष सत्र में सर्वसम्मति से सरना धर्म कोड विधेयक पारित किया था और इसे राज्यपाल के माध्यम से केंद्र सरकार को अनुमोदन के लिए भेजा गया था। हालांकि, लगभग पांच वर्षों के बाद भी केंद्र सरकार ने इस पर कोई निर्णय नहीं लिया है, जिससे आदिवासी समुदाय में गहरा असंतोष है।

    सारना धर्म, जिसे “पवित्र वन का धर्म” भी कहा जाता है, आदिवासी समुदायों द्वारा प्रकृति पूजा पर आधारित एक धार्मिक विश्वास है, जो झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार और छत्तीसगढ़ में प्रचलित है। इस धर्म के अनुयायी जल, जंगल और जमीन की पूजा करते हैं और इसे अपनी पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।

    कार्यक्रम में केदार हाजरा, प्रणव वर्मा, दिलीप रजक, दिलीप मंडल, बबली मरांडी, प्रमिला मेहरा, ज्योति सोरेन, नुनुराम किस्कु, कोलेश्वर सोरेन, प्रधान मुर्मू, हरिलाल मरांडी, बिरजु मरांडी, राकेश सिंह रॉकी, अभय सिंह, योगेन्द्र सिंह, राकेश सिंह टुन्ना, शिवम आजाद, सुमित कुमार, अशोक राम, मेहताब मिर्जा, कृष्ण मुरारी, अनिल राम, महावीर मुर्मू, प्रदोष कुमार, भरत यादव, नूर अहमद, हसनैन अली, मो. जाकीर, छक्कु साव, विजय सिंह, सन्नी रईन, नरेश यादव, पप्पु रजक, हरि मोहन कंधवे, अमित चंद्रवंशी सहित दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

    JMM ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरना धर्म कोड को मान्यता नहीं मिलती, तब तक “नो सेंसस” के नारे के साथ चरणबद्ध आंदोलन जारी रहेगा।

     

  • मइयां सम्मान योजना : किस्तों के इंतजार में लाखों महिलाएं, सवालों के घेरे में प्रशासनिक प्रक्रिया

    परवेज़ आलम.

    झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मुख्यमंत्री मइयां सम्मान योजना एक बार फिर सुर्खियों में है। अप्रैल और मई माह की किस्त का इंतजार कर रहीं लाभार्थी महिलाएं अब यह जानने को बेताब हैं कि आखिर उनके खातों में सम्मान राशि ट्रांसफर क्यों नहीं हो रही। जबकि महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग ने 13 मई को ही राज्यभर के जिलों को 9,609 करोड़ रुपये आवंटित कर दिए हैं।

    तो फिर पैसा लाभुकों के खाते में क्यों नहीं  ?

    सरकारी गाइडलाइन के अनुसार, हर माह की 15 तारीख तक लाभुकों के बैंक खातों में सम्मान राशि भेज दी जानी चाहिए। ऐसे में स्वाभाविक सवाल उठ रहा है कि जब राशि का आवंटन समय पर हो चुका है, तो ट्रांसफर में देरी क्यों हो रही है ? जानकारी के अनुसार, अधिकांश जिलों ने 15 मई से पहले ही तकनीकी और प्रशासनिक तैयारी पूरी कर ली थी।

    हालांकि विभाग की ओर से निर्देश जारी किया गया है कि राशि केवल उन्हीं महिलाओं को दी जाए, जो इसके लिए पूरी तरह पात्र हैं। इसीलिए आधार सीडिंग और खातों का सत्यापन (cross verification) तेजी से किया जा रहा है। जिला कोषांगों का कहना है कि उन्हें राज्य मुख्यालय से ‘ग्रीन सिग्नल’ मिलने की देर है, उसके बाद राशि तुरंत ट्रांसफर कर दी जाएगी।

    एक साथ दो किस्त या सिर्फ एक ? बनी हुई है अनिश्चितता.

    13 मई को राशि आवंटन के समय यह उम्मीद जताई गई थी कि अप्रैल और मई – दोनों महीनों की संयुक्त किस्त (5,000 रु.) लाभुकों को दी जाएगी। मगर अब सूत्रों के मुताबिक, केवल अप्रैल माह की किस्त दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। विभागीय स्तर पर कोई स्पष्ट आदेश नहीं जारी किया गया है, जिससे स्थिति को लेकर भ्रम और भी गहरा गया है।

    सबसे ज्यादा लाभुक कहां   ?

    योजना के आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे अधिक लाभुक गिरिडीह जिले से हैं, इसके बाद रांची, धनबाद, बोकारो और पलामू क्रमशः दूसरे, तीसरे, चौथे और पांचवें स्थान पर हैं। हालांकि विभाग की ओर से यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि इस बार कितने लाभार्थियों को सम्मान राशि दी जाएगी।

    एक अनुमान के अनुसार, करीब 43 लाख महिलाएं इस बार सम्मान राशि पाने वाली हैं। यह संख्या पहले जारी 56.61 लाख लाभुकों की सूची से काफी कम है। जनवरी में जब पहली बार राशि ट्रांसफर की गई थी, तो बड़ी संख्या में अपात्र लाभुकों की पहचान हुई थी। इसके बाद ही लाभुकों के आधार से लिंक खातों की अनिवार्यता तय की गई।

    पहले भी हो चुकी है छंटनी और संशोधन.

    मार्च महीने में एक साथ जनवरी, फरवरी और मार्च की किस्त 37.55 लाख महिलाओं को भेजी गई थी। उसके बाद, जब खातों की जांच-पड़ताल पूरी हुई, तो अप्रैल में 5.52 लाख अतिरिक्त लाभुकों को राशि दी गई थी। इसका मतलब है कि विभाग द्वारा अपात्र लाभुकों की छंटनी और नए पात्र लाभार्थियों को शामिल करने की प्रक्रिया अभी भी जारी है।

    आगे क्या?

    फिलहाल, जिला कोषांगों से लेकर लाभार्थियों तक — सबकी निगाहें राज्य मुख्यालय से मिलने वाले अंतिम निर्देश पर टिकी हैं। लेकिन अब तक यह तय नहीं हो पाया है कि यह ‘ग्रीन सिग्नल’ आखिर कब मिलेगा।

    इस योजना को लेकर सरकार की गंभीरता और पारदर्शिता की मंशा तो स्पष्ट है, लेकिन सूचना के अभाव और स्पष्ट संवाद की कमी ने योजना के क्रियान्वयन को लेकर असमंजस की स्थिति उत्पन्न कर दी है।
    मुख्यमंत्री मइयां सम्मान योजना सामाजिक सुरक्षा की दृष्टि से एक सराहनीय पहल है, लेकिन यदि इसके वितरण में पारदर्शिता और त्वरित प्रक्रिया सुनिश्चित नहीं की गई, तो यह योजना अपनी राजनीतिक और सामाजिक साख को कमजोर कर सकती है। लाभुकों का धैर्य जवाब न दे, इसके लिए ज़रूरी है कि सरकार समय रहते स्थिति स्पष्ट करे और भरोसे का माहौल बनाए रखे।

     

  • गिरिडीह :नक्सली बंकर से रायफल, SLR समेत भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद

    By News Post4u

    GIRIDIH: नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे सघन सर्च अभियान में गिरिडीह पुलिस और सीआरपीएफ को एक बड़ी सफलता मिली है। खुखरा थाना क्षेत्र के जोकानाला जंगल में एक नक्सली बंकर का पर्दाफाश करते हुए सुरक्षा बलों ने भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक जब्त किए हैं।

    गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने पारसनाथ पर्वत की तराई में सर्च ऑपरेशन चलाया। इस दौरान जंगल के भीतर ज़मीन के नीचे छिपा एक बंकर मिला, जिसमें नक्सलियों ने हथियारों का जखीरा छुपा रखा था। बंकर से कुल 14 हथियार बरामद किए गए हैं, जिनमें .303 बोर की रायफल, एक एसएलआर, एक 12 बोर की बंदूक और 11 सिंगल शॉट बंदूकें शामिल हैं।

    इतना ही नहीं, बंकर से 7.62 एमएम की 38 गोलियां, 9 एमएम की 10 गोलियां, गन पाउडर, बारूद, वायर और अन्य विस्फोटक सामग्री भी मिली है। बरामद हथियारों में कुछ पर संदेह है कि वे पुलिस से लूटे गए हो सकते हैं।

    गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक डॉ. विमल कुमार ने शुक्रवार को मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि इस ऑपरेशन में नक्सलियों के ठिकाने को ध्वस्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा, “यह कार्रवाई एक लंबी तैयारी और पुख्ता खुफिया सूचना के बाद संभव हो सकी। इस इलाके में नक्सल विरोधी अभियान लगातार जारी रहेगा।”

    पुलिस की इस कार्रवाई को नक्सली नेटवर्क पर एक बड़ा प्रहार माना जा रहा है। पारसनाथ पर्वत की तराई में सुरक्षा बलों की सक्रियता बढ़ा दी गई है और आगे भी इस तरह के तलाशी अभियान चलाए जाते रहेंगे।

  • गिरिडीह : 339 चौकीदारों को मिला नियुक्ति पत्र, युवाओं में खुशी की लहर

    By the news post4u

    गिरिडीह: गिरिडीह नगर भवन में आज आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में जिले के रिक्त चौकीदार पदों पर चयनित 339 अभ्यर्थियों को विधिवत रूप से नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। इस मौके पर युवाओं के चेहरों पर खुशी की चमक साफ नजर आई। राज्य सरकार की इस पहल को युवाओं ने ‘सपनों की पहली सीढ़ी’ बताया और पूरे उत्साह के साथ सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।

    दीप प्रज्वलन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ.

    कार्यक्रम की शुरुआत संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर की गई। कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि सुदिव्य कुमार सोनू  मंत्री – नगर एवं आवास विभाग, उच्च तकनीकी एवं शिक्षा विभाग, पर्यटन तथा खेलकूद विभाग, झारखंड सरकार के साथ बगोदर के विधायक नागेंद्र महतो , जमुआ विधायक मंजु कुमारी एवं डुमरी के विधायक जय राम महतो की गरिमामय उपस्थिति थी  । इस अवसर पर उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक,उप विकास आयुक्त, सदर अनुमंडल पदाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जनसंपर्क पदाधिकारी सहित कई प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे ।

    विस्तृत चयन प्रक्रिया से होकर गुजरे अभ्यर्थी.

    कार्यक्रम में जानकारी दी गई कि गिरिडीह जिले में चौकीदार के कुल 389 पद स्वीकृत हैं। इन पदों के लिए कुल 12,854 आवेदन प्राप्त हुए थे। लिखित परीक्षा में 8126 अभ्यर्थी शामिल हुए, जिनमें से 1664 को सफल घोषित किया गया। इसके बाद हुई शारीरिक दक्षता परीक्षा में 385 अभ्यर्थी सफल हुए। सभी स्तरों पर मूल्यांकन और जिला स्तरीय चयन समिति की अनुशंसा के बाद 339 योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्त किया गया।

    इन 339 चयनित अभ्यर्थियों में 42 महिलाएं और 297 पुरुष शामिल हैं। वर्गानुसार इनकी संख्या इस प्रकार रही –

    • अनारक्षित कोटि – 210
    • अनुसूचित जनजाति – 59
    • आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग – 29
    • अत्यंत पिछड़ा वर्ग – 25
    • पिछड़ा वर्ग – 16

    युवाओं के चेहरों पर खुशी, सरकार को जताया आभार.

    नियुक्ति पत्र मिलने के बाद युवाओं में जबरदस्त उत्साह देखा गया। कई चयनित अभ्यर्थियों ने कहा कि यह नौकरी उनके जीवन को दिशा देगी और परिवार को आर्थिक संबल प्रदान करेगी। एक अभ्यर्थी ने कहा, “हमने मेहनत की, भरोसा रखा और सरकार ने हमारे सपने पूरे किए। आज एक नई शुरुआत हो रही है।”

    मंत्री ने दी शुभकामनाएं, सेवा भाव से कार्य करने की अपील.

    नवनियुक्त चौकीदारों को नियुक्ति पत्र सौंपते हुए झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू  ने कहा कि यह सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि समाज और शासन के प्रति जिम्मेदारी का अवसर है। उन्होंने युवाओं से कहा, “ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और सेवा भाव से कार्य करें। आपकी भूमिका गांव-गांव में प्रशासन की आंख और कान की तरह होगी। सरकार जमीनी स्तर पर प्रशासन को सशक्त करने के लिए काम कर रही है।”

    उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में विभिन्न विभागों में और भी नियुक्तियां की जाएंगी, जिससे युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। मंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों के विकास पर जोर देते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है।

    महिलाओं, युवाओं और गरीबों के लिए सरकार की प्रतिबद्धता.

    मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार महिलाओं, युवाओं और गरीब वर्गों को सशक्त बनाने के लिए कई योजनाएं चला रही है। उन्होंने सभी अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को नियमित स्कूल भेजें, क्योंकि शिक्षा ही समाज में वास्तविक परिवर्तन का आधार है।

    सभी वर्गों के लिए समर्पित सरकार – मंत्री

    उन्होंने कहा, “राज्य सरकार सभी वर्गों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। ग्राम पंचायत से लेकर प्रखंड स्तर तक बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। युवाओं से अपील है कि वे राज्य और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझें और ईमानदारी से कार्य करें।”
    गिरिडीह में आयोजित यह नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम न सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया की सफलता का प्रतीक था, बल्कि यह युवाओं के आत्मविश्वास और राज्य सरकार की प्रतिबद्धता का भी सशक्त उदाहरण बना। यह कार्यक्रम यह दर्शाता है कि रोजगार सृजन के क्षेत्र में सरकार का   ठोस प्रयास जमीनी स्तर पर असर दिखा रह है ।

  • झारखंड में मौसम ने ली अचानक करवट: तेज आंधी-बारिश से दिन में रात हो गई

    गिरिडीह /रांची।  झारखंड में मौसम ने अप्रत्याशित रूप से करवट ली है। चिलचिलाती धूप और 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान के बीच लोग  बेहाल थे, वहीं अब आसमान में घने काले बादलों ने डेरा जमा लिया है और कई जिलों में तेज आंधी के साथ झमाझम बारिश ने लोगों को गर्मी से बड़ी राहत दी है।

    दिन में छाया अंधकार, चालकों को जलानी पड़ी हेडलाइटें.

    हजारीबाग, रांची, धनबाद, गिरिडीह और पाकुड़ समेत झारखंड के कई जिलों में दोपहर के समय ही ऐसा नजारा देखने को मिला मानो दिन में रात उतर आई हो। घने काले बादलों और धूलभरी आंधी के कारण दृश्यता काफी कम हो गई, जिससे सड़क पर चलने वाले वाहनों को हेडलाइट जलाकर चलना पड़ा।

    हजारीबाग में स्थिति इतनी विकट हो गई कि तेज तूफान के दौरान एक पेड़ एक चलती कार पर गिर पड़ा, जिससे एक दंपति के घायल होने की खबर है। वहीं, कई इलाकों में बिजली के पोल गिरने और कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचने की सूचना भी सामने आई है।

    बारिश और तूफान से तापमान में भारी गिरावट.

    राज्य में तेज हवाओं की गति 50-60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई। इसके बाद झमाझम बारिश ने मौसम को ठंडा बना दिया। रांची और इसके आसपास के क्षेत्रों में अचानक बारिश शुरू होने से गर्मी से परेशान लोगों को राहत मिली। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों तक राज्य के कई हिस्सों में इसी तरह का मौसम बना रहेगा।

    मौसम विभाग का अलर्ट: अगले कुछ दिन राहत, फिर लौटेगी गर्मी

    भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पहले ही अलर्ट जारी किया था कि झारखंड के विभिन्न जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना है। अब एक नया अपडेट जारी करते हुए मौसम विभाग ने चेताया है कि यह राहत अस्थायी है। मई के दूसरे सप्ताह से एक बार फिर भीषण गर्मी और लू का प्रकोप झारखंड में देखने को मिलेगा, जब तापमान 45 डिग्री के पार जा सकता है।

    गिरिडीह में झमाझम बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त.

    गिरिडीह में भी तेज हवाओं और बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है। बाजारों में सन्नाटा पसर गया और सड़कों पर वाहन कम नजर आए।
    झारखंड के मौसम में आया यह अचानक बदलाव न केवल लोगों को चिलचिलाती गर्मी से राहत दे रहा है, बल्कि कुछ क्षेत्रों में यह नुकसानदेह भी साबित हो रहा है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट रहने की जरूरत है क्योंकि अगले कुछ दिनों में भी मौसम इसी तरह अनिश्चित बना रह सकता है।

  • झारखंड में सुरक्षाबलों की बड़ी जीत: 8 नक्सली ढेर

    एक करोड़ का इनामी प्रयाग मांझी उर्फ विवेक दा मारा गया

    परवेज़ आलम.

    बोकारो/गिरिडीह: झारखंड में चल रहे नक्सल विरोधी अभियान को सोमवार को बड़ी सफलता मिली जब सुरक्षाबलों ने बोकारो के लुगू पहाड़ क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में आठ नक्सलियों को मार गिराया। इन मारे गए नक्सलियों में सबसे बड़ा नाम है प्रयाग मांझी उर्फ विवेक दा का — जो भाकपा माओवादी की सेंट्रल कमेटी का सदस्य था और झारखंड-बिहार-छत्तीसगढ़-ओडिशा के नक्सली नेटवर्क का संचालन करता था। इस पर एक करोड़ रुपए का इनाम घोषित था ।

    मुठभेड़ रविवार रात से शुरू हुई, जब खुफिया सूत्रों से सुरक्षाबलों को नक्सलियों के जमावड़े की सूचना मिली। इलाके को घेरते हुए तड़के ऑपरेशन शुरू हुआ, और भारी गोलीबारी के बाद सुरक्षाबलों ने आठ नक्सलियों को ढेर कर दिया। फरार नक्सलियों की तलाश में इलाके में अभी भी व्यापक तलाशी अभियान जारी है।

    प्रयाग मांझी उर्फ विवेक दा कौन था?

    धनबाद जिले के टुंडी प्रखंड के दलबुढ़ा गांव का रहने वाला प्रयाग मांझी, माओवादी सर्किट में “विवेक दा”, “करण दा”, “फुचना” और “नागो मांझी” जैसे नामों से जाना जाता था। उसने बेहद कम उम्र में माओवादी संगठन से जुड़ाव बना लिया था और सालों में वह संगठन का रणनीतिक दिमाग बन गया।

    वह न केवल झारखंड, बल्कि बिहार, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के नक्सली बेल्ट में सक्रिय था। गिरिडीह के पारसनाथ और बोकारो के लुगू व झुमरा पहाड़ उसके प्रभाव क्षेत्र थे। सिर्फ गिरिडीह में ही उसके खिलाफ 50 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे।

    रणनीतिकार, प्रशिक्षक और हथियारों का जानकार

    विवेक दा नक्सलियों के लिए सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि सैन्य रणनीतिकार, प्रशिक्षक और हथियारों का जानकार था। उसके दस्ते के पास एके-47, इंसास राइफल और भारी मात्रा में विस्फोटक थे। उसके साथ 50 से ज्यादा प्रशिक्षित नक्सली थे, जिनमें महिला माओवादी भी शामिल थीं।

    सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, हाल ही में उसे पारसनाथ क्षेत्र की कमान दी गई थी, ताकि वहां पुनः नक्सली गतिविधियों को सक्रिय किया जा सके।

    पत्नी भी थी माओवादी नेता, इलाज के दौरान हुई थी मौत.

    विवेक की पत्नी जया मांझी भी माओवादी संगठन में महिला विंग की प्रमुख सदस्य थी। 25 लाख की इनामी जया को गिरिडीह पुलिस ने जुलाई 2024 में धनबाद के एक निजी अस्पताल से गिरफ्तार किया था, जहां वह फर्जी नाम से गॉल ब्लैडर कैंसर का इलाज करवा रही थी। इलाज के दौरान 21 सितंबर 2024 को रांची के रिम्स अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी।

    माओवादियों को गहरा झटका.

    इस मुठभेड़ में मारे गए अन्य नक्सलियों में अरविंद यादव और साहेब राम मांझी भी शामिल थे, जो संगठन के पुराने और प्रभावशाली सदस्य थे। विवेक दा की मौत को सुरक्षाबलों के लिए न सिर्फ सैन्य सफलता, बल्कि मनोवैज्ञानिक बढ़त के रूप में देखा जा रहा है।

    झारखंड पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, यह पहली बार है जब राज्य में एक करोड़ के इनामी नक्सली को मार गिराया गया है। इससे गिरिडीह-बोकारो क्षेत्र में नक्सली नेटवर्क की कमर टूट गई है।

    लुगू और पारसनाथ: नक्सलियों का सुरक्षित अड्डा अब खतरे में.

    लुगू पहाड़ और पारसनाथ लंबे समय से नक्सलियों के सेफ जोन माने जाते रहे हैं। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में लगातार ऑपरेशनों के चलते माओवादी इन इलाकों से पीछे हटे थे। लेकिन हालिया मुठभेड़ से संकेत मिलता है कि नक्सली दोबारा इन्हीं क्षेत्रों को पुनर्जीवित करना चाहते थे।

    पुलिस ने संकेत दिए हैं कि इन इलाकों में सघन अभियान जारी रहेगा ताकि बचे-खुचे माओवादी पूरी तरह खत्म किए जा सकें।

    नक्सलवाद के अंत की ओर एक कदम.

    प्रयाग मांझी की मौत को माओवादी संगठन के लिए बहुत बड़ा धक्का माना जा रहा है। उसकी रणनीतिक पकड़, राज्य के कई जिलों में असर और नेटवर्क को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि यह झारखंड के नक्सल इतिहास में एक निर्णायक मोड़ है।

    पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अब बचे हुए माओवादियों की गिरफ्तारी और संगठन को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने के लिए ज़मीनी स्तर पर ऑपरेशन को और तेज करने की तैयारी में हैं।

  • पूर्व सांसद व काँग्रेस नेता तिलकधारी सिंह नहीं रहे

    शिक्षक से सांसद तक का प्रेरणादायक सफर थमा.

    गिरिडीह: झारखंड की राजनीति ने एक अनुभवी और सज्जन नेता को खो दिया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और दो बार कोडरमा से लोकसभा सांसद रहे तिलकधारी सिंह का सोमवार को निधन हो गया। वे 87 वर्ष के थे और पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे थे। गिरिडीह के नवजीवन अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।

    तिलकधारी सिंह की तबीयत 8 अप्रैल से लगातार खराब चल रही थी। 19 अप्रैल को  राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने अस्पताल जाकर उनका हालचाल लिया था । इससे पहले पूर्व सीएम रघुवर दास, बाबू लाल मरंडी और केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने भी  अस्पताल जाकर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली थी । सोमवार की दोपहर टीडी सिंह के  जीवन का आखिरी पन्ना बंद हो गया। निधन की जानकारी उनके पुत्र किशोर सिंह ने दी।

    गांव से दिल्ली तक: शिक्षक से सांसद बनने की यात्रा.

    तिलकधारी सिंह का जन्म 8 जनवरी 1938 को गिरिडीह जिले के देवरी प्रखंड अंतर्गत चतरो गांव में हुआ था। शिक्षा के प्रति गहरी रुचि रखने वाले सिंह ने बीएससी की पढ़ाई पूरी करने के बाद 1962 में शिक्षक के रूप में अपना करियर शुरू किया। चकाई हाई स्कूल में वर्षों तक सेवा देने के बाद उन्होंने सामाजिक जीवन की ओर रुख किया।

    1968 में उन्होंने मुखिया पद का चुनाव लड़ा और जीतकर ग्रामीण राजनीति में प्रवेश किया। इसके बाद वे जिला परिषद के अध्यक्ष भी बने। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को आज भी याद किया जाता है – उन्होंने जिले में कई सरकारी स्कूलों की स्थापना में अहम भूमिका निभाई थी।

    राजनीति में कांग्रेस का मजबूत चेहरा.

    1977 में वे कांग्रेस के गिरिडीह जिला अध्यक्ष बने। इसके बाद 1980 में धनवार विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित हुए। फिर 1984 में कांग्रेस ने उन्हें कोडरमा लोकसभा सीट से टिकट दिया, और उन्होंने जीत दर्ज कर संसद में प्रवेश किया। इस चुनाव में उन्होंने बीजेपी के रीतलाल प्रसाद वर्मा को हराया था और 208731 वोट हासिल किए थे – जो कुल मतों का 58.8 प्रतिशत था।

    1999 में उन्होंने दूसरी बार कोडरमा से जीत दर्ज की और संसद पहुंचे। अपने राजनीतिक जीवन में वे सांसद के साथ-साथ विधायक, जिला परिषद अध्यक्ष, और कांग्रेस संगठन के अहम पदों पर रहे।

    राजनीतिक विरासत और परिवार.

    राजनीतिक जीवन में सक्रिय रहते हुए, वृद्धावस्था में उन्होंने अपनी राजनीतिक विरासत अपने पुत्र धनंजय सिंह को सौंपी। वर्तमान में धनंजय सिंह कांग्रेस के गिरिडीह जिला अध्यक्ष के पद पर कार्यरत हैं।

    सरल स्वभाव के कारण लोकप्रिय नेता.

    तिलकधारी सिंह को उनके सादे जीवन और सरल स्वभाव के लिए जाना जाता था। आम जनता से लेकर बड़े नेताओं तक, सभी को उनके बोलचाल की शैली और व्यवहार में विनम्रता आकर्षित करती थी। वे ज़िले मे भूमिहार समाज के बड़े नेता थे ।

    श्रद्धांजलियाँ और राजनीतिक शोक

    पूर्व सांसद के निधन पर पूरे गिरिडीह जिले में शोक की लहर दौड़ गई है। मंत्री सुदिव्य कुमार ने उन्हें गिरिडीह की राजनीति का ‘पितामह’ बताते हुए कहा, “उनकी कमी गिरिडीह की राजनीतिक धरातल पर हमेशा महसूस की जाएगी। उनका योगदान अमिट है ।

    शोक व्यक्त करने वालों में सासंद डॉ सरफराज अहमद ,बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रकाश सहाय, कांग्रेस नेता अजय सिन्हा, कार्यकारी अध्यक्ष सतीश केडिया, पूर्व विधायक निर्भय शाहबादी,अभय शाहबादी , लोजपा नेता राज कुमार राज सहित अनेक बुद्धिजीवी और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल हैं।

  • गिरिडीह को मिली नई स्वास्थ्य सौगात: मर्सी हॉस्पिटल का भव्य शुभारंभ, एक सपने की हुई पूर्ति

    परवेज़ आलम .

    गिरिडीह : जिलेवासियों के लिए आज का दिन ऐतिहासिक और भावनात्मक दोनों ही रहा। वर्षों से जिस स्वास्थ्य सुविधा की कमी महसूस की जा रही थी, वह आज पूरी हुई। झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने गिरिडीह के पहले मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल मर्सी हॉस्पिटल का भव्य उद्घाटन किया। समारोह में भारी संख्या में लोग मौजूद रहे और माहौल किसी उत्सव से कम नहीं था।

    स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई उम्मीद.

    मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने उद्घाटन के दौरान अपने संबोधन में कहा, “मर्सी हॉस्पिटल केवल एक इमारत नहीं, बल्कि गिरिडीह और आसपास के जिलों के लिए नई जिंदगी की उम्मीद है। यह अस्पताल वह चिकित्सा सुविधाएं देगा, जो अब तक केवल बड़े शहरों तक सीमित थीं।”

    मर्सी हॉस्पिटल में मरीजों को वही तकनीक और सेवाएं मिलेंगी जो देश के बड़े मेट्रो शहरों में उपलब्ध हैं। इसका लाभ न केवल गिरिडीह के लोग उठाएंगे, बल्कि कोडरमा, हजारीबाग, धनबाद जैसे आसपास के जिले भी इससे लाभान्वित होंगे।

    एक सपने की कहानी: डॉ. अमित गोंड का संकल्प.

    इस अस्पताल की नींव एक स्वप्न पर रखी गई थी — स्वर्गीय डॉ. अमित गोंड का सपना, जो चाहते थे कि गिरिडीह के लोगों को इलाज के लिए बाहर न जाना पड़े। उन्होंने इस सपने के लिए जीवन भर मेहनत की, पर दुर्भाग्यवश, उद्घाटन से ठीक पहले उनका असमय निधन हो गया।

    हालांकि, यह सपना वहीं नहीं रुका। डॉ. गोंड के परिवार ने इसे अपना मिशन बना लिया। रंजीत कुमार गौड, सुमित कुमार गोंड, नीरज शाहबादी, विश्वजीत सिंह (गुड्डू सिंह) और साहिल सलूजा ने अस्पताल के कार्य को आगे बढ़ाया और आज यह दिन उनके प्रयासों और दृढ़ निश्चय का प्रतीक बन गया।

    तीन चरणों में होगी सेवाओं की शुरुआत. 

    मर्सी हॉस्पिटल के सीईओ संजीत नायक ने बताया कि अस्पताल को तीन चरणों में पूरी तरह कार्यशील किया जाएगा:

    1. प्रथम चरण में –
      ओपीडी, अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक लैब, डायलिसिस यूनिट, डेंटल विभाग, सीटी स्कैन, टीएमटी जैसी सेवाएं चालू कर दी गई हैं।
    2. द्वितीय चरण में –
      इमरजेंसी सेवाएं, ऑपरेशन थिएटर, नवजात शिशु और व्यस्क आईसीयू, स्त्री रोग विभाग, एंडोस्कोपी एवं सामान्य सर्जरी यूनिट शुरू की जाएंगी।
    3. तृतीय चरण में –
      कार्डियोलॉजी, एंजियोग्राफी, हार्ट कैथ लैब जैसी सुपर स्पेशलिटी सेवाएं शुरू की जाएंगी, जिससे गिरिडीह मेडिकल सुविधाओं के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके।

    समाज का व्यापक समर्थन. 

    इस ऐतिहासिक अवसर पर शहर के तमाम गणमान्य नागरिक निर्मल शाहबादी,अभय शाहबादी,रितेश शाहबादी, वैभव शाहबादी, रमेश प्रभकर, दिलीप झा,सईद अख्तर , अजित कुमार पप्पू ,सरदार चरणजीत सिंह , अधिवक्ता परवेज़ आलम ,चुननु कान्त , दीपक सवर्णकार, प्रशासनिक अधिकारी, विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, डॉक्टर्स और सैकड़ों की संख्या में आम जनता उपस्थित रही। यह दिन न केवल एक अस्पताल के उद्घाटन का था, बल्कि गिरिडीह के भविष्य की एक नई शुरुआत का प्रतीक भी था।

  • खेलगांव बनेगा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों का केंद्र- मंत्री सुदिव्य कुमार

    झारखंड की खेल अधोसंरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य के खेल मंत्री सुदिव्य कुमार ने शुक्रवार को झारखंड स्टेट स्पोर्ट्स प्रमोशन सोसाइटी (JSSPS) के संचालन, खेलगांव के अपग्रेडेशन और प्रस्तावित खेल विश्वविद्यालय की स्थापना को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD), खेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और संबंधित एजेंसियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

    मंत्री सुदिव्य कुमार ने बैठक में दो टूक कहा कि खेलगांव केवल झारखंड की ही नहीं, बल्कि देश की एक अमूल्य धरोहर है, जिसे विश्वस्तरीय मानकों पर बनाए रखना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार चाहती है कि खेलगांव को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का स्थायी आयोजन स्थल बनाया जाए। आगामी 2025 सैफ एथलेटिक्स चैंपियनशिप की तैयारियों के संदर्भ में उन्होने मोरहाबादी स्थित बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम का निरीक्षण कर मौजूदा अवसंरचना और सुविधाओं का मूल्यांकन भी किया। बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने हेतु विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशानिर्देश प्रदान किए गए हैं। यह एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता है। मसलन, राज्य सरकार अतिथि प्रतिभागियों, दर्शकों एवं मेजबान प्रतिभागियों को उच्चकोटि का अनुभव प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्री ने आगे कहा, “मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का सपना है कि झारखंड में एक ऐसा खेल विश्वविद्यालय स्थापित हो, जो न केवल राज्य के युवाओं को बल्कि देश और विदेश के छात्रों को खेल शिक्षा के विभिन्न कोर्सों में अध्ययन का अवसर दे।” हालांकि उन्होंने यह भी माना कि इस दिशा में शुरुआती गति अपेक्षित नहीं रही है, जिसपर चिंता व्यक्त की गई।

    बैठक में मंत्री ने CCL के CMD से विशेष रूप से आग्रह किया कि कोल इंडिया लिमिटेड और CCL मिलकर इस दिशा में ठोस और त्वरित पहल करें, ताकि खेल विश्वविद्यालय की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो सके। इस पर CCL प्रमुख ने आश्वस्त किया कि खेलगांव के जीर्णोद्धार और खेल अधोसंरचना सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे, और कोल इंडिया से समन्वय स्थापित कर जल्द ही कार्य योजना प्रस्तुत की जाएगी।

    JUIDCO के साथ परियोजना समीक्षा बैठक: शहरी विकास कार्यों में गति लाने के निर्देश.

    शुक्रवार को ही  मंत्री सुदिव्य कुमार ने झारखंड अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी () के अधिकारियों के साथ एक अलग बैठक की, जिसमें शहरी क्षेत्रों में चल रही विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। इसमें स्मार्ट सिटी, स्वच्छता, पेयजल आपूर्ति, सड़क निर्माण, ड्रेनेज व्यवस्था और शहरी आवास योजनाएं प्रमुख रूप से शामिल थीं।

    मंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि सभी योजनाओं को तय समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए, ताकि आम शहरी नागरिकों को शीघ्र सुविधा मिल सके। उन्होंने यह भी जोर दिया कि सभी कार्य मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विकासपरक दृष्टिकोण के अनुरूप हों और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी जाए।

    सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है – एक सशक्त, स्मार्ट और खेल-प्रेरित झारखंड का निर्माण।