गिरिडीह: अहिंसा, त्याग और करुणा का संदेश देने वाले 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी की 2624वीं जयंती गुरुवार को देशभर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई। इसी क्रम में झारखंड के गिरिडीह और सरिया शहरों में भी जैन समाज की ओर से भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धा और आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
सरिया में निकली भक्ति की गंगा
सरिया के स्टेशन रोड से शुरू हुई शोभायात्रा में भगवान महावीर की सजीव झांकी दो विशेष वाहनों पर सजाई गई थी। रथों में विराजमान भगवान की मूर्ति को फूलों, रंग-बिरंगे कपड़ों और झूमरों से सजाया गया था। साथ ही बच्चों की टोली हाथों में जयकारों की तख्तियां लिए उत्साहपूर्वक नारे लगाते हुए चल रही थी — “जिओ और जीने दो”, “अहिंसा परमो धर्मः”।
सरिया जैन समाज की अगुवाई में निकली इस शोभायात्रा में प्रमुख रूप से राजेश जैन, डिंपल जैन, संदीप जैन, विक्की जैन, अजित जैन, मोना जैन और संतोष जैन जैसे समाजसेवी शामिल रहे।
गिरिडीह में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
वहीं गिरिडीह के बड़ा चौक से निकली शोभायात्रा में हजारों की संख्या में भक्तों ने हिस्सा लिया। महिलाएं पारंपरिक परिधानों में ढोल-नगाड़ों की धुन पर झूमती रहीं, तो पुरुषों की टोली जयकारों के साथ आगे बढ़ती रही। एक विशेष आकर्षण रहा भगवान महावीर का घोड़े पर सुसज्जित रथ, जिसमें अष्टधातु की मूर्ति को नगर भ्रमण कराया गया।
हर गली में बिखरी भक्ति की रोशनी
शहर की गलियों से गुजरते हुए शोभायात्रा ने मानो पूरा गिरिडीह को भक्ति के रंग में रंग दिया। मंदिर से निकलते ही रथ की आरती की गई और भगवान के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। दो घोड़ों पर सवार युवक शोभायात्रा का प्रहरी स्वरूप में नेतृत्व करते नजर आए।
समापन पर जलाभिषेक और भंडारे का आयोजन
शोभायात्रा के बाद मंदिर प्रांगण में भगवान महावीर स्वामी का जलाभिषेक कर विशेष पूजा अर्चना की गई। दोपहर में श्रद्धालुओं के लिए भव्य भंडारे का आयोजन हुआ और देर शाम तक आरती व अन्य धार्मिक अनुष्ठान चलते रहे।
इस मौके पर महिला जैन समाज की सदस्य राजश्री जैन ने कहा, “भगवान महावीर का संदेश आज पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है। जब पूरा विश्व हिंसा और संघर्ष से गुजर रहा है, तब ‘जिओ और जीने दो’ का विचार हर घर तक पहुंचना चाहिए।”
शोभायात्रा में शामिल हुए कई प्रमुख श्रद्धालु
इस आयोजन में अशोक जैन, अंकित जैन, अजय जैन, पद्म जैन, विजय सेठी, अमित जैन, राजन जैन, अविनाश सेठी, सार्थक जैन और विनीता जैन समेत जैन समाज के अनेक गणमान्य श्रद्धालु शामिल हुए।
गिरिडीह (गांडेय) : गांडेय विधानसभा क्षेत्र में विकास की एक नई शुरुआत करते हुए स्थानीय विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन ने बुधवार को कई महत्वपूर्ण योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इन योजनाओं में चलंत चिकित्सा वाहन सेवा, सड़क निर्माण, स्वास्थ्य केंद्रों का सशक्तिकरण और पेयजल आपूर्ति की नई परियोजनाएं शामिल हैं। ये सभी योजनाएं जनसुविधा को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई हैं और इनका उद्देश्य क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करना है।
कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने पर विधायक का स्वागत स्थानीय जनता और झामुमो पार्टी के नेताओं द्वारा गर्मजोशी से किया गया। फूल-मालाओं और पुष्पगुच्छ के साथ उनका अभिनंदन हुआ। मौके पर बड़ी संख्या में महिला-पुरुष ग्रामीण, पार्टी कार्यकर्ता और प्रशासनिक पदाधिकारी मौजूद थे।
जनसभा को संबोधित करते हुए विधायक कल्पना सोरेन ने कहा,
“गांव-गांव तक विकास पहुँचाना और जनसेवा को मजबूती देना ही मेरी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।”
उन्होंने आगे कहा कि सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाना ही उनके कार्यकाल का मुख्य उद्देश्य है।
निःशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन शिविर का भी उद्घाटन
इसी दिन गांडेय के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में विजय शंकर चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित निःशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन शिविर का उद्घाटन भी विधायक कल्पना सोरेन ने किया। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर इस शिविर का शुभारंभ किया।शंकर नेत्रालय एवं ओल्ड जेवरियंस एलुमनाई ट्रस्ट के सहयोग से 9 दिवसीय निःशुल्क मोतियाबिंद सर्जरी शिविर की शुरुआत की गई, जहां हज़ारों ज़रूरतमंदों को मिलेगा मुफ़्त जाँच और ऑपरेशन का लाभ
विधायक ने कहा:
“गांडेय में पहली बार इस प्रकार का शिविर आयोजित किया गया है। इससे आम लोगों, विशेषकर गरीब और वंचित तबके को काफी लाभ मिलेगा।”
उन्होंने क्षेत्र के लोगों से अपील की कि वे इस अवसर का भरपूर लाभ उठाएं और ज्यादा से ज्यादा लोग इस चिकित्सा सुविधा से जुड़ें।
इस अवसर पर डीडीसी स्मृति कुमारी, सिविल सर्जन एस.पी. मिश्रा, बैरिस्टर फरदीन अहमद, , पूर्व विधायक केदार हाजरा, झामुमो जिलाध्यक्ष संजय सिंह ,सहित अन्य कई गणमान्य व्यक्ति एवं स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे।
रामनवमी पर्व के मद्देनजर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शनिवार को अपने आवासीय कार्यालय में राज्य की विधि-व्यवस्था की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में सीएम ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि राज्य में किसी भी प्रकार की अफवाह फैलाने या अशांति फैलाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि रामनवमी का उत्सव पूरे राज्य में आपसी प्रेम, सौहार्द और शांति के साथ संपन्न हो। इस समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव अलका तिवारी, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव अविनाश कुमार, प्रधान सचिव गृह विभाग वंदना दादेल, डीजीपी अनुराग गुप्ता, एडीजी ऑपरेशन संजय आनंद राव लाटकर, आईजी ऑपरेशन एवी होमकर, आईजी स्पेशल ब्रांच प्रभात कुमार और जिलों के डीसी, एसएसपी, एसपी उपस्थित रहे.
संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष चौकसी के निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि रामनवमी के दौरान शोभायात्रा और अन्य धार्मिक आयोजन होते हैं, इसलिए कुछ क्षेत्रों में यह समय संवेदनशील हो जाता है। ऐसे चिन्हित क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जाए। साथ ही सभी अखाड़ा समितियों को हाईकोर्ट द्वारा डीजे बजाने को लेकर दिए गए आदेश की प्रति अवश्य उपलब्ध कराई जाए।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अगर कोई अखाड़ा समिति हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन करती है, तो उसके खिलाफ किस तरह की कार्रवाई की जाएगी, इसकी जानकारी पहले से उन्हें दे दी जाए। शोभायात्रा के दौरान CCTV और ड्रोन कैमरे से निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
बाइक रैली पर पूरी तरह रोक
सीएम सोरेन ने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में रामनवमी के अवसर पर शोभायात्राओं के साथ बाइक रैलियों की परंपरा शुरू हो गई है, जिसे किसी भी हाल में अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि ऐसी बाइक रैलियां आम जनता की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती हैं, इसलिए इस पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।
कानून व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने पुलिस प्रशासन को अलर्ट मोड में रहने को कहा और निर्देश दिए कि जुलूस या शोभायात्रा के दौरान कहीं भी किसी तरह की अशांति दिखे तो उसकी सूचना तत्काल पुलिस मुख्यालय और कंट्रोल रूम को दी जाए। छोटी घटनाओं पर भी नजर रखी जाए और आवश्यकता पड़ने पर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए म्यूजिक सिस्टम कुछ देर के लिए बंद कराया जाए।
हजारीबाग और गिरिडीह में विशेष सुरक्षा व्यवस्था
हाल ही में दो समुदायों के बीच हुई झड़प को देखते हुए हजारीबाग और गिरिडीह जिलों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। राज्य पुलिस मुख्यालय ने 25 डीएसपी रैंक के अधिकारियों की विशेष रूप से तैनाती की है जो 8 अप्रैल तक सुरक्षा की कमान संभालें रहेंगे ।
हजारीबाग के लिए नियुक्त 20 डीएसपी में शामिल हैं:
हीरालाल रवि, मजरुल होदा, संजय कुमार (1), सुनील कुमार रजवार, संदीप गुप्ता, दिलीप खलखो, सतीश झा, कुलदीप टोपनो, भूपेंद्र राउत, विजय रंजन कुमार, संजय कुमार (2), रोहित रजवार, मनोज राय, राजीव कुमार, रविंद्र सिंह, राजकुमार यादव, पूनम मिंज, अजय केसरी, राजेंद्र दुबे, मनीष चंद्रलाल।
रामनवमी से पहले गिरिडीह में सुरक्षा का जायजा लेने के लिए एसपी डॉ. विमल कुमार के नेतृत्व में शुक्रवार को फ्लैग मार्च निकाला गया। यह मार्च शहर के बड़ा चौक, मुस्लिम बाजार, मौलाना आजाद चौक, कालीबाड़ी, मकतपुर चौक, कचहरी रोड, टावर चौक होते हुए कंट्रोल रूम तक पहुंचा। इस दौरान स्थानीय लोगों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की गई। पुलिस ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों पर निगरानी रखी जा रही है और किसी भी असामाजिक तत्व को बख्शा नहीं जाएगा।
330 लोगों को दिया गया नोटिस
रामनवमी के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए गिरिडीह ज़िले के विभिन्न हिस्सों में 330 लोगों को नोटिस जारी किया गया है। इनसे कहा गया है कि अगर किसी तरह की गड़बड़ी में उनकी संलिप्तता पाई गई तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विधायक मनोज कुमार यादव ने दोषियों पर कार्रवाई और मुआवजे की मांग की
झारखंड विधानसभा के शून्यकाल के दौरान बरही विधायक मनोज कुमार यादव ने जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) गांडेय के छात्र रामकुमार यादव की संदिग्ध मौत का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को सख्त से सख्त सजा दी जाए और मृतक छात्र के परिजनों को उचित मुआवजा प्रदान किया जाए।
क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि 6 फरवरी को गिरिडीह जिले के जवाहर नवोदय विद्यालय, गांडेय में 11वीं कक्षा के छात्र रामकुमार यादव का शव संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद हुआ था। इस घटना से क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया था। परिजनों और स्थानीय लोगों ने स्कूल प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था। हालांकि, अब तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
विधानसभा में उठा मामला
बरही के विधायक मनोज कुमार यादव ने इस मामले को विधानसभा में उठाते हुए सरकार से मांग की कि जल्द से जल्द इस घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को कठोर सजा दी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए और उन्हें उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए ताकि वे इस मुश्किल घड़ी में आर्थिक रूप से मजबूत हो सकें।
सांसद प्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों का समर्थन
जिला सांसद प्रतिनिधि दिनेश प्रसाद यादव, राष्ट्रीय यादव सेना के जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र यादव और यादव महासभा के अध्यक्ष धनेश्वर यादव समेत कई सामाजिक संगठनों ने इस मांग का समर्थन किया। अधिवक्ता कामेश्वर यादव, सरजू यादव, राजेश यादव, राजेंद्र यादव और शिवशंकर यादव समेत गिरिडीह के अन्य न्यायप्रिय लोगों ने विधायक मनोज कुमार यादव की इस पहल की सराहना की और सरकार से जल्द कार्रवाई की अपील की।
सरकार का आश्वासन
सरकार की ओर से यह आश्वासन दिया गया कि इस मामले की गहराई से जांच की जाएगी और दोषियों को सख्त कानूनी सजा दी जाएगी। साथ ही, पीड़ित परिवार को उचित आर्थिक सहायता देने पर भी विचार किया जाएगा।
इस घटना से पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैला हुआ है, और लोग जल्द से जल्द न्याय की मांग कर रहे हैं। अब देखना होगा कि सरकार कब तक इस मामले में ठोस कदम उठाती है और रामकुमार यादव के परिवार को इंसाफ मिलता है या नहीं।
24 वां अखिल भारतीय बहुभाषी नाटक एवं लोकनृत्य,शास्त्रीय नृत्य प्रतियोगिता
गिरिडीह : कला संगम के तत्वावधान में स्व. जे पी कुशवाहा 24 वां अखिल भारतीय बहुभाषी नाटक एवं स्व. उमा रानी ताह स्मृति लोकनृत्य, शास्त्रीय नृत्य प्रतियोगिता के चौथे दिन नाटक मंचन, शास्त्रीय नृत्य और लोक नृत्य की शुरुआत देशभर से आए कला संगम के सभी कलाकारों द्वारा नगर भ्रमण हेतु निकाली गई रंग यात्रा कर की गई ।
सचिव सतीश कुंदन ने कहा कि कला हमेशा सवाल खड़े करती है और उसके जवाब के लिए कला हमारे सामने आती है। उन्होंने कला संगम को इस आयोजन के लिए एवं देशभर के कलाकारों को अपनी कला का प्रदर्शन के लिए बहुत शुभकामनाएं दीं।
संरक्षक राजेंद्र बगड़िया ने कला संगम की स्थापना के बारे में बताया। कार्यकारी अध्यक्ष पंकज ताह ने कहा कि गिरिडीह में कला भवन बनना चाहिए। उसके लिए उनके स्तर पर प्रयास किए गए हैं। संरक्षक सतविंदर सिंह सलूजा ने कहा कि मोबाइल से बच्चे गलत रास्ते पर चलने लगे हैं। उन्हें कला से जोड़ने से अच्छे संस्कार दिए जा सकते हैं। स्मारिका के प्रधान संपादक ने कहा कि आने वाला समय आर्टिफीशियल इंटलीजेंस का है। इससे कला तो निखरेगी लेकिन रंगमंच प्रभावित होगा। इनके अलावा संरक्षक अजय सिन्हा मंटू, संयोजक चुन्नूकांत, मुख्य सलाहकार विशाल आनंद, संपादक सुनील मंथन शर्मा ने भी समारोह को संबोधित किया। मंच संचालन सचिव सतीश कुंदनने किया।
नाटकों ने झकझोरा तो शास्त्रीय व लोक नृत्य ने मनमोहा
नाटकों की प्रस्तुति ने कभी मन को झकझोरा तो कभी मन को आनंदित किया। कलाकृति कला केंद्र नाटक पेश कर समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया।
बीच-बीच में शास्त्रीय नृत्य, लोक नृत्य प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया। कई समूह लोक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों खूब मनोरंजन किया।
गिरिडीह: स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मियों को वेतन कटौती और भविष्य निधि (EPF) में अनियमितताओं का सामना करना पड़ रहा है। लंबे समय से चली आ रही इस समस्या को लेकर पहले भी कई बार आवाज़ उठाई गई, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला। अब झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) ने एक बार फिर सरकार और प्रशासन के खिलाफ आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है।
JLKM ने किया प्रशासन को आगाह
JLKM के केंद्रीय सचिव नागेंद्र चंद्रवंशी ने जानकारी देते हुए बताया कि गिरिडीह स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत कर्मचारियों को वेतन में कटौती और EPF में गड़बड़ी जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में 18 जनवरी 2025 को संगठन ने गिरिडीह के उपायुक्त (DC), झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री और मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपा था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे कर्मचारियों में भारी आक्रोश है।
तीन चरणों में होगा आंदोलन
JLKM ने सरकार को चेतावनी देते हुए तीन चरणों में आंदोलन करने का निर्णय लिया है—
24 मार्च 2025 – सभी आउटसोर्सिंग कर्मचारी काला बिल्ला लगाकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह कदम सरकार और प्रशासन को चेतावनी देने के लिए उठाया जाएगा।
2 अप्रैल 2025 – प्रशासन की निष्क्रियता के खिलाफ मशाल जुलूस निकाला जाएगा। यह जुलूस गिरिडीह शहर के विभिन्न इलाकों से गुजरते हुए जिला प्रशासन पर दबाव बनाएगा।
7 अप्रैल 2025 – यदि सरकार अब भी निष्क्रिय रही, तो जिला मुख्यालय के सामने विशाल धरना प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें जिले भर के आउटसोर्सिंग कर्मचारी शामिल होंगे।
JLKM ने दी कड़ी चेतावनी
नागेंद्र चंद्रवंशी ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि कर्मचारियों की वेतन और EPF से जुड़ी समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज़ किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन को आगाह किया कि अभी तक प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन यदि मांगे नहीं मानी गईं, तो आंदोलन उग्र रूप ले सकता है।
कर्मचारियों में गहरी नाराजगी, परिवारों पर असर
आउटसोर्सिंग कर्मियों का कहना है कि वेतन में कटौती और EPF गड़बड़ी के कारण उनके जीवन-यापन में कठिनाई हो रही है। उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति खराब हो रही है, यहां तक कि बच्चों की पढ़ाई तक प्रभावित हो रही है। कई कर्मचारियों को महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिससे उनके सामने रोज़मर्रा की जरूरतों को पूरा करने का संकट खड़ा हो गया है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
JLKM ने सवाल उठाया है कि अब तक सरकार और प्रशासन इस गंभीर समस्या पर चुप क्यों है? आखिर गरीब कर्मचारियों को उनका हक़ क्यों नहीं मिल रहा? सरकार की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया न आने के कारण नाराजगी और बढ़ गई है।
आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श जारी
JLKM के कार्यकर्ता और प्रभावित कर्मचारी लगातार बैठकें कर रहे हैं और भविष्य की रणनीति तैयार कर रहे हैं। यदि सरकार और प्रशासन अब भी निष्क्रिय रहे, तो आंदोलन को और बड़े स्तर पर ले जाने की योजना बनाई जा रही है।
अब देखना यह होगा कि सरकार इस मामले को गंभीरता से लेकर उचित कदम उठाती है या फिर कर्मचारियों को अपना हक़ पाने के लिए उग्र आंदोलन करना पड़ेगा।
परवेज़ आलम
झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 12वें दिन गिरिडीह में होली के दौरान हुई हिंसा का मामला गरमा गया। इस मुद्दे पर विपक्षी दल भाजपा ने जमकर हंगामा किया और सरकार पर निष्पक्ष कार्रवाई न करने का आरोप लगाया। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस घटना पर तत्काल चर्चा की मांग करते हुए पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई करने का आरोप लगाया। भाजपा विधायकों की मांग और हंगामे के कारण विधानसभा अध्यक्ष को कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। दुबारा सदन शुरू हुआ तो मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने सरकार का पक्ष मजबूती से रखते हुये कहा कि प्रशासन ने इस पूरे मामले में संयम से काम लिया और स्थिति को बिगड़ने से रोका। उन्होंने कहा कि भाजपा केवल राजनीतिक लाभ उठाने के लिए इस मामले को एकतरफा तरीके से पेश कर रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने पुलिस की भूमिका पर सवाल
बाबूलाल मरांडी ने विधानसभा में गिरिडीह हिंसा का मामला उठाया और कहा कि धनवार थाना क्षेत्र के घोड़थंभा में होली खेलने वाली युवाओं की टोली को पुलिस ने जबरन रोका। इसके बाद एक समुदाय के लोगों ने पेट्रोल बम, बोतलों और पत्थरों से हमला कर दिया। इस हिंसा में कई दुकानों और गाड़ियों में आग लगा दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस इस दौरान मूकदर्शक बनी रही और बाद में कार्रवाई करते हुए दोनों पक्षों से 40-40 लोगों को नामजद कर 11-11 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। मरांडी ने इस कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण करार देते हुए कानून-व्यवस्था पर विशेष चर्चा की मांग की।
सत्तापक्ष का जवाब और विपक्ष का विरोध
संसदीय कार्य मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने विपक्ष की मांग को खारिज करते हुए कहा कि गिरिडीह हिंसा पर चर्चा गृह विभाग की अनुदान मांगों के दौरान की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस मामले में राजनीति करना उचित नहीं है और सभी को संवेदनशीलता के साथ इस विषय पर चर्चा करनी चाहिए।
कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने कहा कि जहां एक ओर इस हिंसा की निंदा होनी चाहिए, वहीं उन क्षेत्रों की सराहना भी की जानी चाहिए जहां हिंदू-मुस्लिम समुदायों ने मिलकर सौहार्दपूर्ण तरीके से होली मनाई। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे लोगों को विधानसभा से बधाई संदेश भेजा जाए, ताकि समाज में भाईचारे का संदेश जाए।
भाजपा का हंगामा, कार्यवाही बाधित
भाजपा विधायकों ने तुरंत चर्चा की मांग को लेकर सदन में हंगामा जारी रखा और वेल में आकर प्रदर्शन करने लगे। इस दौरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की गई। हंगामे के कारण प्रश्नकाल की कार्यवाही बाधित हो गई और विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो को सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
मंत्री इरफान अंसारी का भाजपा पर हमला
गिरिडीह हिंसा पर जारी सियासी घमासान विधानसभा परिसर के बाहर भी जारी रहा। मंत्री इरफान अंसारी ने भाजपा नेताओं पर आरोप लगाया कि वे इस घटना का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास गिरिडीह जाकर माहौल भड़काने का काम कर रहे हैं, जो उचित नहीं है।
मंत्री अंसारी ने चेतावनी दी कि भाजपा नेताओं को झारखंड का माहौल बिगाड़ने नहीं दिया जाएगा और राज्य सरकार कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने भाजपा नेताओं के दबाव में आकर मुकदमा दर्ज किया है और वे इस मामले को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सामने उठाएंगे। उन्होंने कहा कि इस मामले में जो भी लोग दोषी हैं उन पर कार्रवाई होगी, भाईचारगी किसी भी सूरत में बिगड़ने नहीं दी जाएगी. गिरिडीह में माहौल बदल रहा है लगातार पुलिस प्रशासन के द्वारा नजर रखी जा रही है. दोनों पक्षों के लोग शांति चाहते हैं इसीलिए किसी को भी माहौल बिगड़ता की इजाजत नहीं दी जाएगी.
सरकार और प्रशासन का पक्ष
मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि प्रशासन ने इस पूरे मामले में संयम से काम लिया और स्थिति को बिगड़ने से रोका। उन्होंने कहा कि भाजपा केवल राजनीतिक लाभ उठाने के लिए इस मामले को एकतरफा तरीके से पेश कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि होली जुलूस में ऐसे कौन लोग शामिल थे जो पुलिस से हाथापाई कर रहे थे? उन्होंने प्रशासन की भूमिका को संतुलित बताते हुए कहा कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
राजनीतिक उथल-पुथल जारी
गिरिडीह हिंसा का मामला अब झारखंड की राजनीति में गर्माया हुआ है। एक तरफ भाजपा इस घटना को लेकर राज्य सरकार पर हमलावर है, तो दूसरी ओर सरकार विपक्ष पर माहौल बिगाड़ने का आरोप लगा रही है। गिरिडीह में स्थिति सामान्य करने के लिए प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है, लेकिन इस घटना से उपजा राजनीतिक विवाद फिलहाल थमने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
झारखंड के गिरिडीह जिले के घोड़थम्भा में होली के दिन हुई हिंसक झड़प के बाद अब स्थिति पूरी तरह सामान्य है । इलाके मे पुलिस का कडा पहरा है । गिरिडीह एसपी डॉ. विमल कुमार खुद मौके पर मौजूद रह कर माहौल को पुरसकुन बनाने मे लगे है । एसपी ने बताया कि पुलिस घटना को अंजाम देने वाले उपद्रवियों की पहचान कर रही है और उन्हें जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा । उपद्रवियों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज को खंगाला जा रहा है । इलाके मे पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है। पुलिस-प्रशासन की ओर से काफी मशक्कत के बाद स्थिति को नियंत्रण में किया जा सका। इस दौरान एसपी ने कहा कि किसी भी सूरत में शांति भंग करने वाले लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा स्थिति पूरी पुलिस प्रशासन के काबू में है। उन्होंने लोगों से अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की है। इधर डीडीसी स्मिता कुमारी ने बताया कि कुछ अज्ञात लोगों ने व्यवस्था ख़राब करने करने की कोशिश की थी, लेकिन अब सब कुछ सामान्य है। उन्होंने कहा, “कुछ दुकानों को जलाया गया है. कुछ बाइक और वाहनों में भी आग लगाई गई है. इसके पीछे जो भी वजह है, उसकी जांच की जा रही है.।
गौरतलब है कि होली के दिन दो पक्षों के बीच गिरिडीह के घोड़थम्भा में विवाद ने हिंसक रूप ले लिया था जिसके बाद पथराव और आगजनी की घटनाएं सामने आईं। उपद्रवियों ने दुकानों और वाहनों में आग लगा दी, जिससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी
घटना की जानकारी मिलते ही गिरिडीह एसपी डॉ. विमल कुमार के नेतृत्व में खोरीमहुआ एसडीपीओ राजेंद्र प्रसाद सहित कई पुलिस थानों की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद हालात पर काबू पाया और उपद्रवियों को खदेड़ा। पूरे इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है और अन्य थाना क्षेत्रों को भी अलर्ट किया गया है।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह विवाद होली के जुलूस के दौरान भड़का। जुलूस में डीजे बजाने को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी हुई, जो जल्द ही हिंसक झड़प में बदल गई। इसके बाद उपद्रवियों ने पथराव किया और दुकानों एवं वाहनों को आग के हवाले कर दिया।
इस घटना पर सियासी बयानबाजी भी शुरू हो गई है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने प्रशासन और सरकार को विफल करार देते हुए कहा कि त्योहारों के दौरान हिंसा एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है। उन्होंने राज्य सरकार पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया।
इधर जेएमएम के वरिष्ठ नेता इरशाद अहमद वारिस ने कहा कि कुछ शरारती तत्व हेमंत सरकार को बदनाम करने के लिए पर्व की आड़ ले कर माहौल खराब करने का प्रयास करते है । उन्होने कहा कि हेमन्त 02 की सरकार ऐसे तत्वों से निबटना जानती है । उन्होने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुये कहा कि दोषी बक्से न जाएं पर निर्दोष पर झूठे मुकदमे नही हो, पुलिस प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए ।
………आखिरकार इंतजार खत्म हुआ। चार महीने की राजनीतिक उथल-पुथल, अटकलों का बाजार, गुप्त बैठकों और सियासी कयासों के बाद भारतीय जनता पार्टी ने झारखंड में बड़ा फैसला ले लिया है। पार्टी ने अनुभवी नेता और राज्य के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी को विधायक दल का नेता चुन लिया है। यानी अब वह झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाएंगे।
चार महीने की देरी: भाजपा की रणनीति या आंतरिक असमंजस?
झारखंड विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही भाजपा में नेता प्रतिपक्ष के चयन को लेकर उथल-पुथल मची हुई थी। इस पद के लिए कई दिग्गज नेताओं के नाम सामने आए, जिनमें नवीन जायसवाल, नीरा यादव, और सीपी सिंह का नाम प्रमुख था। लेकिन आखिरकार बाजी बाबूलाल मरांडी के हाथ लगी। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने भी इस निर्णय पर मुहर लगा दी। पर्यवेक्षक भूपेंद्र यादव ने विधायकों से चर्चा की । पर्यवेक्षक भूपेन्द्र यादव ने कहा कि विधायकों ने सर्वसम्मति से बाबूलाल मरांडी को नेता चुना है। नवीन जायसवाल,नीरा यादव, राज सिन्हा ने इसके लिए प्रस्ताव रखा। इसे सभी विधायकों ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया।और सर्वसम्मति से मरांडी को नेता चुने जाने की घोषणा की।
लेकिन सवाल यह उठता है कि यह फैसला आने में चार महीने क्यों लगे? क्या भाजपा के भीतर मतभेद थे, या फिर यह किसी रणनीति का हिस्सा था? पार्टी सूत्रों का कहना है कि भाजपा नेतृत्व शुरू से ही मरांडी को लेकर स्पष्ट था, लेकिन सत्ता संतुलन साधने के लिए समय लिया गया और जब आखिरी फैसला हुआ, तो अनुभव और कद को ध्यान में रखते हुए बाबूलाल मरांडी के नाम पर मुहर लगी।
बता दें कि छठी विधानसभा के गठन के बाद से भाजपा विधायक दल के पास नेता नहीं था। भाजपा विधायक दल के नेता ही नेता प्रतिपक्ष होंगे। इस तरह से बाबूलाल मरांडी झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष होंगे। वे अभी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं।
मरांडी की प्रतिक्रिया: पीएम मोदी के सपने को साकार करने की प्रतिबद्धता
नेता प्रतिपक्ष चुने जाने के बाद बाबूलाल मरांडी ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत का जो संकल्प लिया है, उसे पूरा करने में हम भी अपना योगदान देंगे। झारखंड के लोगों की सेवा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए हम पूरी ताकत से काम करेंगे।”
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद से जल्द देंगे इस्तीफा
बाबूलाल मरांडी इस समय झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। अब जब वे नेता प्रतिपक्ष बन गए हैं, तो जल्द ही प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर संगठन में नए अध्यक्ष की नियुक्ति का रास्ता साफ करेंगे। भाजपा नेतृत्व अब इस पर फैसला करेगा कि झारखंड में संगठन की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाए।
बाबू लाल मरंडी की झारखंड की राजनीति मे वापसी
बाबूलाल मरांडी की राजनीति कभी भाजपा तो कभी अलग राह पकड़ती रही। लेकिन यह भी सच है कि वह एक मजबूत जननेता के रूप में उभरे हैं। 2006 में उन्होंने भाजपा से अलग होकर झारखंड विकास मोर्चा बनाया, लेकिन 2020 में दोबारा भाजपा में वापसी कर ली।
उनका सियासी कद केवल झारखंड तक सीमित नहीं रहा। वाजपेयी सरकार में उन्होंने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय में राज्य मंत्री की भूमिका भी निभाई।
बाबूलाल मरांडी: झारखंड की राजनीति का बड़ा नाम
बाबूलाल मरांडी झारखंड के पहले मुख्यमंत्री रह चुके हैं और झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रहे हैं। उन्होंने हमेशा से प्रदेश की राजनीति में एक अहम भूमिका निभाई है। आइए, उनके राजनीतिक सफर पर एक नजर डालते हैं:
जन्म और शिक्षा: 11 जनवरी 1958 को गिरिडीह जिले के कोदईबांक गांव में जन्मे बाबूलाल मरांडी ने रांची विश्वविद्यालय से भूगोल में स्नातकोत्तर किया है।
संघ से जुड़ाव: पढ़ाई के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ गए और बाद में झारखंड क्षेत्र के विश्व हिंदू परिषद (VHP) का संगठन सचिव बने।
मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल: 15 नवंबर 2000 को झारखंड राज्य के गठन के बाद वे राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने और 17 मार्च 2003 तक इस पद पर रहे।
झारखंड विकास मोर्चा की स्थापना: 2006 में भाजपा से अलग होकर उन्होंने झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) की स्थापना की। हालांकि, 2020 में उन्होंने अपनी पार्टी का भाजपा में विलय कर दिया।
लोकसभा में भूमिका: वे 12वीं, 13वीं, 14वीं और 15वीं लोकसभा में सांसद रह चुके हैं। 1998 से 2000 के बीच एनडीए सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री (पर्यावरण एवं वन मंत्रालय) भी रहे।
विधानसभा में वापसी: 2019 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने धनवार सीट से जीत दर्ज की और फिर से झारखंड विधानसभा में सक्रिय हो गए।
नेता प्रतिपक्ष के रूप में उनकी जिम्मेदारी
अब जब बाबूलाल मरांडी झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बन गए हैं, तो उनकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है। आइए, जानते हैं कि विपक्ष के नेता के रूप में उनकी प्रमुख भूमिकाएं क्या होंगी:
विपक्ष का नेतृत्व: सभी विपक्षी दलों को एकजुट करना और उनकी आवाज को विधानसभा में मजबूती से उठाना।
सरकार की नीतियों पर नजर: सरकार के फैसलों की समीक्षा करना और जनता के हितों के खिलाफ नीतियों का विरोध करना।
विधानसभा में प्रभावी बहस: सदन में सरकार को जवाबदेह ठहराना और बहस के दौरान ठोस तर्क प्रस्तुत करना।
जनता की समस्याओं पर ध्यान: जनता की समस्याओं को विधानसभा में उठाना और सरकार से समाधान की मांग करना।
सरकार की जवाबदेही तय करना: किसी भी गलत फैसले या नीतिगत चूक पर सरकार से सवाल पूछना और उसे जवाबदेह ठहराना।
भाजपा की आगे की रणनीति?
अब जब भाजपा ने झारखंड में नेता प्रतिपक्ष का चयन कर लिया है, तो पार्टी की अगली रणनीति सरकार के खिलाफ मजबूत विपक्ष खड़ा करने की होगी। झारखंड में भाजपा अब आगामी चुनावों के लिए जमीन तैयार करेगी और हेमंत सोरेन सरकार को घेरने की योजना बनाएगी।
बाबूलाल मरांडी का झारखंड की राजनीति में कद काफी बड़ा है। उन्होंने मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, सांसद, विधायक और प्रदेश अध्यक्ष जैसे अहम पदों पर काम किया है। अब नेता प्रतिपक्ष के रूप में वे झारखंड में भाजपा के लिए एक मजबूत चेहरा होंगे। भाजपा की रणनीति, झारखंड की राजनीति और विधानसभा में उनकी भूमिका पर सभी की नजरें टिकी होंगी। देखना दिलचस्प होगा कि वे विपक्ष की भूमिका को कितनी मजबूती से निभाते हैं और सरकार को कितनी कड़ी चुनौती देते हैं।
एक छटाक भी खनिज झारखंड से बाहर नहीं जाने दूंगा-हेमंत सोरेन
परवेज़ आलम
झारखंड की सियासत में एक बार फिर केंद्र और राज्य सरकार की तलवारें खिंच गई हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को गिरिडीह में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के 52वें स्थापना दिवस पर केंद्र सरकार को सीधे निशाने पर लिया और 1.36 लाख करोड़ रुपये की बकाया राशि की मांग को लेकर सख्त लहजे में चेतावनी दे डाली।
दिल्ली बनाम झारखंड: सौतेला व्यवहार का आरोप
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंच से साफ कहा कि अगर केंद्र सरकार झारखंड का हक नहीं देती है, तो राज्य की खदानें बंद कर दी जाएंगी। एक छटाक भी खनिज राज्य से बाहर नहीं जाने दिया जाएगा। यह कोई सामान्य बयान नहीं, बल्कि एक बड़े संघर्ष की शुरुआत का ऐलान था। झारखंड खनिज संपदाओं से भरपूर है, लेकिन इसके बावजूद आर्थिक असमानता और सरकारी फंडिंग में भेदभाव की बातें लंबे समय से उठती रही हैं। हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य की आर्थिक बदहाली के लिए पिछली सरकार जिम्मेदार है, लेकिन अब विकास की रफ्तार पकड़ ली गई है।
अबुआ आवास योजना: जब दिल्ली ने पीठ फेर ली तो…
झारखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत राज्य को राशि नहीं मिली, जिससे मजबूरन राज्य सरकार को अपनी योजना शुरू करनी पड़ी। हेमंत सोरेन की सरकार ने अबुआ आवास योजना लॉन्च की, जिससे गरीबों को अपने सिर पर छत नसीब हो सके। यह योजना बताती है कि राज्य सरकार अपने संसाधनों के बलबूते भी जनता को राहत देने को तैयार है। लेकिन यह भी एक हकीकत है कि केंद्रीय सहायता के बिना किसी भी राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं हो सकती।
नीति आयोग की रिपोर्ट: झारखंड की नई उड़ान
हेमंत सोरेन ने कहा कि नीति आयोग भी यह मान रहा है कि झारखंड देश के चार सबसे तेजी से विकास करने वाले राज्यों में से एक है। यह बयान विपक्षी दलों को नागवार गुजर रहा है, क्योंकि झारखंड की यह छवि उनके राजनीतिक एजेंडे में फिट नहीं बैठती। मुख्यमंत्री का यह दावा एक उम्मीद जगाता है कि अगर सही दिशा में योजनाओं का क्रियान्वयन हुआ, तो राज्य गरीबी और पिछड़ेपन के धब्बे से उबर सकता है।
मंईयां योजना पर फर्जीवाड़े का सवाल
महिलाओं के लिए शुरू की गई ‘मंईयां सम्मान योजना’ का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोग फर्जी तरीके से इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। पुरुषों द्वारा महिलाओं के नाम पर पैसा निकालने की खबरें सामने आई हैं। यह सवाल वाकई गंभीर है कि क्या राज्य की योजनाएं उन्हीं लोगों के हाथ में जा रही हैं, जिनके लिए वे बनाई गई हैं? मुख्यमंत्री ने इसे रोकने की बात कही और भ्रष्टाचार पर सख्ती बरतने की चेतावनी दी।
महिलाओं के विकास के लिए आधा बजट
महिलाओं की आर्थिक मजबूती के लिए झारखंड सरकार आधे बजट का इस्तेमाल कर रही है। मंईयां सम्मान योजना को 1000 रुपये से बढ़ाकर 2500 रुपये किया गया। लेकिन इस योजना में फर्जीवाड़े की खबरों ने एक नई बहस छेड़ दी है। क्या सरकार की योजनाओं का असल लाभ जनता तक पहुंच रहा है? यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि जब-जब सरकारी योजनाओं में गड़बड़ी होती है, तो इसका खामियाजा आम जनता को ही भुगतना पड़ता है।
झारखंड बनाम केंद्र: कोयले की राजनीति
झारखंड की अर्थव्यवस्था में कोयले का बड़ा योगदान है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने चेतावनी दी कि अगर राज्य को 1.36 लाख करोड़ रुपये की बकाया राशि नहीं दी गई, तो कोयले की खदानें बंद कर दी जाएंगी। यह चेतावनी सिर्फ राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि एक बड़े संघर्ष का संकेत है। झारखंड की खदानें देशभर में ऊर्जा की आपूर्ति करती हैं। अगर यहां उत्पादन रोका गया, तो इसका असर पूरे देश पर पड़ सकता है।
गांवों से चलेगी सरकार
हेमंत सोरेन ने कहा कि उनकी सरकार सिर्फ रांची से नहीं, बल्कि गांवों से भी चलेगी। उन्होंने पंचायतों और गांवों में जाकर समस्याओं के समाधान की बात कही। जाति, आय और निवासी प्रमाण पत्र अब पंचायत स्तर पर ही बनने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इससे गांव के लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी।
कल्पना सोरेन की भावनात्मक अपील
जेएमएम स्थापना दिवस समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन भी शामिल हुईं। उन्होंने जनता को संबोधित करते हुए भावुक होकर कहा कि जब हेमंत सोरेन जेल में थे, तब झारखंड की जनता ने उनके परिवार को सहारा दिया। कल्पना सोरेन ने कहा कि झारखंड की जनता ने उन्हें बहू नहीं, बल्कि बेटी की तरह अपनाया। यह बयान राजनीतिक रूप से भी अहम था, क्योंकि इससे झामुमो कार्यकर्ताओं और समर्थकों को भावनात्मक रूप से जोड़ने का प्रयास किया गया। इसके पूर्व झामुमो गिरिडीह जिला कमिटी की ओर से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन के सर पर ताज पहनाकर एवं भारी भरकम फूलों का माला पहना दोनों का भव्य स्वागत किया गया। वहीं पार्टी के 52वें जन्मदिन के अवसर पर केक भी काटा गया। बाद में दोनों ने शहीदों के वेदी पर माल्यार्पण किया।
कल्पना मुर्मू सोरेन ने राजनीतिक जीवन की पहली वर्षगांठ मनाई
इंडिया गठबंधन की स्टार प्रचारक और झारखंड मुक्ति मोर्चा की नेत्री कल्पना मुर्मू सोरेन 4 मार्च 2024 को गिरिडीह मे ही पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की थी. गिरिडीह के ऐहतिहासिक झंडा मैदान में पार्टी के स्थापना दिवस समारोह मे कल्पना सोरेन ने झारखंड मुक्ति मोर्चा का दामन थामा था. यहां पर पार्टी की विधिवत सदस्यता लेने के बाद कल्पना मुर्मू सोरेन ने कार्यकर्ताओं में नई जान फूंक दी थी.
भविष्य की राह: क्या वाकई बदलेगा झारखंड?
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दावा किया कि झारखंड को अगले 5 सालों में इतना आगे बढ़ाया जाएगा कि पीछे मुड़कर देखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लेकिन सवाल यह है कि क्या झारखंड इस विकास की रफ्तार को बनाए रख पाएगा? राज्य की सबसे बड़ी चुनौती भ्रष्टाचार और प्रशासनिक पारदर्शिता है। अगर इन दोनों मोर्चों पर सरकार मजबूत कदम उठाने में सफल रही, तो झारखंड वाकई उन राज्यों में शुमार हो सकता है, जो तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
यह राज्य झारखंडियो की सोच से चलेगा-सोनू
सभा को संबोधित करते हुये नगर विकास व पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि जिस पौधा को गिरिडीह में 51 साल पहले शिबू सोरेन ने रोपा था वह आज विशाल वृक्ष का रूप ले लिया है। उन्होने ने कहा कि जनता ने हेमंत सोरेन को 56 सीटों का बहुमत दिया, हेमंत पर यह भरोसा जताया है कि जो काम अधूरे रह गए हैं उसे पूरा करना है. दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने जिस सोना झारखंड की कल्पना की थी वह सोना झारखण्ड धरातल पर उतारने का समय है. मैं आपको भरोसा देना चाहता हूं राजनीतिक साजिश करने वाले कितनी भी ताकत लगा ले लेकिन गिरिडीह के इस ऐतिहासिक झंडा मैदान से यह संदेश स्पष्ट है कि यह राज्य झारखंडियो की सोच से चलेगा.
सभा को सम्बोधित करते राज्यसभा सांसद सरफराज अहमद ने कहा कि हेमंत सोरेन के जेल जाने से कल्पना के रूप में एक बड़ी नेत्री का जन्म हुआ है। इससे भाजपा पश्चाताप कर रहा होगा। हेमंत सोरेन की तरह कल्पना सोरेन को जनता का प्यार मिला. कल जब हेमंत सोरेन की सरकार ने बजट पेश किया तो झारखंडी होने का सबूत भी दिया. सभा को पूर्व विधायक निजामुद्दीन अंसारी, केदार हाजरा, बेबी देवी, प्रणव वर्मा आदि ने भी संबोधित किया। समारोह की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष संजय सिंह ने एवं संचालन अजीत कुमार पप्पू, महालाल सोरेन, शहनवाज ने किया।
संघर्ष जारी रहेगा!
झारखंड के सियासी मंच से एक बार फिर साफ हो गया कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच टकराव जारी रहेगा। कोयला खदानों को बंद करने की चेतावनी, महिलाओं के लिए विशेष योजनाएं, ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार की सक्रियता और केंद्र से बकाया राशि की मांग—ये सारे मुद्दे आने वाले समय में झारखंड की राजनीति को गर्माने वाले हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का बयान एक चेतावनी थी, लेकिन यह चेतावनी कब एक बड़े आंदोलन में बदल जाएगी, यह देखने वाली बात होगी।
गिरिडीह शहर को दुल्हन की तरह सजाया गया था
बता दें कि स्थापना दिवस को लेकर यह पहला मौका था जब झामुमो जिला समिति द्वारा पूरे शहर को दुल्हन की तरह सजाया गया था । शहरी क्षेत्र के सभी प्रमुख मार्गों एवं सभी चौक-चौराहे और सड़कों हरे लाइट से सजाया गया था । जगह-जगह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, दिशोम गुरु शिबू सोरेन, मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन के बड़े-बड़े होर्डिंग लगाए गए थे । वहीं पूरा शहर पार्टी के झंडे से पाट दिया गया था ।