Category: Giridih

  • 10 लाख के इनामी नक्सली को सरेंडर कराने की पहल, जानिए कौन है यह इनामी नक्सली!

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट ………..

    10 लाख के इनामी नक्सली साहेब राम मांझी को सरेंडर कराने की कवायद मे गिरिडीह पुलिस जी जान से जुटी है । पुलिस और प्रशासन ने नक्सलियों को  मुख्यधारा में लौटने की पहल को तेज कर दिया है। शुक्रवार को एएसपी अभियान सुरजीत कुमार और डुमरी एसडीपीओ सुमित कुमार ने इनामी नक्सली साहेब राम मांझी के घर पहुंचे ।  अधिकारियों ने झारखंड सरकार की सरेंडर नीति से नक्सली साहेब राम मांझी के परिवार को अवगत कराया ।

    अधिकारियों ने परिजनों को समझाया कि आत्मसमर्पण न केवल साहेब राम के लिए बल्कि पूरे परिवार के लिए फायदेमंद होगा। उन्होंने बताया कि सरकार सरेंडर करने वाले नक्सलियों को पुनर्वास और अन्य योजनाओं के तहत सहायता प्रदान कर रही है।

    15 साल से घर से दूर है नक्सली.

    परिजनों के मुताबिक, साहेब राम करीब 15-16 साल पहले घर छोड़कर चला गया था। उसके तीन बच्चे हैं, और परिवार अब चाहता है कि वह मुख्यधारा में लौट आए। परिवार ने भरोसा दिलाया कि वे साहेब राम को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित करेंगे।

    10 लाख का इनाम.

    साहेब राम मांझी नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के जोनल कमेटी का सक्रिय सदस्य है। गिरिडीह सहित कई जिलों में उसके खिलाफ कई गंभीर मामले दर्ज हैं, और उस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित है। पुलिस पिछले कुछ वर्षों से उसे सरेंडर करवाने की कोशिश कर रही है।

    नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति और विकास स्थापित करने के लिए पुलिस लगातार प्रयासरत है। नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रोत्साहित करना, सिर्फ कानून व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है यह कहना है पुलिस का ।

    यह पहल न केवल साहेब राम बल्कि अन्य नक्सलियों के लिए भी एक संदेश है कि हथियार छोड़कर शांति और विकास के रास्ते पर चलना संभव है।

  • किसान मेला: नई तकनीक और संभावनाओं का संगम

    गिरिडीह के झंडा मैदान में जिला स्तरीय किसान मेला-सह-फसल प्रदर्शनी कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा और जिला परिषद अध्यक्ष मुनिया देवी ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी, और सैकड़ों किसान उपस्थित थे।

    मेला का उद्देश्य और महत्व. 
    इस किसान मेले का उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से अवगत कराना और उनकी उपज में सुधार के साथ-साथ लागत कम करना है। मेले में कुल 18 स्टॉल लगाए गए, जिनमें कृषि, मत्स्य पालन, पशुपालन, और जैविक खेती से जुड़े संसाधनों और जानकारियों को प्रदर्शित किया गया।

    मुख्य आकर्षण.

    • फसल प्रदर्शनी: विभिन्न फलों, सब्जियों और जैविक उत्पादों की प्रदर्शनियों ने किसानों को नई किस्मों और संरक्षण विधियों से परिचित कराया।
    • तकनीकी नवाचार: कृषि उपकरणों और वैज्ञानिक तकनीकों का लाइव डेमो दिया गया।
    • स्टॉल निरीक्षण: उपायुक्त और जिला परिषद अध्यक्ष ने विभिन्न स्टॉलों का दौरा कर किसानों को उपलब्ध सुविधाओं और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी।

    प्रमुख वक्ताओं के विचार:
    उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा ने कहा, “यह मेला किसानों के लिए ज्ञान और नवाचार का केंद्र है। किसानों को जैविक खेती, फसल प्रबंधन, और विपणन तकनीकों पर जोर देना चाहिए। इन योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना हमारी प्राथमिकता है।”

    जिला परिषद अध्यक्ष मुनिया देवी ने कहा, “तकनीकी खेती को अपनाकर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं। पानी की कमी एक बड़ी समस्या है, और इसे हल करने के लिए चेक डैम और तालाब जैसी योजनाओं पर ध्यान देने की आवश्यकता है।”

    कृषि विशेषज्ञों की सलाह.
    जिला कृषि पदाधिकारी और अन्य विशेषज्ञों ने किसानों को बीज चयन, सिंचाई समय, फसल दूरी, और जैविक खादों के उपयोग जैसे विषयों पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक विधि से खेती करने पर उत्पादन 5-7 गुना तक बढ़ सकता है।

    महिला किसानों का योगदान.
    महिला किसानों को भी प्रोत्साहित किया गया कि वे गृह वाटिका में मौसमी सब्जियां उगाएं और केंचुआ खाद, गोबर खाद का अधिक उपयोग करें। इससे न केवल उनकी आय बढ़ेगी, बल्कि पोषण सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

    सरकार की पहल.
    किसानों को ड्रॉप मोर क्रॉप और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की सलाह दी गई। कार्यक्रम के दौरान आत्मनिर्भर भारत की दिशा में किसानों को पशुपालन और कृषि विज्ञान केंद्रों से जुड़ने की प्रेरणा दी गई।

    यह मेला न केवल कृषि क्षेत्र में नए अवसरों का द्वार खोलता है, बल्कि किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम भी है।

  • गिरिडीह में दर्दनाक हादसा तीन लोगों की मौत

    गिरिडीह: जिले के डुमरी पथ पर चैनपुर में एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया। बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात एक अज्ञात वाहन ने आइसक्रीम बेचने वालों की वैन को टक्कर मार दी। हादसे में वैन में सवार तीन लोगों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान निमियाघाट थाना क्षेत्र के लक्ष्मणटुंडा निवासी 53 वर्षीय देवचंद साव, केंदुआडीह निवासी 16 वर्षीय थानू कुमार और रंगामाटी निवासी 38 वर्षीय घनश्याम साव के रूप में हुई है।

    मेले से लौटते वक्त हुआ हादसा.

    मधुबन थाना के चौकीदार इंद्रदेव महतो ने बताया कि बुधवार को मधुबन में मेले का आयोजन था। तीनों मृतक इसी मेले में आइसक्रीम बेचने आए थे। मेले का काम खत्म करने के बाद वे वैन में सवार होकर घर लौट रहे थे, लेकिन रास्ते में चैनपुर के पास अज्ञात वाहन ने वैन को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि वैन के परखच्चे उड़ गए।

    पुलिस ने संभाला मोर्चा.

    घटना की जानकारी मिलते ही मधुबन थाना पुलिस मौके पर पहुंची। शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेजा गया। गुरुवार दोपहर को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए।

    परिजनों में मातम,

    इस हादसे के बाद से मृतकों के परिवारों में कोहराम मचा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अज्ञात वाहन और उसके चालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

    यह घटना सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि उन गरीब परिवारों की रोजी-रोटी छिन जाने का गम है। ऐसे में सवाल उठता है कि कब तक लापरवाही भरी ड्राइविंग मासूम जिंदगी को यूं खत्म करती रहेगी?

  • महेंद्र सिंह: झारखंड के जननेता को शहादत दिवस पर नमन

    परवेज़ आलम की खास रिपोर्ट ………..

    16 जनवरी झारखंड के लिए एक खास तारीख है। यह दिन उस नेता की याद दिलाता है, जिसने गरीबों, मजदूरों और शोषितों की आवाज़ को बुलंद किया। स्वर्गीय महेंद्र सिंह की शहादत दिवस पर आज झारखंड उन्हें नमन कर रहा है।

    सादगी और संघर्ष से भरा जीवन।

    महेंद्र सिंह का जन्म 1944 में गिरिडीह के छोटे से गांव खंभरा में हुआ। सीमित शिक्षा के बावजूद, उनका ज्ञान और जागरूकता बेमिसाल थी। किताबों और अखबारों से उनका गहरा लगाव था। वह राजनीति को कुर्सी का खेल नहीं, बल्कि जनसेवा का माध्यम मानते थे।

    महेंद्र सिंह ने अपने करियर की शुरुआत लाल सेना के गुरिल्ला नेता के रूप में की। शुरुआत में चुनावी राजनीति के खिलाफ रहने वाले महेंद्र सिंह ने वक्त के साथ अपने विचार बदले और बिहार विधानसभा चुनाव में कूद पड़े। गिरिडीह के बगोदर विधानसभा क्षेत्र से उन्होंने लगातार जीत दर्ज की और गरीबों के सच्चे रहनुमा बने।वे सीपीआई(एमएल) के नेता थे, लेकिन उनकी पहचान केवल पार्टी तक सीमित नहीं थी।

    ईमानदारी और साहस की मिसाल।

    महेंद्र सिंह के लिए राजनीति का मतलब था अन्याय के खिलाफ लड़ाई। उन्होंने खदान मालिकों, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाहियों के खिलाफ आवाज़ उठाई। सत्ता पर तीखा वार करना और जनता के हक की बात करना उनकी पहचान थी। यही वजह है कि वह नक्सल प्रभावित इलाकों में भी उतने ही लोकप्रिय थे जितने ग्रामीण क्षेत्रों में।

    झूठे मामलों में फंसाए गए, पर हिम्मत नहीं हारी।

    1980 के दशक में सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने प्रभावशाली लोगों को चुनौती दी। इसके चलते उन्हें झूठे हत्या के मामले में फंसा दिया गया। निचली अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई, लेकिन हाईकोर्ट ने उन्हें बाइज्जत बरी कर दिया। जेल में भी उन्होंने अन्य कैदियों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।

    शहादत: विचारधारा को कुचलने की कोशिश।

    2005 में 16 जनवरी को महेंद्र सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना उस वक्त हुई, जब वे चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे। उनकी हत्या केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं थी, बल्कि एक विचारधारा को खत्म करने की कोशिश थी। लेकिन महेंद्र सिंह के विचार आज भी हर उस व्यक्ति के दिल में जिंदा हैं, जो न्याय और समानता की बात करता है।

    झारखंड को एक नई राह दिखाने वाले नेता। 

    महेंद्र सिंह की सादगी, ईमानदारी और साहस आज भी झारखंड के लोगों को प्रेरणा देते हैं। उनकी याद में हर साल बगोदर और उनके गांव खंभरा में लोग जुटते हैं। यह साबित करता है कि महेंद्र सिंह का आंदोलन कभी खत्म नहीं होगा।उनकी मौत के सालों बाद आज भी बगोदर विधान सभा में “महेंद्र सिंह तुम जिंदा हो खेतों व खलिहानों में, जनता के अरमानो में नारे गाँव में गूंजती है”.

    महेंद्र सिंह को नमन। उनकी विरासत हमें यह सिखाती है कि राजनीति केवल सत्ता का खेल नहीं, बल्कि जनता के लिए एक मिशन हो सकता है।

  • कौन बनेगा बीजेपी विधायक दल का नेता ? मरांडी, सीपी सिंह और नीरा यादव !

    परवेज़ आलम की खास रिपोर्ट ………

    झारखंड की राजनीति में इन दिनों बीजेपी की खामोशी ने सत्ता पक्ष  को हमलावर होने का पूरा मौका दे दिया है। विधानसभा चुनाव खत्म हुए चार महीने हो गए, लेकिन अब तक बीजेपी अपने विधायक दल के नेता का चयन नहीं कर पाई है। संवैधानिक पदों पर नियुक्तियां अटकी हुई हैं, और सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि दो सप्ताह के भीतर नेता प्रतिपक्ष का चयन किया जाए।

    मरांडी, सीपी सिंह और नीरा यादव!

    पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी इस दौड़ में सबसे आगे हैं। उनके साथ सीपी सिंह और डॉ. नीरा यादव के नामों पर भी गंभीरता से विचार हो रहा है। लेकिन बीजेपी की इस देरी ने सवाल खड़े कर दिए हैं। सत्ता पक्ष  का कहना है कि चुनावी हार के बाद पार्टी नेतृत्व में गहरी निराशा है।

    झामुमो और कांग्रेस के तीखे वार।

    सत्तारूढ़ झामुमो ने इस मुद्दे पर भाजपा को जमकर घेरा है। झामुमो महासचिव विनोद पांडेय ने तंज कसते हुए कहा, “चुनावी हार के बाद भाजपा इतनी निराश हो चुकी है कि विधायक दल का नेता तक नहीं चुन पा रही। राज्य की जनता ने इन्हें नकार दिया है, और अब इनकी सियासत दिशाहीन हो गई है।”

    कांग्रेस ने भी भाजपा पर संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान न करने का आरोप लगाया। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा, “भाजपा को नफरत और झूठ फैलाने के अलावा कुछ नहीं आता। इनकी मंशा संविधान को कमजोर करने की है।”

    मामला उल्टा पड़ गया।

    गौर करने वाली बात यह है कि भाजपा पहले संवैधानिक पदों पर नियुक्ति न होने को लेकर राज्य सरकार पर हमलावर रहती थी। लेकिन अब यही मुद्दा पार्टी के गले की फांस बन गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद विपक्ष को हमले का नया हथियार मिल गया है।

    शीघ्र होगा निर्णय?

    ऐसा माना जा रहा है कि भाजपा केंद्रीय नेतृत्व की निगरानी में जल्द ही विधायक दल के नेता का चयन करेगी। पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाने की संभावना है। सुप्रीम कोर्ट का निर्देश पार्टी पर दबाव बढ़ा रहा है, और फैसला जल्द लिए जाने की उम्मीद की जा रही है।

    क्या मरांडी बन पाएंगे विधायक दल के नेता, या सीपी सिंह और डॉ. नीरा यादव बाज़ी मारेंगे?

  • झारखंड के 4 जिलों में बनेगा जंगल सफारी: 800 करोड़ की योजना पर काम शुरू

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …………..

    रांची: झारखंड सरकार वन्यजीव प्रेमियों को एक खास तोहफा देने जा रही है। राज्य के चार प्रमुख अभयारण्यों में जंगल सफारी विकसित करने की योजना बनाई गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है। पलामू टाइगर रिजर्व, दलमा, हजारीबाग और पारसनाथ वन्यजीव अभयारण्यों में यह सफारी शुरू की जाएगी। लगभग 800 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट को वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में शामिल किया जाएगा।

    क्या खास होगा जंगल सफारी में?

    इन जंगल सफारी में पर्यटक खुली कार या बस में बैठकर वन्यजीवों को बेहद करीब से देख सकेंगे। ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देते हुए स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और पर्यावरण को संरक्षित करने का खास ध्यान रखा जाएगा।

    • खुली सफारी: पर्यटकों को जंगल में खुले में भ्रमण का मौका मिलेगा।
    • ईको-फ्रेंडली टूरिज्म: बांस की झोपड़ियों (बंबू हाट), कैफेटेरिया और कैंटीन जैसी सुविधाएं दी जाएंगी।
    • प्राकृतिक अनुभव: जंगल में घूमने के साथ-साथ वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने का अवसर मिलेगा।

    हर अभयारण्य की अपनी खासियत

    1. पलामू टाइगर रिजर्व: झारखंड का इकलौता टाइगर रिजर्व, जहां बाघ पर्यटकों का मुख्य आकर्षण हैं।
    2. दलमा अभयारण्य: हाथियों के लिए प्रसिद्ध।
    3. हजारीबाग अभयारण्य: सांभर, चीतल, नीलगाय, भालू और लकड़बग्घा जैसे जानवरों का घर।
    4. पारसनाथ अभयारण्य: तेंदुआ, जंगली बिल्ली और साही जैसे दुर्लभ जीव-जंतुओं का बसेरा।

    कैसे हुई योजना की शुरुआत?

    30 दिसंबर को मुख्यमंत्री ने ईको-टूरिज्म के विकास पर जोर देते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया था। इसके बाद पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू  ने बिहार के राजगीर जंगल सफारी का दौरा कर जरूरी अनुभव साझा किए। अब झारखंड में इस प्रोजेक्ट को तेज़ी से लागू किया जा रहा है।

    क्या कहती है सरकार?

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना से न केवल राज्य का पर्यटन बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय लोगों को भी आर्थिक लाभ मिलेगा। पर्यटन और वन विभाग इस प्रोजेक्ट का संयुक्त संचालन करेंगे। हर अभयारण्य पर लगभग 200 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

    पर्यटकों के लिए एक सुनहरा अवसर

    जंगल सफारी झारखंड के प्राकृतिक सौंदर्य और वन्यजीवों का लुत्फ उठाने का बेहतरीन मौका देगा। चाहे बाघ की दहाड़ हो, हाथियों का झुंड हो या तेंदुए की फुर्ती—यह सफारी हर पर्यटक के लिए खास अनुभव होगी।

    झारखंड के पर्यटन में यह पहल एक नए युग की शुरुआत है, जहां पर्यावरण और आर्थिक विकास का संतुलन देखने को मिलेगा।

  • गिरिडीह: धूमधाम से मनाया गया लोहड़ी और मकर संक्रांति

    गिरिडीह: झारखंड के नगर विकास मंत्री और सदर विधायक सुदीव्य कुमार सोनू की ओर से होटल उत्सव उपवन में मकर संक्रांति के अवसर पर पारंपरिक दही, चूड़ा और तिलकुट का प्रसाद ग्रहण करने का कार्यक्रम आयोजित किया गया ।  इस मौके पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कार्यकर्ताओं के अलावा कई गणमान्य लोग शामिल हुये ।  मंत्री सुदीव्य कुमार सोनू ने इस खास अवसर पर झामुमो के साथियों के साथ ही पूरे राज्य वासियों व देशवासियों को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं दीं।

    गुरुद्वारा ग्राउंड में लोहड़ी का रंगारंग उत्सव। 

    इधर सोमवार देर शाम सिख समाज ने गुरुद्वारा ग्राउंड परिसर में लोहड़ी पर्व को बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया। पारंपरिक भंगड़ा और गिद्दा की प्रस्तुति ने माहौल को जीवंत बना दिया। ढोल की थाप पर सिख समुदाय के लोगों ने जमकर नृत्य किया, वहीं पंजाबी गीतों ने आयोजन में चार चांद लगा दिए।

    गिरिडीह गुरुद्वारा के मुख्य प्रधान सेवक गुणवंत सिंह मोंगिया ने सबसे पहले पवित्र लोहड़ी प्रज्वलित की। इसके बाद सिख समुदाय के सदस्यों ने अग्नि की परिक्रमा करते हुए परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की।

    मकर संक्रांति पर मिलन समारोह का आयोजन। 

    गिरिडीह में मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में कई स्थानों पर मिलन समारोह आयोजित किए गए। भाजपा नेता और गिरिडीह बार एसोसिएशन के सचिव चुन्नुकांत ने अपने आवासीय कार्यालय में दही, चूड़ा और तिलकुट के साथ पारंपरिक मकर संक्रांति का आयोजन किया। इस मौके पर चुन्नुकांत ने मकर संक्रांति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, “यह पर्व केवल धार्मिक महत्व नहीं रखता, बल्कि इसका संबंध विज्ञान, कृषि और सामाजिक जीवन से भी है। यह दिन शुभ कार्यों की शुरुआत और आपसी मेल-मिलाप का प्रतीक है।”

    इंजीनियर विनय सिंह के कार्यालय में भी पर्व की धूम।

    सेवानिवृत्त इंजीनियर विनय सिंह के बोड़ो कार्यालय परिसर में भी मकर संक्रांति के मौके पर भव्य मिलन समारोह आयोजित हुआ। यहां भी पारंपरिक दही, चूड़ा और तिलकुट के साथ पर्व मनाया गया। विनय सिंह ने इस अवसर पर कहा, “मकर संक्रांति हमारे सामाजिक जीवन में मेल-जोल और परंपराओं का प्रतीक है। यह पर्व धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।”

    इस कार्यक्रम में भाजपा जिला अध्यक्ष महादेव दुबे, जिला परिषद अध्यक्ष मुनिया देवी, प्रदेश कार्य समिति सदस्य सुरेश साहू, जिला महामंत्री महेंद्र वर्मा, नवीन सिन्हा, रंजीत राय, प्रमोद सिंह, और कई अन्य प्रमुख लोग शामिल हुए।

    उत्सवों ने दिया सामाजिक एकता का संदेश।

    गिरिडीह में आयोजित इन दोनों प्रमुख पर्वों ने यह संदेश दिया कि सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों के माध्यम से सामाजिक जुड़ाव और समर्पण को मजबूत किया जा सकता है। लोहड़ी और मकर संक्रांति के माध्यम से गिरिडीह के लोगों ने मिलन, खुशहाली और समृद्धि का संदेश पूरे जिले में फैलाया।

  • पत्रकार पर हमले के विरोध में प्रेस क्लब का सांकेतिक धरना

    गिरिडीह: पत्रकारिता के पेशे को सुरक्षित रखने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए प्रेस क्लब ने सोमवार को गिरिडीह में सांकेतिक धरना दिया। यह धरना पत्रकार अमरनाथ सिन्हा और अन्य दो पत्रकारों पर हुए हमले के विरोध में आयोजित किया गया।

    प्रेस क्लब की एकजुटता
    इस धरने का नेतृत्व प्रेस क्लब के अध्यक्ष पत्रकार राकेश सिन्हा ने किया, जबकि संचालन महासचिव अरविंद कुमार के हाथों में रहा। इस विरोध प्रदर्शन में गिरिडीह के प्रमुख पत्रकार लक्ष्मी अग्रवाल, अमरनाथ सिन्हा,श्रीकांत सिंह,मृणाल सिंहा, सूरज सिन्हा, अविनाश प्रसाद, आलोक रंजन, अंजनी सिन्हा,  समेत कई अन्य पत्रकार उपस्थित रहे।

    क्या है मामला?
    बताया गया कि हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद नगर निगम के टोल टैक्स पॉइंट से अवैध वसूली को लेकर थी। इस अवैध वसूली की कवरेज के दौरान अमरनाथ सिन्हा और अन्य पत्रकारों पर हमला किया गया। इस मामले में चार लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन टोल टैक्स संवेदक के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

    मंत्री का आश्वासन और धरने का समापन
    धरने की सूचना पाकर नगर विकास मंत्री सुदीब्य कुमार सोनू मौके पर पहुंचे और संवेदक पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। मंत्री के सकारात्मक रुख और भरोसे के बाद प्रेस क्लब ने धरना समाप्त किया।

    पत्रकारिता पर हमला लोकतंत्र पर हमला
    प्रेस क्लब के सदस्यों ने स्पष्ट किया कि यह विरोध केवल पत्रकारों पर हमले का नहीं, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की सुरक्षा के लिए है। पत्रकारों ने मांग की कि इस घटना से जुड़े सभी आरोपियों पर सख्त कार्रवाई हो और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

    यह धरना गिरिडीह के पत्रकारों की एकजुटता और उनकी आवाज को दबाने के खिलाफ उनके साहस का प्रतीक है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि पत्रकारिता न केवल सच की तलाश है, बल्कि इसके लिए खड़ा होना भी उतना ही जरूरी है।

     

  • गिरिडीह :  बहुचर्चित डकैती कांड मे पुलिस को मिली सफलता,चार गिरफ्तार

    गिरिडीह जिले के बिरनी थाना क्षेत्र के बिराजपुर में सुरेश मोदी के घर हुई लगभग 20 लाख रुपये की डकैती का मामला सुलझाते हुए पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। इस मामले में चार शातिर डकैतों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें मोहम्मद मोहतमीम और करण दास उर्फ दास बाबू धनबाद के तोपचांची थाना के हैं, जबकि गुलजार और हातिम धनबाद जिले के कतरास थाना  के हैं। पुलिस कप्तान डॉ. बिमल कुमार ने मीडिया को बताया कि इस घटना के त्वरित खुलासे के लिए गठित SIT ने बेहतरीन काम किया है।

    बरामदगी और पुलिस की सक्रियता
    गिरफ्तार अपराधियों के पास से पुलिस ने घटना में उपयोग की गई 2 मोटरसाइकिलें, 5 मोबाइल फोन, 1 चाकू और 55,000 रुपये नकद बरामद किए हैं। वहीं, इस कांड में शामिल अन्य अपराधियों की तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। एसडीपीओ धनंजय राम के नेतृत्व में गठित SIT ने घटना के खुलासे के लिए तकनीकी और मानवीय साक्ष्य का सहारा लिया।

    कैसे दिया गया घटना को अंजाम?
    घटना बीते 2/3 जनवरी की रात की है। डकैतों ने रात करीब 1 बजे सुरेश मोदी के घर पर धावा बोला। बांस की सीढ़ी का इस्तेमाल कर घर के अंदर घुसे और घर के बुजुर्ग व्यक्ति को हथियार का भय दिखाकर परिवार के अन्य सदस्यों को बंधक बना लिया। इसके बाद अलमारी से गहने और नकदी के साथ किराने की दुकान में रखे पैसे भी लूट ले गए।

    गिरफ्तार अपराधियों का इतिहास
    गिरफ्तार चारों अपराधी पहले भी कई गंभीर अपराधों में लिप्त रहे हैं।

    • मोहम्मद मोहतमीम: कतरास थाना कांड संख्या 126/2021 में संलिप्त।
    • गुलजार अंसारी: निमियाघाट, कतरास, और पुरुलिया के कई कांडों में शामिल।
    • हातिम: नरेंद्रपुर और सरिया थाना क्षेत्र में दर्ज कई मामलों का आरोपी।

    पुलिस का दावा और अगली कार्रवाई
    पूछताछ में इन अपराधियों ने घटना में अपनी संलिप्तता स्वीकार की और बताया कि कुल 13 लोगों ने मिलकर इस डकैती को अंजाम दिया। पुलिस अब फरार अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है।

    इस घटना का खुलासा पुलिस की त्वरित कार्रवाई और सूझबूझ का नतीजा है, लेकिन यह गिरिडीह और आसपास के इलाकों में अपराधियों के बढ़ते हौसले पर सवाल भी खड़े करता है। पुलिस के लिए यह जरूरी है कि वे अपराधियों के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर क्षेत्र में कानून ब्यवस्था बहाल करें।

  • दो नक्सली गिरफ्तार,मुखिया पति को दिया था धमकी

    गिरिडीह :मुखिया पति और पारा शिक्षक को धमकी देने वाले दो नक्सलियों को पुलिस ने किया गिरफ्तार है। गिरफ्तार दोनों नक्सली बिहार के जमुई जिले के बटिया थाना क्षेत्र का रहने वाला है। गिरिडीह के पुलिस कप्तान डॉ. बिमल कुमार ने मीडिया को बताया कि गुनियाथर के मुखिया पति और उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय हड़मातरी के पारा शिक्षक सफदर अली अहमद को नक्सलियों ने पर्चे के माध्यम से धमकी दी थी। इसके बाद फोन पर धमकाते हुए पैसे की मांग की गई। इस घटना से भयभीत होकर सफदर अली ने गुनियाथर ओपी में मामला दर्ज कराया था।

    पुलिस की कार्रवाई:
    घटना की गंभीरता को देखते हुए गिरिडीह एसपी डॉ. बिमल कुमार ने एक विशेष टीम का गठन किया। टीम का नेतृत्व एएसपी (अभियान) सुरजीत कुमार, एसडीपीओ खोरीमहुआ राजेंद्र प्रसाद ने किया।  टीम ने झारखंड और बिहार के विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर जमुई जिले के बटिया थाना क्षेत्र के लखनपुर निवासी बुधन मुर्मू (पिता: सुरेश मुर्मू) और बुढियालापर निवासी अनवर अंसारी (पिता: सिद्दिक मियां) को गिरफ्तार किया।

    एसपी डॉ बिमल ने बताया कि दोनों नक्सली पहले भी कई मामलों में वांछित थे और उन्होंने अपनी संलिप्तता भी स्वीकार की है। पुलिस ने धमकी देने में इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया है।