व्यवहार न्यायालय परिसर में पॉक्सो एक्ट और मोटर वाहन दुर्घटना वाद पर वर्कशॉप का आयोजन

परवेज़ आलम. The News Post4u.

गिरिडीह :  व्यवहार न्यायालय परिसर में पॉक्सो अधिनियम 2012 और मोटर वाहन दुर्घटना वाद पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह वर्कशॉप विशेष रूप से उन मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को तेज़ और प्रभावी बनाने हेतु सभी संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से रखी गई थी। इसका आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकार, गिरिडीह द्वारा किया गया ।

 दीप प्रज्वलन के साथ हुआ उद्घाटन.

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसमें कई प्रमुख अतिथियों ने भाग लिया। इनमें मार्तंड प्रताप मिश्रा (प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश), धनंजय कुमार (प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय),  मनोज कुमार झा (अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश), उपायुक्त रामनिवास यादव, व  पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार शामिल थे।

 पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाना उद्देश्य: न्यायमूर्ति मिश्रा.

अपने संबोधन में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मिश्रा ने कहा कि पॉक्सो और मोटर वाहन दुर्घटना से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन अनिवार्य है। इससे पीड़ितों को त्वरित न्याय देने में मदद मिलेगी। उन्होंने सभी स्टेकहोल्डर्स से आग्रह किया कि वे इन दिशा-निर्देशों को गंभीरता से अपनाएं।

 उपायुक्त ने की सहभागिता की सराहना.

उपायुक्त रामनिवास यादव ने कहा कि यह वर्कशॉप पुलिसकर्मियों, डॉक्टरों, और अधिवक्ताओं के लिए अत्यंत उपयोगी है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि कार्यशाला में साझा किए गए सुझावों और निर्देशों का पालन कर व्यवस्था को और बेहतर बनाएं।

पुलिस अधीक्षक ने किया कर्तव्यों पर बल.

एसपी डॉ. बिमल कुमार ने कहा कि पॉक्सो और सड़क दुर्घटना जैसे मामलों में पुलिस की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी बेहद अहम होती है। उन्होंने अधिकारियों को उनके कर्तव्यों की विस्तार से जानकारी दी।

तकनीकी सत्र: कानून की बारीकियों पर चर्चा.

  • न्यायाधीश राजेश कुमार बग्गा और हरिओम कुमार ने मोटर वाहन दुर्घटना वादों से जुड़े कानूनी प्रावधानों पर प्रकाश डाला।
  • डीएसपी मो. कौसर अली ने “हिट एंड रन” मामलों में मुआवजा प्रक्रिया और जांच के नियमों पर विस्तार से जानकारी दी।
  • विशाल कुमार (अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश) और रीमा कुमारी (न्यायिक दंडाधिकारी) ने पॉक्सो मामलों में संवेदनशीलता और पीड़ितों से व्यवहार की व्याख्या की।

वर्कशॉप में रही भारी सहभागिता.

कार्यक्रम में गिरिडीह न्यायालय के न्यायिक पदाधिकारी, जिला प्रशासन के कार्यपालक अधिकारी, पुलिस विभाग के प्रतिनिधि, लोक अभियोजक, अधिवक्ता संघ के सदस्य, लीगल एड डिफेंस टीम, मध्यस्थ और न्यायालय कर्मी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन न्यायिक दंडाधिकारी सुश्री स्मृति त्रिपाठी ने किया।

इस तरह की कार्यशालाएं न केवल न्यायिक व्यवस्था को सशक्त बनाती हैं, बल्कि न्याय प्रक्रिया को पीड़ितों के लिए सहज, संवेदनशील और त्वरित बनाती हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकार का यह प्रयास न्याय व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक अहम पहल है।

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