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  • उसरी महोत्सव का भव्य शुभारंभ, पर्यावरण संरक्षण के लिए जुटे जिले के लोग

    गिरिडीह जिले में तीन दिवसीय उसरी महोत्सव का आज शास्त्री नगर स्थित अमित बर्दियार छठ घाट में भव्य उद्घाटन हुआ। पर्यावरण को समर्पित इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य उसरी नदी को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने के उपायों पर जोर देना है। महोत्सव का शुभारंभ जिला उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा, डीएफओ मनीष तिवारी, और सदर एसडीओ यशवंत श्रीकांत बिस्पुटे ने संयुक्त रूप से किया।

    जागरूकता का संदेश.

    कार्यक्रम का संचालन कर रहे कोर कमेटी के संयोजक राजेश सिन्हा ने जिले के बुद्धिजीवियों और पर्यावरण प्रेमियों के विचार साझा करते हुए कहा कि गिरिडीह की जनता को ऐसे मुद्दों पर आगे आकर पहल करनी होगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही फैक्ट्री क्षेत्रों में भी सुधार की दिशा में कार्य शुरू किया जाएगा।

    मुख्य अतिथि  नमन प्रियेश लकड़ा ने नदियों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, “जल ही जीवन है और वायु ही प्राणदायिनी। नदियों को बचाने में समाज की सहभागिता बेहद जरूरी है।” उन्होंने उसरी बचाव अभियान को निस्वार्थ भाव से प्रकृति संरक्षण में जुटा हुआ बताते हुए इसे सरकार और प्रशासन का पूरा समर्थन देने की बात कही।

    वन प्रमंडल पदाधिकारी मनीष तिवारी ने जल, जंगल, और जमीन को बचाने की आवश्यकता पर बल देते हुए बताया कि उसरी नदी के किनारे हजारों पेड़ लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा, “उसरी बचाव अभियान की टीम शानदार काम कर रही है और भविष्य में और बेहतर करेगी।”

    खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन.

    महोत्सव में जागरूकता बढ़ाने के लिए नदी में खो-खो और कबड्डी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। खेलों का उद्घाटन उपायुक्त ने खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर किया। खेल आयोजन नुरुल हुदा के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

    कार्यक्रम की शुरुआत भावपूर्ण नृत्य प्रदर्शन से हुई, जिसमें बच्चियों ने अपनी प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया। इस भव्य आयोजन में सैकड़ों की संख्या में महिलाएं, पुरुष, बच्चे और स्कूल के विद्यार्थी उपस्थित थे।

    उसरी बचाओ का संदेश.

    कोर कमेटी के विनय कुमार सिंह ने कहा, “यह महोत्सव हमें प्रेरणा देता है कि हम सब मिलकर अपनी नदियों को बचाने के लिए आगे आएं।” महोत्सव के दौरान गिरिडीह के पर्यावरण प्रेमियों और बुद्धिजीवियों ने अपने विचार साझा कर उपस्थित लोगों को जागरूक किया।
    उसरी महोत्सव ने गिरिडीह में पर्यावरण संरक्षण और नदियों के महत्व को लेकर जागरूकता फैलाने में बड़ी भूमिका निभाई। इस तरह के आयोजन न केवल प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी को रेखांकित करते हैं, बल्कि समाज को एकजुट होकर कार्य करने की प्रेरणा भी देते हैं।

  • किसान मेला: नई तकनीक और संभावनाओं का संगम

    गिरिडीह के झंडा मैदान में जिला स्तरीय किसान मेला-सह-फसल प्रदर्शनी कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा और जिला परिषद अध्यक्ष मुनिया देवी ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी, और सैकड़ों किसान उपस्थित थे।

    मेला का उद्देश्य और महत्व. 
    इस किसान मेले का उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से अवगत कराना और उनकी उपज में सुधार के साथ-साथ लागत कम करना है। मेले में कुल 18 स्टॉल लगाए गए, जिनमें कृषि, मत्स्य पालन, पशुपालन, और जैविक खेती से जुड़े संसाधनों और जानकारियों को प्रदर्शित किया गया।

    मुख्य आकर्षण.

    • फसल प्रदर्शनी: विभिन्न फलों, सब्जियों और जैविक उत्पादों की प्रदर्शनियों ने किसानों को नई किस्मों और संरक्षण विधियों से परिचित कराया।
    • तकनीकी नवाचार: कृषि उपकरणों और वैज्ञानिक तकनीकों का लाइव डेमो दिया गया।
    • स्टॉल निरीक्षण: उपायुक्त और जिला परिषद अध्यक्ष ने विभिन्न स्टॉलों का दौरा कर किसानों को उपलब्ध सुविधाओं और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी।

    प्रमुख वक्ताओं के विचार:
    उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा ने कहा, “यह मेला किसानों के लिए ज्ञान और नवाचार का केंद्र है। किसानों को जैविक खेती, फसल प्रबंधन, और विपणन तकनीकों पर जोर देना चाहिए। इन योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना हमारी प्राथमिकता है।”

    जिला परिषद अध्यक्ष मुनिया देवी ने कहा, “तकनीकी खेती को अपनाकर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं। पानी की कमी एक बड़ी समस्या है, और इसे हल करने के लिए चेक डैम और तालाब जैसी योजनाओं पर ध्यान देने की आवश्यकता है।”

    कृषि विशेषज्ञों की सलाह.
    जिला कृषि पदाधिकारी और अन्य विशेषज्ञों ने किसानों को बीज चयन, सिंचाई समय, फसल दूरी, और जैविक खादों के उपयोग जैसे विषयों पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक विधि से खेती करने पर उत्पादन 5-7 गुना तक बढ़ सकता है।

    महिला किसानों का योगदान.
    महिला किसानों को भी प्रोत्साहित किया गया कि वे गृह वाटिका में मौसमी सब्जियां उगाएं और केंचुआ खाद, गोबर खाद का अधिक उपयोग करें। इससे न केवल उनकी आय बढ़ेगी, बल्कि पोषण सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

    सरकार की पहल.
    किसानों को ड्रॉप मोर क्रॉप और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की सलाह दी गई। कार्यक्रम के दौरान आत्मनिर्भर भारत की दिशा में किसानों को पशुपालन और कृषि विज्ञान केंद्रों से जुड़ने की प्रेरणा दी गई।

    यह मेला न केवल कृषि क्षेत्र में नए अवसरों का द्वार खोलता है, बल्कि किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम भी है।

  • सरकार की योजनाओं को जनकल्याण के लिए प्रभावी बनाएँ अधिकारी -मंत्री अन्नपूर्णा देवी

    गिरिडीह : जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति ‘दिशा’ की बैठक गुरुवार को  समाहरणालय स्थित सभागार कक्ष में आयोजित हुई। इस बैठक की अध्यक्षता कोडरमा लोकसभा क्षेत्र की सांसद एवं केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री, श्रीमतीने की। बैठक में जिले में चल रही विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर व्यापक चर्चा की गई। साथ ही, पूर्व में दिए गए निर्देशों की समीक्षा और उन पर विचार-विमर्श किया गया। उपायुक्त ने वर्तमान में संचालित योजनाओं की प्रगति के बारे में जानकारी दी।

    चर्चा के मुख्य बिंदु और निर्देश:

    बैठक में स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास और कल्याणकारी योजनाओं के क्षेत्र में प्रगति और चुनौतियों की समीक्षा की गई। केंद्रीय मंत्री ने निर्देश दिया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में सभी योजनाओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए। लंबित मुद्दों को तत्काल हल करने पर जोर दिया गया।

    पेयजल और स्वच्छता:

    पेयजल योजनाओं की गहन समीक्षा की गई। मंत्री ने उपायुक्त की अगुवाई में एक निगरानी समिति गठित करने के निर्देश दिए, जिसमें पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अधिकारियों और स्थानीय प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा। यह समिति परियोजनाओं की सतत निगरानी करेगी और क्षेत्रीय समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करेगी।

    बुनियादी ढांचा विकास:

    सड़क और पुल निर्माण परियोजनाओं के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए एक अलग समिति के गठन की घोषणा की गई। इस पहल का उद्देश्य पारदर्शिता को बढ़ावा देना और निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है।

    स्वास्थ्य क्षेत्र:

    स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों, दवाइयों और उपकरणों की उपलब्धता को लेकर चर्चा हुई। सिविल सर्जन को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया कि सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हों। बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू कर स्टाफ की उपस्थिति पर निगरानी रखी जाएगी।

    सामाजिक कल्याण योजनाएं:

    सामाजिक कल्याण विभाग की योजनाओं की समीक्षा करते हुए मंत्री ने आंगनबाड़ी केंद्रों और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के सतत निरीक्षण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होना चाहिए।

    शिक्षा क्षेत्र:

    जर्जर विद्यालय भवनों की स्थिति पर चर्चा हुई। जिला शिक्षा अधिकारी और संबंधित अभियंताओं को विद्यालय भवनों का आकलन कर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।

    बिजली आपूर्ति:

    बिजली बिल और आपूर्ति से संबंधित शिकायतों को लेकर चर्चा हुई। मंत्री ने कार्यपालक अभियंता को इन शिकायतों को त्वरित सुलझाने और सही बिलिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    जनप्रतिनिधियों की राय:

    बैठक में विभिन्न जनप्रतिनिधियों ने स्वास्थ्य, मनरेगा, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और कौशल विकास योजनाओं जैसे क्षेत्रों में विकास कार्यों की प्रगति पर अपने विचार साझा किए।

    • बगोदर विधायक नागेंद्र  महतो ने ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य के विकास पर जोर देते हुए सभी विभागों से कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सही लाभार्थियों तक पहुंचाने की अपील की।
    • जमुआ विधायक मंजु कुमारी  ने योजनाओं के क्रियान्वयन में गुणवत्ता बनाए रखने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
    • डुमरी विधायक जयराम महतो ने समयबद्ध तरीके से योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने पर जोर दिया।

    उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा ने कहा कि जिला प्रशासन की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाएं आम जनता तक सुगमता से पहुंचे। उन्होंने कहा, “कार्य की गुणवत्ता के साथ समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता है। सभी अधिकारी सकारात्मक सोच के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाएं।”

    बैठक का समापन केंद्रीय मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी के इस संदेश के साथ हुआ कि योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए पारदर्शिता, गुणवत्ता, और सामूहिक जिम्मेदारी आवश्यक है। सभी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से सरकार की योजनाओं को जनकल्याण के लिए प्रभावी बनाने का आह्वान किया गया।

     

  • गिरिडीह : सामुदायिक पुलिसिंग कार्यक्रम,ग्रामीणों से सीधा संवाद

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट………

    गिरिडीह जिले में सरकार और प्रशासन मिलकर वंचित समुदायों के उत्थान की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं। इसी कड़ी में आज पीरटाड़ प्रखंड के नौकोनिया गांव में एक अनोखा सामुदायिक पुलिसिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा और पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार ने ग्रामीणों से सीधा संवाद किया और सरकारी योजनाओं के लाभ हर जरूरतमंद तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता जताई।

    पारंपरिक स्वागत और कल्याण योजनाओं की जानकारी।
    कार्यक्रम का आरंभ पारंपरिक रीति-रिवाजों से हुआ, जहां उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक समेत अन्य अधिकारियों का ग्रामीणों ने गर्मजोशी से स्वागतकिया। उपायुक्त ने ग्रामीणों को केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी और अपील की कि सभी इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।

    मनरेगा कार्ड और ठंड से बचाव के लिए कंबल वितरण।
    कार्यक्रम में उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक ने जरूरतमंदों के बीच मनरेगा जॉब कार्ड वितरित किए। साथ ही, बढ़ती ठंड को देखते हुए गर्म कपड़े और कंबल बांटे गए, ताकि ग्रामीण शीतलहर से बच सकें। उपायुक्त ने ठंड से बचाव के लिए जरूरी एहतियात बरतने की अपील भी की।

    बच्चों के लिए खेल सामग्री और शैक्षणिक सामग्रियां वितरित।
    उत्क्रमित मध्य विद्यालय के बच्चों को पढ़ाई और खेल के प्रति प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से खेल सामग्री जैसे बैट, बॉल, फुटबॉल और शैक्षणिक सामान—कॉपी, पेन, पेंसिल—साथ ही स्वेटर, जूते और मोजे वितरित किए गए। इस दौरान उपायुक्त ने बच्चों से संवाद कर उनकी पढ़ाई और रुचियों के बारे में जाना। उन्होंने कहा कि बच्चों को शिक्षा के साथ खेलकूद में भी भाग लेना चाहिए।

    गर्भवती महिलाओं और बच्चों पर विशेष ध्यान।
    कार्यक्रम में गर्भवती महिलाओं का गोदभराई और बच्चों का अन्नप्राशन किया गया। उपायुक्त ने गर्भवती महिलाओं को पोषण और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करते हुए सात्विक और पौष्टिक भोजन के महत्व पर जोर दिया। महिलाओं को उचित आहार और स्वच्छता से संबंधित विस्तृत जानकारी दी गई।

    सामुदायिक पुलिसिंग: भरोसे और जुड़ाव की पहल।
    इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार ने सामुदायिक पुलिसिंग के महत्व पर जोर दिया और कहा कि यह कार्यक्रम पुलिस और जनता के बीच विश्वास को मजबूत करने का जरिया है। ग्रामीणों को भरोसा दिलाया गया कि उनकी सुरक्षा और भलाई प्रशासन की प्राथमिकता है।

    अधिकारियों की उपस्थिति।
    कार्यक्रम में पूर्वी वन प्रमंडल पदाधिकारी, सीआरपीएफ के पदाधिकारी, और कई पुलिस अधिकारी मौजूद थे। सभी ने सामुदायिक जुड़ाव को और सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता जताई।
    गिरिडीह के सुदूर इलाकों में आयोजित यह सामुदायिक कार्यक्रम सिर्फ योजनाओं के प्रचार-प्रसार तक सीमित नहीं था, बल्कि यह सरकार और प्रशासन की ओर से जरूरतमंदों तक पहुंचने की एक सकारात्मक पहल थी। नौकोनिया गांव के इस आयोजन ने दिखाया कि जब प्रशासन और जनता मिलकर काम करते हैं, तो बदलाव की राह आसान हो जाती है।

     

  • हर जान कीमती है, इसे बचाने की मुहिम पर कौन जुटा है,यहाँ जानिए

    गिरिडीह : ज़िले में सड़क सुरक्षा पर जोर देने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा जागरूकता रथ  आज उपायुक्तकी अगुवाई में समाहरणालय भवन से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। अब ये रथ ज़िले के हर कोने में जाकर लोगों को सड़क सुरक्षा का पाठ पढ़ाएगा।

    क्या है खास इस रथ में?
    यह कोई आम रथ नहीं, यह सड़क पर चलते ‘सुरक्षा की पाठशाला’ है। इसमें ट्रैफिक नियम, हेलमेट पहनने की अनिवार्यता, सीट बेल्ट का महत्व, और नशा करके गाड़ी न चलाने जैसे संदेश हर घर और हर दिल तक पहुंचाए जाएंगे। और तो और, गुड सेमेरिटन (अच्छे समरीटन्स) की योजना का भी बड़े स्तर पर प्रचार किया जाएगा। अगर आपने सड़क हादसे में किसी की मदद की, तो प्रशासन आपको ‘नायक’ मानेगा और पूछताछ से राहत भी देगा।

    उपायुक्त ने क्या कहा?
    मीडिया से बातचीत में उपायुक्त ने साफ कहा, “हमारा लक्ष्य सिर्फ नियम बनाना नहीं, बल्कि लोगों को उनकी ज़िम्मेदारी का एहसास दिलाना है। सड़क पर हादसों को रोकने के लिए लोगों को भी अपनी सोच बदलनी होगी।”

    पुलिस अधीक्षक समेत तमाम अधिकारी मौजूद
    इस मुहिम को सफल बनाने के लिए पूरा प्रशासन एकजुट दिखा। पुलिस अधीक्षक, उप विकास आयुक्त, और अन्य बड़े अधिकारी मौके पर मौजूद थे।

    जागरूकता से हादसे कम हो सकते हैं!
    तो गिरिडीह वालों, यह समय है अपनी सुरक्षा को लेकर जागरूक होने का। हेलमेट और सीट बेल्ट सिर्फ कानून की बात नहीं, आपकी ज़िंदगी का सवाल है। और ये रथ, उम्मीद करता है कि गिरिडीह में सुरक्षा का नया अध्याय लिखेगा।

  • बेटियों के लिए प्रशासन का सख्त रुख, PC & PNDT ACT पर उपायुक्त की सख्ती

    गिरिडीह जिले में PC & PNDT ACT से संबंधित एक महत्वपूर्ण बैठक उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा की अध्यक्षता में सोमवार को हुई। इस बैठक में मुख्य रूप से अल्ट्रासाउंड क्लीनिक/सेंटर की स्थिति, पिछले निर्णयों का अनुपालन, नए अल्ट्रासाउंड केंद्रों के आवेदन, और लाइसेंस रिन्यूअल पर चर्चा की गई।
    उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिले में बिना लाइसेंस के संचालित हो रहे क्लीनिकों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए उन्होंने छापेमारी दल का गठन कर गहन जांच अभियान चलाने का आदेश दिया। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा कि अवैध क्लीनिक बंद हों और लिंग परीक्षण पर पूरी तरह रोक लगे।
    बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान को मजबूती.
    उपायुक्त ने कहा कि गिरिडीह जिला प्रशासन “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” मुहिम के तहत लिंग अनुपात सुधारने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि PC & PNDT ACT, 1994 का उद्देश्य गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व लिंग चयन और लिंग आधारित गर्भपात पर पूरी तरह से रोक लगाना है। इसके तहत सभी अनुमंडल पदाधिकारियों को अपने क्षेत्र में अधिनियम के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
    सार्वजनिक जागरूकता पर जोर.
    उपायुक्त ने प्रखंड और जिला स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की भी योजना पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में बेटियों के महत्व को रेखांकित किया जाएगा।
    विशेषज्ञों की उपस्थिति में हुआ विचार-विमर्श.
    बैठक में सिविल सर्जन, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक, आईएमए शाखा के अध्यक्ष, और नामित नोडल पदाधिकारी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इसके अलावा, समाजसेवी, चिकित्सक, और अधिवक्ता भी उपस्थित थे। सभी ने इस दिशा में ठोस और प्रभावी कदम उठाने के सुझाव दिए।
    लिंग अनुपात सुधारने के लिए ठोस कदम.
    इस बैठक में यह सुनिश्चित किया गया कि सभी नए अल्ट्रासाउंड केंद्रों के आवेदन उचित जांच के बाद ही स्वीकृत किए जाएंगे। साथ ही, प्रशासन ने यह भी तय किया कि अवैध गतिविधियों पर नजर रखते हुए जिला स्तर पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।
    गिरिडीह प्रशासन का यह प्रयास लिंग अनुपात सुधारने और बेटियों को समान अवसर देने की दिशा में एक सशक्त कदम माना जा रहा है।

  • ग्रामीण विकास योजनाओं की समीक्षा : मंत्री का सख्त निर्देश

     

    गिरिडीह : गिरिडीह में ग्रामीण विकास विभाग और पंचायती राज विभाग की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा बैठक मंत्री श्रीमती दीपिका पांडे सिंह की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इस बैठक में उप विकास आयुक्त, सदर अनुमंडल पदाधिकारी, कार्यपालक अभियंता समेत जिले के सभी प्रमुख अधिकारी और कर्मी उपस्थित थे।

    बैठक में मंत्री ने विभागीय योजनाओं की अद्यतन स्थिति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि निर्धारित लक्ष्यों को समय पर और पारदर्शिता के साथ पूरा किया जाए। उन्होंने मनरेगा, अबुआ आवास योजना, और झारखंड मुख्यमंत्री मईयां सम्मान योजना की प्रगति की विशेष रूप से समीक्षा की।

    मुख्य निर्देश और चर्चा के बिंदु:

    1. मनरेगा और आवास योजना: मंत्री ने इन योजनाओं के तय लक्ष्य को शीघ्र पूरा करने के आदेश दिए।
    2. लाभुकों को समय पर लाभ: उन्होंने जोर दिया कि योजनाओं का लाभ प्राथमिकता के साथ लाभुकों तक पहुंचे।
    3. झारखंड मुख्यमंत्री मईयां सम्मान योजना: 28 तारीख को आयोजित कार्यक्रम में लाभुकों की संख्या सुनिश्चित करने के लिए प्रखंड अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए।

    बैठक के दौरान सभी बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया गया और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अधिकारियों को जवाबदेह बनाने की बात कही गई। श्रीमती दीपिका पांडे सिंह ने पारदर्शी और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने पर बल देते हुए कहा, “ग्रामीण विकास योजनाएं ग्रामीणों के जीवन में बदलाव लाने का माध्यम हैं, और इन्हें समय पर पूरा करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।”

    ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग की योजनाओं की सफलता सुनिश्चित करने के लिए यह बैठक एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।

     

  • सभी औद्योगिक इकाइयों को इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर (ESP) मशीन लगाना आवश्यक –डीसी

    गिरिडीह जिले में अवैध बालू खनन, डंपिंग और स्टोन माइंस के संचालन पर गहन जांच और कारखानों से निकलने लने वाले धुएं व दूषित जल के निष्पादन में प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश गिरिडीह डीसी नमन प्रियेश लकड़ा ने दिया है । उन्होंने सभी औद्योगिक इकाइयों में इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर (ESP) मशीन लगाने के निर्देश भी दिए। गिरिडीह के समाहरणालय सभागार में मंगलवार को जिला स्तरीय पर्यावरण समिति की बैठक अध्यक्षता उपायुक्त-सह-अध्यक्ष, जिला पर्यावरण समिति नमन प्रियेश लकड़ा ने की। बैठक में पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा हुई और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा की गई।
    उसरी नदी के संरक्षण पर विशेष जोर।
    बैठक का एक मुख्य एजेंडा था उसरी नदी का संरक्षण। उपायुक्त ने इस नदी की सफाई और संरक्षण के लिए सीएसआर फंड के उपयोग की समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस फंड का प्रभावी और पारदर्शी तरीके से क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, नदी में गंदे नालों का पानी फिल्टर करने के बाद ही प्रवाहित करने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए।
    पर्यावरण संरक्षण और हरित उपायों पर फोकस।
    बैठक में औद्योगिक परिसरों में पौधारोपण और प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का पालन करने पर जोर दिया गया। अस्पतालों, होटलों और रेस्तरां को भी प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित अनुमति प्राप्त करने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही, एयर क्वॉलिटी इंडेक्स डिस्प्ले स्क्रीन लगाने का प्रस्ताव रखा गया, ताकि नागरिकों को वायु गुणवत्ता की स्थिति की जानकारी मिल सके।
    प्रमुख अधिकारी थे मौजूद।
    बैठक में पूर्वी वन प्रमंडल पदाधिकारी, उप विकास आयुक्त, सदर अनुमंडल पदाधिकारी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े इस महत्त्वपूर्ण संवाद में सभी संबंधित विभागों के समन्वय पर जोर दिया गया।

  • भू-अर्जन में तेजी के लिए उपायुक्त ने दिया सख्त निर्देश

    गिरिडीह:  जिला मुख्यालय स्थित अपने कार्यालय में सोमवार कोनमन प्रियेश लकड़ा ने पथ निर्माण विभाग, झारखंड सड़क परिवहन एवं राज्यमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार, और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा क्रियान्वित परियोजनाओं की समीक्षा बैठक की।
    बैठक का मुख्य उद्देश्य। 
    बैठक में उपायुक्त ने विकास परियोजनाओं में लंबित मामलों के निपटारे और परियोजनाओं में तेजी लाने के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। विशेष तौर पर एनएच-114 से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई, जिसमें लंबित मामलों और मुआवजा वितरण प्रक्रिया को प्राथमिकता दी गई।
    एनएच-114: लंबित मामलों का जल्द निपटारा। 
    बैठक में एनएच-114 से संबंधित प्रकरणों की समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने जानकारी दी कि FRA (वन अधिकार अधिनियम) का निर्णय लिया जा चुका है।
    • छह मौजा के लिए अवार्ड तैयार कर रैयतों के बीच वितरित किया जा रहा है।
    • लाभुकों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
    • रैयतों द्वारा भू-अर्जन कार्यालय में राजस्व दस्तावेज जमा करने के बाद मुआवजा भुगतान प्रक्रिया आरंभ कर दी जाएगी।
    भू-अर्जन में तेजी के लिए निर्देश। 
    उपायुक्त ने सभी अंचल अधिकारियों को भू-अर्जन कार्यालय के साथ समन्वय बनाकर कैंप आयोजित करने और लंबित एलपीसी (भूमि प्रबंधन प्रमाणपत्र) और वंशावली प्रमाणपत्र को शीघ्र निर्गत करने का निर्देश दिया।
    अधिकारियों को समन्वय पर जोर। 
    उपायुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों को आपसी समन्वय स्थापित करते हुए कार्यों को तेज करना होगा। उन्होंने कहा, “विकास कार्यों में देरी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
    बैठक में कौन-कौन थे मौजूद?
    इस महत्वपूर्ण बैठक में पथ निर्माण विभाग, राजस्व विभाग, और भू-अर्जन कार्यालय के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। सभी ने परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति की जानकारी दी और समयबद्धता सुनिश्चित करने का वादा किया।
    प्रगति की ओर कदम।
    जिले में चल रही सड़क निर्माण परियोजनाओं को लेकर उपायुक्त के सख्त निर्देश और तेजी लाने की पहल यह दर्शाती है कि जिला प्रशासन विकास कार्यों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अब यह देखना अहम होगा कि परियोजनाओं की ये रफ्तार धरातल पर कैसे दिखती है।

  • ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत बाल विवाह रोकने की ली गई शपथ

    गिरिडीह: जिला समाज कल्याण विभाग की पहल पर “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” अभियान के तहत गिरिडीह जिले के सभी उच्च विद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य छात्राओं को उनके अधिकारों और बाल विवाह के खतरों के प्रति जागरूक करना था।
    कार्यक्रम में कौन रहे उपस्थित?
    इस विशेष अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रमों में बाल संरक्षण पदाधिकारी  जीतु कुमार और जिला बाल संरक्षण इकाई की काउंसलर नीलम कुमारी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इनके साथ अन्य अधिकारी भी इस पहल को सफल बनाने में योगदान देने पहुंचे।
    क्या रहा कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण?
    कार्यक्रम में गिरिडीह जिले के सभी उच्च विद्यालयों की छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बाल विवाह रोकने और लड़कियों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए सभी बच्चों को शपथ दिलाई गई।
    इस दौरान जिला समाज कल्याण विभाग की टीम ने कई विद्यालयों का दौरा किया, जिनमें प्रमुख रूप से:
    1. उच्च विद्यालय कुम्हारलालो, पीरटांड़
    2. प्रोजेक्ट कन्या उच्च विद्यालय, डुमरी
    3. पारसनाथ दिगंबर जैन उच्च विद्यालय, डुमरी
    इन स्कूलों में विभागीय अधिकारियों ने निरीक्षण कर ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के उद्देश्यों और महत्व के बारे में जानकारी दी।
    बाल संरक्षण पदाधिकारी की खास बातें
    बाल संरक्षण पदाधिकारी श्री जीतु कुमार ने अभियान के मकसद पर जोर देते हुए कहा, “यह अभियान पूरे भारत में लड़कियों को सशक्त और सुरक्षित बनाने के लिए चलाया जा रहा है।” उन्होंने कम उम्र में लड़कियों की शादी से होने वाले शारीरिक और मानसिक खतरों पर विस्तार से चर्चा की।
    बच्चों को बताए गए उनके अधिकार
    कार्यक्रम में जिला बाल संरक्षण इकाई की काउंसलर नीलम कुमारी ने बच्चों को उनके अधिकारों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने चार मुख्य अधिकारों पर प्रकाश डाला:
    1. जीने का अधिकार
    2. विकास का अधिकार
    3. सुरक्षा का अधिकार
    4. सहभागिता का अधिकार
    नीलम कुमारी ने कहा, “इन अधिकारों को समझना और इनका उपयोग करना हर बच्चे का हक है।”
    जागरूकता और सशक्तिकरण की दिशा में मजबूत कदम.
    गिरिडीह में आयोजित इस अभियान ने लड़कियों को उनके अधिकारों के प्रति न केवल जागरूक किया, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित भी किया। बाल विवाह जैसी कुरीतियों के खिलाफ इस मुहिम को छात्राओं ने भी सराहा।
    ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि लड़कियों की शिक्षा और सुरक्षा को प्राथमिकता देना ही समाज की असली तरक्की है।