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  • कांग्रेस ने सीपी सिंह की सदस्यता रद्द करने की मांग की, कहा- “मानसिक कुंठा के शिकार हैं विधायक”

    रांची ब्यूरो।
    भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक सीपी सिंह के मुसलमानों को लेकर दिए गए विवादित बयान ने झारखंड की सियासत में तूफान ला दिया है। कांग्रेस ने इस बयान की तीखी आलोचना करते हुए इसे न केवल समाज को बांटने वाला बल्कि राज्य की सांप्रदायिक सौहार्द के लिए गंभीर खतरा बताया है। पार्टी ने विधानसभा अध्यक्ष से मांग की है कि सीपी सिंह की विधान सभा की सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द की जाए।

    प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष शहजादा अनवर ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा विधायक पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “सीपी सिंह मानसिक कुंठा के शिकार हो गए हैं। भाजपा में वे न तो प्रदेश अध्यक्ष बन पाए, न ही विधायक दल के नेता। यही कारण है कि वे निराशा में ऐसी बयानबाजी कर रहे हैं जो समाज को गहरे तक बांट सकती है।”

    शहजादा अनवर ने भाजपा नेतृत्व और केंद्र सरकार से तीखे सवाल भी पूछे। उन्होंने कहा, “क्या भाजपा अपने वरिष्ठ मुस्लिम नेताओं जैसे शहनवाज हुसैन, मुख्तार अब्बास नकवी, जफर इस्लाम और यहां तक कि बिहार के राज्यपाल मोहम्मद आरिफ खान को भी ‘जिहादी’ समझती है? जो मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों ने देश की आज़ादी के लिए जान की बाज़ी लगाई, क्या वे भी भाजपा की नजर में जिहादी थे?”

    इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा, मीडिया चेयरमैन सतीश पाल मुजनी, प्रवक्ता सोन शांति, अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य एम तौसीफ और गजेंद्र सिंह समेत कई नेता मौजूद थे। सभी ने एक सुर में कहा कि ऐसे बयानों को किसी भी हाल में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    इस बीच कांग्रेस नेता शमशेर आलम ने विधानसभा अध्यक्ष रविंद्रनाथ महतो को पत्र लिखकर सीपी सिंह के बयान की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में यह बयान सत्य पाए जाते हैं, तो विधानसभा से उनकी सदस्यता रद्द की जाए। शमशेर आलम ने कहा, “एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि होकर सीपी सिंह ने समाज को उस दिशा में धकेलने का काम किया है, जहां न केवल सामाजिक तानेबाने को नुकसान पहुंचेगा, बल्कि पूरे देश की एकता भी खतरे में पड़ सकती है।”

    कांग्रेस का कहना है कि झारखंड जैसे संवेदनशील राज्य में शांति बनाए रखने के लिए ऐसे बयानों पर तत्काल प्रभाव से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि समाज में नफरत फैलाने की कोशिश करने वालों को सख्त संदेश दिया जा सके।

  • झारखंड मुक्ति मोर्चा में नेतृत्व परिवर्तन की संभावना !

    -परवेज़ आलम 

    जेएमएम के 13वें केंद्रीय महाधिवेशन मे झारखंड मुक्ति मोर्चा के  नेतृत्व परिवर्तन के कयास लगाए जा रहे हैं ।  विधायक कल्पना मूर्मु सोरेन व पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष शिबू सोरेन की पुत्र वधू  को पार्टी में केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष  या महासचिव जैसे बड़े पद दिए जा सकते हैं । यह कदम पार्टी के संगठन को और धारदार बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। इसके अलावा, केंद्रीय अध्यक्ष का चुनाव भी होगा, और पार्टी सूत्रों के अनुसार, शिबू सोरेन को एक बार फिर अध्यक्ष चुने जाने की संभावना है।

    झारखंड मुक्ति मोर्चा झारखंड राज्य में एक क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टी है, और अपने 13वें केंद्रीय महाधिवेशन की तैयारी में जुटा है। यह अधिवेसन 14-15 अप्रैल 2025 को रांची में आयोजित होगा, जो पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है। झमुमो, जिसकी स्थापना 1972 में हुई थी, ने झारखंड को बिहार से अलग राज्य बनाने के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया और 2000 में इस लक्ष्य को प्राप्त किया। पार्टी के वर्तमान अध्यक्ष शिबू सोरेन हैं, और कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन, जो वर्तमान में झारखंड के मुख्यमंत्री भी हैं, हैं।

    आयोजन की विस्तृत जानकारी

    महाधिवेशन का आयोजन रांची के खेलगांव स्थित इन्डोर स्टेडियम में होगा, और इसका प्रारम्भ 14 अप्रैल को, जो डॉ. भीमराव अम्बेकर के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है, पर होगा। यह दो-दिवसीय अधिवेसन 15 अप्रैल को समाप्त होगा।

    प्रतिनिधियों का विवरण

    महाधिवेशन में करीब 3900 प्रतिभागी भाग लेंगे, जो झारखंड के अलावा बिहार, प. बंगाल, ओडिशा, असम और तमिलनाडु जैसे अन्य प्रदेशों से आएंगे। इन प्रदेशों में झममो की सांगठनिक इकाइयां हैं, जो इस विस्तार को दर्शाती हैं। इसके अलावा, अंडमान-निकोबार से भी अतिथि के रूप में प्रतिभागी शामिल होंगे, जो इस महाधिवेशन को और अधिक व्यापक बनाता है।

    रजिस्ट्रेशन और तैयारी

    प्रतिभागियों का रजिस्ट्रेशन अप्रैल के पहले सप्ताह में शुरू होगा, ताकि व्यवस्था बनाने में आसानी हो। सदस्यता अभियान 31 मार्च 2025 तक चलेगा, और इसके बाद संगठन की इकाइयों का गठन होगा। यह प्रक्रिया पंचायत, प्रखंड और जिला स्तर पर पूरी करने में करीब 30-35 दिन लगेंगे। अधिवेसन से पहले, 16 जनवरी 2025 से ही राज्य में पंचायत से लेकर जिला स्तर की कमेटियां भंग की जा चुकी हैं।

    चर्चा के मुख्य मुद्दे

    महाधिवेशन में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी, जिसमें पार्टी की भविष्य की रणनीतियां शामिल हैं। विशेष रूप से, बिहार और प. बंगाल के आगामी विधानसभा चुनावों के लिए रणनीति बनाई जाएगी, क्योंकि पार्टी इन दोनों राज्यों में अपनी उपस्थिति मजबूत करना चाहती है। इसके अलावा, देश की आर्थिक स्थिति, जो पार्टी के अनुसार खस्ताहाल है, और केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना भी की जाएगी। पार्टी अगले तीन वर्षों के लिए अपनी कार्य-योजना भी प्रस्तुत करेगी।

    मणिपुर और असम के आदिवासियों के हित से जुड़े मुद्दे भी चर्चा का हिस्सा होंगे, जिसमें हेमंत सोरेन की नेतृत्व क्षमता को रेखांकित किया जाएगा। हेमंत सोरेन को देश के आदिवासी समाज के लिए एक उम्मीद की किरण माना जाता है, खासकर उनके तानाशाही के खिलाफ संघर्ष के लिए।

    संगठनात्मक परिवर्तन और लक्ष्य

    महाधिवेशन में केंद्रीय समिति भंग की जाएगी, और संचालन मंडली व अध्यक्ष मंडली का गठन होगा। सदस्यता अभियान का लक्ष्य 60 लाख सदस्य बनाना है, जो पिछले 50 लाख के लक्ष्य से अधिक है। यह अभियान अब अपने अंतिम चरण में है, और इसके बाद संगठन पंचायत, प्रखंड और जिला कमेटियों के गठन में जुट जाएगा।

    ऐतिहासिक संदर्भ

    यह अधिवेसन 2021 के 12वें केंद्रीय महाधिवेसन से अलग है, जो कोविड-19 महामारी के कारण केवल एक दिन के लिए और 500 से कम प्रतिभागियों के साथ आयोजित हुआ था। इस बार, यह तीन दिनों तक चलेगा, और सात से आठ राज्यों के प्रतिभागी शामिल होंगे, जो इसकी व्यापकता को दर्शाता है।

    तालिका: अधिवेशन के मुख्य बिंदु

    राजनीतिक दल अधिवेशन मे पार्टी की रणनीति और भविष्य की दिशा तय करते है

    राजनीतिक दलों के केंद्रीय अधिवेशन किसी भी संगठन के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर होते हैं, जहां नीतिगत फैसलों से लेकर नेतृत्व के चुनाव तक, विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाती है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के हालिया अधिवेशन में भी यही देखा गया, जहां पार्टी ने केंद्रीय नीतियों का विरोध करने से लेकर आगामी चुनावों की रणनीति तक कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए।

    नीतिगत चर्चा और विरोध के प्रस्ताव

    जेएमएम ने अपने अधिवेशन से पहले कई महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिए, जिनमें जनजातीय अधिकारों की सुरक्षा और राज्य के विकास से जुड़े मुद्दों पर विशेष जोर दिया गया। पार्टी ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), समान नागरिक संहिता (UCC) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को खारिज करने का प्रस्ताव पारित किया, जिसकी संपुष्टि इसी अधिवेशन मे होनी है  । यह निर्णय झारखंड जैसे राज्यों में जनजातीय समुदायों के अधिकारों को सुरक्षित रखने की दिशा में पार्टी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

    नेतृत्व चुनाव और निरंतरता

    राजनीतिक दलों के अधिवेशन नेतृत्व परिवर्तन और पुनर्निर्वाचन के लिए भी जाने जाते हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा में नेतृत्व की निरंतरता देखने को मिली, जब 2021 में शिबू सोरेन को लगातार 10वीं बार पार्टी अध्यक्ष के रूप में चुना गया। उनके पुत्र और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कार्यकारी अध्यक्ष बने रहे। यह नेतृत्व की स्थिरता और पार्टी के संगठनात्मक ढांचे की मजबूती को दर्शाता है।

    पार्टी कार्यकर्ताओं का एकीकरण

    अधिवेशन का एक प्रमुख उद्देश्य झारखंड के साथ-साथ बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे पड़ोसी राज्यों में पार्टी कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाना है । यह केवल एक राजनीतिक प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि इससे कार्यकर्ताओं के बीच संवाद और समन्वय को भी बल मिला।

    अधिवेशन आयोजित करने के प्रमुख कारण

    राजनीतिक दल समय-समय पर अधिवेशन आयोजित करते हैं, जिससे संगठनात्मक जरूरतों और बाहरी राजनीतिक चुनौतियों का समाधान निकाला जा सके।

    • आंतरिक संगठनात्मक आवश्यकताएँ: नेतृत्व परिवर्तन, नीति अद्यतन और पार्टी के भीतर संरचनात्मक बदलाव।
    • बाहरी राजनीतिक चुनौतियाँ: केंद्रीय सरकार की नीतियों के विरोध में रणनीति बनाना, जैसे कि भूमि अधिकारों से संबंधित मुद्दे।
    • संगठनात्मक मजबूती: कार्यकर्ताओं को संगठित करना, सदस्यता बढ़ाना और पार्टी की पकड़ को मजबूत करना।

    अधिवेशन के आयोजक और प्रमुख प्रतिनिधि

    झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा अधिवेशन का आयोजन किया जाता है, जिसमें पार्टी के अध्यक्ष, महासचिव और जिला एवं राज्य स्तरीय समितियाँ प्रमुख भूमिका निभाती हैं। प्रतिभागियों में सांसद, विधायक, मंत्री और प्रमुख कार्यकर्ता शामिल होते हैं। 13वें अधिवेशन के लिए भी यह योजना बनाई गई है  कि इसमें विभिन्न राज्यों से प्रतिनिधियों की भागीदारी होगी।

    नेतृत्व की स्थिरता और पार्टी का भविष्य

    जेएमएम जैसे क्षेत्रीय दलों में नेतृत्व की निरंतरता एक महत्वपूर्ण विषय है। शिबू सोरेन 1997 से अध्यक्ष बने हुए हैं और 2021 में 10वीं बार पुनर्निर्वाचित हुए, जिससे पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व पर उनकी पकड़ साफ दिखाई देती है। यह नेतृत्व परिवर्तन के उस प्रवृत्ति से भिन्न है जो अन्य कई क्षेत्रीय दलों में देखी जाती है। साथ ही, हेमंत सोरेन की भूमिका पार्टी की उत्तराधिकार योजना की ओर भी संकेत करती है।

    झामुमो का गठन और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

    झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना 19वीं सदी के महान आदिवासी योद्धा बिरसा मुंडा की जयंती पर हुई थी। बिरसा मुंडा ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष किया था, और उनकी याद में झारखंड राज्य का गठन भी 15 नवंबर 2000 को किया गया। पार्टी के प्रमुख संस्थापकों में बिनोद बिहारी महतो, शिबू सोरेन और कॉमरेड डॉ. एके रॉय शामिल थे। 4 फरवरी 1972 को पार्टी का औपचारिक संगठन किया गया, जिसमें बिनोद बिहारी महतो को अध्यक्ष और शिबू सोरेन को महासचिव बनाया गया। प्रारंभिक दौर में पार्टी ने आदिवासी, दलित और अन्य पिछड़े समुदायों के औद्योगिक एवं खनन श्रमिकों को अपने साथ जोड़ा।

    झामुमो का राजनीतिक संघर्ष और विकास

    झामुमो का प्रारंभिक दौर संघर्षों से भरा रहा। पार्टी ने औद्योगिक और खनन क्षेत्रों में काम करने वाले आदिवासियों और दलितों के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाई। इस बीच, शिबू सोरेन के भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से नज़दीकियों के कारण पार्टी में असंतोष पनपा और इसके कुछ युवा नेताओं ने ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) का गठन किया। 1980 में, झामुमो नेता बिनोद बिहारी महतो ने कांग्रेस के साथ गठबंधन के विरोध में “झामुमो (बी)” नामक एक अलग गुट बनाया। हालांकि, 1990 में यह गुट वापस झामुमो में शामिल हो गया। 1987 में निर्मल महतो की हत्या के बाद पार्टी में उथल-पुथल मची, लेकिन राम दयाल मुंडा के नेतृत्व में आदिवासी संगठनों को एकजुट कर झारखंड अलग राज्य की मांग को फिर से गति दी गई। 1988-89 में झामुमो और आजसू ने मिलकर कई आर्थिक नाकाबंदियां और आंदोलन किए, जिससे राज्य निर्माण की मांग को मजबूती मिली।

    झारखंड राज्य का गठन और झामुमो की भूमिका 

    2000 में बिहार विधानसभा ने झारखंड राज्य निर्माण के लिए विधेयक पारित किया और 15 नवंबर 2000 को झारखंड भारत का 28वां राज्य बना। इसके बाद झामुमो ने कई राजनीतिक गठबंधन किए और सत्ता में अपनी जगह बनाई। 2005 में झामुमो के नेता शिबू सोरेन मुख्यमंत्री बने, लेकिन बहुमत न होने के कारण जल्द ही इस्तीफा देना पड़ा। हालांकि, उन्होंने तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। इसके अलावा, मनमोहन सिंह सरकार में वे कोयला मंत्री भी रहे। हेमंत सोरेन ने 13 जुलाई 2013 को झारखंड के 9वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। 2019 में एक बार फिर झामुमो ने बहुमत हासिल किया और हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री बने।

    झारखंड मुक्ति मोर्चा का सफर संघर्ष, सत्ता और समझौतों से भरा रहा है। आदिवासी और श्रमिक हितों की रक्षा से शुरू हुआ यह आंदोलन अब राज्य की सत्ता का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। झामुमो ने झारखंड राज्य निर्माण में अहम भूमिका निभाई और आज भी राज्य की राजनीति में इसकी गहरी पकड़ बनी हुई है।

    Key Points

    -झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) की 13वीं केंद्रीय महाधिवेशन 14-15 अप्रैल 2025 को रांची में आयोजित होगा, जिसमें नेतृत्व परिवर्तन की संभावना है।

    – शिबू सोरेन को फिर से अध्यक्ष चुने जाने की संभावना है, जबकि कल्पना मूर्मु सोरेन को केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष या महासचिव जैसे बड़े पद दिए जा सकते हैं।

    – यह परिवर्तन पार्टी के संगठन को मजबूत बनाने और युवा नेतृत्व को बढ़ावा देने की दिशा में एक कदम हो सकता है, लेकिन इसकी पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

     

     

  • झारखंड की राजनीति में बड़ा उलटफेर: बाबूलाल मरांडी बने नेता प्रतिपक्ष

    -परवेज़ आलम

    ………आखिरकार  इंतजार खत्म हुआ। चार महीने की राजनीतिक उथल-पुथल, अटकलों का बाजार, गुप्त बैठकों और सियासी कयासों के बाद भारतीय जनता पार्टी ने झारखंड में बड़ा फैसला ले लिया है। पार्टी ने अनुभवी नेता और राज्य के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी को विधायक दल का नेता चुन लिया है। यानी अब वह झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाएंगे।

    चार महीने की देरी: भाजपा की रणनीति या आंतरिक असमंजस?

    झारखंड विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही भाजपा में नेता प्रतिपक्ष के चयन को लेकर उथल-पुथल मची हुई थी। इस पद के लिए कई दिग्गज नेताओं के नाम सामने आए, जिनमें नवीन जायसवाल, नीरा यादव, और सीपी सिंह  का नाम प्रमुख था। लेकिन आखिरकार बाजी बाबूलाल मरांडी के हाथ लगी। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने भी इस निर्णय पर मुहर लगा दी। पर्यवेक्षक भूपेंद्र यादव ने विधायकों से चर्चा की । पर्यवेक्षक भूपेन्द्र यादव ने कहा कि विधायकों ने सर्वसम्मति से बाबूलाल मरांडी को नेता चुना है। नवीन जायसवाल,नीरा यादव, राज सिन्हा ने इसके लिए प्रस्ताव रखा। इसे सभी विधायकों ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया।और सर्वसम्मति से मरांडी को नेता चुने जाने की घोषणा की।

    लेकिन सवाल यह उठता है कि यह फैसला आने में चार महीने क्यों लगे? क्या भाजपा के भीतर मतभेद थे, या फिर यह किसी रणनीति का हिस्सा था? पार्टी सूत्रों का कहना है कि भाजपा नेतृत्व शुरू से ही मरांडी को लेकर स्पष्ट था, लेकिन सत्ता संतुलन साधने के लिए समय लिया गया और जब आखिरी फैसला हुआ, तो अनुभव और कद को ध्यान में रखते हुए बाबूलाल मरांडी के नाम पर मुहर लगी।

     

     

    बता दें कि छठी विधानसभा के गठन के बाद से भाजपा विधायक दल के पास नेता नहीं था। भाजपा विधायक दल के नेता ही नेता प्रतिपक्ष होंगे। इस तरह से बाबूलाल मरांडी झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष होंगे। वे अभी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं।

    मरांडी की प्रतिक्रिया: पीएम मोदी के सपने को साकार करने की प्रतिबद्धता

    नेता प्रतिपक्ष चुने जाने के बाद बाबूलाल मरांडी ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत का जो संकल्प लिया है, उसे पूरा करने में हम भी अपना योगदान देंगे। झारखंड के लोगों की सेवा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए हम पूरी ताकत से काम करेंगे।”

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद से जल्द देंगे इस्तीफा

    बाबूलाल मरांडी इस समय झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। अब जब वे नेता प्रतिपक्ष बन गए हैं, तो जल्द ही प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर संगठन में नए अध्यक्ष की नियुक्ति का रास्ता साफ करेंगे। भाजपा नेतृत्व अब इस पर फैसला करेगा कि झारखंड में संगठन की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाए।

    बाबू लाल मरंडी की झारखंड की  राजनीति मे वापसी 

    बाबूलाल मरांडी की राजनीति कभी भाजपा तो कभी अलग राह पकड़ती रही। लेकिन यह भी सच है कि वह एक मजबूत जननेता के रूप में उभरे हैं। 2006 में उन्होंने भाजपा से अलग होकर झारखंड विकास मोर्चा बनाया, लेकिन 2020 में दोबारा भाजपा में वापसी कर ली।

    उनका सियासी कद केवल झारखंड तक सीमित नहीं रहा। वाजपेयी सरकार में उन्होंने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय में राज्य मंत्री की भूमिका भी निभाई।

    बाबूलाल मरांडी: झारखंड की राजनीति का बड़ा नाम

    बाबूलाल मरांडी झारखंड के पहले मुख्यमंत्री रह चुके हैं और झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रहे हैं। उन्होंने हमेशा से प्रदेश की राजनीति में एक अहम भूमिका निभाई है। आइए, उनके राजनीतिक सफर पर एक नजर डालते हैं:

    • जन्म और शिक्षा: 11 जनवरी 1958 को गिरिडीह जिले के कोदईबांक गांव में जन्मे बाबूलाल मरांडी ने रांची विश्वविद्यालय से भूगोल में स्नातकोत्तर किया है।
    • संघ से जुड़ाव: पढ़ाई के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ गए और बाद में झारखंड क्षेत्र के विश्व हिंदू परिषद (VHP) का संगठन सचिव बने।
    • मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल: 15 नवंबर 2000 को झारखंड राज्य के गठन के बाद वे राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने और 17 मार्च 2003 तक इस पद पर रहे।
    • झारखंड विकास मोर्चा की स्थापना: 2006 में भाजपा से अलग होकर उन्होंने झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) की स्थापना की। हालांकि, 2020 में उन्होंने अपनी पार्टी का भाजपा में विलय कर दिया।
    • लोकसभा में भूमिका: वे 12वीं, 13वीं, 14वीं और 15वीं लोकसभा में सांसद रह चुके हैं। 1998 से 2000 के बीच एनडीए सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री (पर्यावरण एवं वन मंत्रालय) भी रहे।
    • विधानसभा में वापसी: 2019 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने धनवार सीट से जीत दर्ज की और फिर से झारखंड विधानसभा में सक्रिय हो गए।

    नेता प्रतिपक्ष के रूप में उनकी जिम्मेदारी

    अब जब बाबूलाल मरांडी झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बन गए हैं, तो उनकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है। आइए, जानते हैं कि विपक्ष के नेता के रूप में उनकी प्रमुख भूमिकाएं क्या होंगी:

    1. विपक्ष का नेतृत्व: सभी विपक्षी दलों को एकजुट करना और उनकी आवाज को विधानसभा में मजबूती से उठाना।
    2. सरकार की नीतियों पर नजर: सरकार के फैसलों की समीक्षा करना और जनता के हितों के खिलाफ नीतियों का विरोध करना।
    3. विधानसभा में प्रभावी बहस: सदन में सरकार को जवाबदेह ठहराना और बहस के दौरान ठोस तर्क प्रस्तुत करना।
    4. जनता की समस्याओं पर ध्यान: जनता की समस्याओं को विधानसभा में उठाना और सरकार से समाधान की मांग करना।
    5. सरकार की जवाबदेही तय करना: किसी भी गलत फैसले या नीतिगत चूक पर सरकार से सवाल पूछना और उसे जवाबदेह ठहराना।

    भाजपा की आगे की रणनीति?

    अब जब भाजपा ने झारखंड में नेता प्रतिपक्ष का चयन कर लिया है, तो पार्टी की अगली रणनीति सरकार के खिलाफ मजबूत विपक्ष खड़ा करने की होगी। झारखंड में भाजपा अब आगामी चुनावों के लिए जमीन तैयार करेगी और हेमंत सोरेन सरकार को घेरने की योजना बनाएगी।

    बाबूलाल मरांडी का झारखंड की राजनीति में कद काफी बड़ा है। उन्होंने मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, सांसद, विधायक और प्रदेश अध्यक्ष जैसे अहम पदों पर काम किया है। अब नेता प्रतिपक्ष के रूप में वे झारखंड में भाजपा के लिए एक मजबूत चेहरा होंगे। भाजपा की रणनीति, झारखंड की राजनीति और विधानसभा में उनकी भूमिका पर सभी की नजरें टिकी होंगी। देखना दिलचस्प होगा कि वे विपक्ष की भूमिका को कितनी मजबूती से निभाते हैं और सरकार को कितनी कड़ी चुनौती देते हैं।

     

  • रिश्वत लेते दारोगा रंगे हाथ गिरफ्तार !

    एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रांची में कोतवाली थाना के दारोगा ऋषिकांत को 5,000 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया। दारोगा पर आरोप था कि वे एक व्यक्ति का जब्त मोबाइल छुड़ाने के बदले घूस मांग रहे थे।

    क्या है पूरा मामला?

    रांची के कोतवाली थाना पुलिस ने आर्म्स एक्ट के तहत एक आरोपी को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के दौरान उसका एक महंगा मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया गया। केस की जांच कर रहे दारोगा ऋषिकांत ने पीड़ित से मोबाइल वापस देने के लिए 5,000 रुपये रिश्वत की मांग की।

    पीड़ित के भाई को यह नागवार गुजरा और उसने सीधा एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई।

    शिकायत मिलते ही हरकत में आई एसीबी

    पीड़ित की शिकायत पर एसीबी ने तुरंत मामले की जांच शुरू की। जब दारोगा के खिलाफ रिश्वत मांगने के आरोप सही पाए गए, तो ACB ने जाल बिछाया।

    शिकायतकर्ता को ACB द्वारा पहले से निशान लगाए गए 5,000 रुपये के साथ दारोगा के पास भेजा गया। जैसे ही दारोगा ने पैसे लिए, वहां पहले से घात लगाए बैठी एसीबी टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया।

    अब होगी बड़ी कार्रवाई!

    फिलहाल एसीबी की टीम दारोगा से सघन पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह रिश्वतखोरी का कोई बड़ा नेटवर्क तो नहीं।

  • झारखंड मुक्ति मोर्चा के सदस्यता ग्रहण समारोह में कई नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शिरकत की।

    झामुमो रांची जिला समिति का सदस्यता ग्रहण समारोह संपन्न

    रांची: झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) रांची जिला समिति द्वारा कोकर स्थित इंडस्ट्रियल एरिया के एसोसिएशन भवन में आज एक सदस्यता ग्रहण समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने झामुमो की सदस्यता ग्रहण की।

    समारोह के दौरान झारखंड विकास मोर्चा के राकेश कुमार सिंह, पीयूष कुमार, स्मिता प्रिया और सामाजिक कार्यकर्ता राहुल कुमार ने सैकड़ों समर्थकों के साथ झामुमो की सदस्यता ली। इस अवसर पर जिला संयोजक डॉ. हेमलाल कुमार मेहता, संयोजक अश्विनी शर्मा, झबुलाल महतो और नयनतारा उरांव ने सभी नए सदस्यों को सदस्यता रसीद और पार्टी का अंगवस्त्र प्रदान कर उनका स्वागत किया।

    इस महत्वपूर्ण आयोजन में क्रीड़ा मोर्चा के पूर्व जिला अध्यक्ष प्रदीप मिर्धा, अल्पसंख्यक मोर्चा के पूर्व जिला अध्यक्ष फरीद खान, महिला नेत्री उषा उरांव, पूर्व अल्पसंख्यक जिला उपाध्यक्ष परवेज आलम गुड्डू, नामकुम प्रखंड के पूर्व उपाध्यक्ष साहिल कुमार यादव, युवा नेता गोपाल पांडे, छात्र नेता इरफ़ान खान, अतीकुर रहमान और काशीफ रजा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

    कार्यक्रम के दौरान पार्टी नेताओं ने झामुमो की नीतियों और राज्य के विकास में पार्टी की भूमिका पर प्रकाश डाला तथा नए सदस्यों को संगठन को मजबूत करने का संकल्प दिलाया।

  • रांची नगर निगम 15 नए स्थानों पर बनाएगा पार्किंग, टेंडर जारी

    रांची नगर निगम ने 15 प्रमुख पार्किंग स्थलों के लिए टेंडर जारी किए

    रांची नगर निगम ने शहर के 15 महत्वपूर्ण पार्किंग स्थलों के संचालन के लिए टेंडर जारी किया है। इनमें मेन रोड, जयपाल सिंह स्टेडियम, न्यूक्लियस मॉल, सिदो-कान्हू पार्क और अशोक नगर स्थित मैपल प्लाजा के सामने के पार्किंग स्थल शामिल हैं। इसके अलावा, डंगराटोली स्थित पैंटालून्स मॉल पार्किंग के लिए भी निविदा आमंत्रित की गई है।

    इस टेंडर प्रक्रिया के तहत, प्री-बिड बैठक 10 मार्च को आयोजित की जाएगी, जबकि ऑनलाइन बोली 11 मार्च को होगी।

    नगर निगम द्वारा जारी टेंडर में शामिल प्रमुख पार्किंग स्थल निम्नलिखित हैं:

    • मेन रोड: ब्लैकबेरी बिल्डिंग से होराइजन होंडा तक
    • यूनिवर्सिटी गेट: कार पार्किंग
    • न्यूक्लियस मॉल: मॉल के सामने स्थित पार्किंग
    • रांची क्लब कॉम्प्लेक्स: बैंक ऑफ महाराष्ट्र से इंडसइंड बैंक तक
    • जयपाल सिंह स्टेडियम: स्टेडियम के सामने स्थित पार्किंग
    • रांची पहाड़ी: पार्किंग क्षेत्र
    • स्मार्ट बाजार: मेन रोड और कांके रोड स्थित पार्किंग
    • चर्च कॉम्प्लेक्स: नाईस फर्नीचर तक फैली पार्किंग
    • हरिओम टॉवर: टॉवर के सामने का पार्किंग स्थल
    • पैंटालून्स मॉल: डंगराटोली चौक के पास
    • सिदो-कान्हू पार्क: पार्क के सामने की पार्किंग
    • गुप्ता भंडार से लेदर वर्ल्ड: इंडिया होटल के रास्ते
    • बालकृष्ण सहाय रोड
    • मैपल प्लाजा: अशोक नगर

    नगर निगम के इस कदम से पार्किंग व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है, जिससे शहर में यातायात प्रबंधन सुगम हो सकेगा।

  • रांची में महसूस किए गये भूकंप के झटके, सुबह 6 बजे हिली धरती

    रांची और बंगाल की खाड़ी में भूकंप के झटके, कोई नुकसान की खबर नहीं

    झारखंड की राजधानी रांची में सुबह 6 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए। हालांकि, अब तक भूकंप की तीव्रता का आधिकारिक रिकॉर्ड सामने नहीं आया है और न ही किसी तरह के नुकसान की सूचना मिली है। झटके महसूस होते ही लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, भूकंप का केंद्र अक्षांश 19.52 उत्तर और देशांतर 88.55 पूर्वी पर स्थित था। अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्क रहना जरूरी है।

    इसी के साथ, बंगाल की खाड़ी में भी मंगलवार सुबह 6:10 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 5.1 मापी गई। पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में इस भूकंप के झटके महसूस किए गए, हालांकि किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं मिली है।

    नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में आया भूकंप 91 किलोमीटर की गहराई पर था। विशेषज्ञों का कहना है कि जब भूकंप का केंद्र सतह से अधिक गहराई पर होता है, तो उसका प्रभाव कम होता है। वहीं, अगर भूकंप का केंद्र 5 से 10 किलोमीटर की गहराई में हो, तो इससे ज्यादा नुकसान होने की आशंका रहती है। हालांकि, नुकसान की गंभीरता भूकंप की तीव्रता पर निर्भर करती है।

  • उर्दू किसी एक धर्म की भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का प्रतीक है – अंजुमन उर्दू सम्मेलन में बोले मंत्री इरफान अंसारी

    झारखंड में अंजुमन तरक्की उर्दू हिन्द का पहला राज्य सम्मेलन संपन्न

    रांची के पुरानी विधानसभा भवन में अंजुमन तरक्की उर्दू हिन्द, झारखंड का पहला राज्य सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन के पहले सत्र की अध्यक्षता राष्ट्रीय सचिव अतहर फारूकी ने की, जिसमें सम्मेलन के संयोजक एम. जेड. खान ने संयोजक रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस रिपोर्ट में अंजुमन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला गया।

    उर्दू के सम्मान और विकास पर जोर

    सम्मेलन के विशिष्ट अतिथि, झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने अपने संबोधन में कहा कि उर्दू किसी विशेष धर्म से जुड़ी नहीं है, बल्कि यह एक भारतीय भाषा और संस्कृति का प्रतीक है। उन्होंने उर्दू को उसका उचित सम्मान न मिलने पर चिंता जताई और कहा कि इस भाषा से प्रेम करने वालों की संख्या कम नहीं है। उन्होंने उर्दू शिक्षा को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।

    इस सत्र में जालिब वतनी की पुस्तक “उड़ान” का विमोचन किया गया। इस अवसर पर सुशील साहिल (गोड्डा), मुफ्ती सईद आलम (गिरिडीह), हसन निज़ामी (धनबाद), जफरुल्लाह सादिक (हजारीबाग), जमशेद कमर (रांची) आदि ने अपने विचार साझा किए। भारतीय संविधान की प्रस्तावना को उर्दू भाषा में डॉ. मोहम्मद रेहाना अली ने प्रस्तुत किया।

    सम्मेलन में उर्दू के प्रचार-प्रसार पर विचार-विमर्श

    सभा को संबोधित करते हुए सुभाषिनी अली ने कहा कि उर्दू को उसकी सही पहचान तक पहुंचाने के लिए ठोस प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि उर्दू को केवल मुसलमानों की भाषा समझना एक बड़ी गलतफहमी है। इस भाषा की उन्नति के लिए इसे आर्थिक व्यवस्था से जोड़ने और अधिक जनप्रिय बनाने के प्रयास करने होंगे। साथ ही, उन्होंने उर्दू साहित्य के अन्य भाषाओं में अनुवाद की जरूरत पर भी जोर दिया।

    दूसरे सत्र की अध्यक्षता डॉ. यासीन अंसारी ने की, जबकि संचालन एम. जेड. खान ने किया। इस सत्र में सांसद महुआ माजी ने कहा कि हिंदी और उर्दू का संबंध “मां और मौसी” की तरह है। इस सम्मेलन में झारखंड के 22 जिलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

    उर्दू के विकास को लेकर पारित प्रस्ताव

    इस सत्र में उर्दू भाषा के संवर्धन से जुड़े 13 प्रस्ताव पारित किए गए, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल थे:

    • साहित्य एवं उर्दू अकादमी का गठन
    • उर्दू सेल और उर्दू निदेशालय की स्थापना
    • उर्दू शिक्षकों के रिक्त पदों पर नियुक्ति

    साहित्यकारों की भागीदारी

    सम्मेलन में उर्दू और हिंदी के कई प्रतिष्ठित साहित्यकारों ने भाग लिया, जिनमें प्रमुख नाम थे – वीना श्रीवास्तव, अपराजिता, एम. एल. सिंह, के. के. सिंह, सुशील साहिल, रेहाना, नजमा नाहिद, आलम आरा, फरहत जहां, शाजिया शबनम, डॉ. अंजार, मो. शकील, शोएब, कनक चौधरी आदि।

    यह सम्मेलन झारखंड में उर्दू भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। वक्ताओं ने उर्दू को नई पीढ़ी तक पहुंचाने, इसे शिक्षा प्रणाली में मजबूत करने और सामाजिक-आर्थिक विकास से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। सम्मेलन के दौरान उर्दू भाषा को अधिक मान्यता दिलाने के लिए विभिन्न सुझाव और संकल्प पारित किए गए।

    उल्लेखनीय है कि अंजुमन तरक्की उर्दू हिन्द की स्थापना 1882 में हुई थी, और इससे महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, मौलाना अबुल कलाम आजाद, शिबली नोमानी जैसी महान विभूतियों का संबंध रहा है।

  • QR Code से ठगी का नया मामला: युवती बनी शिकार, मॉल संचालक की सूझबूझ ने बचाया

    ऑनलाइन धोखाधड़ी के लगातार नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं, जहां ठग घर बैठे लोगों को काम दिलाने का झांसा देकर उनके पैसे हड़प रहे हैं। शनिवार को रांची के रातू स्थित एक मॉल में ऐसा ही मामला सामने आया, जब एक युवती इस जाल में फंसकर ठगी का शिकार हो गई।

    क्यूआर कोड स्कैन कर ठगी की कोशिश

    युवती मॉल पहुंची और संचालक से एक क्यूआर कोड स्कैन कर उसमें पैसे डालने का अनुरोध किया। संचालक ने पैसे ट्रांसफर कर दिए, लेकिन दूसरी ओर मौजूद व्यक्ति ने दावा किया कि रकम गलत नंबर पर चली गई है और पैसे वापस पाने के लिए दोबारा भुगतान करना होगा। युवती के आग्रह पर संचालक ने फिर से पैसे भेजे, लेकिन राशि नहीं मिली।

    मॉल संचालक की सतर्कता से बचाव

    जब मॉल संचालक ने युवती से अपने ₹7,200 लौटाने को कहा, तो उसने ठगी करने वाले व्यक्ति से बात करने के लिए कहा। कॉल पर मौजूद शख्स ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए वर्दी में वीडियो कॉल की और संचालक को धमकाया कि ज्यादा सवाल पूछने पर उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। हालांकि, संचालक घबराने के बजाय सतर्कता बरतते हुए तुरंत पुलिस को सूचना दी और पीसीआर बुला लिया।

    युवती की पहचान और ठगी के सुराग

    युवती के भाई के अनुसार, वह कुछ दिनों से घर से लापता थी और मार्च में उसकी शादी होने वाली थी। युवती की मांग में सिंदूर था, लेकिन जिस व्यक्ति को उसने अपना चाचा बताया, उसका नाम क्यूआर कोड स्कैन करने पर मुस्लिम पहचान से जुड़ा मिला, जबकि युवती हिंदू थी।

    रातू थाना प्रभारी राम नारायण सिंह ने कहा कि ऑनलाइन ठगी के नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे किसी भी अनजान क्यूआर कोड को स्कैन करने या अज्ञात व्यक्ति को ऑनलाइन भुगतान करने से बचें।

  • HEC पर गंभीर संकट: केंद्र सरकार ने सहायता देने से किया इनकार,29 महीने से कर्मचारियों नहीं मिला वेतन

    केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल रांची स्थित हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (एचईसी) के पुनरुद्धार को लेकर कोई योजना नहीं बनाई गई है। यह जानकारी केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने सांसद राजेश रंजन के एक लिखित प्रश्न के उत्तर में दी।

    स्वयं संसाधन जुटाकर वेतन देना होगा

    केंद्रीय मंत्री ने बताया कि एचईसी कंपनी अधिनियम के तहत पंजीकृत एक स्वतंत्र कानूनी इकाई है। इसलिए कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए इसे अपने स्वयं के संसाधनों की व्यवस्था करनी होगी।

    2024-25 में अब तक 4.5 महीने का वेतन दिया गया

    एचडी कुमारस्वामी के अनुसार, लगातार हो रहे घाटे के कारण एचईसी गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहा है। इसका असर कर्मचारियों के वेतन भुगतान पर पड़ा है, जो अनियमित हो चुका है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में अब तक कर्मचारियों को मात्र साढ़े चार महीने का वेतन दिया गया है।

    25 से 29 महीने का वेतन बकाया

    केंद्रीय मंत्री ने स्वीकार किया कि एचईसी के कर्मचारियों और अधिकारियों का 25 महीने का वेतन बकाया है, जबकि सुपरवाइजरों के लिए यह अवधि 29 महीने की है। सांसद पप्पू यादव ने लोकसभा में एचईसी कर्मियों के तीन साल से लंबित वेतन भुगतान के लिए ठोस कार्रवाई की मांग रखी थी।

    बकाया वेतन के लिए कर्मचारियों का आंदोलन जारी

    एचईसी के सैकड़ों कर्मचारी वेतन भुगतान की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। वेतन न मिलने के कारण अधिकारी और कर्मचारी कई तरह की परेशानियों का सामना कर रहे हैं।