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  • गिरिडीह: पूर्वी रेलवे के प्रमुख वाणिज्य प्रबंधक ने किया रेलवे स्टेशन का निरीक्षण

    – सुविधाएं सुधारने और ट्रेनों की संख्या बढ़ाने का दिया संकेत.

    By : बिनोद कुमार

    For The News Post4u.

    गिरिडीह: पूर्वी रेलवे के प्रमुख वाणिज्य प्रबंधक (पीसीसीएम) उदय शंकर झा गुरुवार को गिरिडीह रेलवे स्टेशन के निरीक्षण पर पहुंचे। उनके साथ वाणिज्य विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी और स्थानीय रेलवे प्रशासन के पदाधिकारी भी मौजूद थे। इस निरीक्षण का उद्देश्य स्टेशन की वर्तमान स्थिति, यात्री सुविधाओं की गुणवत्ता और संभावित सुधार की संभावनाओं का मूल्यांकन करना था।

    निरीक्षण के दौरान श्री झा ने प्लेटफॉर्म की सफाई व्यवस्था, प्रतीक्षालय की दशा, शौचालयों की स्वच्छता, पेयजल आपूर्ति और अन्य बुनियादी सुविधाओं का गहन अवलोकन किया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों से यात्रियों को दी जा रही सेवाओं के बारे में विस्तृत फीडबैक भी लिया।

    मीडिया से बातचीत में श्री झा ने स्वीकार किया कि गिरिडीह एक महत्वपूर्ण स्टेशन है, लेकिन वर्तमान में यहां ट्रेनों की सीमित संख्या के कारण यात्री भार अपेक्षा से काफी कम है। इस कारण से कई बार स्टेशन पर दी जाने वाली सुविधाओं के रखरखाव में भी अनियमितता देखने को मिलती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस स्थिति को गंभीरता से लिया गया है और जल्द सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

    श्री झा ने कहा कि स्टेशन पर ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इसके लिए एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसे जल्द ही रेलवे डिवीजन को सौंपा जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि गिरिडीह के यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ट्रेनों की संख्या में बढ़ोतरी पर विचार किया जाएगा।

    उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि यात्रियों को सुरक्षित, सुविधाजनक और समयबद्ध रेल सेवा उपलब्ध हो। गिरिडीह स्टेशन को अधिक सक्रिय और आधुनिक बनाया जाएगा, जिससे न केवल यात्रियों की संख्या बढ़े, बल्कि स्टेशन की उपयोगिता भी बढ़े।”

    निरीक्षण के दौरान कुछ यात्रियों ने अपनी समस्याएं भी अधिकारियों के समक्ष रखीं, जिनमें स्टेशन पर शौचालयों की साफ-सफाई, पेयजल की उपलब्धता और बैठने की पर्याप्त व्यवस्था की कमी जैसी बातें प्रमुख थीं। इन शिकायतों पर पीसीसीएम ने संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।

    रेलवे विभाग ने स्पष्ट किया है कि आने वाले दिनों में गिरिडीह स्टेशन पर ट्रेनों की आवाजाही के साथ-साथ यात्री सुविधाओं का भी व्यापक उन्नयन किया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय यात्रियों को बेहतर रेल सेवा मिल सके।

  • झारखंड शराब घोटाला: छत्तीसगढ़ की ‘सुमित फैसिलिटीज’ के निदेशक अमित सलौंकी गिरफ्तार

    अब तक 11 गिरफ्तारियां.

    State Bureau, The News Post4u.

    रांची:  झारखंड में बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच कर रही एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एक और बड़ी गिरफ्तारी की है। बुधवार को ACB ने छत्तीसगढ़ की प्लेसमेंट एजेंसी ‘सुमित फैसिलिटीज’ के निदेशक अमित प्रभाकर सलौंकी को हिरासत में लिया। यह इस मामले में ग्यारहवीं गिरफ्तारी है। सलौंकी पर खुदरा शराब दुकानों के लिए मैनपावर आपूर्ति के नाम पर ठेका हासिल कर करोड़ों रुपये के गबन का आरोप है।

    छत्तीसगढ़ कनेक्शन और ‘सिंडिकेट‘.

    गिरफ्तार सलौंकी, छत्तीसगढ़ के विवादित शराब कारोबारी सिद्धार्थ सिंघानिया का करीबी बताया जा रहा है, जिसे ACB पहले ही जेल भेज चुकी है। ACB के सूत्रों के अनुसार, सलौंकी की गिरफ्तारी सिंघानिया से हुई पूछताछ के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर की गई है। सलौंकी का नाम शराब घोटाले में ऐसे समय आया जब जांच एजेंसी राज्य में शराब नीति लागू किए जाने के बाद हुए घोटालों की परत-दर-परत जांच कर रही है।

    नीति लागू होते ही सक्रिय हुआ नेटवर्क.

    जानकारी के मुताबिक, मई 2022 में झारखंड में नई उत्पाद नीति लागू होने के बाद सुमित फैसिलिटीज समेत चार मैनपावर एजेंसियों ने खुदरा शराब दुकानों में स्टाफ उपलब्ध कराने का ठेका लिया। इस पूरी योजना को सीएसएमसीएल के तत्कालीन एमडी अरुण पति त्रिपाठी और उत्पाद विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव विनय कुमार चौबे के संरक्षण में संचालित किया गया।

    ₹450 करोड़ के गबन का आरोप.

    इन चार एजेंसियों—सुमित फैसिलिटीज, एटूजेड इंफ्रा सर्विसेज, इगल हंटर सॉल्यूशंस और प्राइम वन वर्क फोर्स प्राइवेट लिमिटेड—ने करीब आठ महीनों तक झारखंड में काम किया। इसके बाद इन्हें भारी वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में हटा दिया गया और ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। उत्पाद विभाग ने इन कंपनियों पर करीब ₹450 करोड़ के गबन का आरोप लगाया है और मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।अभी तक गिरफ्तार हुए 10 अन्य आरोपी

    इस घोटाले में अब तक जिन प्रमुख लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें शामिल हैं—

    विनय कुमार चौबे – निलंबित IAS, पूर्व प्रधान सचिव, उत्पाद विभाग,गजेंद्र सिंह – तत्कालीन संयुक्त आयुक्त उत्पाद (वर्तमान में जमानत पर),सुधीर कुमार दास – पूर्व महाप्रबंधक (वित्त),सुधीर कुमार – पूर्व अभियान प्रमुख,अमित प्रकाश – पूर्व आयुक्त, उत्पाद,नीरज कुमार सिंह – प्लेसमेंट एजेंसी मार्शन के प्रतिनिधि,सिद्धार्थ सिंघानिया – छत्तीसगढ़ के शराब कारोबारी,विधु गुप्ता – नकली होलोग्राम मामले में फंसे प्रिज्म होलोग्राफी कंपनी से,अतुल कुमार सिंह – श्री ओम साईं बेवरेजेज  व मुकेश मनचंदा – कारोबारी, इनमें से 9 आरोपी फिलहाल रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि एक आरोपी गजेंद्र सिंह जमानत पर बाहर हैं।

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    जांच जारी, और भी गिरफ्तारियां संभव.

    ACB की जांच में यह सामने आ रहा है कि कैसे छत्तीसगढ़ से झारखंड में एक संगठित नेटवर्क के जरिए शराब कारोबार को नियंत्रित किया गया। इस नेटवर्क में नौकरशाहों से लेकर निजी कंपनियों और राजनीतिक संपर्कों तक की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। अब सलौंकी की गिरफ्तारी के बाद यह तय माना जा रहा है कि जल्द ही कुछ और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

     

  • धनबाद अवैध खनन हादसा: चाल धंसने से 10 से अधिक लोगों के दबे होने की आशंका, राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज़

    By: परवेज़ आलम.

    For The News Post4u.

     धनबाद/ गिरिडीह, झारखंड: झारखंड के धनबाद जिले के बाघमारा इलाके में बुधवार को एक दर्दनाक हादसा हुआ, जहां अवैध खनन के दौरान एक कोयला खदान की चाल धंस गई। यह हादसा केसरगढ़ क्षेत्र में हुआ, जो बीसीसीएल के ब्लॉक-II क्षेत्र के अंतर्गत आता है।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शिव मंदिर के पास अवैध रूप से खनन किया जा रहा था, उसी दौरान यह दुर्घटना हो गई। आशंका जताई जा रही है कि 10 से अधिक मजदूर खदान में फंसे हुए हैं। हालांकि अब तक प्रशासन की ओर से फंसे हुए लोगों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, एक शव को अवैध खनन करने वाले लोग निकालकर ले जाने में सफल रहे हैं।

    परिवारों को घटनास्थल से दूर रखने की कोशिश, आक्रोश बढ़ा.

    जैसे ही चाल धंसने की खबर फैली, इलाके में हड़कंप मच गया। आरोप है कि अवैध खनन माफिया ने फंसे मजदूरों के परिवारों को घटनास्थल के पास आने से रोकने की कोशिश की, जिससे स्थानीय लोगों में गुस्सा और बढ़ गया। लोग यह भी कह रहे हैं कि पूरे हादसे को छुपाने की कोशिश की जा रही है।

    विधायक जयराम महतो का दावा – 15 मौतें, 30 लोग अंदर दबे.

    डुमरी के विधायक जयराम महतो ने x पर लिखा कि हादसे में 15 मजदूरों की मौत की सूचना मिली है, जबकि अंदर 30 लोगों के दबे होने की आशंका है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद अवैध खनन का मुहाना जल्दबाजी में बंद कर दिया गया, और लाशों को छुपाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि मुहाने को दोबारा खोला जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

    खनन माफिया को संरक्षण?

    झारखंड के वरिष्ठ नेता व विधायक  सरयू राय ने भी इस घटना पर दुख जताया और दावा किया कि जमुनिया गांव में 9 मजदूरों की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि अवैध खनन माफिया मृतकों के शवों को छुपाने की कोशिश कर रहे हैं। सरयू राय ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में धनबाद एसएसपी को सूचना दे दी है।

     

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    अब तक शव मिलने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं.

    घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और CISF की टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया गया। हालांकि अभी तक किसी शव के मिलने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कुछ खबरें एक शव मिलने की बात कहती हैं, लेकिन प्रशासन ने अब तक इसकी पुष्टि नहीं की है। यहां तक कि पुलिस ने इस हादसे के अस्तित्व को भी स्वीकार नहीं किया है, जिससे लोगों में भ्रम और नाराजगी और गहराती जा रही है।

    केसरगढ़ में अवैध खनन का गढ़, अल्पसंख्यक समुदाय के लोग ज्यादा प्रभावित.

    जानकारी के अनुसार, बाघमारा के कतरास के केसरगढ़ क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा था, जिसमें स्थानीय गरीब और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों से मजदूरी कराई जाती थी। रिपोर्ट्स बताती हैं कि इन मजदूरों को गिरिडीह और जामताड़ा आस-पास के जिलों से बुलाया गया था।

    अब तक जिन मजदूरों के दबे होने की सूचना है, उनमें शामिल हैं:

    • चरकू उर्फ अजीज अंसारी (35) – कुंडलवादाह, ताराटांड, गिरिडीह
    • अफजल उर्फ खान साहब (35) – कुंडलवादाह, गिरिडीह
    • दिलीप साव (32) – बुढ़वाशेर, गिरिडीह
    • मो. जमशेद (30) – मथुरासिंहा, बदगुंडा पंचायत, गिरिडीह
    • एक अन्य व्यक्ति – जामताड़ा से बताया जा रहा है

    जवाबदेही तय करने और जांच की मांग.

    इस हादसे के बाद अवैध खनन पर प्रशासनिक उदासीनता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। आम जनता और राजनीतिक प्रतिनिधि अब जवाबदेही तय करने, दोषियों को सज़ा देने और पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं।

    फिलहाल राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है, लेकिन प्रशासन की देरी और चुप्पी ने लोगों के मन में गहरा अविश्वास पैदा कर दिया है।

  • झारखंड के पांच राजनीतिक दलों का नहीं मिला सुराग, चुनाव आयोग की निगरानी तेज़

    The News Post4u.

    रांची: झारखंड में चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में दर्ज सात पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों में से पांच दलों का कोई ठोस पता या गतिविधि नहीं मिल पाने के कारण उनके पंजीकरण पर तलवार लटक गई है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के निर्देश पर राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने ऐसे दलों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो लंबे समय से निष्क्रिय हैं या जिनका कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है।

     

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    सुनवाई के लिए बुलाए गए थे 7 दल

    चुनाव आयोग ने इन सात दलों को 22 जुलाई 2025 को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाया था, ताकि वे अपने अस्तित्व और सक्रियता को लेकर स्थिति स्पष्ट कर सकें। सुनवाई के दौरान केवल दो दल—रांची की जनसाधारण पार्टी और झारखंड विकास दल—के प्रतिनिधि उपस्थित हुए। दोनों दलों ने आयोग को शपथ पत्र और लिखित जवाब सौंपते हुए कहा कि वे सक्रिय हैं और आगामी चुनावों में भाग लेने की तैयारी कर रहे हैं।

    इन दलों ने नहीं दिया कोई जवाब

    हालांकि शेष पांच दल—भारत विकास मोर्चा, भारतीय जनमुक्ति पार्टी, मानव मुक्ति मोर्चा, नवजवान संघर्ष मोर्चा और राष्ट्रीय मजदूर किसान प्रजातांत्रिक पार्टी—न तो निर्धारित तिथि पर सुनवाई में पहुंचे, न ही उन्होंने कोई लिखित जवाब आयोग को भेजा। आयोग ने इन्हें पहले पंजीकृत पते पर नोटिस भेजा था और उसके बाद समाचार पत्रों व सोशल मीडिया के माध्यम से भी आम सूचना जारी की गई थी, फिर भी इनसे कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

    पंजीकरण रद्द करने की प्रक्रिया की तैयारी

    इन दलों को 15 जुलाई तक शपथ पत्र और जवाब जमा करने का अंतिम मौका दिया गया था, जिसके बाद 22 जुलाई को व्यक्तिगत सुनवाई की गई। अब आयोग के पास यह विकल्प खुला है कि गैर-हाजिर दलों के खिलाफ पंजीकरण रद्द करने की अनुशंसा की जाए। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि जो दल समय पर जवाब नहीं देंगे, उन्हें निर्वाचन आयोग की पंजीकृत सूची से हटाने की सिफारिश की जाएगी।

    पारदर्शिता सुनिश्चित करने की पहल

    इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य चुनावी पारदर्शिता और मतदाता सूचना की शुद्धता बनाए रखना है। निर्वाचन आयोग चाहता है कि केवल वही राजनीतिक दल सूची में बने रहें, जो सक्रिय हैं और जिनका पता-संपर्क स्पष्ट रूप से उपलब्ध हो। निष्क्रिय और संदिग्ध दलों को हटाकर चुनावी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में यह एक अहम कदम माना जा रहा है।

  • झारखंड हाईकोर्ट को मिला नया मुख्य न्यायाधीश, जस्टिस तरलोक सिंह चौहान ने ली शपथ

    By: परवेज़ आलम.

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    रांची – झारखंड हाईकोर्ट को सोमवार को अपना 17वां मुख्य न्यायाधीश मिल गया। हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस तरलोक सिंह चौहान ने 23 जुलाई को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से राजभवन स्थित बिरसा मंडप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। इस गरिमामयी समारोह में राज्य की प्रशासनिक, राजनीतिक और न्यायिक जगत की कई प्रतिष्ठित हस्तियों ने भाग लिया।

    शपथ समारोह बना राजभवन का खास अवसर.

    शपथग्रहण समारोह में जस्टिस चौहान के परिजनों के साथ-साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, विधानसभा अध्यक्ष रविन्द्रनाथ महतो, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी समेत राज्य सरकार के कई मंत्री, हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश और बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद थे। राज्यपाल गंगवार और मुख्यमंत्री सोरेन ने समारोह के बाद जस्टिस चौहान को पुष्पगुच्छ भेंट कर शुभकामनाएं दीं। बिरसा मंडप को इस विशेष अवसर पर भव्य ढंग से सजाया गया था।

    हिमाचल से झारखंड तक न्यायिक यात्रा.

    शिमला जिले के रोहड़ू क्षेत्र से आने वाले जस्टिस चौहान ने स्कूली शिक्षा शिमला से प्राप्त की और फिर पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ से कानून की पढ़ाई पूरी की। 1989 में उन्होंने हिमाचल प्रदेश स्टेट बार काउंसिल में बतौर अधिवक्ता नामांकन कराया और वहीं से वकालत की शुरुआत की। अपनी कड़ी मेहनत और न्यायिक दृष्टिकोण के चलते वे हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में वरिष्ठतम न्यायाधीश बने।

    झारखंड हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एम. एस. रामचंद्र राव के त्रिपुरा हाईकोर्ट में स्थानांतरण के बाद सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश पर जस्टिस तरलोक सिंह चौहान को झारखंड का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया।

    कार्यभार ग्रहण के बाद नई उम्मीदें.

    शपथ लेने के बाद जस्टिस चौहान सीधे हाईकोर्ट पहुंचे और वहां मुख्य न्यायाधीश के रूप में अपना कार्यभार ग्रहण किया। इस मौके पर झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं  ने उनका स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व में अदालत की कार्यप्रणाली में तेजी आएगी, विशेषकर लंबित मामलों की सुनवाई और रिक्त जजों की नियुक्तियों में।

    गौरतलब है कि जस्टिस तरलोक सिंह चौहान का कार्यकाल जनवरी 2026 तक रहेगा। न्यायपालिका, अधिवक्ताओं और आम जनता को अब उनसे न्यायिक प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और गति की उम्मीद है।

  • झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस तरलोक सिंह चौहान कल लेंगे शपथ

    परवेज़ आलम.

    For The News Post4u.

    रांची, 22 जुलाई : झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस तरलोक सिंह चौहान कल  सुबह 10 बजे राजभवन के बिरसा मंडप में पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे । राज्यपाल संतोष गंगवार  उन्हें शपथ दिलाएँगे । वे झारखंड हाईकोर्ट के 17वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदभार ग्रहण करेंगे।

    मंगलवार को रांची पहुंचे, हुआ भव्य स्वागत.

    जस्टिस चौहान मंगलवार को अपने परिजनों के साथ रांची पहुंचे। बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीशों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं और रजिस्ट्रार कार्यालय के अधिकारियों ने उनका भव्य स्वागत किया। इसके बाद वे होटल रेडिशन ब्लू पहुंचे, जहां उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया।

    शपथ के बाद सीधे संभालेंगे न्यायिक कार्य.

    शपथ ग्रहण समारोह के बाद जस्टिस चौहान सीधे हाईकोर्ट जाएंगे, जहां वे अपने नए पद का कार्यभार संभालेंगे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, झारखंड हाईकोर्ट के सभी न्यायाधीश, वरिष्ठ अधिकारी, अधिवक्ता और अन्य गणमान्य अतिथियों के शामिल होने की संभावना है।

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    राजभवन के बिरसा मंडप में भव्य समारोह की तैयारियां मंगलवार शाम तक पूरी कर ली गईं।

    जस्टिस तरलोक सिंह चौहान: एक परिचय.

    • जन्म: 9 जनवरी 1964, रोहड़ू तहसील, जिला शिमला (हिमाचल प्रदेश)
    • स्कूली शिक्षा: बिशप कॉटन स्कूल, शिमला
    • स्नातक: गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज, संजौली (बीए ऑनर्स)
    • कानून की पढ़ाई: पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से एलएलबी

    न्यायिक करियर.

    • 1989: हिमाचल प्रदेश बार काउंसिल में वकील के रूप में पंजीकरण
    • 2007: वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित
    • 2014 : हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त
    • 2014 : स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ
    • कई अवसरों पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की भूमिका निभा चुके हैं

    गौरवशाली इतिहास वाला झारखंड हाईकोर्ट.

    झारखंड हाईकोर्ट का इतिहास न्यायिक उत्कृष्टता से परिपूर्ण रहा है।

    • प्रथम मुख्य न्यायाधीश जस्टिस विनोद कुमार गुप्ता थे, जो बाद में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने।
    • यहां सेवा देने वाले कई मुख्य न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे, जिनमें शामिल हैं:
      • जस्टिस अल्तमश कबीर.
      • जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा.
      • जस्टिस आर. बनुमति.
      • जस्टिस अनिरुद्ध बोस.

    जस्टिस तरलोक सिंह चौहान के आने से झारखंड हाईकोर्ट को एक अनुभवी और प्रतिष्ठित न्यायविद् का नेतृत्व मिलने जा रहा है। उनके न्यायिक अनुभव और सशक्त दृष्टिकोण से राज्य की न्यायिक प्रणाली को और अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जनहितकारी बनाए जाने की उम्मीद की जा रही है।

  • झारखंड पर्यटन को मिलेगी नई रफ्तार-सुदिव्य कुमार

    केंद्रीय पर्यटन मंत्री से मुलाकात में लिए गए कई अहम फैसले.

    परवेज़ आलम.

    For The News Post4U.

    रांची /नई दिल्ली, 22 जुलाई
    झारखंड में पर्यटन विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से आज नई दिल्ली में झारखंड पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार और केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई । यह शिष्टाचार भेंट झारखंड को एक उभरते हुए पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ठोस पहल मानी जा रही है।

    बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने राज्य में पर्यटन के सर्वांगीण विकास से संबंधित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया और केंद्र सरकार से सक्रिय सहयोग का आश्वासन प्राप्त हुआ।

    बैठक में लिए गए मुख्य निर्णय.

    अशोक होटल के हस्तांतरण पर सहमति.
    रांची स्थित अशोक होटल को झारखंड सरकार को सौंपने के संबंध में सैद्धांतिक सहमति बनी है। इससे होटल क्षेत्र में राज्य सरकार की सक्रियता बढ़ेगी और स्थानीय पर्यटन व्यवसाय को बल मिलेगा।

    इको-टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा.
    स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के अंतर्गत छनडील, नेतरहाट और तेनुघाट में इको-टूरिज्म परियोजनाएं विकसित की जाएंगी, जो पर्यावरण-संवेदनशील पर्यटन को प्रोत्साहित करेंगी।

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    पर्यटन संस्थान की स्थापना.
    राज्य में IITTM मॉडल पर आधारित एक उच्च स्तरीय पर्यटन संस्थान स्थापित किया जाएगा, जो पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में युवाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराएगा।

    राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मेलों का आयोजन.
    झारखंड में पर्यटन को वैश्विक मंच देने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मेलों का संयुक्त आयोजन किया जाएगा, जिससे राज्य की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विविधताओं को व्यापक पहचान मिलेगी।

    विरासत स्थलों का संरक्षण.
    राज्य के पुरातात्विक और ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया गया। यह पहल न केवल सांस्कृतिक विरासत को संजोएगी, बल्कि इन्हें आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित करेगी।

    पर्यटन के नए युग की शुरुआत.

    बैठक के बाद यह स्पष्ट हुआ कि झारखंड को पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान दिलाने के लिए राज्य और केंद्र मिलकर ठोस प्रयास करेंगे। पर्यटन से जुड़े ये सभी प्रोजेक्ट्स न केवल झारखंड की आर्थिक संरचना को मजबूत करेंगे, बल्कि स्थानीय रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि करेंगे।

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के झारखंड दौरे को लेकर तैयारियां तेज

    मुख्य सचिव  ने दिए सुरक्षा और प्रोटोकॉल पुख्ता करने के निर्देश.

    For The News Post4u.

    रांची : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू  के झारखंड के  दो दिवसीय दौरे को लेकर प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। मुख्य सचिव अलका तिवारी ने मंगलवार को देवघर, रांची और धनबाद के उपायुक्तों और वरिष्ठ पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर सुरक्षा से लेकर कार्यक्रम संचालन तक हर पहलू पर विस्तार से चर्चा की और संबंधित विभागों को जिम्मेदारी सौंपी। 31 जुलाई से 1 अगस्त तक राष्ट्रपति झारखंड मे रहेंगी ।

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    मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि राष्ट्रपति के झारखंड प्रवास के दौरान हर छोटी-बड़ी व्यवस्था को समय रहते दुरुस्त कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि देवघर में सावन माह के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए कांवरिया पथ को बिना प्रभावित किए राष्ट्रपति के एयरपोर्ट से एम्स तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित कर लिया गया है।

    गौरतलब है कि राष्ट्रपति मुर्मू का पूर्व निर्धारित झारखंड दौरा 10-11 जून को अपरिहार्य कारणों से स्थगित हो गया था। उस समय भी तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने राष्ट्रपति के झारखंड दौरे को “यादगार और गरिमामय” बनाने का निर्देश दिया था, जिसे इस बार भी दोहराया गया।

    कार्यक्रमों का ब्यौरा:

    • राष्ट्रपति देवघर में एम्स के पहले दीक्षांत समारोह में भाग लेंगी।
    • इसके बाद वे धनबाद स्थित IIT (ISM) के दीक्षांत समारोह में भी शिरकत करेंगी।
    • रांची में भी उनके कुछ निर्धारित कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।

    मुख्य सचिव ने राष्ट्रपति के आगमन से लेकर प्रस्थान तक की हर व्यवस्था के लिए स्पष्ट जवाबदेही तय की।

    • वाणिज्य कर विभाग के सचिव अमिताभ कौशल और आईजी अखिलेश कुमार झा को मुख्य नोडल अधिकारी बनाया गया है।
    • सूचना एवं जनसंपर्क विभाग को पब्लिक एड्रेस सिस्टम और मीडिया व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गई है।

    प्रमुख तैयारियों पर हुई चर्चा:

    • राष्ट्रपति के कार्यक्रम स्थलों पर मंच व्यवस्था, राष्ट्रीय गान, रेड कार्पेट और बुके, कारकेड और आउट राइडर्स,
    • फोटोग्राफरों के लिए खुले वाहन, बैगेज वैन, छाता, ध्वनि विस्तारक यंत्र,
    • प्रमुख अतिथियों की सूची, मंच से बोलने वालों की सूची,
    • देवघर एयरपोर्ट से एम्स तक की सुरक्षा व्यवस्था,
    • चिकित्सा सुविधा, पेयजल, शौचालय, अग्निशमन व्यवस्था,
    • राष्ट्रपति के साथ आनेवाले अतिथियों के ठहराव और भोजन जैसी व्यवस्थाओं पर विस्तार से समीक्षा की गई।

    देवघर, रांची और धनबाद के उपायुक्तों ने भी अपने-अपने जिलों में राष्ट्रपति के संपूर्ण प्रवास के लिए ब्लूप्रिंट प्रस्तुत किया। उन्होंने यह आश्वासन दिया कि राष्ट्रपति के प्रत्येक कार्यक्रम प्रोटोकॉल के अनुरूप और शिष्टाचार पूर्ण वातावरण में संपन्न होंगे।

    मुख्य सचिव ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने का निर्देश दिया ताकि राष्ट्रपति का यह दौरा ना केवल सुरक्षित और सुव्यवस्थित हो, बल्कि राज्य की प्रतिष्ठा को भी ऊंचाई दे सके।

  • जनकपुर धाम की आध्यात्मिक यात्रा: पत्रकारों ने जाना पौराणिक स्थलों का महत्व, लिया पर्यटन स्थलों का जायजा

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    GIRIDIH : नेपाल के मिथिलांचल क्षेत्र में स्थित जनकपुर धाम की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को नजदीक से जानने के उद्देश्य से पत्रकार चंदन पांडे और नीतू कुमारी ने हाल ही में एक विशेष यात्रा की। इस दौरान उन्होंने जनकपुर के प्रमुख धार्मिक स्थलों का भ्रमण किया और वहां की पौराणिक कथाओं व मान्यताओं को समझने का प्रयास किया।

    यात्रा की शुरुआत पवित्र गंगासागर में स्नान से की गई, जिसके बाद वे जनकपुर धाम के विवाह मंडप पहुंचे — वह स्थान जहां भगवान श्रीराम और माता सीता सहित चारों भाइयों का पौराणिक विवाह हुआ था। इसके पश्चात उन्होंने श्रीराम जानकी मंदिर, स्वयंवर स्थल, और वह स्थल भी देखा जहां श्रीराम ने शिवधनुष को उठाकर तोड़ा था। इन धार्मिक स्थलों पर उन्होंने पूजा-अर्चना भी की।

    इसके बाद दल ने कोहबर भवन का दौरा किया, जो सीता-राम विवाह के उपरांत का एक प्रमुख स्थल माना जाता है। साथ ही उन्होंने श्रीराम-जानकी माता संग्रहालय में विद्युत चलचित्र के माध्यम से मिथिला की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक झलकियों का अवलोकन किया।

    यात्रा के दौरान उन्होंने रघुपति रेस्टोरेंट में स्थानीय स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद भी लिया, जो जनकपुर की पारंपरिक पाकशैली की झलक देता है।

    जनकपुर धाम की इस आध्यात्मिक यात्रा के बाद दल ने बिहार के मधुबनी जिले के बेनीपट्टी स्थित उच्चैट भगवती मंदिर में भी मां भगवती के दर्शन किए और पूजा अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

    इस यात्रा में पत्रकार चंदन पांडे और शिक्षिका नीतू कुमारी के साथ पर्यटक नमिता कुमारी, आकाश कुमार, आरती कुमारी, सोनू कुमार, आर्यन और शानवी भी शामिल रहे। सभी ने इस यात्रा को धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक समझ का अनोखा अनुभव बताया।

  • डाक जीवन बीमा: एक भरोसेमंद सुरक्षा कवच

    डाक जीवन बीमा की उपयोगिता और लाभों पर डाक निदेशक ने डाली रोशनी.

    By: बिनोद कुमार

    Edited: परवेज़ आलम.

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    गिरिडीह : नगर भवन गिरिडीह में मंगलवार को डाक विभाग गिरिडीह मंडल की ओर से पीएलआई-आरपीएलआई मेला का आयोजन भव्य रूप से किया गया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि डाक सेवाएं निदेशक राम विलास चौधरी द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। मेले का उद्देश्य आम नागरिकों को डाक जीवन बीमा योजनाओं की जानकारी देना और उन्हें इससे जोड़ना रहा।

    अपने संबोधन में डाक निदेशक राम विलास चौधरी ने कहा कि डाक जीवन बीमा ( – PLI) और ग्रामीण डाक जीवन बीमा (RPLI) योजनाएं केंद्र सरकार द्वारा समर्थित हैं, जिन्हें भारतीय डाक द्वारा राष्ट्रपति की ओर से प्रदान किया जाता है। उन्होंने कहा कि यह योजनाएं केवल बीमा का संरक्षण नहीं देतीं, बल्कि आमजन, खासकर मध्यमवर्गीय परिवारों को कम प्रीमियम में अधिक लाभ देकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में मदद करती हैं।

    डाक निदेशक ने आगे बताया कि जीवन की अनिश्चितताओं के दौर में PLI और RPLI जैसी सरकारी योजनाएं लोगों को सुरक्षा की भावना देती हैं। यह न केवल भरोसेमंद हैं, बल्कि निवेश के लिहाज से भी लाभकारी हैं, क्योंकि इनमें जोखिम कम और लाभ अपेक्षाकृत ज्यादा है।

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    इस अवसर पर पीएलआई के उप विकास प्रबंधक अमित कुमार ने विस्तार से बताया कि डाक जीवन बीमा की सबसे बड़ी खासियत इसकी गैर-लाभकारी प्रकृति है। इसी कारण, यह अन्य निजी बीमा योजनाओं की तुलना में कम प्रीमियम दरों के बावजूद बेहतर रिटर्न देती है। उन्होंने इसे एक आकर्षक और सुरक्षित निवेश विकल्प बताया।

    अमित कुमार ने कहा कि यह योजनाएं केंद्र व राज्य सरकार के कर्मचारियों, सरकारी उपक्रमों में कार्यरत कर्मियों, रक्षा एवं अर्धसैनिक बलों के जवानों, तथा डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट जैसे पेशेवरों के लिए भी उपलब्ध हैं। देशभर के 1.5 लाख से भी अधिक डाकघरों में पीएलआई की सेवाएं उपलब्ध हैं। कोई भी लाभार्थी किसी भी डाकघर में जाकर प्रीमियम की किस्त जमा कर सकता है, जिससे योजना में शामिल होना और भी सरल हो गया है।

    इस अवसर पर कार्यक्रम में डाक विभाग के कर्मियों को उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित भी किया गया। यह कदम कर्मचारियों को प्रेरित करने और सेवा के प्रति उत्साह बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा गया।

    कार्यक्रम में बड़ी संख्या में डाककर्मी उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से सहायक डाक अधीक्षक मंटू साव, अभिषेक कुमार (गोमिया सबडिवीजन), सुमन कुमार, डाकपाल अभिषेक कुमार, मनीष कुमार (उत्तरी क्षेत्र), विकास अधिकारी दीपक कुमार, लोकी रविदास, सुखदेव कुमार, संजीव देव, संजय सिंह, जियाजी, अवधेश वर्मा, अनिल कुमार, उपडाकपाल व शाखा डाकपाल शामिल थे।

    कार्यक्रम की समाप्ति पर डाक निदेशक ने सभी डाककर्मियों से अपील की कि वे इन योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाएं, ताकि देश के अधिक से अधिक नागरिक इन भरोसेमंद और लाभकारी योजनाओं से जुड़कर आर्थिक रूप से सुरक्षित भविष्य की ओर कदम बढ़ा सकें।