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  • झारखंड में कोचिंग संस्थानों पर लगेगी लगाम, सोरेन सरकार ला रही सख्त नियंत्रण कानून

    For The News Post4u.

    रांची: झारखंड में बेलगाम तरीके से खुलते जा रहे कोचिंग संस्थानों पर अब सरकार शिकंजा कसने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार आगामी मानसून सत्र 2025 में एक नया कानून लेकर आ रही है, जिसका नाम है – झारखंड कोचिंग सेंटर (कंट्रोल एंड रेगुलेशन) बिल-2025। इस कानून के लागू होते ही राज्य में संचालित कोचिंग संस्थानों को तय मापदंडों और नियमों के अधीन आना अनिवार्य हो जाएगा।

    छात्रों को मिलेगा अधिकार, संस्थानों की मनमानी पर लगेगी रोक.

    यह प्रस्तावित कानून 50 से अधिक छात्रों वाले कोचिंग संस्थानों पर लागू होगा। इसके तहत:

    • प्रत्येक छात्र को न्यूनतम एक वर्ग मीटर जगह देना अनिवार्य होगा।
    • यदि कोई संस्थान कोर्स अधूरा छोड़कर या समय से पहले समाप्त करता है, या बिना पूर्व सूचना के संस्थान को बंद करता है, तो उस पर वित्तीय दायित्वों को पूरा करने की कानूनी बाध्यता होगी – जिसमें छात्रों की फीस लौटाना, शिक्षकों के वेतन का भुगतान और अन्य देनदारियां शामिल होंगी।

    भ्रामक प्रचार और झूठे विज्ञापनों पर लगेगी लगाम.

    बिल में कोचिंग संस्थानों के झूठे दावों और भ्रामक विज्ञापनों पर भी रोक लगाने के लिए कई सख्त प्रावधान जोड़े गए हैं। अब कोई संस्थान उस छात्र का नाम और फोटो अपने प्रचार में नहीं दिखा सकेगा जो वास्तव में उसके संस्थान का छात्र नहीं रहा हो।

    आईडी कार्ड सिस्टम होगा लागू: पारदर्शिता की ओर कदम.

    बिल के अनुसार, एक सुदृढ़ पहचान प्रणाली (ID Card System) लागू की जाएगी:

    1. सीसीआर कार्ड (CCR – Coaching Center Registration): प्रत्येक संस्थान के लिए अनिवार्य।
    2. सीईडी कार्ड (CED – Coaching Enrolled Data): हर छात्र को मिलेगा, जिससे सरकार को पता रहेगा कि कौन-सा छात्र किस संस्थान में पढ़ रहा है।
    3. सीटीआर कार्ड (CTR – Coaching Tutor Registration): हर ट्यूटर को मिलेगा, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि एक शिक्षक एक समय में एक ही संस्थान में पढ़ाए।
    4. सीएमसी कार्ड (CMC – Coaching Mental Counselor): उन संस्थानों में अनिवार्य होगा जहां छात्र संख्या 1000 से अधिक है। ऐसे संस्थानों को एक मनोचिकित्सक नियुक्त करना अनिवार्य होगा।

    अभिभावकों की सहमति अनिवार्य.

    यदि किसी छात्र की उम्र 18 वर्ष से कम है, तो कोचिंग संस्थान में प्रवेश के समय उसके माता-पिता या अभिभावक की अनिवार्य उपस्थिति और लिखित सहमति जरूरी होगी।

    कोचिंग संस्थानों को भवन उपविधि-2016 के तहत लाया जाएगा.

    अब सभी कोचिंग संस्थानों को झारखंड भवन उपविधि-2016 के दायरे में लाया जाएगा। इसके तहत:

    • स्वच्छ शौचालय
    • शुद्ध पेयजल
    • हवादार कक्ष
    • आपात निकास की व्यवस्था
      इन सभी सुविधाओं को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराना होगा। यह नियम झारखंड नगरपालिका अधिनियम 2011 की धारा 434 के तहत अधिसूचित किया गया है।

    फ्रैंचाइजी और फ्रैंचाइज़र भी आएंगे कानून के घेरे में.

    सरकार का यह कानून कोचिंग उद्योग में प्रचलित फ्रैंचाइज़र और फ्रैंचाइजी मॉडल पर भी सख्ती करेगा। हाल ही में राजधानी रांची में एक प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान के अचानक बंद हो जाने के कारण छात्रों और अभिभावकों को शैक्षिक, आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। अब ऐसे मामलों में सरकार दोनों पक्षों पर कानूनी कार्रवाई कर सकेगी।

    शिक्षा के क्षेत्र में अनुशासन और जवाबदेही की ओर कदम.

    यह नया कानून झारखंड में कोचिंग संस्थानों को प्रभावी निगरानी, पारदर्शिता, छात्र कल्याण और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में यह विधेयक छात्रों के हितों की रक्षा करेगा और शिक्षा को एक व्यवस्थित, सुरक्षित और जिम्मेदार प्रक्रिया बनाएगा।

    अब राज्य में शिक्षा के नाम पर मनमानी, शोषण और भ्रम फैलाने वालों को जवाब देना होगा — झारखंड सरकार अब तैयार है।

     

  • झारखंड : रहस्यमयी खदानों की दुनिया को अब नजदीक से देखेंगे पर्यटक

    पहली बार शुरू होगा माइनिंग टूरिज्म.

    By: परवेज़ आलम.

    For The News Post4u.

    रांची : झारखंड सरकार ने देश में पहली बार एक अनोखी और साहसिक पहल की शुरुआत की है। अब तक बंद दरवाज़ों के पीछे रही खदानों की दुनिया आम जनता के लिए खोली जा रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुवाई में राज्य ने माइनिंग टूरिज्म (खनन पर्यटन) की शुरुआत की है, जो न सिर्फ राज्य की औद्योगिक पहचान को मजबूत करेगा, बल्कि पर्यटन क्षेत्र को भी नया आयाम देगा।

    खनन क्षेत्र अब बनेगा दर्शनीय स्थल.

    इस योजना के तहत राज्य सरकार और कोल इंडिया लिमिटेड की अनुषंगी कंपनी सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) के बीच एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह साझेदारी झारखंड पर्यटन विकास निगम (JTDC) और CCL के बीच हुई है। प्रारंभिक तौर पर यह परियोजना उत्तर उरीमारी खदान (North Urimari Mines) से शुरू की जाएगी।

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि इस पहल से लोगों को खदानों की कार्यप्रणाली, खनिज संपदा और श्रमिकों की मेहनत को नजदीक से देखने और समझने का मौका मिलेगा। उन्होंने यह फैसला हाल ही में स्पेन के गावा संग्रहालय के दौरे के बाद लिया, जहां उन्होंने प्राचीन खनन तकनीकों को देखा और उनसे प्रेरित हुए।

    क्या होगा इस खनन पर्यटन में खास.

    • पर्यटन संचालन: JTDC पर्यटकों की ऑनलाइन बुकिंग करेगा। सप्ताह में दो दिन पर्यटन की सुविधा मिलेगी। प्रत्येक ग्रुप में 10 से 20 पर्यटक शामिल हो सकेंगे।
    • सुरक्षा और निर्देश: पर्यटकों को खदान में प्रवेश से पहले CCL के सुरक्षा प्रोटोकॉल और स्वास्थ्य मानकों का पालन करना होगा। अंतिम अनुमति CCL द्वारा दी जाएगी।
    • गाइड सुविधा: CCL खदान की कार्यशैली, तकनीकी प्रक्रिया और सुरक्षा उपायों को समझाने के लिए प्रशिक्षित गाइड उपलब्ध कराएगा।
    • समझौते की अवधि: यह MoU पांच वर्षों के लिए लागू रहेगा, जिसे आगे पांच साल और बढ़ाया जा सकता है।
    • विस्तार की योजना: भविष्य में अन्य खदानों को भी इस पर्यटन सर्किट में जोड़ा जाएगा।

    खान पर्यटन के पीछे सरकार का मकसद.

    पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा, “झारखंड खनन राज्य के रूप में जाना जाता है। अब हम उस पहचान को एक नए रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। खनन पर्यटन आम जनता, छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए एक ज्ञानवर्धक अनुभव बनेगा। इससे न केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी बल्कि राज्य की औद्योगिक विरासत और ऊर्जा इतिहास को भी वैश्विक मंच पर पहचान मिलेगी।”

    उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में सरकार भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) के साथ मिलकर एक और माइनिंग टूरिज्म ज़ोन विकसित करने की योजना पर काम कर रही है।

    समारोह में बड़ी भागीदारी.

    इस ऐतिहासिक अवसर पर CCL के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर निलेंदु कुमार सिंह, JTDC के एमडी प्रेम रंजन, पर्यटन निदेशक विजया जाधव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए सरकार और CCL के बीच तीन दौर की मैराथन बैठकें हुईं, जिसके बाद यह समझौता साकार हुआ।

    राज्य को मिलेंगे बहुआयामी लाभ.

    झारखंड खनिज संसाधनों से भरपूर राज्य है। देश के कुल खनिज भंडार का करीब 40% हिस्सा यहीं स्थित है। ऐसे में यह पहल राज्य को सिर्फ पर्यटन के क्षेत्र में ही नहीं, शिक्षा, रोजगार, सांस्कृतिक धरोहर और उद्योग के क्षेत्र में भी लाभ पहुंचाएगी।


    माइनिंग टूरिज्म के जरिए झारखंड अब सिर्फ ‘खनन राज्य’ नहीं, बल्कि ‘टूरिस्ट फ्रेंडली खनन राज्य’ बनने की ओर बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी सरकार का यह कदम देशभर में अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।

    अगर आप रहस्यमयी खदानों की दुनिया को नजदीक से देखना चाहते हैं, तो झारखंड अब आपके स्वागत के लिए तैयार है।

  • एसपी हत्याकांड में हाई कोर्ट के जजों में मतभेद ! एक ने किया बरी, दूसरे जस्टिस ने फांसी की सजा को सही माना

    –अब चीफ जस्टिस तय करेंगे अगली सुनवाई.

    रांची, झारखंड: झारखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 2013 में पाकुड़ के तत्कालीन एसपी अमरजीत बलिहार और अन्य पांच पुलिसकर्मियों की हत्या मामले में दोषी ठहराए गए दो नक्सलियों की फांसी की सजा पर अलग-अलग निर्णय सुनाया है। अब यह मामला मुख्य न्यायाधीश को सौंपा जाएगा, जो इसे किसी अन्य पीठ को भेज सकते हैं।

    निचली अदालत ने सुनाई थी फांसी की सजा.

    6 सितंबर 2018 को दुमका के चतुर्थ जिला एवं सत्र न्यायाधीश तौफीकुल हसन की विशेष अदालत ने प्रवीर मुर्मू उर्फ ‘प्रवीर दा’ और सनातन बास्की उर्फ ‘ताला दा’ को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। अदालत ने इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ की श्रेणी का मामला माना था। दोषियों को हत्या, आपराधिक साजिश और आर्म्स एक्ट के तहत सजा दी गई थी।

    दोषियों ने इस निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उन्होंने कहा कि निचली अदालत ने बिना ठोस सबूतों के उन्हें दोषी करार दिया।

    हाईकोर्ट के जजों मे मतभेद.

    जस्टिस आर मुखोपाध्याय का निर्णय-दोषियों को संदेह का लाभ.

    जस्टिस रोंगोन मुखोपाध्याय ने अभियुक्तों को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का पक्ष लिया। उनके अनुसार –

    • गवाहों की पहचान प्रक्रिया (टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड) में खामियां थीं।
    • अभियोजन पक्ष के कई गवाहों के बयान आपस में मेल नहीं खा रहे थे।
    • घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था और फोरेंसिक साक्ष्य भी अपर्याप्त थे।
    • घायल पुलिसकर्मी बबलू मुर्मू ने भी आरोपियों की पहचान करने से इनकार कर दिया था।

    उनका मानना था कि अभियोजन पक्ष केवल संदेह के आधार पर दोष सिद्ध करने का प्रयास कर रहा था, जबकि अदालत में दोष सिद्ध करने के लिए संदेह से परे प्रमाण आवश्यक हैं।

    जस्टिस संजय प्रसाद का निर्णय: सजा कायम रखने का समर्थन.

    वहीं दूसरी ओर, जस्टिस संजय प्रसाद ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई मृत्युदंड की सजा को उचित ठहराया। उनके अनुसार –

    • अभियोजन ने घटना के दो प्रत्यक्षदर्शी गवाहों को प्रस्तुत किया, जो स्वयं हमले में घायल हुए थे।
    • अभियुक्त सनातन बास्की के इकबालिया बयान में हमले की पूर्व योजना का विवरण था।
    • मेडिकल रिपोर्ट और परिस्थितिजन्य साक्ष्य अभियोजन के पक्ष में थे।
    • यह हमला सुनियोजित, क्रूर और राज्य विरोधी था।

    जस्टिस प्रसाद ने कहा कि यह ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ श्रेणी का अपराध है और इसमें कोई नरमी नहीं बरती जा सकती।

    मुआवजे और पुनर्वास का निर्देश.

    जस्टिस संजय प्रसाद ने अपने फैसले में झारखंड सरकार को यह आदेश भी दिया:

    • तत्कालीन एसपी अमरजीत बलिहार के परिजनों को 2 करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाए।
    • उनके पुत्र या पुत्री को डीएसपी या डिप्टी कलेक्टर के पद पर नियुक्त किया जाए, साथ ही आवश्यकता पड़ने पर आयु सीमा में छूट भी दी जाए।
    • शहीद हुए अन्य पांच पुलिसकर्मियों के परिजनों को 50-50 लाख रुपये मुआवजा और उनकी योग्यता के अनुसार पुलिस विभाग में नियुक्ति दी जाए।

    इस आदेश की प्रति राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी समेत संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    2013 मे हुआ था भीषण हमला.

    2 जुलाई 2013 को पाकुड़ के एसपी अमरजीत बलिहार दुमका में एक चुनावी बैठक से लौट रहे थे, तभी लिट्टीपाड़ा के समीप करीब 30 नक्सलियों ने घात लगाकर पुलिस दल पर हमला कर दिया था। इस हमले में एसपी बलिहार सहित छह पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी। नक्सली मौके से दो AK-47, चार INSAS राइफलें, बुलेटप्रूफ जैकेट और मोबाइल भी लूट ले गए थे।

    आगे की कार्रवाई- नई बेंच तय करेगी निर्णय.

    दोनों जजों के भिन्न मत के कारण अब यह मामला झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भेजा जाएगा। वे तय करेंगे कि इस अपील की सुनवाई के लिए कौन सी बेंच गठित की जाए।

  • 3 अगस्त को झारखंड, बिहार समेत पांच राज्यों में नक्सली बंद का ऐलान

     — बढ़ते ऑपरेशनों के विरोध में नक्सलियों का प्रतिरोध

    By: परवेज़ आलम

    For The News Post4u.

    गिरिडीह/रांची: झारखंड और बिहार समेत पांच राज्यों में एक बार फिर नक्सली बंद का ऐलान किया गया है। प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) ने 3 अगस्त 2025 को झारखंड, बिहार, उत्तरी छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और असम में बंद का आह्वान किया है। बंद का उद्देश्य नक्सल ऑपरेशनों और लगातार हो रही मुठभेड़ों के विरोध में “जनविरोधी कार्रवाइयों” के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर करना है।

    माओवादी संगठन का आरोप और बंद का मकसद.

    भाकपा (माओवादी) के पूर्वी रीजनल ब्यूरो के प्रवक्ता संकेत ने प्रेस रिलीज जारी कर इस बंद की जानकारी दी। बयान में कहा गया है कि ऑपरेशन कगार के तहत की जा रही “फासीवादी कार्रवाई” और विवेक उर्फ प्रयाग मांझी सहित आठ माओवादी कार्यकर्ताओं की हत्या का प्रतिशोध लेने के लिए यह बंद बुलाया गया है। संगठन का आरोप है कि राज्य और केंद्र सरकारें गरीब, आदिवासी और वंचित वर्गों को कुचलने के लिए जबरन सैन्य कार्रवाई कर रही हैं।

    जगह-जगह स्मृति सभा का भी ऐलान.

    नक्सलियों ने न सिर्फ बंद का ऐलान किया है, बल्कि अपने मारे गए कैडरों की स्मृति में देशभर में स्मृति सभाएं आयोजित करने की योजना भी बनाई है। इन सभाओं में अंडरग्राउंड समर्थकों को भाग लेने और जनसंपर्क बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि नक्सली संगठन इस बंद के माध्यम से एक बार फिर अपने खोते प्रभाव को पुनः स्थापित करने की कोशिश में है।

    पुलिस का प्रहार: 6 महीने में 17 नक्सली मारे गए, 197 गिरफ्तार.

    इस साल के पहले छह महीनों में झारखंड पुलिस और केंद्रीय बलों ने माओवादियों पर बड़ा शिकंजा कसते हुए 17 नक्सलियों को मुठभेड़ में ढेर कर दिया है। वहीं 197 नक्सलियों को गिरफ्तार भी किया गया है। कई इनामी माओवादी या तो मारे गए हैं या जेल पहुंच चुके हैं।

    कुछ प्रमुख मुठभेड़ की घटनाएं:

    • 21 जनवरी 2025: बोकारो जिले में एरिया कमांडर शांति देवी और कदर मनोज टुडू को मार गिराया गया।
    • 29 जनवरी 2025: चाईबासा में जोनल कमांडर संजय गंझू और एक करोड़ के इनामी नक्सली एनाल्डा की महिला मित्र हेमंत मांगियां को सुरक्षा बलों ने ढेर किया।
    • जनवरी 2025: रामगढ़ में आतंक का पर्याय बने राहुल तुरी को भी मार गिराया गया।
    • 21 अप्रैल 2025: झारखंड पुलिस के इतिहास का सबसे बड़ा एनकाउंटर, जिसमें एक साथ आठ नक्सली ढेर हुए, जिनमें सबसे चर्चित नाम था एक करोड़ के इनामी विवेक उर्फ प्रयाग मांझी का।
    • जुलाई 2025: बोकारो में पांच लाख के इनामी नक्सली कुंवर को भी मार गिराया गया।

    इन सभी कार्रवाइयों ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया है कि राज्य की सुरक्षा एजेंसियां माओवादियों के खिलाफ सख्त मोड में हैं और अब संगठन बैकफुट पर है।

    सुरक्षा एजेंसियों के लिए अलर्ट.

    3 अगस्त को प्रस्तावित बंद को देखते हुए पुलिस और खुफिया एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं। रेलवे, बस अड्डे, बाजार, खनन क्षेत्र और सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पिछली बार की तरह इस बार भी नक्सली हिंसा की आशंका को देखते हुए अतिसंवेदनशील जिलों में ड्रोन और सैटेलाइट निगरानी की व्यवस्था की जा रही है।

    जहां एक ओर माओवादी संगठन पुलिस कार्रवाई के खिलाफ आवाज़ उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा बलों का दावा है कि उनका उद्देश्य केवल आम लोगों की सुरक्षा और शांति बहाल करना है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि नक्सली बंद को कितना समर्थन मिल पाता है और क्या राज्य प्रशासन उस पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रख पाता है।

  • पर्यावरण संरक्षण की दिशा में CIO की पहल: बच्चों ने लिया हरित भविष्य का संकल्प

    By The News Post4u.

    गिरिडीह: पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक सराहनीय कदम उठाते हुए चिल्ड्रेन इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन (CIO) ने गिरिडीह के बिशुनपुर स्थित होली एंजेल्स पब्लिक स्कूल में वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया। यह आयोजन “मिट्टी  में हाथ, दिल वतन के साथ” नामक राष्ट्रीय अभियान के तहत किया गया, जिसका उद्देश्य देशभर में 10 लाख पौधे लगाने का है।

    यह हरित अभियान 25 जून से 25 जुलाई तक चलाया जा रहा है, और इसी क्रम में विद्यालय परिसर में दर्जनों पौधे रोपे गए। इस कार्यक्रम में स्कूली बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और पर्यावरण संरक्षण को लेकर अपने विचार भी व्यक्त किए।

    कार्यक्रम की प्रमुख झलकियाँ.

    • स्कूल के निदेशक कामरान अख्तर ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया और बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखना इंसान की ज़िम्मेदारी है।
    • छात्राओं ने भी अपनी बात रखते हुए पर्यावरण के विभिन्न पहलुओं पर रोशनी डाली:
      • हेबा कुलसुम ने इस्लाम में पर्यावरण के महत्व को बताया।
      • साफिया राशिदा ने वृक्षों से मिलने वाले लाभों की चर्चा की।
      • तसनिम सबा ने हरियाली और स्वास्थ्य के गहरे संबंध पर विचार रखे।

    करीब 40 बच्चों ने मिलकर पौधे लगाए और भविष्य में एक स्वच्छ, हरा-भरा वातावरण बनाने का संकल्प लिया।

    कार्यक्रम संचालन और सहयोग.

    इस कार्यक्रम का संचालन हुम्मना नोमान और ईंशा हासमी ने किया। आयोजन की सफलता में सरफराज अख्तर सैफी, रसिद आलम, मोईन अख्तर, लईक अहमद अंसारी, नवेद अंजुम अजमी, प्रवेजुल हसन काजमी और मो. रीज़वान की भूमिका महत्वपूर्ण रही।

    सकारात्मक संदेश.

    CIO और GIO द्वारा की गई यह पहल न सिर्फ बच्चों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा कर रही है, बल्कि समाज को यह संदेश भी दे रही है कि “अगर आज एक पौधा लगाया जाए, तो कल एक बेहतर दुनिया बन सकती है।”

    इस अभियान के माध्यम से यह साबित हो रहा है कि छोटे-छोटे कदम भी बड़े बदलाव की दिशा में अहम भूमिका निभा सकते हैं — और इसकी शुरुआत बच्चों से हो, तो भविष्य और भी उज्जवल नज़र आता है।

  • वायरल वीडियो पर झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी की सफाई: “बेटे कृष को राजनीतिक साजिश के तहत घसीटा जा रहा है”

    By: परवेज़ आलम.

    For The News Post4u.

    रांची, 19 जुलाई 2025
    झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के बेटे कृष अंसारी इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो को लेकर सुर्खियों में हैं। वीडियो में कृष अंसारी राजधानी रांची के प्रमुख अस्पतालों – रिम्स (RIMS) और पारस हॉस्पिटल में मरीजों से बातचीत करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि कृष अस्पतालों का “निरीक्षण” कर रहे थे, जिससे सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    क्या है वायरल वीडियो का मामला?

    वायरल हो रहे इस वीडियो में कृष अंसारी कुछ युवकों के साथ अस्पतालों में मरीजों से बातचीत करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में उनके साथ मौजूद युवक कहते सुने जा सकते हैं – “ये मंत्री जी के बेटे हैं, अपनी समस्याएं बताइए।” इसके बाद से ही कृष पर “नेतागिरी” और “बिना अधिकार निरीक्षण” के आरोप लगने लगे।

    हालांकि, वीडियो की सत्यता की स्वतंत्र पुष्टि किसी न्यूज माध्यम द्वारा नहीं की गई है, लेकिन मामला तूल पकड़ता देख अब स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने खुद X (पूर्व ट्विटर) पर बयान जारी कर साफ-साफ जवाब दिया है।

    मंत्री इरफान अंसारी की प्रतिक्रिया: “तथ्यों को तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है”

    अपने आधिकारिक पोस्ट में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा:

    “सच्चाई को समझें। मेरे बेटे कृष को बेवजह और दुर्भावनापूर्ण तरीके से एक झूठे विवाद में घसीटा जा रहा है। कुछ मीडिया संस्थानों और राजनीतिक स्वार्थी तत्वों द्वारा इस विषय को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।”

    मंत्री ने स्पष्ट किया कि कृष किसी सरकारी निरीक्षण या राजनीतिक उद्देश्य से अस्पताल नहीं गया था। उन्होंने बताया कि कृष रिम्स में अपने शिक्षक आदित्य कुमार झा के बीमार पिता का हालचाल लेने गया था।

    “मानवीय आधार पर की गई मदद को राजनीति का रंग दिया जा रहा”

    डॉ. इरफान अंसारी ने आगे बताया कि पिछली रात कुछ आदिवासी परिवार उनके सरकारी आवास पर मदद के लिए पहुंचे थे, जो रिम्स में इलाज के लिए परेशान थे। उनके आग्रह पर कृष मानवीय भाव से उनकी मदद के लिए अस्पताल गया, ताकि वे आवश्यक चिकित्सा सहायता प्राप्त कर सकें।

    उन्होंने यह भी जोड़ा कि संयोग से रिम्स में भर्ती एक वरिष्ठ पत्रकार के परिजन को भी चिकित्सकीय सहयोग की ज़रूरत थी, और कृष ने उन्हें भी पूरी संवेदनशीलता से सहयोग किया।

    “सेवा करना अपराध कब से हो गया?” – इरफान अंसारी

    मंत्री ने वीडियो के राजनीतिकरण पर गहरी नाराज़गी जताते हुए कहा:

    “आज जिस तरह से एक सामान्य मानवीय कर्तव्य को तोड़-मरोड़ कर राजनीति का रंग चढ़ाया जा रहा है, वह दुखद और चिंताजनक है। कृष एक होनहार छात्र है, जो छुट्टियों में रांची आया है। वह पूर्व सांसद फुरकान अंसारी का पोता है, जिन्होंने झारखंड के अलग राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। क्या ऐसे परिवार में सेवा की भावना होना कोई अपराध है?”

    विपक्ष ने उठाए सवाल, मंत्री ने ठहराया ‘राजनीतिक साजिश’

    इस पूरे विवाद को लेकर विपक्ष के कुछ नेताओं ने सरकार पर प्रशासनिक नियमों के उल्लंघन और राजनीतिक परिवारवाद का आरोप लगाया है। वहीं, इरफान अंसारी ने इसे साफ तौर पर एक राजनीतिक साजिश और चरित्र हनन का प्रयास बताया है।

    वायरल वीडियो के बहाने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के परिवार को लेकर उठे विवाद ने झारखंड की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। जहां एक ओर मंत्री इसे सेवा भावना बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ वर्ग इसे शक्ति का दुरुपयोग कहा जा रहा है ।

    अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मामला राजनीतिक बहस तक सीमित रहता है या प्रशासनिक जाँच का विषय बनता है।

  • रांची, जमशेदपुर और धनबाद में मेट्रो रेल परियोजना के लिए केंद्र को भेजा गया प्रस्ताव

    –हेमंत सरकार की बड़ी पहल.

    By: परवेज़ आलम.

    For The News Post4u.

    रांची, 19 जुलाई 2025:
    झारखंड सरकार ने राज्य के तीन प्रमुख शहरों – रांची, जमशेदपुर और धनबाद – में मेट्रो रेल परियोजना शुरू करने की दिशा में अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा दिया है, जिससे झारखंड को आधुनिक और टिकाऊ शहरी परिवहन व्यवस्था मिल सके।

    पूर्वी क्षेत्रीय परिषद में रखा गया था एजेंडा.

    10 जुलाई को रांची में आयोजित 27वीं पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में इस मेट्रो रेल परियोजना का औपचारिक प्रस्ताव रखा। इसके बाद राज्य के  नगर विकास विभाग ने प्रस्ताव को केंद्रीय शहरी विकास एवं आवास मंत्री मनोहर लाल खट्टर और मंत्रालय के सचिव को भेज दिया है।

    तीन शहरों में मेट्रो से होगी शुरुआत.

    फिलहाल परियोजना का दायरा रांची, जमशेदपुर और धनबाद तक सीमित है, लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की दीर्घकालिक योजना है कि झारखंड के सभी पांच प्रमंडलीय शहरों तक मेट्रो सेवा का विस्तार किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा है कि , “यह मेट्रो रेल परियोजना झारखंड की नई विकास गाथा की नींव रखेगी और राज्य को आधुनिक परिवहन व्यवस्था से जोड़ेगी।”

     पूर्ववर्ती सरकारों की आलोचना.

    JMM  प्रवक्ता  ने  पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि “झारखंड में पहले कभी ऐसी विकास परियोजनाओं को लेकर केंद्र के पास गंभीरता से प्रस्ताव नहीं भेजे जाते थे। देश के दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों की तरह झारखंड को भी अब आधारभूत संरचना में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।”

    हेमंत सरकार ने पहली बार इस दिशा में ठोस पहल करते हुए मेट्रो जैसी परियोजना की विस्तृत योजना बनाई और केंद्र को सौंपा है।

    क्या है प्रस्ताव में खास?

    नगर विकास विभाग द्वारा भेजे गए प्रस्ताव में केंद्र से तीन प्रमुख मांगें की गई हैं:

    1. मेट्रो परियोजना की फिजिबिलिटी स्टडी (संभवता अध्ययन)
    2. सर्वेक्षण और तकनीकी मूल्यांकन
    3. विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के लिए सहयोग

    इसका उद्देश्य है कि केंद्र सरकार शीघ्र अनुमोदन दे ताकि इन शहरों में मेट्रो परियोजना की औपचारिक शुरुआत की जा सके।

    झारखंड के लिए मेट्रो क्यों है जरूरी?

    रांची, जमशेदपुर और धनबाद जैसे शहरों में बढ़ती जनसंख्या और ट्रैफिक के दबाव को देखते हुए मेट्रो सेवा न केवल परिवहन व्यवस्था को सुगम बनाएगी, बल्कि यह शहरी क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर, आर्थिक गतिविधियों में तेजी और पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगी।

    हेमंत सरकार का यह कदम झारखंड को 21वीं सदी की बुनियादी संरचना से जोड़ने की दिशा में एक दूरदर्शी प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

  • गिरिडीह: तैलिक साहू सभा ने सावन मिलन समारोह में सजाई सांस्कृतिक और महिला सशक्तिकरण की रंगारंग झलक

    By: चंदन पांडेय

    Edited By: परवेज़ आलम

    For The News Post4u.

    गिरिडीह, 19 जुलाई 2025
    गिरिडीह जिला तैलिक साहू सभा (महिला प्रकोष्ठ) द्वारा शनिवार को हुट्टी बाजार प्रांगण में सावन मिलन समारोह का भव्य आयोजन किया गया। पारंपरिक उल्लास और सामाजिक एकता से सराबोर यह कार्यक्रम सावन के पावन अवसर पर महिलाओं के लिए एक खास संगम साबित हुआ।

    दीप प्रज्वलन और पुष्पांजली के साथ हुई शुरुआत.

    समारोह की शुरुआत महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष सुचिता देवी के नेतृत्व में दीप प्रज्ज्वलन और समाज के महान दानवीर भामाशाह जी की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। इस अवसर पर महिला महासचिव विनीता देवी समेत तमाम पदाधिकारी उपस्थित रहीं। इसके बाद सुरम्य गणेश वंदना से कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन हुआ, जिसने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

    सावन की पवित्रता और सांस्कृतिक सौंदर्य पर प्रकाश.

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अध्यक्ष सुचिता देवी ने सावन माह की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह महीना आध्यात्मिक ऊर्जा और प्रकृति के सौंदर्य का प्रतीक होता है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन न केवल सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखते हैं, बल्कि महिलाओं को एकजुट कर उनके भीतर नेतृत्व और सामाजिक भागीदारी की भावना भी जागृत करते हैं।

    खेल, सौंदर्य प्रतियोगिता और सम्मान समारोह.

    समारोह के दौरान विभिन्न मनोरंजक खेल और सौंदर्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार और सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया, जिससे उनमें विशेष उत्साह और आत्मबल देखा गया।

    सक्रिय भागीदारी ने बनाया आयोजन सफल.

    कार्यक्रम की सफलता में महिला प्रकोष्ठ की सभी सदस्याओं ने मिलकर योगदान दिया। मीरा देवी, गीता देवी, मधु देवी, नीतू साहू, उपाध्यक्ष खुशबू कुमारी, सचिव पिंकी साह, शिल्पी साह, रूबी शाह, सुष्मिता शाह, रानी कुमारी, युवा अध्यक्ष सोनी साह, संगठन मंत्री डोली कुमारी, सुनीता देवी, सरस्वती देवी, कंचन कुमारी, किरण देवी, जयंती देवी, रंजू देवी, सीमा देवी, प्रमिला देवी और दीपा कुमारी जैसी सक्रिय कार्यकर्ताओं की उपस्थिति ने इस समारोह को यादगार बना दिया।

    महिला सशक्तिकरण की दिशा में सशक्त कदम.

    यह आयोजन महिला सशक्तिकरण, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल साबित हुआ। मंच संचालन सोनी साह ने अत्यंत आकर्षक और प्रभावशाली ढंग से किया, जबकि कोषाध्यक्ष माधुरी गुप्ता और पूनम साव ने आयोजन की व्यवस्था को सफलतापूर्वक संभाला।

    उल्लेखनीय उपस्थिति.

    कार्यक्रम में करीब 100 महिलाओं की सक्रिय भागीदारी रही, जिन्होंने सावन के इस पावन अवसर को भक्ति, उत्सव और मेल-मिलाप के रंगों से भर दिया।

    यह समारोह समाज में महिलाओं की भूमिका को सशक्त करने और पारंपरिक मूल्यों को जीवंत रखने की दिशा में एक अनुकरणीय उदाहरण बनकर सामने आया।

  • आम जनता में सुरक्षा का भाव बनाए रखना पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता-एसपी

    For The News Post4u.

    गिरिडीह, 19 जुलाई 2025.
    पुलिस अधीक्षक कार्यालय स्थित सभागार में आज मासिक अपराध गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक  डॉक्टर बिमल कुमार  ने जिले भर के पुलिस पदाधिकारियों के साथ विभिन्न मामलों की समीक्षा करते हुए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए। गोष्ठी का उद्देश्य अपराध नियंत्रण, लंबित मामलों के निष्पादन और आम जन की सुरक्षा सुनिश्चित रखना पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है ।

    1. लंबित कांडों की समीक्षा और निष्पादन.
      बैठक के दौरान जिले में लंबित आपराधिक मामलों की गहन समीक्षा की गई। पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया कि ऐसे मामलों के शीघ्र निष्पादन के लिए सभी थाना प्रभारी गंभीर प्रयास करें और आवश्यकतानुसार त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें।
    2. जन शिकायतों पर संवेदनशीलता.
      जनता की शिकायतों को गंभीरता से लेने और उनका शीघ्र समाधान करने पर बल दिया गया। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि लोगों की भरोसा कायम रखने के लिए प्रत्येक थाना स्तर पर पारदर्शिता और उत्तरदायित्व जरूरी है।
    3. श्रावण मास और कांवर यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था.
      आगामी श्रावण मास को देखते हुए कांवरियों के आवागमन के दौरान विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया। साथ ही यह भी कहा गया कि कांवरियों को रास्ते में किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए जिला पुलिस द्वारा सभी आवश्यक इंतजाम किए जाएं।
    4. पुलिस हेल्पलाइन नंबरों का प्रचार.
      पुलिस अधीक्षक ने निर्देशित किया कि जिले के प्रमुख सड़कों पर फ्लैक्स लगवाए जाएं, जिन पर गिरिडीह पुलिस के संपर्क नंबर अंकित हों, ताकि आमजन आवश्यकता पड़ने पर तुरंत सहायता प्राप्त कर सकें।
    5. विधि-व्यवस्था बनाए रखने हेतु अन्य निर्देश.
      इसके अतिरिक्त शहर और ग्रामीण इलाकों में कानून व्यवस्था बनाए रखने, असामाजिक तत्वों पर नजर रखने और सामूहिक आयोजनों के दौरान सतर्कता बरतने जैसे अन्य अहम निर्देश भी अधिकारियों को दिए गए।

    गोष्ठी में सभी थाना प्रभारियों, डीएसपी स्तर के अधिकारियों तथा विशेष शाखा के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में जुलाई माह की आपराधिक घटनाओं, अनुसंधान प्रगति, और आगामी धार्मिक आयोजनों को लेकर समेकित रणनीति पर चर्चा की गई।

    पुलिस अधीक्षक ने दोहराया कि कानून-व्यवस्था को दुरुस्त रखना और आम जनता में सुरक्षा का भाव बनाए रखना जिला पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

     

  • गिरिडीह:साइबर ठगी रैकेट का भंडाफोड़, दो आरोपी गिरफ्तार

    -मोबाइल ऐप के ज़रिए करते थे बैंक अकाउंट से पैसे गायब. 

    For The News Post4u.

    GIRIDIH: गिरिडीह जिले के अहिल्यापुर थाना क्षेत्र अंतर्गत नावाडीह गांव के डंगाल इलाके में शुक्रवार को साइबर अपराधियों के एक सक्रिय नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ। पुलिस अधीक्षक को प्रतिबिम्ब पोर्टल के माध्यम से प्राप्त गुप्त सूचना के आधार पर गिरिडीह साइबर थाना की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए छापेमारी कर दो साइबर ठगों को गिरफ्तार कर लिया।

    गिरफ्तार आरोपी –देवघर से है.

    पकड़े गए आरोपियों की पहचान मनीष कुमार मंडल और मिथुन कुमार मंडल  के रूप में हुई है। दोनों आरोपी झारखंड के देवघर जिले के मारगोमुण्डा थाना क्षेत्र स्थित खिजुरियाटाड़ गांव के निवासी हैं।

    फर्जी मोबाइल एप्स बना था ठगी का हथियार.

    पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि दोनों युवक फर्जी मोबाइल ऐप्स जैसे:

    • Delhi Jal Board Update.apk
    • Electricity Bill Update.apk
    • NDMC Bill Update.apk

    …को आम नागरिकों के मोबाइल पर भेजते थे। जब लोग इन ऐप्स को डाउनलोड करते थे, तो उनके फोन हैक हो जाते थे। इसके बाद अपराधी उनके मोबाइल के माध्यम से बैंक खाते से पैसे निकाल लेते थे। यह एक सोची-समझी और तकनीकी रूप से अत्याधुनिक साइबर ठगी की साजिश थी।

    तकनीकी सबूत भी बरामद.

    पुलिस ने आरोपियों के पास से 8 मोबाइल फोन और 9 सक्रिय सिम कार्ड बरामद किए हैं। जब्त मोबाइल नंबरों की जांच में पता चला है कि इन पर कम से कम 7 साइबर ठगी के मामले पहले से दर्ज हैं, जिससे स्पष्ट है कि आरोपी लंबे समय से इस नेटवर्क का संचालन कर रहे थे।

    कानूनी कार्रवाई जारी.

    इस पूरे मामले में गिरिडीह साइबर थाना मे  मामला दर्ज की गई है। पुलिस इन आरोपियों से जुड़े अन्य नेटवर्क की भी जांच कर रही है और इनके गिरोह में शामिल अन्य अपराधियों की तलाश जारी है। इस छापेमारी दल का नेतृत्व साइबर क्राइम डीएसपी आबिद खान  ने किया। गिरिडीह पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे अनजान लिंक या मोबाइल एप्लिकेशन को डाउनलोड करने से बचें। यदि कोई संदिग्ध मैसेज या कॉल आता है, तो तुरंत नजदीकी साइबर थाना या हेल्पलाइन पर इसकी सूचना दें।