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  • जन्मदिन पर दिखे ‘कैप्टन कूल’: फैंस को दिया माही ने खास तोहफा, फार्म हाउस से निकलकर लहराया हाथ

    Edited by – परवेज़ आलम.
    For – The News Post4u.

    भारतीय क्रिकेट के सबसे चहेते सितारे और देश को तीन आईसीसी ट्रॉफियां दिलाने वाले महेंद्र सिंह धोनी  ने 7 जुलाई को अपने जन्मदिन के मौके पर एक ऐसा पल रच दिया जिसे रांची कभी नहीं भूलेगा। सोमवार की सुबह, जब रांची हल्की बारिश और बादलों की चादर में लिपटी थी, धोनी अपने सिमलिया स्थित फार्म हाउस से बाहर निकले और अपने चाहने वालों को अपनी झलक देकर जन्मदिन को यादगार बना दिया।

    धोनी इस मौके पर अपनी नई चमचमाती कार में सवार थे। जैसे ही उन्होंने फार्म हाउस का गेट पार किया, वहां पहले से मौजूद सैकड़ों प्रशंसकों में उत्साह की लहर दौड़ गई। “धोनी-धोनी!”  के नारों से इलाका गूंज उठा। माही ने भी अपने खास शांत और सादगीपूर्ण अंदाज़ में कार की स्पीड धीमी की और हाथ हिलाकर सबका अभिवादन किया।

    भीड़ में बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक, हर कोई अपनी आंखों से ‘कैप्टन कूल’ की एक झलक पाने को आतुर था। कुछ लोगों के हाथों में तख्तियां थीं जिन पर लिखा था – “हैप्पी बर्थडे माही, झारखंड की शान, भारत की जान”। वहीं कुछ युवा अपने मोबाइल कैमरों से उस ऐतिहासिक क्षण को कैद करने में लगे थे।

    सुबह से जुटने लगी थी भीड़, बारिश भी नहीं रोक सकी जोश.

    धोनी के फैंस सुबह से ही उनके फार्म हाउस के बाहर जमा होने लगे थे। किसी ने केक साथ लाया था, तो कोई धोनी के पोस्टर लेकर खड़ा था। फैन क्लब्स ने वहीं सड़क किनारे छोटा-सा मंच बना रखा था जहां संगीत, उत्सव और जोश का माहौल था। बारिश रुक-रुक कर हो रही थी लेकिन लोगों के उत्साह में कोई कमी नहीं थी।

    सोशल मीडिया से लेकर गली-मोहल्लों तक मना जश्न.

    रांची ही नहीं, पूरे देश में माही का जन्मदिन किसी त्योहार से कम नहीं रहा। ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स पर #HappyBirthdayDhoni ट्रेंड करता रहा। फैंस ने जगह-जगह केक काटकर जश्न मनाया और अपने-अपने अंदाज में धोनी के प्रति अपना प्यार जताया।

    एक नजर धोनी की उपलब्धियों पर.
    महेंद्र सिंह धोनी न सिर्फ भारतीय क्रिकेट के सबसे शांत कप्तानों में से हैं, बल्कि उनकी कप्तानी में भारत ने जो इतिहास रचा, वो कभी नहीं मिटाया जा सकता।

    • 2007 में टी20 वर्ल्ड कप.
    • 2011 में वनडे वर्ल्ड कप.
    • 2013 में चैंपियंस ट्रॉफी.

    इसके अलावा उन्होंने भारतीय टेस्ट टीम को भी नंबर-1 रैंकिंग तक पहुंचाया। आईपीएल में भी धोनी की टीम चेन्नई सुपर किंग्स ने उनके नेतृत्व में 5 बार खिताब जीता है, और आज CSK को सबसे सफल फ्रेंचाइज़ी में गिना जाता है.

    जन्मदिन पर धोनी ने कुछ कहा तो नहीं, लेकिन उनका एक इशारा – भीड़ को देखकर मुस्कुराना, हाथ हिलाना और कार की स्पीड धीमी करना – यही संदेश दे गया कि वह आज भी अपने फैंस को सबसे पहले रखते हैं। उनके लिए यह छोटा-सा लम्हा शायद एक दिन का किस्सा हो, लेकिन उनके फैंस के लिए यह यादगार बन गया।

  • तेलंगाना में बेरहमी से पिता की हत्या: पत्नी और दो बेटों ने मिलकर रची साजिश, झारखंड के गिरिडीह से जुड़ा है मामला

    Edited by: परवेज़ आलम
    For The News Post4U

    गिरिडीह/सिकंदराबाद/हैदराबाद:
    मानवता को झकझोर देने और दिल दहला देने वाली घटना में झारखंड के गिरिडीह निवासी अशोक यादव की हैदराबाद के पास सुनसान इलाके में बेरहमी से हत्या कर दी गई। इस हत्याकांड को किसी और ने नहीं बल्कि उसकी पत्नी और दो बेटों ने मिलकर अंजाम दिया। तेलंगाना पुलिस ने इस मामले में मृतक की पत्नी क्रांति देवी, बेटों राजेंद्र यादव  और राजेश यादव के अलावा एक जूस दुकान के कर्मचारी को गिरफ्तार कर लिया है।

    हत्या के पीछे पारिवारिक विवाद और अवैध संबंधों का संदेह.

    मृतक अशोक यादव, झारखंड के गिरिडीह जिले के घोड़थम्बा ओपी क्षेत्र के पड़रिया गांव का रहने वाला था। वह लंबे समय से तेलंगाना के सिकंदराबाद के काजिगुड़ा इलाके में जूस की दुकान चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। परिजनों के मुताबिक, अशोक की शादी क्रांति देवी से हुई थी, लेकिन शुरू से ही उनके वैवाहिक संबंध तनावपूर्ण रहे। हालांकि, उनके दो बेटे और एक बेटी हुए। बेटी की शादी कर दी गई थी, और दोनों बेटों को अशोक ने अपनी दुकान का जिम्मा सौंप दिया था।

    भाई पिंटू यादव ने बताया कि अशोक को अपनी पत्नी क्रांति देवी के किसी अन्य व्यक्ति के साथ अवैध संबंधों का शक था। इसी को लेकर पति-पत्नी के बीच अक्सर झगड़े होते रहते थे। कई बार गांव में इस मुद्दे पर पंचायत भी हुई, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं आया। आरोप है कि क्रांति देवी ने अपने बेटों को पिता के खिलाफ भड़काया और उनके साथ मिलकर पति की हत्या की साजिश रच डाली।

    हत्या की रात्रि और निर्मम वारदात.

    मंगलवार की देर रात, अशोक यादव जब होटल में खाना खाकर घर लौटा और सोने चला गया, तभी उस पर जानलेवा हमला किया गया। पहले उसके सिर पर लोहे के काता (लोहे की छड़) से वार किया गया, जिससे वह बुरी तरह घायल हो गया। फिर क्रांति देवी और दोनों बेटों ने मिलकर गन्ना छीलने वाले धारदार हसुआ  से उसके सिर, जबड़े और गर्दन पर वार कर बेरहमी से उसकी हत्या कर दी।

    हत्या के बाद शव को एक अज्ञात वाहन से 40 किलोमीटर दूर हैदराबाद के कुतापेठ-नागोल इलाके में एक सुनसान जगह ले जाकर फेंक दिया गया, ताकि पहचान न हो सके।

    शव की पहचान और गिरफ्तारी.

    घटना की सूचना तब मिली जब एक राहगीर ने कुतापेठ-नागोल इलाके में लावारिस शव पड़ा देखा और इसकी सूचना नागोल पुलिस स्टेशन  को दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पहचान की प्रक्रिया शुरू की। बाद में अशोक यादव की पहचान होने के बाद, परिजनों को सूचना दी गई।

    अशोक के भाई पिंटू यादव द्वारा दर्ज कराए गए बयान और आवेदन के आधार पर पुलिस ने फौरन कार्रवाई करते हुए पत्नी, दोनों बेटों और जूस दुकान के कर्मचारी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

    गांव में पसरा मातम, शव का अंतिम संस्कार.

    पोस्टमार्टम के बाद अशोक यादव का शव उनके पैतृक गांव गिरिडीह के पड़रिया  भेजा गया, जहां परिवार और ग्रामीणों ने नम आंखों से उनका अंतिम संस्कार किया। पूरे गांव में घटना को लेकर शोक और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि पारिवारिक कलह इस हद तक पहुंच जाएगी, किसी ने सोचा नहीं था।

    यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि उस सामाजिक विघटन की तस्वीर है, जिसमें परिवार का विश्वास, संवाद और समझदारी खत्म हो चुकी है। जब घर के अपने ही खून के प्यासे बन जाएं, तो यह केवल एक अपराध नहीं बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी बन जाती है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की आगे की जांच जारी है।

  • मोहर्रम और ताजिया की परंपरा: शहादत का प्रतीक, गम और श्रद्धा की मिसाल

    परवेज़ आलम
    For The News Post4U

    इस्लाम धर्म में मोहर्रम  का महीना एक खास स्थान रखता है। यह इस्लामिक कैलेंडर  का पहला महीना होता है, लेकिन इस महीने की शुरुआत किसी जश्न से नहीं, बल्कि गम और मातम  से होती है। इसकी सबसे बड़ी वजह है पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन  की कर्बला की जंग   में हुई शहादत, जिसे मुस्लिम समुदाय आज भी गहरे दुख के साथ याद करता है।

    मोहर्रम और अशूरा का महत्व.

    मोहर्रम की दसवीं तारीख  को अशूरा कहा जाता है, जो इस महीने का सबसे अहम दिन होता है। इस साल अशूरा 6 जुलाई 2025 को मनाया जा रहा है। इसी दिन 680 ईस्वी में इराक के कर्बला में इमाम हुसैन और उनके परिवार के सदस्यों ने यज़ीद की सेना से मुकाबला करते हुए शहादत  दी थी। यह लड़ाई सिर्फ सत्ता की नहीं, बल्कि सत्य, न्याय और धर्म की रक्षा के लिए थी। इसलिए मोहर्रम को त्याग और बलिदान का प्रतीक  माना जाता है।

    इस महीने में मुस्लिम समाज में कोई भी शुभ कार्य जैसे शादी-ब्याह  या अन्य उत्सव नहीं किए जाते। इसकी जगह मातम, रोजा और दुआ का आयोजन होता है।

    क्या है ताजिया और क्यों निकलता है इसका जुलूस ?

    मोहर्रम के महीने में देशभर में ताजिया का जुलूस  निकाला जाता है, जो अक्सर प्रतीकात्मक रूप से “कर्बला” में जाकर समाप्त होता है। ताजिया  दरअसल एक कलात्मक ढांचा  होता है, जिसे इमाम हुसैन की कब्र (रौज़ा-ए-मुबारक)  का प्रतीक माना जाता है। यह ढांचा बांस, लकड़ी, कागज, स्टील, रंगीन शीशे और कई बार चांदी-सोने की सजावट  से तैयार किया जाता है। इसे घरों, मोहल्लों और इमामबाड़ों में बनाया जाता है, और 10 मोहर्रम को मातमी धुनों और नारे ‘या हुसैन‘ के साथ जुलूस के रूप में निकाला जाता है।

    ताजिया की शुरुआत भारत में कैसे और कब हुई ?

    बहुत कम लोगों को यह पता है कि ताजिया निकालने की परंपरा की शुरुआत भारत  से ही हुई थी। इतिहासकारों के अनुसार, 14वीं सदी  में बादशाह तैमूरलंग  के समय (801 हिजरी, लगभग 1399 ई.) में भारत में पहला ताजिया तैयार किया गया था। तैमूर शिया संप्रदाय से ताल्लुक रखता था और हर साल इमाम हुसैन की कब्र की जियारत (यात्रा) के लिए कर्बला, इराक जाया करता था। लेकिन एक समय वह हृदय रोग से पीड़ित हो गया और लंबी यात्रा करने में असमर्थ हो गया।

    अपने शोक और श्रद्धा को व्यक्त करने के लिए, दरबारियों ने उनके सामने बांस और रंग-बिरंगे कागज  से इमाम हुसैन की मजार की प्रतिकृति  बनाकर पेश की। इस कलाकृति को देख बादशाह बेहद भावुक हो गया और यह परंपरा बन गई। तब से हर साल ताजिया बनाए जाने लगे और यह परंपरा भारत से होते हुए दुनिया भर के शिया मुसलमानों में फैल गई।

    आज ताजिया सिर्फ एक प्रतीक नहीं, बल्कि भावना है.

    वक्त के साथ ताजिया सिर्फ एक कलात्मक प्रतीक नहीं रहा, बल्कि यह भक्ति, समर्पण और इंसाफ की लड़ाई  की मिसाल बन गया है। रांची ,लखनऊ , भोपाल या कोलकाता—हर शहर में ताजिए का अपना अनूठा स्वरूप होता है, लेकिन भावनाएं एक जैसी होती हैं: इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद करना और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना।

    मोहर्रम और ताजिए की परंपरा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सत्य, बलिदान और निष्ठा की एक जीवंत कहानी है जो हर साल दुनिया को यह याद दिलाती है कि हक़ के लिए लड़ना और ज़ुल्म के आगे झुकना नहीं, यही इमाम हुसैन की सीख है।

  • पूर्व विधायक अम्बा प्रसाद के ठिकानों पर ईडी का शिकंजा कसता, कांग्रेस ने कहा- बदले की कार्रवाई

    Edited by: परवेज़ आलम
    For: The News Post4U

    रांची/हजारीबाग/बड़कागांव:
    झारखंड की राजनीति एक बार फिर ईडी की दस्तक से गरमा गई है। शुक्रवार की सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कांग्रेस की पूर्व विधायक अम्बा प्रसाद और उनके करीबियों के रांची, हजारीबाग और बड़कागांव  सहित आठ ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू की। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध खनन से जुड़े एक पुराने मामले के सिलसिले में की जा रही है, जो कोल ट्रांसपोर्टिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और पावर सेक्टर से जुड़ी एक विवादित कंपनी से संबंधित है।

    कई ठिकानों पर एक साथ दबिश.

    ईडी की टीमों ने शुक्रवार सुबह रांची के किशोरगंज, बड़कागांव और हजारीबाग  में एक साथ कार्रवाई की। रांची में अम्बा प्रसाद के निजी सहायक संजीव कुमार के आवास पर जांच चल रही है। संजीव उस वक्त घर पर मौजूद नहीं थे, लेकिन ईडी की टीम ने जांच जारी रखी। दो वाहनों में पहुंचे अधिकारियों की टीम ने चार लोगों के साथ घर के भीतर तलाशी ली, जबकि छह सशस्त्र सुरक्षाकर्मी बाहर तैनात थे।

    बड़कागांव में पूर्व विधायक के भाई अंकित उर्फ सुमित, चार्टर्ड अकाउंटेंट बादल, और कथित रूप से उनसे जुड़े बालू कारोबारियों के ठिकानों पर भी ईडी की कार्रवाई हुई। हजारीबाग में चार स्थानों पर एक साथ छापेमारी की गई। बड़कागांव में अम्बा प्रसाद के करीबी पंचम कुमार, मनोज दांगी और अन्य सहयोगियों के आवास भी निशाने पर रहे।

    पिछली कार्रवाई से जुड़े दस्तावेज बने आधार.

    सूत्रों के मुताबिक, मार्च 2024 में की गई छापेमारी के दौरान ईडी को कई अहम सुराग मिले थे। उस दौरान अम्बा प्रसाद, उनके पिता पूर्व मंत्री योगेंद्र साव, भाई अंकित राज  समेत कई सहयोगियों के ठिकानों पर कार्रवाई हुई थी। उस छापेमारी में 35 लाख रुपये नकद, डिजिटल डिवाइसेज़, फर्जी बैंक टिकट, हाथ से लिखी रसीदें, और कई संदिग्ध दस्तावेज मिले थे। माना जा रहा है कि इस बार की कार्रवाई उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।

    जांच के दायरे में 10 कंपनियां.

    ईडी सूत्रों के अनुसार, अम्बा प्रसाद और उनके परिवार से जुड़े कम से कम 10 कंपनियां  जांच के दायरे में हैं। ये कंपनियां खनन, भूमि खरीद-फरोख्त और निर्माण कार्यों से जुड़ी हैं। इन कंपनियों के माध्यम से कथित रूप से मनी लॉन्ड्रिंग की गई थी। ईडी की टीमें इन सभी संस्थाओं के वित्तीय दस्तावेजों और लेन-देन का बारीकी से विश्लेषण कर रही हैं।

    कांग्रेस ने बताया राजनीति से प्रेरित कार्रवाई.

    ईडी की इस ताजा छापेमारी को लेकर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी प्रवक्ता किशोरनाथ शहदेव  ने इसे चुनावी साजिश करार देते हुए कहा कि अम्बा प्रसाद को इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वे बिहार चुनावों  में पार्टी की तरफ से प्रभारी (ऑब्जर्वर) बनाई गई हैं। उन्होंने कहा, “भाजपा की सरकार सीबीआई और ईडी को विपक्ष के खिलाफ हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है। यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।”

    उन्होंने यह भी कहा कि ईडी द्वारा अब तक की गई सभी छापेमारियों में कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है, फिर भी बार-बार कार्रवाई कर जनता का ध्यान असल मुद्दों से भटकाया जा रहा है।

    राजनीतिक परिवार, पुराना प्रभाव.

    अम्बा प्रसाद झारखंड की बड़कागांव सीट से 2019 में कांग्रेस के टिकट पर विधायक  चुनी गई थीं। उनके पिता योगेंद्र साव  और मां निर्मला देवी  भी इस सीट से विधायक रह चुके हैं। इस परिवार की इलाके में मजबूत राजनीतिक पकड़ रही है, और अब उनके खिलाफ ईडी की बढ़ती कार्रवाई से राज्य की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है।

    अम्बा प्रसाद और उनके परिवार पर प्रवर्तन निदेशालय की नजरें टिकी हैं। हालांकि आधिकारिक रूप से ईडी ने अभी तक कोई प्रेस बयान नहीं दिया है, लेकिन लगातार हो रही छापेमारियों से संकेत साफ है कि जांच लंबी और गहन हो सकती है। कांग्रेस इसे बदले की राजनीति बता रहा है .

  • मुहर्रम को लेकर पुलिस सख्त: डीजे पर पाबंदी, सोशल मीडिया पर खास नजर

    Edited By: परवेज़ आलम
    For: The News Post4U

    झारखंड में मोहर्रम पर्व को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद कर दी गई है। राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) अनुराग गुप्ता ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (SSP) को कड़े निर्देश जारी किए हैं। उनका साफ कहना है कि शांति भंग करने की किसी भी कोशिश को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह सड़क पर हो या सोशल मीडिया पर।

    डीजे बजाने पर सख्त पाबंदी.

    DGP ने स्पष्ट कर दिया है कि मोहर्रम के जुलूस में डीजे बजाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह पर्व मातम का होता है, न कि जश्न का। ऐसे में डीजे बजाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा, जैसा कि पहले रामनवमी के अवसर पर भी किया गया था। अगर किसी ने डीजे का इस्तेमाल किया, तो सीधी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम.

    पुलिस प्रमुख ने सभी जिलों में संभावित संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त बल की तैनाती, सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन निगरानी, और वीडियोग्राफी के निर्देश दिए हैं। जुलूस के रूट्स की जांच की जा रही है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी मार्ग पर पत्थर या ईंट जैसी चीजें न हों, ताकि किसी तरह के उपद्रव की संभावना को खत्म किया जा सके।

    पुराने उपद्रवियों पर कड़ी नजर.

    DGP ने आदेश दिया है कि पहले से चिन्हित उपद्रवियों पर नजर रखी जाए और उन पर निरोधात्मक कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने सभी थानों और जिलों को शांति समिति की बैठक आयोजित करने को भी कहा है।

    सोशल मीडिया पर सख्त निगरानी.

    DGP अनुराग गुप्ता ने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ तुरंत एक्शन लेने का निर्देश दिया है। पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि अगर कोई असामाजिक तत्व अफवाह फैलाने की कोशिश करता है, तो तुरंत उसकी पहचान कर कार्रवाई की जाए।

    पुलिस बलों के लिए व्यवस्था भी जरूरी.

    सिर्फ सुरक्षा नहीं, पुलिसकर्मियों की सुविधा का भी ख्याल रखा जा रहा है। DGP ने पुलिस बलों के लिए भोजन, आवास और पीने के पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने का आदेश भी दिया है। साथ ही एंटी-रायट ड्रिल, बॉडी प्रोटेक्टर, और दंगा नियंत्रण उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है।

    हर जिले के एसपी होंगे ज़िम्मेदार.

    DGP ने डायल 112 इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम को एक्टिव मोड में रखने को कहा है। उन्होंने कहा कि अगर किसी जिले में कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती है, तो सीधी जिम्मेदारी संबंधित SP की होगी। हर जिले के एसपी को क्षेत्र भ्रमण करने और स्थानीय स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित करने का निर्देश दिया गया है। DGP ने यह भरोसा जताया है कि पूरे झारखंड में मोहर्रम का त्योहार शांति और सौहार्द के माहौल में संपन्न होगा। लेकिन किसी भी तरह की लापरवाही या उकसावे को लेकर अब प्रशासन कतई माफ करने के मूड में नहीं है। जो नियम तोड़ेगा, उस पर कानून अपना काम करेगा।

  • साइबर ठगों ने झारखंड बीजेपी विधायक को ही लगा दिया चूना

    Edited by: परवेज़ आलम. For The News Post4U

    रांची:  झारखंड में साइबर ठगी का एक और हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसमें साइबर अपराधियों ने राज्य के पांकी विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी विधायक कुशवाहा शशिभूषण मेहता को निशाना बनाते हुए 1.27 लाख रुपये की ठगी कर ली। यह घटना राज्यभर में चर्चा का विषय बन गई है, क्योंकि इस बार ठगों के जाल में कोई आम नागरिक नहीं, बल्कि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि फंसा है।

    कैसे दिया गया ठगी को अंजाम.

    ठगों ने खुद को जीएसटी कस्टम विभाग का अधिकारी बताकर विधायक से संपर्क किया और दावा किया कि उन्होंने पश्चिम बंगाल के मालदा में कई लग्जरी गाड़ियां जब्त की हैं, जिनकी नीलामी होने वाली है। विधायक को एक फॉर्च्यूनर कार की तस्वीर व्हाट्सएप पर भेजी गई और उसकी कीमत 12.70 लाख रुपये बताई गई। ठगों ने गाड़ी की बुकिंग के लिए 10% अग्रिम भुगतान, यानी 1.27 लाख रुपये की मांग की।

    विधायक ने अपने निजी सहायक के माध्यम से यह राशि ठगों को ट्रांसफर कर दी। ठगों ने उन्हें एक फर्जी रसीद भी भेज दी ताकि भरोसा बना रहे। लेकिन भुगतान के बाद जब विधायक ने संपर्क करने की कोशिश की, तो सभी मोबाइल नंबर बंद मिले।

    साइबर थाने में दर्ज हुई शिकायत.

    विधायक कुशवाहा शशिभूषण मेहता ने इस पूरे मामले की जानकारी रांची साइबर थाने को दी और तीन अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया। विधायक ने यह भी बताया कि भुगतान उन्होंने अपने निजी सहायक के खाते से कराया था।

    इसी बीच एक और साइबर ठग चढ़ा पुलिस के हत्थे.

    वहीं, दूसरी ओर रांची साइबर पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ निवासी साइबर ठग विजय प्रकाश को गिरफ्तार किया गया है। विजय पर यूट्यूब पर इन्वेस्टमेंट से जुड़े फर्जी विज्ञापनों के माध्यम से देशभर के लोगों से ठगी करने का आरोप है। विज्ञापन पर क्लिक करते ही लोग एक व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ जाते थे, जहां उन्हें मुनाफे का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी की जाती थी।

    झारखंड समेत देश के 10 से ज्यादा राज्यों में उसके खिलाफ कुल 38 मामले दर्ज हैं। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है ताकि अन्य ठगी के मामलों का भी खुलासा हो सके।

    साइबर सुरक्षा पर सवाल.

    बीजेपी विधायक के साथ हुई इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी कितने संगठित और शातिर हो चुके हैं। अब आम जनता के साथ-साथ जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी इनके निशाने पर हैं। राज्य सरकार और पुलिस के लिए यह एक गंभीर चेतावनी है कि साइबर फ्रॉड से निपटने के लिए और ज्यादा सतर्कता, तकनीकी संसाधन और जनजागरूकता की जरूरत है

    सावधानी ही सुरक्षा है – अनजान कॉल, लिंक और स्कीम से सतर्क रहें। ठगों की चालाकी आपके विवेक से ही मात खा सकती है।

  • नक्सलियों के गढ़ से विस्फोटक जखीरा बरामद: 18,000 डेटोनेटर किए गए जब्त, जंगल में ही किया गया नष्ट

    Edited By – परवेज़ आलम
    For The News Post4U

    रांची: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे सघन अभियान के तहत सुरक्षा बलों को मंगलवार को एक बड़ी सफलता हाथ लगी। जिले के टोंटो थाना क्षेत्र अंतर्गत हुसिपी गांव और आसपास के सघन जंगलों में माओवादियों के गुप्त ठिकानों पर छापेमारी के दौरान सुरक्षाबलों ने लगभग 18,000 डेटोनेटर बरामद किए हैं। यह खेप इतनी बड़ी थी कि इसे जंगल में ही बम निरोधक दस्ते द्वारा सुरक्षित ढंग से नष्ट कर दिया गया।

    सटीक गुप्त सूचना पर हुआ जॉइंट ऑपरेशन.

    पुलिस अधीक्षक राकेश रंजन के मुताबिक  इस ऑपरेशन को खुफिया सूचना के आधार पर अंजाम दिया गया। छापेमारी में झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ की 60वीं बटालियन, और झारखंड जगुआर की संयुक्त टीम शामिल रही। अभियान के दौरान यह खुलासा हुआ कि नक्सलियों ने डेटोनेटरों को जंगल में अलग-अलग स्थानों पर छिपा रखा था। इन्हें बाद में सुरक्षा बलों को निशाना बनाने या सुरंगनुमा रास्तों में विस्फोट करने के मकसद से रखा गया था।

    ओडिशा से लूटे गए थे विस्फोटक, अब झारखंड में मिले.

    इस बरामदगी का संबंध बीते 27 मई को ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले में हुए विस्फोटक लूटकांड से जोड़ा जा रहा है। उस दिन माओवादियों ने रेलाहातू यांको स्थित एक पत्थर खदान के पास से विस्फोटकों से भरी 200 पैकेट वाली एक वैन को लूट लिया था। बाद में वे इस वैन को झारखंड की सीमा में स्थित सारंडा के जंगलों तक ले गए और वहां विस्फोटकों को उतारकर छिपा दिया गया।

    सारंडा का जंगल: नक्सलियों का पुराना गढ़.

    सारंडा जंगल, जो झारखंड और ओडिशा की सीमा पर स्थित है, लंबे समय से नक्सलियों का रणनीतिक ठिकाना रहा है। हालांकि बीते दो वर्षों में सुरक्षा बलों द्वारा लगातार की जा रही घेराबंदी और तलाशी अभियानों के चलते नक्सलियों की सक्रियता काफी सीमित हो गई है। इसके बावजूद वे सुरक्षाबलों को नुकसान पहुंचाने के लिए अब भी जंगलों में आईईडी जैसे विस्फोटक उपकरण बिछाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

    विस्फोटकों से अब तक कई जाने गईं.

    पिछले दो सालों में जंगलों में बिछाए गए आईईडी विस्फोटों की चपेट में आकर कम से कम चार जवान शहीद हो चुके हैं, वहीं दस से अधिक ग्रामीणों की भी जानें गई हैं। यह ताजा बरामदगी न केवल नक्सली मंसूबों पर करारा प्रहार है, बल्कि आगामी अभियानों के लिए भी एक बड़ी राहत मानी जा रही है।

    The News Post4U की रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा बल अब भी इलाके में व्यापक तलाशी अभियान चला रहे हैं ताकि और भी छिपे विस्फोटक और माओवादी ठिकानों को नष्ट किया जा सके।

     

  • सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती शिबू सोरेन की तबीयत में आया सुधार

    परवेज़ आलम. For The News Post4u

    दिल्ली/रांची:  झारखंड की राजनीति के पितामह और झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के संस्थापक दिशोम गुरु शिबू सोरेन   की तबीयत में सुधार की खबर ने पूरे राज्य में राहत की सांस ली है। दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में पिछले एक सप्ताह से भर्ती 81 वर्षीय वरिष्ठ नेता ने रविवार को अपनी आंखें खोलीं। यह क्षण न केवल उनके परिवार के लिए भावनात्मक रहा, बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए भी बेहद सुखद रहा।

    प्रार्थनाओं का असर: मंदिरों से अस्पताल तक दुआओं का सिलसिला. 

    बीते कई दिनों से झारखंड के कोने-कोने में उनके स्वास्थ्य लाभ की कामनाओं के साथ पूजा-अर्चना का दौर जारी था। जेएमएम और कांग्रेस के कार्यकर्ता मंदिरों, गुरुद्वारों और मस्जिदों में जाकर शांति और शक्ति की कामना कर रहे थे। रांची में रथयात्रा के अवसर पर कार्यकर्ताओं ने शिबू सोरेन की तस्वीर के साथ  प्रार्थना सभा आयोजित कर उनके दीर्घायु और शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए विशेष पूजा की। मंत्री  सुदिव्य कुमार सोनू ने फ़ेस बुक बॉल पर लिखा आदरणीय बाबा दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी अस्वस्थ हैं और वर्तमान में दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में उनका उपचार चल रहा है। झामुमो के कार्यकर्ताओं और राज्य के वंचित वर्गों के लिए, वे एक महत्वपूर्ण आशा की किरण हैं।  इस चुनौतीपूर्ण समय में, मरांग बुरु दिशोम मांझी थान में मरांग बुरु संस्थान, आदिवासी समाज और उनके समर्पित कार्यकर्ताओं द्वारा उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए बोंगा बुरु (पूजा पाठ) का आयोजन किया गया है। हमारी ईश्वर से प्रार्थना है कि बाबा जल्द स्वस्थ होकर हमारे बीच वापस आएं। मंत्री ने पुजा करते कार्यकर्ताओं की तस्वीर भी साझा की है ।

    दिल्ली में परिवार जुटा, गुरुजी की सेवा में दिन-रात लगे हैं हेमंत सोरेन. 

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, उनकी पत्नी और दुमका से विधायक कल्पना सोरेन, तथा परिवार के अन्य सदस्य बीते सप्ताह भर से दिल्ली में मौजूद हैं और अस्पताल में लगातार उनके साथ समय बिता रहे हैं।
    राजनीतिक सीमाओं से परे जाकर कांग्रेस, भाजपा, आरजेडी, वाम दलों के नेताओं ने सर गंगाराम अस्पताल पहुंचकर गुरुजी की तबीयत की जानकारी ली और उनका हालचाल जाना।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की मुलाकात, कहा – ‘गुरुजी जल्द स्वस्थ हों‘

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी सर गंगा राम अस्पताल पहुंचीं और उन्होंने शिबू सोरेन के स्वास्थ्य की जानकारी ली। राष्ट्रपति ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर स्थिति का जायजा लिया और दिशोम गुरु के शीघ्र स्वस्थ होने की ईश्वर से कामना की।

    हल्के पैरालिटिक अटैक के बाद हुए थे भर्ती, मेडिकल निगरानी में जारी है इलाज. 

    जानकारी के अनुसार, शिबू सोरेन को कुछ दिन पहले हल्का पैरालाइसिस अटैक आया था, जिसके बाद उन्हें फौरन दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया। वह पहले से ही किडनी से जुड़ी बीमारी और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। अस्पताल के न्यूरोलॉजी और नेफ्रोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम लगातार उनकी देखभाल कर रही है।
    शिबू सोरेन न सिर्फ झारखंड आंदोलन का चेहरा रहे हैं, बल्कि जनजातीय अस्मिता और अधिकारों की लड़ाई के प्रतीक भी हैं। उनके स्वास्थ्य में सुधार की खबर उनके लाखों समर्थकों और राज्य की जनता के लिए एक नई उम्मीद की किरण बनकर आई है।

     

  • इनर व्हील क्लब ऑफ गिरिडीह सनशाइन ने ‘आभार’ समारोह में रचा इतिहास

     By The News Post4u.

    देवघर : देवघर में आयोजित डिस्ट्रिक्ट अवॉर्ड फंक्शन ‘आभार’  में इनर व्हील क्लब ऑफ गिरिडीह सनशाइन ने अपने उत्कृष्ट कार्यों, समाज सेवा के प्रति समर्पण और प्रेरणादायक टीमवर्क के बल पर कई पुरस्कार हासिल कर नया इतिहास रच दिया। इस कार्यक्रम में क्लब को “आउटस्टैंडिंग क्लब” के खिताब से सम्मानित किया गया, जो कि क्लब के लिए एक गर्व का क्षण रहा।

    कार्यक्रम में क्लब की अध्यक्ष सोनाली तरवे को “बेस्ट प्रेसिडेंट”, सचिव राखी झुनझुनवाला को “बेस्ट सेक्रेटरी”, कोषाध्यक्ष स्मृति आनंद को “आउटस्टैंडिंग ट्रेज़रर”, और एडवोकेट सुनीता शर्मा को “एफिशिएंट ISO” का अवार्ड मिला। इसके अतिरिक्त दीप्ति सिन्हा को “आउटस्टैंडिंग एडिटर” के रूप में सम्मानित किया गया।

    प्रोजेक्ट आधारित विशेष सम्मान :

    क्लब की सेवा भावना और रचनात्मक पहलों को देखते हुए उन्हें निम्नलिखित सामाजिक प्रोजेक्ट्स के लिए भी सम्मानित किया गया:

    • मियावाकी फॉरेस्ट प्रोजेक्ट के लिए पुरस्कार
    • कार रैली में सक्रिय भागीदारी के लिए सम्मान
    • साड़ी वॉकाथॉन के लिए विशेष पुरस्कार
    • वाटर कूलर प्रोजेक्ट में उत्कृष्ट कार्य
    • यूनिक प्रोजेक्ट के लिए विशेष प्रशंसा
    • डिस्ट्रिक्ट 329 के साथ संयुक्त परियोजना में योगदान के लिए सम्मान

    क्लब की प्रेरणा और समर्पण:

    क्लब की अध्यक्ष सोनाली तरवे ने मंच से कहा, “यह उपलब्धि सिर्फ पुरस्कारों की नहीं, बल्कि समाज सेवा के क्षेत्र में किए गए समर्पित कार्यों की पहचान है। हमारे हर सदस्य का योगदान अतुलनीय है।”

    उन्होंने विशेष रूप से PDC पूनम सहाय जी को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनकी सतत प्रेरणा और मार्गदर्शन के बिना यह सफर इतना सफल नहीं हो सकता था।

    क्लब की सचिव राखी झुनझुनवाला ने भी मंच से अपने वक्तव्य में कहा, “हमारी पूरी टीम ने एक परिवार की तरह मिलकर हर योजना को साकार किया है, यही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।”

    इनर व्हील क्लब ऑफ गिरिडीह सनशाइन की यह सफलता न केवल क्लब के लिए, बल्कि पूरे गिरिडीह के लिए गर्व का विषय है। यह साबित करता है कि जब समर्पण, नेतृत्व और सेवा की भावना मिलती है, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।

  • गिरिडीह: ‘मन की बात’ की 123वीं कड़ी का आयोजन, जनभागीदारी और राष्ट्र भावना का दिखा उत्साह

    By The News Post4u

    गिरिडीह: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रेरणास्पद मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’  की 123वीं कड़ी का सीधा प्रसारण रविवार को गिरिडीह में बेहद उत्साह, गरिमा और राष्ट्र भावना के साथ आयोजित किया गया।

    कार्यक्रम में जिले के प्रतिष्ठित उद्योगपतियों, महिला स्वयं सहायता समूहों, युवा कार्यकर्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण और गर्व का क्षण तब आया जब गिरिडीह सीधे पूरे देश के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ा। यह गिरिडीहवासियों के लिए न सिर्फ एक विशेष अवसर था, बल्कि यह क्षण उन्हें राष्ट्र के साथ जुड़ने का गौरव भी प्रदान कर गया।  इस अवसर ने गिरिडीह में लोकतांत्रिक सहभागिता और राष्ट्र निर्माण के प्रति जनजागरूकता को नई ऊर्जा दी। आयोजन सिर्फ एक रेडियो प्रसारण भर नहीं था, बल्कि यह एक प्रेरणादायक सामाजिक मिलन बन गया जिसमें सभी ने एक साथ बैठकर प्रधानमंत्री के विचारों को सुना और आत्मसात किया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे भाजपा के वरिष्ठ नेता और सांसद प्रतिनिधि दिनेश यादव, बिनय सिंह, भाजपा जिला अध्यक्ष महादेव दुबे, उद्योगपति अमरजीत सिंह सलूजा,चैम्बर ऑफ कॉमर्स के निर्मल झुनझुनवाला, मुकेश जालान, विकास खेतान,निर्मल स्लामपुरिया,संजीव कुमार व साहिल शर्मा उपस्थित थे ।