Tag: jharkhand police

  • सहारा इंडिया: निवेशकों के 40 हजार करोड़ हड़पने का आरोप

    विदेश जाने पर रोक की मांग

    रांची: सहारा इंडिया के खिलाफ निवेशकों की परिपक्वता राशि न लौटाने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। झारखंड पुलिस प्रमुख को लिखे गए पत्र में विश्व भारती जनसेना संस्थान ने मांग की है कि सहारा इंडिया के निदेशकों के पासपोर्ट ब्लॉक किए जाएं और उन्हें विदेश जाने से रोका जाए।

    निवेशकों के पैसे हड़पने का आरोप।
    बता दें कि झारखंड के अलग-अलग थानों में सहारा इंडिया के खिलाफ कई प्राथमिकियां दर्ज हैं, जिनमें निवेशकों के 40 करोड़ रुपये के भुगतान का मामला शामिल है। इसके अलावा, 40 हजार करोड़ रुपये की परिपक्वता राशि हड़पने की शिकायतें भी दर्ज कराई गई हैं। जनसेना संस्थान ने पत्र लिखकर कहा है कि सहारा इंडिया के खिलाफ जांच तेजी से आगे बढ़ रही है, जिससे उनके अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है।

    विदेश भाग सकते हैं आरोपी अधिकारी।
    पत्र  में आशंका जताई गई है कि जिस तरह से जांच की गति तेज हो रही है, सहारा इंडिया के अधिकारी देश छोड़ सकते हैं। सुब्रत राय के निधन के बाद भी उनके दोनों पुत्र अब तक भारत नहीं लौटे हैं। इसी तरह, मामले में नामजद अन्य अधिकारी भी विदेश भाग सकते हैं। इसलिए, जब तक जांच पूरी न हो जाए, इन्हें देश छोड़ने से रोका जाए।

    15 दिन का अल्टीमेटम, फिर होगी गिरफ्तारी।
    डीजीपी की अध्यक्षता में 24 जनवरी को हुई बैठक में सहारा इंडिया के अधिकारियों को झारखंड के निवेशकों को उनकी परिपक्वता राशि लौटाने के लिए 15 दिनों का समय दिया गया था। समय सीमा समाप्त होने के बाद सभी निदेशकों की गिरफ्तारी की चेतावनी दी गई है।

    इन अधिकारियों पर केस दर्ज।
    प्राथमिकी में सहारा इंडिया के नौ निदेशकों के नाम शामिल हैं:

    1. स्वप्न राय (वाइस चेयरमैन)
    2. जयब्रत राय (डिप्टी चेयरमैन)
    3. सुशांतो राय (एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर)
    4. सिमांतो राय (एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर)
    5. ओमप्रकाश श्रीवास्तव (डिप्टी मैनेजिंग वर्कर)
    6. देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव (सहारा इंडिया को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड के चेयरमैन)
    7. नीरज कुमार पाल (रांची परिक्षेत्र प्रमुख सह निदेशक)
    8. सुंदर झा (पूर्व जोनल मैनेजर)
    9. संजीव कुमार (जोनल मैनेजर, रांची)

    क्राइम ब्रांच के नोटिस पर नहीं पहुंचे अधिकारी।
    क्राइम ब्रांच रांची ने इस मामले में 31 जनवरी को दो अधिकारियों को तलब किया था। इसमें सहारा इंडिया के निदेशक सह रांची टेरिटरी प्रमुख नीरज कुमार पाल और डिप्टी मैनेजर शैलेंद्र शुक्ला को बुलाया गया था। सूत्रों के अनुसार, शैलेंद्र शुक्ला रांची पहुंचे, लेकिन नीरज पाल ने पत्र लिखकर मां की तबीयत खराब होने का हवाला देते हुए अतिरिक्त समय की मांग की।

    निवेशकों के साथ हुआ सबसे बड़ा धोखा।
    यह मामला सहारा इंडिया के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक माना जा रहा है। वर्ष 2009 में यह घोटाला तब सामने आया जब कंपनी ने निवेशकों को झूठे वादे और भ्रामक दावे करके भारी भरकम रकम जुटाई। निवेशकों को ऊंचे रिटर्न का सपना दिखाया गया, लेकिन हकीकत में उनकी गाढ़ी कमाई हड़प ली गई।

    अब देखना यह होगा कि झारखंड पुलिस की सख्ती के बाद सहारा इंडिया के अधिकारी कानून की गिरफ्त में आते हैं या फिर कोई नया दांव खेलते हैं।

  • अनुराग गुप्ता बने झारखंड के रेगुलर DGP, सरकार की मुहर!

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …………..

    झारखंड को आखिरकार अपना नियमित पुलिस महानिदेशक (DGP) मिल गया है! वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अनुराग गुप्ता को राज्य सरकार ने रेगुलर डीजीपी के रूप में नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। उनकी नियुक्ति दो साल के लिए होगी।

    प्रभारी डीजीपी थे,अब रेगुलर डीजीपी नियुक्त।
    1990 बैच के आईपीएस अधिकारी अनुराग गुप्ता पहले से ही झारखंड के प्रभारी डीजीपी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इससे पहले विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग ने उन्हें इस पद से हटा दिया था और अजय कुमार सिंह को डीजीपी नियुक्त कर दिया गया था। लेकिन, 28 नवंबर 2024 को सरकार ने दोबारा उन्हें प्रभारी डीजीपी बना दिया था और अब, सरकार ने उनकी स्थायी नियुक्ति पर मुहर लगा दी है।

    कब से शुरू होगा कार्यकाल?
    सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया गया है कि उनके दो साल के कार्यकाल की गिनती कब से होगी। बस इतना कहा गया है कि यह नियुक्ति ‘महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक, झारखंड (पुलिस बल प्रमुख) का चयन एवं नियुक्ति नियमावली 2025’ के नियम 10(1) के तहत की गई है, जिसके अनुसार कार्यकाल दो साल का होगा।

    कई अहम जिम्मेदारियों को संभाल चुके हैं।
    अनुराग गुप्ता के करियर की बात करें, तो उन्होंने गढ़वा, गिरिडीह और हजारीबाग में एसपी के रूप में सेवाएं दी हैं। इसके अलावा, वे रांची के एसएसपी भी रह चुके हैं। वर्तमान में वे सीआईडी और एसीबी के डीजी का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे हैं।

    एक मजबूत प्रशासनिक अधिकारी के रूप में पहचान।
    साल 2022 में उन्हें डीजी रैंक में प्रमोट कर डीजी ट्रेनिंग का पद सौंपा गया था। इसके बाद 26 जुलाई 2024 को उन्हें झारखंड का प्रभारी डीजीपी नियुक्त किया गया था। अब, उनकी स्थायी नियुक्ति के साथ झारखंड को एक अनुभवी और तेजतर्रार डीजीपी मिल गया है, जिनसे राज्य की कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने की उम्मीद की जा रही है।

  • 24 घंटे में विजय यादव की जघन्य हत्याकांड का खुलासा,चार गिरफ्तार

    गिरिडीह पुलिस की हो रही है सराहना

    परवेज़ आलम की खास रिपोर्ट……

    गिरिडीह। पुलिस ने सिर्फ 24 घंटे में विजय यादव की जघन्य हत्याकांड का खुलासा कर दिया।  गिरिडीह पुलिस और सिमुलतला पुलिस ने न शिर्फ हत्याकांड का खुलासा किया बल्कि  चार आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया। गिरिडीह एसपी डॉ. बिमल कुमार  ने  शुक्रवार को पूरे ह्त्या कांड और अभियुक्तों की गिफ़्तरी की जानकारी मीडिया  को दी ।  पुलिस के अनुसार, हत्या की वजह पुरानी रंजिश थी।

    पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरफ्तार अभियुक्त—बाबू चंद यादव, पवन यादव, अरुण कुमार शर्मा और मनोज यादव ने मिलकर इस नृशंस हत्या को अंजाम दिया। पहले विजय को जबरन शराब पिलाई गई, फिर बोलेरो गाड़ी में ठूंसकर बिहार ले जाया गया। रास्ते में गमछे से गला घोंटकर उसकी सांसें रोक दी गईं और तलवार से हमला कर हत्या कर दी गई। इसके बाद शव को सिमुलतला के घने जंगल में फेंक दिया गया, ताकि किसी को शक न हो।

    सड़क पर उतरे लोग, पुलिस पर दबाव, 24 घंटे में खुलासा।

    विजय यादव के लापता होने की खबर मिलते ही इलाके में सनसनी फैल गई थी । जब परिजनों को शक हुआ कि विजय का अपहरण कर हत्या कर दी गई है, तो बुधवार को जिला परिषद सदस्य राजकुमार राउत और मुखिया हासिम अंसारी के नेतृत्व में सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए। उन्होंने गावां-गिरिडीह मुख्य मार्ग को जाम कर दिया और अपराधियों की गिरफ्तारी की मांग की।

    एसपी के आदेश पर बनी टीम, खोजी कुत्तों और फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट की मदद से खुलासा

    हालात की गंभीरता को देखते हुए गिरिडीह एसपी डॉ. बिमल  कुमार ने तुरंत खोरीमहुआ एसडीपीओ राजेंद्र प्रसाद के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया । छापेमारी, फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट और खोजी कुत्तों की मदद से पुलिस को अहम सुराग मिले, जिसके बाद चारों अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया।

    हत्या में प्रयुक्त हथियार, बोलेरो और मोबाइल फोन जब्त।

    गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल की गई तलवार, गमछा, बोलेरो गाड़ी और 6 मोबाइल फोन जब्त किए। पूछताछ में आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

    “विजय मुखर था, इसलिए मार दिया गया” – गांव वालों का बयान

    गांव के लोगों का कहना है कि “विजय गलत के खिलाफ हमेशा आवाज उठाता था। वह निडर था, लेकिन शायद यही उसकी सबसे बड़ी गलती बन गई।”

    पुरानी दुश्मनी का बदला: एसडीपीओ का बयान।

    खोरीमहुआ एसडीपीओ राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि विजय यादव और आरोपियों के बीच पुरानी दुश्मनी थी। इसी के चलते उसे रास्ते से हटाने की साजिश रची गई।

    गिरिडीह पुलिस की तत्परता से 24 घंटे में केस सुलझा

    गिरिडीह पुलिस ने सिर्फ 24 घंटे में इस जघन्य हत्याकांड का खुलासा कर दिया, जिससे इलाके में पुलिस की तत्परता की सराहना की जा रही है। हालांकि, इस निर्मम हत्या ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या सच बोलना अब जानलेवा हो गया है?

     

  • नक्सली दंपती गिरफ्तार, सेंट्रल कमेटी के इनामी सदस्य के दस्ते से जुड़े होने का खुलासा

    झारखंड के नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षाबलों को एक बड़ी कामयाबी मिली है। नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के सेंट्रल कमेटी सदस्य और एक करोड़ के इनामी माओवादी नेता विवेक के दस्ते में शामिल पति-पत्नी को गिरिडीह पुलिस ने गिरफ्तार किया गया है। पकड़े गए नक्सलियों की पहचान तालेश्वर हांसदा उर्फ सेरमा और उनकी पत्नी मालती मुर्मू उर्फ गुड़ी उर्फ गुड़िया के रूप में हुई है। तालेश्वर गिरिडीह के जमुआ थाना क्षेत्र के गणियाडीह और मालती मधुबन थाना क्षेत्र के टेसाफुली की रहने वाली है।

    जंगली क्षेत्र में छापेमारी से गिरफ्तारी.

    गिरफ्तारी की पुष्टि गिरिडीह के एएसपी अभियान सुरजीत कुमार ने की है। उन्होंने बताया कि गिरिडीह एसपी डॉ. बिमल कुमार को सूचना मिली थी कि टेसाफुली के जंगली पहाड़ी इलाके में माओवादी दस्ते की गतिविधियां देखी गई हैं। इसके बाद एसपी और सीआरपीएफ 154 बटालियन के कमांडेंट के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया।

    टीम में एएसपी अभियान, सीआरपीएफ के सेकंड कमान अधिकारी, एसडीपीओ डुमरी, और डुमरी, पीरटांड व मधुबन के थाना प्रभारियों को शामिल किया गया। छापेमारी के दौरान नक्सली दंपती को गिरफ्तार कर लिया गया। इनके पास से 9 एमएम पिस्टल और गोलियां बरामद की गईं।

    प्रमुख नक्सली दस्ते से जुड़ाव।

    पूछताछ के दौरान दंपती ने स्वीकार किया कि वे प्रतिबंधित नक्सली संगठन के बड़े नेता प्रयाग मांझी उर्फ विवेक उर्फ करण दा के दस्ते के सक्रिय सदस्य थे। एएसपी अभियान ने बताया कि दंपती से पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं, जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    अभियान में सुरक्षाबलों की प्रभावी भूमिका।

    इस सफल अभियान में एएसपी अभियान सुरजीत कुमार, सीआरपीएफ के सेकेंड कमान अधिकारी दलजीत सिंह भाटी, एसडीपीओ डुमरी सुमित प्रसाद, सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट मनोज कुमार यादव, मधुबन थाना प्रभारी जगन्नाथ पान, पीरटांड थाना प्रभारी दीपेश कुमार, महिला चौकीदार मैनवा देवी, और सशस्त्र बलों की टीम ने हिस्सा लिया।

    पुलिस की उपलब्धि।

    इस गिरफ्तारी को पुलिस के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। माओवादी संगठन के खिलाफ चल रहे अभियान में यह कार्रवाई सुरक्षाबलों के आत्मविश्वास को और बढ़ाएगी। पूछताछ में मिली जानकारियां संगठन के अन्य सदस्यों और गतिविधियों पर चोट पहुंचाने में मददगार साबित हो सकती हैं।

    झारखंड के नक्सल प्रभावित इलाकों में इस तरह के अभियानों से पुलिस और सीआरपीएफ का ऑपरेशन माओवादियों के लिए लगातार चुनौती बनता जा रहा है।

  • झारखंड: मनचाही पोस्टिंग और ट्रांसफर कराने का झांसा देने वाला गिरोह का भंडाफोड़  

    परवेज़ आलम की खास रिपोर्ट ………..

    झारखंड में पुलिस-प्रशासन के अफसरों को मनचाही पोस्टिंग और ट्रांसफर का झांसा देकर ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। रांची पुलिस ने इस गिरोह के पाँच शातिर सदस्यों को हिरासत में लिया था पर फिलवक्त इन आरोपियों को पीआर बॉन्ड पर छोड़ दिया गया है । इस गिरोह ने  कई आईपीएस, डीएसपी और दारोगा को अपना शिकार बनाया है। पुलिस ने आरोपियों के व्हाट्सएप चैट और लेन-देन के सबूत खंगालने रही है।

    गुप्त सूचना से हुआ खुलासा.

    रांची कोतवाली थाने में दर्ज एक सनहा के आधार पर पुलिस ने इस गिरोह का पर्दाफाश किया है । खबर थी कि यह गिरोह अधिकारियों के तबादले, पोस्टिंग और ठेका मैनेज करने का झांसा देकर बड़ी रकम वसूल रहा था। इसके बाद हिंदपीढ़ी और चुटिया थाना क्षेत्रों में दबिश देकर गिरोह के प्रमुख सदस्य सज्जाद उर्फ मुन्ना और कैप्टन सिंह सलूजा को हिरासत में लिया गया। इनसे पूछताछ के बाद जमशेदपुर के अयान सरकार, हल्दीपोखर के चंदन लाल और रांची के सूर्य प्रभात को भी गिरफ्तार किया गया।

    राजनीतिक कनेक्शन से जुड़े तार।

    पुलिस की पहली जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों का राजनीतिक कनेक्शन है। अयान सरकार भाजपा नेता बाबूलाल सोरेन के कारोबारी साझेदार बताए जा रहे हैं। चंदन लाल भी सोरेन के साथ मिलकर काम करता है। वहीं, सूर्य प्रभात भाजपा युवा मोर्चा का पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष रह चुका है, जबकि कैप्टन सिंह सलूजा भाजपा के एक राज्यसभा सदस्य के करीबी माने जाते हैं।

    डेढ़ करोड़ की ठगी का शक।

    सूत्रों के मुताबिक, गिरोह ने अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग के नाम पर अब तक करीब डेढ़ करोड़ रुपये की ठगी की है। हालांकि फंसने के डर से कोई भी पीड़ित अधिकारी सामने नहीं आ रहा है, जिससे पुलिस के लिए जांच को आगे बढ़ाना चुनौतीपूर्ण हो रहा है।

    मोबाइल और चैट की जांच जारी।

    पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए हैं। व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है ताकि पता चल सके कि किन-किन अधिकारियों को ठगा गया है और यह गिरोह किस तरह से काम कर रहा था।

    सीआईडी जांच की संभावना।

    पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए सीआईडी से जांच कराए जाने की संभावना जताई जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि इस गिरोह के खिलाफ और भी ठोस सबूत जुटाए जा सकते हैं।

    आरोपियों को पीआर बॉन्ड पर छोड़ा गया।

    फिलहाल हिरासत में लिए गए आरोपियों को पीआर बॉन्ड पर छोड़ दिया गया है, लेकिन जांच जारी है। पुलिस इस गिरोह से जुड़े हर पहलू को खंगालने में जुटी है ताकि झारखंड में ऐसी ठगी के खेल पर लगाम लगाई जा सके।

    झारखंड में अधिकारियों को निशाना बनाकर चल रहे इस ठगी के खेल के भडाफोड़ ने  प्रशासनिक महकमे मे खलबली मचा दी है ।

     

  • झारखंड : नक्सलवाद का सफाया सुनिश्चित-डीजीपी अनुराग गुप्ता

    झारखंड पुलिस ने नक्सलवाद पर कड़ा प्रहार करते हुए 248 नक्सलियों को गिरफ्तार किया। साथ ही, दबिश के चलते 24 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। मुठभेड़ों में 9 नक्सलियों को मार गिराया गया। डीजीपी अनुराग गुप्ता ने गणतंत्र दिवस के मौके पर कहा, “इस वर्ष नक्सलवाद का सफाया सुनिश्चित है।”

    श्री गुप्ता ने कहा कि झारखंड में वर्ष 2024 नक्सलवाद और अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के लिए याद किया जाएगा। पुलिस ने इस साल बड़े पैमाने पर अभियान चलाते हुए न केवल नक्सलियों को कड़ा संदेश दिया, बल्कि संगठित अपराध, मादक पदार्थ तस्करी, और साइबर अपराध के मामलों में भी उल्लेखनीय सफलता हासिल की।

    डीजीपी ने संविधान के प्रति समर्पण की बात करते हुए कहा, “हमें झारखंड को नक्सल और अपराध मुक्त बनाते हुए इसे समृद्ध और शांतिपूर्ण राज्य में बदलने की दिशा में काम करना है।”

    संगठित अपराध और आतंकवाद पर शिकंजा.

    राज्य पुलिस ने संगठित अपराध के खिलाफ भी मजबूत कार्रवाई की, जिसमें 154 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। आतंकवाद के खिलाफ विशेष अभियान में एटीएस ने अलकायदा के 4 आतंकवादियों को पकड़ा। ये गिरफ्तारियां झारखंड पुलिस की सतर्कता और प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं।

    मादक पदार्थ तस्करों और साइबर अपराधियों पर बड़ी कार्रवाई.

    अवैध मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल 1362 लोगों को सलाखों के पीछे भेजा गया। साथ ही, 1.82 करोड़ रुपये की अवैध मादक पदार्थ जब्त किए गए।
    साइबर अपराध के मामलों में, 1869 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने 67.20 करोड़ रुपये की राशि फ्रिज की और 3 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि पीड़ितों को वापस लौटाई।

    जन शिकायत समाधान: पुलिस-जनता की साझेदारी

    राज्य में जनता की समस्याओं को त्वरित हल करने के लिए विशेष जन शिकायत समाधान कार्यक्रम चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार यह पहल पुलिस और जनता के बीच विश्वास बढ़ाने और बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए की गई है।

     

  • गिरिडीह: घरेलू हिंसा और आरोपी पुलिस अफसर पर हुई कार्रवाई

    नगर भवन में हुआ जन शिकायत समाधान कार्यक्रम को आयोजन.

    गिरिडीह में घरेलू हिंसा और जमीन विवाद से जुड़े कई मामलों का पुलिस महकमे द्वारा आयोजित जन शिकायत समाधान कार्यक्रम में त्वरित निबटारा ऑन द स्पॉट किया गया ।  बुधवार को नगर भवन में गिरिडीह पुलिस ने जन शिकायत समाधान कार्यक्रम का आयोजन किया था । कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डीआईजी संजीव कुमार शामिल हुए। उनके साथ एसपी डॉक्टर विमल कुमार और डालसा सचिव सोनम बिश्नोई भी उपस्थित थीं। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलित कर की गई। डीआईजी ने कहा, “जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान हमारी प्राथमिकता है।”

    छात्रा ने पुलिस अधिकारी पर लगाए गंभीर आरोप॰
    कार्यक्रम में मुफ्फसिल थाना इलाके की एक छात्रा ने पचंबा थाना के एसआई संजय सिंह पर गंभीर आरोप लगाए। छात्रा ने कहा कि उसके भाई पर मारपीट के मामले में जांच के नाम पर एसआई ने उसका मोबाइल जब्त कर लिया था। यह मोबाइल एक साल से थाने में पड़ा है और वापस मांगने पर केवल आश्वासन दिया जाता है।

    डीआईजी ने दिए सख्त निर्देश।
    छात्रा की शिकायत सुनकर डीआईजी संजीव कुमार ने एसपी डॉक्टर विमल कुमार से रिपोर्ट मांगी। उन्होंने मामले को गंभीर बताते हुए तुरंत पचंबा थाना के एसआई संजय सिंह को निलंबित करने का आदेश दिया और छात्रा का मोबाइल वापस लौटाने को कहा।

    कई अधिकारियों की मौजूदगी. 
    कार्यक्रम में एसडीपीओ जीत वाहन, डीएसपी नीरज सिंह, साइबर डीएसपी आबिद खान, प्रोबेशनल डीएसपी नीलम कुजूर, कैलाश महतो और अन्य अधिकारी मौजूद थे। सभी ने जनसमस्याओं को सुनने और उनके समाधान के लिए सक्रियता दिखाई।

    जनता को मिला राहत का भरोसा.
    जन शिकायत समाधान कार्यक्रम ने यह साबित किया कि जब प्रशासन गंभीरता से जनता की बात सुने और कार्रवाई करे, तो समस्याओं का समाधान संभव है। खासकर घरेलू हिंसा और जमीन विवाद जैसे संवेदनशील मामलों में पुलिस की तत्परता ने लोगों का भरोसा बढ़ाया।

     

  • नेहरू युवा केंद्र व रुद्रा फाउंडेशन ने चलाया सड़क सुरक्षा जागरूकता सप्ताह कार्यक्रम

    महेशलुंडी पंचायत में सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

    गिरिडीह : महेशलुंडी पंचायत सचिवालय भवन में नेहरू युवा केंद्र, गिरिडीह और रुद्रा फाउंडेशन गिरिडीह ने सोमवार को राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया।

    कार्यक्रम की शुरुआत रुद्रा फाउंडेशन के सचिव सैयद सबीह अशरफ ने मुख्य अतिथि, गिरिडीह के यातायात निरीक्षक  दुगन टोपनो और पंचायत मुखिया शिवनाथ साव का बुके देकर स्वागत करते हुए की।

    मुख्य अतिथि  टोपनो ने कार्यक्रम में उपस्थित युवाओं को राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह की महत्ता समझाई। उन्होंने यातायात नियमों का पालन करने का आग्रह करते हुए कहा, “आपकी सुरक्षा आपकी जागरूकता पर निर्भर है। हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग न केवल अनिवार्य है, बल्कि जीवन रक्षक भी है। यातायात पुलिस आपकी मदद के लिए तत्पर है, लेकिन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जनता का सहयोग अनिवार्य है।” उन्होंने सड़क पर धैर्य रखने और ट्रैफिक जाम की समस्या से बचने के लिए सभी को प्रेरित किया।

    पंचायत मुखिया शिवनाथ साव ने इस जागरूकता कार्यक्रम को अपने पंचायत में आयोजित किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “यह पहल न केवल मेरे पंचायत के युवाओं को जागरूक करेगी, बल्कि पूरे गिरिडीह जिले में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक होगी। सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ऐसे अभियान निरंतर चलने चाहिए।”

    रुद्रा फाउंडेशन के सचिव सैयद सबीह अशरफ ने ट्रैफिक नियमों के महत्व पर विस्तार से चर्चा करते हुए सभी से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की। उन्होंने कहा, “अगर हम सब मिलकर प्रयास करें, तो गिरिडीह को दुर्घटनामुक्त जिला बना सकते हैं।”

    कार्यक्रम का संचालन रुद्रा फाउंडेशन के समन्वयक संतोष कुमार पांडेय ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन रवि कुमार ने दिया।

    इस कार्यक्रम में पंचायत उपमुखिया रमेश कंधवे, रुद्रा फाउंडेशन के संतोष कुमार और रवि कुमार, युवा प्रतिनिधि सागर कुमार, रिजवाज अंसारी, प्रेम कुमार गुप्ता, आनंद कुमार समेत सैकड़ों युवाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाना और समाज में सकारात्मक बदलाव लाना था।

  • 10 लाख के इनामी नक्सली को सरेंडर कराने की पहल, जानिए कौन है यह इनामी नक्सली!

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट ………..

    10 लाख के इनामी नक्सली साहेब राम मांझी को सरेंडर कराने की कवायद मे गिरिडीह पुलिस जी जान से जुटी है । पुलिस और प्रशासन ने नक्सलियों को  मुख्यधारा में लौटने की पहल को तेज कर दिया है। शुक्रवार को एएसपी अभियान सुरजीत कुमार और डुमरी एसडीपीओ सुमित कुमार ने इनामी नक्सली साहेब राम मांझी के घर पहुंचे ।  अधिकारियों ने झारखंड सरकार की सरेंडर नीति से नक्सली साहेब राम मांझी के परिवार को अवगत कराया ।

    अधिकारियों ने परिजनों को समझाया कि आत्मसमर्पण न केवल साहेब राम के लिए बल्कि पूरे परिवार के लिए फायदेमंद होगा। उन्होंने बताया कि सरकार सरेंडर करने वाले नक्सलियों को पुनर्वास और अन्य योजनाओं के तहत सहायता प्रदान कर रही है।

    15 साल से घर से दूर है नक्सली.

    परिजनों के मुताबिक, साहेब राम करीब 15-16 साल पहले घर छोड़कर चला गया था। उसके तीन बच्चे हैं, और परिवार अब चाहता है कि वह मुख्यधारा में लौट आए। परिवार ने भरोसा दिलाया कि वे साहेब राम को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित करेंगे।

    10 लाख का इनाम.

    साहेब राम मांझी नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के जोनल कमेटी का सक्रिय सदस्य है। गिरिडीह सहित कई जिलों में उसके खिलाफ कई गंभीर मामले दर्ज हैं, और उस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित है। पुलिस पिछले कुछ वर्षों से उसे सरेंडर करवाने की कोशिश कर रही है।

    नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति और विकास स्थापित करने के लिए पुलिस लगातार प्रयासरत है। नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रोत्साहित करना, सिर्फ कानून व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है यह कहना है पुलिस का ।

    यह पहल न केवल साहेब राम बल्कि अन्य नक्सलियों के लिए भी एक संदेश है कि हथियार छोड़कर शांति और विकास के रास्ते पर चलना संभव है।

  • सभी जिलों में जन शिकायत समाधान कार्यक्रम 22 जनवरी को-DGP

    झारखंड में जन शिकायत समाधान कार्यक्रम एक बार फिर से सुर्खियों में है। आगामी 22 जनवरी को राज्य के सभी 24 जिलों में इस कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। डीजीपी अनुराग गुप्ता ने इस संबंधमें सभी जिलों के एसएसपी और एसपी को निर्देश जारी किए हैं। खास बात यह है कि कार्यक्रम उन्हीं स्थानों पर आयोजित किया जाएगा, जहां पहले इसे सफलतापूर्वक संपन्न किया गया था।

    यह कार्यक्रम इससे पहले 18 दिसंबर 2024 और 10 सितंबर 2024 को आयोजित हो चुका है। कार्यक्रम का उद्देश्य नागरिकों की पुलिस से संबंधित शिकायतों को न केवल पंजीकृत करना है, बल्कि त्वरित और प्रभावी समाधान प्रदान करना भी है।

    कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्य:

    1. शिकायतों का पंजीकरण और समाधान: पुलिस से जुड़ी समस्याओं को दर्ज कर समाधान प्रक्रिया से नागरिकों को अवगत कराना।
    2. कार्रवाई की जानकारी: शिकायतों पर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की स्थिति से शिकायतकर्ताओं को अपडेट देना।
    3. समयबद्ध कार्रवाई: यदि किसी शिकायत का समाधान तय समयसीमा में नहीं होता, तो उसे वरिष्ठ अधिकारियों को