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  • झारखंड में बड़ा शराब घोटाला: IAS विनय चौबे और संयुक्त आयुक्त गजेंद्र सिंह गिरफ्तार

    By The NewsPost4u

    रांची :  झारखंड में हुए बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच के तहत मंगलवार को राज्य के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय कुमार चौबे को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने गिरफ्तार कर लिया। उनके साथ संयुक्त उत्पाद आयुक्त गजेंद्र सिंह को भी हिरासत में लिया गया है। यह कार्रवाई एक लंबे समय से जारी जांच और पूछताछ के बाद की गई, जिसमें दोनों अधिकारियों पर छत्तीसगढ़ के शराब सिंडिकेट के साथ मिलकर झारखंड में नई शराब नीति के नाम पर घोटाले को अंजाम देने का आरोप है।शाम लगभग 5 बजे दोनों को रांची की विशेष एसीबी अदालत में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने उन्हें तीन जून तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। दोनों को होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार ले जाया गया है।

    छत्तीसगढ़ से जुड़े तार, वहीं से खुला मामला.

    यह घोटाला सबसे पहले छत्तीसगढ़ में सामने आया था, जहां स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड के अधिकारियों और व्यापारियों पर शराब नीति में गड़बड़ी करने और सरकारी धन की हेराफेरी करने के आरोप लगे थे। छत्तीसगढ़ की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और फिर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच शुरू की। जांच में खुलासा हुआ कि छत्तीसगढ़ में सक्रिय सिंडिकेट ने झारखंड में भी इसी तर्ज पर एक समान शराब नीति लागू करवाई और घोटाले को अंजाम दिया।

    झारखंड में भी लागू हुई विवादास्पद उत्पाद नीति.

    ईडी को जांच में पता चला कि झारखंड में जिस उत्पाद नीति के जरिए यह गड़बड़ियां की गईं, उसे विनय चौबे के कार्यकाल में मंजूरी दी गई थी। इसके बाद ईडी ने उन्हें पूछताछ के लिए समन जारी किया था। 2024 में ईडी ने विनय चौबे और गजेंद्र सिंह के ठिकानों पर छापेमारी भी की थी।

    38 करोड़ का नुकसान, साजिश कर चयनित की गई एजेंसियां.

    एसीबी की जांच में सामने आया है कि दोनों अधिकारियों ने सरकारी प्रक्रिया की अनदेखी कर कुछ प्लेसमेंट एजेंसियों को फायदा पहुंचाने के लिए साजिश रची, जिससे राज्य सरकार को करीब 38 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ।

    पूछताछ के बाद गिरफ्तारी, कोर्ट ने भेजा जेल.

    मंगलवार सुबह एसीबी की टीम ने विनय चौबे के रांची स्थित आवास पर पहुंचकर उन्हें पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। कई घंटे चली पूछताछ के बाद उन्हें और गजेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया गया। शाम लगभग 5 बजे दोनों को रांची की विशेष एसीबी अदालत में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने उन्हें तीन जून तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। दोनों को होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार ले जाया गया है।

    चौबे फिलहाल पंचायती राज विभाग में, पहले थे JSBCL के MD.

    गौरतलब है कि विनय चौबे झारखंड राज्य बेवरेजेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (JSBCL) के प्रबंध निदेशक भी रह चुके हैं। वर्तमान में वे पंचायती राज विभाग के प्रधान सचिव हैं। गजेंद्र सिंह उस दौरान आबकारी विभाग के संयुक्त आयुक्त थे।

    कैबिनेट सचिवालय से ली गई अनुमति, FIR दर्ज कर जांच तेज.

    राज्य सरकार के मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग से अनुमति लेने के बाद एसीबी ने 20 मई 2025 को रांची थाना कांड संख्या 09/2025 के तहत प्राथमिकी दर्ज की। इसके तहत जांच और तेज कर दी गई है। आने वाले दिनों में एसीबी दोनों अधिकारियों को रिमांड पर लेकर विस्तृत पूछताछ की तैयारी कर रही है।

  • झारखंड में मौसम का मिजाज बदला-बदला सा: 24 मई तक बारिश और तेज़ हवाओं की चेतावनी, आकाशीय बिजली से 5 की मौत

    By The NewsPost4u

    झारखंड में मौसम का मिजाज लगातार बदलता जा रहा है। दिन में चटक धूप के बाद अचानक बदलता मौसम तापमान में पांच से छह डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट ला रहा है। राज्य के कई इलाकों में दोपहर बाद हल्की से मध्यम बारिश हो रही है, जिससे आम जनजीवन पर असर पड़ा है।

    मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि 24 मई तक झारखंड के कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी हुई है। इसके साथ ही 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज़ हवाएं चलने और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है।

    राजधानी रांची और अन्य इलाकों में राहत, लेकिन पलामू तप रहा है.

    पिछले दो दिनों में रांची और उसके आसपास के इलाकों में दोपहर बाद हुई बारिश ने मौसम में ठंडक घोल दी है। तापमान में पांच से छह डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, पलामू अब भी भीषण गर्मी की चपेट में है। वहां का तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। दूसरी ओर, पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम में गर्मी में कुछ राहत मिली है, जहां पारा 34 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा।

    23 और 24 मई को फिर बारिश की संभावना.

    मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि 23 और 24 मई को राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इन दो दिनों के लिए भी येलो अलर्ट जारी किया गया है। हालांकि सोमवार को रांची में मौसम अपेक्षाकृत साफ रहा। कभी-कभी बादल छाए और हल्की हवाएं भी चलीं।

    प्रमुख शहरों का तापमान:

    • रांची – 35.8°C
    • जमशेदपुर – 34.5°C
    • डाल्टनगंज – 42.2°C
    • बोकारो – 34.5°C
    • चाईबासा – 35.4°C

    बीते कुछ दिनों में रांची में खराब मौसम के चलते विमान सेवाएं और ट्रेनों का संचालन भी प्रभावित हुआ है। वहीं, कई इलाकों में घंटों तक बिजली गुल रही।

    आकाशीय बिजली का कहर: 5 की मौत, 6 घायल.

    सोमवार को गढ़वा और हजारीबाग जिलों में आकाशीय बिजली गिरने से पांच लोगों की मौत हो गई जबकि छह अन्य लोग घायल हो गए। पुलिस के अनुसार, गढ़वा में तीन और हजारीबाग में दो लोगों की जान गई है।

    सुरक्षा बल पर भी मौसम का कहर.

    पिछले हफ्ते चाईबासा में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान सीआरपीएफ के 46 वर्षीय जवान की आकाशीय बिजली गिरने से मौत हो गई थी और तीन अन्य घायल हुए थे।

    मौसम विभाग की सतर्कता जारी.

    मौसम विभाग ने पहले ही 20 मई तक ऑरेंज अलर्ट जारी किया था। 23-24 मई को बारिश बढ़ने के कारण तूफान की आशंका कम हो सकती है, लेकिन किसी भी मौसमीय आपातस्थिति से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए विभाग समय-समय पर येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी कर रहा है ताकि लोग सतर्क रहें।

    झारखंड में मौसम की अनिश्चितता लोगों के लिए चुनौती बनती जा रही है। ऐसे में ज़रूरी है कि लोग मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान दें और सावधानी बरतें, खासकर खुले इलाकों में निकलने से बचें।

  • गिरिडीह :नक्सली बंकर से रायफल, SLR समेत भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद

    By News Post4u

    GIRIDIH: नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे सघन सर्च अभियान में गिरिडीह पुलिस और सीआरपीएफ को एक बड़ी सफलता मिली है। खुखरा थाना क्षेत्र के जोकानाला जंगल में एक नक्सली बंकर का पर्दाफाश करते हुए सुरक्षा बलों ने भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक जब्त किए हैं।

    गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने पारसनाथ पर्वत की तराई में सर्च ऑपरेशन चलाया। इस दौरान जंगल के भीतर ज़मीन के नीचे छिपा एक बंकर मिला, जिसमें नक्सलियों ने हथियारों का जखीरा छुपा रखा था। बंकर से कुल 14 हथियार बरामद किए गए हैं, जिनमें .303 बोर की रायफल, एक एसएलआर, एक 12 बोर की बंदूक और 11 सिंगल शॉट बंदूकें शामिल हैं।

    इतना ही नहीं, बंकर से 7.62 एमएम की 38 गोलियां, 9 एमएम की 10 गोलियां, गन पाउडर, बारूद, वायर और अन्य विस्फोटक सामग्री भी मिली है। बरामद हथियारों में कुछ पर संदेह है कि वे पुलिस से लूटे गए हो सकते हैं।

    गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक डॉ. विमल कुमार ने शुक्रवार को मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि इस ऑपरेशन में नक्सलियों के ठिकाने को ध्वस्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा, “यह कार्रवाई एक लंबी तैयारी और पुख्ता खुफिया सूचना के बाद संभव हो सकी। इस इलाके में नक्सल विरोधी अभियान लगातार जारी रहेगा।”

    पुलिस की इस कार्रवाई को नक्सली नेटवर्क पर एक बड़ा प्रहार माना जा रहा है। पारसनाथ पर्वत की तराई में सुरक्षा बलों की सक्रियता बढ़ा दी गई है और आगे भी इस तरह के तलाशी अभियान चलाए जाते रहेंगे।

  • भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच अमित शाह का  झारखंड दौरा टला, पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक रद्द

    BY THE NEWS POST4U

    RANCHI: भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनज़र केंद्र सरकार ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। इन्हीं फैसलों की श्रृंखला में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का झारखंड दौरा और रांची में होने वाली पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक रद्द कर दी गई है। अमित शाह को 9 मई को रांची पहुंचना था और 10 मई को बैठक में भाग लेना था।

    केंद्र सरकार की बैठक पर लगा विराम

    सूत्रों के मुताबिक, 10 मई को रांची में पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक आयोजित होनी थी, जिसमें बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्रियों को शामिल होना था। बैठक में क्षेत्रीय विकास, आंतरिक सुरक्षा, सीमावर्ती क्षेत्रों की चुनौतियाँ और केंद्र-राज्य समन्वय जैसे मुद्दों पर चर्चा प्रस्तावित थी। हालाँकि बैठक रद्द करने का कोई आधिकारिक कारण सरकार की ओर से सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि भारत-पाकिस्तान के बीच उत्पन्न हुए संभावित सैन्य तनाव की पृष्ठभूमि में यह निर्णय लिया गया है।

    सीमावर्ती राज्यों के CM और LG के साथ हुई अहम बैठक

    गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में उन राज्यों के मुख्यमंत्रियों और उपराज्यपालों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की, जिनकी सीमाएँ पाकिस्तान और नेपाल से लगती हैं। इस बैठक में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की गई और संवेदनशील इलाकों में सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए गए। केंद्र सरकार का उद्देश्य देश की सीमाओं को पूर्णतः सुरक्षित बनाए रखना है।

    झारखंड सरकार का केंद्र को समर्थन.

    झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के प्रति समर्थन जताते हुए कहा, “यह समय देश की एकता और अखंडता के लिए एकजुट रहने का है। केंद्र और सेना जो भी निर्णय लेंगी, झारखंड सरकार उसका समर्थन करेगी।” उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा सर्वोपरि है और वर्तमान हालात में राजनीतिक बयानबाज़ी से परहेज़ करते हुए देशहित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने बैठक की सभी तैयारियाँ पूरी कर ली थीं और गृह मंत्री को राजकीय अतिथि घोषित किया गया था, लेकिन राष्ट्रीय हितों के मद्देनज़र जो भी फैसला लिया गया है, वह स्वागत योग्य है।

     

     

  • सीमा पर तनाव के बीच में मॉक ड्रिल: युद्धकालीन हालात से निपटने की रणनीतिक तैयारी

    परवेज़ आलम.

    रांची : भारत-पाकिस्तान सीमा पर बढ़ते तनाव और हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद देशभर में नागरिक सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। इसी क्रम में गृह मंत्रालय के निर्देश पर बुधवार को देशभर के प्रमुख शहरों में मॉक ड्रिल (सुरक्षा अभ्यास) का आयोजन किया गया। झारखंड की राजधानी रांची,बोकारो, जमशेदपुर, गोड्डा और साहिबगंज जिलों में में भी यह ड्रिल पूरे जोर-शोर से की गई, जिसका उद्देश्य आम नागरिकों, प्रशासनिक अमले और राहत एजेंसियों को आपातकालीन परिस्थितियों के लिए तैयार करना था।

    मॉक ड्रिल का संचालन: युद्ध जैसी स्थिति की तैयारी.

    रांची के मेकॉन क्षेत्र में मुख्य मॉक ड्रिल आयोजित की गई, जहां सायरन बजते ही सुरक्षा बलों और प्रशासन की टीमें सक्रिय हो गईं। डोरंडा समेत आसपास के क्षेत्रों में आवाजाही रोक दी गई, सड़कें बंद कर दी गईं और दुकानों को अस्थायी रूप से बंद करा दिया गया। ड्रिल के दौरान शहर के विभिन्न हिस्सों में एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, पुलिस बल और एनडीआरएफ की टीमों ने संयुक्त रूप से अपनी तैयारियों का प्रदर्शन किया।

    लाउडस्पीकर से दिशा-निर्देश, नागरिकों को जागरूक किया गया.

    प्रशासन ने पूरे अभ्यास के दौरान लाउडस्पीकर के माध्यम से मॉक ड्रिल में शामिल लोगों को दिशा-निर्देश देते हुए यह स्पष्ट किया कि यह अभ्यास नागरिक सुरक्षा के लिए किया जा रहा है। रांची के डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने पहले ही नागरिकों से अपील की थी कि सायरन बजने पर घबराएं नहीं, यह सिर्फ एक अभ्यास है।

    सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता और समन्वय.

    ड्रिल में एनडीआरएफ ने मेकॉन भवन में आग लगने की स्थिति का अभ्यास किया, जहां फायर ब्रिगेड की मदद से आग बुझाने का प्रदर्शन हुआ और कर्मचारियों को सुरक्षित बसों से निकाला गया। एंबुलेंस के जरिए घायलों को अस्पताल तक पहुंचाने का मॉक अभ्यास किया गया। इस दौरान विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली की परीक्षा ली गई।

    बच्चों और आम नागरिकों को भी दिया गया प्रशिक्षण.

    सुरक्षा ड्रिल में स्कूलों के बच्चों को भी शामिल किया गया। उन्हें बताया गया कि सायरन बजते ही किस तरह अपनी सुरक्षा करनी है – जैसे बेंच-टेबल के नीचे छिपना, खिड़कियों से दूरी बनाना और घबराए बिना सतर्क रहना। कुछ स्कूलों में बच्चों ने लाइव डेमोंस्ट्रेशन के ज़रिए बचाव तकनीकों का प्रदर्शन किया।

    एनसीसी और एनएसएस की भूमिका.

    राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) और राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के स्वयंसेवकों ने भी इस अभ्यास में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने आम नागरिकों को राहत स्थल तक पहुंचाने और आपातकालीन स्थिति में आवश्यक सहयोग देने के तरीकों का प्रदर्शन किया।

    राज्य के 5 जिलों में चला व्यापक अभ्यास.

    रांची के अलावा झारखंड के बोकारो, जमशेदपुर, गोड्डा और साहिबगंज जिलों में भी इस तरह की मॉक ड्रिल आयोजित की गई। कुल छह स्थलों पर एक साथ यह अभ्यास हुआ, जहां सायरन की आवाज के साथ यातायात रोका गया और लोगों को घरों की लाइटें बंद करने, खिड़की-दरवाजे बंद रखने और किसी भी संभावित हमले की स्थिति में सतर्क रहने के निर्देश दिए गए।

    ड्रिल का उद्देश्य: दहशत नहीं, तैयारी जरूरी.

    इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य आम जनता को युद्ध या आतंकी हमलों जैसी परिस्थितियों में भयभीत होने से बचाना और उन्हें सटीक तरीके से प्रतिक्रिया करने के लिए प्रशिक्षित करना है। अधिकारियों का कहना है कि सायरन की आवाज से लोगों को ऐसे हालात में शांत और संगठित रहने की आदत डालनी चाहिए।

    भविष्य में और क्षेत्रों में भी होगा आयोजन.

    प्रशासन ने संकेत दिया है कि इस प्रकार की मॉक ड्रिल आगे भी समय-समय पर राज्य के विभिन्न हिस्सों में कराई जाएगी, ताकि किसी भी संभावित संकट की स्थिति में अफरा-तफरी से बचा जा सके और जान-माल की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।


     

  • देवघर में आयोजित हुई उच्चस्तरीय बैठक, श्रावणी मेला 2025 की तैयारियों का खाका तैयार

    देवघर :  आगामी राजकीय श्रावणी मेला 2025 की भव्य और सुरक्षित आयोजन को लेकर मंगलवार को  देवघर परिसदन सभागार में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता झारखंड सरकार में नगर विकास एवं आवास, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग के मंत्री सुदिव्य कुमार  सोनू ने की।

    बैठक में पर्यटन सचिव, देवघर व दुमका के उपायुक्त, पर्यटन निदेशक, और अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। सभी विभागों की तैयारियों कीसमीक्षा करते हुए यह सुनिश्चित किया गया कि श्रावणी मेले के दौरान श्रद्धालुओं को हर संभव सुविधा, सुरक्षा और सहजता प्रदान की जाए।

    श्रावणी मेला: केवल आयोजन नहीं, आस्था का उत्सव.

    बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा, “श्रावणी मेला सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि झारखंड की पहचान है। लाखों श्रद्धालुओं की आस्था इससे जुड़ी है। हमारा लक्ष्य है कि हर श्रद्धालु को सुरक्षित, व्यवस्थित और सम्मानजनक अनुभव मिले।” उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय और समयबद्ध कार्यों की प्राथमिकता पर बल देते हुए निर्देशित किया।

    VIP दर्शन पर रोक: समानता को प्राथमिकता.

    एक बड़ा निर्णय यह लिया गया कि इस बार श्रावणी मेले में हर सोमवार को VIP और VVIP दर्शन की सुविधा पूर्णतः बंद रहेगी। इस कदम का उद्देश्य यह है कि किसी भी श्रद्धालु को विशेषाधिकार की वजह से पीछे न हटना पड़े और सभी को समान अवसर मिल सके।

    तकनीक का मेल से रिश्ता: स्मार्ट मेला 2025.

    इस वर्ष मेला क्षेत्र में तकनीकी हस्तक्षेप को बढ़ाते हुए डिजिटल और AI आधारित सुविधाओं को प्रमुखता दी जा रही है:

    • AI आधारित इंटीग्रेटेड मेला कंट्रोल रूम
    • AI चैटबोट – श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन, फीडबैक और हेल्पलाइन सेवाएं
    • AI ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम
    • QR कोड आधारित फीडबैक सिस्टम
    • लोकेशन बेस्ड अटेंडेंस सिस्टम
    • डिजिटल पवेलियन – संस्कृति और पर्यटन को डिजिटल रूप में दिखाने की पहल

    श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं.

    श्रावणी मेला 2025 में श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु इन विशेष व्यवस्थाओं पर जोर दिया गया:

    • स्वास्थ्य केंद्र और सहायता केंद्र
    • टेंट सिटी, स्वच्छ स्नानगृह, शौचालय, कूड़ेदान
    • पेयजल व्यवस्था, मिस्ट कूलिंग (इंद्र वर्षा)
    • सजावट और स्वागत तोरण द्वारों की भव्य योजना

    सुरक्षा और विधि-व्यवस्था की व्यापक योजना.

    मंत्री ने साफ किया कि मेले में श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि है। इस हेतु:

    • थाना और ट्रैफिक नियंत्रण केंद्र की व्यवस्था
    • अपराध नियंत्रण, वाहन पार्किंग, रूटलाइनिंग की स्पष्ट रणनीति
    • CCTV निगरानी, ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाबल और आपातकालीन प्रतिक्रिया दल

    हर विभाग को मिला समयबद्ध कार्य का निर्देश.

    नगर विकास, पेयजल एवं स्वच्छता, जनसंपर्क, बिजली, स्वास्थ्य, भवन निर्माण आदि विभागों को अपने-अपने कार्यों को समय पर और गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने का निर्देश दिया गया।

    श्रावणी मेला 2025: श्रद्धा, व्यवस्था और तकनीक का संगम.

    11 जुलाई से 09 अगस्त 2025 तक चलने वाले इस राजकीय आयोजन को सफल बनाने के लिए झारखंड सरकार पूरी तरह संकल्पित है। इस बार का मेला केवल आस्था का नहीं, बल्कि सुनियोजित व्यवस्था और तकनीक के संगम का प्रतीक होगा।

  • गिरिडीह : 339 चौकीदारों को मिला नियुक्ति पत्र, युवाओं में खुशी की लहर

    By the news post4u

    गिरिडीह: गिरिडीह नगर भवन में आज आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में जिले के रिक्त चौकीदार पदों पर चयनित 339 अभ्यर्थियों को विधिवत रूप से नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। इस मौके पर युवाओं के चेहरों पर खुशी की चमक साफ नजर आई। राज्य सरकार की इस पहल को युवाओं ने ‘सपनों की पहली सीढ़ी’ बताया और पूरे उत्साह के साथ सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।

    दीप प्रज्वलन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ.

    कार्यक्रम की शुरुआत संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर की गई। कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि सुदिव्य कुमार सोनू  मंत्री – नगर एवं आवास विभाग, उच्च तकनीकी एवं शिक्षा विभाग, पर्यटन तथा खेलकूद विभाग, झारखंड सरकार के साथ बगोदर के विधायक नागेंद्र महतो , जमुआ विधायक मंजु कुमारी एवं डुमरी के विधायक जय राम महतो की गरिमामय उपस्थिति थी  । इस अवसर पर उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक,उप विकास आयुक्त, सदर अनुमंडल पदाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जनसंपर्क पदाधिकारी सहित कई प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे ।

    विस्तृत चयन प्रक्रिया से होकर गुजरे अभ्यर्थी.

    कार्यक्रम में जानकारी दी गई कि गिरिडीह जिले में चौकीदार के कुल 389 पद स्वीकृत हैं। इन पदों के लिए कुल 12,854 आवेदन प्राप्त हुए थे। लिखित परीक्षा में 8126 अभ्यर्थी शामिल हुए, जिनमें से 1664 को सफल घोषित किया गया। इसके बाद हुई शारीरिक दक्षता परीक्षा में 385 अभ्यर्थी सफल हुए। सभी स्तरों पर मूल्यांकन और जिला स्तरीय चयन समिति की अनुशंसा के बाद 339 योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्त किया गया।

    इन 339 चयनित अभ्यर्थियों में 42 महिलाएं और 297 पुरुष शामिल हैं। वर्गानुसार इनकी संख्या इस प्रकार रही –

    • अनारक्षित कोटि – 210
    • अनुसूचित जनजाति – 59
    • आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग – 29
    • अत्यंत पिछड़ा वर्ग – 25
    • पिछड़ा वर्ग – 16

    युवाओं के चेहरों पर खुशी, सरकार को जताया आभार.

    नियुक्ति पत्र मिलने के बाद युवाओं में जबरदस्त उत्साह देखा गया। कई चयनित अभ्यर्थियों ने कहा कि यह नौकरी उनके जीवन को दिशा देगी और परिवार को आर्थिक संबल प्रदान करेगी। एक अभ्यर्थी ने कहा, “हमने मेहनत की, भरोसा रखा और सरकार ने हमारे सपने पूरे किए। आज एक नई शुरुआत हो रही है।”

    मंत्री ने दी शुभकामनाएं, सेवा भाव से कार्य करने की अपील.

    नवनियुक्त चौकीदारों को नियुक्ति पत्र सौंपते हुए झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू  ने कहा कि यह सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि समाज और शासन के प्रति जिम्मेदारी का अवसर है। उन्होंने युवाओं से कहा, “ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और सेवा भाव से कार्य करें। आपकी भूमिका गांव-गांव में प्रशासन की आंख और कान की तरह होगी। सरकार जमीनी स्तर पर प्रशासन को सशक्त करने के लिए काम कर रही है।”

    उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में विभिन्न विभागों में और भी नियुक्तियां की जाएंगी, जिससे युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। मंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों के विकास पर जोर देते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है।

    महिलाओं, युवाओं और गरीबों के लिए सरकार की प्रतिबद्धता.

    मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार महिलाओं, युवाओं और गरीब वर्गों को सशक्त बनाने के लिए कई योजनाएं चला रही है। उन्होंने सभी अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को नियमित स्कूल भेजें, क्योंकि शिक्षा ही समाज में वास्तविक परिवर्तन का आधार है।

    सभी वर्गों के लिए समर्पित सरकार – मंत्री

    उन्होंने कहा, “राज्य सरकार सभी वर्गों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। ग्राम पंचायत से लेकर प्रखंड स्तर तक बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। युवाओं से अपील है कि वे राज्य और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझें और ईमानदारी से कार्य करें।”
    गिरिडीह में आयोजित यह नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम न सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया की सफलता का प्रतीक था, बल्कि यह युवाओं के आत्मविश्वास और राज्य सरकार की प्रतिबद्धता का भी सशक्त उदाहरण बना। यह कार्यक्रम यह दर्शाता है कि रोजगार सृजन के क्षेत्र में सरकार का   ठोस प्रयास जमीनी स्तर पर असर दिखा रह है ।

  • खुफिया इनपुट के बावजूद नहीं हुई सुरक्षा तैयारी, पहलगाम हमले पर खरगे ने केंद्र सरकार को घेरा

    परवेज़ आलम.

    रांची: झारखंड की राजधानी रांची में आयोजित ‘संविधान बचाओ रैली’ के मंच से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले का हवाला देते हुए खरगे ने दावा किया कि हमले से तीन दिन पहले प्रधानमंत्री को खुफिया रिपोर्ट भेजी गई थी। इसके आधार पर पीएम मोदी ने तो अपनी यात्रा रद्द कर दी, लेकिन आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर कोई कदम नहीं उठाया गया, जिसके कारण 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई। खरगे ने कहा, “हमले से तीन दिन पहले प्रधानमंत्री को इंटेलिजेंस इनपुट मिला था, जिसके बाद उन्होंने अपना कश्मीर दौरा रद्द कर दिया। लेकिन सवाल यह है कि अगर उन्हें खतरे की जानकारी थी, तो आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर क्या किया गया?”

    जब जानकारी थी, तो सुरक्षा क्यों नहीं ?

    खरगे ने सवाल किया कि यदि प्रधानमंत्री को खतरे की गंभीर जानकारी थी, तो उसी रिपोर्ट को सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय पुलिस के साथ क्यों नहीं साझा किया गया? उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री खुद खतरों से बच गए, लेकिन आम लोगों को क्यों मरने के लिए छोड़ दिया गया?” उन्होंने केंद्र को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि जब सरकार खुद इंटेलिजेंस फेल्योर को स्वीकार कर रही है, तो उसे इन मौतों की जवाबदेही भी लेनी चाहिए।

    आतंकवाद के खिलाफ समर्थन, लेकिन चूक पर सवाल जरूरी.

    कांग्रेस अध्यक्ष ने यह स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ सरकार के हर कड़े कदम का समर्थन करती है। लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि “समर्थन का मतलब यह नहीं कि सरकार अपनी लापरवाही पर पर्दा डाले।”

    मीडिया रिपोर्ट का हवाला, पीएम का दौरा रद्द.

    खरगे ने एक अखबार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 19 अप्रैल को प्रधानमंत्री को पहलगाम में खतरे की जानकारी मिली थी, जिसके बाद उन्होंने कश्मीर का दौरा रद्द कर दिया। “जब पीएम खुद नहीं गए, तो यह जानकारी आम लोगों को सुरक्षित रखने के लिए क्यों नहीं इस्तेमाल हुई?” उन्होंने पूछा।

    रोजगार और अर्थव्यवस्था पर भी उठाए सवाल.

    रैली में खरगे ने आर्थिक मोर्चे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि देश में 30 लाख सरकारी पद खाली हैं, लेकिन मोदी सरकार इन्हें भरने में रुचि नहीं ले रही। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीति बन गई है – “PSU बंद करो और गरीबों की नौकरी छीनो।”

    उन्होंने यह भी कहा कि कई सरकारी उपक्रमों में कर्मचारियों को महीनों से वेतन नहीं मिला, जबकि सरकार दावा करती है कि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत है। उन्होंने कहा, “अगर जमीन पर हालात नहीं सुधरते, तो आंकड़े महज भ्रम पैदा करने का जरिया बन जाते हैं।”

    जातीय जनगणना और सामाजिक न्याय की मांग.

    खरगे ने केंद्र सरकार से जल्द जातीय जनगणना शुरू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि ओबीसी आरक्षण का दायरा बढ़ाया जाए और 50% की सीमा खत्म की जाए। उन्होंने कहा, “वोट हमारा और राज तुम्हारा – यह अब नहीं चलेगा। अब वोट भी हमारा होगा और सरकार भी हमारी होगी।” उन्होंने मोदी सरकार पर पिछड़े वर्गों और गरीबों की आवाज को दबाने का आरोप लगाया।

    सरना धर्मकोड और HEC की बदहाली का मुद्दा.

    रैली में खरगे ने झारखंड के अहम मुद्दों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि आगामी जनगणना में सरना धर्मकोड को मान्यता दिलाने के लिए संघर्ष जारी रखना होगा। साथ ही HEC (हैवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन) की खराब स्थिति के लिए भी उन्होंने केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, “जहां दो-दो साल से वेतन नहीं मिला, वहां कर्मचारी कैसे काम करेंगे? मोदी सरकार की नीति एससी, एसटी और ओबीसी को हाशिए पर ढकेलने की है।”

    संगठन और संविधान की रक्षा का आह्वान.

    खरगे ने कार्यकर्ताओं से पार्टी को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि “अगर कांग्रेस कमजोर हुई, तो न कोई मंत्री रहेगा, न मुख्यमंत्री। संविधान को बचाना है तो एकजुट संघर्ष जरूरी है।”

    शहीद नेताओं को श्रद्धांजलि और जनता का धन्यवाद

    अपने संबोधन के अंत में खरगे ने महात्मा गांधी, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि “देश पहले है, जाति, धर्म और पार्टी बाद में।” उन्होंने झारखंड की जनता को ‘इंडिया‘ गठबंधन को समर्थन देने के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि राज्य में जनहितैषी सरकार बेहतर ढंग से काम कर रही है।

    मंच पर दिखी कांग्रेस की ताकत

    संविधान बचाओ रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के अलावे कांग्रेस संगठन महासचिव के.सी.वेणुगोपाल, छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, विधायक दल के नेता प्रदीप यादव, कार्यक्रम संयोजक और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप बलमुचू, पूर्व मंत्री सुबोधकांत सहाय, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर के अलावे कांग्रेस कोटे के हेमंत सरकार के मंत्री राधाकृष्ण किशोर, दीपिका पांडे सिंह, डॉ इरफान अंसारी, शिल्पी नेहा तिर्की आदि मौजूद थे

    इस दौरान कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ के बीच कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का जमकर स्वागत किया गया. रैली में भारी संख्या में कार्यकर्ताओं की उपस्थिति ने पार्टी के उत्साह को और मजबूती दी।

  • रांची में ‘संविधान बचाओ रैली’ को संबोधित करेंगे मल्लिकार्जुन खरगे, भाजपा ने साधा तीखा निशाना

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    रांची: कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे 6 मई को एक दिवसीय दौरे पर विशेष विमान से रांची पहुंचेंगे। इस दौरे के दौरान वे रांची के ऐतिहासिक पुराने विधानसभा मैदान में आयोजित ‘संविधान बचाओ’ रैली को संबोधित करेंगे। यह रैली देश के मौलिक अधिकारों और सामाजिक न्याय की अवधारणा को बचाने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है।

    कांग्रेस के झारखंड प्रदेश मुख्य प्रवक्ता लाल किशोर नाथ शाहदेव ने बताया कि खरगे पहली बार झारखंड प्रदेश कांग्रेस की पोलिटिकल अफेयर कमेटी और विस्तारित कार्यसमिति की बैठक में भाग लेंगे। साथ ही रैली के बाद होटल बीएनआर चाणक्य में पार्टी के जिला अध्यक्षों की बैठक को भी संबोधित करेंगे, जहां संगठनात्मक मुद्दों पर रणनीतिक चर्चा होगी।

    रैली की व्यापक तैयारी.

    ‘संविधान बचाओ’ रैली को सफल बनाने के लिए कांग्रेस के विधायक, सांसद, मंत्री और जिला स्तर के पदाधिकारी घर-घर जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं। भीषण गर्मी और बारिश की आशंका को ध्यान में रखते हुए आयोजन स्थल पर विशेष जर्मन हैंगर और दो अतिरिक्त पंडाल लगाए जा रहे हैं ताकि राज्य भर से आने वाले कार्यकर्ताओं और आम लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

    शाहदेव ने बताया कि इस रैली में जातिगत जनगणना की दिशा में मिली प्रारंभिक सफलता की जानकारी साझा की जाएगी और अनुच्छेद 15(5) के शीघ्र क्रियान्वयन की मांग को प्रमुखता दी जाएगी। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने हाल ही में एक पत्र भेजा है जिसमें राज्य स्तर पर नियंत्रण कक्ष और नोडल पदाधिकारी की नियुक्ति कर गतिविधियों की निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही 30 मई तक चलने वाले घर-घर अभियान और चौपालों के आयोजन की योजना भी बनाई गई है।

    भाजपा का तीखा हमला: “बिल्ली हज को चली”

    कांग्रेस की इस पहल पर झारखंड भाजपा ने कड़ा हमला बोला है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस की ‘संविधान बचाओ’ रैली को “70 चूहे खाकर बिल्ली हज को चली” जैसी कहावत से जोड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने लंबे शासनकाल में संविधान की सबसे ज्यादा अवहेलना की है, और अब वही पार्टी खुद को संविधान का रक्षक बताने का नाटक कर रही है।

    मरांडी ने कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में रहते हुए निजी हितों के लिए संविधान में 80 बार संशोधन किए। 1951 में ही नेहरू ने पहला संशोधन किया, और आपातकाल के दौरान तो संविधान को कुचल ही दिया गया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं के लिए संविधान अब “जेबी किताब” बन चुका है।

    भाजपा नेता ने मल्लिकार्जुन खरगे से मांग की कि रांची की रैली से पहले उन्हें मंच पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या कांग्रेस उस मंत्री के बयान से सहमत है, जो कहता है कि “मेरे लिए शरीयत ऊपर है और संविधान नीचे।”

    मरांडी ने यह भी कहा कि अगर कांग्रेस को वास्तव में संविधान पर विश्वास है तो नेशनल हेराल्ड मामले में राहुल गांधी से पूछताछ पर उसके नेता सड़कों पर क्यों उतर आते हैं। उन्होंने कांग्रेस पर संविधान के अनुच्छेद 356 का दुरुपयोग कर राज्य सरकारों को गिराने का भी आरोप लगाया।
    6 मई को होने जा रही ‘संविधान बचाओ’ रैली सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश में सामाजिक न्याय और संविधान की व्याख्या को लेकर छिड़ी बहस का केंद्र बन चुकी है। जहां कांग्रेस इसे लोकतंत्र और अधिकारों की लड़ाई बता रही है, वहीं भाजपा इसे ढोंग और पाखंड करार दे रही है। देखना होगा कि इस रैली के जरिए कांग्रेस क्या संदेश देने में सफल होती है, और भाजपा इसका किस तरह से जवाब देती है।

  • 10 मई को रांची में होगी ईस्टर्न ज़ोनल काउंसिल की अहम बैठक

    गृह मंत्री अमित शाह और कई मुख्यमंत्री होंगे शामिल, सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद
    परवेज़ आलम.
    रांची। झारखंड की राजधानी रांची एक बार फिर एक अहम राष्ट्रीय बैठक की मेज़बानी करने जा रही है। 10 मई को यहां ईस्टर्न ज़ोनल काउंसिल (पूर्वी क्षेत्र परिषद) की 27वीं बैठक आयोजित की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता स्वयं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे। इस बैठक में बिहार, ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री समेत चारों राज्यों के मुख्य सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे।
    अहम नीतिगत मसलों पर होगा विचार-विमर्श.
    इस बैठक में चारों राज्यों के बीच सीमा विवाद, आंतरिक सुरक्षा, अंतरराज्यीय परिवहन, सामाजिक कल्याण योजनाएं, और आर्थिक समन्वय जैसे विषयों पर गहन चर्चा होगी। इसके साथ ही बैठक में क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान, विकास परियोजनाओं की प्रगति और प्रशासनिक तालमेल पर भी विचार किया जाएगा।
    गौरतलब है कि ईस्टर्न ज़ोनल काउंसिल का गठन राज्यों के बीच बेहतर संवाद, समन्वय और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए किया गया है। यह मंच विकास कार्यों को गति देने और नीतिगत अड़चनों को सुलझाने का एक प्रभावशाली माध्यम बन चुका है।
    रांची पुलिस अलर्ट मोड में, डीआईजी की अगुवाई में सुरक्षा तैयारियां.
    बैठक को देखते हुए रांची पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर है। गुरुवार को रांची के डीआईजी सह एसएसपी चंदन कुमार सिन्हा ने शहर के सभी महत्वपूर्ण पुलिस पदाधिकारियों — सिटी एसपी, ग्रामीण एसपी, ट्रैफिक एसपी, सभी डीएसपी और थानेदारों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की।
    इस बैठक में वीआईपी सुरक्षा, रूट प्लानिंग, ट्रैफिक कंट्रोल, और मीटिंग वेन्यू व होटल्स की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विस्तृत निर्देश दिए गए।
    डीआईजी सिन्हा ने कहा,
    “सभी संबंधित विभागों को निर्देश दे दिए गए हैं कि सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक न हो। हर स्तर पर निगरानी रखी जाएगी और सुरक्षा के लिए बहुस्तरीय योजना बनाई गई है।”
    रूट मैप और ट्रैफिक व्यवस्था पर विशेष फोकस.
    गृह मंत्री और अन्य वीआईपी के आगमन के दौरान यातायात को सुगम और सुरक्षित बनाए रखने के लिए विशेष रूट प्लान तैयार किया गया है। पुलिस टीम यह सुनिश्चित करेगी कि सुरक्षा के साथ-साथ आम जनता को भी अनावश्यक परेशानी न हो।
    रांची में इस समय सुरक्षा अभ्यास (Security Drill) भी शुरू हो चुका है, जिसमें बम स्क्वॉड, डॉग स्क्वॉड और स्पेशल ब्रांच की सक्रिय भूमिका रहेगी।
    झारखंड के लिए बड़ी जिम्मेदारी और अवसर.
    केंद्र और राज्यों के शीर्ष नेतृत्व के इस महत्त्वपूर्ण जमावड़े से न केवल नीति-निर्माण में झारखंड की भूमिका सुदृढ़ होगी, बल्कि राज्य को राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से एक सशक्त मंच भी मिलेगा। स्थानीय प्रशासन के लिए यह आयोजन एक चुनौतीपूर्ण परीक्षा भी है, जिसमें सुरक्षा, प्रबंधन और समन्वय की क्षमता को परखा जाएगा।

    10 मई को रांची राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रहेगा। यह बैठक जहां क्षेत्रीय विकास को नई दिशा दे सकती है, वहीं इसके सफल आयोजन से झारखंड की प्रशासनिक और राजनीतिक साख को भी बल मिलेगा।