Tag: kalpna soren

  • झारखंड की धरती पर वीरता और सादगी को सलाम

    परवेज़ आलम की कलम से……

    आज झारखंड  में एक अद्भुत भावनात्मक संगम देखने को मिला। एक ओर शहादत की गूंज थी, तो दूसरी ओर राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा। परमवीर चक्र विजेता लांस नायक अल्बर्ट एक्का की शहादत दिवस और देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती पर राज्यपाल संतोष गंगवार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने झारखंड की मिट्टी से जुड़े इन महान व्यक्तित्वों को श्रद्धांजलि दी।

    अल्बर्ट एक्का: शौर्य की जीवित गाथा
    महात्मा गांधी मार्ग, रांची में अल्बर्ट एक्का की प्रतिमा पर पुष्पचक्र अर्पित करते हुए राज्यपाल संतोष गंगवार ने कहा, “लांस नायक अल्बर्ट एक्का का साहस और बलिदान केवल झारखंड नहीं, पूरे देश का गौरव है। उनका जीवन हर भारतवासी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनके वीरता की गाथा सदियों तक अमर रहेगी।”

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी इस अवसर पर शहीद को नमन करते हुए झारखंड के वीर सपूतों के अद्वितीय योगदान को रेखांकित किया।

    डॉ. राजेंद्र प्रसाद: सादगी का अनूठा आदर्श
    इसके बाद डोरंडा स्थित राजेंद्र चौक पर देश के प्रथम राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। राज्यपाल गंगवार ने कहा, “डॉ. राजेंद्र प्रसाद की सादगी, निस्वार्थ सेवा, और राष्ट्र निर्माण में योगदान हर पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक हैं। उनकी निष्ठा हमें बताती है कि महानता दिखावे में नहीं, कर्म में होती है।”

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस अवसर पर कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद के आदर्श झारखंड जैसे उभरते राज्य के लिए विकास और समानता के पथ पर चलते रहने की प्रेरणा देते हैं।

    अल्बर्ट एक्का की शहादत और डॉ. राजेंद्र प्रसाद की सादगी—दो कहानियां, दो मिसाल। एक ने मातृभूमि के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया, तो दूसरे ने राष्ट्र को मजबूत करने के लिए अपना सर्वस्व समर्पित किया। आज झारखंड ने इन दोनों को याद कर एक बार फिर अपनी मिट्टी की गहराई और गर्व को महसूस किया।

  • झारखंड: मंत्रिमंडल विस्तार पर ‘इंडिया’ में मंथन

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट……..

    झारखंड सरकार के नए मंत्रिमंडल गठन को लेकर इंडिया गठबंधन के भीतर सियासी सरगर्मी चरम पर है। झामुमो, कांग्रेस, और राजद के बीच ‘छह-चार-एक’ का फॉर्मूला तो तय हो चुका है, लेकिन असली दांवपेंच अभी बाकी हैं। हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में कौन-कौन जगह पाएगा, इसका खुलासा फिलहाल टलता दिख रहा है।

    जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कवायद

    मंत्रिमंडल विस्तार के लिए हर दल जातीय और प्रमंडलीय समीकरणों को साधने में जुटा है। झामुमो, कांग्रेस और राजद यह सुनिश्चित करने में लगे हैं कि पूरे राज्य को समेटते हुए हर वर्ग का प्रतिनिधित्व हो। साथ ही, पार्टी के भीतर असंतोष को भी थामे रखा जाए।

    “हर प्रमंडल और हर जाति का प्रतिनिधित्व हो, यह मंत्रिमंडल का लक्ष्य है,” पार्टी सूत्रों का कहना है।

    कांग्रेस का दिल्ली दरबार

    कांग्रेस के विधायक मंत्री पद की दावेदारी को लेकर दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। अनुभव, क्षेत्र, जाति और सामाजिक समीकरणों को आधार बनाकर अपनी दावेदारी पेश करने का दौर जारी है। इस बार कांग्रेस चार मंत्री पद और विधायक दल के नेता-उपनेता की भूमिका को अलग-अलग करना चाहती है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और अन्य नेता आलाकमान से मंत्रियों के नाम तय करने में जुटे हैं।

    झामुमो का पुराना फॉर्मूला बरकरार?

    झामुमो की ओर से संकेत मिले हैं कि इस बार का फॉर्मूला पिछली सरकार की तर्ज पर रहेगा। कोल्हान प्रमंडल से रामदास सोरेन, दीपक बिरुआ और सविता महतो जैसे नेताओं के नाम चर्चा में हैं। वहीं, संताल से एमटी राजा और पलामू से अनंत प्रताप देव के नाम पर भी विचार किया जा रहा है।

    इंडिया गठबंधन की चुनौती: तालमेल और नाराजगी

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में गठबंधन ने जहां राज्य की राजनीतिक धारा को नया आकार दिया, वहीं मंत्रिमंडल गठन में संतुलन साधना सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। गठबंधन की कोशिश है कि हर प्रमंडल, जाति और समुदाय को बराबरी से शामिल किया जाए।

    पिछली सरकार में पलामू और उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल को कांग्रेस से प्रतिनिधित्व नहीं मिला था, लेकिन इस बार इन क्षेत्रों को जगह मिलने की संभावना है।

    विधानसभा सत्र से पहले मंत्रिमंडल का विस्तार?

    माना जा रहा है कि नौ दिसंबर से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र से पहले मंत्रिमंडल विस्तार का काम पूरा हो जाएगा। लेकिन सवाल उठता है कि क्या यह विस्तार पार्टी के भीतर के असंतोष को शांत कर पाएगा?

    सियासी समीकरणों का इम्तिहान

    झारखंड का मंत्रिमंडल विस्तार सिर्फ संख्या का खेल नहीं है, यह सियासी संतुलन का इम्तिहान है। झामुमो, कांग्रेस और राजद की साझेदारी को स्थानीय बनाम बाहरी, जातीय समीकरण और क्षेत्रीय असंतोष की धाराओं के बीच तालमेल बिठाना होगा।

     

  • महिलाओं के खातों में 2500 रुपये । तारीख़ लिख लीजिए, 11 दिसंबर !

    RANCHI: “हेमंत सोरेन सरकार के ‘मंईयां सम्मान योजना’ की पांचवीं किस्त पर नज़र डालिए। वो जो बदलाव की धारा बहती है, वो अब महिलाओं के खातों में 1000 नहीं, पूरे 2500 रुपये लेकर आ रही है। झारखंड के गांव-गांव, शहर-शहर से एक ही आवाज़ गूंज रही है – ‘मंईयां का सम्मान बढ़ा है, हर घर में खुशियां छाई हैं।’”

    झारखंड की सड़कों से लेकर सत्ता के गलियारों तक:
    57 लाख महिलाओं के खातों में 2500 रुपये पहुंचने को हैं तैयार। तारीख़ लिख लीजिए, 11 दिसंबर! कल्याण विभाग पसीना बहा रहा है ताकि हर बहन के चेहरे पर मुस्कान आए। सोचिए, अब तक चार किस्तों में जो 1000 रुपये भेजे गए थे, उनकी जगह 2500 रुपये मिलेंगे।

    चुनावी राजनीति का सियासी खेल:
    विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने ‘गोगो दीदी योजना’ में 2100 रुपये का वादा किया। लेकिन हेमंत सोरेन, जो अपने वादों पर अडिग रहते हैं, उन्होंने सीधे 2500 का दांव खेला। और चुनावी नतीजों ने दिखा दिया कि ये दांव सफल रहा। इंडिया गठबंधन ने प्रचंड बहुमत से जीत दर्ज की, और मंईयां सम्मान योजना इसमें एक बड़ा कारण बनी।

    झारखंड के घरों की चूल्हे की बातें:
    “अब चूल्हे पर सिर्फ खाना नहीं, सपने भी पकेंगे,” कह रही हैं मरियम बीबी , जो इस योजना से बेहद खुश हैं। ग्रामीण झारखंड में ये योजना एक नई उम्मीद बनकर उभरी है।

    रेवड़ी बांटने जैसे आरोप कहीं खरे नहीं उतरते

    झारखंड में मंईयां योजना को चालू रखने के लिए राज्य सरकार को संसाधनों की कमी होने के आसार अभी तक नहीं है। वित्त विभाग के अधिकारियों की मानें तो पिछले कुछ वर्षों में झारखंड ने कहीं से कर्ज नहीं लिया है और सरप्लस बजट भी रहा है।
    ऐसे में कर्ज लेकर रेवड़ी बांटने जैसे आरोप कहीं खरे नहीं उतरते। सरकार एक बार फिर इस योजना के लिए कोई कर्ज नहीं लेगी। ऐसे में यह तय होता दिख रहा है कि कर्ज लिए बगैर भी मंईयां योजना को जारी रखा जा सकता है। वित्त विभाग के सूत्रों के अनुसार इस उपलब्धि के पीछे पिछले चार-पांच वर्षों से चले आ रहे वित्तीय सुधारों का व्यापक असर है।
    हेमंत सरकार की ये योजना न सिर्फ आर्थिक मदद, बल्कि सामाजिक बदलाव की कहानी भी लिख रही है। ये सिर्फ 2500 रुपये नहीं, ये महिलाओं की आत्मनिर्भरता और सम्मान का प्रतीक है।

     

  • झारखंड की नई पहल: दिव्यांग और अनाथ विद्यार्थियों के सपनों को पंख!

    रांची की सुबह आज नई उम्मीदों से रोशन हुई है। झारखंड सरकार ने दिव्यांग और अनाथ विद्यार्थियों की शिक्षा के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। 2025-26 के शैक्षणिक सत्र से, राज्य सरकार इन बच्चों की उच्च और तकनीकी शिक्षा का पूरा खर्च उठाएगी।

    क्या है योजना?
    सरकार 10 लाख रुपये तक की ट्यूशन फीस खुद वहन करेगी और हर महीने छात्रों को 4,000 रुपये भत्ता भी दिया जाएगा। छात्रों के लिए एक “ऑनलाइन पोर्टल” तैयार किया जा रहा है, जहां वे इस योजना के तहत आवेदन कर सकेंगे।

    किसे मिलेगा लाभ?
    सरकार की नई “वाल्मीकि छात्रवृत्ति योजना” का उद्देश्य हर साल 12,000 स्नातक और परास्नातक छात्रों और 1,200 व्यावसायिक कोर्स करने वाले विद्यार्थियों तक पहुंचना है। लेकिन ये संख्या आखिरी नहीं है। राज्य के किसी भी संस्थान में नामांकन लेने वाले छात्रों को इसका लाभ मिलेगा। अन्य राज्यों के छात्रों के लिए यह सुविधा केवल टॉप श्रेणी के संस्थानों में पढ़ाई करने वालों तक सीमित रहेगी।

    शर्तें क्या हैं?

    लाभुक को झारखंड का स्थानीय निवासी होना चाहिए।
    डिप्लोमा के लिए दसवीं और डिग्री कोर्स के लिए दसवीं व बारहवीं झारखंड के स्कूलों से उत्तीर्ण होना अनिवार्य है।
    क्यों है ये कदम ऐतिहासिक?
    दिव्यांग और अनाथ बच्चों के लिए शिक्षा की राह अब न केवल आसान होगी, बल्कि यह उनके सपनों को साकार करने का एक बड़ा माध्यम बनेगी। 99.66 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली यह योजना, न केवल आर्थिक बाधाओं को हटाएगी, बल्कि समाज में समावेशिता और समानता का एक नया अध्याय भी लिखेगी।

    सरकार की सोच और तैयारी
    इस योजना की निगरानी के लिए एक विशेष समिति बनाई जाएगी, जिसमें उच्च शिक्षा निदेशक, सामाजिक सुरक्षा निदेशक और तकनीकी शिक्षा निदेशक जैसे विभागीय पदाधिकारी शामिल होंगे। सरकार ने इसे जनवरी-फरवरी 2025 में लांच करने का लक्ष्य तय किया है।

    “ये कदम सिर्फ एक सरकारी घोषणा नहीं, बल्कि उन अनगिनत सपनों की बुनियाद है, जो अब उड़ान भरने को तैयार हैं।” झारखंड सरकार की यह पहल एक मिसाल है, जो पूरे देश को दिखाती है कि शिक्षा का हक हर बच्चे का है।

    आइए, इस बदलाव का हिस्सा बनें, जहां हर बच्चा पढ़ेगा, बढ़ेगा और सपनों को हकीकत में बदलेगा!

  • झारखंड की ‘सोरेन गाथा’

    रिपोर्ट: परवेज़ आलम……..

    हेमंत सोरेन का नाम झारखंड की राजनीति में महज एक नेता का नहीं, बल्कि संघर्ष, दृढ़ता और विजयी संकल्प का प्रतीक बन चुका है। गुरुवार को जब उन्होंने चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तो यह केवल एक पद ग्रहण करने का अवसर नहीं, बल्कि एक ऐसा क्षण था जो बताता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी साहस और प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ा जा सकता है।

    तीन मोर्चों पर अकेले लड़ाई, सबको चौंकाया .

    हेमंत सोरेन के लिए यह चुनावी सफर आसान नहीं था। तीन मोर्चे थे—कानूनी संकट, पार्टी का आंतरिक संघर्ष, और विपक्षी हमले। 2023 में भूमि घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों और गिरफ्तारी ने उनकी राजनीतिक यात्रा को सबसे चुनौतीपूर्ण बना दिया। लेकिन पांच महीने जेल में बिताने के बाद जब उन्होंने जमानत पर रिहाई पाई, तो उनका यह कहना कि “यह साजिश थी, आदिवासियों की आवाज को दबाने की कोशिश,” पूरे झारखंड में गूंज उठा।

    पार्टी के भीतर बगावत से निपटना भी किसी युद्ध से कम नहीं था। झामुमो को संगठित रखते हुए उन्होंने कांग्रेस और राजद जैसे गठबंधन सहयोगियों को भी विश्वास में बनाए रखा। और विपक्ष ? भाजपा के तीखे हमलों और राजनीतिक चालों के बावजूद, सोरेन का लचीला नेतृत्व और अदम्य साहस झारखंड की जनता के लिए भरोसे का आधार बना रहा।

    संघर्षों से सफलता तक की कहानी .

    हेमंत सोरेन का राजनीतिक सफर संघर्षों से भरा रहा है। 10 अगस्त 1975 को झारखंड के नेमरा गांव में जन्मे सोरेन अपने पिता और झामुमो के संस्थापक शिबू सोरेन की राजनीतिक विरासत के उत्तराधिकारी माने गए। लेकिन उनके सफर में कठिनाइयां कम नहीं थीं। 2009 में राज्यसभा सदस्य के तौर पर शुरुआत करने वाले सोरेन को जल्दी ही राज्य की राजनीति में गहराई तक उतरना पड़ा।       2013 में पहली बार मुख्यमंत्री बनने वाले हेमंत, झारखंड के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने। लेकिन यह कार्यकाल अधिक लंबा नहीं चला। 2014 में भाजपा सत्ता में आ गई और सोरेन विपक्ष में बैठ गए।

    जनता के लिए नायक, विरोधियों के लिए चुनौती .

    हेमंत सोरेन ने हर बार झारखंड की जनता के मुद्दों को अपने एजेंडे में रखा। उनकी योजनाओं ने सामाजिक सुरक्षा और आदिवासी अधिकारों पर खासा ध्यान दिया। ‘मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना’ के तहत महिलाओं को आर्थिक सहारा, किसानों के ऋण माफी का ऐलान, और ‘आपके अधिकार, आपकी सरकार, आपके द्वार’ जैसी योजनाओं ने उन्हें जनता के बीच खासा लोकप्रिय बना दिया।

    उनकी यह योजनाएं केवल विकास के वादे नहीं, बल्कि सत्ता के केंद्र में जनता को लाने की कोशिश थी। और यही कारण है कि विपक्ष की तमाम कोशिशों के बावजूद वे झारखंड के सबसे प्रभावशाली और भरोसेमंद नेताओं में अपनी जगह बनाए हुए हैं।

    हेमंत की जीत: झारखंड की उम्मीदें

    चुनावों के नतीजों ने साबित कर दिया कि हेमंत सोरेन केवल एक नेता नहीं, बल्कि झारखंड की उम्मीदों का चेहरा बन चुके हैं। उनकी चौथी पारी झारखंड को नई दिशा देने के लिए कितनी सफल होगी, यह तो वक्त बताएगा। लेकिन इस वक्त, उनकी कहानी न केवल झारखंड, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा है।

    झारखंड की जंग में अकेले उतरकर उन्होंने न केवल जीत हासिल की, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि जब जनता का भरोसा साथ हो, तो कोई भी लड़ाई मुश्किल नहीं होती।

     

  • झारखंड में सोरेन युग की नई शुरुआत : स्टीफन मरांडी होगें प्रोटेम स्पीकर

     परवेज़ आलम की रिपोर्ट……..

    हेमंत सोरेन ने गुरुवार शाम शपथ ली और उसी वक्त से झारखंड को बदलने की दिशा में कदम बढ़ा दिए। शपथ ग्रहण के बाद जब वे प्रोजेक्ट भवन स्थित झारखंड मंत्रालय पहुंचे, तो यह महज औपचारिकता नहीं, बल्कि नए इरादों का ऐलान था। डेढ़-दो घंटे की बैठक में फैसले ऐसे हुए, जो न केवल झारखंड के प्रशासन को नई दिशा देंगे, बल्कि सियासत के बदलते मिजाज का भी संकेत दे गए।

    स्टीफन मरांडी फिर बने प्रोटेम स्पीकर
    हेमंत सोरेन ने एलान किया कि झारखंड विधानसभा का पहला सत्र 9 से 12 दिसंबर के बीच आयोजित होगा। नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाने की जिम्मेदारी जेएमएम के वरिष्ठ विधायक स्टीफन मरांडी को दी गई है। यह नाम केवल एक नियुक्ति नहीं, बल्कि गठबंधन की परंपरा और पुराने भरोसे का प्रतीक है।

    मंईयां सम्मान योजना: महिलाओं के लिए बड़ी राहत
    बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने मंईयां सम्मान योजना के तहत महिलाओं को दिसंबर महीने से ₹2500 देने का निर्देश दिया। यह केवल एक योजना नहीं, बल्कि राज्य की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अगस्त से नवंबर तक ₹1000-1000 ट्रांसफर किए गए थे, अब यह राशि बढ़ाकर ₹2500 कर दी गई है।

    केंद्र से ₹1.36 लाख करोड़ वसूली: कानूनी कार्यवाही शुरू
    हेमंत सोरेन का कहना है कि झारखंड का ₹1.36 लाख करोड़ केंद्रीय सरकारी उपक्रमों पर बकाया है। इस रकम की वसूली के लिए कानूनी लड़ाई शुरू की जाएगी। झारखंड जैसे राज्य के लिए यह पैसा केवल बकाया नहीं, बल्कि विकास की उम्मीद है।

    खनिज टैक्स की समीक्षा और आय के नए स्रोत
    मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड, देश के सबसे पिछड़े राज्यों में है। राज्य की आर्थिक मजबूती के लिए खनन क्षेत्र में टैक्स की समीक्षा की जाएगी। अदालत में लंबित टैक्स मामलों का समाधान भी प्राथमिकता में रहेगा।

    सिपाही भर्ती और परीक्षा कैलेंडर का एलान
    हेमंत सोरेन ने झारखंड के युवाओं को लेकर बड़ा ऐलान किया। सिपाही भर्ती प्रक्रिया को सुधारने के साथ ही उन्होंने सभी सरकारी रिक्तियों के लिए 1 जनवरी 2025 तक परीक्षा कैलेंडर प्रकाशित करने का निर्देश दिया।

    असम के चाय बागान मजदूरों पर सर्वदलीय समिति
    राज्य के आदिवासी समुदाय की दशा-दिशा पर ध्यान देते हुए, असम के चाय बागानों में मजदूरी कर रहे झारखंड के मूलवासियों की स्थिति का अध्ययन करने के लिए सर्वदलीय समिति गठित करने की घोषणा की गई।

    हेमंत सोरेन का यह कार्यकाल झारखंड को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा देने की दिशा में एक नई शुरुआत है। शपथ से लेकर पहले दिन के फैसलों तक, उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह सरकार केवल सत्ता के लिए नहीं, बल्कि बदलाव के लिए आई है।

    सोरेन के इरादे साफ हैं। फैसले तेज हैं। अब देखना यह होगा कि इस नई दिशा को प्रशासन कितना अमलीजामा पहनाता है।

  • हेमंत कैबिनेट की आज पहली बैठक,होंगे कई अहम फैसले

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट…..

    RANCHI : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के शपथ ग्रहण के बाद आज यानि गुरुवार को कैबिनेट की पहली बैठक होगी । इस बैठक में झारखंड विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का फैसला लिया जा सकता है ताकि विश्वास मत हासिल किया जा सके। हेमंत सोरेन ने चौथी बार मुख्यमंत्री बने हैं  और अब उनकी सरकार की पहली कैबिनेट बैठक पर सबकी निगाहें टिकी हैं। इस बैठक से कई बड़े फैसले निकलने की उम्मीद है, जो न सिर्फ गठबंधन के चुनावी वादों को हकीकत में बदलने का काम करेंगे, बल्कि झारखंड की जनता को राहत का संदेश भी देंगे।
    भगवान बिरसा और सिदो-कान्हू के नाम पर बड़ा फैसला ?
    झारखंड के सबसे बड़े पुरस्कार का नाम बदलकर भगवान बिरसा मुंडा-भगवान सिदो-कान्हू पुरस्कार करने का प्रस्ताव आज कैबिनेट में पेश हो सकता है। यह फैसला राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को सम्मान देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
    रसोई गैस सिलेंडर @450 रुपये: जनता को राहत का तोहफा?
    बैठक में झारखंड के हर जरूरतमंद परिवार को 450 रुपये में रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने की योजना को मंजूरी मिल सकती है। गठबंधन के चुनावी घोषणापत्र में इसे सात गारंटी में शामिल किया गया था, और अब इसे जमीन पर उतारने की तैयारी हो रही है।
    मंईयां सम्मान योजना में पहले ही बढ़ाई गई राशि
    शपथ ग्रहण से पहले हुई अंतिम कैबिनेट बैठक में मंईयां सम्मान योजना की राशि बढ़ाकर 2500 रुपये करने का प्रस्ताव पारित किया जा चुका है। इसे दिसंबर से लागू किया जाएगा। नई सरकार इस योजना को और विस्तार देने पर विचार कर रही है।
    1932 के खतियान और सरना कोड पर चर्चा
    कैबिनेट की प्राथमिकता में 1932 के खतियान आधारित स्थानीयता नीति और सरना धर्म कोड लाने की दिशा में कदम बढ़ाने की उम्मीद है। इससे राज्य की स्थानीय पहचान और संस्कृति को मजबूती मिलने की संभावना है।
    सात गारंटी: जनता से वादों की दिशा में पहला कदम—
    1. स्थानीयता की गारंटी: 1932 खतियान आधारित स्थानीयता नीति और सरना धर्म कोड लागू करने का वादा।
    2. मंईयां सम्मान की गारंटी: दिसंबर 2024 से 2500 रुपये की सम्मान राशि।
    3. सामाजिक न्याय की गारंटी: एसटी, एससी, ओबीसी और अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षण और कल्याण योजनाएं।
    4. खाद्य सुरक्षा की गारंटी: गरीब परिवारों को 450 रुपये में गैस सिलेंडर और 7 किलो राशन।
    5. रोजगार और स्वास्थ्य की गारंटी: 10 लाख युवाओं को नौकरी और 15 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा।
    6. शिक्षा की गारंटी: हर प्रखंड में डिग्री कॉलेज और 500 एकड़ में औद्योगिक पार्क।
    7. किसान कल्याण की गारंटी: धान का एमएसपी 3200 रुपये और लघु वनोपज पर समर्थन मूल्य में 50% वृद्धि।

    झारखंड के लोग इस कैबिनेट बैठक से बड़े फैसलों की उम्मीद कर रहे हैं। हेमंत सरकार अगर इन वादों को पूरा करती है, तो यह न सिर्फ जनता का विश्वास जीतने में सफल होगी, बल्कि झारखंड की राजनीति में एक नई इबारत लिखेगी।

  • हेमंत सोरेन ने चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली

    परवेज आलम की रिपोर्ट…..

    झारखंड की राजनीति ने रच दिया इतिहास। 2024 के विधानसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन की प्रचंड जीत के बाद हेमंत सोरेन ने चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। मोरहाबादी के मैदान में ऐसा नज़ारा था, जो शायद दशकों तक याद किया जाएगा।

    राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने शाम चार बजे हेमंत सोरेन को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। हेमंत अब झारखंड के 14वें मुख्यमंत्री हैं। तीन बार पहले भी इस कुर्सी पर विराजमान हो चुके अर्जुन मुंडा और शिबू सोरेन के बाद, हेमंत का यह चौथा कार्यकाल एक नई कहानी लिखने को तैयार है।

    इंडिया गठबंधन की चमक और शपथ का मंच—

    जिस तरह से मोरहाबादी के मंच पर इंडिया गठबंधन के नेता जुटे, वो किसी शक्ति प्रदर्शन से कम नहीं था। राहुल गांधी से लेकर ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल से लेकर अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, और यहां तक कि तमिलनाडु से उदयनिधि स्टालिन तक… हर किसी की मौजूदगी ने इस समारोह को राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बना दिया। शिबू सोरेन, जो खुद दिशोम गुरु कहे जाते हैं, अपने बेटे की इस चौथी पारी के गवाह बने।

    नतीजों का संदेश—

    2024 के विधानसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन ने 81 में से 56 सीटें जीतकर साबित कर दिया कि झारखंड की जनता का भरोसा उनके साथ है। झामुमो ने 34 सीटों पर कब्जा जमाया, जो इसका अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन है। कांग्रेस को 16, आरजेडी को 4, और भाकपा-माले को 2 सीटें मिलीं।

    सुरक्षा और उत्सव—

    मोरहाबादी मैदान में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था थी, लेकिन माहौल में जोश और जश्न का संगम दिखा। हजारों समर्थकों ने अपने नेता का स्वागत किया। झारखंड का भविष्य नई उम्मीदों से भर चुका है, और इंडिया गठबंधन के लिए यह एक बड़ी जीत का प्रतीक है।

    मोरहाबादी के मंच से झारखंड के हर कोने तक एक संदेश गया—यह जीत सिर्फ राजनीति की नहीं, बल्कि झारखंड के सपनों को नई दिशा देने की शुरुआत है। हेमंत सोरेन की चौथी पारी कितनी सफल होगी, यह तो वक्त बताएगा। लेकिन इस शपथ ग्रहण ने झारखंड की राजनीति को एक नई उड़ान जरूर दी है।

  • झारखंड की राजनीति में नया पेंच: कांग्रेस की ‘चार विधायकों पर एक मंत्री’

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट……
    झारखंड की सत्ता की गोटियां बिछ रही हैं और कांग्रेस ने पुराना पत्ता फेंका है—चार विधायकों पर एक मंत्री का फॉर्मूला। 2019 में इस फॉर्मूले ने कांग्रेस को चार मंत्री पद दिलवाए थे, जब उसके पास 16 विधायक थे। हेमंत सोरेन की अगुवाई वाली सरकार में तब जेएमएम के 30 विधायक थे, और पार्टी ने मुख्यमंत्री समेत सात मंत्री पद अपने हिस्से किए थे। आरजेडी को एक मंत्री पद मिला था।

    अब क्या बदला?
    इस बार कांग्रेस के पास फिर से 16 विधायक हैं, लेकिन पेंच यह है कि इंडिया ब्लॉक के कुल विधायकों की संख्या 56 है। कांग्रेस के फॉर्मूले से 14 मंत्रियों की गुंजाइश बनती है, लेकिन कानून कहता है कि झारखंड विधानसभा (81 सीटें) में मंत्रियों की संख्या 12 से अधिक नहीं हो सकती। इसमें मुख्यमंत्री भी शामिल हैं।

    फिर क्यों कर रही है कांग्रेस ये डिमांड?
    साफ है, बार्गेनिंग पावर कमजोर हुई है। 2019 में जेएमएम को सरकार बनाने के लिए कांग्रेस के 11 विधायकों की जरूरत थी। इस बार जेएमएम को केवल सात विधायकों का सहारा चाहिए। ऐसे में कांग्रेस का पुराना फॉर्मूला प्रैक्टिकल तो नहीं, लेकिन दांवपेंच का हिस्सा जरूर है।

    लेफ्ट का खेल और आरजेडी की चुनौती
    इस बार लेफ्ट भी गठबंधन का हिस्सा है। कोयलांचल और संथाल में लेफ्ट का जनाधार मजबूत है, और लोकसभा चुनाव से पहले हेमंत सोरेन ने उसे साथ लाने की पहल की थी। ऐसे में लेफ्ट को नज़रअंदाज़ करना मुश्किल होगा। आरजेडी भी एक मंत्री पद की उम्मीद लगाए बैठा है।

    नंबर गेम और गठबंधन की सियासत
    जेएमएम की स्थिति मजबूत है। कांग्रेस को दरकिनार कर भी गठबंधन 40 के आंकड़े पर पहुंच रहा है, जो बहुमत से महज एक कम है। ऐसे में कांग्रेस का दबाव बनाना स्वाभाविक है, लेकिन इस बार उसकी बात कितनी सुनी जाएगी, यह कहना मुश्किल है।

    क्या होगा आगे?
    हेमंत सोरेन की सरकार के लिए मंत्रीमंडल का संतुलन साधना बड़ी चुनौती है। क्या कांग्रेस अपने फॉर्मूले पर अड़ी रहेगी? क्या लेफ्ट को मंत्री पद मिलेगा? और आरजेडी कहां खड़ा होगा? जवाब आने वाले दिनों में झारखंड की सियासत तय करेगी।

     

  • हेमंत सोरेन: नेमरा की मिट्टी, कल्पवृक्ष की छांव और बचपन की यादें

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …….

    झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, जो 28 नवंबर को चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं, अपने पैतृक गांव नेमरा पहुंचे। नेमरा, जो न सिर्फ उनके बचपन का गवाह है, बल्कि उनकी जड़ों और संघर्ष की कहानियों को भी समेटे हुए है। पहाड़ की तलहटी में बसे इस गांव में हेमंत सोरेन के कदम पड़ते ही पुरानी यादें जैसे ताजा हो उठीं।

    गांव का बदलता चेहरा, पर यादों का वही अक्स
    नेमरा में स्थित उनका खपरैल मकान, अब आंशिक रूप से दो मंजिला हो गया है। आंगन में लगा कल्पतरु का वृक्ष पहले से अधिक घना हो चुका है, लेकिन खेतों की पगडंडियां और गांव के गलियारे हेमंत सोरेन के लिए वही बचपन की कहानियां सुनाने लगे। वे बिना चप्पल दौड़ने, गुल्ली-डंडा, फुटबॉल, और बैडमिंटन खेलने की यादों में खो गए।

    गांव में रोशनी, पर सुविधाओं की दरकार
    नेमरा, जहां अब 150 संताल परिवारों के घर हैं, सौर ऊर्जा से जलने वाली स्ट्रीट लाइटों से रोशन है। रामगढ़ ज़िले के गोला प्रखंड मुख्यालय से 14 किलोमीटर दूर यह गांव अब पक्की सड़कों से जुड़ चुका है। हालांकि, गांव में अब भी आधारभूत सुविधाओं का अभाव है। सिर्फ नौवीं कक्षा तक पढ़ाई करने वाला एक स्कूल, डॉक्टरों की कमी वाला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, और कमजोर मोबाइल कनेक्टिविटी यहां की वास्तविकता को बयां करते हैं।

    शहीद सोबरन सोरेन को श्रद्धांजलि
    हेमंत सोरेन ने अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के साथ शहीद सोबरन सोरेन के 67वें शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा, “दादा की शहादत इसी पहाड़ की तराई में हुई थी। वह हमारे दिलों में आज भी जिंदा हैं।”

    गांववालों को दिया शपथ ग्रहण का न्योता
    नेमरा में श्रद्धांजलि सभा के दौरान हेमंत सोरेन ने गांव के लोगों का धन्यवाद किया और उन्हें शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने का न्योता भी दिया। उन्होंने कहा, “सरकार का गठन हो रहा है। इस बार जब नेमरा आया हूं, तो फिलहाल परिसंपत्तियों का वितरण या योजनाओं का उद्घाटन नहीं, बल्कि आप सभी से संवाद के लिए आया हूं।”

    संदेश: मिट्टी से जुड़े रहना ही असली पहचान
    हेमंत सोरेन का यह दौरा न केवल उनके जीवन के शुरुआती संघर्षों की याद दिलाता है, बल्कि यह भी बताता है कि चाहे इंसान कितनी भी ऊंचाई पर पहुंच जाए, उसकी जड़ें हमेशा उसकी ताकत होती हैं।