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  • झारखंड सरकार का कर्मचारियों के लिए नए साल का तोहफा!

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट ……….

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई झारखंड कैबिनेट की बैठक में राज्य कर्मचारियों के लिए नई सौगात का ऐलान किया गया। राज्य कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई है। अब यह भत्ता 50 प्रतिशत से बढ़कर 53 प्रतिशत हो गया है। यह बढ़ोतरी 1 जुलाई 2024 से लागू होगी।

    पेंशनभोगियों को भी राहत। 
    केवल सरकारी कर्मचारी ही नहीं, बल्कि पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते में भी तीन प्रतिशत की वृद्धि की गई है। सरकार का यह कदम महंगाई के बढ़ते बोझ को कम करने की दिशा में राहत भरा है।

    मेरू योजना के तहत विनोबा भावे विश्वविद्यालय को मिला 99.56 करोड़। 
    बैठक में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए भी बड़े फैसले लिए गए। प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (PM-USHA) के तहत विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग के लिए 99.56 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई। इस राशि का उपयोग मल्टीडिसिप्लिनरी एजुकेशन एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी (MERU) योजना के तहत किया जाएगा।

    कैग रिपोर्ट और अन्य अहम फैसले। 
    कैबिनेट ने आगामी विधानसभा सत्र में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट को पेश करने की स्वीकृति दी। यह रिपोर्ट राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना और स्वास्थ्य सेवाओं की प्रबंधन स्थिति पर केंद्रित होगी।

    डॉ. तुलसी महतो को प्रोन्नति। 
    झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के आलोक में रिम्स के सेवानिवृत्त प्राध्यापक डॉ. तुलसी महतो को भूतलक्षी प्रभाव से प्रोन्नति देने का निर्णय भी लिया गया।

    अन्य प्रमुख फैसले:

    1. झारखंड विधानसभा के पहले सत्र के सत्रावसान को मंजूरी।
    2. राज्यपाल के अभिभाषण को घटनोत्तर स्वीकृति।
    3. खनन पदाधिकारियों को सेवा शर्तों में छूट।
    4. कैग की वित्तीय वर्ष 2023-24 की लेखा परीक्षा रिपोर्ट को विधानसभा पटल पर रखने की अनुमति।

    तीसरी कैबिनेट बैठक, दस अहम फैसले। 
    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुवाई में बनी सरकार की यह तीसरी कैबिनेट बैठक थी, जिसमें कुलपर सहमति दी गई। राज्य सरकार के इन फैसलों से कर्मचारियों और शिक्षा क्षेत्र को राहत और प्रगति दोनों मिलने की उम्मीद है।

    सरकार का यह कदम विकास और जनकल्याण की दिशा में एक और बड़ा प्रयास माना जा रहा है।मुख्यमंत्री हेमंत सोरेनने कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुये सभी झारखंडवासियों कोनए साल की बधाई भी दी । 

  • सभी औद्योगिक इकाइयों को इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर (ESP) मशीन लगाना आवश्यक –डीसी

    गिरिडीह जिले में अवैध बालू खनन, डंपिंग और स्टोन माइंस के संचालन पर गहन जांच और कारखानों से निकलने लने वाले धुएं व दूषित जल के निष्पादन में प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश गिरिडीह डीसी नमन प्रियेश लकड़ा ने दिया है । उन्होंने सभी औद्योगिक इकाइयों में इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर (ESP) मशीन लगाने के निर्देश भी दिए। गिरिडीह के समाहरणालय सभागार में मंगलवार को जिला स्तरीय पर्यावरण समिति की बैठक अध्यक्षता उपायुक्त-सह-अध्यक्ष, जिला पर्यावरण समिति नमन प्रियेश लकड़ा ने की। बैठक में पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा हुई और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा की गई।
    उसरी नदी के संरक्षण पर विशेष जोर।
    बैठक का एक मुख्य एजेंडा था उसरी नदी का संरक्षण। उपायुक्त ने इस नदी की सफाई और संरक्षण के लिए सीएसआर फंड के उपयोग की समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस फंड का प्रभावी और पारदर्शी तरीके से क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, नदी में गंदे नालों का पानी फिल्टर करने के बाद ही प्रवाहित करने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए।
    पर्यावरण संरक्षण और हरित उपायों पर फोकस।
    बैठक में औद्योगिक परिसरों में पौधारोपण और प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का पालन करने पर जोर दिया गया। अस्पतालों, होटलों और रेस्तरां को भी प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित अनुमति प्राप्त करने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही, एयर क्वॉलिटी इंडेक्स डिस्प्ले स्क्रीन लगाने का प्रस्ताव रखा गया, ताकि नागरिकों को वायु गुणवत्ता की स्थिति की जानकारी मिल सके।
    प्रमुख अधिकारी थे मौजूद।
    बैठक में पूर्वी वन प्रमंडल पदाधिकारी, उप विकास आयुक्त, सदर अनुमंडल पदाधिकारी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े इस महत्त्वपूर्ण संवाद में सभी संबंधित विभागों के समन्वय पर जोर दिया गया।

  • भीख मांगने की आड़ में चोरी का खेल, सीसीटीवी ने खोली पोल

    गिरिडीह: दो मासूम बच्चों को साथ लेकर घर-घर भीख मांगने के बहाने दिनदहाड़े चोरी करने वाली महिला को आखिरकार नगर थाना की पुलिस ने धर दबोचा। पावर हाउस मोड़, बरगंडा रोड पर सोमवार को सीसीटीवी फुटेज की मदद से इस संदिग्ध महिला को गिरफ्तार किया गया।

    क्या है मामला?
    इन दिनों गिरिडीह नगर थाना क्षेत्र में एक महिला द्वारा भीख मांगने की आड़ में चोरी की घटनाओं ने हड़कंप मचा दिया था।

    महिला पर आरोप है कि उसने मकतपुर रोड स्थित एसबीआई गली और आजाद नगर के घरों में चोरी की वारदातों को अंजाम दिया।
    इन घटनाओं में नकद और जेवरात गायब होने की शिकायतें दर्ज की गई थीं।
    बीएनएस डीएवी स्कूल की शिक्षिका ने बताया कि उनके घर में भी चोरी हुई, जब उनका बेटा छत पर था। सीसीटीवी फुटेज में महिला अपने बच्चों के साथ घर से निकलती हुई दिखी।
    पुलिस की कार्रवाई. 

    नगर थाना पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण करने के बाद महिला को गिरफ्तार किया।पुलिस का दावा है कि फुटेज में दिखने वाली यही महिला थी, जो शातिर अंदाज़ में चोरी की वारदातों को अंजाम देती थी।
    पुलिस का आरोप और पीड़ितों का बयान. 
    डीएवी स्कूल की शिक्षिका और अन्य पीड़ितों ने सीसीटीवी फुटेज में महिला की पहचान की है।
    शिक्षिका ने कहा, “चोरी के समय घर पर कोई नहीं था। फुटेज में महिला को बच्चों के साथ निकलते देखा गया।”
    पिछले घटनाक्रम.
    महिला पर डीएवी प्रिंसिपल मनीष सिन्हा और संतोष तुरी के घर चोरी करने का भी आरोप है।इन घटनाओं में नगद और जेवरात चोरी हुए थे।
    पुलिस का मानना है कि महिला लंबे समय से इस तरह की घटनाओं को अंजाम दे रही थी। नगर थाना की टीम अब इस महिला से गहन पूछताछ कर रही है।चोरी के नेटवर्क और अन्य वारदातों में उसकी संलिप्तता की जांच की जा रही है।
    पुलिस यह भी पता लगा रही है कि महिला के साथ कोई अन्य व्यक्ति इस अपराध में शामिल है या नहीं।
    आखिरी सवाल. 
    क्या महिला निर्दोष है, या फिर शातिर चोर? यह सवाल अभी बाकी है। लेकिन एक बात तय है कि पुलिस की कार्रवाई ने गिरिडीह शहर में चोरी की घटनाओं पर लगाम लगाने की कवायद तेज़ कर दी है ।

  • भू-अर्जन में तेजी के लिए उपायुक्त ने दिया सख्त निर्देश

    गिरिडीह:  जिला मुख्यालय स्थित अपने कार्यालय में सोमवार कोनमन प्रियेश लकड़ा ने पथ निर्माण विभाग, झारखंड सड़क परिवहन एवं राज्यमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार, और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा क्रियान्वित परियोजनाओं की समीक्षा बैठक की।
    बैठक का मुख्य उद्देश्य। 
    बैठक में उपायुक्त ने विकास परियोजनाओं में लंबित मामलों के निपटारे और परियोजनाओं में तेजी लाने के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। विशेष तौर पर एनएच-114 से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई, जिसमें लंबित मामलों और मुआवजा वितरण प्रक्रिया को प्राथमिकता दी गई।
    एनएच-114: लंबित मामलों का जल्द निपटारा। 
    बैठक में एनएच-114 से संबंधित प्रकरणों की समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने जानकारी दी कि FRA (वन अधिकार अधिनियम) का निर्णय लिया जा चुका है।
    • छह मौजा के लिए अवार्ड तैयार कर रैयतों के बीच वितरित किया जा रहा है।
    • लाभुकों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
    • रैयतों द्वारा भू-अर्जन कार्यालय में राजस्व दस्तावेज जमा करने के बाद मुआवजा भुगतान प्रक्रिया आरंभ कर दी जाएगी।
    भू-अर्जन में तेजी के लिए निर्देश। 
    उपायुक्त ने सभी अंचल अधिकारियों को भू-अर्जन कार्यालय के साथ समन्वय बनाकर कैंप आयोजित करने और लंबित एलपीसी (भूमि प्रबंधन प्रमाणपत्र) और वंशावली प्रमाणपत्र को शीघ्र निर्गत करने का निर्देश दिया।
    अधिकारियों को समन्वय पर जोर। 
    उपायुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों को आपसी समन्वय स्थापित करते हुए कार्यों को तेज करना होगा। उन्होंने कहा, “विकास कार्यों में देरी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
    बैठक में कौन-कौन थे मौजूद?
    इस महत्वपूर्ण बैठक में पथ निर्माण विभाग, राजस्व विभाग, और भू-अर्जन कार्यालय के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। सभी ने परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति की जानकारी दी और समयबद्धता सुनिश्चित करने का वादा किया।
    प्रगति की ओर कदम।
    जिले में चल रही सड़क निर्माण परियोजनाओं को लेकर उपायुक्त के सख्त निर्देश और तेजी लाने की पहल यह दर्शाती है कि जिला प्रशासन विकास कार्यों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अब यह देखना अहम होगा कि परियोजनाओं की ये रफ्तार धरातल पर कैसे दिखती है।

  • ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत बाल विवाह रोकने की ली गई शपथ

    गिरिडीह: जिला समाज कल्याण विभाग की पहल पर “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” अभियान के तहत गिरिडीह जिले के सभी उच्च विद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य छात्राओं को उनके अधिकारों और बाल विवाह के खतरों के प्रति जागरूक करना था।
    कार्यक्रम में कौन रहे उपस्थित?
    इस विशेष अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रमों में बाल संरक्षण पदाधिकारी  जीतु कुमार और जिला बाल संरक्षण इकाई की काउंसलर नीलम कुमारी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इनके साथ अन्य अधिकारी भी इस पहल को सफल बनाने में योगदान देने पहुंचे।
    क्या रहा कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण?
    कार्यक्रम में गिरिडीह जिले के सभी उच्च विद्यालयों की छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बाल विवाह रोकने और लड़कियों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए सभी बच्चों को शपथ दिलाई गई।
    इस दौरान जिला समाज कल्याण विभाग की टीम ने कई विद्यालयों का दौरा किया, जिनमें प्रमुख रूप से:
    1. उच्च विद्यालय कुम्हारलालो, पीरटांड़
    2. प्रोजेक्ट कन्या उच्च विद्यालय, डुमरी
    3. पारसनाथ दिगंबर जैन उच्च विद्यालय, डुमरी
    इन स्कूलों में विभागीय अधिकारियों ने निरीक्षण कर ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के उद्देश्यों और महत्व के बारे में जानकारी दी।
    बाल संरक्षण पदाधिकारी की खास बातें
    बाल संरक्षण पदाधिकारी श्री जीतु कुमार ने अभियान के मकसद पर जोर देते हुए कहा, “यह अभियान पूरे भारत में लड़कियों को सशक्त और सुरक्षित बनाने के लिए चलाया जा रहा है।” उन्होंने कम उम्र में लड़कियों की शादी से होने वाले शारीरिक और मानसिक खतरों पर विस्तार से चर्चा की।
    बच्चों को बताए गए उनके अधिकार
    कार्यक्रम में जिला बाल संरक्षण इकाई की काउंसलर नीलम कुमारी ने बच्चों को उनके अधिकारों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने चार मुख्य अधिकारों पर प्रकाश डाला:
    1. जीने का अधिकार
    2. विकास का अधिकार
    3. सुरक्षा का अधिकार
    4. सहभागिता का अधिकार
    नीलम कुमारी ने कहा, “इन अधिकारों को समझना और इनका उपयोग करना हर बच्चे का हक है।”
    जागरूकता और सशक्तिकरण की दिशा में मजबूत कदम.
    गिरिडीह में आयोजित इस अभियान ने लड़कियों को उनके अधिकारों के प्रति न केवल जागरूक किया, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित भी किया। बाल विवाह जैसी कुरीतियों के खिलाफ इस मुहिम को छात्राओं ने भी सराहा।
    ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि लड़कियों की शिक्षा और सुरक्षा को प्राथमिकता देना ही समाज की असली तरक्की है।

  • बांग्लादेश ने भारत से मांगा शेख हसीना का प्रत्यर्पण, कहा- ‘न्यायिक प्रक्रिया के लिए जरूरी’

    बांग्लादेश ने सोमवार को भारत को एक आधिकारिक नोट भेजकर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की है। बांग्लादेश सरकार का कहना है कि हसीना को वापस लाकर देश में उनके खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए।

    क्या कहा बांग्लादेश के अधिकारियों ने?

    बांग्लादेश के विदेश सलाहकार तोहीद होसैन ने पुष्टि करते हुए कहा, “हमने भारत सरकार को औपचारिक नोट भेजा है। इसमें साफ कहा गया है कि शेख हसीना की उपस्थिति न्यायिक प्रक्रिया के लिए जरूरी है।”

    बांग्लादेश के घरेलू मामलों के सलाहकार, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) जहांगीर आलम चौधुरी, ने प्रत्यर्पण पर जोर देते हुए कहा, “हमारे पास भारत के साथ कैदी विनिमय समझौता है। यह प्रक्रिया उसी समझौते के तहत पूरी की जाएगी।”

    कैसे शुरू हुआ मामला?

    पिछले महीने, बांग्लादेश के अंतरिम प्रमुख मुहम्मद युनुस ने घोषणा की थी कि उनकी सरकार शेख हसीना का प्रत्यर्पण भारत से मांगेगी। उल्लेखनीय है कि 5 अगस्त को शेख हसीना देश में व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच भारत भागकर  आ गई थीं। इन प्रदर्शनों के कारण उनके 15 साल लंबे शासन का अंत हुआ।

    युनुस का बड़ा कदम। 

    नोबेल पुरस्कार विजेता और बांग्लादेश के अंतरिम प्रमुख मुहम्मद युनुस ने अपने 100 दिन के कार्यकाल में यह स्पष्ट किया कि उनकी सरकार उन सभी के खिलाफ कार्रवाई करेगी, जो छात्रों के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और जनहानि के लिए जिम्मेदार हैं।

    युनुस ने कहा, “हम शेख हसीना को भारत से वापस लाने की पूरी कोशिश करेंगे।” उन्होंने यह भी खुलासा किया कि इस मुद्दे पर उनकी बातचीत अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के मुख्य अभियोजक करीम खान से हुई है।

    क्यों है प्रत्यर्पण महत्वपूर्ण?

    युनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का कहना है कि जुलाई और अगस्त में छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुए कथित “मास हत्याओं” के लिए शेख हसीना को न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना होगा। सरकार ने भारत के साथ प्रत्यर्पण संधि का हवाला देते हुए इसे जल्द से जल्द अमल में लाने की बात कही।

    अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नजरें टिकीं। 

    यह मामला केवल बांग्लादेश और भारत तक सीमित नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की सक्रियता और नोबेल विजेता युनुस की भूमिका के कारण यह मामला वैश्विक स्तर पर भी चर्चा में है।

    अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।या मामला अंतर्राष्ट्रीय मंच पर जाएगा? इस पूरे घटनाक्रम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

  • नो डिटेंशन पॉलिसी खत्म अब 5वीं और 8वीं में फेल होने पर नहीं होगा प्रमोशन, केंद्र सरकार का बड़ा फैसला

    नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सोमवार को शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव करते हुए ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ को समाप्त करने का ऐलान कर दिया है। अब 5वीं और 8वीं कक्षा में फ़ेल होने वाले छात्रों को बिना मेहनत के अगली कक्षा में भेजने का रास्ता बंद हो गया है। सरकार के इस कदम का उद्देश्य छात्रों के शिक्षण स्तर को सुधारना और उनकी बुनियादी शिक्षा को मजबूत करना है।

    क्या है नई नीति?

    पहले, 5वीं और 8वीं में फेल होने पर छात्रों को अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया जाता था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। नई व्यवस्था के तहत, वार्षिक परीक्षा में फ़ेल होने वाले छात्रों को दो महीने के भीतर पुनः परीक्षा देने का मौका दिया जाएगा। अगर वे इसमें भी फ़ेल रहते हैं, तो उन्हें अगली कक्षा में प्रमोशन नहीं मिलेगा।

    हालांकि, यह स्पष्ट कर दिया गया है कि कोई भी स्कूल 8वीं कक्षा तक किसी छात्र को स्कूल से बाहर नहीं कर सकता।

    नीति का उद्देश्य। 

    शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि यह कदम छात्रों की शैक्षणिक क्षमता को सुधारने और उनकी सीखने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए उठाया गया है। मंत्रालय के सचिव संजय कुमार ने कहा, “हमारा उद्देश्य छात्रों के शिक्षण स्तर को मजबूत करना और उनकी समझ को विकसित करना है। यह नीति छात्रों को मेहनत करने और शिक्षा की नींव को मजबूत करने का मौका देगी।”

    फेल छात्रों को मिलेगा दूसरा मौका। 

    नई नीति के तहत, असफल छात्रों को अपनी कमजोरी सुधारने का अवसर दिया जाएगा। रिजल्ट के बाद दो महीने के भीतर दोबारा परीक्षा आयोजित की जाएगी। अगर छात्र दूसरी बार भी सफल नहीं होते हैं, तो उन्हें उसी कक्षा में रहना होगा।

    शिक्षा प्रणाली में सुधार की ओर एक कदम। 

    सरकार के इस निर्णय का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली में गुणवत्ता लाना है। यह नीति न केवल छात्रों के प्रदर्शन को सुधारने में मदद करेगी, बल्कि उन्हें कड़ी मेहनत के लिए प्रेरित भी करेगी।

    इस बदलाव से यह साफ है कि सरकार अब शिक्षा के क्षेत्र में के पुराने नियम को समाप्त कर, छात्रों की वास्तविक क्षमता को पहचानने और उनकी प्रगति सुनिश्चित करने के लिए गंभीर है।

    क्या यह कदम छात्रों और अभिभावकों के लिए सही साबित होगा? यह तो समय ही बताएगा, लेकिन फिलहाल शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने की यह पहल एक महत्वपूर्ण बदलाव की ओर इशारा करती है।

  • खाली पदों को जल्द से जल्द भरा जाएगा -उद्योग मंत्री संजय यादव

    1. रांची: झारखंड के उद्योग मंत्री संजय प्रसाद यादव ने सोमवार को प्रोजेक्ट भवन में उद्योग विभाग की गहन समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि विकास कार्यों को गति देने के लिए विभाग में खाली पदों को जल्द से जल्द भरा जाए। उन्होंने अधिकारियों से समन्वय बनाकर कार्य करने की अपील की और कहा कि झारखंड को विकसित राज्य की श्रेणी में बनाए रखने के लिए उद्योगों को बढ़ावा देना अनिवार्य है।

    रिक्त पदों पर बहाली को प्राथमिकता. 

    समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री ने विभाग में खाली पड़े पदों का मुद्दा उठाया। उन्होंने निर्देश दिए कि रिक्त पदों की सूची तुरंत उपलब्ध कराई जाए, ताकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से विचार-विमर्श कर इस दिशा में आवश्यक कदम उठाए जा सकें। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री का सपना है कि झारखंड एक औद्योगिक हब बने, और हम इसे साकार करेंगे।”

    निवेशकों को हर प्रकार की सुविधाएं . 

    मंत्री यादव ने कहा कि सरकार निवेशकों को हर प्रकार की सुविधाएं प्रदान करेगी। उन्होंने उद्योगों के विकास में बिचौलियों से सतर्क रहने पर भी जोर दिया। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को बताया कि उद्योगों के विस्तार और निवेश को आकर्षित करने के लिए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।

    समीक्षा बैठक में शामिल अधिकारी. 

    इस समीक्षा बैठक में उद्योग विभाग के सचिव जितेंद्र सिंह, अपर सचिव, उद्योग निदेशक सुशांत गौरव, और हस्तकरघा, रेशम एवं हस्तशिल्प निदेशालय की निदेशक आकांक्षा रंजन सहित कई महत्वपूर्ण अधिकारी मौजूद थे। इस दौरान जियाडा, ज़िडको, झारक्राफ्ट, झारखंड माटीकला बोर्ड, और मुख्यमंत्री लघु, कुटीर एवं उद्यम विकास बोर्ड समेत अन्य संस्थानों के कार्यों की भी समीक्षा की गई।

    मुख्यमंत्री की परिकल्पना को साकार करने का आह्वान. 

    मंत्री ने बैठक में कहा कि का उद्देश्य झारखंड को एक औद्योगिक हब के रूप में विकसित करना है। राज्य में अधिक से अधिक उद्योग स्थापित हों और झारखंड विकास की नई ऊंचाइयों को छुए, यही सरकार का लक्ष्य है।

    संजय प्रसाद यादव के इन निर्देशों से यह स्पष्ट है कि झारखंड सरकार विकास कार्यों में तेजी लाने और राज्य को उद्योगों के लिए आकर्षक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

     

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  • झारखंड: जंगली हाथियों का आतंक, डर के साए में जी रहे हैं ग्रामीण

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …………..

    झारखंड के गिरिडीह जिले में जंगली हाथियों का कहर जारी है। बीती रात चार हाथियों के झुंड ने शिकरा हेम्ब्रम के घर को तोड़ डाला और उन्हें रौंदकर मौत के घाट उतार दिया। यह हादसा सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि पूरे इलाके के लिए एक भयावह सचाई है।
    इस घटना की सूचना मिलते ही पूर्व मंत्री बेबी देवी ने मौके पर पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की। उन्होंने हर संभव मदद का भरोसा दिया और तुरंत 40,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की। साथ ही उन्होंने कहा कि शेष 3,60,000 रुपये की राशि जल्द से जल्द दी जाएगी।
    बेबी देवी ने ट्वीट करते हुए कहा। 
    “आज प्रातः शिकरा हेम्ब्रम जी को हाथियों ने कुचलकर मार दिया। मैं घटनास्थल पर गई और उनके परिजनों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया। वन विभाग को निर्देश दिया गया है कि पीड़ित परिवार को सहयोग प्रदान किया जाए। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें।”
    इससे पहले सनिवार को भी सुगवाटांड़ में हाथियों ने तीन घरों को बुरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया। गीता देवी, विलसी देवी और कौशल्या देवी के घर अब मलबे के ढेर में बदल चुके हैं।
    हाथियों ने घरों में रखा धान और अनाज चट कर दिया, और खेतों में लगी आलू की फसल को रौंद डाला। यह घटना न केवल इन परिवारों के लिए आर्थिक झटका है, बल्कि पूरे गांव के लिए डर का कारण भी बन गई है।
    कहां से आए ये हाथी?
    घटना से पहले हाथियों का झुंड जलेबिया घाटी के पास देखा गया था। वन विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए था, लेकिन रात के अंधेरे में ये झुंड सुगवाटांड़ पहुंच गया।
    सरकार और वन विभाग का कदम। 
    गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू ने घटनास्थल का दौरा किया और पीड़ित परिवारों को 10,000 रुपये का चेक और एक-एक पेटी चावल दिया।
    वन विभाग ने जानकारी दी कि हाथियों को भगाने के लिए बांकुड़ा से विशेषज्ञों की टीम बुलाई जा रही है।
    लेकिन सवाल यही है: क्या सिर्फ राहत राशि और चावल देकर इस समस्या का समाधान हो सकता है?
    ग्रामीणों की गुहार: हमें चाहिए सुरक्षा, सिर्फ वादे नहीं। 
    जंगल और पहाड़ों के पास बसे गांवों के लोग अब अपने ही घरों में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। हर बार हाथियों का झुंड आता है, तबाही मचाता है, और प्रशासन केवल मुआवजा देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेता है।
    क्या वन विभाग और सरकार के पास इन घटनाओं से निपटने की कोई ठोस योजना है?
    कब तक लोग हाथियों के डर के साए में अपनी जिंदगी जीने को मजबूर रहेंगे?
    आप क्या सोचते हैं?
    क्या झारखंड सरकार और वन विभाग इस समस्या को गंभीरता से ले रहा है?
    अपनी राय कमेंट में साझा करें।

  • झारखंड : बारिश, ठंड और धुंध का मिला-जुला असर

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …………..

    झारखंड मे  इस बार प्रकृति ने अपने अलग-अलग रंग दिखाए हैं।

    बारिश, बादल और राहत की कहानी। 
    पिछले 24 घंटों में झारखंड के कई जिलों में हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश हुई। खूंटी के तोरपा में सबसे ज्यादा 20.6 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। इस बारिश ने ठंड के तेवर थोड़ा नरम कर दिए। न्यूनतम तापमान 8 डिग्री सेल्सियस तक गिरा, जो चतरा में रिकॉर्ड किया गया, जबकि सिमडेगा के बानो में 27℃ का अधिकतम तापमान दर्ज हुआ।

    बंगाल की खाड़ी में बने लो प्रेशर एरिया का असर अभी भी झारखंड में नजर आ रहा है। बादलों ने ठंड को थोड़ा काबू में रखा है, लेकिन दिन में धुंध और ठंडी हवाओं ने यह एहसास दिलाया कि सर्दियां अभी खत्म नहीं हुई हैं।

    कोल्हान में कोहरा: येलो अलर्ट जारी।
    कोल्हान क्षेत्र में धुंध और कोहरे का असर बढ़ा है। खासकर पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला और सिमडेगा में येलो अलर्ट जारी किया गया है। सुबह के वक्त धुंध से विजिबिलिटी कम हो रही है, और लोग ज्यादा ठंड महसूस कर रहे हैं।

    क्रिसमस से पहले बारिश की संभावना। 
    मौसम विभाग का अनुमान है कि 24 दिसंबर को झारखंड के सात जिलों- गढ़वा, पलामू, चतरा, सिमडेगा, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला में हल्की बारिश हो सकती है। जहां बारिश नहीं होगी, वहां भी बादल छाए रहेंगे।

    हालांकि क्रिसमस के दिन मौसम साफ रहने का अनुमान है। इस दिन अधिकतम तापमान 25-26℃ और न्यूनतम तापमान 13℃ के आसपास रहेगा।

    ठंड का नया मिजाज। 
    राज्य के जिन जिलों में एक हफ्ते पहले तापमान 5-7 डिग्री तक गिरा था, वहां अब यह 11 डिग्री तक चढ़ गया है। लेकिन दिन के समय बादल और ठंडी हवाओं की वजह से ठंड का एहसास बना हुआ है। लोहरदगा, धनबाद, चतरा और बोकारो में अधिकतम तापमान गिरा है, जिससे ठंड और बढ़ गई है।

    तोरपा में रिकॉर्ड बारिश, अन्य जिलों में हल्की बूंदाबांदी। 
    खूंटी के तोरपा में 20.6 मिमी बारिश ने पूरे राज्य में सुर्खियां बटोरीं। पूर्वी सिंहभूम के बहरागोड़ा और मझगांव में भी हल्की बारिश दर्ज की गई। रांची समेत राज्य के बाकी हिस्सों में बादल छाए रहने का अनुमान है।

    ठंड का बदलता रूप।
    झारखंड में इस बार ठंड का मिजाज बदला-बदला सा है। बारिश और बादलों ने कंपकंपाती ठंड से राहत तो दी है, लेकिन दिन में ठंडी हवाएं और धुंध का असर लोगों को सर्दियों का पूरा एहसास करा रहा है।