Blog

  • झारखंड: 1000 से ज्यादा NGOs पर लटक रही मान्यता रद्द होने की तलवार!

    GIRIDIH:झारखंड में निबंधन नियमावली का पालन न करने पर 1000 से अधिक संस्थाओं का पंजीकरण सस्पेंड कर दिया है। इन संस्थाओं को नोटिस जारी कर पूछा गया है—“क्यों न आपकी मान्यता समाप्त कर दी जाए?”

    यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि सरकार को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई संस्थाएं कागजों पर चल रही हैं, वार्षिक रिपोर्ट जमा नहीं कर रहीं, पते बदलने जैसी जानकारियां सरकार से छिपा रही हैं। झारखंड के राजस्व, निबंधन और भूमि सुधार विभाग ने इन आरोपों के आधार पर कड़ा कदम उठाया है।

    नोटिस का जवाब नहीं दिया तो खत्म होगी मान्यता. 
    सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए इन संस्थाओं की गतिविधियों पर रोक लगा दी है। सस्पेंड रजिस्ट्रेशन के दौरान ये संस्थाएं कोई भी चल-अचल संपत्ति ट्रांसफर नहीं कर सकेंगी। उन्हें 31 दिसंबर 2024 तक अंतिम मौका दिया गया है कि वे अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें। ऐसा न करने पर एकतरफा कार्रवाई करते हुए उनकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी।

    नियम तोड़ने के आरोप, दस्तावेजों में गड़बड़ी. 
    सरकार की समीक्षा में यह सामने आया कि कई संस्थाएं नियमों का पालन नहीं कर रही थीं। इनमें से कई संस्थाएं ऐसी हैं, जिन्होंने रजिस्ट्रेशन के बाद से कभी भी वार्षिक रिपोर्ट नहीं सौंपी। कुछ ने नियमों का उल्लंघन करते हुए अनुदान प्राप्त किया। सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के तहत निबंधित इन संस्थाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं मिली हैं।

    सवाल उठते हैं, जवाब नहीं मिलते. 
    क्या ये संस्थाएं वाकई समाज सेवा के लिए थीं या सिर्फ कागजी दांवपेंच के सहारे सरकारी संसाधनों का दोहन कर रही थीं? और अगर सरकार को इतने वर्षों तक इनकी गतिविधियों की जानकारी नहीं थी, तो क्या यह सरकारी तंत्र की विफलता नहीं है?

    संस्थाओं का अस्तित्व और विश्वास का सवाल. 
    अब सवाल सिर्फ 1000 संस्थाओं की मान्यता का नहीं है। सवाल झारखंड में NGO के अस्तित्व और उनके प्रति जनता के विश्वास का है। क्या ये संस्थाएं अपनी पारदर्शिता साबित कर पाएंगी? या यह अध्याय झारखंड में स्वयंसेवी संस्थाओं की नई परिभाषा गढ़ने का आगाज होगा? सरकार की इस कार्रवाई ने झारखंड के NGO क्षेत्र में भूचाल ला दिया है। 31 दिसंबर 2024 की समयसीमा न सिर्फ इन संस्थाओं के भविष्य का फैसला करेगी, बल्कि यह भी तय करेगी कि झारखंड में सामाजिक कार्यों की साख कितनी मजबूत है।

  • शांति वन में मनमोहन सिंह का होगा अंतिम संस्कार

    नई दिल्ली: शनिवार की सुबह शांति वन में जब देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अंतिम विदाई दी जाएगी, तो यह सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि एक युग का अंत होगा। वह युग, जिसने भारत को आर्थिक उदारीकरण के रास्ते पर आगे बढ़ाया। सुबह 8 बजे उनके पार्थिव शरीर को उनके सरकारी आवास से कांग्रेस मुख्यालय लाया जाएगा। यहाँ पार्टी के नेता और उनके चाहने वाले उन्हें अंतिम विदाई देंगे। यह अंतिम यात्रा महज एक रस्म नहीं है। यह वह पल है जब कांग्रेस पार्टी के इतिहास को दोबारा लिखा जा रहा है।

    गांधी परिवार से परे मनमोहन सिंह की स्मृति पर जोर. 
    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर यमुना किनारे एक स्थायी स्मारक के लिए जगह मांगी। यह स्मारक उस शख्स के लिए होगा जिसने भारत की आवाज को वैश्विक मंच पर एक नई पहचान दी।

    प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल की रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से बातचीत, खरगे की चिट्ठी और सोनिया-राहुल गांधी का हर पल मनमोहन सिंह के परिवार के साथ खड़ा रहना—ये सब एक बात को स्पष्ट करते हैं: कांग्रेस इस बार कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती।

    शांति वन: जहां इतिहास खुद को दोहराता है. 
    करना अपने आप में प्रतीकात्मक है। यह वही जगह है, जहां देश के अन्य पूर्व प्रधानमंत्रियों को अंतिम विदाई दी गई। लेकिन सवाल यह है कि क्या इस स्मारक की राजनीति मनमोहन सिंह की यादों के साथ न्याय कर पाएगी?

    एक पत्र, एक स्मृति, और ओबामा का कथन. 
    खरगे के पत्र में एक खास बात थी: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा का वह बयान, जिसमें उन्होंने कहा था, “जब भारत के प्रधानमंत्री बोलते हैं, तो पूरी दुनिया सुनती है।” यह वाक्य न सिर्फ मनमोहन सिंह की गरिमा को दर्शाता है, बल्कि यह भी कि एक साधारण परिवार से आए व्यक्ति ने वैश्विक स्तर पर भारत का कद कैसे बढ़ाया।

    गांधी परिवार की छाया से बाहर निकलने की कोशिश?
    नरसिम्हा राव के समय हुई चूक को लेकर आलोचनाएं कांग्रेस को अब भी घेरती हैं। ऐसे में मनमोहन सिंह के मामले में पार्टी इस बार सतर्क दिख रही है। उनके पार्थिव शरीर को कांग्रेस मुख्यालय लाना और सम्मानपूर्वक अंतिम यात्रा निकालना, इन सबके पीछे एक राजनीतिक संदेश भी है। शनिवार को जब शांति वन में मनमोहन सिंह को अंतिम विदाई दी जाएगी, तब यह सिर्फ एक श्रद्धांजलि नहीं होगी। यह वह पल होगा जब कांग्रेस पार्टी अपनी संवेदनशीलता और राजनीतिक सोच का प्रदर्शन करेगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह स्मारक और यह यात्रा इतिहास में कैसे दर्ज होती है।

  • “मंईयां सम्मान” कार्यक्रम स्थगित,मनमोहन सिंह के निधन पर राजकीय शोक

    रांची: 28 दिसंबर को आयोजित होने वाला मंईयां सम्मान कार्यक्रम फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। इसकी वजह है भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का निधन, जो देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है। इस दुखद समाचार के बाद राज्य सरकार ने तय किया है कि झारखंड में कोई भी राजकीय समारोह आयोजित नहीं किया जाएगा।

    गौरतलब है कि मंईयां सम्मान योजना के तहत लाभुकों को 2500 रुपये की राशि उनके बैंक खातों में भेजी जानी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस योजना के तहत 28 दिसंबर को नामकुम में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पांच महिलाओं के खातों में सामूहिक रूप से राशि ट्रांसफर करने की योजना बनाई थी। लेकिन अब यह कार्यक्रम राजकीय शोक के चलते स्थगित कर दिया गया है।

    राजकीय शोक के नियमों का पालन. 
    डॉ. मनमोहन सिंह के निधन पर भारत सरकार ने 7 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है, जो 26 दिसंबर से 1 जनवरी तक जारी रहेगा। इसी के तहत झारखंड में भी कोई राजकीय कार्यक्रम नहीं होगा। सभी सरकारी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा। राज्य सरकार के संयुक्त सचिव ने इस संदर्भ में एक पत्र जारी कर सभी विभागों को सूचित किया है।

    कार्यक्रम की नई तारीख जल्द तय होगी.
    मंईयां सम्मान कार्यक्रम के तहत लाभुकों को उनके अधिकार मिलना तय है। राज्य सरकार ने आश्वासन दिया है कि शोक की अवधि समाप्त होने के बाद कार्यक्रम की नई तारीख घोषित की जाएगी।

    डॉ. मनमोहन सिंह के निधन ने पूरे देश को शोकाकुल कर दिया है। उनकी सादगी, दूरदर्शिता और योगदान को सदैव याद किया जाएगा। झारखंड सहित पूरे भारत में इस दौरान सभी आधिकारिक गतिविधियां सीमित रहेंगी।

  • मनमोहन सिंह के निधन पर राज्यसभा सांसद डॉ. सरफराज ने किया शोक व्यक्त

    NEW DELHI : पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। देशभर से लोग उनके अद्वितीय योगदान को याद कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। इसी क्रम में, राज्यसभा सांसद डॉ. सरफराज अहमद ने भी गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह भारत में आर्थिक सुधारों के सूत्रधार थे। उनके द्वारा किए गए ऐतिहासिक कार्य जैसे मनरेगा, राइट टू फूड, राइट टू एजुकेशन, आरटीआई और आधार पहचान पत्र जैसे कदम आज भी देश के विकास में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।

    डॉ. अहमद ने याद किया कि अपने राजनीतिक जीवन के दौरान, जब वे एकीकृत बिहार में कांग्रेस के सक्रिय नेता थे, उनकी मुलाकात डॉ. मनमोहन सिंह से पटना में हुई थी। उन्होंने कहा, “डॉ. मनमोहन सिंह से समय-समय पर सीखने का अवसर मिला। वे दूरदर्शी व्यक्तित्व के धनी थे। भले ही वे कम बोलते थे, लेकिन उनके काम ने हमेशा उनकी सोच और दृष्टिकोण को बखूबी व्यक्त किया। उनके निधन से देश को अपूरणीय क्षति हुई है।”

    डॉ. मनमोहन सिंह के द्वारा किए गए कार्यों को याद करते हुए डॉ. अहमद ने कहा कि उनका नेतृत्व और योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। उनका शांत और स्थिर स्वभाव उन्हें एक महान नेता और आदर्श व्यक्तित्व बनाता है।

  • विधायक जयराम महतो और उनके समर्थकों पर मुकदमा

    झारखंड के डुमरी  के विधायक जयराम महतो और उनके समर्थकों पर सीसीएल के क्वार्टर पर कब्जा करने, सरकारी काम में बाधा डालने और क्वार्टर में रखें सामान की चोरी करने के आरोप लगे हुए हैं. बोकारो जिले के चंद्रपुरा थाने में सीसीएल के ढोरी क्षेत्र, फुसरो (बोकारो) में सुरक्षा पदाधिकारी सुरेश कुमार सिंह ने विधायक जयराम महतो और उनके समर्थकों पर केस दर्ज करवाया है. पुलिस ने बताया कि डी /02 सेंट्रल कॉलोनी, ढोरी, मकोली के एक क्वार्टर पर जेएलकेएम पार्टी के विधायक जयराम महतो के समर्थकों ने कब्जा कर लिया था. इतना ही नहीं विधायक के समर्थकों ने कथित तौर पर वहां रह रहे प्रशिक्षु पदाधिकारियों को  जबरन भागया और उनका सामान हटा दिया. इधर जैसे ही मामले की सूचना सुरक्षा पदाधिकारी को मिली तो वह मौके पर पहुंचे. जेएलकेएम पार्टी के 20 से 25 अज्ञात कार्यकर्ता हंगामा कर रहे थे और बार-बार कह रहे थे कि डुमरी के विधायक जयराम महतो के निर्देश पर वे लोग यहां क्वार्टर पर कब्जा करने आए हैं.

    सीसीएल के क्वार्टर के अंदर जबरन प्रवेश कर चुके जेएलकेएम पार्टी के कार्यकर्ताओं को सुरक्षाकर्मी निकल रहे थे. मामला बिगड़ता देख वहां चंद्रपुरा थाना प्रभारी अमन कुमार पुलिस बल के साथ पहुंचे और उपद्रव मचा रहे युवकों को शांत कराने की कोशिश की. हालांकि उपद्रवी लड़के कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थे. इसके बाद प्रखंड कार्यालय बेरमो से प्रशासनिक अमला पहुंचा और उपद्रवियों को बाहर निकालने का निर्देश दिया.

    देर रात डुमरी के जयराम महतो भी मौके पर पहुंचे और प्रशासन को सहयोग करने के बजाय उपद्रवी लड़कों का सहयोग करते हुए पुलिस पदाधिकारियों भिड़ने लगे. सीसीएल ढोरी क्षेत्र के सुरक्षा पदाधिकारी सुरेश कुमार सिंह ने हंगामे के बाद विधायक जयराम महतो और उनके करीब 30-40 समर्थकों के खिलाफ क्वार्टर में जबरन घुसने, वहां रह रहे प्रशिक्षुओं का सामान गायब करने, सरकारी काम में बाधा डालने, उपस्थित मजिस्ट्रेट, पुलिस कर्मी, सीसीएल कर्मी और सीआईएसएफ कर्मी के साथ गाली-गलौज करने सहित कई आरोप लगाते हुए चंद्रपुरा थाना में शिकायत दी है.

  • मनमोहन सिंह: सादगी का महानायक, भारतीय राजनीति की सबसे शांत आवाज़ का मौन होना

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …………

    डॉ. मनमोहन सिंह – एक ऐसा नाम जिसने भारतीय राजनीति को न सिर्फ नई दिशा दी बल्कि अपने व्यक्तित्व से राजनीति की परिभाषा भी बदली। गुरुवार, 26 दिसंबर 2024, देश के लिए एक ऐसा दिन जब उसने अपनी सबसे शांत और विनम्र आवाज़ को खो दिया। एम्स दिल्ली में 92 साल की उम्र में इस पूर्व प्रधानमंत्री का निधन हुआ, और उनके साथ खत्म हुआ एक युग। गुरशरण कौर और अपनी तीन बेटियों के साथ सादगी से भरा उनका जीवन सिर्फ उनकी पारिवारिक सीमाओं तक नहीं था। डॉ. मनमोहन सिंह का हर कदम, हर निर्णय, सादगी और गहराई से परिभाषित था।

    वो सफर अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत से दिल्ली तक।
    26 सितंबर 1932 को अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत  में जन्मे मनमोहन सिंह ने बंटवारे के बाद भारत को अपना घर बनाया। उनकी शिक्षा की कहानी भारत की हर महत्वाकांक्षी आत्मा के लिए प्रेरणा है। पंजाब विश्वविद्यालय से शुरुआत, फिर कैम्ब्रिज और ऑक्सफोर्ड – शिक्षा के हर पड़ाव ने उनके विचारों को और निखारा।

    आर्थिक सुधारों का महानायक। 
    1991 का वो दौर जब भारत आर्थिक संकट से जूझ रहा था। वित्त मंत्री के रूप में डॉ. सिंह ने जो फैसले लिए, उन्होंने भारत को आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाया। उदारीकरण के जरिए उन्होंने देश के लिए वैश्विक अवसरों के दरवाजे खोले।

    प्रधानमंत्री: सत्ता से परे एक दृष्टिकोण। 
    2004 से 2014 तक के दो कार्यकाल में मनमोहन सिंह ने देश को सामाजिक योजनाओं और आर्थिक सुधारों के जरिए मजबूत करने का प्रयास किया। वो शायद पहले ऐसे प्रधानमंत्री थे जो सत्ता में रहते हुए भी “सत्ता” से दूर थे।

    एक आदर्श जिसने राजनीति को मानवीय बनाया। 
    मनमोहन सिंह कभी भी उग्र भाषणों के लिए नहीं जाने गए। लेकिन उनकी चुप्पी अक्सर विरोधियों के शोर से भारी पड़ी। उनका हर निर्णय गहराई और देश की भलाई को प्राथमिकता देता था।

    आज जब पूरा देश शोक में है, तब ये याद रखना जरूरी है कि उनका जीवन सिर्फ एक नेता का नहीं, बल्कि एक आदर्श का था। सादगी, ईमानदारी, और निष्ठा का जो संदेश उन्होंने छोड़ा है, वो हमेशा भारतीय राजनीति को राह दिखाता रहेगा।

  • अहिबरन जयंती की धूम: एकता, शिक्षा और संघर्षशीलता का संदेश

    गिरिडीह का बरनवाल सेवा सदन गुरुवार को एकता, उल्लास और उमंग से सराबोर दिखा। मौका था अहिबरन जयंती सह परिवार मिलन समारोह का, जिसे बरनवाल सेवा समिति ने पूरे जोर-शोर से आयोजित किया। कार्यक्रम की शुरुआत महाराजा अहिबरन की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन से हुई। मंच पर झारखंड प्रदेश अध्यक्ष लखन लाल बरनवाल, महामंत्री इंद्रजीत लाल, लौह व्यवसायी जयप्रकाश लाल और डॉक्टर विकास लाल समेत अन्य विशिष्ट जन मौजूद थे।

    शोभायात्रा में गूंजा जयकारा. 
    जयंती समारोह से पहले निकली शोभायात्रा ने गिरिडीह की सड़कों को बरनवाल समाज की एकता से भर दिया। महिला, पुरुष, बच्चे—हर उम्र के लोग हाथों में जयकारे के साथ चलते दिखे। यह यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए बंगाल सेवा सदन में संपन्न हुई।

    प्रतियोगिताओं में दिखा बच्चों का उत्साह. 
    समारोह के दौरान बरनवाल धर्मशाला में बच्चों के लिए कई प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। चित्रांकन प्रतियोगिता ने खासा ध्यान खींचा। विजेताओं को प्रमाण पत्र और पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। मंच संचालन समिति के सचिव राजेंद्र लाल बरनवाल ने कुशलता से किया।

    नेताओं के संदेश: शिक्षित और संगठित बनें. 

    • लखन लाल बरनवाल ने समाज को शिक्षित, संगठित और संघर्षशील बनने का संदेश दिया। उन्होंने ऐलान किया कि समाज के कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति और कन्या विवाह में सहयोग हेतु एक विशेष समिति का गठन किया जाएगा।
    • इंद्रजीत लाल ने कुरीतियों को छोड़ने और अच्छी नीतियों को अपनाने की बात कही।
    • जयप्रकाश लाल ने कहा, “संगठन में ही शक्ति है। यदि हम संगठित रहेंगे, तो समाज का उत्थान निश्चित है।”

    संगठन की शक्ति का प्रदर्शन. 
    समारोह में शामिल बड़ी संख्या में महिला-पुरुषों और बच्चों ने यह दिखा दिया कि बरनवाल समाज में एकता और उत्साह की कोई कमी नहीं है। यह आयोजन सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि समाज को मजबूत बनाने की दिशा में एक कदम था।

    सफल आयोजन के पीछे ये चेहरे.
    कार्यक्रम को सफल बनाने में सुबोध कुमार बरनवाल, संजय कुमार बरनवाल, राकेश रंजन, विनोद कुमार बरनवाल, प्रदीप बरनवाल, अभिलाष आनंद, आयुष राज, शंकर बरनवाल, ललिता बरनवाल, सरिता बरनवाल और सीमा बरनवाल का योगदान सराहनीय रहा।

    अगला कदम: समाज के लिए नई योजनाएं. 
    समारोह ने यह स्पष्ट कर दिया कि बरनवाल समाज संगठित होकर अपने भविष्य को संवारने के लिए प्रतिबद्ध है। जयंती की यह धूम समाज को एक नई दिशा और ऊर्जा देने में कामयाब रही।

  • रघुवर दास की घर वापसी:बीजेपी की राजनीति में फिर इंट्री !

    RANCHI : ओडिशा के राज्यपाल पद से इस्तीफा देने के बाद जब झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास गुरुवार को रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पहुंचे, तो नजारा देखने लायक था। बीजेपी कार्यकर्ताओं का हुजूम उनके स्वागत में उमड़ पड़ा। जैसे ही दास एयरपोर्ट से बाहर आए, फूल-मालाओं से उन्हें लाद दिया गया। जमशेदपुर से भी कई समर्थक इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने पहुंचे थे।

    अव्यवस्था के बीच नेता-कार्यकर्ताओं का मिलन। 
    एयरपोर्ट के बाहर भीड़ इतनी अधिक थी कि कुछ देर के लिए अव्यवस्था का माहौल बन गया। लेकिन रघुवर दास ने सब्र से 15 मिनट तक कार्यकर्ताओं और नेताओं से मुलाकात की। चेहरे पर मुस्कान और दिल में आभार लिए, दास वहां से अपने सरकारी आवास के लिए रवाना हुए।

    गार्ड ऑफ ऑनर और भव्य स्वागत। 
    एयरपोर्ट पर गार्ड ऑफ ऑनर से उनका सम्मान किया गया। यह स्वागत उनके लिए किसी विजय यात्रा से कम नहीं था। शुक्रवार को उनके जमशेदपुर रवाना होने की खबर है, जहां जोर-शोर से उनके स्वागत की तैयारियां चल रही हैं।

    बीजेपी में वापसी के संकेत। 
    सूत्रों की मानें तो शुक्रवार को रघुवर दास फिर से बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं। संवैधानिक बाध्यताओं के चलते राज्यपाल बनने से पहले उन्हें पार्टी से इस्तीफा देना पड़ा था। अब उनके लिए बीजेपी के दरवाजे फिर खुल रहे हैं। हालांकि, आधिकारिक ऐलान का इंतजार है।

    राजभवन का वादा निभाया। 
    ओडिशा से विदाई के पहले रघुवर दास ने एक और दिल जीतने वाला कदम उठाया। झारखंड के 1000 आदिवासी बच्चों को उन्होंने भुवनेश्वर स्थित राजभवन की सैर कराई। यह वही वादा था, जो उन्होंने बच्चों से किया था।

    दास ने इन बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा, “आगे बढ़ने के लिए बड़े सपने देखना जरूरी है। अपना लक्ष्य तय करें और उसे पाने के लिए जुट जाएं। समर्पित प्रयास ही सफलता की कुंजी है।”

    क्या कहते हैं संकेत?
    रघुवर दास कीवापसी  झारखंड में फिर से राजनीतिक सक्रियता की ओर इशारा करता है, बल्कि उनकी नेतृत्व क्षमता और कार्यकर्ताओं के बीच लोकप्रियता को भी साबित करता है। बीजेपी में उनकी वापसी एक नया राजनीतिक अध्याय खोल सकती है।

  • हेमंत सोरेन का न्यू ईयर गिफ्ट क्या है ? …..और किसके लिए !

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …………

    जेल में बंद कैदियों के लिए खुशखबरी ! झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन न्यू ईयर पर कैदियों के लिए बड़ा तोहफा देने की तैयारी में हैं। अब बंदियों को जेल की बोरिंग थाली से राहत मिलेगी, क्योंकि खाने में मांसाहारी और शाकाहारी दोनों के लिए खास बदलाव होने जा रहा है।

    कैसा होगा नया मेन्यू?
    अब तक जेल में कैदियों को हफ्ते में सिर्फ एक दिन मांसाहार का स्वाद चखने को मिलता था। लेकिन नए प्रस्ताव के मुताबिक, मांसाहारी कैदियों को हफ्ते में चार दिन स्पेशल ट्रीट मिलेगी। मांसाहारी बंदियों को 3 दिन 200 ग्राम चिकन, 1 दिन 2 अंडे शाकाहारी बंदियों को 3 दिन 100 ग्राम सोयाबीन बड़ी, 1 दिन पनीर की सब्जी और खीर तो पहले से मिल ही रही थी।

    सीएम हेमंत सोरेन की जेल की यादें बनीं प्रेरणा।
    यह कदम मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के जेल के अनुभवों से प्रेरित है। हेमंत सोरेन ने जेल में रहने के दौरान जेल की खान-पान व्यवस्था को करीब से देखा। कुछ बंदियों से भी फीडबैक लिया। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने अधिकारियों से जेल में खानपान में सुधार को लेकर ठोस योजना बनाने संबंधित दिशा-निर्देश दिया था।

    मटन की विदाई, चिकन का स्वागत!
    अब कैदियों की थाली से मटन गायब होगा। वजह ? मटन की क्वालिटी पर कैदियों की शिकायतें। उसकी जगह अब चिकन और अंडा से भरपूर प्रोटीन का इंतजाम किया गया है।

    प्रोटीन बढ़ेगा, सेहत सुधरेगी।
    इस बदलाव का उद्देश्य सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि सेहत भी है। नए साल में कैदियों की थाली न सिर्फ स्वादिष्ट होगी, बल्कि हेल्दी भी। यह कदम जेल प्रशासन के 2012 के डायट चार्ट को अपग्रेड करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

    कैसे मिलेगा हरी झंडी ?
    कारा महानिरीक्षक ने इस प्रस्ताव को विभागीय मंत्री हेमंत सोरेन के पास भेजा है। उनके अनुमोदन के बाद यह प्रस्ताव कैबिनेट में जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने पर इसे लागू किया जाएगा।

    तो क्या कहें?
    कैदियों के लिए यह बदलाव सिर्फ खाने की थाली तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके जीवन में एक सकारात्मक संदेश भी है। अब जेल में बंद बंदी सिर्फ सजा नहीं काटेंगे, बल्कि सेहतमंद जिंदगी की ओर भी कदम बढ़ाएंगे।

  • वीर बाल दिवस : बलिदान से प्रेरणा लेने का संदेश

    GIRIDIH : भारतीय जनता पार्टी, जिला गिरिडीह द्वारा नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष दिनेश प्रसाद यादव के आवासीय कार्यालय, धरियाडीह में वीर बाल दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।

    कार्यक्रम के मुख्य अतिथि धनबाद विधायक राज सिन्हा ने वीर बाल दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, “यह दिन उन वीर बालकों के बलिदान को समर्पित है जिन्होंने कभी अपने दुश्मनों के सामने झुकना स्वीकार नहीं किया। उनका जीवन हमें सिखाता है कि सत्य और धर्म के लिए अंत तक संघर्ष करना ही सच्ची वीरता है।”

    कार्यक्रम में भागीदारी:
    इस अवसर पर भाजपा के प्रमुख कार्यकर्ताओं सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से दिनेश यादव, महादेव दुबे, विनय सिंह, कामेश्वर पासवान, संगीता सेठ, प्रकाश दास, और सिंकू सिन्हा की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष बनाया।

    संदेश और प्रेरणा:
    कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल वीर बालकों के बलिदान को याद करना था, बल्कि वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को उनके साहस और आत्मबलिदान से प्रेरणा देने का भी था।