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  • सबूत के अभाव में पूर्व विधायक संजीव सिंह सहित सभी आरोपी बरी

    नीरज सिंह हत्याकांड मे आठ साल बाद आया फैसला.

    परवेज़ आलम.द न्यूज़ पोस्ट4यू.

    धनबाद : बहुचर्चित नीरज सिंह हत्याकांड  में बुधवार को आखिरकार अदालत का फैसला आ गया। धनबाद की एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने पूर्व भाजपा विधायक संजीव सिंह सहित सभी 8 आरोपियों को सबूत के अभाव में बरी कर दिया।

    विशेष न्यायाधीश दुर्गेश चंद्र अवस्थी की अदालत ने यह निर्णय सुनाया। इस दौरान कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और गहमागहमी का माहौल रहा।

    स्ट्रेचर पर कोर्ट पहुंचे संजीव सिंह.

    फैसले के दिन संजीव सिंह को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण स्ट्रेचर पर कोर्ट लाया गया। पुलिस एंबुलेंस से उन्हें सिंह मेंशन से अदालत तक लेकर पहुंची। सुनवाई शुरू होने से पहले वकीलों को कोर्ट में प्रवेश से रोक दिया गया, जिसके चलते अधिवक्ताओं ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी भी की। हालांकि, थोड़ी देर बाद स्थिति सामान्य हुई और अदालत ने केस की सुनवाई शुरू की।

    21 मार्च 2017 की वारदात जिसने झकझोर दिया था झारखंड.

    धनबाद के सरायढेला थाना क्षेत्र स्थित स्टील गेट पर 21 मार्च 2017 की शाम लगभग 7 बजे अंधाधुंध फायरिंग कर कांग्रेस नेता और पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह, उनके अंगरक्षक मुन्ना तिवारी, पीए अशोक यादव और ड्राइवर घोलटू महतो की हत्या कर दी गई थी। यह घटना राज्य का सबसे बड़ा शूटआउट मानी जाती है।

    हत्या के बाद संजीव सिंह समेत 12 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। बाद में एक आरोपी अमन सिंह की 2023 में जेल के अंदर हत्या कर दी गई, जबकि रिंकू सिंह से जुड़े मामले का ट्रायल अलग से चल रहा है।

    आठ साल लंबी कानूनी जंग.

    इस मामले में सुनवाई 6 अलग-अलग अदालतों में हुई।

    • 408 तारीखों पर पेशी हुई।
    • 3 जनवरी 2019 को 22 महीने बाद आरोप तय हुए।
    • अभियोजन पक्ष ने 74 गवाहों में से 37 गवाह और कई साक्ष्य पेश किए।
    • बचाव पक्ष ने 5 गवाहों की गवाही कराई।
    • दोनों पक्षों की बहस 49 तारीखों तक चली।
      आखिरकार, आठ साल से ज्यादा समय तक चली इस कानूनी जंग का परिणाम सभी आरोपियों की रिहाई के रूप में सामने आया।

    फैसले से पहले प्रशासन अलर्ट.

    जिला प्रशासन को पहले से आशंका थी कि फैसले के दिन दोनों गुटों के समर्थक बड़ी संख्या में कोर्ट परिसर पहुंच सकते हैं, जिससे टकराव की स्थिति बन सकती है। इस कारण धारा 144 लागू की गई।

    • जैप (Jharkhand Armed Police) की एक कंपनी को सुरक्षा में लगाया गया।
    • कोर्ट परिसर और उसके आसपास भारी पुलिस बल तैनात रहा।
    • संवेदनशील इलाकों में नियमित गश्त भी तेज की गई।

    राजनीतिक पृष्ठभूमि और असर.

    यह मामला राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम रहा है।

    • बरी हुए संजीव सिंह की पत्नी रागिनी सिंह वर्तमान में झरिया से भाजपा विधायक हैं।
    • वहीं, नीरज सिंह की पत्नी पूर्णिमा नीरज सिंह कांग्रेस से झरिया की विधायक रह चुकी हैं।
      इस वजह से इस केस पर पूरे झारखंड ही नहीं, बल्कि बिहार और उत्तर प्रदेश की भी नज़रें थीं।
  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के झारखंड दौरे को लेकर तैयारियां तेज

    मुख्य सचिव  ने दिए सुरक्षा और प्रोटोकॉल पुख्ता करने के निर्देश.

    For The News Post4u.

    रांची : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू  के झारखंड के  दो दिवसीय दौरे को लेकर प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। मुख्य सचिव अलका तिवारी ने मंगलवार को देवघर, रांची और धनबाद के उपायुक्तों और वरिष्ठ पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर सुरक्षा से लेकर कार्यक्रम संचालन तक हर पहलू पर विस्तार से चर्चा की और संबंधित विभागों को जिम्मेदारी सौंपी। 31 जुलाई से 1 अगस्त तक राष्ट्रपति झारखंड मे रहेंगी ।

    ADVT.

    मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि राष्ट्रपति के झारखंड प्रवास के दौरान हर छोटी-बड़ी व्यवस्था को समय रहते दुरुस्त कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि देवघर में सावन माह के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए कांवरिया पथ को बिना प्रभावित किए राष्ट्रपति के एयरपोर्ट से एम्स तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित कर लिया गया है।

    गौरतलब है कि राष्ट्रपति मुर्मू का पूर्व निर्धारित झारखंड दौरा 10-11 जून को अपरिहार्य कारणों से स्थगित हो गया था। उस समय भी तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने राष्ट्रपति के झारखंड दौरे को “यादगार और गरिमामय” बनाने का निर्देश दिया था, जिसे इस बार भी दोहराया गया।

    कार्यक्रमों का ब्यौरा:

    • राष्ट्रपति देवघर में एम्स के पहले दीक्षांत समारोह में भाग लेंगी।
    • इसके बाद वे धनबाद स्थित IIT (ISM) के दीक्षांत समारोह में भी शिरकत करेंगी।
    • रांची में भी उनके कुछ निर्धारित कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।

    मुख्य सचिव ने राष्ट्रपति के आगमन से लेकर प्रस्थान तक की हर व्यवस्था के लिए स्पष्ट जवाबदेही तय की।

    • वाणिज्य कर विभाग के सचिव अमिताभ कौशल और आईजी अखिलेश कुमार झा को मुख्य नोडल अधिकारी बनाया गया है।
    • सूचना एवं जनसंपर्क विभाग को पब्लिक एड्रेस सिस्टम और मीडिया व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गई है।

    प्रमुख तैयारियों पर हुई चर्चा:

    • राष्ट्रपति के कार्यक्रम स्थलों पर मंच व्यवस्था, राष्ट्रीय गान, रेड कार्पेट और बुके, कारकेड और आउट राइडर्स,
    • फोटोग्राफरों के लिए खुले वाहन, बैगेज वैन, छाता, ध्वनि विस्तारक यंत्र,
    • प्रमुख अतिथियों की सूची, मंच से बोलने वालों की सूची,
    • देवघर एयरपोर्ट से एम्स तक की सुरक्षा व्यवस्था,
    • चिकित्सा सुविधा, पेयजल, शौचालय, अग्निशमन व्यवस्था,
    • राष्ट्रपति के साथ आनेवाले अतिथियों के ठहराव और भोजन जैसी व्यवस्थाओं पर विस्तार से समीक्षा की गई।

    देवघर, रांची और धनबाद के उपायुक्तों ने भी अपने-अपने जिलों में राष्ट्रपति के संपूर्ण प्रवास के लिए ब्लूप्रिंट प्रस्तुत किया। उन्होंने यह आश्वासन दिया कि राष्ट्रपति के प्रत्येक कार्यक्रम प्रोटोकॉल के अनुरूप और शिष्टाचार पूर्ण वातावरण में संपन्न होंगे।

    मुख्य सचिव ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने का निर्देश दिया ताकि राष्ट्रपति का यह दौरा ना केवल सुरक्षित और सुव्यवस्थित हो, बल्कि राज्य की प्रतिष्ठा को भी ऊंचाई दे सके।

  • रांची, जमशेदपुर और धनबाद में मेट्रो रेल परियोजना के लिए केंद्र को भेजा गया प्रस्ताव

    –हेमंत सरकार की बड़ी पहल.

    By: परवेज़ आलम.

    For The News Post4u.

    रांची, 19 जुलाई 2025:
    झारखंड सरकार ने राज्य के तीन प्रमुख शहरों – रांची, जमशेदपुर और धनबाद – में मेट्रो रेल परियोजना शुरू करने की दिशा में अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा दिया है, जिससे झारखंड को आधुनिक और टिकाऊ शहरी परिवहन व्यवस्था मिल सके।

    पूर्वी क्षेत्रीय परिषद में रखा गया था एजेंडा.

    10 जुलाई को रांची में आयोजित 27वीं पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में इस मेट्रो रेल परियोजना का औपचारिक प्रस्ताव रखा। इसके बाद राज्य के  नगर विकास विभाग ने प्रस्ताव को केंद्रीय शहरी विकास एवं आवास मंत्री मनोहर लाल खट्टर और मंत्रालय के सचिव को भेज दिया है।

    तीन शहरों में मेट्रो से होगी शुरुआत.

    फिलहाल परियोजना का दायरा रांची, जमशेदपुर और धनबाद तक सीमित है, लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की दीर्घकालिक योजना है कि झारखंड के सभी पांच प्रमंडलीय शहरों तक मेट्रो सेवा का विस्तार किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा है कि , “यह मेट्रो रेल परियोजना झारखंड की नई विकास गाथा की नींव रखेगी और राज्य को आधुनिक परिवहन व्यवस्था से जोड़ेगी।”

     पूर्ववर्ती सरकारों की आलोचना.

    JMM  प्रवक्ता  ने  पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि “झारखंड में पहले कभी ऐसी विकास परियोजनाओं को लेकर केंद्र के पास गंभीरता से प्रस्ताव नहीं भेजे जाते थे। देश के दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों की तरह झारखंड को भी अब आधारभूत संरचना में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।”

    हेमंत सरकार ने पहली बार इस दिशा में ठोस पहल करते हुए मेट्रो जैसी परियोजना की विस्तृत योजना बनाई और केंद्र को सौंपा है।

    क्या है प्रस्ताव में खास?

    नगर विकास विभाग द्वारा भेजे गए प्रस्ताव में केंद्र से तीन प्रमुख मांगें की गई हैं:

    1. मेट्रो परियोजना की फिजिबिलिटी स्टडी (संभवता अध्ययन)
    2. सर्वेक्षण और तकनीकी मूल्यांकन
    3. विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के लिए सहयोग

    इसका उद्देश्य है कि केंद्र सरकार शीघ्र अनुमोदन दे ताकि इन शहरों में मेट्रो परियोजना की औपचारिक शुरुआत की जा सके।

    झारखंड के लिए मेट्रो क्यों है जरूरी?

    रांची, जमशेदपुर और धनबाद जैसे शहरों में बढ़ती जनसंख्या और ट्रैफिक के दबाव को देखते हुए मेट्रो सेवा न केवल परिवहन व्यवस्था को सुगम बनाएगी, बल्कि यह शहरी क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर, आर्थिक गतिविधियों में तेजी और पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगी।

    हेमंत सरकार का यह कदम झारखंड को 21वीं सदी की बुनियादी संरचना से जोड़ने की दिशा में एक दूरदर्शी प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

  • दुबई में फंसे झारखंड के 15 मजदूरों ने भेजा भावुक संदेश, भारत वापसी की लगाई गुहार

    भोजन के लाले, बीमारियां बढ़ीं, ठेकेदार ने झाड़ा पल्ला, अब सरकार ही आखिरी उम्मीद

    परवेज़ आलम. By The News Post4u.

    झारखंड के गिरिडीह, धनबाद और हजारीबाग जिलों से दुबई में काम की तलाश में गए 15 मजदूर इन दिनों बेहद मुश्किल हालात में जी रहे हैं। दुबई की “मसाई कांट्रैक्टिंग एलएलसी” नामक कंपनी में काम करने गए इन मजदूरों ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर केंद्र और राज्य सरकार से मदद की भावुक अपील की है। मजदूरों का कहना है कि बीते तीन महीनों से उन्हें वेतन नहीं मिला है, जिस कारण भुखमरी की नौबत आ गई है।

    वीडियो में मजदूरों ने रोते हुए बताया कि अब उनके पास दो वक्त की रोटी तक का इंतजाम नहीं है। कुछ मजदूर बीमार भी हैं लेकिन उनके पास इलाज के लिए पैसे नहीं हैं। उन्होंने बताया कि वहां उन्हें न खाना सही मिल रहा है, न रहने की उचित व्यवस्था है। जिन उम्मीदों के साथ वे विदेश गए थे, अब वही उम्मीदें दम तोड़ रही हैं।

    ठेकेदार ने भी छोड़ा साथ.
    मजदूरों ने बताया कि वे एक ठेकेदार के भरोसे दुबई पहुंचे थे। शुरुआत में ठेकेदार ने उन्हें अच्छे वेतन और सुविधाओं का आश्वासन दिया था, लेकिन अब ठेकेदार ने भी उनसे मुंह मोड़ लिया है। कंपनी ने पिछले तीन महीने से सैलरी नहीं दी और काम के बदले बस इंतजार थमा दिया है।

    इन मजदूरों की सूची में शामिल हैं:

    • हजारीबाग जिले से: चुरामन महतो, चंद्रिका महतो, कैलाश महतो, विष्णु महतो, जगन्नाथ सिंह, लाखन सिंह, सुखदेव सिंह, अर्जुन महतो, त्रिलोकी महतो, बालेश्वर महतो
    • गिरिडीह जिले से: बैजनाथ महतो, महेंद्र महतो, सीताराम महतो, मूरत महतो
    • धनबाद जिले से: संजय कुमार महतो

    भूख से मौत की आशंका, सरकार से सीधी अपील.

    वीडियो में मजदूरों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधा अनुरोध करते हुए कहा, “अब बस एक ही आस बची है—कृपया हमें जल्द से जल्द अपने देश वापस लाने का इंतजाम करें। यहां हर दिन हमारी हालत बद से बदतर होती जा रही है। अगर अब भी देरी हुई, तो कुछ मजदूर भूख से दम तोड़ देंगे।”

    नाइजर में गिरिडीह के 5 मजदूर पहले से अगवा.
    इस बीच, गिरिडीह जिले के बगोदर इलाके से अफ्रीकी देश नाइजर में पहले से ही 5 मजदूर अगवा हैं और अब दुबई में यह नया संकट सामने आया है। ऐसे में राज्य में चिंता और आक्रोश दोनों बढ़ रहे हैं।

    परिवारों की बढ़ती चिंता, प्रशासन अब तक मौन.
    इन मजदूरों के परिजन झारखंड में बेहद चिंतित हैं। रोजाना कोई न कोई रिश्तेदार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है, लेकिन अभी तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान या पहल सामने नहीं आई है। यह चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।

    अब देखना यह होगा कि सरकार इन मजलूम मजदूरों की पुकार को कब तक अनसुना करती है और क्या कोई ठोस कदम जल्द उठाया जाएगा या नहीं। मजदूरों की जिंदगी अब सरकार की संवेदनशीलता पर टिकी है।

     

  • बोकारो: अवैध हथियार फैक्ट्री का भंडाफोड़

     बंगाल-बिहार के नेटवर्क से जुड़ी थी सप्लाई चेन, दो गिरफ्तार, मुख्य आरोपी फरार

    Key points:

    🔗 बोकारो में पकड़ी गई गन फैक्ट्री, बांग्लादेश तक होती थी हथियारों की सप्लाई.
    🔗 धनबाद में भी पकड़े गए थे अवैध हथियार, बंगाल और बिहार कनेक्शन उजागर.

     By The News Post4U | परवेज़ आलम | 20 जून 2025

    झारखंड के बोकारो जिले में सुरक्षा एजेंसियों को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। कोलकाता एसटीएफ और रांची एटीएस की संयुक्त कार्रवाई में बेरमो अनुमंडल क्षेत्र के जरीडीह बाजार स्थित एक पुराने व्यवसायिक परिसर में चल रही अवैध गन फैक्ट्री का पर्दाफाश किया गया है। इस छापेमारी में हथियार निर्माण से जुड़ा बड़ा नेटवर्क सामने आया है, जिसकी डोरें बिहार से लेकर बांग्लादेश तक फैली हुई थीं।

    मैरेज हॉल की आड़ में चल रहा था हथियारों का कारखाना.

    यह अवैध फैक्ट्री जरीडीह पश्चिमी पंचायत अंतर्गत कलाली रोड पर स्थित ‘कावेरी मैरेज पैलेस’ और उसके ठीक सामने स्थित एक गोदाम में संचालित की जा रही थी। छापेमारी के दौरान वहां से बड़ी संख्या में अर्धनिर्मित हथियार, उनके पुर्जे, हथियार निर्माण में उपयोग की जाने वाली लेथ मशीन, कच्चा माल और करीब 50 कार्टून अवैध शराब जब्त की गई है। इस पूरी कार्रवाई में यह भी सामने आया है कि उक्त स्थल पर लंबे समय से हथियार निर्माण का काम चल रहा था और इसे कबाड़ व्यवसाय की आड़ में छुपाया गया था।

    बिहार से लाए गए थे कुशल कारीगर.

    फैक्ट्री में काम कर रहे दो हथियार बनाने वाले कारीगरों को गिरफ्तार किया गया है, जिनकी पहचान बिहार के मुंगेर और खगड़िया जिलों के रहने वाले के रूप में हुई है। दोनों ही इस अवैध धंधे में प्रशिक्षित और तकनीकी दक्षता रखते हैं। वहीं इस पूरे ऑपरेशन का मास्टरमाइंड और मैरेज हॉल का संचालक सूरज साव मौके से फरार हो गया है। उसकी गिरफ्तारी के लिए देर रात तक छापेमारी जारी रही।

    इंटरस्टेट और इंटरनेशनल नेटवर्क की पुष्टि.

    सूत्रों के अनुसार यह गन फैक्ट्री सिर्फ स्थानीय स्तर पर ही नहीं बल्कि अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हथियारों की आपूर्ति में शामिल थी। बंगाल में हाल ही में जब्त किए गए अवैध हथियारों के बाद एसटीएफ ने इस नेटवर्क को ट्रैक करते हुए बोकारो के इस ठिकाने तक पहुंच बनाई। बताया जा रहा है कि इस नेटवर्क के जरिए तैयार हथियारों की सप्लाई बांग्लादेश जैसे देशों तक भी की जा रही थी।

    लंबे समय से चल रही थी खुफिया निगरानी.

    कोलकाता एसटीएफ और रांची एटीएस की टीमें बीते दो-तीन दिनों से गुप्त रूप से इस क्षेत्र में जमी हुई थीं और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी रख रही थीं। जैसे ही ठोस जानकारी प्राप्त हुई, दोनों टीमों ने स्थानीय पुलिस—बेरमो थाना और गांधीनगर थाना के सहयोग से एक सुनियोजित तरीके से छापा मारा। चारों ओर से इलाके को घेर कर मैरेज हॉल और गोदाम में एक साथ दबिश दी गई।

    पहले भी महुदा में हुई थी बरामदगी.

    गौरतलब है कि इससे पहले भी 15 दिन पूर्व इसी एसटीएफ टीम ने धनबाद के महुदा थाना क्षेत्र में भारी मात्रा में अवैध हथियार बरामद किए थे। उस कार्रवाई से मिले सुरागों को जोड़ते हुए अब यह बोकारो ऑपरेशन अंजाम दिया गया, जिससे इस बड़े नेटवर्क की परतें खुलने लगी हैं।

    सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने में जुट गई हैं। गिरफ्तार कारीगरों से पूछताछ की जा रही है और फरार मुख्य आरोपी सूरज साव की गिरफ्तारी के लिए कई जगहों पर दबिश दी जा रही है। इस मामले में और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

     

     

  • धनबाद में अवैध हथियार फैक्ट्री का भंडाफोड़, ATS की कार्रवाई में पांच गिरफ्तार

    By The News Post4u.
    धनबाद/कोलकाता : झारखंड के धनबाद जिले के महुदा थाना क्षेत्र अंतर्गत सिंगड़ा बस्ती में बुधवार देर रात अवैध हथियारों के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। पश्चिम बंगाल की एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) और झारखंड एटीएस की संयुक्त टीम ने एक मकान में संचालित हो रही अवैध मिनी गन फैक्ट्री पर छापेमारी कर बड़ी मात्रा में हथियार और हथियार निर्माण के उपकरण जब्त किए हैं। इस कार्रवाई में फैक्ट्री का संचालन कर रहे मास्टरमाइंड मुर्शिद अंसारी समेत कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार लोगों में चार आरोपी बिहार के मुंगेर जिले से हैं, जो अवैध हथियार निर्माण के लिए पहले से बदनाम है।
    ATS को अर्श मोहम्मद से मिली अहम जानकारी.
    सूत्रों के मुताबिक, यह छापेमारी पश्चिम बंगाल में पहले से चल रही एक जांच के आधार पर की गई। कुछ दिन पहले पश्चिम बंगाल एटीएस ने अर्श मोहम्मद नामक एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था, जो अवैध हथियारों के कच्चे माल की सप्लाई से जुड़ा हुआ था। अर्श से पूछताछ में यह खुलासा हुआ कि धनबाद के महुदा क्षेत्र में एक अवैध गन फैक्ट्री चलाई जा रही है, जिसके बाद बंगाल एटीएस ने झारखंड एटीएस से समन्वय कर संयुक्त कार्रवाई की।
    हथियार निर्माण करते रंगे हाथ पकड़े गए कारीगर.
    बुधवार रात की छापेमारी के समय, फैक्ट्री में मौजूद चारों कारीगर हथियार निर्माण में व्यस्त थे। कार्रवाई इतनी त्वरित और योजनाबद्ध थी कि आरोपियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। दिलचस्प बात यह रही कि जब एटीएस टीम ने इनसे पूछताछ के दौरान हथियार बनाने की प्रक्रिया समझनी चाही, तो कारीगरों ने मौके पर ही कुछ मिनटों में चार पिस्तौल तैयार कर टीम को दिखा दिए। यह देखकर एटीएस के अधिकारी भी हैरान रह गए।
    तीन हजार से अधिक हथियार जब्त होने की आशंका.
    एटीएस और पुलिस सूत्रों के अनुसार, मौके से भारी मात्रा में निर्मित और अर्द्धनिर्मित हथियार बरामद हुए हैं। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार इनकी संख्या लगभग तीन हजार हो सकती है, हालांकि पुलिस ने इस संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसके अलावा मौके से बैरल, लेथ मशीन, ड्रिल मशीन, ग्राइंडर, ग्रुप कटर, हेक्सा ब्लेड, गेज जैसे औजार तथा लोहा, तांबा, पीतल आदि धातुएं भी बरामद की गई हैं।
    महिला हिरासत में, अंतरराज्यीय तस्करी की जांच शुरू.
    इस मामले में मुर्शिद अंसारी की पत्नी हिना परवीन को भी हिरासत में लिया गया है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि इस गन फैक्ट्री में बने हथियार किन-किन राज्यों में सप्लाई किए गए। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि पश्चिम बंगाल में हाल ही में हुई एक आपराधिक घटना में महुदा में बने हथियारों का इस्तेमाल हुआ था, जिससे इस नेटवर्क का सुराग मिला।
    फैक्ट्री चलाने वाला गिरोह तकनीकी रूप से दक्ष.
    गिरफ्तार कारीगर बिहार के मुंगेर जिले से हैं, जो देश में अवैध हथियार निर्माण का कुख्यात केंद्र माना जाता है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ये सभी व्यक्ति तकनीकी रूप से अत्यंत दक्ष हैं और सुनियोजित तरीके से अवैध हथियार तैयार करते थे। यह गिरोह लंबे समय से अंतरराज्यीय स्तर पर हथियारों की आपूर्ति कर रहा था।
    मौके पर भारी पुलिस बल तैनात.
    छापेमारी के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। बाघमारा के डीएसपी पुरुषोत्तम कुमार सिंह, स्थानीय थाना पुलिस के अधिकारी, एटीएस के इंस्पेक्टर मंगल हेम्ब्रम, समीर भगत समेत सैकड़ों जवान मौजूद थे।
    पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी एटीएस.
    फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से गहन पूछताछ जारी है। पुलिस इस पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड, हथियारों के खरीदारों और सप्लाई चैन की विस्तृत जानकारी जुटाने में लगी है। एटीएस सूत्रों का मानना है कि यह महज एक केंद्र नहीं, बल्कि एक बड़े अंतरराज्यीय हथियार तस्करी नेटवर्क का हिस्सा है।

  • झारखंड में आतंकी नेटवर्क का खुलासा – रांची से लेकर धनबाद तक फैला था जाल !

    परवेज़ आलम.  

    धनबाद/रांची।  झारखंड आतंकवाद निरोधक दस्ता [एटीएस] ने राज्य में आतंक के खिलाफ बड़ी कामयाबी हासिल की है। वासेपुर से गिरफ्तार की गई महिला संदिग्ध शबनम परवीन न केवल अलकायदा, आईएसआईएस और हिज्ब-उत-तहरीर जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों से जुड़ी रही, बल्कि इन संगठनों के झारखंड मॉड्यूल को सक्रिय रूप से संचालित करने में भी अहम भूमिका निभा रही थी।

    जांच में यह साफ हुआ है कि शबनम युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा के जरिए बहला-फुसलाकर आतंकी संगठनों में भर्ती करने का काम कर रही थी। खासकर 18 से 25 वर्ष की आयु के मुस्लिम युवाओं को वह धर्म के नाम पर गुमराह करती थी।

    चार आधार कार्ड, चार अलग उम्रें – असली पहचान पर सस्पेंस.

    एटीएस की छापेमारी के दौरान शबनम के पास से चार अलग-अलग आधार कार्ड बरामद हुए हैं, जिनमें उसकी उम्र अलग-अलग — 20, 25, 28 और 32 वर्ष दर्ज है। इससे स्पष्ट है कि वह पहचान छिपाने और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के नेटवर्क से भी जुड़ी हुई थी।

    शबनम धनबाद के गोविंदपुर की रहने वाली बताई जा रही है, लेकिन उसके मूल घर के बारे में पुलिस को कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिली है। उसने आयान जावेद नामक युवक से प्रेम विवाह किया था, जो खुद भी एक संदिग्ध आतंकी है। लेकिन शादी के बाद वह जावेद के साथ अमन सोसायटी के घर में न रहकर शमशेर नगर में किराए के मकान में रह रही थी। यहीं से वह साइबर कैफे के माध्यम से युवाओं को प्रभावित करने का कार्य करती थी।

    झारखंड में आतंकी नेटवर्क का खुलासा – रांची से लेकर धनबाद तक फैला था जाल

    शबनम अकेली नहीं थी। गौरतलब है कि एटीएस की ओर से 26 अप्रैल को धनबाद में छापेमारी कर प्रतिबंध आतंकी संगठन के आतंकी शबनम के साथ गुलफाम हसन, अयान जावेद, और मोहम्मद शहजाद आलम  को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

    इनके पास से दो पिस्तौल, 12 जिंदा कारतूस, आतंकी संगठनों से जुड़े कई दस्तावेज, किताबें, और मोबाइल-लैपटॉप बरामद किए गए हैं।

    हथियारों का लेन देन ये लोग करते ही थे, लेकिन मूल काम युवाओं को आतंकी संगठनों से जोड़ना था। इसी माड्यूल पर रांची से गिरफ्तार हुआ डॉ. इश्तियाक भी काम करता रहा है।

    झारखंड एटीएस की टीम बुधवार को धनबाद के वासेपुर से गिरफ्तार आतंकी संगठन हिज्ब उत तहरीर से जुड़े महिला समेत चार संदिग्धों को तीन दिन की रिमांड पर ली थी । एटीएस की टीम ने न्यायालय में चारों संदिग्धों को रिमांड पर लेने के लिए आवेदन दिया था। आवेदन पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने तीन दिन तक रिमांड दी है। अब इनसे एटीएस की टीम तीन दिन तक लगातार पूछताछ करेगी और उनके इरादों के साथ ही उनके संबंधों को की भी जांच की जाएगी। इसके अलावा एटीएस की टीम चारों संदिग्धों के विदेशी संबंधों की भी जांच करेगी।

    रिमांड मिलने के बाद टीम बुधवार को चारों संदिग्धों को बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा से एटीएस की टीम अपने साथ ले गई। इसके तुरंत बाद एटीएस ने चारों संदिग्धों से एटीएस ने पूछताछ शुरू कर दी है। मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम तक एटीएस उनसे पूछताछ करेगी।

    अम्मार यासर की गिरफ्तारी – इंडियन मुजाहिदीन से लेकर हिज्ब-उत-तहरीर तक का कनेक्शन.

    झारखंड एटीएस ने अम्मार यासर नामक एक संदिग्ध को भी गिरफ्तार किया है, जो पहले इंडियन मुजाहिदीन से जुड़ा रहा है। वर्ष 2014 में जोधपुर से गिरफ्तार हुआ था । यासर, हाल ही में 2024 में जेल से रिहा होने के बाद फिर से आतंकी गतिविधियों में सक्रिय हो गया था और हिज्ब-उत-तहरीर के झारखंड मॉड्यूल का हिस्सा बन गया। अयान जावेद से पूछताछ में अम्मार यासर का नाम सामने आया, जिसके आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया। झारखंड के डीजीपी अनुराग गुप्ता ने इसकी गिरफ्तारी की पुष्टि की है

    क्या है ‘हिज्ब-उत-तहरीर‘?

    1953 में यरुशलम में गठित यह आतंकी संगठन एक इस्लामिक खिलाफत स्थापित करने के उद्देश्य से काम करता है। भारत में यह संगठन 2010 में प्रतिबंधित कर दिया गया था। इसका मकसद लोकतांत्रिक सरकारों को गिराकर कट्टरपंथी इस्लामिक शासन लागू करना है।

    एटीएस की सतर्कता से टला खतरा, जांच अब विदेशी लिंक पर. 

    झारखंड एटीएस की सघन कार्रवाई से एक बड़े आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। एटीएस अब इन सभी संदिग्धों के विदेशी कनेक्शन की पड़ताल में जुटी है। शुरुआती पूछताछ में कुछ अहम जानकारियां सामने आई हैं, लेकिन यह जांच अभी जारी है।
    झारखंड जैसे शांत राज्य में आतंक की ये घुसपैठ बेहद चिंताजनक है। युवाओं को धर्म के नाम पर भटकाना, फर्जी दस्तावेज बनाना और विदेशी संगठनों से जुड़ना — ये सारी गतिविधियां अब जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। सवाल ये है कि क्या ये सिर्फ एक मॉड्यूल था? या फिर एक बड़ा नेटवर्क धीरे-धीरे सामने आने वाला है?

  • धनबाद में एटीएस की बड़ी कार्रवाई: आतंकी संगठनों से जुड़े है तार , दर्जनों से पूछताछ जारी

    धनबाद, झारखंड : शनिवार  सुबह करीब साढ़े पांच बजे शुरू हुई इस व्यापक कार्रवाई में एटीएस ने धनबाद के वासेपुर, भूली और अन्य इलाकों में 20 से अधिक स्थानों पर दबिश दी। इस अभियान में एक दंपती समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया  है  हालांकि  गिरफ़्तरी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गयी है छापेमारी के दौरान आरोपियों के पास से दो पिस्टल, 12 जिंदा कारतूस, कई मोबाइल फोन, लैपटॉप, प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े दस्तावेज और कट्टरपंथी साहित्य बरामद हुआ। इसके अलावा, करीब एक दर्जन संदिग्धों को भी हिरासत में लेकर अलग-अलग थानों में पूछताछ के लिए रखा गया है।

    युवाओं को बहकाने की साजिश.

    सूत्रों के मुताबिक, एटीएस को गुप्त सूचना मिली थी कि HTU, AQIS और ISIS जैसे संगठन झारखंड के युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथ की ओर धकेल रहे हैं और उन्हें अपने नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को हवा देने की इस साजिश का भंडाफोड़ करने के लिए धनबाद पुलिस के सहयोग से विशेष टीमें गठित कर ताबड़तोड़ छापेमारी की गई।

    डीएसपी लॉ एंड ऑर्डर नौशाद आलम के नेतृत्व में बैंकमोड़ थाना प्रभारी प्रवीण कुमार समेत कई थानों के अधिकारी इस अभियान में शामिल रहे।

    किराए के मकान में चल रही थी संदिग्ध गतिविधियाँ.

    भूली के शमशेर नगर में पकड़े गए दंपति  जनवरी महीने से किराए पर रह रहे थे। मोहल्ले के लोगों को उन्होंने आधार कार्ड बनाने का काम करने वाला बताया था, लेकिन स्थानीय लोगों से उनका खास मेलजोल नहीं था। एटीएस की छापेमारी में उनके घर से बड़ी संख्या में प्रतिबंधित किताबें और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद हुए।

    भागते हुये दोनों पकड़े गए.

    जब एटीएस ने वासेपुर और अमन सोसाइटी में दबिश दी तो  हसन और जावेद घर से फरार हो गए। दोनों ने एक स्कूटी से तोपचांची की ओर भागने की कोशिश की। लेकिन जीटी रोड सिक्स लेन ब्रह्मांडीहा फ्लाईओवर के पास एटीएस की टीम ने दोनों को धर दबोचा। तलाशी के दौरान दोनों के पास से हथियार, कारतूस, डायरी, नक्शा और मोबाइल फोन बरामद किए गए।

    सोशल मीडिया पर अफवाहों का बाजार गर्म.

    एटीएस की कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर अफवाहों का दौर शुरू हो गया। किसी ने आतंकियों के पकड़े जाने की बात लिखी, तो किसी ने धर्म और जाति को लेकर भ्रामक जानकारियां वायरल कीं। हालांकि, एटीएस और स्थानीय पुलिस ने इस पूरे मामले पर अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई बयान नहीं दिया है।

    सभी गिरफ्तार आरोपी 20-21 वर्ष के.

    गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों की उम्र महज 20-21 वर्ष है। हसन और जावेद की उम्र 21 वर्ष है। माना जा रहा है कि आतंकी संगठन जानबूझकर कम उम्र के युवाओं को अपने जाल में फंसा रहे हैं ताकि उन्हें आसानी से कट्टरपंथी विचारधारा में ढाला जा सके।

    पहली बार धनबाद में ऐसी बड़ी गिरफ्तारी.

    गौरतलब है कि भारत सरकार ने अक्टूबर 2024 में HTU, AQIS और ISIS जैसे संगठनों को प्रतिबंधित किया था। इसके बाद धनबाद में इनसे जुड़े लोगों की यह पहली बड़ी गिरफ्तारी है। सभी गिरफ्तार युवक धनबाद जिले के ही निवासी हैं।

    सीओ कार्यालय के कर्मचारी पर भी जांच.

    एटीएस ने जिन दर्जनभर लोगों को उठाया है, उनमें से एक स्थानीय सीओ कार्यालय का आउटसोर्स कर्मचारी भी बताया जा रहा है। फिलहाल, सभी संदिग्धों से गहन पूछताछ जारी है और उनके मोबाइल फोन, लैपटॉप तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की जा रही है।

    सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के बाद इस पूरे नेटवर्क के बारे में और चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।

  • झारखंड में सुरक्षाबलों की बड़ी जीत: 8 नक्सली ढेर

    एक करोड़ का इनामी प्रयाग मांझी उर्फ विवेक दा मारा गया

    परवेज़ आलम.

    बोकारो/गिरिडीह: झारखंड में चल रहे नक्सल विरोधी अभियान को सोमवार को बड़ी सफलता मिली जब सुरक्षाबलों ने बोकारो के लुगू पहाड़ क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में आठ नक्सलियों को मार गिराया। इन मारे गए नक्सलियों में सबसे बड़ा नाम है प्रयाग मांझी उर्फ विवेक दा का — जो भाकपा माओवादी की सेंट्रल कमेटी का सदस्य था और झारखंड-बिहार-छत्तीसगढ़-ओडिशा के नक्सली नेटवर्क का संचालन करता था। इस पर एक करोड़ रुपए का इनाम घोषित था ।

    मुठभेड़ रविवार रात से शुरू हुई, जब खुफिया सूत्रों से सुरक्षाबलों को नक्सलियों के जमावड़े की सूचना मिली। इलाके को घेरते हुए तड़के ऑपरेशन शुरू हुआ, और भारी गोलीबारी के बाद सुरक्षाबलों ने आठ नक्सलियों को ढेर कर दिया। फरार नक्सलियों की तलाश में इलाके में अभी भी व्यापक तलाशी अभियान जारी है।

    प्रयाग मांझी उर्फ विवेक दा कौन था?

    धनबाद जिले के टुंडी प्रखंड के दलबुढ़ा गांव का रहने वाला प्रयाग मांझी, माओवादी सर्किट में “विवेक दा”, “करण दा”, “फुचना” और “नागो मांझी” जैसे नामों से जाना जाता था। उसने बेहद कम उम्र में माओवादी संगठन से जुड़ाव बना लिया था और सालों में वह संगठन का रणनीतिक दिमाग बन गया।

    वह न केवल झारखंड, बल्कि बिहार, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के नक्सली बेल्ट में सक्रिय था। गिरिडीह के पारसनाथ और बोकारो के लुगू व झुमरा पहाड़ उसके प्रभाव क्षेत्र थे। सिर्फ गिरिडीह में ही उसके खिलाफ 50 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे।

    रणनीतिकार, प्रशिक्षक और हथियारों का जानकार

    विवेक दा नक्सलियों के लिए सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि सैन्य रणनीतिकार, प्रशिक्षक और हथियारों का जानकार था। उसके दस्ते के पास एके-47, इंसास राइफल और भारी मात्रा में विस्फोटक थे। उसके साथ 50 से ज्यादा प्रशिक्षित नक्सली थे, जिनमें महिला माओवादी भी शामिल थीं।

    सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, हाल ही में उसे पारसनाथ क्षेत्र की कमान दी गई थी, ताकि वहां पुनः नक्सली गतिविधियों को सक्रिय किया जा सके।

    पत्नी भी थी माओवादी नेता, इलाज के दौरान हुई थी मौत.

    विवेक की पत्नी जया मांझी भी माओवादी संगठन में महिला विंग की प्रमुख सदस्य थी। 25 लाख की इनामी जया को गिरिडीह पुलिस ने जुलाई 2024 में धनबाद के एक निजी अस्पताल से गिरफ्तार किया था, जहां वह फर्जी नाम से गॉल ब्लैडर कैंसर का इलाज करवा रही थी। इलाज के दौरान 21 सितंबर 2024 को रांची के रिम्स अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी।

    माओवादियों को गहरा झटका.

    इस मुठभेड़ में मारे गए अन्य नक्सलियों में अरविंद यादव और साहेब राम मांझी भी शामिल थे, जो संगठन के पुराने और प्रभावशाली सदस्य थे। विवेक दा की मौत को सुरक्षाबलों के लिए न सिर्फ सैन्य सफलता, बल्कि मनोवैज्ञानिक बढ़त के रूप में देखा जा रहा है।

    झारखंड पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, यह पहली बार है जब राज्य में एक करोड़ के इनामी नक्सली को मार गिराया गया है। इससे गिरिडीह-बोकारो क्षेत्र में नक्सली नेटवर्क की कमर टूट गई है।

    लुगू और पारसनाथ: नक्सलियों का सुरक्षित अड्डा अब खतरे में.

    लुगू पहाड़ और पारसनाथ लंबे समय से नक्सलियों के सेफ जोन माने जाते रहे हैं। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में लगातार ऑपरेशनों के चलते माओवादी इन इलाकों से पीछे हटे थे। लेकिन हालिया मुठभेड़ से संकेत मिलता है कि नक्सली दोबारा इन्हीं क्षेत्रों को पुनर्जीवित करना चाहते थे।

    पुलिस ने संकेत दिए हैं कि इन इलाकों में सघन अभियान जारी रहेगा ताकि बचे-खुचे माओवादी पूरी तरह खत्म किए जा सकें।

    नक्सलवाद के अंत की ओर एक कदम.

    प्रयाग मांझी की मौत को माओवादी संगठन के लिए बहुत बड़ा धक्का माना जा रहा है। उसकी रणनीतिक पकड़, राज्य के कई जिलों में असर और नेटवर्क को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि यह झारखंड के नक्सल इतिहास में एक निर्णायक मोड़ है।

    पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अब बचे हुए माओवादियों की गिरफ्तारी और संगठन को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने के लिए ज़मीनी स्तर पर ऑपरेशन को और तेज करने की तैयारी में हैं।

  • JMM : संघर्ष से सत्ता तक, 53 साल का सफर

    धनबाद मे स्थापना दिवस आज 

    परवेज़ आलम की खास रिपोर्ट ………..

    झारखंड की राजनीति में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) का नाम सिर्फ एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि संघर्ष और सफलता की कहानी है। 4 फरवरी 1972 को धनबाद के गोल्फ ग्राउंड में हुई एक ऐतिहासिक रैली के दौरान इस पार्टी की नींव रखी गई थी।  53 साल बाद, झामुमो न केवल सत्ता का केंद्र बना हुआ है, बल्कि झारखंड की पहचान और राजनीतिक धारा को भी निर्धारित कर रहा है।

    34 वर्षों से शिबू सोरेन के हाथों में झामुमो की बागडोर।

    पार्टी के संस्थापक शिबू सोरेन पिछले 34 वर्षों से झामुमो के अध्यक्ष हैं। यह भारतीय राजनीति में एक दुर्लभ घटना है कि एक ही व्यक्ति इतने लंबे समय तक किसी पार्टी की कमान संभाले रहे। 2021 में हुए अधिवेशन में उन्हें 10वीं बार अध्यक्ष और हेमंत सोरेन को तीसरी बार कार्यकारी अध्यक्ष चुना गया।

    शिबू सोरेन: उम्र भले बढ़ी, पर प्रभाव बरकरार।

    हालांकि, बढ़ती उम्र के कारण शिबू सोरेन की सक्रियता कम हो गई है, लेकिन वह आज भी झारखंड की राजनीति के अहम किरदार हैं। जब तक वह हैं, झामुमो की अध्यक्षता को लेकर कोई दूसरी चर्चा नहीं हो सकती। उनके बाद उनके बेटे हेमंत सोरेन पार्टी के सबसे बड़े नेता बनकर उभरे हैं और बीते एक दशक से कार्यकारी अध्यक्ष की भूमिका निभा रहे हैं।

    पांच बार सत्ता में झामुमो, हर बार सोरेन परिवार का दबदबा।

    15 नवंबर 2000 को झारखंड अलग राज्य बनने के बाद, झामुमो अब तक पांच बार सत्ता में आ चुका है। दिलचस्प बात यह है कि हर बार मुख्यमंत्री सोरेन परिवार से ही बना।

    • शिबू सोरेन ने 2005, 2008 और 2009 में मुख्यमंत्री पद संभाला।
    • हेमंत सोरेन ने 2013-14 में पहली बार और फिर 2019 से लगातार सत्ता में बने हुए हैं।

    हालांकि, झामुमो की चार सरकारें अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकीं। कुछ महज़ कुछ दिन टिकीं, कुछ 6 महीने तो कुछ 14 महीने चलीं।

    2019 और 2024 में झामुमो की ऐतिहासिक जीत।

    2019 के चुनाव में हेमंत सोरेन की अगुवाई में झामुमो ने 81 में से 30 सीटों पर जीत हासिल कर कांग्रेस और आरजेडी के साथ सरकार बनाई।

    2024 में झामुमो ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया।

    • पार्टी ने 34 सीटों पर जीत दर्ज की।
    • गठबंधन ने 81 में से 56 सीटें जीतकर लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी की।

    संघर्ष के दिन: जब शिबू सोरेन को अंडरग्राउंड होना पड़ा।

    शिबू सोरेन जब 12 साल के थे, तब सूदखोरों ने उनके पिता सोबरन मांझी की हत्या कर दी। इसके बाद उन्होंने महाजनों और शोषण के खिलाफ संघर्ष शुरू किया, जिसने कई बार हिंसक रूप ले लिया। वह कई बार अंडरग्राउंड भी रहे। धनबाद के जिलाधिकारी के.बी. सक्सेना और कांग्रेस नेता ज्ञानरंजन की पहल से उन्होंने आत्मसमर्पण किया और दो महीने जेल में बिताने के बाद बाहर आए।

    ‘सोनोत संताल’ और ‘शिवाजी समाज’ के विलय से बनी झामुमो।

    1972 में सोनोत संताल और विनोद बिहारी महतो के नेतृत्व वाले शिवाजी समाज के विलय से झारखंड मुक्ति मोर्चा का गठन हुआ। इसमें ट्रेड यूनियन लीडर ए.के. राय की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

    • विनोद बिहारी महतो पार्टी के पहले अध्यक्ष बने।
    • शिबू सोरेन पहले महासचिव बने।

    1980 में पहली बार सांसद बने शिबू सोरेन।

    1980 में शिबू सोरेन दुमका से सांसद चुने गए। इसी साल, बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी ने संथाल परगना की 18 में से 9 सीटें जीतकर पहली बार अपने मजबूत राजनीतिक वजूद का एहसास कराया।

    1991 में विनोद बिहारी महतो के निधन के बाद शिबू सोरेन पार्टी के अध्यक्ष बने और तब से पार्टी की कमान उन्हीं के हाथों में है।

    हेमंत सोरेन की नई लीडरशिप।

    2015 में जमशेदपुर में हुए अधिवेशन में हेमंत सोरेन को पहली बार कार्यकारी अध्यक्ष चुना गया। इसके बाद झामुमो एक नए दौर में प्रवेश कर गया और आज वह झारखंड की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक ताकत बना हुआ है।

    संघर्ष से सत्ता तक का सफर जारी…

    झामुमो की यह यात्रा सिर्फ सत्ता प्राप्ति तक सीमित नहीं है। यह झारखंड की आत्मा से जुड़ा आंदोलन है, जिसने झारखंड के लोगों को पहचान, हक और नेतृत्व देने का काम किया है। अब सवाल यह है कि पार्टी आने वाले वर्षों में अपनी सत्ता और सिद्धांतों के बीच कैसे संतुलन बनाए रखती है,यह वक्त बताएगा।