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  • JPSC-JSSC आंदोलन के बीच झारखंड में सियासी हलचल तेज

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    रांची। झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। सड़क से लेकर अस्पताल तक और सरकार से लेकर राजभवन तक—हर स्तर पर हलचल बढ़ गई है। इसी बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रोजेक्ट बिल्डिंग में अपने कैबिनेट सहयोगियों के साथ अहम बैठक बुलाई है। दूसरी ओर, CID ने बड़ी कार्रवाई करते हुए JPSC की पूर्व सदस्य अजीता भट्टाचार्य के PA ब्रज कुमार दास को हिरासत में लिया है। CID की टीम उनसे पूछताछ कर रही है।

    सरकार और छात्रों के बीच चौथे दौर की बातचीत

    छात्र आंदोलन के बीच सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच सोमवार को चौथे दौर की वार्ता शुरू हुई। बातचीत शाम करीब साढ़े सात बजे शुरू हुई। इससे पहले छात्रों को मोरहाबादी स्थित स्टेट गेस्ट हाउस बुलाया गया था।

    प्रशासन की ओर से छात्रों के प्रतिनिधियों को गाड़ियों से गेस्ट हाउस ले जाया गया, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उन्हें बताया गया कि मुख्यमंत्री पहले मंत्रियों के साथ बैठक करेंगे। इसके बाद छात्रों के साथ बातचीत की जाएगी।

    अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और छात्रों के बीच होने वाली यह वार्ता किसी ठोस समाधान तक पहुंचती है या नहीं।

    CID की कार्रवाई, पूर्व JPSC अध्यक्ष से भी हुई पूछताछ

    जांच के सिलसिले में JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते से करीब 48 घंटे तक पूछताछ की गई। CID ने 15 अगस्त को उन्हें पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया था। पूछताछ पूरी होने के बाद सोमवार को उन्हें अदालत में पेश किया गया। न्यायालय के आदेश के बाद उन्हें दोबारा न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

    इसके साथ ही JPSC की पूर्व सदस्य अजीता भट्टाचार्य के PA ब्रज कुमार दास को हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने से जांच का दायरा और बढ़ता दिखाई दे रहा है।

    चयनित अभ्यर्थियों की सरकार से अपील

    इधर, JSSC-CGL के चयनित अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर उनके भविष्य पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है।

    चयनित अभ्यर्थियों ने प्रोजेक्ट भवन के निकट मानव श्रृंखला बनाकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। उनका कहना है कि चयन प्रक्रिया को लेकर पैदा हुई परिस्थितियों का सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ रहा है।

    16वें दिन भी जारी देवेंद्र महतो का अनशन

    छात्र आंदोलन के बीच देवेंद्र नाथ महतो का आमरण अनशन भी लगातार जारी है। भूख हड़ताल के 16वें दिन उनकी स्वास्थ्य स्थिति चिंताजनक बताई गई। सोमवार को उनका रक्तचाप 84/39 mmHg दर्ज किया गया।

    15 अगस्त के बाद से लगातार जांच में उनका BP कम पाया जा रहा था और सोमवार को यह और नीचे चला गया। फिलहाल सदर अस्पताल में उनकी मेडिकल जांच और निगरानी की जा रही है।

    आंदोलनकारियों की मांग है कि देवेंद्र महतो को अस्पताल से वापस सत्याग्रह स्थल लाया जाए, हालांकि उनकी लगातार बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति के बीच यह मांग भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

    राजभवन पहुंचा विपक्ष, राज्यपाल से मुलाकात

    छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक सरगर्मी भी तेज हो गई है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह ने लोकभवन में राज्यपाल से मुलाकात की।

    भाजपा नेताओं ने राज्यपाल के सामने छात्र आंदोलन से उपजे हालात समेत प्रदेश के अन्य ज्वलंत मुद्दों को रखा। उनका आरोप है कि छात्र पिछले 24 दिनों से रांची में न्याय की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और कई छात्र आमरण अनशन के कारण गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं।

    भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार बातचीत के नाम पर छात्रों को गुमराह कर रही है। उन्होंने राज्यपाल से मामले में हस्तक्षेप करते हुए छात्रों की जायज मांगों का जल्द समाधान कराने की मांग की।

    राज्यपाल ने भाजपा नेताओं को आश्वस्त किया कि पूरे घटनाक्रम और राज्य की परिस्थितियों पर उनकी पैनी नजर है।

    अब बड़ा सवाल—क्या निकलेगा समाधान?

    JPSC-JSSC आंदोलन, CID की कार्रवाई, पूर्व अधिकारियों से पूछताछ, छात्रों की भूख हड़ताल, चयनित अभ्यर्थियों का प्रदर्शन और राजभवन तक पहुंचा राजनीतिक विवाद—इन सबके बीच झारखंड की सियासत और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज है।

    अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या सरकार और छात्रों के बीच चौथे दौर की वार्ता से कोई ठोस समाधान निकलेगा, या झारखंड का छात्र आंदोलन अभी और बड़ा रूप लेगा?

     

  • बाहा पर्व 2026: सिंगल यूज़ प्लास्टिक से मुक्त करने की मुहिम, ‘हर दुकान दस्तक अभियान’ की शुरुआत

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह : बाहा पर्व के अवसर पर आस्था और पर्यावरण संरक्षण का अद्भुत संगम देखने को मिला। जैव विविधता से भरपूर और धार्मिक आस्था के केंद्र  मारांग बुरु/पारसनाथ पहाड़ को सिंगल यूज़ प्लास्टिक मुक्त बनाने के संकल्प के साथ “हर दुकान दस्तक अभियान” की औपचारिक शुरुआत की गई।

    उपायुक्त रामनिवास यादव के निर्देश पर प्रखंड विकास पदाधिकारी के नेतृत्व में यह अभियान चलाया गया। कार्यक्रम का आयोजन स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत यूनिसेफ के सहयोग से मधुबन पंचायत क्षेत्र में किया गया।

    मारांग बुरु/पारसनाथ पहाड़ न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह क्षेत्र जैव विविधता का खजाना भी है। लेकिन पर्व के दौरान बढ़ती भीड़ और अस्थायी दुकानों के कारण प्लास्टिक प्रदूषण का खतरा भी बढ़ जाता है। प्रशासन ने इसी चुनौती को अवसर में बदलते हुए दुकानदारों तक सीधे पहुंचने की रणनीति अपनाई।

    दुकान-दुकान दस्तक, प्लास्टिक पर सख्ती.

    पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की जल सहियाओं और झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) की आजीविका समूह की दीदियों ने दुकान-दुकान जाकर सिंगल यूज़ प्लास्टिक का उपयोग बंद करने की अपील की। इसके स्थान पर कपड़े के थैले, जूट बैग और सखुआ पत्ते से बने दोना-पत्तल अपनाने का आग्रह किया गया।

    होटल संचालकों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सूखा और गीला कचरा अलग-अलग रखने की समझाइश दी गई, ताकि मधुबन क्षेत्र में कचरे का ढेर न लगे और वायु, जल तथा मिट्टी प्रदूषण की समस्या से बचा जा सके।

    ‘बोतल बैंक’ बनेगा नया मॉडल.

    अभियान के तहत मारांग बुरु परिसर में “बोतल बैंक” स्थापित किया जा रहा है। यहां पर्यटक प्लास्टिक की बोतलें और अन्य कचरा इधर-उधर फेंकने के बजाय निर्धारित संरक्षित बैंक में जमा करेंगे। एकत्रित प्लास्टिक को मधुबन में प्रस्तावित प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट में भेजकर रिसाइक्लिंग की जाएगी।

    अभियान का उद्देश्य केवल प्लास्टिक पर रोक लगाना नहीं, बल्कि कार्बन उत्सर्जन कम करना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और पर्यटकों को जूट बैग जैसे टिकाऊ विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित करना भी है।

    कार्यक्रम में यूनिसेफ प्रतिनिधि, जेएसएलपीएस के प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी, मधुबन के मुखिया एवं अन्य प्रशासनिक पदाधिकारी उपस्थित रहे।

    प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे इस पहल में सक्रिय भागीदारी निभाएं और मारांग बुरु/पारसनाथ पहाड़ की पवित्रता के साथ-साथ उसकी प्राकृतिक धरोहर को भी सुरक्षित रखने में सहयोग करें।

    आस्था का यह पर्व अब पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देगा—ताकि प्रकृति और परंपरा दोनों साथ-साथ आगे बढ़ें।

  • भाकपा (माओवादी) को गिरिडीह में बड़ा झटका

     

    एरिया कमेटी सदस्य शिवलाल हेम्ब्रम और पत्नी सरिता हांसदा ने किया आत्मसमर्पण

    परवेज़ आलम.

    The News Post4u.

    गिरिडीह: झारखंड में नक्सल मोर्चे पर पुलिस को मिली एक बड़ी सफलता! भाकपा (माओवादी) संगठन के एरिया कमेटी सदस्य शिवलाल हेम्ब्रम उर्फ शिवा और उनकी पत्नी दस्ता सदस्य सरिता हांसदा उर्फ उर्मिला ने बुधवार को गिरिडीह पुलिस के समक्ष स्वेच्छा से आत्मसमर्पण कर दिया।

    दोनों ने झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति “नई दिशा – एक नई पहल” से प्रभावित होकर हथियार डालने का फैसला किया।
    आत्मसमर्पण का यह क्षण गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार, उपायुक्त  रामनिवास यादव, अपर पुलिस अधीक्षक (अभियान) सुरजीत सिंह, पुलिस उपमहानिरीक्षक, सीआरपीएफ 154 बटालियन कमांडेंट अमित सिंह, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी डुमरी और अन्य पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति में दर्ज हुआ।

    कौन हैं शिवलाल और सरिता.

    शिवलाल हेम्ब्रम निवासी टेसाफुली, थाना मधुबन — संगठन में एरिया कमेटी सदस्य के रूप में सक्रिय थे।
    वहीं उनकी पत्नी सरिता हांसदा (उम्र 19 वर्ष), निवासी चतरो, थाना खुखरा — दस्ते की सक्रिय सदस्य थीं।

    पुलिस के अनुसार, शिवलाल वर्ष 2017 में नक्सली संगठन से जुड़ा था। शुरुआत में उसने संतरी और रसोइए का काम किया, लेकिन जल्द ही वह माओवादी कमांडर करम दा उर्फ विवेक का अंगरक्षक बन गया।
    वर्ष 2022 में उसे एरिया कमेटी सदस्य के पद पर पदोन्नत किया गया।
    संगठन में रहते हुए शिवलाल ने हथियार और विस्फोटक छिपाने, ग्रामीणों से लेवी वसूली और पुलिस बलों पर हमलों जैसी कई नक्सली कार्रवाइयों में हिस्सा लिया। आत्मसमर्पण के बाद दोनों को राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत लाभ दिया जाएगा।

    सरिता हांसदा को 2020 में ‘जया दी’ द्वारा संगठन में शामिल किया गया था।
    दोनों ने वर्ष 2024 में विवाह किया, लेकिन बीते महीनों में संगठन के शीर्ष कमांडरों द्वारा लगातार शोषण और ग्रामीणों पर अत्याचार से दोनों का मोहभंग हो गया। सरिता हांसदा के विरुद्ध भी कई नक्सली मामलों में प्राथमिकी दर्ज है।

    मुख्यधारा की ओर वापसी.

    गिरिडीह पुलिस ने बताया कि संगठन के प्रति मोहभंग और लगातार पुलिस दबाव के चलते दोनों ने आत्मसमर्पण का निर्णय लिया।
    पुलिस लगातार उनके परिजनों के संपर्क में थी और उन्हें समझा-बुझाकर मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित कर रही थी।

    अब आत्मसमर्पण के बाद दोनों को राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत सभी लाभ दिए जाएंगे।
    पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, शिवलाल के खिलाफ कुल 11 आपराधिक मामले दर्ज हैं — जिनमें हत्या, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, यूएपीए और आर्म्स एक्ट की धाराएं शामिल हैं।
    सरिता के विरुद्ध भी कई नक्सली मामलों में प्राथमिकी दर्ज है।

    पुलस अधीक्षक का बयान.

    पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार ने कहा —

    “शिवलाल और सरिता का आत्मसमर्पण माओवादी संगठन के लिए बड़ा झटका है। इससे न सिर्फ संगठन कमजोर होगा, बल्कि अन्य उग्रवादियों को भी मुख्यधारा में लौटने की प्रेरणा मिलेगी।”

    उन्होंने इस आत्मसमर्पण को गिरिडीह पुलिस के लिए नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि बताया।

    अब नई दिशा में नया जीवन.

    दोनों नक्सली दंपती ने यह साफ कहा —

    “अब हथियार नहीं, हम समाज और परिवार के साथ नई जिंदगी शुरू करेंगे।”

    झारखंड सरकार की पहल “नई दिशा – एक नई पहल” एक बार फिर कारगर साबित हुई है —
    जहाँ कभी गोलियों की आवाज़ गूंजती थी, अब वहाँ मुख्यधारा में लौटने की उम्मीदें पनप रही हैं।

     

  • गांधी आगमन शताब्दी समारोह में उपायुक्त ने दी अहिंसा और पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह : जमुआ प्रखंड के खरगडीहा में सोमवार को  गांधी आगमन शताब्दी समारोह की शुरुवात एक प्रेरणादायी माहौल में हुआ ।
    इस अवसर पर डीसी रामनिवास यादव ने लंगटा बाबा समाधि स्थल  पर चादरपोशी कर समाज में एकता और शांति का संदेश दिया। इसके बाद उन्होंने बेसिक स्कूल खरगडीहा में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर बापू को  नमन किया।

    इसके बाद डीसी रामनिवास यादव  गांधी पदयात्रा में भी कदम से कदम मिलाकर हिस्सा लिया। पदयात्रा के दौरान उन्होंने पौधारोपण कर लोगों को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा —

    “महात्मा गांधी सत्य और अहिंसा के प्रतीक हैं। उनका जीवन केवल स्वतंत्रता संग्राम तक सीमित नहीं, बल्कि आज की युवा पीढ़ी के लिए भी दिशा और प्रेरणा है। हमें उनके सिद्धांतों को आत्मसात कर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करना चाहिए।”

    उन्होंने यह भी कहा कि प्रदूषण और पर्यावरण क्षरण आज की सबसे बड़ी चुनौतियाँ हैं। हर व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक पेड़ अवश्य लगाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण मिल सके।

    कार्यक्रम का समापन सामूहिक संकल्प के साथ हुआ — “हम गांधी के रास्ते पर चलेंगे, और प्रकृति की रक्षा करेंगे।”

  • शिबू सोरेन की अस्थियों को दामोदर नदी में विसर्जित किया गया

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संथाली परंपरा के अनुरूप सभी अनुष्ठान पूरा किया.

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क

    रामगढ़, झारखंड :  रविवार का दिन झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के लिए बेहद भावुक क्षणों का गवाह बना। मुख्यमंत्री ने अपने परिवार के साथ रामगढ़ के प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां छिन्नमस्तिका मंदिर में पूजा-अर्चना की और इसके बाद अपने पिता तथा झारखंड के जननायक दिशोम गुरु शिबू सोरेन की अस्थियों को दामोदर नदी में संथाली परंपरा के अनुरूप विसर्जित किया।

    अस्थि विसर्जन का यह क्षण मुख्यमंत्री के लिए पीड़ा और श्रद्धा दोनों का संगम था। घाट पर उपस्थित लोग साफ देख रहे थे कि पिता की स्मृति से भरे इस मौके पर मुख्यमंत्री की आंखें नम थीं।

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने पैतृक गांव नेमरा से अस्थि कलश लेकर पहुंचे। घाट पर परंपरागत संथाली पाहनों (पुजारियों) की मौजूदगी में मंत्रोच्चार और रीति-रिवाजों के साथ विसर्जन की प्रक्रिया पूरी की गई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के छोटे भाई व विधायक बसंत सोरेन, परिवार की महिलाएं और अन्य रिश्तेदार भी उपस्थित रहे।

    विसर्जन के बाद हेमंत सोरेन ने मां छिन्नमस्तिका मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की। मंदिर के पुजारी ने विधि-विधान से अनुष्ठान सम्पन्न कराया। पूजा के उपरांत मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में मौजूद गरीब और असहाय लोगों के बीच कपड़े व खाद्य सामग्री का वितरण किया। उन्होंने इस सेवा को अपने पिता के आदर्शों से प्रेरित सामाजिक उत्तरदायित्व का हिस्सा बताया। इसके बाद मुख्यमंत्री पुनः नेमरा लौट गए।

    तीन लाख लोगों ने ग्रहण किया संस्कार भोज का प्रसाद.

    नेमरा में आयोजित संस्कार भोज में जनसैलाब उमड़ पड़ा था  अनुमानित तीन लाख लोगों ने प्रसाद ग्रहण कर दिशोम गुरु को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस भोज ने यह प्रमाणित किया कि शिबू सोरेन केवल एक नेता नहीं, बल्कि जनता के हृदय में बसे एक परिवार के सदस्य थे।

    कार्यक्रम में राष्ट्रीय और राज्य स्तर के कई दिग्गज नेता व गणमान्य अतिथि उपस्थित हुए। इनमें केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, योगगुरु बाबा रामदेव, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय, बिहार के सांसद पप्पू यादव, विधानसभा अध्यक्ष रविंद्र नाथ महतो, राज्य सरकार के कई मंत्री और विधायक शामिल थे। झारखंड के वरिष्ठ आईएएस-आईपीएस अधिकारी तथा पड़ोसी राज्यों से आए लोग भी इस अवसर के साक्षी बने।

    4 अगस्त को बुझा एक युग का दीप.

    गौरतलब है कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन का निधन 4 अगस्त 2025 को दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद हुआ था। 5 अगस्त को उनके पैतृक गांव नेमरा में पूरे राजकीय और धार्मिक सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। तब से लेकर अब तक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन गांव में रहकर पिता के श्राद्धकर्म और धार्मिक अनुष्ठानों का पालन कर रहे हैं।

    झारखंड आंदोलन के अमर नायक.

    शिबू सोरेन केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि झारखंड आंदोलन के आदिवासी जननायक और संथाल समाज के सांस्कृतिक प्रतीक थे। उन्हें ‘दिशोम गुरु’ की उपाधि जनता ने उनके संघर्ष और समर्पण के कारण दी थी। उन्होंने जीवनभर आदिवासी समाज के अधिकार, जमीन-जंगल-जमीन की रक्षा और अलग राज्य की पहचान के लिए संघर्ष किया।

    रविवार को संपन्न हुए इस आयोजन ने एक बार फिर यह साबित किया कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन की स्मृति सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे देश के राजनीतिक-सामाजिक परिदृश्य में जीवित है।

  • मानहानि मुकदमे में राहुल गांधी कल चाईबासा कोर्ट में होंगे पेश

    अमित शाह पर टिप्पणी से जुड़ा है मामला 

    The News Post4u.

    रांची ,झारखंड: कांग्रेस नेता राहुल गांधी आगामी 6 अगस्त को झारखंड के चाईबासा में स्थित एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट में पेश होंगे। यह पेशी वर्ष 2018 में भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े मानहानि के मामले में हो रही है। इस मामले में कोर्ट ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश देते हुए गैर-जमानती वारंट जारी किया था।

    क्या है मामला ?

    चाईबासा निवासी प्रताप कटियार ने 9 जुलाई 2018 को एक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि कांग्रेस अधिवेशन के दौरान राहुल गांधी ने अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक बयान दिया था, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची। इस शिकायत पर कार्रवाई करते हुए कोर्ट ने पहले अप्रैल 2022 में राहुल गांधी के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया। लेकिन उनके द्वारा इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई।

    इसके बाद फरवरी 2024 में कोर्ट ने गैर-जमानती वारंट जारी किया। राहुल गांधी की ओर से उनके अधिवक्ता ने व्यक्तिगत पेशी से छूट की अर्जी दाखिल की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। फिर मामला झारखंड हाईकोर्ट पहुंचा, जहां उन्हें कुछ समय के लिए राहत मिली।

    हालांकि मार्च 2024 में हाईकोर्ट ने राहुल गांधी की याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद चाईबासा कोर्ट ने मामले में पुनः सुनवाई शुरू की और उन्हें 6 अगस्त को सशरीर उपस्थित होने का आदेश जारी किया।

    सुरक्षा के कड़े इंतजाम, हेलीपैड तैयार.

    राहुल गांधी की प्रस्तावित उपस्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन सतर्क है। सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद बनाने की कवायद जारी है। चाईबासा के टाटा कॉलेज मैदान में उनके हेलीकॉप्टर की लैंडिंग के लिए विशेष हेलीपैड तैयार किया गया है। टाटा कॉलेज से लेकर व्यवहार न्यायालय तक के पूरे रास्ते में पुलिस बल की तैनाती की जाएगी।

    प्रशासन ने उनके आगमन को लेकर सभी सुरक्षा मानकों और प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। राहुल गांधी के साथ दिल्ली और रांची से अधिवक्ताओं की एक टीम के आने की भी संभावना जताई जा रही है।

    अब अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें.

    यह मामला राजनीतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राहुल गांधी की कोर्ट में उपस्थिति न सिर्फ कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है, बल्कि इसके संभावित राजनीतिक प्रभावों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अब देखना यह होगा कि 6 अगस्त को कोर्ट में क्या रुख अपनाया जाता है और आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।

     

  • राशन डीलरों का फूटा आक्रोश, आपूर्ति विभाग के खिलाफ धरना

    संवाददाता, The News Post4U

    गिरिडीह : जिले के राशन डीलरों ने शुक्रवार को जिला आपूर्ति विभाग की नीतियों और कार्यशैली के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए समाहरणालय परिसर में एकदिवसीय धरना दिया। डीलरों ने सात सूत्री मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन किया और विभाग पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए।

    समय पर स्टॉक नहीं, फिर भी दबाव में वितरण.

    डीलर संघ के प्रतिनिधि राजा बंसल और पंकज पांडेय के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन में डीलरों ने स्पष्ट कहा कि विभाग केवल वितरण के आंकड़ों को लेकर सख्ती करता है, लेकिन उन्हें समय पर स्टॉक ही उपलब्ध नहीं कराया जाता। इसके अलावा, वर्षों से लंबित बकाया कमीशन का भुगतान न होने से डीलरों की आर्थिक स्थिति भी प्रभावित हो रही है।

    उन्होंने कहा कि, “जब तक कम से कम एक महीने का राशन स्टॉक एडवांस में उपलब्ध नहीं कराया जाएगा, तब तक शत-प्रतिशत वितरण संभव नहीं है। केवल टारगेट देना समाधान नहीं है।”

    कोविड काल से लंबित हैं कमीशन की राशि.

    डीलरों ने आरोप लगाया कि कोविड-19 महामारी के दौरान राशन वितरण के कार्यों में भाग लेने के बावजूद अधिकांश डीलरों को अब तक कमीशन का भुगतान नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि कुछ खास डीलरों को ही आंशिक भुगतान मिला है, जबकि शेष डीलर लगातार विभाग के चक्कर काट रहे हैं।

    आधुनिकीकरण के दावे, लेकिन व्यवस्था अब भी जर्जर.

    डीलर संघ के एक सदस्य ने व्यंग्य करते हुए कहा, “देश 5जी की ओर बढ़ गया है, लेकिन झारखंड में अब भी राशन व्यवस्था 2जी की तरह धीमी और अपारदर्शी बनी हुई है।“ उन्होंने कहा कि डिजिटल प्रणाली के नाम पर केवल दिखावा किया जा रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर डीलरों को अभी भी मूलभूत समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

    मांगे नहीं मानी गई तो होगा उग्र प्रदर्शन.

    धरना में राजेश बंसल, अमित कुमार, राजेश राज, कैदन बरनवाल समेत दर्जनों राशन डीलर मौजूद रहे। सभी ने एक सुर में चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो वे अगली बार जिला स्तर पर उग्र आंदोलन करेंगे और आपूर्ति व्यवस्था को पूरी तरह ठप करने पर भी विचार करेंगे। डीलरों की सात सूत्री प्रमुख मांगों में शामिल हैं, बकाया कमीशन का शीघ्र भुगतान,प्रत्येक माह राशन स्टॉक की समय पर आपूर्ति,कार्य संचालन में पारदर्शिता,डीलरों पर अनावश्यक दबाव बंद किया जाए,कोविड काल के सभी लंबित भुगतान निपटाए जाएं,तकनीकी खामियों को शीघ्र दूर किया जाए,विभागीय संवाद प्रणाली को प्रभावी बनाया जाए.

  • झारखंड में जमीन रजिस्ट्री का क्या है  नया नियम जान लीजिये वरना पछताना पड़ेगा

    2 लाख से अधिक के लेनदेन पर बैंक ट्रांजैक्शन की देनी होगी जानकारी

    परवेज़ आलम.

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    गिरिडीह: झारखंड में जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़ी प्रक्रिया अब और अधिक पारदर्शी और काले धन से मुक्त होगी। राज्य के भूमि-राजस्व विभाग ने इस दिशा में बड़ा फैसला लेते हुए दो लाख रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियों की रजिस्ट्री के लिए केवल बैंक ट्रांजैक्शन को ही मान्य करने का आदेश जारी किया है।

    रजिस्ट्री के लिए अब बैंक भुगतान अनिवार्य.

    गिरिडीह के जिला अवर निबंधक  के मुताबिक अब दो लाख रुपये से अधिक की संपत्तियों की रजिस्ट्री तब तक नहीं होगी जब तक खरीदार बैंक के जरिए भुगतान की पुष्टि नहीं करता। नकद लेनदेन को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। इस बाबत रजिस्ट्री कार्यालयों को इसके स्पष्ट निर्देश दे दिए गए हैं और परिसर में इस संबंध में नोटिस भी लगाए जा चुके हैं ताकि आम जनता को जागरूक किया जा सके।

    सुप्रीम कोर्ट और आयकर विभाग की सिफारिशों के आधार पर फैसला

    यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और आयकर विभाग के निर्देशों के तहत लिया गया है। आयकर अधिनियम की धारा 269ST के तहत किसी भी व्यक्ति को दो लाख रुपये से अधिक का नकद लेनदेन करना प्रतिबंधित है। इसी आधार पर अब संपत्ति लेनदेन को भी बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से बाध्य किया गया है ताकि काले धन के प्रवाह पर लगाम लगाई जा सके।

    खरीदारों को देनी होगी ट्रांजैक्शन की पूरी जानकारी

    अब रजिस्ट्री के दौरान संपत्ति खरीदार को निम्नलिखित जानकारियां प्रस्तुत करनी होंगी:

    • भुगतान की विधि (जैसे NEFT, RTGS, चेक आदि),
    • राशि,
    • भुगतान की तारीख और
    • लेन-देन का वैध दस्तावेज या प्रमाण।

    सरकार को टैक्स चोरी रोकने में मिलेगी मदद.

    इस नियम के लागू होने से जमीन की खरीद-बिक्री में पारदर्शिता आएगी और बेनामी सौदों, काले धन और टैक्स चोरी जैसे मामलों पर प्रभावी अंकुश लगेगा। साथ ही सरकार को राजस्व का नुकसान भी नहीं होगा।

    भूमि-राजस्व विभाग को उम्मीद है कि इस सख्ती से राज्य के रियल एस्टेट बाजार में ईमानदारी को बढ़ावा मिलेगा और आम जनता का विश्वास भी प्रणाली पर और मजबूत होगा।

     

  • गिरिडीह: डीसी ने खनन कार्यालय का किया औचक निरीक्षण

     अवैध खनन पर जीरो टॉलरेंस की चेतावनी.

    The News Post4u.

    गिरिडीह: उपायुक्त रामनिवास यादव ने शुक्रवार को जिला खनन कार्यालय का औचक निरीक्षण कर खनन संबंधित कार्यप्रणाली और राजस्व संग्रहण की स्थिति की गहन समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान उन्होंने राजस्व संग्रह बढ़ाने के लिए अधिकारियों को ठोस और व्यावहारिक रणनीति अपनाने के निर्देश दिए।

    उपायुक्त ने खनन कार्यालय में रखे गए अभिलेखों, पंजियों और दस्तावेजों की बारीकी से जांच की और कहा कि दस्तावेजों का संधारण पूर्ण पारदर्शिता के साथ किया जाए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अवैध खनन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसके खिलाफ नियमित जांच और कार्रवाई आवश्यक है।

    रामनिवास यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि यदि जिले में कहीं भी अवैध खनन या खनिजों का अवैध परिवहन हो रहा हो, तो उस पर तुरंत और कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने खासतौर पर वन क्षेत्रों में चल रहे अवैध क्रशर इकाइयों, माईका उत्खनन और उसके अवैध प्रेषण पर सतत निगरानी रखने का आदेश दिया। इसके लिए विशेष छापामारी अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए।

    डीसी ने कहा कि गिरिडीह जिला प्रशासन खनिज संपदाओं की रक्षा और राजस्व संग्रह में पारदर्शिता सुनिश्चित करने को लेकर प्रतिबद्ध है। इस दिशा में किसी भी प्रकार की लापरवाही या शिथिलता को गंभीरता से लिया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई तय होगी।

    निरीक्षण के दौरान खनन पदाधिकारी समेत अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। यह कदम प्रशासन की ओर से अवैध खनन पर लगाम कसने और खनिज संपदा के संरक्षण को लेकर सक्रियता का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।

  • जंगली हाथी के साथ रील बना रह था सद्दाम,फिर जो हुआ …..

    वन विभाग की चेतावनियों के बावजूद रील बनाने की सनक ने ले ली जान.

    परवेज़ आलम.

    For The News Post4u.

    कोडरमा (झारखंड): झारखंड के कोडरमा जिले में रील बनाने की कोशिश में एक युवक की जान चली गई। सोशल मीडिया पर प्रसिद्ध होने की चाहत ने 30 वर्षीय सद्दाम अंसारी को इस कदर अंधा कर दिया कि वह जंगली हाथियों के झुंड के पास जाकर उनके साथ सेल्फी और रील बनाता रहा। लेकिन यह दुस्साहसिक कदम उसकी मौत का कारण बन गया।

    हाथी के गुस्से का शिकार बना युवक.

    यह हादसा मरकच्चो थाना क्षेत्र के सलैया पहाड़ी के जंगलों में हुआ। स्थानीय निवासी सद्दाम अंसारी, जो बेलडीह गांव का रहने वाला था और पेशे से मार्बल मिस्त्री था, अपने दो दोस्तों के साथ जंगल में पहुंचे थे। उन्हें सूचना मिली थी कि इलाके में हाथियों का झुंड देखा गया है। वहां पहुंचकर सद्दाम हाथियों के बेहद करीब जाकर मोबाइल से वीडियो शूट करने लगा और सेल्फी लेने लगा।

    इसी दौरान झुंड में से एक हाथी अचानक आक्रामक हो गया और युवक की ओर दौड़ पड़ा। सद्दाम के दोनों दोस्त किसी तरह जान बचाकर भाग निकले, लेकिन सद्दाम का पैर झाड़ियों में फंस गया और वह गिर गया। गुस्साए हाथी ने उसे उठाकर पटक दिया और फिर पैरों से बुरी तरह कुचल डाला।

    इलाज के दौरान तोड़ा दम.

    घायल अवस्था में ग्रामीणों ने सद्दाम को तुरंत कोडरमा सदर अस्पताल पहुंचाया, जहां उसकी हालत गंभीर देखते हुए डॉक्टरों ने उसे रांची के रिम्स (RIMS) अस्पताल रेफर कर दिया। लेकिन रांची पहुंचने से पहले ही रास्ते में उसकी मौत हो गई।

    ADVT.

    पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं.

    यह कोई पहली घटना नहीं है जब हाथियों के हमले में इंसानी जान गई हो। इससे पहले मार्च महीने में झारखंड के सिमडेगा और गुमला जिलों में भी जंगली हाथियों ने चार ग्रामीणों को कुचलकर मार डाला था। इसके बावजूद लोग अब भी बिना सुरक्षा उपायों के जंगली क्षेत्रों में जान जोखिम में डालकर वीडियो बनाते देखे जाते हैं।

    प्रशासन और वन विभाग की अपील.

    वन विभाग ने बार-बार चेतावनी दी है कि जंगली जानवरों से दूरी बनाकर रखें और बिना अनुमति जंगलों में प्रवेश न करें। रील और सोशल मीडिया के लिए अपनी जान खतरे में डालना किसी भी तरह से समझदारी नहीं है।

    यह हादसा एक बार फिर चेतावनी देता है कि वाइल्डलाइफ से छेड़छाड़ या लापरवाही सिर्फ अवैध ही नहीं, घातक भी हो सकती है।