बाहा पर्व 2026: सिंगल यूज़ प्लास्टिक से मुक्त करने की मुहिम, ‘हर दुकान दस्तक अभियान’ की शुरुआत

द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

गिरिडीह : बाहा पर्व के अवसर पर आस्था और पर्यावरण संरक्षण का अद्भुत संगम देखने को मिला। जैव विविधता से भरपूर और धार्मिक आस्था के केंद्र  मारांग बुरु/पारसनाथ पहाड़ को सिंगल यूज़ प्लास्टिक मुक्त बनाने के संकल्प के साथ “हर दुकान दस्तक अभियान” की औपचारिक शुरुआत की गई।

उपायुक्त रामनिवास यादव के निर्देश पर प्रखंड विकास पदाधिकारी के नेतृत्व में यह अभियान चलाया गया। कार्यक्रम का आयोजन स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत यूनिसेफ के सहयोग से मधुबन पंचायत क्षेत्र में किया गया।

मारांग बुरु/पारसनाथ पहाड़ न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह क्षेत्र जैव विविधता का खजाना भी है। लेकिन पर्व के दौरान बढ़ती भीड़ और अस्थायी दुकानों के कारण प्लास्टिक प्रदूषण का खतरा भी बढ़ जाता है। प्रशासन ने इसी चुनौती को अवसर में बदलते हुए दुकानदारों तक सीधे पहुंचने की रणनीति अपनाई।

दुकान-दुकान दस्तक, प्लास्टिक पर सख्ती.

पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की जल सहियाओं और झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) की आजीविका समूह की दीदियों ने दुकान-दुकान जाकर सिंगल यूज़ प्लास्टिक का उपयोग बंद करने की अपील की। इसके स्थान पर कपड़े के थैले, जूट बैग और सखुआ पत्ते से बने दोना-पत्तल अपनाने का आग्रह किया गया।

होटल संचालकों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सूखा और गीला कचरा अलग-अलग रखने की समझाइश दी गई, ताकि मधुबन क्षेत्र में कचरे का ढेर न लगे और वायु, जल तथा मिट्टी प्रदूषण की समस्या से बचा जा सके।

‘बोतल बैंक’ बनेगा नया मॉडल.

अभियान के तहत मारांग बुरु परिसर में “बोतल बैंक” स्थापित किया जा रहा है। यहां पर्यटक प्लास्टिक की बोतलें और अन्य कचरा इधर-उधर फेंकने के बजाय निर्धारित संरक्षित बैंक में जमा करेंगे। एकत्रित प्लास्टिक को मधुबन में प्रस्तावित प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट में भेजकर रिसाइक्लिंग की जाएगी।

अभियान का उद्देश्य केवल प्लास्टिक पर रोक लगाना नहीं, बल्कि कार्बन उत्सर्जन कम करना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और पर्यटकों को जूट बैग जैसे टिकाऊ विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित करना भी है।

कार्यक्रम में यूनिसेफ प्रतिनिधि, जेएसएलपीएस के प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी, मधुबन के मुखिया एवं अन्य प्रशासनिक पदाधिकारी उपस्थित रहे।

प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे इस पहल में सक्रिय भागीदारी निभाएं और मारांग बुरु/पारसनाथ पहाड़ की पवित्रता के साथ-साथ उसकी प्राकृतिक धरोहर को भी सुरक्षित रखने में सहयोग करें।

आस्था का यह पर्व अब पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देगा—ताकि प्रकृति और परंपरा दोनों साथ-साथ आगे बढ़ें।

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