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  • SIR को लेकर JMM की बैठक, एक भी मतदाता न छूटे: संजय सिंह

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने साफ संदेश दिया है कि जिले का एक भी पात्र मतदाता मतदाता सूची से बाहर नहीं रहना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर शुक्रवार को सर्किट हाउस में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

    सर्किट हाउस, गिरिडीह में आयोजित इस बैठक में झामुमो जिला अध्यक्ष संजय सिंह ने पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को निर्देश देते हुए कहा कि SIR अभियान को पूरी गंभीरता के साथ लिया जाए। उन्होंने कहा कि गिरिडीह जिले का एक भी मतदाता छूटना नहीं चाहिए।

    पार्टी द्वारा नियुक्त बीएलए-2 को बूथ लेवल अधिकारियों यानी बीएलओ के साथ समन्वय स्थापित कर घर-घर जाकर मतदाताओं की मैपिंग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। साथ ही सभी प्रखंड और नगर कमेटियों को जल्द से जल्द बीएलए-2 की बैठक आयोजित करने को कहा गया है।

    “विशेष गहन पुनरीक्षण में बीएलए-2 और बीएलओ की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। दोनों को मिलकर घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क करना होगा और सूची में मौजूद त्रुटियों को दूर करना होगा।” –संजय सिंह, जिला अध्यक्ष, झामुमो

    बैठक में यह भी बताया गया कि चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों की भागीदारी बढ़ाने के लिए बीएलए को बल्क में आवेदन जमा करने की अनुमति दी है। अब बीएलए प्रतिदिन 50 आवेदन अपने बीएलओ को सौंप सकेंगे।

    जमुआ के पूर्व विधायक केदार हाजरा ने कहा कि दो महीने तक चलने वाले इस अभियान में कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर पर सक्रिय रहना होगा, ताकि कोई भी मतदाता सूची से वंचित न रहे।

    वहीं जिला उपाध्यक्ष शाहनवाज अंसारी ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता सभी विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की मदद के लिए तैयार हैं और दस्तावेजों में मौजूद त्रुटियों को दूर कराने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। जिला प्रवक्ता कृष्ण मुरारी शर्मा ने जानकारी दी कि आगामी 14 जून को जिले के सभी 2,586 बूथों के बीएलए-2 को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे पहले सभी प्रखंडों और नगर क्षेत्रों में बैठकें आयोजित कर अभियान को और मजबूत किया जाएगा।

    बैठक में केंद्रीय समिति सदस्य दिलीप मंडल, युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष कोलेश्वर सोरेन, महानगर अध्यक्ष राकेश कुमार रॉकी सहित कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

    कुल मिलाकर, झामुमो ने SIR अभियान को लेकर अपनी तैयारियां पूरी तरह से तेज कर दी हैं और पार्टी का लक्ष्य स्पष्ट है—गिरिडीह का कोई भी पात्र मतदाता मतदाता सूची से बाहर न रहे।

  • जाति-धर्म की राजनीति से शहर का विकास नहीं – सुदिव्य कुमार सोनू

    मंत्री का  भाजपा पर तीखा हमला, प्रमिला मेहरा के समर्थन में जुटी भीड़.

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू.

    गिरिडीह: नगर निगम चुनाव की सरगर्मी के बीच माथाडीह फुटबॉल मैदान गुरुवार को राजनीतिक बयानबाज़ी और शक्ति प्रदर्शन का केंद्र बन गया। मंच पर थे झारखंड सरकार के नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, और निशाने पर थी भारतीय जनता पार्टी।

    मिलन समारोह में उमड़ी भीड़ को संबोधित करते हुए मंत्री सोनू ने बिना नाम लिए भाजपा पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “बांटने और बंटवारे की राजनीति करने वाली पार्टी के लोग आज हम पर समाज को बांटने का आरोप लगा रहे हैं। जबकि सच्चाई यह है कि शुरुआत से ही उन्होंने जाति और धर्म के नाम पर समाज में विभाजन की रेखाएं खींची हैं।”

    उन्होंने आरोप लगाया कि पहले धर्म के नाम पर समाज को बांटा गया, और अब जाति के आधार पर विभाजन की राजनीति हो रही है। नगर निगम चुनाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि गरीब दलित के बजाय अमीर दलित को समर्थन देना इस बात का प्रमाण है कि राजनीति में सामाजिक न्याय नहीं, बल्कि वर्गीय समीकरण देखे जा रहे हैं।
    “अगर समाज को नहीं बांटना था, तो टिकट देने में अमीर-गरीब का पैमाना कैसे आ गया ?” – यह सवाल पूछते हुए मंत्री ने कहा कि धर्म और जाति के नाम पर देश को पहले भी नुकसान हुआ है और यह राजनीति अब अपने अंतिम चरण में है।

    उन्होंने उपस्थित जनसमूह से अपील की कि वे मेयर प्रत्याशी प्रमिला मेहरा को समर्थन दें और गिरिडीह के विकास के लिए एकजुट होकर मतदान करें।

    “गिरिडीह की बेटी और बहू” – संजय सिंह.

    झामुमो जिलाध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि पार्टी ने मेयर पद के लिए प्रमिला मेहरा को समर्थन दिया है क्योंकि वे गिरिडीह की बेटी और बहू हैं, और सामाजिक-राजनीतिक जीवन में उनका लंबा अनुभव रहा है।

    उन्होंने मतदाताओं को आगाह करते हुए कहा कि चुनाव मैदान में कुछ ऐसे लोग भी हैं जिन पर फर्जी प्रमाण पत्र का आरोप है। “ऐसे उम्मीदवारों से सावधान रहिए और सोच-समझकर अपना मत दीजिए,”

    “आपका एक वोट बदल सकता है शहर की तस्वीर” – प्रमिला मेहरा॰

    मेयर प्रत्याशी प्रमिला मेहरा ने अपने संबोधन में भावुक अपील की। उन्होंने कहा,
    “आप सभी अपने मत का प्रयोग अवश्य करें। चुनाव के दिन सोच-समझकर फैसला लें। अगर आप गिरिडीह की तस्वीर बदलना चाहते हैं, तो मुझे अपना आशीर्वाद और समर्थन दें।”

    उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि जनता का समर्थन मिला, तो शहर के बुनियादी मुद्दों—पेयजल, सफाई, सड़क और प्रकाश व्यवस्था—पर प्राथमिकता से काम किया जाएगा।

    भाजपा छोड़ झामुमो में वापसी.

    सभा के दौरान एक और राजनीतिक संदेश गया, जब नागेश्वर दास ने भाजपा छोड़कर अपने समर्थकों के साथ पुनः झामुमो का दामन थाम लिया। पार्टी नेताओं ने फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया। नागेश्वर दास ने मंच से प्रमिला मेहरा को  समर्थन की घोषणा की।

    सभा को झामुमो जिला उपाध्यक्ष अजीत कुमार पप्पू, शाहनवाज अंसारी, सुनील यादव, जिला प्रवक्ता कृष्ण मुरारी शर्मा, जिला सह सचिव दिलीप रजक सहित कई नेताओं ने भी संबोधित किया।

    कार्यक्रम में महानगर अध्यक्ष राकी सिंह, विकास सिन्हा, रामजी यादव, सुनील पासवान, मंगल सिंह, प्रवीण राय, महबूब आलम तुफान, मो. इम्तियाज, अजीत कुमार सिन्हा, राकेश कुमार सिंह, मोनू सिंह, मेहताब मिर्जा, विशाल मंडल, सुनील दास, रामचंद्र दास, कमल दास, सुखदेव दास, चंचला देवी, हरि मरांडी, अमजद अंसारी समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे।

    राजनीतिक तापमान चढ़ा.

    माथाडीह का यह मिलन समारोह साफ संकेत दे गया कि नगर निगम चुनाव अब केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं है। जाति, धर्म और सामाजिक समीकरणों की बहस के बीच चुनावी लड़ाई और तीखी होती जा रही है।

    अब देखना यह है कि जनता विकास के वादों को प्राथमिकता देती है या राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की इस आंधी में कोई नया समीकरण उभरता है।

  • प्रमिला मेहरा का जनसंपर्क तेज, बोलीं— “बेटी को मौका दीजिए, शहर को नई दिशा मिलेगी”

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह: नगर निगम चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, सियासी सरगर्मी भी तेज होती जा रही है। इसी कड़ी में महापौर प्रत्याशी प्रमिला मेहरा ने शहर के विभिन्न मोहल्लों में जोरदार जनसंपर्क अभियान चलाया। घर-घर पहुंचकर उन्होंने लोगों से आशीर्वाद मांगा और भावनात्मक अपील करते हुए कहा, “आपकी बेटी, आपकी बहन चुनाव मैदान में है। अगर आप मुझे मेयर बनाते हैं तो गिरिडीह का समुचित और संतुलित विकास सुनिश्चित करूंगी।”

    जनसंपर्क के दौरान प्रमिला मेहरा ने स्थानीय समस्याओं—जल संकट, सफाई व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं—को प्रमुख मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि वह शहरी क्षेत्र की परेशानियों से भली-भांति परिचित हैं और मेयर बनने के बाद निश्चित समय सीमा में समाधान सुनिश्चित करेंगी।

    महाशिवरात्रि के अवसर पर उन्होंने विभिन्न मंदिरों में महादेव की पूजा-अर्चना कर शहर की सुख-समृद्धि की कामना भी की।

    रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग होगा प्राथमिक एजेंडा.

    प्रमिला मेहरा ने अपने विज़न को स्पष्ट करते हुए कहा कि गिरिडीह नगर निगम क्षेत्र में रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था लागू की जाएगी, ताकि लगातार गिरते भूजल स्तर को रोका जा सके। उनका दावा है कि इससे आने वाले वर्षों में शहर को पानी की समस्या से बड़ी राहत मिलेगी।

    उन्होंने “हर घर नल जल” की व्यवस्था सुनिश्चित करने का भी वादा किया और कहा कि जल संकट का स्थायी समाधान उनकी प्राथमिकता में सबसे ऊपर है।

    समर्थकों का दिखा उत्साह.

    जनसंपर्क अभियान में इरशाद अहमद वारिस , नऔषद अहमद चांद ,राकेश कुमार राकी, अभय सिंह, सुमेर वर्मा, रौनक मिश्रा, अभय कुमार, सन्नी सिंह, विवेक सिन्हा, नंदकिशोर सिंह, बासुदेव यादव, मो. इम्तियाज, उमेश यादव, अंजली सोरेन, नंदू सिंह, गीता शर्मा, प्रमिला कुमारी, सुशील शर्मा, शाहनवाज अंसारी, मो. तुफान, सोनू एजाज, अल्कामा, मो. वसीम राजा, मो. पप्पू सहित दर्जनों समर्थक मौजूद रहे।

    चुनावी मौसम में अब देखना दिलचस्प होगा कि जनता “बेटी” की इस अपील को कितना समर्थन देती है और शहर की सरकार की सत्ता की चाबी किसके हाथों में जाती है।

  • निकाय  चुनाव “गैर-दलीय” है… लेकिन सियासत पूरी तरह दलीय हो चुकी है।

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू .
    राज्य के 48 शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव इस बार सीधे मुकाबले से निकलकर त्रिकोणीय जंग में बदल गए हैं। 23 फरवरी को मतदान होगा और चार दिन बाद तस्वीर साफ हो जाएगी। पांच साल बाद हो रहे इन चुनावों की खास बात यह है कि ये कागज़ पर गैर-दलीय हैं, लेकिन ज़मीन पर राजनीतिक दल पूरी ताकत के साथ मैदान में हैं।

    सत्तारूढ़ इंडिया ब्लॉक के दो बड़े चेहरे—झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कांग्रेस—अब आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। संयुक्त उम्मीदवार पर सहमति नहीं बन पाई, और नतीजा यह कि दोनों दलों ने नौ नगर निगमों में महापौर पद के लिए अपने-अपने समर्थित उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया। इसके साथ ही 20 नगर परिषदों और 19 नगर पंचायतों में अध्यक्ष पद के लिए भी खुला समर्थन दिया गया है।

    गैर-दलीय चुनाव, पर दलीय रणनीति

    8 फरवरी को नाम वापसी की आखिरी तारीख बीतते ही तस्वीर साफ हो गई—गठबंधन की एकजुटता यहां नहीं दिखेगी। हालांकि, कांग्रेस और जेएमएम दोनों इसे “मतभेद” मानने से इनकार कर रहे हैं।
    कांग्रेस प्रवक्ता का कहना है—“यह विधानसभा या लोकसभा चुनाव नहीं है। यहां मुद्दे मोहल्लों के हैं, नालियों और सड़कों के हैं, हर वार्ड की अपनी प्राथमिकताएं हैं।”
    जेएमएम प्रवक्ताभी यही तर्क देते हैं—“जब चुनाव पार्टी चिन्ह पर नहीं हो रहा, तो स्थानीय चेहरा और उसकी स्वीकार्यता ज्यादा मायने रखती है।”

    लेकिन सवाल यह है कि अगर चुनाव पूरी तरह स्थानीय है, तो फिर इतने बड़े पैमाने पर दलों की सक्रियता क्यों?

    बीजेपी की शहरी पकड़

    राज्य के प्रमुख शहरी केंद्र—रांची, जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो, देवघर, हजारीबाग, गिरिडीह और मेदिनीनगर—परंपरागत रूप से भाजपा के प्रभाव वाले क्षेत्र रहे हैं। एनडीए खेमे में भाजपा को अपने सहयोगियों एजेएसयू, जद(यू) और लोजपा (रामविलास) से खास चुनौती नहीं दिख रही।

    यानी मुकाबला असल में तीन कोनों वाला है—भाजपा, जेएमएम और कांग्रेस।

    जेएमएम की शहरी परीक्षा

    अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि यह दरअसल जेएमएम का “अर्बन एक्सपेरिमेंट” है। 81 सदस्यीय विधानसभा में जेएमएम की 34 सीटों में से करीब 90 प्रतिशत ग्रामीण इलाकों से आती हैं। ग्रामीण इलाकों में मजबूत पकड़ के बावजूद बड़े शहरों में पार्टी अब तक सीमित रही है।

    छह साल से सत्ता में रहने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में जेएमएम अब शहरों में भी अपनी जमीन तलाश रही है। यही वजह है कि पार्टी ने कई मजबूत स्थानीय चेहरों—यहां तक कि दूसरे दलों के बागी नेताओं—को भी समर्थन दिया है।

    गठबंधन पर असर?

    क्या यह नगर निकाय चुनाव भविष्य में इंडिया ब्लॉक की एकता को प्रभावित करेगा?
    फिलहाल दोनों दल इसे महज़ स्थानीय रणनीति बता रहे हैं। लेकिन राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर नतीजे चौंकाने वाले रहे, तो इसका असर 2029 की बड़ी लड़ाइयों तक महसूस किया जा सकता है।

    फिलहाल तस्वीर साफ है—
    चुनाव भले ही “गैर-दलीय” हो,
    लेकिन सियासत पूरी तरह “दलीय” है।

    23 फरवरी को मतदाता तय करेंगे कि शहरों की कमान किसके हाथ जाएगी—परिणाम सिर्फ मेयर और अध्यक्ष नहीं चुनेंगे, बल्कि यह भी बताएंगे कि झारखंड की शहरी राजनीति किस करवट बैठ रही है।

     

  • JMM की हो गयी शालिनी, कोडरमा की पूर्व जिप अध्यक्ष रही है

    CM हेमंत सोरेन की मोजूदगी मे ली सदस्यता

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    कोडरमा / गिरिडीह :  कोडरमा की सियासी ज़मीन पर आज झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपनी ताकत का खुला प्रदर्शन किया। झामुमो के सदस्यता समारोह में खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मौजूद रहे, और इसी मंच से राजनीति की एक अहम तस्वीर भी साफ हो गई।

    जिला परिषद की पूर्व अध्यक्ष और आजसू की वरिष्ठ नेत्री शालिनी गुप्ता ने गुरुवार को सैकड़ों समर्थकों के साथ झामुमो का दामन थाम लिया। मंच पर मौजूद थे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू—और माहौल था पूरी तरह सियासी उत्साह से भरा हुआ।

    कोडरमा में आयोजित इस सदस्यता समारोह में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने शालिनी गुप्ता को औपचारिक रूप से झामुमो की सदस्यता दिलाई। कार्यक्रम में झामुमो कार्यकर्ताओं के साथ बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी मौजूद रहे, जो इस बदलाव को अपने आप में बड़ा संकेत मान रहे हैं।
    हेमंत सोरेन ने पार्टी में शामिल होने वाले सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं का स्वागत करते हुए कहा कि यह झामुमो के बढ़ते कुनबे और जनता के मजबूत भरोसे का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता लगातार झामुमो की नीतियों और सरकार के काम पर भरोसा जता रही है।

    वहीं, झामुमो में शामिल होने के बाद शालिनी गुप्ता ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार के कामकाज की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि झामुमो की सरकार आदिवासी, मूलवासी समेत समाज के हर वर्ग का ख्याल रख रही है और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में झारखंड विकास की सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।
    शालिनी गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री के विकास कार्यों से प्रभावित होकर उन्होंने यह फैसला लिया। साथ ही उनके क्षेत्र के कार्यकर्ताओं की भी यही इच्छा थी, और उसी भावना का सम्मान करते हुए उन्होंने झामुमो में शामिल होने का निर्णय लिया।

    सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पार्टी के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन को याद किया। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने का जो सपना देखा गया था, वह आज जमीन पर उतरता दिखाई दे रहा है।
    मुख्यमंत्री ने दावा किया कि राज्य के हर गांव तक विकास योजनाएं पहुंच रही हैं और सरकार सभी वर्गों को साथ लेकर काम कर रही है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि झारखंड के विकास को देखकर भाजपा असहज है और केंद्र सरकार द्वारा राज्य की योजनाओं की राशि रोकी जा रही है।

    महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने ‘मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना’ समेत कई जनकल्याणकारी योजनाओं का जिक्र किया। साथ ही भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में झारखंड में कई कंपनियां निवेश करेंगी, जिससे युवाओं को रोजगार और नौकरी के नए अवसर मिलेंगे।

    कुल मिलाकर, कोडरमा से उठी यह सियासी तस्वीर साफ संकेत दे रही है—झामुमो लगातार अपना दायरा बढ़ा रहा है, और आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति और भी दिलचस्प होने वाली है।

     

  • झारखंड विधानसभा मानसून सत्र की तैयारी तेज़,1 अगस्त से 7 अगस्त तक चलेगा सत्र

    अध्यक्ष ने दिए सख्त निर्देश, मंत्री की चिंता

    The News Post4u.

    झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र 1 अगस्त से 7 अगस्त तक चलेगा और इसे सुचारु व व्यवस्थित रूप से संचालित करने के लिए बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष रवीन्द्रनाथ महतो की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में संसदीय कार्य मंत्री सह वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, मुख्य सचिव अलका तिवारी, पुलिस महानिदेशक अनुराग गुप्ता, रांची के एसएसपी व डीआईजी चंदन कुमार सिन्हा, सभी विभागों के सचिव, जनसंपर्क विभाग के प्रतिनिधि और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

    अध्यक्ष ने दिए निर्देश.

    विधानसभा अध्यक्ष रवीन्द्रनाथ महतो ने अधिकारियों से कहा कि सत्र के दौरान किसी भी प्रकार की तकनीकी, प्रशासनिक या सुरक्षा संबंधी समस्या नहीं आनी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी विभाग समय से पहले तैयारी पूरी कर लें और विधानसभा में आने वाले सभी प्रश्नों के उत्तर तय समयसीमा में उपलब्ध कराएं।

    सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि विधानसभा परिसर की सुरक्षा पूरी तरह चाक-चौबंद होनी चाहिए। आगंतुकों के लिए पास प्रणाली को और सख्त करने तथा CCTV निगरानी को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। उन्होंने आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए एक विशेष त्वरित प्रतिक्रिया दल को तैयार रखने की बात कही।

    इसके अलावा, उन्होंने सदन की कार्यवाही के डिजिटलीकरण, ध्वनि प्रणाली की गुणवत्ता, लाइव प्रसारण, मीडिया कवरेज, विधायकों की सुविधा और आगंतुक प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान देने को कहा।

    मीडिया और समन्वय पर विशेष ध्यान.

    अध्यक्ष ने मीडिया प्रतिनिधियों के लिए उचित स्थान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि वे बिना किसी असुविधा के सदन की कार्यवाही को कवर कर सकें। साथ ही, सभी विभागों को सत्र के दौरान आपसी समन्वय बनाए रखने का निर्देश दिया गया ताकि जनहित के मुद्दों पर प्रभावी और सार्थक चर्चा हो सके। उन्होंने कहा कि इस बार का सत्र कई महत्वपूर्ण जनहित विषयों पर आधारित होगा, इसलिए सभी संबंधित पक्षों को इसकी गरिमा बनाए रखनी होगी।

    संसदीय कार्य मंत्री की चिंता.

    बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने प्रशासनिक लापरवाही पर नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि पिछले बजट सत्र में शून्यकाल के तहत 391 प्रश्न पूछे गए थे, लेकिन अब तक केवल 31 प्रश्नों के उत्तर प्राप्त हुए हैं। आश्वासन समिति में 1371 मामले लंबित हैं और निवेदन समिति में 135 में से केवल 9 मामलों के ही उत्तर मिले हैं।

    उन्होंने कहा कि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और इससे यह स्पष्ट होता है कि कार्यपालिका सदन के प्रति गंभीर नहीं है। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि जबतक कार्यपालिका समयबद्ध उत्तर नहीं देती, तब तक सदन की गरिमा और उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठते रहेंगे।

    इस बैठक के माध्यम से विधानसभा अध्यक्ष और संसदीय कार्य मंत्री ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि इस बार का सत्र पूरी तैयारी और पारदर्शिता के साथ संचालित किया जाएगा। जनहित के सवालों पर गंभीरता से चर्चा हो और विधायकों को संतोषजनक जवाब मिले — यही सत्र की प्राथमिकता रहेगी।

     

  • हेमंत सरकार द्वारा अटल क्लिनिक का नाम बदलने पर भड़की बीजेपी

    रघुवर दास ने कहा- सरकार की मानसिक दिवालियापन की निशानी.

    The News Post4u.

    झारखंड में अटल क्लिनिक का नाम बदलकर “मदर टेरेसा एडवांस हेल्थ क्लिनिक” रखने के फैसले के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जमकर विरोध जताया है। शुक्रवार  को राज्य के कई जिलों में भाजपा कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया।

    पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, “अटल बिहारी वाजपेयी जी जैसे महान नेता के नाम पर शुरू की गई स्वास्थ्य योजना का नाम बदलना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और सरकार की गिरती मानसिकता को दिखाता है। सरकार ओछी राजनीति कर रही है।”

    रघुवर दास ने कहा कि वे मदर टेरेसा का सम्मान करते हैं, लेकिन कुछ संस्थाओं के जरिए उनके नाम पर जो काम हुए, वह देश जानता है। उन्होंने आरोप लगाया कि “निर्मल हृदय” संस्था पर नवजात बच्चों की बिक्री जैसे गंभीर आरोप लगे थे। ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि क्या यह नाम परिवर्तन धर्मांतरण की चल रही गतिविधियों से जुड़ा हुआ कदम तो नहीं है?

    उन्होंने आगे कहा कि “यह फैसला अटल जी जैसे राष्ट्र निर्माता को जनता की स्मृति से मिटाने की एक साजिश लगती है। न तो आदिवासी समाज और न ही आम जनता इसे स्वीकार करेगी।”

    पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि अगर सरकार मदर टेरेसा के नाम पर योजना शुरू करना चाहती थी, तो वह नई योजना लेकर आती। उन्होंने कहा, “पुरानी योजनाओं का नाम बदलकर अपनी नाकामी छुपाने का काम हो रहा है। सरकार स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर कुछ नया करने में असफल रही है।”

    रघुवर दास ने याद दिलाया कि “16 अगस्त 2019 को अटल जी की पुण्यतिथि पर गरीबों को सस्ती और अच्छी स्वास्थ्य सेवा देने के लिए अटल क्लिनिक की शुरुआत की गई थी।” उन्होंने सरकार से मांग की कि “वह अटल क्लिनिक का नाम वापस बहाल करे और इस तरह के राजनीतिक निर्णयों से बचे।”