रामगढ़/नेमरा/रांची: झारखंड की राजनीति के पुरोधा, आदिवासी अस्मिता के प्रतीक दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि देने के लिए आज नेमरा गांव में श्रद्धालुओं और नेताओं का सैलाब उमड़ पड़ा। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के पैतृक आवास पर सुबह से ही लोगों का आना-जाना जारी रहा, जहां आमजन से लेकर देश के बड़े नेता तक श्रद्धा-सुमन अर्पित करने पहुंचे।
अखिलेश यादव का भावुक पल.
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व सांसद अखिलेश यादव मंगलवार को नेमरा पहुंचे। उन्होंने दिवंगत नेता की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन, विधायक कल्पना सोरेन, विधायक बसंत सोरेन समेत परिवार के अन्य सदस्यों से मुलाकात की और गहरी संवेदनाएं प्रकट कीं। मुलाकात के दौरान वे रूपी सोरेन से बातचीत करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन का जीवन संघर्ष, सेवा और जनहित के लिए समर्पण का प्रतीक रहा है, जिसे देश और झारखंड कभी नहीं भूल पाएगा।
चंद्रशेखर आज़ाद ने भी दी श्रद्धांजलि.
इससे पहले नगीना लोकसभा से सांसद और भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद भी मुख्यमंत्री के पैतृक आवास पहुंचे। उन्होंने गुरुजी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना की। चंद्रशेखर आज़ाद ने शोक-संतप्त परिवार को सांत्वना देते हुए इस कठिन घड़ी को सहने की शक्ति प्रदान करने की कामना की।
नेमरा में उमड़ी भीड़, गुरुजी को जननायक के रूप में किया याद.
श्रद्धांजलि देने वालों में राजनीतिक नेता, सामाजिक कार्यकर्ता, व्यापारी, वकील, किसान, मजदूर और आम ग्रामीण बड़ी संख्या में मौजूद थे। सभी ने गुरुजी को ‘जननायक’ के रूप में याद किया और कहा कि उनका जीवन आदिवासी, वंचित और शोषित समाज की आवाज़ बनकर बीता। आज उनके श्राद्ध कर्म के सातवें दिन सुबह से ही नेमरा गांव में भीड़ उमड़नी शुरू हो गई थी। घर के आंगन से लेकर आस-पास की गलियों तक लोगों की कतारें लगी थीं।
स्वतंत्रता दिवस समारोह में बदलाव.
इसी बीच, रांची से यह खबर आई कि 15 अगस्त को मोरहाबादी मैदान में ध्वजारोहण मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की जगह राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार करेंगे। परंपरा के अनुसार, हर साल स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यमंत्री रांची में और राज्यपाल दुमका में ध्वजारोहण करते हैं। लेकिन इस बार मुख्यमंत्री के पारिवारिक शोक के कारण यह बदलाव किया गया है। राजभवन से जारी सूचना में बताया गया कि राज्य सरकार के प्रस्ताव पर राज्यपाल ने स्वीकृति दे दी है। साथ ही, इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में राजभवन में होने वाला पारंपरिक ‘एट होम’ कार्यक्रम भी रद्द कर दिया गया है, जो कि गुरुजी के सम्मान में लिया गया निर्णय है।
गुरुजी की विरासत अमर रहेगी.
नेमरा में मौजूद लोगों का कहना था कि शिबू सोरेन न सिर्फ एक नेता थे, बल्कि संघर्ष, सादगी और सेवा की मिसाल थे। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
गिरिडीह, झारखंड: गांडेय विधानसभा क्षेत्र में गुरुवार का दिन विकास, महिला सशक्तिकरण और प्रेरणा से भरा रहा, जब क्षेत्रीय विधायक और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की धर्मपत्नी कल्पना सोरेन ने एक दिवसीय दौरे के दौरान कई योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। उन्होंने गांव-गांव जाकर न केवल विकास कार्यों का जायजा लिया, बल्कि युवाओं और महिलाओं से संवाद कर उन्हें आत्मनिर्भरता और शिक्षा के लिए प्रेरित किया।
महिलाओं के हाथों में आर्थिक मजबूती की बागडोर.
दौरे की शुरुआत कर्णपुरा पंचायत में सखी मंडल की दीदियों द्वारा संचालित आटा उत्पादन केंद्र के निरीक्षण से हुई। कल्पना सोरेन ने झारखंड सरकार की “अबुआ सरकार” की सराहना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं और आज वे अपने पैरों पर खड़ी होकर आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं।
इस दौरान चपुआडीह पंचायत भवन में जेएसएलपीएस के तहत गठित सखी मंडलों के बीच 2 लाख 63 हजार रुपये की परिसंपत्तियों का वितरण किया गया। इसके अलावा जेएलपीएस द्वारा निर्मित आटा मील और वन विभाग द्वारा बनाए गए रेस्ट हाउस का भी उद्घाटन किया गया।
24.90 करोड़ की लागत से बनेगा महिला इंटर कॉलेज, स्टेडियम की भी सौगात.
गांडेय विधानसभा के अंतर्गत बेंगाबाद प्रखंड के महुआर गांव में कल्पना सोरेन ने 24.90 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले महिला इंटर कॉलेज की आधारशिला रखी। वहीं कर्णपुरा पंचायत में 6 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले मिनी स्टेडियम का शिलान्यास भी किया गया।
ग्रामीणों के बीच 10 लाख रुपये की परिसंपत्ति का वितरण कर कल्पना सोरेन ने यह भी संदेश दिया कि झारखंड सरकार गांवों के विकास और महिलाओं की आर्थिक मजबूती को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।
बेंगाबाद +2 स्कूल में छात्रों से संवाद: शिक्षा ही असली ताकत.
दौरे का एक अहम पड़ाव रहा बेंगाबाद +2 उच्च विद्यालय, जहां कल्पना सोरेन ने विद्यार्थियों के साथ संवाद कर उन्हें शिक्षा के प्रति प्रेरित किया। एक मोटिवेशनल सत्र के दौरान उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि कठिन परिश्रम, अनुशासन और आत्मविश्वास ही सफलता की असली कुंजी हैं।
“जीवन में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। पढ़ाई के प्रति ईमानदारी और निरंतर प्रयास ही आपको आगे ले जा सकते हैं,” – कल्पना सोरेन ने विद्यार्थियों से कहा।
छात्रों ने भी खुलकर सवाल पूछे और कल्पना सोरेन ने सहजता से हर सवाल का उत्तर देकर उनका आत्मबल बढ़ाया। यह सत्र छात्रों के लिए प्रेरणादायक साबित हुआ।
अधिकारियों के साथ समन्वय और योजनाओं की समीक्षा.
गिरिडीह पहुंचने के बाद कल्पना सोरेन ने सबसे पहले परिषदन भवन में जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक कर विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकारी योजनाओं का लाभ हर ज़रूरतमंद तक समयबद्ध रूप से पहुँचे।
उपस्थित रहे कई वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि.
इस मौके पर उपायुक्त राम निवास यादव, एसपी डॉ. विमल कुमार, डीडीसी स्मृता कुमारी, डीएसई वसीम अहमद, झामुमो जिलाध्यक्ष संजय सिंह, प्रणव वर्मा समेत कई वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षकगण और स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
जनता से जुड़ाव और सकारात्मक माहौल.
कल्पना सोरेन का यह दौरा केवल योजनाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह लोगों के बीच एक भावनात्मक जुड़ाव और भरोसे का प्रतीक भी बना। चाहे सखी मंडल की दीदियों से बातचीत हो, बच्चों को प्रेरणा देना हो या अधिकारियों से योजनाओं की समीक्षा – हर पहलु में कल्पना सोरेन का जमीनी जुड़ाव झलका।
गांडेय में यह दौरा महिलाओं, युवाओं और ग्रामीण विकास के लिए एक सार्थक कदम के रूप में देखा जा रहा है, जिससे क्षेत्र में सकारात्मक माहौल बना और अब आने वाले समय में इसके प्रभाव भी ज़मीन पर नज़र आएंगे।
दिल्ली/रांची: झारखंड की राजनीति के पितामह और झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के संस्थापक दिशोम गुरु शिबू सोरेन की तबीयत में सुधार की खबर ने पूरे राज्य में राहत की सांस ली है। दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में पिछले एक सप्ताह से भर्ती 81 वर्षीय वरिष्ठ नेता ने रविवार को अपनी आंखें खोलीं। यह क्षण न केवल उनके परिवार के लिए भावनात्मक रहा, बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए भी बेहद सुखद रहा।
प्रार्थनाओं का असर: मंदिरों से अस्पताल तक दुआओं का सिलसिला.
बीते कई दिनों से झारखंड के कोने-कोने में उनके स्वास्थ्य लाभ की कामनाओं के साथ पूजा-अर्चना का दौर जारी था। जेएमएम और कांग्रेस के कार्यकर्ता मंदिरों, गुरुद्वारों और मस्जिदों में जाकर शांति और शक्ति की कामना कर रहे थे। रांची में रथयात्रा के अवसर पर कार्यकर्ताओं ने शिबू सोरेन की तस्वीर के साथ प्रार्थना सभा आयोजित कर उनके दीर्घायु और शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए विशेष पूजा की। मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने फ़ेस बुक बॉल पर लिखा आदरणीय बाबा दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी अस्वस्थ हैं और वर्तमान में दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में उनका उपचार चल रहा है। झामुमो के कार्यकर्ताओं और राज्य के वंचित वर्गों के लिए, वे एक महत्वपूर्ण आशा की किरण हैं। इस चुनौतीपूर्ण समय में, मरांग बुरु दिशोम मांझी थान में मरांग बुरु संस्थान, आदिवासी समाज और उनके समर्पित कार्यकर्ताओं द्वारा उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए बोंगा बुरु (पूजा पाठ) का आयोजन किया गया है। हमारी ईश्वर से प्रार्थना है कि बाबा जल्द स्वस्थ होकर हमारे बीच वापस आएं। मंत्री ने पुजा करते कार्यकर्ताओं की तस्वीर भी साझा की है ।
दिल्ली में परिवार जुटा, गुरुजी की सेवा में दिन-रात लगे हैं हेमंत सोरेन.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, उनकी पत्नी और दुमका से विधायक कल्पना सोरेन, तथा परिवार के अन्य सदस्य बीते सप्ताह भर से दिल्ली में मौजूद हैं और अस्पताल में लगातार उनके साथ समय बिता रहे हैं।
राजनीतिक सीमाओं से परे जाकर कांग्रेस, भाजपा, आरजेडी, वाम दलों के नेताओं ने सर गंगाराम अस्पताल पहुंचकर गुरुजी की तबीयत की जानकारी ली और उनका हालचाल जाना।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की मुलाकात, कहा – ‘गुरुजी जल्द स्वस्थ हों‘
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी सर गंगा राम अस्पताल पहुंचीं और उन्होंने शिबू सोरेन के स्वास्थ्य की जानकारी ली। राष्ट्रपति ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर स्थिति का जायजा लिया और दिशोम गुरु के शीघ्र स्वस्थ होने की ईश्वर से कामना की।
हल्के पैरालिटिक अटैक के बाद हुए थे भर्ती, मेडिकल निगरानी में जारी है इलाज.
जानकारी के अनुसार, शिबू सोरेन को कुछ दिन पहले हल्का पैरालाइसिस अटैक आया था, जिसके बाद उन्हें फौरन दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया। वह पहले से ही किडनी से जुड़ी बीमारी और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। अस्पताल के न्यूरोलॉजी और नेफ्रोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम लगातार उनकी देखभाल कर रही है।
शिबू सोरेन न सिर्फ झारखंड आंदोलन का चेहरा रहे हैं, बल्कि जनजातीय अस्मिता और अधिकारों की लड़ाई के प्रतीक भी हैं। उनके स्वास्थ्य में सुधार की खबर उनके लाखों समर्थकों और राज्य की जनता के लिए एक नई उम्मीद की किरण बनकर आई है।
सर गंगाराम अस्पताल में चल रहा है शिबू सोरेन का इलाज
राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री समेत कई नेता हालचाल लेने पहुंचे
हल्का पैरालिसिस अटैक की पुष्टि
झारखंड में पार्टी कार्यकर्ताओं ने शुरू की प्रार्थनाएं
रघुवर दास और इरफान अंसारी ने जताई चिंता
परवेज़ आलम. पॉलिटिकल करेसपांडेन्ट. The News Post4u
झारखंड के वरिष्ठ नेता, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक और दिशोम गुरु शिबू सोरेन की तबीयत खराब है, दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में उनका चल रहा है इलाज । अस्पताल में उनका इलाज नेफ्रोलॉजी विभाग के वरिष्ठ डॉक्टर एके भल्ला की टीम कर रही है। बताया जा रहा है कि उन्हें किडनी संबंधी समस्या है और इलाज के दौरान उन्हें हल्का पैरालिसिस अटैक भी आया है।
मुख्यमंत्री और परिवार का दिल्ली में डेरा.
शिबू सोरेन की गंभीर स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, उनकी पत्नी कल्पना सोरेन और विधायक बसंत सोरेन लगातार दिल्ली में मौजूद हैं और डॉक्टरों की देखरेख में इलाज की प्रक्रिया पर निगरानी बनाए हुए हैं। मुख्यमंत्री लगातार अपने पिता की सेहत की जानकारी ले रहे हैं।
राष्ट्रपति और स्वास्थ्य मंत्री ने जाना हालचाल.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को सर गंगाराम अस्पताल जाकर शिबू सोरेन का हालचाल जाना था वहीं, झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी भी कांग्रेस के सह प्रभारी बेला प्रसाद के साथ दिल्ली पहुंचे। वे दोनों संथाल परगना के दौरे पर थे, लेकिन कांग्रेस के प्रभारी के. राजू के निर्देश पर वे दौरा छोड़कर तुरंत दिल्ली रवाना हो गए।
डॉ. इरफान अंसारी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर बताया कि यह उनका नैतिक दायित्व है कि वे इस कठिन समय में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके परिवार के साथ रहें। उन्होंने यह भी कहा कि गुरुजी को स्वस्थ करके वापस लाना उनका संकल्प है।
रघुवर दास ने भी जताई चिंता.
पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी शिबू सोरेन की तबीयत को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से फोन पर बात की और गुरुजी की तबीयत की जानकारी ली। बाद में रघुवर दास ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्हें हल्का पैरालिसिस अटैक आया है, और वे भगवान जगन्नाथ से उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हैं।
पूरे झारखंड में दुआओं का दौर.
झारखंड में जेएमएम के नेता और कार्यकर्ता शिबू सोरेन की सलामती के लिए विशेष प्रार्थनाएं कर रहे हैं। शुक्रवार को रांची के ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर में रथयात्रा के अवसर पर जेएमएम प्रवक्ता मनोज पांडेय की अगुवाई में पार्टी कार्यकर्ताओं ने गुरुजी की तस्वीर के साथ पूजा-अर्चना की और उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। झारखंड के हर कोने से लोग गुरुजी के स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं। प्रदेश की राजनीति में उनके योगदान को देखते हुए आम जनता से लेकर बड़े नेता तक, सब उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना में लगे हैं।
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक शिबू सोरेन की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 81 वर्षीय सोरेन लंबे समय से किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं और इस बार उनकी हालत कुछ ज्यादा गंभीर हो गई है। फिलहाल उन्हें अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग के चेयरमैन डॉ. ए.के. भल्ला की निगरानी में रखा गया है। डॉक्टरों के मुताबिक उनकी स्थिति स्थिर है, लेकिन पूरी तरह से खतरे से बाहर नहीं कही जा सकती
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की मुलाकात, जताई चिंता.
जैसे ही शिबू सोरेन के अस्वस्थ होने की खबर सामने आई, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू खुद सर गंगाराम अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने ‘दिशोम गुरु’ के नाम से प्रसिद्ध शिबू सोरेन से मुलाकात की और उनकी सेहत के बारे में जानकारी ली। राष्ट्रपति ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की और उन्हें देश की एक अमूल्य धरोहर बताया। इस दौरान झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन भी अस्पताल में मौजूद रहे।
राज्यपाल संतोष गंगवार ने भी जाना हाल.
इससे पहले झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार भी दिल्ली पहुंचे और अस्पताल जाकर शिबू सोरेन से मुलाकात की। उन्होंने डॉक्टरों से इलाज की स्थिति पर बातचीत की और सोशल मीडिया पर ट्वीट कर लिखा कि दिशोम गुरु की हालत को लेकर वे चिंतित हैं और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हैं।
झारखंड की राजनीति के स्तंभ हैं शिबू सोरेन.
शिबू सोरेन झारखंड की राजनीति का एक बड़ा नाम हैं। आदिवासी अधिकारों की लड़ाई से लेकर झारखंड को बिहार से अलग राज्य के रूप में स्थापित करने तक, उन्होंने हमेशा संघर्ष का रास्ता अपनाया। वे तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और एक बार केंद्रीय कोयला मंत्री भी बने थे। आदिवासी समाज में उन्हें सम्मान से ‘दिशोम गुरु’ यानी ‘देश का गुरु’ कहा जाता है।
परिवार और जनता की दुआएं.
अस्पताल में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन लगातार शिबू सोरेन की देखरेख कर रहे हैं। हेमंत सोरेन ने झारखंड की जनता से अपील की है कि वे उनके पिता के लिए दुआ करें। सोशल मीडिया से लेकर गांव-शहरों तक, लोग दिशोम गुरु की सलामती की प्रार्थना कर रहे हैं।
उम्मीद की जा रही है कि झारखंड के इस पुरोधा नेता की तबीयत जल्द सुधरे और वे एक बार फिर स्वस्थ होकर अपने राज्यवासियों के बीच लौटें।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मंगलवार को अचानक दिल्ली के लिए रवाना हुए। उनके दिल्ली दौरे की वजह उनके पिता और झारखंड आंदोलन के प्रणेता, राज्यसभा सांसद शिबू सोरेन की तबीयत है। फिलहाल शिबू सोरेन दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती हैं। बताया जा रहा है कि उन्हें रूटीन चेकअप के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया है, लेकिन परिजन और पार्टी की ओर से अभी तक स्वास्थ्य को लेकर कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने पिता का हाल जानने के लिए दिल्ली पहुंचे हैं। इससे पहले दो दिन पहले ही उनकी पत्नी और गांडेय से विधायक कल्पना सोरेन भी दिल्ली पहुंची थीं। लगातार दिल्ली से हो रही हलचलों के बीच यह साफ है कि सोरेन परिवार शिबू सोरेन के स्वास्थ्य को लेकर सजग है, लेकिन अभी तक किसी भी स्तर पर यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि उनकी तबीयत कितनी गंभीर है।
सूत्रों की मानें तो शिबू सोरेन को कुछ दिन पहले ही स्वास्थ्य जांच के लिए दिल्ली लाया गया था। उम्रजनित बीमारियों और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया है। हालांकि, अब तक मुख्यमंत्री कार्यालय या पार्टी की ओर से कोई अधिकारिक मेडिकल बुलेटिन जारी नहीं किया गया है।
चाईबासा/लातेहार – झारखंड के ग्रामीण इलाकों में राशन जैसी बुनियादी जरूरत को हासिल करना अब सिर्फ पात्रता या ज़रूरत की बात नहीं रही। अब इसके लिए आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर और उस पर आने वाला ओटीपी यानी ‘वन टाइम पासवर्ड’ जरूरी हो गया है। यह सुनने में एक तकनीकी प्रक्रिया लग सकती है, लेकिन ज़मीन पर इसके नतीजे भूख, अपमान और असहायता के रूप में सामने आ रहे हैं।
लातेहार जिले की हमीदा बीबी (39) की कहानी इस व्यवस्था की जमीनी सच्चाई बयां करती है। हमीदा जुलाई 2024 में अपने दो नाबालिग बेटों का नाम राशन कार्ड में जुड़वाने के लिए जन सेवा केंद्र गई थीं। लेकिन वहां ऑपरेटर ने उन्हें बताया कि आवेदन को आगे बढ़ाने के लिए उनके आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर आया ओटीपी दर्ज करना होगा। हमीदा ने फोन चेक किया, लेकिन कोई संदेश नहीं आया। कुछ देर बाद पता चला – उनका मोबाइल नंबर आधार से लिंक ही नहीं है।
बदलते नियम, बिना सूचना.
यह समस्या अकेली हमीदा की नहीं है। झारखंड की नई पीडीएस (जन वितरण प्रणाली) गाइडलाइन के तहत अब राशन कार्ड में किसी भी तरह का बदलाव — जैसे सदस्य जोड़ना या हटाना, नाम या उम्र में सुधार — बिना ओटीपी के नहीं हो सकता। पहले तक केवल मुखिया का आधार नंबर और राशन कार्ड नंबर काफी था, लेकिन अब ओटीपी के बिना सिस्टम आगे नहीं बढ़ता।
राज्य के अधिकारी दावा करते हैं कि यह कदम सुरक्षा बढ़ाने और फर्जीवाड़ा रोकने के लिए उठाया गया है। लेकिन गांव की महिलाओं और सीमित संसाधनों वाले परिवारों के लिए यह बदलाव एक नई दीवार बनकर खड़ा हो गया है।
“मुखिया हैं, पर मोबाइल नहीं तो कुछ नहीं कर सकते”
झारखंड के कई हिस्सों में महिलाएं ही घर की मुखिया हैं — यह व्यवस्था राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम की एक प्रगतिशील पहल का हिस्सा है। लेकिन जब आधार से जुड़ा मोबाइल ही नहीं है, तो ये महिलाएं सिस्टम में अदृश्य हो जाती हैं।
सरयू ब्लॉक के चोरहा पंचायत की एक महिला ने बताया कि वह अपनी सास की मृत्यु के बाद घर की मुखिया बनीं, लेकिन महीनों की कोशिश के बाद भी राशन कार्ड में अपना नाम नहीं जुड़वा सकीं। “कई बार प्रखंड और जिला मुख्यालय गई, लेकिन कोई हल नहीं निकला,” उन्होंने कहा, “अब तो हार मान ली है।”
तकनीक बनी बाधा, ना कि समाधान.
आधार और मोबाइल से जुड़ी यह नई अनिवार्यता ग्रामीण महिलाओं के लिए एक ऐसी तकनीकी बाधा बन गई है, जिसे पार करना कई बार असंभव होता है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5, 2019-21) के अनुसार झारखंड में 10% घरों में मोबाइल फोन ही नहीं है। और जिनके पास मोबाइल है भी, वहां अक्सर नंबर निष्क्रिय होते हैं, या किसी पुरुष रिश्तेदार के नाम पर होते हैं।
2023 में NSSO के सर्वे के अनुसार, देश में 10 में से 7 गैर-मोबाइल उपयोगकर्ता महिलाएं हैं। ऐसे में ओटीपी आधारित प्रमाणीकरण की बाध्यता महिलाओं को अपने ही अधिकारों से वंचित कर रही है।
बिचौलियों का खेल, बढ़ती जेब पर चोट.
जहां सिस्टम जटिल है, वहां बिचौलियों की आमद तय मानी जाती है। बरहेट जैसे इलाकों में लोगों से आधार या राशन अपडेट कराने के लिए ₹500 से लेकर ₹1,600 तक वसूले गए। यह वे सेवाएं हैं जो सामान्यतः मुफ्त या न्यूनतम शुल्क पर उपलब्ध होनी चाहिए थीं।
कई लोगों को अपने दस्तावेज अपडेट कराने के लिए बार-बार प्रखंड कार्यालय जाना पड़ता है, जिससे ना सिर्फ परिवहन खर्च बढ़ता है, बल्कि उस दिन की मजदूरी भी चली जाती है।
क्या राज्य अपने हकदारों को पहचानता है?
राशन, सब्सिडी और जन-कल्याण की योजनाएं कोई उपकार नहीं हैं। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत ये नागरिकों का कानूनी अधिकार हैं — और इसमें सबसे अहम पात्र हैं महिलाएं और गरीब। लेकिन आधार-ओटीपी प्रमाणीकरण जैसे तकनीकी बदलावों ने इन हकदारों को सिस्टम से दूर धकेलना शुरू कर दिया है।
संवेदनशील समाधान की ज़रूरत.
डिजिटलीकरण अपने आप में समस्या नहीं है — समस्या है उसका एकमुश्त और बिना तैयारी के लागू किया जाना। झारखंड सरकार को चाहिए कि वो:
वैकल्पिक प्रक्रिया लागू करे जहां ओटीपी की अनिवार्यता न हो।
मोबाइल-आधार लिंकिंग की प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाए।
ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक आधार केंद्र स्थापित करे।
जन-जागरूकता के माध्यम से पात्र लोगों को बदलावों की जानकारी दे।
और सबसे जरूरी, महिलाओं की डिजिटल पहुंच को प्राथमिकता के साथ मजबूत किया जाए।
जब तक यह सुनिश्चित नहीं किया जाता कि तकनीकी बदलावों का लाभ समाज के सबसे वंचित हिस्से तक पहुंचे — तब तक डिजिटलीकरण भूख, अपमान और असमानता का दूसरा नाम ही बना रहेगा।
*लेखक लिबटेक इंडिया से जुड़े हैं, जो कोलेबरेटिव रिसर्च एंड डिसेमिनेशन (CORD) का एक केंद्र है।
एक छटाक भी खनिज झारखंड से बाहर नहीं जाने दूंगा-हेमंत सोरेन
परवेज़ आलम
झारखंड की सियासत में एक बार फिर केंद्र और राज्य सरकार की तलवारें खिंच गई हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को गिरिडीह में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के 52वें स्थापना दिवस पर केंद्र सरकार को सीधे निशाने पर लिया और 1.36 लाख करोड़ रुपये की बकाया राशि की मांग को लेकर सख्त लहजे में चेतावनी दे डाली।
दिल्ली बनाम झारखंड: सौतेला व्यवहार का आरोप
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंच से साफ कहा कि अगर केंद्र सरकार झारखंड का हक नहीं देती है, तो राज्य की खदानें बंद कर दी जाएंगी। एक छटाक भी खनिज राज्य से बाहर नहीं जाने दिया जाएगा। यह कोई सामान्य बयान नहीं, बल्कि एक बड़े संघर्ष की शुरुआत का ऐलान था। झारखंड खनिज संपदाओं से भरपूर है, लेकिन इसके बावजूद आर्थिक असमानता और सरकारी फंडिंग में भेदभाव की बातें लंबे समय से उठती रही हैं। हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य की आर्थिक बदहाली के लिए पिछली सरकार जिम्मेदार है, लेकिन अब विकास की रफ्तार पकड़ ली गई है।
अबुआ आवास योजना: जब दिल्ली ने पीठ फेर ली तो…
झारखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत राज्य को राशि नहीं मिली, जिससे मजबूरन राज्य सरकार को अपनी योजना शुरू करनी पड़ी। हेमंत सोरेन की सरकार ने अबुआ आवास योजना लॉन्च की, जिससे गरीबों को अपने सिर पर छत नसीब हो सके। यह योजना बताती है कि राज्य सरकार अपने संसाधनों के बलबूते भी जनता को राहत देने को तैयार है। लेकिन यह भी एक हकीकत है कि केंद्रीय सहायता के बिना किसी भी राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं हो सकती।
नीति आयोग की रिपोर्ट: झारखंड की नई उड़ान
हेमंत सोरेन ने कहा कि नीति आयोग भी यह मान रहा है कि झारखंड देश के चार सबसे तेजी से विकास करने वाले राज्यों में से एक है। यह बयान विपक्षी दलों को नागवार गुजर रहा है, क्योंकि झारखंड की यह छवि उनके राजनीतिक एजेंडे में फिट नहीं बैठती। मुख्यमंत्री का यह दावा एक उम्मीद जगाता है कि अगर सही दिशा में योजनाओं का क्रियान्वयन हुआ, तो राज्य गरीबी और पिछड़ेपन के धब्बे से उबर सकता है।
मंईयां योजना पर फर्जीवाड़े का सवाल
महिलाओं के लिए शुरू की गई ‘मंईयां सम्मान योजना’ का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोग फर्जी तरीके से इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। पुरुषों द्वारा महिलाओं के नाम पर पैसा निकालने की खबरें सामने आई हैं। यह सवाल वाकई गंभीर है कि क्या राज्य की योजनाएं उन्हीं लोगों के हाथ में जा रही हैं, जिनके लिए वे बनाई गई हैं? मुख्यमंत्री ने इसे रोकने की बात कही और भ्रष्टाचार पर सख्ती बरतने की चेतावनी दी।
महिलाओं के विकास के लिए आधा बजट
महिलाओं की आर्थिक मजबूती के लिए झारखंड सरकार आधे बजट का इस्तेमाल कर रही है। मंईयां सम्मान योजना को 1000 रुपये से बढ़ाकर 2500 रुपये किया गया। लेकिन इस योजना में फर्जीवाड़े की खबरों ने एक नई बहस छेड़ दी है। क्या सरकार की योजनाओं का असल लाभ जनता तक पहुंच रहा है? यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि जब-जब सरकारी योजनाओं में गड़बड़ी होती है, तो इसका खामियाजा आम जनता को ही भुगतना पड़ता है।
झारखंड बनाम केंद्र: कोयले की राजनीति
झारखंड की अर्थव्यवस्था में कोयले का बड़ा योगदान है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने चेतावनी दी कि अगर राज्य को 1.36 लाख करोड़ रुपये की बकाया राशि नहीं दी गई, तो कोयले की खदानें बंद कर दी जाएंगी। यह चेतावनी सिर्फ राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि एक बड़े संघर्ष का संकेत है। झारखंड की खदानें देशभर में ऊर्जा की आपूर्ति करती हैं। अगर यहां उत्पादन रोका गया, तो इसका असर पूरे देश पर पड़ सकता है।
गांवों से चलेगी सरकार
हेमंत सोरेन ने कहा कि उनकी सरकार सिर्फ रांची से नहीं, बल्कि गांवों से भी चलेगी। उन्होंने पंचायतों और गांवों में जाकर समस्याओं के समाधान की बात कही। जाति, आय और निवासी प्रमाण पत्र अब पंचायत स्तर पर ही बनने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इससे गांव के लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी।
कल्पना सोरेन की भावनात्मक अपील
जेएमएम स्थापना दिवस समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन भी शामिल हुईं। उन्होंने जनता को संबोधित करते हुए भावुक होकर कहा कि जब हेमंत सोरेन जेल में थे, तब झारखंड की जनता ने उनके परिवार को सहारा दिया। कल्पना सोरेन ने कहा कि झारखंड की जनता ने उन्हें बहू नहीं, बल्कि बेटी की तरह अपनाया। यह बयान राजनीतिक रूप से भी अहम था, क्योंकि इससे झामुमो कार्यकर्ताओं और समर्थकों को भावनात्मक रूप से जोड़ने का प्रयास किया गया। इसके पूर्व झामुमो गिरिडीह जिला कमिटी की ओर से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन के सर पर ताज पहनाकर एवं भारी भरकम फूलों का माला पहना दोनों का भव्य स्वागत किया गया। वहीं पार्टी के 52वें जन्मदिन के अवसर पर केक भी काटा गया। बाद में दोनों ने शहीदों के वेदी पर माल्यार्पण किया।
कल्पना मुर्मू सोरेन ने राजनीतिक जीवन की पहली वर्षगांठ मनाई
इंडिया गठबंधन की स्टार प्रचारक और झारखंड मुक्ति मोर्चा की नेत्री कल्पना मुर्मू सोरेन 4 मार्च 2024 को गिरिडीह मे ही पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की थी. गिरिडीह के ऐहतिहासिक झंडा मैदान में पार्टी के स्थापना दिवस समारोह मे कल्पना सोरेन ने झारखंड मुक्ति मोर्चा का दामन थामा था. यहां पर पार्टी की विधिवत सदस्यता लेने के बाद कल्पना मुर्मू सोरेन ने कार्यकर्ताओं में नई जान फूंक दी थी.
भविष्य की राह: क्या वाकई बदलेगा झारखंड?
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दावा किया कि झारखंड को अगले 5 सालों में इतना आगे बढ़ाया जाएगा कि पीछे मुड़कर देखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लेकिन सवाल यह है कि क्या झारखंड इस विकास की रफ्तार को बनाए रख पाएगा? राज्य की सबसे बड़ी चुनौती भ्रष्टाचार और प्रशासनिक पारदर्शिता है। अगर इन दोनों मोर्चों पर सरकार मजबूत कदम उठाने में सफल रही, तो झारखंड वाकई उन राज्यों में शुमार हो सकता है, जो तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
यह राज्य झारखंडियो की सोच से चलेगा-सोनू
सभा को संबोधित करते हुये नगर विकास व पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि जिस पौधा को गिरिडीह में 51 साल पहले शिबू सोरेन ने रोपा था वह आज विशाल वृक्ष का रूप ले लिया है। उन्होने ने कहा कि जनता ने हेमंत सोरेन को 56 सीटों का बहुमत दिया, हेमंत पर यह भरोसा जताया है कि जो काम अधूरे रह गए हैं उसे पूरा करना है. दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने जिस सोना झारखंड की कल्पना की थी वह सोना झारखण्ड धरातल पर उतारने का समय है. मैं आपको भरोसा देना चाहता हूं राजनीतिक साजिश करने वाले कितनी भी ताकत लगा ले लेकिन गिरिडीह के इस ऐतिहासिक झंडा मैदान से यह संदेश स्पष्ट है कि यह राज्य झारखंडियो की सोच से चलेगा.
सभा को सम्बोधित करते राज्यसभा सांसद सरफराज अहमद ने कहा कि हेमंत सोरेन के जेल जाने से कल्पना के रूप में एक बड़ी नेत्री का जन्म हुआ है। इससे भाजपा पश्चाताप कर रहा होगा। हेमंत सोरेन की तरह कल्पना सोरेन को जनता का प्यार मिला. कल जब हेमंत सोरेन की सरकार ने बजट पेश किया तो झारखंडी होने का सबूत भी दिया. सभा को पूर्व विधायक निजामुद्दीन अंसारी, केदार हाजरा, बेबी देवी, प्रणव वर्मा आदि ने भी संबोधित किया। समारोह की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष संजय सिंह ने एवं संचालन अजीत कुमार पप्पू, महालाल सोरेन, शहनवाज ने किया।
संघर्ष जारी रहेगा!
झारखंड के सियासी मंच से एक बार फिर साफ हो गया कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच टकराव जारी रहेगा। कोयला खदानों को बंद करने की चेतावनी, महिलाओं के लिए विशेष योजनाएं, ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार की सक्रियता और केंद्र से बकाया राशि की मांग—ये सारे मुद्दे आने वाले समय में झारखंड की राजनीति को गर्माने वाले हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का बयान एक चेतावनी थी, लेकिन यह चेतावनी कब एक बड़े आंदोलन में बदल जाएगी, यह देखने वाली बात होगी।
गिरिडीह शहर को दुल्हन की तरह सजाया गया था
बता दें कि स्थापना दिवस को लेकर यह पहला मौका था जब झामुमो जिला समिति द्वारा पूरे शहर को दुल्हन की तरह सजाया गया था । शहरी क्षेत्र के सभी प्रमुख मार्गों एवं सभी चौक-चौराहे और सड़कों हरे लाइट से सजाया गया था । जगह-जगह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, दिशोम गुरु शिबू सोरेन, मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन के बड़े-बड़े होर्डिंग लगाए गए थे । वहीं पूरा शहर पार्टी के झंडे से पाट दिया गया था ।
झारखंड की राजनीति में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक आंदोलन की तरह है। यह संघर्ष और सत्ता की वो कहानी है, जिसने झारखंड की राजनीति को न केवल नया रूप दिया, बल्कि इसे एक अलग पहचान भी दिलाई। झारखंड आंदोलन से जन्मी यह पार्टी आज सत्ता के केंद्र में है, लेकिन क्या इसका मूल संघर्ष अभी भी वही है? क्या झामुमो अपने मूल सिद्धांतों पर कायम है या सत्ता की राजनीति में उलझ चुका है?
झंडा मैदान से शुरू हुआ सफर
4 मार्च 1973 को गिरिडीह के ऐतिहासिक झंडा मैदान में एक रैली के दौरान झामुमो की नींव रखी गई थी। यह महज एक पार्टी की स्थापना नहीं थी, बल्कि झारखंडी अस्मिता की एक नई शुरुआत थी। 52 साल बाद, वही झंडा मैदान फिर से इतिहास को दोहराने जा रहा है। 4 मार्च को झामुमो अपना 52वां स्थापना दिवस मनाएगा, जिसमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित कई बड़े नेता शिरकत करेंगे। संध्या 5 बजे से शुरू होने वाले इस समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी धूम रहेगी।
सज चुका है झंडा मैदान, दिख रहा सिर्फ हरा रंग
गिरिडीह के झंडा मैदान और आसपास के इलाकों में झामुमो का रंग बिखर चुका है। 40 से अधिक तोरणद्वार लगाए गए हैं। हजारों होर्डिंग और झंडों से पूरा शहर हरे रंग में रंग चुका है। कार्यकर्ताओं में जोश है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या झामुमो केवल सत्ता तक सीमित रह गया है, या अब भी झारखंड के मूल मुद्दों पर संघर्षरत है? क्या हेमंत सरकार जनआंदोलन के उस मूलभूत लक्ष्य को पूरा कर रही है, जिसके लिए झारखंड अलग राज्य बना?
शिबू सोरेन: 34 वर्षों से पार्टी की कमान
झारखंड की राजनीति में एक अनोखी बात यह है कि झामुमो की कमान पिछले 34 वर्षों से एक ही व्यक्ति, शिबू सोरेन, के हाथों में है। 2021 में हुए अधिवेशन में उन्हें 10वीं बार अध्यक्ष और हेमंत सोरेन को तीसरी बार कार्यकारी अध्यक्ष चुना गया। यह दिखाता है कि पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की गुंजाइश अब भी सीमित है।
पांच बार सत्ता में झामुमो, लेकिन क्या बदल पाया झारखंड?
झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद से झामुमो अब तक पांच बार सत्ता में आ चुका है। दिलचस्प यह है कि हर बार मुख्यमंत्री सोरेन परिवार से ही बना।
2005, 2008, 2009 में शिबू सोरेन मुख्यमंत्री बने।
2013-14 और फिर 2019 से अब तक हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री हैं।
हालांकि, इनमें से चार सरकारें अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाईं। कुछ सरकारें महज़ कुछ दिन चलीं, कुछ छह महीने तो कुछ 14 महीने ही चल सकीं। सवाल यह है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा बार-बार सत्ता में आने के बावजूद अपने एजेंडे को लागू करने में क्यों विफल रहा?
2019 और 2024: ऐतिहासिक जीत, लेकिन क्या असली बदलाव आया?
2019 में झामुमो ने 81 में से 30 सीटें जीतकर कांग्रेस और आरजेडी के साथ सरकार बनाई। 2024 में पार्टी ने 34 सीटों पर जीत दर्ज की और गठबंधन ने कुल 81 में से 56 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की। लेकिन क्या यह जीत सिर्फ सत्ता की जीत थी, या झारखंड के आम लोगों को भी इसका कोई फायदा हुआ? क्या इस सरकार में शिक्षा, रोजगार और जल-जंगल-जमीन से जुड़े मुद्दे हल हो पाए?
संघर्ष के दिन: जब शिबू सोरेन को अंडरग्राउंड होना पड़ा
झारखंड मुक्ति मोर्चा का जन्म केवल एक राजनीतिक दल के रूप में नहीं हुआ था, बल्कि यह झारखंड की अस्मिता की लड़ाई थी। जब शिबू सोरेन 12 साल के थे, तब सूदखोरों ने उनके पिता की हत्या कर दी। इसके बाद उन्होंने महाजनों और शोषण के खिलाफ संघर्ष शुरू किया, जो कई बार हिंसक भी हुआ। उन्हें कई बार अंडरग्राउंड होना पड़ा। आखिरकार, धनबाद के जिलाधिकारी के.बी. सक्सेना और कांग्रेस नेता ज्ञानरंजन की पहल से उन्होंने आत्मसमर्पण किया और जेल गए।
‘सोनोत संताल’ और ‘शिवाजी समाज’ के विलय से बनी झामुमो
1972 में ‘सोनोत संताल’ और विनोद बिहारी महतो के नेतृत्व वाले ‘शिवाजी समाज’ के विलय से झामुमो का गठन हुआ। ट्रेड यूनियन नेता ए.के. राय की इसमें अहम भूमिका रही।
पहले अध्यक्ष: विनोद बिहारी महतो
पहले महासचिव: शिबू सोरेन
1972 मे धनबाद के डीसी केबी सक्सेना थे वे आदिवासियों के शोषण के विरुद्ध कड़ी कारवाई करने वाले ईमानदार अधिकारियों मे गिने जाते थे । उनकी कार्यशैली और विचारधारा ने शिबू सोरेन को काफी प्रभावित किया । डीसी केबी सक्सेना का आकर्षण उन्हे प्रसाशन के करीब ले आया । इससे उनकी संघरशीलता बाधित हुई और आपताकाल के दौरान उन्होने 20 सूत्री कार्यक्रम का समर्थन किया । काँग्रेस की उनकी निकटता बढ़ती गयी और विनोद बिहारी महतो तथा एके राय से दूरी बढ़ाने लगी । 1980 के चुनाव मे शिबू सोरेन ने काँग्रेस के साथ चुनावी गठबंधन कर लिया और महतो समर्थक उनसे अलग हो गए और जेएमएम विभाजित हो गया । 1980 में शिबू सोरेन पहली बार दुमका से सांसद बने। बिहार विधानसभा चुनाव में संथाल परगना की 18 में से 9 सीटें जीतकर पार्टी ने पहली बार अपनी ताकत दिखाई।1990 मे बिहार मे जब पहली बार लालू प्रसाद की सरकार बनी तो जेएमएम ने सरकार को संरता के एवज मे सत्ता सुख का आनंद उठाया ।
हेमंत सोरेन: नया नेतृत्व, लेकिन पुरानी राजनीति?
2015 में जमशेदपुर अधिवेशन में हेमंत सोरेन को कार्यकारी अध्यक्ष चुना गया और पार्टी एक नए दौर में प्रवेश कर गई। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह नया दौर झारखंड की असली समस्याओं को हल कर सका है? आज भी आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन की लड़ाई जारी है। बेरोजगारी और भ्रष्टाचार झारखंड की बड़ी समस्या बने हुए हैं।
क्या झारखंड को नई राजनीति की जरूरत है?
झामुमो की राजनीति अभी भी पुराने ढर्रे पर चल रही है। सवाल यह है कि क्या झारखंड को एक नई राजनीति की जरूरत है? क्या झामुमो अपनी पारिवारिक राजनीति से बाहर निकलकर नए नेतृत्व को जगह देगा? झारखंड में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की स्थिति आज भी खराब बनी हुई है। क्या झामुमो अब भी जनआंदोलन की उस धार को बरकरार रख पाएगा?
संघर्ष से सत्ता तक: लेकिन आगे क्या?
झारखंड मुक्ति मोर्चा की यात्रा केवल सत्ता प्राप्ति तक सीमित नहीं है। यह झारखंड की आत्मा से जुड़ा आंदोलन है, जिसने राज्य को अलग पहचान दिलाई। लेकिन अब जब पार्टी सत्ता में है, तो क्या यह अपने मूल संघर्ष को भूल रही है? क्या यह पार्टी सत्ता और सिद्धांतों के बीच संतुलन बनाए रख पाएगी? यह आने वाला वक्त ही बताएगा।
झारखंड में मुख्यमंत्री के लाभार्थी इस वक्त असमंजस और इंतजार की स्थिति में हैं। जनवरी माह की किस्त का पैसा अब तक लाभार्थी के अकाउंट में ट्रांसफर नहीं हुआ है, जिससे 58 लाख से अधिक लाभार्थियों के बीच सवाल उठ रहे हैं कि आखिर देरी की वजह क्या है।
अगस्त से शुरू हुई है योजना।
मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना की शुरुआत अगस्त 2024 में हुई थी। योजना के तहत अगस्त से नवंबर तक लाभार्थियों को हर माह ₹1,000 दिए गए। दिसंबर से इस राशि को बढ़ाकर ₹2,500 प्रति माह कर दिया गया।
6 जनवरी 2025 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नामकुम में आयोजित एक बड़े कार्यक्रम में ₹2,500 की पहली बढ़ी हुई राशि 56,61,791 लाभार्थियों के खातों में ट्रांसफर की थी। मात्र दिसंबर माह में ₹1,415 करोड़ 44 लाख 77 हजार 500 रुपये का वितरण हुआ। इसके बाद से जनवरी की किस्त का इंतजार बढ़ता जा रहा है।
कहां फंसा है पेंच?
योजना के तहत हर माह की 15 तारीख तक राशि लाभार्थियों के खातों में क्रेडिट हो जानी चाहिए, लेकिन इस बार प्रक्रिया में देरी हुई है।
प्रखंड स्तर पर सत्यापन प्रक्रिया
हर महीने नए लाभार्थियों को जोड़ा जा रहा है और 50 वर्ष की आयु पूरी कर चुके लाभार्थियों को सूची से हटाया जा रहा है। जनवरी में 10 लाख से अधिक नए आवेदन आए, जिनमें से डेढ़ लाख का सत्यापन पूरा हो चुका है।
पोर्टल की तकनीकी समस्याएं
योजना का पोर्टल बार-बार तकनीकी खामियों का सामना कर रहा है। आवेदन अद्यतन और सत्यापन प्रक्रिया बाधित हो रही है। इसका सीधा असर राशि ट्रांसफर पर पड़ रहा है।
क्या कह रहा है विभाग?
जिला स्तर पर नोडल बैंकों और प्रखंड स्तर के अधिकारियों के सहयोग से सत्यापन प्रक्रिया जारी है। विभाग का कहना है कि जैसे ही प्रक्रिया पूरी होगी, लाभार्थियों के खातों में राशि ट्रांसफर कर दी जाएगी।
लाभार्थियों को संदेश।
जनवरी माह की राशि में हो रही देरी के बावजूद सरकार ने मार्च तक की राशि पहले ही आवंटित कर दी है। विभागीय अधिकारी तकनीकी खामियों को दूर करने और सत्यापन प्रक्रिया को तेज करने के लिए काम कर रहे हैं।