By: परवेज़ आलम.
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धनबाद/ गिरिडीह, झारखंड: झारखंड के धनबाद जिले के बाघमारा इलाके में बुधवार को एक दर्दनाक हादसा हुआ, जहां अवैध खनन के दौरान एक कोयला खदान की चाल धंस गई। यह हादसा केसरगढ़ क्षेत्र में हुआ, जो बीसीसीएल के ब्लॉक-II क्षेत्र के अंतर्गत आता है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शिव मंदिर के पास अवैध रूप से खनन किया जा रहा था, उसी दौरान यह दुर्घटना हो गई। आशंका जताई जा रही है कि 10 से अधिक मजदूर खदान में फंसे हुए हैं। हालांकि अब तक प्रशासन की ओर से फंसे हुए लोगों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, एक शव को अवैध खनन करने वाले लोग निकालकर ले जाने में सफल रहे हैं।
परिवारों को घटनास्थल से दूर रखने की कोशिश, आक्रोश बढ़ा.
जैसे ही चाल धंसने की खबर फैली, इलाके में हड़कंप मच गया। आरोप है कि अवैध खनन माफिया ने फंसे मजदूरों के परिवारों को घटनास्थल के पास आने से रोकने की कोशिश की, जिससे स्थानीय लोगों में गुस्सा और बढ़ गया। लोग यह भी कह रहे हैं कि पूरे हादसे को छुपाने की कोशिश की जा रही है।
विधायक जयराम महतो का दावा – 15 मौतें, 30 लोग अंदर दबे.
डुमरी के विधायक जयराम महतो ने x पर लिखा कि हादसे में 15 मजदूरों की मौत की सूचना मिली है, जबकि अंदर 30 लोगों के दबे होने की आशंका है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद अवैध खनन का मुहाना जल्दबाजी में बंद कर दिया गया, और लाशों को छुपाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि मुहाने को दोबारा खोला जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
धनबाद, बाघमारा के केसरगढ़ में अवैध खनन की चाल धँसने से 15 मज़दूरों की मौत की सूचना है. अंदर 30 लोगों की दबाने की आशंका है
अवैध मुहाने कोजल्दबाजी में बंद कर दिया गया है, लाश को छिपाया जा रहा है. जिला प्रशासन बंद किए गए मुहाने को खोलकर लाश को निकाले और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करें pic.twitter.com/VFaDv1QU55— Tiger jairam mahto (@JairamTiger) July 23, 2025
खनन माफिया को संरक्षण?
झारखंड के वरिष्ठ नेता व विधायक सरयू राय ने भी इस घटना पर दुख जताया और दावा किया कि जमुनिया गांव में 9 मजदूरों की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि अवैध खनन माफिया मृतकों के शवों को छुपाने की कोशिश कर रहे हैं। सरयू राय ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में धनबाद एसएसपी को सूचना दे दी है।

अब तक शव मिलने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं.
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और CISF की टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया गया। हालांकि अभी तक किसी शव के मिलने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कुछ खबरें एक शव मिलने की बात कहती हैं, लेकिन प्रशासन ने अब तक इसकी पुष्टि नहीं की है। यहां तक कि पुलिस ने इस हादसे के अस्तित्व को भी स्वीकार नहीं किया है, जिससे लोगों में भ्रम और नाराजगी और गहराती जा रही है।
केसरगढ़ में अवैध खनन का गढ़, अल्पसंख्यक समुदाय के लोग ज्यादा प्रभावित.
जानकारी के अनुसार, बाघमारा के कतरास के केसरगढ़ क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा था, जिसमें स्थानीय गरीब और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों से मजदूरी कराई जाती थी। रिपोर्ट्स बताती हैं कि इन मजदूरों को गिरिडीह और जामताड़ा आस-पास के जिलों से बुलाया गया था।
अब तक जिन मजदूरों के दबे होने की सूचना है, उनमें शामिल हैं:
- चरकू उर्फ अजीज अंसारी (35) – कुंडलवादाह, ताराटांड, गिरिडीह
- अफजल उर्फ खान साहब (35) – कुंडलवादाह, गिरिडीह
- दिलीप साव (32) – बुढ़वाशेर, गिरिडीह
- मो. जमशेद (30) – मथुरासिंहा, बदगुंडा पंचायत, गिरिडीह
- एक अन्य व्यक्ति – जामताड़ा से बताया जा रहा है
जवाबदेही तय करने और जांच की मांग.
इस हादसे के बाद अवैध खनन पर प्रशासनिक उदासीनता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। आम जनता और राजनीतिक प्रतिनिधि अब जवाबदेही तय करने, दोषियों को सज़ा देने और पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है, लेकिन प्रशासन की देरी और चुप्पी ने लोगों के मन में गहरा अविश्वास पैदा कर दिया है।







