By: परवेज़ आलम.
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रांची – झारखंड हाईकोर्ट को सोमवार को अपना 17वां मुख्य न्यायाधीश मिल गया। हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस तरलोक सिंह चौहान ने 23 जुलाई को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से राजभवन स्थित बिरसा मंडप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। इस गरिमामयी समारोह में राज्य की प्रशासनिक, राजनीतिक और न्यायिक जगत की कई प्रतिष्ठित हस्तियों ने भाग लिया।
शपथ समारोह बना राजभवन का खास अवसर.
शपथग्रहण समारोह में जस्टिस चौहान के परिजनों के साथ-साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, विधानसभा अध्यक्ष रविन्द्रनाथ महतो, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी समेत राज्य सरकार के कई मंत्री, हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश और बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद थे। राज्यपाल गंगवार और मुख्यमंत्री सोरेन ने समारोह के बाद जस्टिस चौहान को पुष्पगुच्छ भेंट कर शुभकामनाएं दीं। बिरसा मंडप को इस विशेष अवसर पर भव्य ढंग से सजाया गया था।
हिमाचल से झारखंड तक न्यायिक यात्रा.
शिमला जिले के रोहड़ू क्षेत्र से आने वाले जस्टिस चौहान ने स्कूली शिक्षा शिमला से प्राप्त की और फिर पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ से कानून की पढ़ाई पूरी की। 1989 में उन्होंने हिमाचल प्रदेश स्टेट बार काउंसिल में बतौर अधिवक्ता नामांकन कराया और वहीं से वकालत की शुरुआत की। अपनी कड़ी मेहनत और न्यायिक दृष्टिकोण के चलते वे हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में वरिष्ठतम न्यायाधीश बने।
झारखंड हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एम. एस. रामचंद्र राव के त्रिपुरा हाईकोर्ट में स्थानांतरण के बाद सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश पर जस्टिस तरलोक सिंह चौहान को झारखंड का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया।
कार्यभार ग्रहण के बाद नई उम्मीदें.
शपथ लेने के बाद जस्टिस चौहान सीधे हाईकोर्ट पहुंचे और वहां मुख्य न्यायाधीश के रूप में अपना कार्यभार ग्रहण किया। इस मौके पर झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं ने उनका स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व में अदालत की कार्यप्रणाली में तेजी आएगी, विशेषकर लंबित मामलों की सुनवाई और रिक्त जजों की नियुक्तियों में।
गौरतलब है कि जस्टिस तरलोक सिंह चौहान का कार्यकाल जनवरी 2026 तक रहेगा। न्यायपालिका, अधिवक्ताओं और आम जनता को अब उनसे न्यायिक प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और गति की उम्मीद है।







