Category: Crime

  • BJP और जयराम महतो की पार्टी से चुनाव लड़ चुका सूर्या हांसदा एनकाउंटर में ढेर

    कई आपराधिक मामलों में था वांटेड.

    The News Post4u.

    रांची/गोड्डा:  झारखंड के गोड्डा जिले में सोमवार तड़के हुई पुलिस मुठभेड़ में पूर्व भाजपा प्रत्याशी और कुख्यात अपराधी सूर्या नारायण हांसदा उर्फ सूर्या हांसदा मारा गया। पुलिस के अनुसार, हांसदा के खिलाफ गोड्डा और साहिबगंज जिलों के विभिन्न थानों में कई संगीन मामले दर्ज थे, जिनमें आगजनी, हमले और अवैध हथियार रखने जैसे अपराध शामिल हैं।

    देवघर से गिरफ्तारी, जंगल में मुठभेड़ में मौत.
    दुमका के जोनल आईजी शैलेंद्र कुमार सिन्हा ने जानकारी दी कि गोड्डा पुलिस ने रविवार को सूर्या हांसदा को देवघर से गिरफ्तार किया था। पूछताछ में उसने अपने छुपाए हथियारों और साथियों के ठिकानों का खुलासा किया। इसी सुराग पर पुलिस दल उसे लालमटिया के घने वन क्षेत्र में लेकर पहुंचा।

    पुलिस का कहना है कि मौके पर हथियार बरामदगी के दौरान हांसदा ने पुलिसकर्मी का हथियार छीनकर भागने की कोशिश की। इसी बीच, उसके साथियों ने भी पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने गोली चलाई, जिसमें सूर्या हांसदा गंभीर रूप से घायल हो गया और उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

    राजनीतिक सफर: चार बार चुनावी किस्मत आजमाई, हर बार हार
    सूर्या हांसदा का नाम केवल अपराध जगत में ही नहीं, बल्कि राजनीति में भी चर्चा में रहा है। उसने चार बार विधानसभा चुनाव लड़े—

    • 2024: झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) से बोरियो सीट पर चुनाव लड़ा, मात्र 2,937 वोट मिले।
    • 2019: भाजपा प्रत्याशी के रूप में बोरियो से चुनाव लड़ा, 59,441 वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहा। इस चुनाव में भाजपा ने पूर्व अध्यक्ष ताला मरांडी का टिकट काटकर हांसदा को मौका दिया था।
    • 2014 और 2009: झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) से इसी सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों बार हार का सामना किया।

    गंभीर अपराधों में लिप्त.
    सूर्या हांसदा का आपराधिक रिकॉर्ड लंबा रहा है। सबसे चर्चित मामला 9 जनवरी 2020 का है, जब गोड्डा जिले के ठाकुरगंगटी थाना क्षेत्र के बहादुरचक के पास अडानी कंपनी की वाटर पाइपलाइन परियोजना में लगे वाहनों में आग लगा दी गई थी। जांच में सामने आया कि इस घटना की साजिश हांसदा ने रची थी।

    इसके अलावा, जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में उसके खिलाफ दर्जनों मुकदमे दर्ज थे। पुलिस के मुताबिक, हांसदा कई महीनों से फरार था और उस पर गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही थी।

  • गिरिडीह में नकली अंग्रेजी शराब की बड़ी खेप पकड़ी गई, एक गिरफ्तार, दो फरार

    The News Post4u.

    GIRIDIH : गिरिडीह पुलिस ने अवैध शराब कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एक बार फिर बड़ी कामयाबी हासिल की है। गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने एक सिल्वर रंग की मारुति ओमनी वैन से 300 बोतल नकली अंग्रेजी शराब बरामद की है। इस दौरान एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दो अन्य आरोपी फरार हैं।

    इस संबंध में खोरीमहुआ के एसडीपीओ राजेन्द्र प्रसाद ने मीडिया को बताया कि पुलिस अधीक्षक डॉ. विमल कुमार को सूचना मिली थी कि एक संदिग्ध वाहन के जरिए नकली शराब की तस्करी की जा रही है। सूचना मिलते ही एसपी के निर्देश पर एक विशेष टीम गठित की गई और डोमनपहाड़ी चौक के पास वाहन चेकिंग अभियान शुरू किया गया।

    वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस टीम ने मारुति ओमनी (नं. JH11H 8087) को रोककर तलाशी ली, जिसमें से रॉयल गोल्ड कप ब्रांड की 25 पेटियों में भरी 300 बोतल (750 एमएल) नकली अंग्रेजी शराब बरामद की गई। मौके पर वाहन चालक गोपाल साहु (उम्र 45 वर्ष), निवासी गढ़पट्टी, थाना पचंबा को गिरफ्तार कर लिया गया।

    पूछताछ के दौरान गोपाल साहु ने खुलासा किया कि वह यह शराब बासुदेव साव (निवासी सोनापहाड़ी, थाना बगोदर) और मनोज यादव (निवासी पेटहंडी, थाना जमुआ) के साथ मिलकर अवैध रूप से तस्करी कर रहा था। फिलहाल पुलिस दोनों फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही है।

    पुलिस का कहना है कि गिरिडीह में अवैध शराब कारोबार पर शिकंजा कसने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं और आने वाले दिनों में और भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।

  • झारखंड शराब घोटाला: छत्तीसगढ़ की ‘सुमित फैसिलिटीज’ के निदेशक अमित सलौंकी गिरफ्तार

    अब तक 11 गिरफ्तारियां.

    State Bureau, The News Post4u.

    रांची:  झारखंड में बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच कर रही एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एक और बड़ी गिरफ्तारी की है। बुधवार को ACB ने छत्तीसगढ़ की प्लेसमेंट एजेंसी ‘सुमित फैसिलिटीज’ के निदेशक अमित प्रभाकर सलौंकी को हिरासत में लिया। यह इस मामले में ग्यारहवीं गिरफ्तारी है। सलौंकी पर खुदरा शराब दुकानों के लिए मैनपावर आपूर्ति के नाम पर ठेका हासिल कर करोड़ों रुपये के गबन का आरोप है।

    छत्तीसगढ़ कनेक्शन और ‘सिंडिकेट‘.

    गिरफ्तार सलौंकी, छत्तीसगढ़ के विवादित शराब कारोबारी सिद्धार्थ सिंघानिया का करीबी बताया जा रहा है, जिसे ACB पहले ही जेल भेज चुकी है। ACB के सूत्रों के अनुसार, सलौंकी की गिरफ्तारी सिंघानिया से हुई पूछताछ के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर की गई है। सलौंकी का नाम शराब घोटाले में ऐसे समय आया जब जांच एजेंसी राज्य में शराब नीति लागू किए जाने के बाद हुए घोटालों की परत-दर-परत जांच कर रही है।

    नीति लागू होते ही सक्रिय हुआ नेटवर्क.

    जानकारी के मुताबिक, मई 2022 में झारखंड में नई उत्पाद नीति लागू होने के बाद सुमित फैसिलिटीज समेत चार मैनपावर एजेंसियों ने खुदरा शराब दुकानों में स्टाफ उपलब्ध कराने का ठेका लिया। इस पूरी योजना को सीएसएमसीएल के तत्कालीन एमडी अरुण पति त्रिपाठी और उत्पाद विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव विनय कुमार चौबे के संरक्षण में संचालित किया गया।

    ₹450 करोड़ के गबन का आरोप.

    इन चार एजेंसियों—सुमित फैसिलिटीज, एटूजेड इंफ्रा सर्विसेज, इगल हंटर सॉल्यूशंस और प्राइम वन वर्क फोर्स प्राइवेट लिमिटेड—ने करीब आठ महीनों तक झारखंड में काम किया। इसके बाद इन्हें भारी वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में हटा दिया गया और ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। उत्पाद विभाग ने इन कंपनियों पर करीब ₹450 करोड़ के गबन का आरोप लगाया है और मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।अभी तक गिरफ्तार हुए 10 अन्य आरोपी

    इस घोटाले में अब तक जिन प्रमुख लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें शामिल हैं—

    विनय कुमार चौबे – निलंबित IAS, पूर्व प्रधान सचिव, उत्पाद विभाग,गजेंद्र सिंह – तत्कालीन संयुक्त आयुक्त उत्पाद (वर्तमान में जमानत पर),सुधीर कुमार दास – पूर्व महाप्रबंधक (वित्त),सुधीर कुमार – पूर्व अभियान प्रमुख,अमित प्रकाश – पूर्व आयुक्त, उत्पाद,नीरज कुमार सिंह – प्लेसमेंट एजेंसी मार्शन के प्रतिनिधि,सिद्धार्थ सिंघानिया – छत्तीसगढ़ के शराब कारोबारी,विधु गुप्ता – नकली होलोग्राम मामले में फंसे प्रिज्म होलोग्राफी कंपनी से,अतुल कुमार सिंह – श्री ओम साईं बेवरेजेज  व मुकेश मनचंदा – कारोबारी, इनमें से 9 आरोपी फिलहाल रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि एक आरोपी गजेंद्र सिंह जमानत पर बाहर हैं।

    ADVT.

    जांच जारी, और भी गिरफ्तारियां संभव.

    ACB की जांच में यह सामने आ रहा है कि कैसे छत्तीसगढ़ से झारखंड में एक संगठित नेटवर्क के जरिए शराब कारोबार को नियंत्रित किया गया। इस नेटवर्क में नौकरशाहों से लेकर निजी कंपनियों और राजनीतिक संपर्कों तक की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। अब सलौंकी की गिरफ्तारी के बाद यह तय माना जा रहा है कि जल्द ही कुछ और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

     

  • गिरिडीह:साइबर ठगी रैकेट का भंडाफोड़, दो आरोपी गिरफ्तार

    -मोबाइल ऐप के ज़रिए करते थे बैंक अकाउंट से पैसे गायब. 

    For The News Post4u.

    GIRIDIH: गिरिडीह जिले के अहिल्यापुर थाना क्षेत्र अंतर्गत नावाडीह गांव के डंगाल इलाके में शुक्रवार को साइबर अपराधियों के एक सक्रिय नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ। पुलिस अधीक्षक को प्रतिबिम्ब पोर्टल के माध्यम से प्राप्त गुप्त सूचना के आधार पर गिरिडीह साइबर थाना की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए छापेमारी कर दो साइबर ठगों को गिरफ्तार कर लिया।

    गिरफ्तार आरोपी –देवघर से है.

    पकड़े गए आरोपियों की पहचान मनीष कुमार मंडल और मिथुन कुमार मंडल  के रूप में हुई है। दोनों आरोपी झारखंड के देवघर जिले के मारगोमुण्डा थाना क्षेत्र स्थित खिजुरियाटाड़ गांव के निवासी हैं।

    फर्जी मोबाइल एप्स बना था ठगी का हथियार.

    पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि दोनों युवक फर्जी मोबाइल ऐप्स जैसे:

    • Delhi Jal Board Update.apk
    • Electricity Bill Update.apk
    • NDMC Bill Update.apk

    …को आम नागरिकों के मोबाइल पर भेजते थे। जब लोग इन ऐप्स को डाउनलोड करते थे, तो उनके फोन हैक हो जाते थे। इसके बाद अपराधी उनके मोबाइल के माध्यम से बैंक खाते से पैसे निकाल लेते थे। यह एक सोची-समझी और तकनीकी रूप से अत्याधुनिक साइबर ठगी की साजिश थी।

    तकनीकी सबूत भी बरामद.

    पुलिस ने आरोपियों के पास से 8 मोबाइल फोन और 9 सक्रिय सिम कार्ड बरामद किए हैं। जब्त मोबाइल नंबरों की जांच में पता चला है कि इन पर कम से कम 7 साइबर ठगी के मामले पहले से दर्ज हैं, जिससे स्पष्ट है कि आरोपी लंबे समय से इस नेटवर्क का संचालन कर रहे थे।

    कानूनी कार्रवाई जारी.

    इस पूरे मामले में गिरिडीह साइबर थाना मे  मामला दर्ज की गई है। पुलिस इन आरोपियों से जुड़े अन्य नेटवर्क की भी जांच कर रही है और इनके गिरोह में शामिल अन्य अपराधियों की तलाश जारी है। इस छापेमारी दल का नेतृत्व साइबर क्राइम डीएसपी आबिद खान  ने किया। गिरिडीह पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे अनजान लिंक या मोबाइल एप्लिकेशन को डाउनलोड करने से बचें। यदि कोई संदिग्ध मैसेज या कॉल आता है, तो तुरंत नजदीकी साइबर थाना या हेल्पलाइन पर इसकी सूचना दें।

     

  • JMM का आधिकारिक ‘X’ हैंडल हुआ हैक, सीएम ने पुलिस और X कॉर्प को किया अलर्ट

     — अपडेटेड साइबर अलर्ट.

    परवेज़ आलम.

    The News Post4U के लिए रिपोर्ट.

    रांची/नई दिल्ली:  झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रविवार को एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) का आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल @JmmJharkhand हैक कर लिया गया है। उन्होंने इस साइबर हमले के लिए “असामाजिक तत्वों” को जिम्मेदार ठहराया है और इस मामले को गंभीरता से लेते हुए झारखंड पुलिस और सोशल मीडिया कंपनी X (पूर्व में ट्विटर) से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

    दिल्ली में रहकर दी जानकारी.

    गौरतलब है कि इस वक्त मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने पिता और पार्टी के संस्थापक शिबू सोरेन के इलाज के सिलसिले में दिल्ली में हैं। इसी दौरान उन्होंने अपने व्यक्तिगत ‘X’ अकाउंट से एक पोस्ट साझा कर यह गंभीर सूचना सार्वजनिक की।

    उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा —

    “झामुमो का आधिकारिक X हैंडल @JmmJharkhand असामाजिक तत्वों द्वारा हैक कर लिया गया है। झारखंड पुलिस इस पर संज्ञान ले और शीघ्र जांच कर आवश्यक कार्रवाई करे। @XCorpIndia कृपया आप भी इस पर ध्यान दें।”

    मुख्यमंत्री की इस प्रतिक्रिया के बाद झारखंड पुलिस को मामले में तकनीकी जांच शुरू करने का निर्देश भी दे दिया गया है।

    क्या पोस्ट किया है हैकरों ने?

    हैक होने के कुछ ही समय बाद JMM के आधिकारिक X हैंडल से जो पहली पोस्ट साझा की गई, उसमें एक गिलहरी जैसी फोटो के साथ एक क्रिप्टोकरेंसी भुगतान पता (crypto wallet address) और संदेश लिखा था — “LIVE ON BONK”।
    इससे अंदेशा लगाया जा रहा है कि यह एक क्रिप्टो स्कैम ग्रुप का काम हो सकता है, जिसका मकसद अकाउंट हैक कर पब्लिसिटी और आर्थिक लाभ उठाना होता है।

    एलन मस्क के X पर बड़ा साइबर हमला.

    यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि झारखंड मुक्ति मोर्चा का यह हैंडल सोशल मीडिया पर खासा सक्रिय रहता है और इसके 2 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं।
    ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) अब टेस्ला और स्पेसX के मालिक एलन मस्क के अधीन है। हेमंत सोरेन ने खुद X कॉर्पोरेशन को टैग करते हुए तकनीकी हस्तक्षेप की मांग की है ताकि हैकर्स को रोका जा सके और पार्टी की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित हो।

    झारखंड की राजनीति के लिए चेतावनी.

    विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह का साइबर हमला केवल एक डिजिटल उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक दलों की साइबर सुरक्षा में भारी खामी को उजागर करता है।
    झामुमो के आधिकारिक हैंडल को हैक किया जाना न सिर्फ पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है, बल्कि इससे राजनीतिक सूचनाओं के दुरुपयोग की भी आशंका बढ़ जाती है।

    झारखंड पुलिस की साइबर शाखा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। वहीं X कॉर्प की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
    हेमंत सोरेन और उनकी पार्टी उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही हैंडल को सुरक्षित कर लिया जाएगा और दोषियों को चिन्हित कर कड़ी सजा दी जाएगी।

     

     

  • सहारा इंडिया ज़मीन घोटाला: झारखंड CID की जांच में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर

    -दर्जनों शहरों में फंड ट्रांसफर और ज़मीनों की हेराफेरी का खुलासा.

    Edited By: परवेज़ आलम

    For The News Post4u.

    रांची: झारखंड CID ने सहारा समूह से जुड़े एक बड़े घोटाले का खुलासा किया है, जिसमें करोड़ों रुपये की जमीनें फर्जी कंपनियों और व्यक्तियों के माध्यम से बेच दी गईं। यह घोटाला सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार कोलकाता, गुवाहाटी, पटना, लखनऊ और दिल्ली जैसे बड़े शहरों से भी जुड़ते दिख रहे हैं।

    जांच एजेंसी ने सहारा इंडिया के अधिकारी शैलेंद्र शुक्ला से पूछताछ की, जिसमें उन्होंने कबूल किया कि रांची और बोकारो जोन से नियमित रूप से बड़ी मात्रा में धनराशि कंपनी के मुख्यालय के निर्देश पर विभिन्न शहरों में ट्रांसफर की जाती थी। फंड ट्रांसफर के आदेश कंपनी के मंडल प्रमुख नीरज कुमार पाल और मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी एस.बी. सिंह द्वारा दिए जाते थे।

    जमीन की हेराफेरी का तरीका और खुलासे:

    CID की रिपोर्ट के अनुसार, सहारा समूह ने फर्जी कंपनियों और व्यक्तियों के नाम पर जमीनों की बिक्री की। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ये जमीनें SEBI द्वारा तय मूल्यों से कई गुना कम कीमत पर बेची गईं, और इससे अर्जित राशि ना तो निवेशकों को वापस लौटाई गई और ना ही SEBI में जमा की गई। इसके बजाय यह पैसा निजी खर्चों में उपयोग किया गया।

    उदाहरण स्वरूप कुछ बड़े सौदे:

    • बेगूसराय में 28.39 एकड़ जमीन, जिसकी कीमत 2013 में 41.17 करोड़ रुपये आंकी गई थी, महज 2.15 करोड़ रुपये में बेच दी गई।
    • 3.77 एकड़ दूसरी जमीन को भी 3.36 करोड़ रुपये में बेचा गया, जबकि उस वक्त बाजार दर इससे कई गुना अधिक थी।
    • पटना में 65.28 एकड़ जमीन, जिसकी कीमत SEBI ने 44.80 करोड़ रुपये तय की थी, रणकौशल प्रताप सिंह नामक व्यक्ति को केवल 2.52 करोड़ रुपये में बेच दी गई। यहां तक कि सरकारी गाइडलाइन के अनुसार भी इस जमीन की कीमत 5.05 करोड़ रुपये थी।
    • बोकारो में 68.14 एकड़ जमीन, जिसकी अनुमानित कीमत 2013 में 61.33 करोड़ रुपये थी, आज भी सहारा इंडिया के नाम पर ही दर्ज है। इससे यह संकेत मिलता है कि कई सौदों के दस्तावेजों में भी अनियमितता हो सकती है।

    धनबाद में अस्पताल निर्माण पर सवाल:

    धनबाद के गोविंदपुर स्थित रेगुनी मौजा में सहारा की ज़मीन पर अस्पताल का निर्माण किया जा रहा है। CID इस प्रकरण की भी जांच कर रही है कि यह ज़मीन कैसे उपयोग में लाई गई, जबकि यह ज़मीन अब भी कंपनी के नाम पर दर्ज है।

    CID की कार्रवाई और सिफारिश:

    इस घोटाले को लेकर CID ने FIR दर्ज करने की सिफारिश की है। इसके साथ ही संबंधित विभागों से सभी आवश्यक दस्तावेज और सौदों की जानकारी तलब की गई है। पोस्टिंग अधिकारी, अंचल अधिकारी और थाना प्रभारियों से विशेष सहयोग की अपील की गई है ताकि जांच तेजी से पूरी हो सके।

    CID की टीम अब इस घोटाले से जुड़े हर छोटे-बड़े सौदे की जांच कर रही है। कई फर्जी कंपनियों के नाम और उनसे जुड़े व्यक्तियों की पहचान की जा रही है। जल्द ही इस मामले से जुड़े और बड़े नामों का पर्दाफाश होने की उम्मीद है।

    कहानी सिर्फ जमीन की नहीं है… कहानी है एक सुनियोजित लूट की।

    जांच में खुलासा हुआ है कि सहारा समूह ने झारखंड सहित कई राज्यों में जमीनों की बिक्री फर्जी नामों, फर्जी कंपनियों के ज़रिए की। और ये कोई मामूली गलती नहीं थी – ये एक ठोस योजना थी, जिसमें निवेशकों की कमाई को कौड़ियों के दाम बेचकर, उसकी रकम से अपनी जेबें भरी गईं।

    न निवेशकों को पैसा, न SEBI को हिसाब… तो गया कहाँ पैसा?

    CID की रिपोर्ट में साफ कहा गया है – इन जमीनों की बिक्री से जो पैसा आया, न वो सेबी में जमा हुआ, न निवेशकों को वापस मिला। वो पैसा गया कहाँ? निजी खर्चों में – मतलब किसी के बंगले बने, किसी के चुनाव खर्च निकले, किसी की गाड़ी चली।

    यह जांच सिर्फ कागज़ों में रह जाएगी या सचमुच कोई बड़ी कार्रवाई होगी?
    क्या जिन लोगों ने भरोसे के नाम पर हजारों लोगों की कमाई लूटी, वो जेल में होंगे या फिर अगला चुनाव लड़ेंगे?

     

  • तेलंगाना में बेरहमी से पिता की हत्या: पत्नी और दो बेटों ने मिलकर रची साजिश, झारखंड के गिरिडीह से जुड़ा है मामला

    Edited by: परवेज़ आलम
    For The News Post4U

    गिरिडीह/सिकंदराबाद/हैदराबाद:
    मानवता को झकझोर देने और दिल दहला देने वाली घटना में झारखंड के गिरिडीह निवासी अशोक यादव की हैदराबाद के पास सुनसान इलाके में बेरहमी से हत्या कर दी गई। इस हत्याकांड को किसी और ने नहीं बल्कि उसकी पत्नी और दो बेटों ने मिलकर अंजाम दिया। तेलंगाना पुलिस ने इस मामले में मृतक की पत्नी क्रांति देवी, बेटों राजेंद्र यादव  और राजेश यादव के अलावा एक जूस दुकान के कर्मचारी को गिरफ्तार कर लिया है।

    हत्या के पीछे पारिवारिक विवाद और अवैध संबंधों का संदेह.

    मृतक अशोक यादव, झारखंड के गिरिडीह जिले के घोड़थम्बा ओपी क्षेत्र के पड़रिया गांव का रहने वाला था। वह लंबे समय से तेलंगाना के सिकंदराबाद के काजिगुड़ा इलाके में जूस की दुकान चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। परिजनों के मुताबिक, अशोक की शादी क्रांति देवी से हुई थी, लेकिन शुरू से ही उनके वैवाहिक संबंध तनावपूर्ण रहे। हालांकि, उनके दो बेटे और एक बेटी हुए। बेटी की शादी कर दी गई थी, और दोनों बेटों को अशोक ने अपनी दुकान का जिम्मा सौंप दिया था।

    भाई पिंटू यादव ने बताया कि अशोक को अपनी पत्नी क्रांति देवी के किसी अन्य व्यक्ति के साथ अवैध संबंधों का शक था। इसी को लेकर पति-पत्नी के बीच अक्सर झगड़े होते रहते थे। कई बार गांव में इस मुद्दे पर पंचायत भी हुई, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं आया। आरोप है कि क्रांति देवी ने अपने बेटों को पिता के खिलाफ भड़काया और उनके साथ मिलकर पति की हत्या की साजिश रच डाली।

    हत्या की रात्रि और निर्मम वारदात.

    मंगलवार की देर रात, अशोक यादव जब होटल में खाना खाकर घर लौटा और सोने चला गया, तभी उस पर जानलेवा हमला किया गया। पहले उसके सिर पर लोहे के काता (लोहे की छड़) से वार किया गया, जिससे वह बुरी तरह घायल हो गया। फिर क्रांति देवी और दोनों बेटों ने मिलकर गन्ना छीलने वाले धारदार हसुआ  से उसके सिर, जबड़े और गर्दन पर वार कर बेरहमी से उसकी हत्या कर दी।

    हत्या के बाद शव को एक अज्ञात वाहन से 40 किलोमीटर दूर हैदराबाद के कुतापेठ-नागोल इलाके में एक सुनसान जगह ले जाकर फेंक दिया गया, ताकि पहचान न हो सके।

    शव की पहचान और गिरफ्तारी.

    घटना की सूचना तब मिली जब एक राहगीर ने कुतापेठ-नागोल इलाके में लावारिस शव पड़ा देखा और इसकी सूचना नागोल पुलिस स्टेशन  को दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पहचान की प्रक्रिया शुरू की। बाद में अशोक यादव की पहचान होने के बाद, परिजनों को सूचना दी गई।

    अशोक के भाई पिंटू यादव द्वारा दर्ज कराए गए बयान और आवेदन के आधार पर पुलिस ने फौरन कार्रवाई करते हुए पत्नी, दोनों बेटों और जूस दुकान के कर्मचारी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

    गांव में पसरा मातम, शव का अंतिम संस्कार.

    पोस्टमार्टम के बाद अशोक यादव का शव उनके पैतृक गांव गिरिडीह के पड़रिया  भेजा गया, जहां परिवार और ग्रामीणों ने नम आंखों से उनका अंतिम संस्कार किया। पूरे गांव में घटना को लेकर शोक और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि पारिवारिक कलह इस हद तक पहुंच जाएगी, किसी ने सोचा नहीं था।

    यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि उस सामाजिक विघटन की तस्वीर है, जिसमें परिवार का विश्वास, संवाद और समझदारी खत्म हो चुकी है। जब घर के अपने ही खून के प्यासे बन जाएं, तो यह केवल एक अपराध नहीं बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी बन जाती है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की आगे की जांच जारी है।

  • साइबर ठगों ने झारखंड बीजेपी विधायक को ही लगा दिया चूना

    Edited by: परवेज़ आलम. For The News Post4U

    रांची:  झारखंड में साइबर ठगी का एक और हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसमें साइबर अपराधियों ने राज्य के पांकी विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी विधायक कुशवाहा शशिभूषण मेहता को निशाना बनाते हुए 1.27 लाख रुपये की ठगी कर ली। यह घटना राज्यभर में चर्चा का विषय बन गई है, क्योंकि इस बार ठगों के जाल में कोई आम नागरिक नहीं, बल्कि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि फंसा है।

    कैसे दिया गया ठगी को अंजाम.

    ठगों ने खुद को जीएसटी कस्टम विभाग का अधिकारी बताकर विधायक से संपर्क किया और दावा किया कि उन्होंने पश्चिम बंगाल के मालदा में कई लग्जरी गाड़ियां जब्त की हैं, जिनकी नीलामी होने वाली है। विधायक को एक फॉर्च्यूनर कार की तस्वीर व्हाट्सएप पर भेजी गई और उसकी कीमत 12.70 लाख रुपये बताई गई। ठगों ने गाड़ी की बुकिंग के लिए 10% अग्रिम भुगतान, यानी 1.27 लाख रुपये की मांग की।

    विधायक ने अपने निजी सहायक के माध्यम से यह राशि ठगों को ट्रांसफर कर दी। ठगों ने उन्हें एक फर्जी रसीद भी भेज दी ताकि भरोसा बना रहे। लेकिन भुगतान के बाद जब विधायक ने संपर्क करने की कोशिश की, तो सभी मोबाइल नंबर बंद मिले।

    साइबर थाने में दर्ज हुई शिकायत.

    विधायक कुशवाहा शशिभूषण मेहता ने इस पूरे मामले की जानकारी रांची साइबर थाने को दी और तीन अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया। विधायक ने यह भी बताया कि भुगतान उन्होंने अपने निजी सहायक के खाते से कराया था।

    इसी बीच एक और साइबर ठग चढ़ा पुलिस के हत्थे.

    वहीं, दूसरी ओर रांची साइबर पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ निवासी साइबर ठग विजय प्रकाश को गिरफ्तार किया गया है। विजय पर यूट्यूब पर इन्वेस्टमेंट से जुड़े फर्जी विज्ञापनों के माध्यम से देशभर के लोगों से ठगी करने का आरोप है। विज्ञापन पर क्लिक करते ही लोग एक व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ जाते थे, जहां उन्हें मुनाफे का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी की जाती थी।

    झारखंड समेत देश के 10 से ज्यादा राज्यों में उसके खिलाफ कुल 38 मामले दर्ज हैं। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है ताकि अन्य ठगी के मामलों का भी खुलासा हो सके।

    साइबर सुरक्षा पर सवाल.

    बीजेपी विधायक के साथ हुई इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी कितने संगठित और शातिर हो चुके हैं। अब आम जनता के साथ-साथ जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी इनके निशाने पर हैं। राज्य सरकार और पुलिस के लिए यह एक गंभीर चेतावनी है कि साइबर फ्रॉड से निपटने के लिए और ज्यादा सतर्कता, तकनीकी संसाधन और जनजागरूकता की जरूरत है

    सावधानी ही सुरक्षा है – अनजान कॉल, लिंक और स्कीम से सतर्क रहें। ठगों की चालाकी आपके विवेक से ही मात खा सकती है।

  • नक्सलियों के गढ़ से विस्फोटक जखीरा बरामद: 18,000 डेटोनेटर किए गए जब्त, जंगल में ही किया गया नष्ट

    Edited By – परवेज़ आलम
    For The News Post4U

    रांची: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे सघन अभियान के तहत सुरक्षा बलों को मंगलवार को एक बड़ी सफलता हाथ लगी। जिले के टोंटो थाना क्षेत्र अंतर्गत हुसिपी गांव और आसपास के सघन जंगलों में माओवादियों के गुप्त ठिकानों पर छापेमारी के दौरान सुरक्षाबलों ने लगभग 18,000 डेटोनेटर बरामद किए हैं। यह खेप इतनी बड़ी थी कि इसे जंगल में ही बम निरोधक दस्ते द्वारा सुरक्षित ढंग से नष्ट कर दिया गया।

    सटीक गुप्त सूचना पर हुआ जॉइंट ऑपरेशन.

    पुलिस अधीक्षक राकेश रंजन के मुताबिक  इस ऑपरेशन को खुफिया सूचना के आधार पर अंजाम दिया गया। छापेमारी में झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ की 60वीं बटालियन, और झारखंड जगुआर की संयुक्त टीम शामिल रही। अभियान के दौरान यह खुलासा हुआ कि नक्सलियों ने डेटोनेटरों को जंगल में अलग-अलग स्थानों पर छिपा रखा था। इन्हें बाद में सुरक्षा बलों को निशाना बनाने या सुरंगनुमा रास्तों में विस्फोट करने के मकसद से रखा गया था।

    ओडिशा से लूटे गए थे विस्फोटक, अब झारखंड में मिले.

    इस बरामदगी का संबंध बीते 27 मई को ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले में हुए विस्फोटक लूटकांड से जोड़ा जा रहा है। उस दिन माओवादियों ने रेलाहातू यांको स्थित एक पत्थर खदान के पास से विस्फोटकों से भरी 200 पैकेट वाली एक वैन को लूट लिया था। बाद में वे इस वैन को झारखंड की सीमा में स्थित सारंडा के जंगलों तक ले गए और वहां विस्फोटकों को उतारकर छिपा दिया गया।

    सारंडा का जंगल: नक्सलियों का पुराना गढ़.

    सारंडा जंगल, जो झारखंड और ओडिशा की सीमा पर स्थित है, लंबे समय से नक्सलियों का रणनीतिक ठिकाना रहा है। हालांकि बीते दो वर्षों में सुरक्षा बलों द्वारा लगातार की जा रही घेराबंदी और तलाशी अभियानों के चलते नक्सलियों की सक्रियता काफी सीमित हो गई है। इसके बावजूद वे सुरक्षाबलों को नुकसान पहुंचाने के लिए अब भी जंगलों में आईईडी जैसे विस्फोटक उपकरण बिछाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

    विस्फोटकों से अब तक कई जाने गईं.

    पिछले दो सालों में जंगलों में बिछाए गए आईईडी विस्फोटों की चपेट में आकर कम से कम चार जवान शहीद हो चुके हैं, वहीं दस से अधिक ग्रामीणों की भी जानें गई हैं। यह ताजा बरामदगी न केवल नक्सली मंसूबों पर करारा प्रहार है, बल्कि आगामी अभियानों के लिए भी एक बड़ी राहत मानी जा रही है।

    The News Post4U की रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा बल अब भी इलाके में व्यापक तलाशी अभियान चला रहे हैं ताकि और भी छिपे विस्फोटक और माओवादी ठिकानों को नष्ट किया जा सके।

     

  • गिरिडीह में आदिवासी युवती के अपहरण का मामला: आरोपी गिरफ्तार, युवती सकुशल बरामद

    By The News Post4u

    गिरिडीह जिले के भेलवाघाटी थाना क्षेत्र से एक आदिवासी युवती के अपहरण का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक युवक ने उसे शादी का झांसा देकर बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। इस मामले में पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, जबकि युवती को सकुशल बरामद कर उसके परिजनों को सौंप दिया गया है।

    क्या है पूरा मामला ?

    गिरिडीह एसपी कार्यालय द्वारा जारी प्रेस बयान के अनुसार, 25 जून को भेलवाघाटी थाना क्षेत्र के रहने वाले सुनील हेम्ब्रोम, पिता बड़कु हेम्ब्रोम ने थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने गांव के ही लकड़मरवा निवासी जुबेर अंसारी उर्फ कारू अंसारी, पिता मुमताज अंसारी पर आरोप लगाया कि उसने उनकी बहन को शादी का झांसा देकर अपहरण कर लिया।

    शिकायत मिलने के बाद भेलवाघाटी थाना ने तत्काल थाना कांड संख्या 10/25 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी की तलाश शुरू की और उसे गिरफ्तार कर लिया। साथ ही युवती को भी सकुशल बरामद किया गया।

    पुलिस की तत्परता से मिली राहत.

    पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से परिजनों को राहत मिली है। युवती को मेडिकल जांच के बाद परिजनों को सौंप दिया गया। वहीं आरोपी को गिरिडीह न्यायालय में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।

    एसपी ने क्या कहा ?

    गिरिडीह एसपी कार्यालय के मुताबिक, महिला सुरक्षा को लेकर जिला पुलिस पूरी तरह गंभीर है और ऐसे मामलों में सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने चेतावनी भी दी है कि महिलाओं के साथ धोखाधड़ी या जबरदस्ती करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

    इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की सुरक्षा और जागरूकता को लेकर गंभीरता से सोचने की जरूरत पर बल दिया है।