Category: Dhanbad

  • ………..और मुकाबला डिप्टी मेयर की कुर्सी का, नया राजनीतिक “मैच” शुरू

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू

    झारखंड की सियासत में मेयर चुनाव के बाद अब एक नया राजनीतिक “मैच” शुरू हो चुका है—और यह मुकाबला है डिप्टी मेयर की कुर्सी का। नौ नगर निगमों में पार्षदों की गिनती, बैठकों का दौर, सम्मान समारोह और डिनर डिप्लोमेसी… सब कुछ तेज हो गया है। आइए समझते हैं कि इस वक्त झारखंड के नगर निगमों में किसकी दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है और कहां किस तरह की राजनीतिक हलचल है।

    मेयर के बाद अब डिप्टी मेयर की जंग

    मेयर चुनाव खत्म होते ही अब राजनीतिक दलों की नजर डिप्टी मेयर के पद पर टिक गई है। भाजपा, कांग्रेस और झामुमो—तीनों दल अपने-अपने समर्थित पार्षदों को एकजुट करने में जुट गए हैं। नगर निगमों में इस पद के लिए लॉबिंग और लामबंदी तेज हो गई है। पार्षदों के सम्मान समारोह हो रहे हैं, बैठकों का दौर चल रहा है और कई जगहों पर “डिनर डिप्लोमेसी” भी देखने को मिल रही है। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि कहीं हॉर्स ट्रेडिंग न हो जाए। ऐसे में दल अपने पार्षदों पर नजर बनाए हुए हैं ताकि आखिरी वक्त में क्रॉस वोटिंग की स्थिति न बने।

    रांची में डिनर डिप्लोमेसी और शक्ति प्रदर्शन.

    राजधानी रांची में डिप्टी मेयर की रेस काफी दिलचस्प हो गई है।

    • भाजपा ने पार्षदों का सम्मान समारोह आयोजित कर अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की।
    • इस बैठक में 53 में से 42 पार्षदों की मौजूदगी बताई जा रही है।

    वहीं दूसरी ओर कांग्रेस भी पीछे नहीं है।

    • कांग्रेस नेताओं ने एक बड़े होटल में पार्षदों के साथ डिनर मीटिंग की।
    • इस बैठक में 37 पार्षदों के शामिल होने का दावा किया गया है।

    कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्षदों ने डिप्टी मेयर के नाम तय करने का अधिकार पार्टी को दे दिया है।

    गिरिडीह में झामुमो की मजबूत स्थिति

    गिरिडीह नगर निगम में समीकरण कुछ अलग दिख रहे हैं। यहां मेयर पद पर झामुमो समर्थित उम्मीदवार की जीत के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि डिप्टी मेयर भी झामुमो समर्थित पार्षद ही बनेंगे। बताया जा रहा है कि भाजपा के पास यहां 10 से भी कम पार्षदों का समर्थन है, जबकि झामुमो समर्थित पार्षदों की संख्या ज्यादा बताई जा रही है। लालों राइन व सुमित कुमार दोनों jmm से हैं के बीच ही रश काशी चल रही है ।

    हजारीबाग और मेदिनीनगर में ये नाम आगे।

    राज्य के अन्य नगर निगमों में भी डिप्टी मेयर को लेकर तस्वीर धीरे-धीरे साफ हो रही है।

    • मेदिनीनगर: कांग्रेस समर्थित मनोज सिंह मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं।
    • हजारीबाग: यहां मिताली रश्मि का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है

    धनबाद, देवघर और आदित्यपुर में कांटे की टक्कर।

    कुछ नगर निगमों में मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है।

    • धनबाद: यहां अरुण चौहान और सुमन सिंह के बीच सीधी टक्कर बताई जा रही है। अरुण चौहान को झामुमो का समर्थन मिलने की चर्चा है।
    • देवघर: पहली बार की पार्षद टीप चटर्जी डिप्टी मेयर पद के लिए मजबूत दावेदार मानी जा रही हैं।
    • चास: यहां पांच से छह पार्षदों के बीच मुकाबला बताया जा रहा है।
    • आदित्यपुर और मानगो: इन दोनों नगर निगमों में भाजपा और कांग्रेस समर्थित पार्षदों के बीच सीधी टक्कर के संकेत मिल रहे हैं।

    कब होगा शपथ ग्रहण और डिप्टी मेयर का चुनाव.

    अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि डिप्टी मेयर का चुनाव कब होगा। अलग-अलग नगर निगमों में शपथ ग्रहण और चयन की तारीखें तय कर दी गई हैं।

    • देवघर नगर निगम – 13 मार्च
    • हजारीबाग नगर निगम – 13 मार्च
    • मेदिनीनगर नगर निगम – 14 मार्च
    • गिरिडीह नगर निगम – 16 मार्च
    • आदित्यपुर नगर निगम – 16 मार्च
    • मानगो नगर निगम – 17 मार्च
    • चास नगर निगम – 17 मार्च
    • धनबाद नगर निगम – 18 मार्च
    • रांची नगर निगम – 19 मार्च

    अंतिम तस्वीर अभी बाकी.

    कुल मिलाकर झारखंड के नौ नगर निगमों में डिप्टी मेयर की कुर्सी को लेकर राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है। पार्षदों की संख्या, दलों की रणनीति और आखिरी वक्त की राजनीतिक चालें—इन सबके बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि आखिर किसके सिर सजता है डिप्टी मेयर का ताज। आने वाले कुछ दिन झारखंड की नगर राजनीति के लिए बेहद अहम साबित होने वाले हैं।

  • एसटी दर्जा की मांग पर कुर्मी समाज 20 सितंबर से सड़कों और रेल पटरियों पर उतरेगा

     झारखंड, बंगाल और ओडिशा में “रेल टेका, दहर चेका” आंदोलन.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    पारसनाथ/रांची/कोलकाता/भुवनेश्वर : अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में सूचीबद्ध कुर्मी आदिवासी समुदाय ने अपने “लंबित अधिकारों” को लेकर एक बार फिर बड़ा आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है। शनिवार, 20 सितंबर से झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के कई हिस्सों में ट्रेनों और सड़कों को रोककर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू होगा। आंदोलन का नारा है – रेल टेका, दहर चेका” यानी रेल रोकों, सड़क जाम करो।

    क्या हैं कुर्मी समाज की मांगें?

    कुर्मी समाज की सबसे बड़ी मांग है कि उन्हें अनुसूचित जनजाति (ST) की सूची में शामिल किया जाए। इसके अलावा, उनकी कुर्माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में मान्यता दी जाए और सरना धर्म कोड लागू किया जाए।
    समुदाय का कहना है कि आज़ादी के बाद उन्हें आदिवासी श्रेणी से हटाकर OBC में डालना एक राजनीतिक षड्यंत्र था।

    आंदोलन का इतिहास.

    कुर्मी समाज का यह संघर्ष नया नहीं है।

    • 20 सितंबर 2022 को आंदोलन की शुरुआत हुई थी, जो नौ दिनों तक चला।
    • 2023 में भी यही आंदोलन 20 सितंबर से शुरू हुआ और लगभग आठ दिन चला।
    • 2024 में लोकसभा और विधानसभा चुनाव के चलते आंदोलन स्थगित रहा।
    • इस साल आंदोलन दिल्ली के जंतर-मंतर तक पहुंच गया और अब पूर्वी भारत के तीन राज्यों में फैलने जा रहा है।

    किन जगहों पर होगा अवरोध?

    टोटेमिक कुर्मी विकास मोर्चा (TKVM) के अध्यक्ष शीतल ओहदार ने बताया कि झारखंड में सोनुवा, गम्हरिया, गालूडीह, मुरी, बरकाकाना, गड्डी और पारसनाथ-चंद्रपुरा जैसे रेलवे स्टेशनों पर रेल अवरोध होगा।
    पश्चिम बंगाल के चार और ओडिशा के एक स्थान पर भी प्रदर्शन की योजना बनाई गई है।

    आदिवासी कुर्मी समाज मंच के सदस्य सूरज महतो ने कहा कि आंदोलन में हर घर से लोग शामिल होंगे। प्रदर्शन स्थलों पर ही खाना बनाया जाएगा और अस्थायी शिविर लगाए जाएंगे।

    विरोध और समर्थन.

    जब आंदोलन को लेकर कुछ आदिवासी नेताओं के विरोध पर सवाल किया गया, तो कुर्मी समाज ने साफ कहा कि विरोध करने वाले अधिकतर लोग मिशनरी समूहों से जुड़े हैं और ईसाई धर्म अपना चुके हैं।
    उनका दावा है कि कोल्हान क्षेत्र के संताल और हो समुदाय ने उनकी मांगों का विरोध नहीं किया है।

    आंदोलन की रूपरेखा.

    आदिवासी कुर्मी समाज मंच की केंद्रीय समिति के अध्यक्ष शशांक शेखर महतो ने बताया कि शनिवार सुबह 5 बजे से सरायकेला-खरसावां जिले के सिनी रेलवे स्टेशन से रेल अवरोध की शुरुआत होगी।
    उनके अनुसार –

    1. कुर्मी समाज को एसटी का दर्जा दिया जाए।
    2. कुर्माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में जगह मिले।
    3. सरना धर्म कोड लागू किया जाए।

    रेलवे और प्रशासन की तैयारियां

    रांची और धनबाद  रेल मंडल पूरी तरह अलर्ट पर है। RPF के एक अधिकारी ने बताया कि सभी संवेदनशील स्थानों पर RPF और राज्य पुलिस का संयुक्त बल तैनात रहेगा।
    भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है।
    उन्होंने कहा “ट्रेन रोकने की कोशिश करने वालों पर एफआईआर और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अभी तक किसी ट्रेन रूट में बदलाव नहीं किया गया है,” उन्होंने कहा।

    राजनीतिक दलों की दुविधा.

    यह मुद्दा झारखंड और पूर्वी भारत की राजनीति में बेहद संवेदनशील बन गया है। राजनीतिक दल न तो कुर्मी समाज की मांगों का खुलकर समर्थन कर पा रहे हैं और न ही इसका खुला विरोध।

  • सबूत के अभाव में पूर्व विधायक संजीव सिंह सहित सभी आरोपी बरी

    नीरज सिंह हत्याकांड मे आठ साल बाद आया फैसला.

    परवेज़ आलम.द न्यूज़ पोस्ट4यू.

    धनबाद : बहुचर्चित नीरज सिंह हत्याकांड  में बुधवार को आखिरकार अदालत का फैसला आ गया। धनबाद की एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने पूर्व भाजपा विधायक संजीव सिंह सहित सभी 8 आरोपियों को सबूत के अभाव में बरी कर दिया।

    विशेष न्यायाधीश दुर्गेश चंद्र अवस्थी की अदालत ने यह निर्णय सुनाया। इस दौरान कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और गहमागहमी का माहौल रहा।

    स्ट्रेचर पर कोर्ट पहुंचे संजीव सिंह.

    फैसले के दिन संजीव सिंह को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण स्ट्रेचर पर कोर्ट लाया गया। पुलिस एंबुलेंस से उन्हें सिंह मेंशन से अदालत तक लेकर पहुंची। सुनवाई शुरू होने से पहले वकीलों को कोर्ट में प्रवेश से रोक दिया गया, जिसके चलते अधिवक्ताओं ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी भी की। हालांकि, थोड़ी देर बाद स्थिति सामान्य हुई और अदालत ने केस की सुनवाई शुरू की।

    21 मार्च 2017 की वारदात जिसने झकझोर दिया था झारखंड.

    धनबाद के सरायढेला थाना क्षेत्र स्थित स्टील गेट पर 21 मार्च 2017 की शाम लगभग 7 बजे अंधाधुंध फायरिंग कर कांग्रेस नेता और पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह, उनके अंगरक्षक मुन्ना तिवारी, पीए अशोक यादव और ड्राइवर घोलटू महतो की हत्या कर दी गई थी। यह घटना राज्य का सबसे बड़ा शूटआउट मानी जाती है।

    हत्या के बाद संजीव सिंह समेत 12 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। बाद में एक आरोपी अमन सिंह की 2023 में जेल के अंदर हत्या कर दी गई, जबकि रिंकू सिंह से जुड़े मामले का ट्रायल अलग से चल रहा है।

    आठ साल लंबी कानूनी जंग.

    इस मामले में सुनवाई 6 अलग-अलग अदालतों में हुई।

    • 408 तारीखों पर पेशी हुई।
    • 3 जनवरी 2019 को 22 महीने बाद आरोप तय हुए।
    • अभियोजन पक्ष ने 74 गवाहों में से 37 गवाह और कई साक्ष्य पेश किए।
    • बचाव पक्ष ने 5 गवाहों की गवाही कराई।
    • दोनों पक्षों की बहस 49 तारीखों तक चली।
      आखिरकार, आठ साल से ज्यादा समय तक चली इस कानूनी जंग का परिणाम सभी आरोपियों की रिहाई के रूप में सामने आया।

    फैसले से पहले प्रशासन अलर्ट.

    जिला प्रशासन को पहले से आशंका थी कि फैसले के दिन दोनों गुटों के समर्थक बड़ी संख्या में कोर्ट परिसर पहुंच सकते हैं, जिससे टकराव की स्थिति बन सकती है। इस कारण धारा 144 लागू की गई।

    • जैप (Jharkhand Armed Police) की एक कंपनी को सुरक्षा में लगाया गया।
    • कोर्ट परिसर और उसके आसपास भारी पुलिस बल तैनात रहा।
    • संवेदनशील इलाकों में नियमित गश्त भी तेज की गई।

    राजनीतिक पृष्ठभूमि और असर.

    यह मामला राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम रहा है।

    • बरी हुए संजीव सिंह की पत्नी रागिनी सिंह वर्तमान में झरिया से भाजपा विधायक हैं।
    • वहीं, नीरज सिंह की पत्नी पूर्णिमा नीरज सिंह कांग्रेस से झरिया की विधायक रह चुकी हैं।
      इस वजह से इस केस पर पूरे झारखंड ही नहीं, बल्कि बिहार और उत्तर प्रदेश की भी नज़रें थीं।
  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आईआईटी-आईएसएम के दीक्षांत समारोह में की शिरकत, छात्रों को दिया प्रेरणादायक संदेश

    परवेज़ आलम.

    धनबाद ब्यूरो रिपोर्ट, The News Post4U.

    धनबाद : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज धनबाद पहुंचीं और बरवाअड्डा एयरपोर्ट पर उतरने के बाद सीधे आईआईटी-आईएसएम के 45वें दीक्षांत समारोह में भाग लेने रवाना हो गईं। यह समारोह न केवल संस्थान के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था, बल्कि सैकड़ों छात्रों के जीवन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि का प्रतीक भी बना।

    राष्ट्रपति का स्वागत.

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के धनबाद हवाई अड्डा पर पहुँचने पर राज्यपाल संतोष गंगवार और झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार ने बुके देकर उनका स्वागत किया। इस मौके पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सहित कई बड़े अधिकारी और आईआईटी-आईएसएम के छात्र – छात्रायेँ भी उपस्थिथ थे ।

    छात्रों को मिला राष्ट्रपति का मार्गदर्शन.

    दीक्षांत समारोह के मंच से राष्ट्रपति ने उपस्थित छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि यह दिन छात्रों की वर्षों की मेहनत, संघर्ष और सफलता का उत्सव है। उन्होंने सभी पदक और डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं और कहा, “यह समारोह जीवन के एक अध्याय की समाप्ति नहीं, बल्कि नए सफर की शुरुआत है।”

    राष्ट्रपति ने छात्रों से आग्रह किया कि वे अपनी शिक्षा और ज्ञान का उपयोग समाज, देश और पूरी दुनिया की जटिल समस्याओं के समाधान के लिए करें।

    संस्थान की 100 वर्षों की उपलब्धियां.

    राष्ट्रपति मुर्मू ने आईआईटी-आईएसएम की सदी भर की गौरवपूर्ण यात्रा को याद करते हुए कहा, “यह संस्थान मूल रूप से खनन और भूविज्ञान के क्षेत्र में विशेषज्ञ तैयार करने के उद्देश्य से स्थापित हुआ था, लेकिन आज यह उच्च तकनीकी शिक्षा और शोध का एक वैश्विक केंद्र बन चुका है।” उन्होंने तकनीकी नवाचारों और समाजोपयोगी अनुसंधानों में संस्थान के योगदान की सराहना की।

    जनजातीय समाज और महिलाओं के लिए संस्थान की पहल.

    उन्होंने विशेष रूप से संस्थान के उस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की प्रशंसा की, जो झारखंड के आदिवासी युवाओं के सशक्तिकरण में लगा है। डिजिटल साक्षरता, कौशल विकास, और रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से यह केंद्र नई पीढ़ी को आत्मनिर्भर बना रहा है।

    साथ ही, उन्होंने महिलाओं के लिए चल रहे “फाउंडेशन स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम” की भी तारीफ की, जो आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण में सहायक हो रहा है।

    विकसित भारत 2047: युवा बनें परिवर्तन के वाहक.

    राष्ट्रपति ने ‘विकसित भारत 2047’ के विज़न को साझा करते हुए कहा कि भारत आत्मविश्वास के साथ इस लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे केवल तकनीकी ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदार बनें। “विकसित भारत वह है जहां प्रत्येक नागरिक को गरिमा, अवसर और समृद्ध जीवन मिले,” उन्होंने कहा।

    वैश्विक चुनौतियों के समाधान में अहम भूमिका.

    अपने संबोधन में उन्होंने जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों की कमी और डिजिटल असमानता जैसी वैश्विक समस्याओं का उल्लेख किया और कहा कि आईआईटी-आईएसएम जैसे संस्थान इन समस्याओं के स्थायी और प्रभावी समाधान प्रदान कर सकते हैं।

    शिक्षा का नया दृष्टिकोण.

    राष्ट्रपति ने यह भी रेखांकित किया कि तकनीकी शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, नवाचार-केंद्रित और उद्योगों के अनुकूल बनाने की जरूरत है। उन्होंने इंटर-डिसिप्लिनरी अप्रोच अपनाने की सलाह दी ताकि छात्र बहुआयामी चुनौतियों का समाधान ढूंढ सकें।

    राष्ट्रपति मुर्मू ने छात्रों से कहा, “अपने ज्ञान को न केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए, बल्कि समाज के लिए उपयोग करें। ग्रीन इंडिया के निर्माण में सहभागी बनें और मानवता की सेवा को अपना ध्येय बनाएं।”

    अपने प्रेरणादायक भाषण के अंत में उन्होंने सभी छात्रों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी और आशा जताई कि वे भारत के ऐतिहासिक बदलावों के निर्माता बनेंगे।

     

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का 2 दिवसीय झारखंड दौरा 31 से

    धनबाद और देवघर में अहम समारोहों की होंगी मुख्य अतिथि.

    परवेज़ आलम. 

    The News Post4u.

    धनबाद /देवघर :   देश की महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू  31 जुलाई से दो दिवसीय दौरे पर झारखंड आ रही हैं। राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन उनकी आगवानी और सुरक्षा के लिए जोर-शोर से तैयारियों में जुटा है। यह दौरा विशेष रूप से आईआईटी (ISM) धनबाद और एम्स देवघर में होने वाले दीक्षांत समारोहों को लेकर बेहद अहम माना जा रहा है।

    1 अगस्त को धनबाद में दीक्षांत समारोह मे होंगी शामिल.

    राष्ट्रपति मुर्मू 1 अगस्त को धनबाद स्थित आईआईटी इंडियन स्कूल ऑफ माइंस (आईएसएम) के 45 वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगी। यह संस्थान वर्ष 1926 में स्थापित हुआ था और 2016 में इसे आईआईटी का दर्जा प्राप्त हुआ था। यह दीक्षांत समारोह कई मायनों में खास है, क्योंकि राष्ट्रपति मुर्मू यहां भाग लेने वाली दूसरी राष्ट्रपति होंगी। इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी 2014 में यहां आए थे।

    राज्यपाल और मुख्यमंत्री भी रह सकते हैं मौजूद.

    इस कार्यक्रम में झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के भी उपस्थित रहने की संभावना जताई गई है। उनकी मौजूदगी से यह आयोजन और भी गरिमामय होने वाला है।

    देवघर एम्स के पहले दीक्षांत समारोह में भी लेंगी भाग.

    धनबाद के अलावा राष्ट्रपति का कार्यक्रम देवघर में भी निर्धारित है, जहां वे एम्स देवघर के पहले दीक्षांत समारोह में शामिल होंगी। यह संस्थान हाल ही में झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में स्थापित हुआ है।

    धनबाद एयरस्पेस रहेगा नो-फ्लाइंग जोन.

    राष्ट्रपति के दौरे के मद्देनजर धनबाद उपायुक्त आदित्य रंजन ने सुरक्षा के तहत 31 जुलाई सुबह 10 बजे से 1 अगस्त शाम 6 बजे तक धनबाद हवाई क्षेत्र को नो-फ्लाइंग जोन’ घोषित किया है। इस दौरान ड्रोन, पैराग्लाइडिंग और गर्म हवा के गुब्बारे उड़ाने जैसी गतिविधियां पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगी।

    वरिष्ठ अधिकारियों की छुट्टियां रद्द, अलर्ट मोड पर प्रशासन.

    दौरे के दौरान किसी भी प्रकार की प्रशासनिक कमी न हो, इसके लिए सभी वरिष्ठ अधिकारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एसपी, डीसी, ट्रैफिक पुलिस, और विशेष सुरक्षा दस्ते पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं।

    पिछली बार स्थगित हुआ था दौरा;.

    गौरतलब है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 10 जून को झारखंड दौरे पर आने वाली थीं, लेकिन किसी कारणवश वह यात्रा स्थगित कर दी गई थी। इस बार पूरे राज्य में उनके स्वागत की तैयारियाँ पूरे उत्साह से की जा रही हैं।

    सिर्फ एक घंटे धनबाद में रुकेंगी राष्ट्रपति.

    सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति मुर्मू दीक्षांत समारोह में भाग लेने के लिए केवल एक घंटे के लिए धनबाद में ठहरेंगी। उनके कार्यक्रम को लेकर आईआईटी प्रशासन से लेकर जिला प्रशासन तक हर स्तर पर बारीकी से तैयारियाँ की जा रही हैं।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यह दौरा न केवल शैक्षणिक संस्थानों के लिए गौरव का क्षण है, बल्कि झारखंड के लिए एक प्रतिष्ठित अवसर भी है। आईआईटी-आईएसएम धनबाद और एम्स देवघर के दीक्षांत समारोहों में उनकी उपस्थिति राज्य के शैक्षणिक और स्वास्थ्य क्षेत्र को नई पहचान देने का कार्य करेगी।

  • झारखंड में भारी बारिश का अलर्ट: अगले कुछ दिन सतर्क रहने की जरूरत

    13 जिलों में तेज हवाओं और वज्रपात की चेतावनी.

    The News Post4u.

    रांची  : झारखंड में सक्रिय मानसून के चलते राज्य के कई जिलों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश, तेज हवाएं और वज्रपात की आशंका जताई गई है। भारतीय मौसम विभाग ने 28 जुलाई 2025 से लेकर आगामी दिनों तक राज्य के उत्तर-पूर्वी और मध्य हिस्सों में मौसम बिगड़ने की चेतावनी दी है। इसके तहत राज्य के 13 जिलों में येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

    इन जिलों में बारिश का कहर मचा सकता है मुश्किल.

    मौसम विभाग की ओर से जिन 13 जिलों में भारी बारिश और वज्रपात की चेतावनी दी गई है, उनमें रांची, रामगढ़, हजारीबाग, धनबाद, गिरिडीह, बोकारो, कोडरमा, देवघर, जामताड़ा, दुमका, गोड्डा, पाकुड़ और साहिबगंज शामिल हैं। कई इलाकों में तेज हवाएं 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं, जिससे जनजीवन प्रभावित हो सकता है।

    तेज बारिश और वज्रपात की आशंका.

    राज्य के पूर्वी और दक्षिणी जिलों—जैसे सरायकेला-खरसावां, पूर्वी सिंहभूम, साहिबगंज, दुमका और गोड्डा—में विशेष रूप से भारी वर्षा के साथ वज्रपात की आशंका है। मौसम विज्ञान केंद्र रांची ने लोगों को सतर्क रहने और बिजली चमकने के दौरान खुले स्थानों से दूर रहने की सलाह दी है।

    तापमान में उतार-चढ़ाव बना रहेगा.

    28 से 30 जुलाई के बीच झारखंड में मौसम में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है। अधिकतम तापमान 30 से 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 21 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। हालांकि, अगले पांच दिनों तक अधिकतम तापमान में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है।

    किसानों के लिए राहत, लेकिन सतर्कता भी जरूरी.

    बारिश की यह रफ्तार जहां आम जनजीवन को प्रभावित कर सकती है, वहीं किसानों के लिए यह राहत की खबर भी है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, नियमित बारिश से धान की रोपाई और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आई है। खेतों में नमी बनी रहने से फसलों को पर्याप्त पानी मिल रहा है। हालांकि, अत्यधिक जलभराव और वज्रपात के कारण किसानों को सतर्क रहने की भी सलाह दी गई है।

    अभी तक सामान्य से 53 फीसदी अधिक बारिश.

    इस बार झारखंड में मानसून काफी सक्रिय रहा है। 1 जून से 28 जुलाई 2025 तक राज्य में औसतन 478.3 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक 732.7 मिमी बारिश दर्ज की जा चुकी है, जो कि सामान्य से करीब 53% अधिक है। इस बीच धनबाद के पूर्वी टुंडी में बीते 24 घंटे में सबसे अधिक 82 मिमी वर्षा दर्ज की गई।

    अनावश्यक यात्रा से बचें – मौसम विभाग की अपील.

    भारतीय मौसम विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें और मौसम संबंधी निर्देशों का पालन करें। विशेष रूप से खुले मैदान, जलजमाव वाले क्षेत्र और पेड़ों के नीचे वज्रपात के दौरान जाने से बचने की सलाह दी गई है।

    झारखंड में मानसून इस समय अपने सक्रिय रूप में है। जहां यह कृषि के लिए वरदान साबित हो रहा है, वहीं इसके साथ आने वाले खतरे—जैसे तेज बारिश, बिजली गिरने की घटनाएं और तेज हवाएं—जनजीवन के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। ऐसे में सभी नागरिकों को सावधानी और सजगता बरतने की जरूरत है।

  • हेमंत सरकार द्वारा अटल क्लिनिक का नाम बदलने पर भड़की बीजेपी

    रघुवर दास ने कहा- सरकार की मानसिक दिवालियापन की निशानी.

    The News Post4u.

    झारखंड में अटल क्लिनिक का नाम बदलकर “मदर टेरेसा एडवांस हेल्थ क्लिनिक” रखने के फैसले के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जमकर विरोध जताया है। शुक्रवार  को राज्य के कई जिलों में भाजपा कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया।

    पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, “अटल बिहारी वाजपेयी जी जैसे महान नेता के नाम पर शुरू की गई स्वास्थ्य योजना का नाम बदलना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और सरकार की गिरती मानसिकता को दिखाता है। सरकार ओछी राजनीति कर रही है।”

    रघुवर दास ने कहा कि वे मदर टेरेसा का सम्मान करते हैं, लेकिन कुछ संस्थाओं के जरिए उनके नाम पर जो काम हुए, वह देश जानता है। उन्होंने आरोप लगाया कि “निर्मल हृदय” संस्था पर नवजात बच्चों की बिक्री जैसे गंभीर आरोप लगे थे। ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि क्या यह नाम परिवर्तन धर्मांतरण की चल रही गतिविधियों से जुड़ा हुआ कदम तो नहीं है?

    उन्होंने आगे कहा कि “यह फैसला अटल जी जैसे राष्ट्र निर्माता को जनता की स्मृति से मिटाने की एक साजिश लगती है। न तो आदिवासी समाज और न ही आम जनता इसे स्वीकार करेगी।”

    पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि अगर सरकार मदर टेरेसा के नाम पर योजना शुरू करना चाहती थी, तो वह नई योजना लेकर आती। उन्होंने कहा, “पुरानी योजनाओं का नाम बदलकर अपनी नाकामी छुपाने का काम हो रहा है। सरकार स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर कुछ नया करने में असफल रही है।”

    रघुवर दास ने याद दिलाया कि “16 अगस्त 2019 को अटल जी की पुण्यतिथि पर गरीबों को सस्ती और अच्छी स्वास्थ्य सेवा देने के लिए अटल क्लिनिक की शुरुआत की गई थी। उन्होंने सरकार से मांग की कि “वह अटल क्लिनिक का नाम वापस बहाल करे और इस तरह के राजनीतिक निर्णयों से बचे।”

     

  • धनबाद अवैध खनन हादसा: चाल धंसने से 10 से अधिक लोगों के दबे होने की आशंका, राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज़

    By: परवेज़ आलम.

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     धनबाद/ गिरिडीह, झारखंड: झारखंड के धनबाद जिले के बाघमारा इलाके में बुधवार को एक दर्दनाक हादसा हुआ, जहां अवैध खनन के दौरान एक कोयला खदान की चाल धंस गई। यह हादसा केसरगढ़ क्षेत्र में हुआ, जो बीसीसीएल के ब्लॉक-II क्षेत्र के अंतर्गत आता है।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शिव मंदिर के पास अवैध रूप से खनन किया जा रहा था, उसी दौरान यह दुर्घटना हो गई। आशंका जताई जा रही है कि 10 से अधिक मजदूर खदान में फंसे हुए हैं। हालांकि अब तक प्रशासन की ओर से फंसे हुए लोगों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, एक शव को अवैध खनन करने वाले लोग निकालकर ले जाने में सफल रहे हैं।

    परिवारों को घटनास्थल से दूर रखने की कोशिश, आक्रोश बढ़ा.

    जैसे ही चाल धंसने की खबर फैली, इलाके में हड़कंप मच गया। आरोप है कि अवैध खनन माफिया ने फंसे मजदूरों के परिवारों को घटनास्थल के पास आने से रोकने की कोशिश की, जिससे स्थानीय लोगों में गुस्सा और बढ़ गया। लोग यह भी कह रहे हैं कि पूरे हादसे को छुपाने की कोशिश की जा रही है।

    विधायक जयराम महतो का दावा – 15 मौतें, 30 लोग अंदर दबे.

    डुमरी के विधायक जयराम महतो ने x पर लिखा कि हादसे में 15 मजदूरों की मौत की सूचना मिली है, जबकि अंदर 30 लोगों के दबे होने की आशंका है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद अवैध खनन का मुहाना जल्दबाजी में बंद कर दिया गया, और लाशों को छुपाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि मुहाने को दोबारा खोला जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

    खनन माफिया को संरक्षण?

    झारखंड के वरिष्ठ नेता व विधायक  सरयू राय ने भी इस घटना पर दुख जताया और दावा किया कि जमुनिया गांव में 9 मजदूरों की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि अवैध खनन माफिया मृतकों के शवों को छुपाने की कोशिश कर रहे हैं। सरयू राय ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में धनबाद एसएसपी को सूचना दे दी है।

     

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    अब तक शव मिलने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं.

    घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और CISF की टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया गया। हालांकि अभी तक किसी शव के मिलने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कुछ खबरें एक शव मिलने की बात कहती हैं, लेकिन प्रशासन ने अब तक इसकी पुष्टि नहीं की है। यहां तक कि पुलिस ने इस हादसे के अस्तित्व को भी स्वीकार नहीं किया है, जिससे लोगों में भ्रम और नाराजगी और गहराती जा रही है।

    केसरगढ़ में अवैध खनन का गढ़, अल्पसंख्यक समुदाय के लोग ज्यादा प्रभावित.

    जानकारी के अनुसार, बाघमारा के कतरास के केसरगढ़ क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा था, जिसमें स्थानीय गरीब और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों से मजदूरी कराई जाती थी। रिपोर्ट्स बताती हैं कि इन मजदूरों को गिरिडीह और जामताड़ा आस-पास के जिलों से बुलाया गया था।

    अब तक जिन मजदूरों के दबे होने की सूचना है, उनमें शामिल हैं:

    • चरकू उर्फ अजीज अंसारी (35) – कुंडलवादाह, ताराटांड, गिरिडीह
    • अफजल उर्फ खान साहब (35) – कुंडलवादाह, गिरिडीह
    • दिलीप साव (32) – बुढ़वाशेर, गिरिडीह
    • मो. जमशेद (30) – मथुरासिंहा, बदगुंडा पंचायत, गिरिडीह
    • एक अन्य व्यक्ति – जामताड़ा से बताया जा रहा है

    जवाबदेही तय करने और जांच की मांग.

    इस हादसे के बाद अवैध खनन पर प्रशासनिक उदासीनता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। आम जनता और राजनीतिक प्रतिनिधि अब जवाबदेही तय करने, दोषियों को सज़ा देने और पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं।

    फिलहाल राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है, लेकिन प्रशासन की देरी और चुप्पी ने लोगों के मन में गहरा अविश्वास पैदा कर दिया है।

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के झारखंड दौरे को लेकर तैयारियां तेज

    मुख्य सचिव  ने दिए सुरक्षा और प्रोटोकॉल पुख्ता करने के निर्देश.

    For The News Post4u.

    रांची : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू  के झारखंड के  दो दिवसीय दौरे को लेकर प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। मुख्य सचिव अलका तिवारी ने मंगलवार को देवघर, रांची और धनबाद के उपायुक्तों और वरिष्ठ पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर सुरक्षा से लेकर कार्यक्रम संचालन तक हर पहलू पर विस्तार से चर्चा की और संबंधित विभागों को जिम्मेदारी सौंपी। 31 जुलाई से 1 अगस्त तक राष्ट्रपति झारखंड मे रहेंगी ।

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    मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि राष्ट्रपति के झारखंड प्रवास के दौरान हर छोटी-बड़ी व्यवस्था को समय रहते दुरुस्त कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि देवघर में सावन माह के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए कांवरिया पथ को बिना प्रभावित किए राष्ट्रपति के एयरपोर्ट से एम्स तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित कर लिया गया है।

    गौरतलब है कि राष्ट्रपति मुर्मू का पूर्व निर्धारित झारखंड दौरा 10-11 जून को अपरिहार्य कारणों से स्थगित हो गया था। उस समय भी तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने राष्ट्रपति के झारखंड दौरे को यादगार और गरिमामय” बनाने का निर्देश दिया था, जिसे इस बार भी दोहराया गया।

    कार्यक्रमों का ब्यौरा:

    • राष्ट्रपति देवघर में एम्स के पहले दीक्षांत समारोह में भाग लेंगी।
    • इसके बाद वे धनबाद स्थित IIT (ISM) के दीक्षांत समारोह में भी शिरकत करेंगी।
    • रांची में भी उनके कुछ निर्धारित कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।

    मुख्य सचिव ने राष्ट्रपति के आगमन से लेकर प्रस्थान तक की हर व्यवस्था के लिए स्पष्ट जवाबदेही तय की।

    • वाणिज्य कर विभाग के सचिव अमिताभ कौशल और आईजी अखिलेश कुमार झा को मुख्य नोडल अधिकारी बनाया गया है।
    • सूचना एवं जनसंपर्क विभाग को पब्लिक एड्रेस सिस्टम और मीडिया व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गई है।

    प्रमुख तैयारियों पर हुई चर्चा:

    • राष्ट्रपति के कार्यक्रम स्थलों पर मंच व्यवस्था, राष्ट्रीय गान, रेड कार्पेट और बुके, कारकेड और आउट राइडर्स,
    • फोटोग्राफरों के लिए खुले वाहन, बैगेज वैन, छाता, ध्वनि विस्तारक यंत्र,
    • प्रमुख अतिथियों की सूची, मंच से बोलने वालों की सूची,
    • देवघर एयरपोर्ट से एम्स तक की सुरक्षा व्यवस्था,
    • चिकित्सा सुविधा, पेयजल, शौचालय, अग्निशमन व्यवस्था,
    • राष्ट्रपति के साथ आनेवाले अतिथियों के ठहराव और भोजन जैसी व्यवस्थाओं पर विस्तार से समीक्षा की गई।

    देवघर, रांची और धनबाद के उपायुक्तों ने भी अपने-अपने जिलों में राष्ट्रपति के संपूर्ण प्रवास के लिए ब्लूप्रिंट प्रस्तुत किया। उन्होंने यह आश्वासन दिया कि राष्ट्रपति के प्रत्येक कार्यक्रम प्रोटोकॉल के अनुरूप और शिष्टाचार पूर्ण वातावरण में संपन्न होंगे।

    मुख्य सचिव ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने का निर्देश दिया ताकि राष्ट्रपति का यह दौरा ना केवल सुरक्षित और सुव्यवस्थित हो, बल्कि राज्य की प्रतिष्ठा को भी ऊंचाई दे सके।

  • रांची, जमशेदपुर और धनबाद में मेट्रो रेल परियोजना के लिए केंद्र को भेजा गया प्रस्ताव

    हेमंत सरकार की बड़ी पहल.

    By: परवेज़ आलम.

    For The News Post4u.

    रांची, 19 जुलाई 2025:
    झारखंड सरकार ने राज्य के तीन प्रमुख शहरों – रांची, जमशेदपुर और धनबाद – में मेट्रो रेल परियोजना शुरू करने की दिशा में अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा दिया है, जिससे झारखंड को आधुनिक और टिकाऊ शहरी परिवहन व्यवस्था मिल सके।

    पूर्वी क्षेत्रीय परिषद में रखा गया था एजेंडा.

    10 जुलाई को रांची में आयोजित 27वीं पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में इस मेट्रो रेल परियोजना का औपचारिक प्रस्ताव रखा। इसके बाद राज्य के  नगर विकास विभाग ने प्रस्ताव को केंद्रीय शहरी विकास एवं आवास मंत्री मनोहर लाल खट्टर और मंत्रालय के सचिव को भेज दिया है।

    तीन शहरों में मेट्रो से होगी शुरुआत.

    फिलहाल परियोजना का दायरा रांची, जमशेदपुर और धनबाद तक सीमित है, लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की दीर्घकालिक योजना है कि झारखंड के सभी पांच प्रमंडलीय शहरों तक मेट्रो सेवा का विस्तार किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा है कि , “यह मेट्रो रेल परियोजना झारखंड की नई विकास गाथा की नींव रखेगी और राज्य को आधुनिक परिवहन व्यवस्था से जोड़ेगी।”

     पूर्ववर्ती सरकारों की आलोचना.

    JMM  प्रवक्ता  ने  पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि “झारखंड में पहले कभी ऐसी विकास परियोजनाओं को लेकर केंद्र के पास गंभीरता से प्रस्ताव नहीं भेजे जाते थे। देश के दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों की तरह झारखंड को भी अब आधारभूत संरचना में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।”

    हेमंत सरकार ने पहली बार इस दिशा में ठोस पहल करते हुए मेट्रो जैसी परियोजना की विस्तृत योजना बनाई और केंद्र को सौंपा है।

    क्या है प्रस्ताव में खास?

    नगर विकास विभाग द्वारा भेजे गए प्रस्ताव में केंद्र से तीन प्रमुख मांगें की गई हैं:

    1. मेट्रो परियोजना की फिजिबिलिटी स्टडी (संभवता अध्ययन)
    2. सर्वेक्षण और तकनीकी मूल्यांकन
    3. विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के लिए सहयोग

    इसका उद्देश्य है कि केंद्र सरकार शीघ्र अनुमोदन दे ताकि इन शहरों में मेट्रो परियोजना की औपचारिक शुरुआत की जा सके।

    झारखंड के लिए मेट्रो क्यों है जरूरी?

    रांची, जमशेदपुर और धनबाद जैसे शहरों में बढ़ती जनसंख्या और ट्रैफिक के दबाव को देखते हुए मेट्रो सेवा न केवल परिवहन व्यवस्था को सुगम बनाएगी, बल्कि यह शहरी क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर, आर्थिक गतिविधियों में तेजी और पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगी।

    हेमंत सरकार का यह कदम झारखंड को 21वीं सदी की बुनियादी संरचना से जोड़ने की दिशा में एक दूरदर्शी प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।